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केएमपी बनने के बाद भी बरकरार रहेगी फिजा

केएमपी एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के बाद पर्यावरण को नुकसान न हो इसके लिए प्लान तैयार कर लिया गया है। इसके लिए रोड के किनारे हजारों की संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे। इनमें उन पेड़ों की संख्या ज्यादा होगी जो प्रदूषण कम करने में सहायक हों। पौधों को वन विभाग की नर्सरी में तैयार किया जाने लगा है। केएमपी के आसपास भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए निश्चित दूरी पर छोटे-छोटे तालाब बनाए जा रहे हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग का भी इंतजाम किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक निर्माण से जुड़ी कंपनी ने हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर सूचना दी है कि 2 महीने के अंदर मानेसर-पलवल स्ट्रेच शुरू कर दिया जाएगा।

हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन एचएसआईडीसी से मिली जानकारी के अनुसार इस एक्सपे्रस-वे को जमीन से करीब सात फुट ऊपर बनाया जा रहा है। इसके दोनों तरफ हजारों की संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे। इन पेड़ों में त्रिवेणी(नीम, पीपल और बरगद) अधिक रहेंगे। यह पेड़ प्रदूषण को कम करने में काफी सहायक होते हैं। पेड़ चंद कदमों के फासले पर लगाए जाएंगे। इन पेड़ों को मेंटेन करने का काम भी प्राइवेट कंपनी को दिया जाएगा। इसके अलावा खूबसूरती के लिए हरी घास और कुछ फूलों के पेड़ भी लगाए जाएंगे। पेड़ों को लगाने का मकसद एक तो मिट्टी के बहाव को रोकना और दूसरा प्रदूषण स्तर को कम करना रहेगा। त्रिवेणी के अलावा अगर किसान चाहें तो आसपास की जमीन पर फलदार पेड़ भी लगाए जा सकते हैं। इन फलों पर पूरी तरह किसानों का ही अधिकार होगा। फल आने पर किसान उसका आर्थिक लाभ भी उठा सकते हैं।

ताकि डिवेलपमेंट के बाद भी बना रहे जलस्तर

केएमपी के पूरा होने के बाद इसके आसपास तेजी से डिवेलपमेंट होगा। ऐसे में इसके आसपास भूजल स्तर कम न हो इसके लिए भी अभी से प्लानिंग की जा रही है। बताया जा रहा है कि केएमपी के आसपास छोटे छोटे तालाब बनाए जाएंगे। बरसात में का पानी इसमें इकट्ठा होगा। इन तालाबों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी रहेगा ताकि यह जल सीधा जमीन के अंदर जाए और भूजल स्तर में किसी तरह की कमी न आए।

क्यों पिछड़ रहा है केएमपी का काम

केएमपी का काम अगस्त 2010 में हुई तेज बरसात की वजह से पिछड़ा। तब इसकी मिट्टी बह गई। इसे ठीक करने में तीन से चार महीने का समय लगा। इसके बाद धुंध और ठंड ने श्रमिकों को काम नहीं करते दिया। रा मटीरियल समय पर नहीं पहुंचा। इसके बाद होली आ गई। इसके बाद फसलों की कटाई का सिलसिला जारी है। इसके चलते श्रमिकों को एक बार फिर टोटा पड़ गया। बात यदि सिर्फ मानेसर और पलवल स्ट्रेच की करें तो यहां चार टोल प्लाजा का निर्माण होना है। यह काम देख रहे सीनियर इंजीनियर परवेश का कहना है कि अभी काम 50 फीसदी तक हुआ है। होली से ही लेबर की समस्या चल रही है। इसकी वजह से काम काफी धीमा चल रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

( एचएसआईआईडीसी ) के डीजीएम सलिल नारंग का कहना है कि केएमपी के दोनों ओर हरे भरे पेड़ लगाए जाएंगे ताकि प्रदूषण शुरू से ही नियंत्रण में रहे। कोशिश की जा रही है कि कटने वाले कुछ पेड़ों को ट्रांसप्लांट कर दिया जाए। इसके अलावा फूल और हरी घास भी लगाई जाएगी। जन संरक्षण के लिए छोटे तालाब और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी अपनाया जा रहा है।

कैसा होगा चारों टोल प्लाजा का स्वरूप

हाइवे 8 से पलवल की तरफ पहला टोल प्लाजा - 8 लेन

तावडू सोहना रोड के पास टोल प्लाजा - 6 लेन

सोहना नूंह रोड के पास - 6 लेन

हाइवे 2 के पास - 16 लेन

मानेसर पलवल स्ट्रैच

कुल लंबाई 53 किलोमीटर

डेट लाइन मार्च 2011 थी , अब डिक्लेयर नहीं

कुल फ्लाईओवर 15

पेडेस्ट्रियन 75

संपूर्ण प्रोजेक्ट

. कुल लंबाई 135 किलोमीटर

. कुल लागत 1830 करोड़

. कुल फ्लाईओवर 45

. पेडेस्ट्रिरयन , कैटल अंडरपास 220

. रेलवे ओवर ब्रिज 4

नई टोल व्यवस्था

केएमपी पर पहली बार देश में नई टोल व्यवस्था रहेगी। इस पर आप जितना लंबा सफर करेंगे उतना ही टोल देना होगा। एक्सप्रेस - वे से आप जिधर निकलना चाहेंगे वहां आपको टोल देना होगा।

. कार , यात्री वैन या जीप 0.75 रुपये प्रति किलोमीटर

. हल्के व्यवसायिक वाहन 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर

. ट्रक या बस 2.60 रुपये प्रति किलोमीटर

मल्टी एक्सेल वाहन 4.15 रुपये प्रति किलोमीट र


-NB Times
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