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डीडीए : 30 अक्टूबर तक डिमार्केशन ऑर्डर


हाई कोर्ट

रोहिणी डीडीए स्कीम मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने डीडीए से कहा है कि वह 21 हजार प्लॉटों का डिमार्केशन 30 अक्टूबर तक पूरा करे और इस बारे में 9 नवंबर को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अदालत को बताए।

याचिकाकर्ता राहुल गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को बताया गया कि कुल 62 फीसदी लैंड का डिमार्केशन हो चुका है और बाकी का काम चल रहा है। डीडीए ने अपने हलफनामे में कहा था कि वह 30 अक्टूबर तक 21 हजार 328 प्लॉट का डिमार्केशन का काम कर लेगा और डेढ़ साल में प्लॉट अलाट कर दिया जाएगा।

गुप्ता ने बताया कि हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान डीडीए से कहा है कि अगर डिमार्केशन का काम नहीं हुआ तो वह याचिकाकर्ताओं की उस दलील को मंजूर कर सकती है कि रोहिणी इलाके की जमीन पर इस तरह के अन्य प्रोजेक्ट को स्टे किया जाए। अदालत ने कहा कि यह मामला तीन दशक से लटका हुआ है और ऐसे में डीडीए को इस मामले को प्राथमिकता के तौर पर देखना चाहिए और उन लोगों के बीच विश्वास पैदा किया जाना चाहिए जिन्होंने स्कीम में रजिस्ट्रेशन कराया था।

1981 में डीडीए ने रोहिणी इलाके में रेजिडेंशल स्कीम निकाली थी। 82,000 लोगों ने अप्लाई किया और उन्हें प्लॉट देने की बात कही गई। 55,000 लोगों को प्लॉट दिए गए लेकिन 25,000 लोगों को प्लॉट नहीं मिल पाए। अप्रैल 2009 में इसके लिए जनहित याचिका दायर की गई जिस पर सुनवाई चल रही है।

ब्लास्ट पीडि़त का मामला

डीडीए ने कोर्ट को बताया कि 7 सितंबर को हाई कोर्ट ब्लास्ट में घायल शख्स ( इस केस के याचिकाकर्ता ) को आउट ऑफ टर्न प्लॉट अलाटमेंट से संबंधित प्रस्ताव एलजी के पास भेजा गया है। इस मामले में एक हफ्ते में फैसला ले लिया जाएगा। पिछली सुनवाई के दौरान डीडीए के वकील राजीव बंसल ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच के सामने कहा था कि ब्लास्ट में जो याचिकाकर्ता घायल हुए हैं उनके केस को वह स्पेशल केस के तौर पर रखना चाहते हैं। इस पर याचिकाकर्ता राहुल गुप्ता ने अदालत को बताया था कि उनके दोस्त विपिन गौतम इस ब्लास्ट में बुरी तरह घायल हो गए थे। उनका एक पैर काटना पड़ा है। ऐसे में उन्हें आउट ऑफ टर्न प्लॉट दिया जाना चाहिए।



-Navbharat times