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Old September 25 2011, 07:35 AM   #35
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सपनों को दरकिनार कर खजाना भरती रही डीडीए

सपनों का घर बनाने के लिए हजारों लोग इंतजार करते रहे, इनमें से तो कई ऐसे भी लोग थे जो अब इस दुनिया में नहीं हैं और उनकी अगली भी पीढ़ी प्लॉट पाने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर डीडीए इन लोगों को प्लॉट देने के बजाए न सिर्फ उनके सपनों से खेलती रही बल्कि उसी जमीन पर फ्लैट बनाकर अपना खजाना भरती रही। पिछले तीन दशक से लोगों के उम्मीद तोड़ने वाले डीडीए के रवैये पर हाईकोर्ट ने कड़ा एतराज जताते हुए तुरंत कार्रवाई करने को कहा है।

दरलअस, डीडीए ने रोहिणी आवासीय योजना-1981 के तहत इलाके में 2493 हेक्टेयर जमीन किसानों से अधिग्रहित की थी। इस जमीन पर एक लाख 17 हजार लोगों को प्लॉट काट कर दिए जाने के साथ-साथ महज 17 हजार लोगों के लिए फ्लैट बनाने का प्रावधान था। तीन दशक बीत जाने के बाद भी प्लॉट के लिए करीब पच्चीस हजार लोग इंतजार के साथ-साथ कोर्ट-कचहरी का चक्कर भी लगा रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश व फटकार के बाद भी डीडीए अब भी प्लॉट देने में आना कानी कर रही है। दूसरी तरफ इस जमीन पर डीडीए हरेक साल हजारों फ्लैट बनाकर अपना खजाना भर रही है। याचिकाकर्ता राहुल गुप्ता का दावा है कि डीडीए 17 हजार की जगह करीब एक लाख फ्लैट बनाकर बेच चुकी है।

इतना ही नहीं, डीडीए ने रोहिणी के सेक्टर -आठ, नौ और चौदह में 152 सहकारी आवास समिति को जमीन आवंटित कर दिया। जबकि जमीन अधिग्रहण के समय सहकारी आवास समिति को जमीन देने का कोई प्रावधान ही नहीं था।

-Hindustan