|
|
|
|
#1 |
|
Super Moderator
Join Date: Mar 2010
Location: Latitude 28.587, Longitude 77.394
Posts: 8,545
My Mood:
Thanks: 197
Thanked 671 Times in 487 Posts
|
85000 flats in 2012 in Delhi (click on image for larger view)
|
|
|
|
#2 |
|
Veteran Member
Join Date: Dec 2010
Posts: 1,752
My Mood:
Thanks: 7
Thanked 104 Times in 73 Posts
|
sahi hai - wo kahte hai na asli maal alag se chupa kar rakho - aur jab kooda kachra bik jaaye tab nikalo :P
I think may be my bawana investment will give me returns by leaps and bounds rohit |
|
|
|
#3 |
|
New Member
Join Date: Dec 2011
Posts: 18
My Mood:
Thanks: 2
Thanked 0 Times in 0 Posts
|
Nice Observation about Delhi. Is it true one or just joking???
I am amazed really! |
|
|
|
#4 |
|
Super Moderator
Join Date: Mar 2010
Location: Latitude 28.587, Longitude 77.394
Posts: 8,545
My Mood:
Thanks: 197
Thanked 671 Times in 487 Posts
|
कैसे तैयार होंगे हर साल एक लाख फ्लैट
प्रति वर्ष एक लाख ईडब्ल्यूएस फ्लैट कैसे तैयार किए जाएं, इस पर डीडीए में माथापच्ची शुरू हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में फ्लैट तैयार करने के लिए संशाधनों की कमी के चलते पीपीपी मोड पर फ्लैट तैयार करने के लिए विचार चल रहा है। इसी बीच डीडीए ने द्वारका में बनाए गए ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के सैंपल ब्लाक का उद्घाटन करने करने का फैसला लिया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमल नाथ व शहरी विकास एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री कुमारी शैलजा सोमवार को इस ब्लाक का उद्घाटन करेंगी। डीडीए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए फ्री-फैवरीकेट तकनीक से ईडब्ल्यूएस फ्लैटों का निर्माण कर रहा है। इस तकनीक से बनने वाले फ्लैट सस्ते तो हैं ही कम समय में भी बनते हैं। तकनीक के अनुसार फ्लैटों की दीवारों आदि को किसी अन्य स्थान पर तैयार किया जाता है। वहां से लाकर बनाए गए ढांचे में फिट किया जाता है। डीडीए उपाध्यक्ष जी.एस. पटनायक ने इस तकनीक पर अधिक काम करने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। इस तकनीक से एलआइजी फ्लैट भी बनाए जा रहे हैं। 13 जनवरी को शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने डीडीए के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उस बैठक में मुख्य मुद्दा दिल्ली को आवास उपलब्ध कराने का रहा था। कमलनाथ ने दिल्ली की आवास समस्या को देखते हुए प्रति वर्ष एक लाख फ्लैट कम आय वर्ग के लिए बनाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि इस कार्य को चुनौती के तौर पर लिया जाएगा। इसके बाद से डीडीए इस योजना को मूर्त रूप देने में जुट गया है। -dainik jagran |
|
|
|
#5 |
|
Super Moderator
Join Date: Mar 2010
Location: Latitude 28.587, Longitude 77.394
Posts: 8,545
My Mood:
Thanks: 197
Thanked 671 Times in 487 Posts
|
डीडीए बना रहा है 20 हजार ईडब्ल्यूएस फ्लैट
द्वारका।। दिल्ली में अपने घर का सपना देख रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। खासकर कम आय वर्ग के लोगों के लिए। डीडीए ईडब्लूएस कैटिगरी के हजारों मकान बना रहा है और उन पर काम फुल स्पीड में चल रहा है। ये सभी फ्लैट प्री-फैब तकनीक से बनाए जा रहे हैं। शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्री-फैब तकनीक से साल में दो लाख फ्लैट बनाए जा सकते हैं। इन फ्लैटों में रहने वालों को पूरी सुविधाएं मिलेंगी। परिसर में ही कम्युनिटी सेंटर, दुकानें और आंगनबाड़ी को भी तैयार किया जा रहा है। डीडीए 20,040 ईडब्लूएस फ्लैट पर काम कर रहा है। इसमें से द्वारका में 2,400, नरेला में 6,580 और रोहिणी में 11,060 फ्लैट बनाए जा रहे हैं। द्वारका में सैंपल ब्लॉक का उद्घाटन किया गया। यहां फ्लैट के साथ ही सारी सुविधाएं भी हैं। फ्लैटों के साथ 21 आंगनबाड़ी, 168 दुकानें और 187 कम्युनिटी हॉल बनेंगे। डीडीए पहली बार प्री-फैब तकनीक से फ्लैट बना रहा है। यह तकनीक और इसमें इस्तेमाल सामग्री ग्रीन बिल्डिंग के अनुसार होती है। इनमें लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इस तकनीक से फ्लैट बनाने में कम वक्त लगता है। वजन कम होने की वजह से इनको भूकंप से कम नुकसान होता है और यह कमजोर जमीनी सतह पर बनाने के लिए अनुकूल है। इन बिल्डिंग में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का भी इंतजाम है। यहां गाड़ी पार्क करने की भी सुविधा है और चारदीवारी भी बनाई जा रही है। बच्चों के खेलने के लिए कैंपस में ही मैदान है। गाडि़यां कैंपस में नहीं लाने दी जाएंगी और गाडि़यों के लिए पेरिफेरल पार्किंग होगी। द्वारका में 5.69 हेक्टेयर में यह प्रोजेक्ट चल रहा है। इसमें करीब 554 करोड़ रुपये की लागत आएगी। एक फ्लैट की कीमत करीब चार लाख रुपये पड़ेगी। डीडीए थोड़ा मुनाफा लेकर इसे करीब साढे़ चार लाख रुपए तक में बेच सकता है। द्वारका में 2,400 फ्लैट के साथ 18 कम्युनिटी हॉल, 15 दुकानें और 3 आंगनबाड़ी बनाई जा रही हैं। यहां दिसंबर 2012 तक काम पूरा होने की उम्मीद है। सैंपल फ्लैट का उद्घाटन करते हुए शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने कहा कि डीडीए को नए नजरिए से सोचना होगा। उसे ठेकेदार की तरह नहीं, बल्कि सेवा भाव की सोच रखनी होगी। उन्होंने कहा कि प्री-फैब तकनीक दुनियाभर में इस्तेमाल हो रही है। इसमें कम वक्त लगता है। इसलिए डीडीए को साल में 1 लाख नहीं, बल्कि 2 लाख फ्लैट बनाने चाहिए। कमलनाथ ने ही इससे पहले कहा था कि इस तकनीक से सालभर में 1 लाख फ्लैट बनाए जा सकते हैं। क्या है प्री - फैब तकनीक इस तकनीक से वक्त बचता है। इसकी खासियत है सेफ्टी , स्पीड और सस्टेनेबिलिटी। परंपरागत प्रक्रिया से उलट इसमें मकान की नींव को छोड़कर अन्य हिस्सों को उस साइट पर नहीं , बल्कि फैक्टरी में बनाया जाता है और फिर उन्हें कंस्ट्रक्शन साइट पर लाकर जोड़ा जाता है। आम प्रक्रिया में ईंट , लकड़ी , सीमेंट , बालू , स्टील आदि को साइट पर लाकर निर्माण किया जाता है , लेकिन प्री - फैब तकनीक में महज नींव ही परंपरागत तरीके से बनाई जाती है और दीवारों , फर्श और छत के हिस्से फैक्टरी में बनाए जाते हैं और कई बार विंडो तथा डोर फ्रेम में भी उनमें लगा दिए जाते हैं। बाद में इन्हें कंस्ट्रक्शन साइट पर लाकर क्रेन के जरिए जोड़ दिया जाता है। किसे मिलेंगे फ्लैट यह फ्लैट कम आय वर्ग के लोगों के लिए हैं। यानी वह लोग जिनकी सालाना आय 75 हजार रुपये से कम है वह इन फ्लैट को पाने के लिए आवेदन कर सकेंगे । -nbt |
|
|
|
#6 |
|
Super Moderator
Join Date: Mar 2010
Location: Latitude 28.587, Longitude 77.394
Posts: 8,545
My Mood:
Thanks: 197
Thanked 671 Times in 487 Posts
|
एक लाख फ्लैट बनाएगा डीडीए
नई दिल्ली। डीडीए को ठेकेदार की तरह नहीं, बल्कि सेवा की सोच रखनी होगी। इसके लिए नए नजरिए की आवश्यकता है। दिल्ली के विकास के लिए नए विजन की जरूरत है, ताकि राजधानी में रहने वाले लोगों की मांग को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके। उक्त बातें सोमवार को द्वारका सेक्टर 23 में डीडीए के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए निर्मित होने वाले सैंपल ब्लॉक के उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने कहीं। उन्होंने इस मौके पर कहा कि गरीबों के लिए डीडीए एक लाख फ्लैटाें के निर्माण का लक्ष्य पूरा करे। हर वर्ष अन्य राज्यों से पांच लाख लोगों के आने को एक चुनौती माना जाए। प्री-फैब तकनीक से मकान बनाने से कई लोगों के आशियाना का सपना पूरा होगा। केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने कहा कि जेएनएनयूआरएम के तहत ईडब्ल्यूएस के लिए 74 हजार फ्लैटाें की स्वीकृति मिली है। डीडीए की जमीन पर 325 स्लम क्लस्टर हैं। गरीब और पिछड़े वर्ग की आवश्यकता को समझा गया होता तो ये बस्तियां नहीं होतीं। डीडीए उपाध्यक्ष जीएस पटनायक ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए रोहिणी में 11,060 फ्लैट, नरेला में 6,580 और द्वारका में 2,400 प्री-फेब टेक्नोलॉजी से फ्लैटाें का निर्माण हो रहा है। इन जगह पर कुल 19,657 फ्लैट का निर्माण किया जाएगा। -Amar Ujala |
|
|
|
#7 |
|
Super Moderator
Join Date: Mar 2010
Location: Latitude 28.587, Longitude 77.394
Posts: 8,545
My Mood:
Thanks: 197
Thanked 671 Times in 487 Posts
|
Need 2 lakh houses a year: Nath
MINISTERSPEAK Inaugurates EWS flats in Dwarka, says DDA should not think like contractor THE FLATS HAVE BEEN BUILT USING PREFAB TECHNOLOGY, WHICH HELPS IN FASTER AND MORE ENVIRONMENT- FRIENDLY CONSTRUC- TION OF HOUSES The Delhi Development Authority (DDA) should build two lakh houses every year to meet the Capital's growing housing needs, feels Union urban development minister Kamal Nath. He said this while inaugurating a sample block of flats constructed by the DDA in Sector 23, Dwarka, for people belonging to the economically weaker section (EWS) on Monday. “Urbanisation is a challenge in Delhi. In the next 10 years, 50 lakh more people will come to the city. We have to absorb this population,“ he said. The civic body has constructed the sample flats using prefab technology, which helps in faster and more environmentfriendly construction of houses. The civic agency plans to build around one lakh EWS flats every year. Nath said by using prefab technology, in which standardised building material is prepared at a casting yard and then brought to the site, the DDA can build up to two lakh houses every year. DDA vice-chairperson GS Patnaik said under the EWS housing scheme, 11,060 houses in Rohini, 6,580 in Narela and 2,400 in Dwarka have been taken up with prefab technology. Nath said the DDA, too, has to change to meet the challenge of urbanisation. “The DDA should not think like a thekedaar (contractor). Delhi has changed and they should also evolve with time,“ he said. The minister said the master plans for Delhi should be made keeping the future in mind. “We make master plans to correct our follies that have been committed in the past. The plan should be made for future,“ he said. “We do not include people in the planning process,“ said Kumari Selja, Union minister of housing and urban poverty alleviation, who was also present at the inauguration ceremony. “Inclusive growth needs inclusive planning and we have failed in doing that,“ she added. Nath said the freight complex being planned in Dwarka was unnecessary as it would make life difficult for people by adding to the traffic woes in the area. He said some changes have to be made in the master plan so that the complex was made outside Dwarka. He also emphasised that the 24-km-long peripheral road being planned near Najafgarh should be built soon. -HT |
|
|
|
#8 |
|
Super Moderator
Join Date: Mar 2010
Location: Latitude 28.587, Longitude 77.394
Posts: 8,545
My Mood:
Thanks: 197
Thanked 671 Times in 487 Posts
|
बनेंगे तीन लाख मकान पर पानी कहां मिलेगा
नई दिल्ली दिल्ली के विस्तार में पीने का पानी सबसे बड़ी दिक्कत बनने वाला है। आवास की कमी दूर करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने हर साल एक लाख मकान बनाने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन इनमें रहने वाले लोगों के लिए पीने का पानी कहां से आएगा? यह सवाल मुंह बायें खड़ा है। जल बोर्ड का कहना है कि अगले आठ साल तक दिल्ली को अतिरिक्त पानी मिलने की कोई संभावना नहीं है। इससे डीडीए की इस घोषणा पर पलीता लग सकता है। दिल्ली को अभी विभिन्न स्त्रोतों से 850 मिलियन गैलन रोजाना (एमजीडी) पानी मिल रहा है, जबकि दिल्ली को लगभग 1080 एमजीडी पानी की जरूरत है। यानी, अभी भी दिल्ली में लगभग 230 एमजीडी पानी की कमी है। जल बोर्ड को मुनक नहर से 80 एमजीडी पानी मिलना है, लेकिन हरियाणा सरकार पानी देने से इंकार कर रही है, जबकि इसके लिए दिल्ली अब तक 404 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर चुकी है। इसके अलावा दिल्ली ने रेणुका बांध से 275 एमजीडी पानी के लिए समझौता किया है और दिल्ली सरकार लगभग 215 करोड़ रुपये का भुगतान भी हिमाचल सरकार को कर चुकी है, परंतु इस योजना पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है। हिमाचल सरकार बांध के लिए जमीन का अधिग्रहण तक नहीं कर पाई है। कहां से लाएं पानी : दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश नेगी ने बताया कि अगर डीडीए नए इलाके विकसित करके मकान बनाने की सोच रहा है तो वहां पानी मुहैया करा पाना फिलहाल असंभव है, क्योंकि रेणुका बांध पर काम आजकल में शुरू भी हो जाए तो भी दिल्ली को अगले आठ साल तक पानी नहीं मिलने वाला। अगर हरियाणा मुनक नहर का पानी दे दे तो कुछ हालात सुधर सकते हैं, वह भी विकसित इलाकों में। नए मकान बनते हैं तो जल बोर्ड उन इलाकों में भूमिगत जलाशय बना कर वहां पानी पहुंचा सकता है। नेगी बताते हैं कि दिल्ली में पानी की खपत कम करके भी समस्या का कुछ हल निकाला जा सकता है। जैसे कि अभी दिल्लीवासियों को 190 लीटर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति (एलपीसीडी) पानी मुहैया कराया जा रहा है, यदि इसे 130 एलपीसीडी तक पहुंचा दिया जाए तो समस्या का कुछ कम हो सकती है, परंतु ऐसा कर पाना भी आसान नहीं है। -Dainik Jagran |
|
|
|
#9 |
|
Super Moderator
Join Date: Mar 2010
Location: Latitude 28.587, Longitude 77.394
Posts: 8,545
My Mood:
Thanks: 197
Thanked 671 Times in 487 Posts
|
Delhi govt to build 72k flats for slum dwellers
NEW DELHI: The Delhi government has decided to construct 72,000 low-cost flats in next two years for allotment among slum dwellers and economically weaker section, in tune with its plan to make the national capital slum-free. Top officials involved in the mega housing project said the ground work for construction of the low-cost flats has already been started and agencies involved in it have been told to expedite process of various clearances. Delhi government's premier infrastructure agency Delhi State Industrial Infrastructure Development Corporation (DSIIDC) will implement the project which has been conceived as part of government's ambitious goal of making the city slum-free in next three to four years, they said. "We have set a target of completing the construction within next two years," said a top official of DSIIDC. The DSIIDC has already completed construction of 9,660 flats in Narela, Dwarka, Bhorgarh under the JNNURM scheme and another 5,184 flats are likely to be completed very soon. The officials said the process of selecting the beneficiaries for around 15,000 flats was underway. They said people who have settled in a slum or jhughi jhopri cluster not later than March 31, 2007 will be eligible to get allotment of the low-cost houses. In her annual address to top officials earlier this week, Dikshit had identified providing roof to slum-dwellers as one of the three major priority areas for her government for the coming financial year. The government earlier this month had started allotment of around 2,200 low-cost flats to industrial workers. In the first batch, a total of 115 industrial workers were given allotment letters of flats built at Narela area of North West Delhi. The DSIIDC has built the flats on 'no loss no profit'. The flats have been built under Rajiv Gandhi Housing scheme for industrial workers. The remaining 2,114 flats will be alloted within next six months. Officials said Government would make available hospitals, schools, shopping complexes and bus services in the areas where low-cost flats are coming up. -TOI |
|
|
|
#10 |
|
Super Moderator
Join Date: Mar 2010
Location: Latitude 28.587, Longitude 77.394
Posts: 8,545
My Mood:
Thanks: 197
Thanked 671 Times in 487 Posts
|
हर साल एक लाख घर बनाएगा डीडीए
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) प्रतिवर्ष एक लाख मकानों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। शहरी विकास राज्य मंत्री सौगत राय ने लोकसभा में ऊषा वर्मा, सीमा उपाध्याय तथा सुशीला सरोज के सवालों के लिखित उत्तर में बताया कि डीडीए ने सूचना दी है कि लगभग 95 हजार रिहायशी इकाइयों के निर्माण के संबंध में योजना प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। उन्होंने डीडीए के हवाले से बताया कि 95384 रिहायशी ईकाइयों की योजना तैयार की जा रही है जिसमें निम्न आय वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 78371 ईकाइयां तथा बाकी 16977 ईकाइयां अन्य श्रेणियों के लिए होंगी। राय ने के सुगुमार के एक अन्य सवाल के लिखित जवाब में बताया कि दिल्ली तथा देश के अन्य भागों में कृषि भूमि पर आवास बनाने की अनुमति के लिए एक केन्द्रीय कानून बनाने का सरकार का कोई विचार नहीं है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव है। -Hindustan |
|
![]() |
| Tags |
| 2012, delhi, flats |
| Thread Tools | Search this Thread |
|
|
Similar Threads
|
||||
| Thread | Thread Starter | Forum | Replies | Last Post |
| Does higher Delhi mean cheaper flats in NCR? | fritolay_ps | Delhi | 2 | 24-02-12 11:47 AM |
| Delhi: Property prices may fall 20-30% by mid-2012 | Designer | Delhi | 3 | 21-12-11 03:44 PM |
| Lal dora flats in neb sarai delhi | yuvrajjad9 | Delhi | 1 | 20-08-11 03:02 AM |
| 1/2 BHK DDA Flats For Self Use | Delhi West | Mahesh2010 | Delhi | 4 | 23-06-11 02:59 PM |
| Delhi Government To Build 35,000 Flats For Poor | MANOJa | Delhi | 1 | 04-02-11 01:13 PM |