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की सबसे बड़ी रियल्टी कंपनी डीएलएफ ने एम3एम इंडिया को 440 करोड़ रुपए में गुड़गांव का अपना एक प्लॉट बेचा है। डीएलएफ ने कर्ज के अपने बोझ को कम करने के लिए चालू वित्त वर्ष में अपने कुछ प्लॉट बेचने की योजना बनाई है। यह डील कंपनी की इसी योजना की पहली कड़ी है। एम3एम भी रियल्टी कंपनी है।
इस सौदे से जुड़े कम से कम दो लोगों ने कहा है कि गुड़गांव के 28 एकड़ के इस प्लॉट को एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए सभी मंजूरी मिल चुकी है। टाटा रियल्टी और महिंद्रा को पीछे छोड़ एम3एम डीएलएफ से यह प्लॉट खरीदने में कामयाब हुई है। कंपनी पहले ही डीएलएफ को 150 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुकी है। शेष रकम का भुगतान अगले एक महीने में होगा। सूत्रों का कहना है कि एम3एम इस सौदे के लिए रकम का इंतजाम अपने आंतरिक स्त्रोतों से कर रही है। हालांकि, इस सौदे के मामले में डीएलएफ के एक प्रवक्ता ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। नाम जाहिर न करने की शर्त पर डीएलएफ के एक अधिकारी ने इस सौदे की पुष्टि कर दी। अधिकारी ने बताया कि दोनों कंपनियों के बीच यह सौदा गुरुवार को हुआ। एम3एम के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी जमीन खरीदने के लिए पिछले कुछ समय से डीएलएफ से बातचीत कर रही थी। हालांकि, प्रवक्ता ने यह बताने से मना कर दिया कि उनके बीच कोई सौदा हुआ है या नहीं। डीएलएफ लगातार अपने गैर-प्रमुख कारोबार को बेचने की कोशिश कर रही है। इसके तहत कंपनी प्लॉट, स्पेशल इकनॉमिक जोन और आईटी पार्क सहित अमन होटल कारोबार बेच चुकी है। हालांकि, कंपनी ने सेंट्रल दिल्ली स्थित अपना होटल कारोबार नहीं बेचा है। दरअसल, कंपनी इन कारोबारों को बेचकर अगले दो साल में करीब 7,000 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल कर्ज का बोझ घटाने के लिए करेगी। 30 जून 2011 तक डीएलएफ पर 21,524 करोड़ रुपए का कर्ज था। कर्ज पर लगातार बढ़ती ब्याज दर की वजह से कंपनी का ब्याज खर्च काफी बढ़ गया है। इससे कंपनी को कर्ज का बोझ घटाने में दिक्कत आ रही है। जून 2011 तिमाही में कंपनी ने गैर-प्रमुख कारोबारों को बेचने की कोशिशें तेज कर दी थी। छोटी गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की बिक्री से कंपनी ने इस दौरान 165 करोड़ रुपए जुटाए। एनालिस्टों की एक हालिया बैठक में कंपनी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सौरभ चावला ने कहा कि डीएलएफ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में दो गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की बिक्री करेगी। कंपनी इस साल पुणे में सेज और नोएडा के एक आईटी पार्क में हिस्सेदारी बेचने का काम पूरा कर लेगी। इस बिक्री से कंपनी और को-प्रमोटर 1,300 करोड़ रुपए जुटा सकते हैं। -navbharat times |
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