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IREF® Real Estate in India - Property Discussion
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Old May 20 2012, 12:46 PM   #2821
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एनसीआर में बढ़ी रेजिडेंशल प्रॉपर्टी की बिक्री


रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल इकनॉमिक स्लोडाउन के बावजूद एनसीआर में नए प्रोजेक्ट्स की लांचिंग पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। वित्तीय वर्ष 2012 में लांच हुए प्रोजेक्ट्स में से अकेले 34 फीसदी प्रोजेक्ट गाजियाबाद में लांच हुए। इसके बाद गुड़गांव और नोएडा का नंबर रहा। वित्तीय वर्ष 2012 में 86 हजार रेजिडेंशल यूनिट्स तैयार हुए जिसमें गुड़गांव, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद आदि का हिस्सा करीब-करीब बराबर ही रहा।

.....................

एनसीआर के लिए अच्छी खबर है। ग्लोबल कंसलटेंसी फर्म नाइटफ्रैंक के मुताबिक एनसीआर में इकनॉमी की रफ्तार मंद होने के बावजूद 2011-12 की अंतिम तिमाही में रेजिडेंशल प्रॉपर्टी की बिक्री बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआर के सबअरबन मार्केट में अगले कुछ महीनों तक कीमतों में ज्यादा फेर-बदल की उम्मीद नहीं है।

पूरा होने से पहले सोल्डआउट

एनसीआर में पिछले कुछ समय में इतने प्रोजेक्ट्स के लांच होने के बावजूद डिमांड बनी हुई है। जो प्रोजेक्ट लांच हो रहे हैं, वे पूरा होने से करीब छह महीने पहले ही पूरी तरह बिक जा रहे हैं। यह निष्कर्ष नाइटफ्रैंक ने लंबे समय के अध्ययन के बाद निकाला है। रिपोर्ट में कंज्यूमर सेंटिमेंट धीरे-धीरे बेहतर होने की बात भी कही गई है। डिवेलपर्स को आने वाले समय में नोएडा एक्सटेंशन में काम शुरू होने और हरियाणा सरकार द्वारा सेल्फ सर्टिफिकेशन सिस्टम शुरू करने की घोषणा का भी लाभ मिलेगा। हालांकि डिवेलपर्स के लिए पैसे की समस्या बनी हुई है। साथ ही कंस्ट्रक्शन कॉस्ट भी बढ़ा है। इसका नतीजा यह हो सकता है कि डिवेलपर्स एक साथ कई प्रोजेक्ट लांच शायद न कर पाएं।

नंबर 1 गाजियाबाद

रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल इकनॉमिक स्लोडाउन के बावजूद एनसीआर में नए प्रोजेक्ट्स की लांचिंग पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। वित्तीय वर्ष 2012 में लांच हुए प्रोजेक्टस में से अकेले 34 फीसदी प्रोजेक्ट गाजियाबाद में लांच हुए। इसके बाद गुड़गांव और नोएडा का नंबर रहा। वित्तीय वर्ष 2012 में 86 हजार रेजिडेंशल यूनिट्स तैयार हुए जिसमें गुड़गांव, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद आदि का हिस्सा करीब करीब बराबर ही रहा।

सप्लाई

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2012 तक एनसीआर में करीब पांच लाख यूनिट्स निर्माण के विभिन्न दौर में थे। इसमें से करीब 50 फीसदी का पजेशन साल 2013 तक संभावित है। इनमें से च्यादातर प्रोजेक्ट साल 2009 और 2010 में लांच हुए थे। इस सप्लाई में 57 फीसदी हिस्सा नोएडा और ग्रेटर नोएडा का है। गुड़गांव का हिस्सा करीब 19 फीसदी का है। 2015 तक इस सप्लाई में 94 हजार फ्लैट्स के और जुड़ने की संभावना है।

अनसोल्ड

करीब 78 फीसदी अनसोल्ड अपार्टमेंट्स नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पड़े हैं। इसकी वजह उन इलाकों में कई मेगा प्रोजेक्ट्स की शुरुआत बताई जाती है। नोएडा एक्सटेंशन का भी असर पड़ा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा डिवेलपर्स के लिए कनेक्टिविटी और सस्ती जमीन के कारण आकर्षक डेस्टिनेशन बने हुए थे। यद्यपि यहां आईटी-आईटीईएस कंपनियों के अलावा पूर्वी दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहने वालों द्वारा प्रॉपर्टी की खासी डिमांड है, फिर भी जिस रफ्तार से यहां प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं, उनकी बिक्री पर नाइटफ्रैंक ने संदेह जताया है।

गुड़गांव भी...

गुड़गांव तक में खाली फ्लैटों की संख्या करीब 39 फीसदी है। यहां द्वारका एक्सप्रेस-वे पर वित्तीय वर्ष 2012 में काफी प्रोजेक्ट आए। यहां दूसरे माइक्रोमार्केट्स की तुलना में रेट भी ज्यादा है। गुड़गांव में डिमांड पैदा करने में साइबर सिटी, गोल्फ कोर्स रोड और उद्योग विहार आदि में काम करने वालों की अहम भूमिका बताई जाती है। च्यादातर एंड यूजर रेडी टु मूव प्रॉपर्टी ही खरीदना चाहते हैं।

जनवरी-मार्च में बढ़ी बिक्री

जनवरी-मार्च की तिमाही में कुल मिलाकर बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, फरीदाबाद और गाजियाबाद में ग्रोथ नेगेटिव रहा। इन दोनों शहरों के लिए वजह यह बताई गई है कि यहां रेजिडेंशल डिमांड को सपोर्ट करने के लिए उस हिसाब से कमर्शल डिवेलपमेंट नहीं हुआ। गौर करने वाली बात यह है कि यहां फ्लैट अफोर्डेबल सिगमेंट में होने के बावजूद खाली हैं। मार्केट में सबसे ज्यादा फ्लैट अफोर्डेबल और मिड सिगमेंट में बिक रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में इसका शेयर करीब 66 फीसदी रहा। रिपोर्ट का कहना है कि जो फ्लैट खाली पड़े हैं, उनके बिकने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है।

कीमत

कीमतों की बात करें तो दूसरे मेच्रो शहरों की तुलना में एनसीआर का हिसाब-किताब बढि़या है। यहां कीमतें गिरी नहीं हैं। मार्केट को इनवेस्टर्स के एक्टिव होने का फायदा मिल रहा है। एक आम खरीददार जहां इंट्रेस्ट रेट से प्रभावित हुआ, वहीं इनवेस्टरों पर इसका भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।

_navbharat times
 
Old May 20 2012, 02:02 PM   #2822
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Default 200 cr for Great Patna project

Realty group Cosmic Structures Ltd. will invest Rs 200 crore to develop the Greater Patna Project on the lines of the Great Noida, its Managing director Sushant Mutreja said recently. A plan in this regard will be soon presented to the Chief Minister Nitish Kumar, he told reporters n Patna. The realty company has an experience of delivering about 50 lakh sq ft of constructed space in 40 different projects in Delhi NCP, Mumbai and other towns across the country, Mutreja said. The company has set up its corporate office here with a long-term plan to launch housing projects in the state. — Agencies
Source:The Tribune
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Old May 21 2012, 05:04 AM   #2823
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आशियाने का सपने को लगी महंगाई की नजर


रोटी, कपड़ा और मकान किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी हैं। महंगाई के चलते जहां थाली से कई चीजें गायब हुई हैं, वहीं अपने आशियाने के सपने को भी इसकी नजर लग गई है। मनमोहन सरकार 22 मई को तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी। इन तीन वर्षो में जिस तेजी से महगाई बढ़ी है, उसने आम आदमी के लिए आशियाना बनाना भी महगा कर दिया है।
महगाई एवं भ्रष्टाचार को लेकर सभी वर्ग के लोग नाराज है। आम आदमी यह समझ नहीं पा रहा है कि सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती महंगाई में अपने आशियाने के ख्वाब को किस तरह से पूरा करे। प्रॉपर्टी के रेट आसमान पर है, वहीं पिछले तीन वर्षो के दौरान निर्माण सामग्री के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सीमेंट, स्टोन चिप्स, लकड़ी, रोड़ी व सैटरिग से लेकर निर्माण सामग्री से जुड़ी तमाम चीजों के दाम आसमान छू रहे है। स्थिति यह हो गई है कि जो लोग दो मंजिल का मकान बनाने की तैयारी में थे, वे अब एक ही मंजिल का निर्माण करने में सक्षम हैं। घर तो बना लेकिन इसमें रहना कैसे होगा, यह समस्या लोगों के लिए गंभीर होती जा रही है।
जगबीर खटाना का कहना है कि निर्माण सामग्री के रेट पिछले तीन वर्षो में लगभग दो गुने तक बढ़ गए हैं। महगाई लगातार बढ़ती जा रही है तथा सरकार महगाई पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। रोड़ी, बजरी, सीमेंट, ईट आदि के दामों में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। सरिये के दाम तीन वर्ष पहले 28 से 30 रुपये प्रति किलो तक थे, जो अब 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं।
अशोक कुमार सिंह का कहना है कि आम आदमी के लिए मकान का निर्माण करना मुश्किल हो गया है। निर्माण सामग्री के दाम भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। अपने मकान का निर्माण तो दूर लोगों को किराये पर मकान लेने में ही पसीने छूट रहे हैं और सका एक ही कारण है महगाई। महगाई में आम आदमी के लिए गुजर-बसर करना मुश्किल हो गया है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह के मुताबिक, तीन वर्षो में निर्माण सामग्री लगभग दो गुनी महंगी हो चुकी है। निर्माण सामग्री के बढ़े हुए दामों के कारण आम आदमी का बजट बिगड़ चुका है। मकान बनाना तो दूर महगाई के कारण आम आदमी को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है।
वस्तु तीन वर्ष पहले अब
सीमेंट 220 280
कंक्रीट 18 26 से 30
सैटरिग 2 से 3 8
सरिया 30 45
लकड़ी चौखट 900 1400
नोट : सीमेंट की कीमत रुपये प्रति बोरी, सरिये की कीमत रुपये प्रति किलो व बाकी चीजों की कीमत रुपये प्रति फुट के हिसाब से है।



-dainik jagran
 
Old May 21 2012, 05:08 AM   #2824
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Authority takes steps to boost development in rural areas


NOIDA: The civil construction department of Noida Authority has now been entrusted with the task of looking after development activities in rural areas apart from urban sectors for providing basic amenities. This step will reduce dependency of rural areas on urban sectors and ensure that development activities remain equal between both areas.

Earlier, the two Gram Vikas divisions of Noida Authority used to undertake developmental works in rural areas, but owing to paucity of staff budgets used to remain unutilized every year and works were left incomplete.

The decision to hand over works in rural areas has been taken as per the mandate of the new CEO. "Each year, around 40-45% of the budget meant for development of rural areas remains unutilized as the two Gram Vikas divisions worked with a staff strength of only 15-16 people," said a senior Noida Authority official. "This led to lop-sided development, where rural areas lagged considerably behind urban ones in civic developmental works. Rural areas will equal urban sectors within two years if work is properly done through this change in mechanism," added the official.

The two Gram Vikas divisions undertook developmental work like laying sewer lines, water supply, installation of hand pumps, laying cement-concrete roads, building primary schools and community centres, etc. "All such works will now be looked after by the civil construction department. This department has five divisions and around 60 engineers with hands-on experience of undertaking developmental works," said the official.

The department is expected to speed up pending work in rural areas and ensure proper and complete utilization of the budget allotted by Noida Authority. "Work has been divided among five divisions of the department for the 61 villages of Noida," said the official. "Given the increase in population pressure over rural areas in the last few years, the impact of this pressure had been spreading over to urban areas as well," he added.

TOI
 
Old May 21 2012, 05:14 AM   #2825
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रजिस्ट्र्ी से चूके तो देना होगा जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के फ्लैटों की रजिस्ट्री न करा पाने वालों को अब भारी पेनल्टी देनी पड़ सकती है। प्राधिकरण इन पर पेनल्टी तय करने की तैयारी में है। इस मुद्दे के साथ ही सोसायटी की संपत्तियों से जुड़े अनेक मुद्दों पर आज सीईओ व निबंधन अधिकारी बैठक करेंगे।
बैठक में अब तक अटकी आवासीय समितियों की रजिस्ट्री न हो पाने का मुद्दा चर्चा का मुख्य केंद्र होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद रजिस्ट्री से चूके इन फ्लैटों पर पेनॉल्टी तय की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार दस सितंबर को आवासीय समितियों के हर फ्लैट को पंजीकृत कराने का निर्णय दिया था। इसके छह माह के भीतर रजिस्ट्री करा लेने पर किसी तरह की पेनल्टी वसूलने को कहा। इसके बाद संपत्ति न दर्ज करा पाने वाले दोबारा कोर्ट चले गए। फिर से कोर्ट ने 27 जुलाई को आदेश जारी किया और रजिस्ट्री के लिए छह माह का अतिरिक्त समय दिया। इस दौरान फ्लैटों पर किसी तरह की पेनॉल्टी वसूल नहीं की गई। अब भी तीन हजार से अधिक फ्लैट ऐसे हैं, जिनके न तो सबलीज कराई और न ही रजिस्ट्री। इनसे करीब सौ करोड़ रुपये राजस्व मिलने का अनुमान है। निबंधन विभाग ऐसी संपत्तियों की सूची भी सीईओ के समक्ष रखेगा। इन पर दबाव डालकर सबलीज और रजिस्ट्री के लिए कहेगा।
डीआईजी स्टांप वीडी शर्मा ने कहा कि आवासीय संपत्तियों से कितनी पेनॉल्टी और कब से वसूली जानी है, इस पर चर्चा होगी। इसके अलावा मल्टीपल अटॉर्नी पर बिके फ्लैटों की सबलीज व रजिस्ट्री कराने की छूट, प्राधिकरण से आवंटित संपित्तयों का कुल भुगतान के बिना भी ट्रांसफर करने की छूट समेत कई अन्य मसलों पर भी चर्चा होगी। इस बारे में एसोसिएशन ऑफ नोएडा (एडवोकेट एंड डीड राइटर्स) के महासचिव एलसी शर्मा ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत की अंतिम तिथि के बाद से ही पेनल्टी ली जानी चाहिए।उनका कहना है कि अब तक सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से प्राधिकरण पेनॉल्टी वसूलता है। ऐसे में सोसायटी बनने से पेनॉल्टी वसूलेगा तो आठ लाख रुपये प्रति फ्लैट तक आवंटियों को भुगतान करना पड़ जाएगा। यह रकम संपत्ति मालिक के लिए बहुत भारी पड़ जाएगी। उन्होंने मल्टीपल अटॉर्नी पर बिकी संपत्तियों को भी पेनल्टी से बाहर रखने और उनकी सबलीज व रजिस्ट्री के लिए समाधान योजना लाने की भी मांग की है।
प्राधिकरण के सीईओ और निबंधन के अधिकारी आज कर रहे हैं बैठक
मल्टीपल अटॉर्नी वाले फ्लैटों की सबलीज और रजिस्ट्री पर भी चर्चा
 
Old May 21 2012, 08:57 AM   #2826
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Can the real luxury please stand up?


What do you look for when you buy a home? Budget, most definitely, but you’re also thinking of living in a home where the family can meet, eat and yet retain privacy through all this connectedness. Ample light and air, may be a kitchen garden or balcony to savour your morning tea, and the rest, simple fuss-free maintenance.


Now think luxury and what comes to your mind? Do elaborate driveways and Swarovski chandeliers qualify? Imported marble flooring? Which makes one wonder what happened to Indian marble, but then anything imported in our minds, is luxury.


The intent of this story is not to take you on an austerity drive, but only to question — do you know what you are buying into? What your builder has imported is not just a box of tiles, he has imported a way of living. His elaborate design diktats tell you that you have to be surrounded by a golf course to be in sync with the rest of your tribe, that without water walls and horse riding, you haven’t arrived yet, that you deserve golf living or a polo way of life.


“People follow each other, like sheep. As a country that takes pride in pluralism and diversity, we fail when it comes to making choices. We all want to live the American dream and the culture of consumption is what drives us,” says architect Ashish Ganju, who designed the Press Enclave apartments in Saket, New Delhi. It was the first cooperative initiative where the residents and the architect worked together. That is luxury, where you can request for a window for the kitchen that faces a park, even if it is not in the elevation, simply because it is your house in the end.


THE NEW COMMODITY


Our Indian way of living has primarily revolved around street ecosystems. Galli cricket, the kulfi-man on his cycle, the flower seller bringing flowers for your morning puja, watching your children play, all this doesn’t exist in a gated, multi-storey premium apartment. “It is bound to happen,” says architect Hafeez Contractor. “You are financially a different person, you are in a different place in life. An executive exposed to a global way of life wants to live such a life back home too.” Little wonder then that a flat in Chennai looks no different from a flat in Gurgaon.


Speaking to architects who build for premium developers, there was a consensus on what is termed as luxury. This includes views (so what if it is artificially placed), elaborate driveways and lobbies, common gardens, besides, the house layout and location. The ‘By Invitation’ tag only increases the uber quotient. Isn’t it true then that majority builders appeal to the baser instincts, so a lap pool (even if you can’t swim) and butler service may add to the oomph to a basic plot?


Globally, a house with a view, is one that faces the hills or a river. In fact, good design doesn’t blow it’s own trumpet, it arrives quite silently and you never know it’s there, but you will most definitely feel it. It’s never forced.


“These days, one is no longer buying into a community, but a commodity,” says architect Gautam Bhatia. “It’s easier for builders to make a luxury apartment than research on materials, find ways to cut cost, make homes that will reorganise spaces in a new way... Homes today, can be built at twice the cost of an MIG (middle-income group) house and sold at 10 times the price.”


Little wonder then there is a ‘Scottish Garden’ and ‘California Heights’ amidst barren wastelands. So what would you say to a builder who imports elephant statues from Bali to embellish the manor-like entrance to your apartment? It’s certainly not coming to you free of cost. Then there is the preoccupation with glazing, glass bathrooms, glass walls. Where can your eye rest?


Surfeit of information leads to frayed nerves, not to mention the efforts to maintain these accoutrements.


The market meaning of luxury borders on a hypnotic illusion of what life can be. But strip the fancy lights and the corniced ceilings, what would you want in your home?


LOOK WITHIN


McKinsey & Company answers this question in their report on India’s urbanisation. It says, a city that is designed around the dimensions of the human body and its need for clean air, water and healthy food will also improve the lives of its citizens. Well-designed cities of the future could be net contributors to soil building and biodiversity, making them beneficial to people and nature.


The challenge facing our cities is the absence of a clear direction of how our cities should evolve, how they can be sustainably built. Builders today, are the master planners, and those of us who need a roof above our head and a place to call “home” have to rely on their judgment. But there is good news in all this.


“There are the younger crop of builders who seem to be sensitive to issues of sustainability and energy renewal, and are thinking of alternative ways of living,” says Ganju. Such discerning builders are making a difference in the country, who are making the process of “building”, a participatory one and giving back more than taking, from the environment.


So while the zeitgeist may lean towards frills and trivialities, we might just be moving away from the landmine of a tactile-less world.


Factor these when buying a builder apartment


Light & Ventilation: Ensure there is ample natural light in rooms, kitchen and bathrooms.


Plumbing & Electricals: Quite often the builders are equally clueless, so ask for detailed plans of these as well. At a later stage, it would help your maintenance guy to know how the wiring and pipes are done so there is minimal breaking of walls.


Parking & Common Areas: Is there individual and guest parking? Check on electricity back up, water supply and waste disposal.


FSI: Floor Space Index is the built area on the site. The “covered area” does not include balconies and the “super area” includes common areas such as stairs and lifts within the flat.


Balconies: Since these are not included in the floor space ratio, these come cheaper than a covered area, so invest in homes with large balconies.


Spaces: Look for optimal use of space, those that can multi-task. What use is a separate dining room if you are there only for two hours in a day?


Flooring & Walls: Opt for floors that need minimal maintenance and non-slippery ones for bathrooms and kitchen with a gradient to allow for water run-off. For walls, avoid horizontal lines, grooves and louvres if you’re obsessed about dust. Avoid false ceiling in kitchens and bathrooms that can pick up moisture and look patchy over time.


Lighting: Opt for spot lighting rather than tube lights, these are energy efficient and provide good quality, ambient light.


Fittings and fixtures: If you’re getting a jacuzzi or pressure-intensive gadgets in your bathroom, ensure you have a powerful pump to carry the water up for the right pressure.


— Inputs by Suparna Bhalla, Abaxial Architects

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Old May 21 2012, 08:59 AM   #2827
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Jamiat wants property rights for women

Jamiat Ulama-i-Hind, which runs the largest number of madrasas across the country, has sought inheritance rights for Muslim women through amendment of existing laws.

"According to the law of our country, women are denied right to inheritance in agricultural land. This is against the law of Islamic inheritance. So, the existing law should be amended to ensure her rights," JuH leader Mahmood Madani told TOI.


In Islam, women are treated as "more than equal", he said. "However, in complete contrast to Islam, the women are being denied inheritance from her father and husband. It's a blot on Muslim society that they are denying our women their right," he added.


Asked if they would face opposition from the community, Madani said, "We will build up a movement through our network of mosques and madrasas to make people aware of women's rights."


Farida Khanum, professor at Jamia Millia Islamia, however, was not too optimistic, saying, "These are good as subjects of speech. I doubt if this can change a deep-rooted mindset."


Indian Muslims give daughters dowry but deny her inheritance. "Sura Al Nisa chapter 4 verse 11 of the Quran speaks clearly about women's right to inheritance. But to safeguard self-interest, this is conveniently ignored," said Khanum.


JuH leaders also stressed on building educational institutions for girls. "Many Muslims don't want to send their daughters to school, even if they can afford it, as schools or colleges are co-educational," said Niaz Ahmed Farooqui, JuH working committee member.


However, there were hurdles for Muslims to set up schools. Drawing on personal experience, Madani said, "I had bought land for Rs 1.50 crore in Dehradun to build schools for girls and boys. The then Congress government did not allow me."

He approached the high court and won the lawsuit in 2011. "Yet, I have not been allowed to begin work on that plot. If Jamiat, which opposed the two-nation theory and played a stellar role in the country's freedom struggle, is harassed this way, you can well imagine the plight of common Muslims," Madani said.

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Old May 21 2012, 08:59 AM   #2828
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Real estate ideal for investors looking for high returns and no risk


The stock markets tanking and the rupee depreciating against the dollar seem to be daily headlines of late. While the stock and currency markets rock, taking cues from global and domestic macroeconomic developments , the residential property markets seem set on a buoyant note. The rapid urbanisation, on the one hand, is pushing the case in cities, while the relatively more dependable property as an investment option is drawing more buyers on the other.


It is a given that property, especially in rapidly-developing cities such as Bangalore , is bound to find demand across all price points. With more entrepreneurs moving into the city and employment opportunities expanding , the property sector is set to grow.


At this point in time, moving funds from riskier equity-based investment avenues to the stable realty space is an option worth considering. Just as in the case of equity, property too is a medium to long-term asset class for investors . A long-term investor will also find property to be a tax-efficient asset class that generates rentals in the interim period. The tax-adjusted returns on property works out higher given the fact that the capital appreciation property registers in the medium to long-term is high. On liquidity , while property is not as liquid as equity, these days equity too is a long-term option, especially in these turbulent markets. Yet, property in prime localities and those with premium brand tags are liquid , with demand for such options being on an uptrend constantly .


Given these factors, the upbeat sentiment in the markets with the Reserve Bank of India cutting the repo rate in the last Credit Policy, and expected downtrend in home loan interest rates, the investment climate is turning sunny for the property space. Investors in property have many options too with a variety of price points and options available across the board. The suburbs opening up with the connectivity being augmented is leading to significant inventory coming in for buyers. The rentals have recorded growth thanks to the commercial development around the city in the last couple of quarters too.


So who should be making a move now?


"Those with high exposure to equity should look at rebalancing the portfolio with property as an asset class in these times. Typically, property yields multi-bagger returns if held for around 10 years" , says Anil Rego, an investment consultant. "Another advantage of real estate is minimal volatility" .


Property is a comfortable asset class for many. "High net worth individuals who don't face EMI pressures are looking at property in the current market conditions" , adds Anil. Budget housing too is an option these days. "Budget housing is a volume segment. The ticket size is lower. It is therefore much easier to exit from a budget housing option. This option is good especially if the rental yield is relatively higher" , says Anil. Sites are known to deliver multibagger returns over time. "This option works best in the outskirts now. The property title has to be checked carefully though" , he explains .


With the rupee depreciating against the dollar, more NRIs can invest in property back home. The exchange rate advantage works well for those earning dollars abroad. The property management services available on many projects help them find tenants and maintain the property here. "NRIs who may have some plans of coming back at a later stage find this a good time to buy property. Also, fence-sitters are taking decisions now with the rupee over 53 to the dollar" , says Zahed Mahmood , a realtor in the city. "These NRIs are looking at apartments and properties that fetch good rental incomes" , he adds. This trend is set to gain ground in the months ahead, according to industry watchers.

Property, a dependable hedge against inflation, is a safe avenue in these turbulent market conditions.

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Old May 21 2012, 08:59 AM   #2829
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Time to go for that home loan; attractive options in the market for prospective borrowers


The interest rates on home loans have started coming down after the Reserve Bank of India (RBI) decision to reduce the repo rate last month. The repo rate is the short-term lending rate on which the RBI extends short-term loans to banks. The repo rate is one of the major factors that decide a bank's lending rate. The lowering of the repo rate has reduced the cost of funds for banks and hence there was a drop in loan interest rates.


The rates on new loan accounts have come down more than the interest rates on existing loans. This is because new accounts are viewed as fresh sales. Hence, banks float many promotional schemes and go aggressive on them. The rate cut happens on existing loans only when banks get comfortable on their overall cost of funds and are sure about maintaining their net interest margins.


Outlook on rates


Interest rates follow a cyclic pattern over a long term. The interest rates were at historical low levels during 2007 and 2008. However, as the inflation rate started picking up, the RBI gradually started tightening the monetary policy to moderate the demand-related impact on inflation .


The interest rates had gone up sharply because of the RBI's monetary tightening over the last three years and this started hurting borrowers' confidence as well as economic growth. Towards the end of last year, there was a drop in the inflation rate and this gave room to the RBI to soften its monetary policy stance. The RBI responded with a cut in the cash reserve ratio (CRR) as well as the repo rate.


However, further monetary easing depends on the inflation rate that is still high with respect to the RBI's comfort target range, while a slowdown in the economic growth rate is a cause for concern.


Strategy for prospective borrowers


Banks have already announced aggressive rate cuts and attractive schemes to attract prospective home loan borrowers as the repo rate cut has brought down the cost of funds and the CRR cut has resulted in more liquidity with banks. Prospective home loan borrowers should look at good bargains on interest rate, upfront processing fee and other charges while processing the application .


Since there are indications that further rate cuts may not happen in the near term, it is a good time and opportunity for prospective borrowers to sign up for a home loan with a floating interest rate in order to avail the benefits of future rate cuts.


Switching to another lender


After the RBI's repo rate cut last month, many banks have already reduced the interest rates on existing home loan schemes. However, some banks do not automatically reduce the rates but offer schemes to borrowers to migrate to lower interest rates.


On the other hand, some banks are slow in reducing the interest rates on existing home loan accounts. This is where borrowers can consider the options of switching the home loan account from one bank to another.


There are some of the significant points that should be considered while evaluating the switching option. Switching a home loan account from one bank to another comes with various costs such as new loan processing fee, documentation charges etc. You should compare the costs against the saving in interest rate. As a thumb rule, a switch is worth doing when the interest rate differential is at least 1.5 percent or more other important points to be kept in mind while changing a bank are the possibility of taking a top-up on the loan, increasing or decreasing the loan tenure, and changing the EMI.


Since a housing loan is a long-term relationship with the bank, borrowers should analyse the past record of the bank such as trigger and frequency of revising the home loan interest rate over the last few years, addressing borrowers' concerns etc.

ET
 
Old May 21 2012, 09:02 AM   #2830
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'प्यासे' को टेंशन, बिल्डर पर नहीं एक्शन


नोएडा।। जिले में ग्राउंड वॉटर बचाने के नाम पर प्रदेश सरकार ने जेवर ब्लॉक में बोरवैल पर प्रतिबंध लगा दिया , लेकिन भूमिगत जल को गंदे नाले में बहा रहे नोएडा - ग्रेटर नोएडा के बिल्डरों पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन पहले ही इन बिल्डरों की ताकत के आगे हाथ खड़े कर चुके हैं। वहीं , राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एनवायरनमेंट संबंधी मामलों के लिए गठित भूरेलाल कमिटी ने इस बर्बादी पर आंखें मूंद रखी हैं।

मुनाफे के लिए बढ़ा रहे टेंशन
मुनाफे के लिए बढ़ रहा बिल्डरों का लालच भूमिगत जल का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है। बिल्डर ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में गहरे बेसमेंट बनवा रहे हैं। चूंकि नोएडा यमुना और हिंडन नदी का दोआब का क्षेत्र है , इसलिए गहरी खुदाई करने पर पानी निकल आता है। बिल्डर इस पानी को हैवी मोटरें लगाकर आस - पड़ोस से गुजर रहे गंदे नालों या सीवर लाइन में बहा देते हैं।

120 फुट पर पहुंचा ग्राउंड वॉटर
यमुना से सिर्फ एक किलोमीटर दूर बसे अट्टा , नया बांस , हरौला और छलेरा जैसे गांवों में 20 साल पहले 20 फुट की गहराई पर पीने का पानी निकल आता था। अब बिल्डरों के अंधाधुंध दोहन से इन गांवों में भूमिगत जल 120 फुट गहराई में भी नहीं मिल रहा है। यही स्थिति शहर के अन्य 42 गांवों की भी है। हालात यह हैं कि इन गांवों में जलापूर्ति के लिए बीडीओ की ओर से लगवाए गए करीब एक हजार हैंडपंपों में से 90 पर्सेंट सूख चुके हैं।

4 साल से बह रहा ' झरना '
सेक्टर -18 में बन रहे एक शॉपिंग मॉल से 4 साल से करोड़ों लीटर पानी शाहदरा ड्रेन में बहाया जा रहा है। वहीं , सेक्टर -94 में पोस्टमार्टम हाउस के बगल में कर्मशल लैंड खरीदने वाला एक बिल्डर 2 साल से ग्राउंड वॉटर गंदे नाले में बहा रहा है। इसके अलावा महामाया बालिका इंटर कॉलेज से करीब 200 मीटर आगे 2 बिल्डरों ने भूमिगत जल को सीवर लाइन का रास्ता दिखा रखा है। साथ ही , सेक्टर -94 में उत्तर भारत का सबसे ऊंचा रेजिडेंशल टावर बनवा रहे बिल्डर ने ही ग्राउंड वॉटर निकालने के लिए लाइनें बिछवानी शुरू कर दी हैं।

7 साल की सजा का है प्रावधान
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के मुताबिक , कोई भी व्यक्ति अपना मकान बनाने के लिए हर महीने एक लाख लीटर भूमिगत जल का बिना परमीशन लिए यूज कर सकते हैं। इससे ज्यादा लिमिट में ग्राउंड वॉटर निकालने के लिए स्टेट पलूशन कंट्रोल बोर्ड से परमीशन लेना जरूरी होता है। दोनों ही परिस्थितियों में पानी को गंदे नाले , सीवर आदि में फालतू न बहाने की शर्त होती है। वहीं , ऐसा करते पाए जाने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना और सात साल तक की सजा हो सकती है।

जिला प्रशासन और अथॉरिटी ने खड़े किए हाथ
नोएडा अथॉरिटी की परमीशन के बिना ग्राउंड वॉटर का यूज नहीं किया जा सकता है। ऐसा न करने पर शहर का ग्राउंड वॉटर लेवल बिगाड़ने के आरोप में भारी जुर्माना लगाने और अलॉटमेंट कैंसल करने तक की कार्रवाई हो सकती है। इसी प्रकार जिला प्रशासन भी जनहित को नुकसान पहुंचाने के आरोप में जुर्माने और मुकदमे की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि दोनों विभाग बिल्डरों की ताकत के आगे पस्त दिखाई देते हैं। अथॉरिटी के पूर्व चीफ टाउन प्लानर राजपाल कौशिक ने तो बिल्डरों को नोटिस भेजकर औपचारिकता की थी , लेकिन जिला प्रशासन यह हिम्मत भी नहीं कर पाया।

सिर्फ नोटिस देकर शांत हुई भूरेलाल कमिटी
जिले में ग्राउंड वॉटर लेवल को बचाने के लिए अभियान चला रहे एक पर्यावरणविद ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भूरेलाल कमिटी से इसकी शिकायत की थी। इस पर बोर्ड के अफसर नोएडा आए और सेक्टर -18 वाले शॉपिंग मॉल का दौरा किया। शॉपिंग मॉल मैनेजमेंट ने बरसात का पानी निकालने के लिए कुछ दिन पहले मशीनें लगाने की बात कही गई और बोर्ड के अधिकारी भूमिगत जल बचाने की नसीहत देकर लौट गए। वहीं , दिल्ली - एनसीआर में पर्यावरण संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित भूरेलाल कमिटी ने भी बिल्डरों और अथॉरिटी के अफसरों को दिल्ली बुलाकर ग्राउंड वॉटर बचाने की नसीहत दी। लेकिन उन नसीहतों पर अब तक अमल नहीं हुआ है।

स्टेट गवर्नमेंट का आदेश

प्रदेश में तेजी से गिर रहे ग्राउंड वॉटर लेवल को बचाने के लिए शासन ने प्रदेश के 108 ब्लॉकों में बोरवैलों की खुदाई करने पर बैन लगाने का आदेश 18 मई को दिया था। इसके दायरे में गौतमबुद्धनगर जिले का जेवर और गाजियाबाद जिले के लोनी और भोजपुर ब्लॉक भी आ गए हैं। इन निर्देशों के तहत फ्री हैंडपंप और प्राइवेट टयूबवैलों के बोरिंग करने पर रोक लगाई गई है। साथ ही , सरकार से मिलने वाले लोन , सब्सिडी और ट्यूबवैल के लिए बिजली का कनेक्शन देने पर भी बैन लगाया गया है।

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