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#51 |
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Veteran Member
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जीडीए के ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स कितने सुरक्षित
Aug 4, 2012, 08.00AM IST आनंद कुमार ॥ साहिबाबाद जीडीए ने ट्रांस हिंडन एरिया में दो दशक पहले कम आमदनी वाले लोगों के लिए ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स बनवाए थे। अब ये जर्जर हाल में पहुंच चुके हैं। इनमें रहने वालों को इनके ढहने का डर सताता रहता है। वैशाली सेक्टर-1 बाहर से फ्लैट्स के प्लास्टर उतर चुके हैं। कई फ्लैट्स तो ऐसे हैं जिनकी नींव तक कमजोर हो चुके हैं। यहां रहने वालों ने अपने हिसाब से इसमें सपोर्ट दे रखा है। आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष मोहन सिंह का कहना है कि इन फ्लैटों के रिनोवेशन के लिए कई बार जीडीए के अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है। इस मामले में आरटीआई के तहत सूचनाएं भी मांगी गई है लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है। वैशाली सेक्टर-2 यहां कामना इलाके में बहुमंजिला फ्लैट्स की हालत बदतर हो चुकी है। इमारत की दीवारों पर पेड़ उग आए हैं। जगह-जगह दीवारों पर दरारें पड़ी हुई हैं जो कभी भी गिर सकती हैं। आरडब्ल्यूए के हरी रावत का कहना है कि यहां पर फ्लैटस की दीवार ढहने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। कई के आगे के हिस्से ढह चुके हैं लेकिन उसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर इन फ्लैटों में रह रहे हैं। वैशाली सेक्टर-3 रचना इलाके में ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स 10 वर्षों से जर्जर हालत में हैं। कुछ फ्लैटों को छोड़कर लोग चले गए हैं। आरडब्ल्यूए पदाधिकारी केदार मेहता का कहना है कि जर्जर अवस्था में होने के कारण यहां के कई फ्लैटों का फायदा असामाजिक तत्वों को मिल रहा है। उनका कहना है कि यहां के फ्लैट्स की स्थिति अच्छी रहती तो लोगों को कोई परेशानी नहीं होती। इंदिरापुरम न्याय खंड-1, 2 और 3 में जीडीए के बनाये गये अधिकतर ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स के प्लास्टर उखड़ चुके हैं। इनकी दीवारों पर पेड़ उग चुके हैं। इससे दीवारें पूरी तरह कमजोर हो गई हैं। रेजिडेंट्स कुसुम सिंह का कहना यहां के कई फ्लैट्स गिर चुके हैं लेकिन उसके बावजूद अब तक जीडीए के अधिकारियों ने इन्हें ठीक करने की सुध नहीं ली। बृज विहार सी - ब्लॉक इलाके में ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स को बनाकर जीडीए ने इन्हें सीबीएसई को लीज पर दे दिया लेकिन इसकी ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। छज्जे टूट कर गिरने लगे हैं। आधे से ज्यादा लोग यहां से जा चुके हैं। आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष राम अवतार पंवार का कहना है कि यह फ्लैट कब गिर जाएं पता नहीं। आसपास रहने वाले लोगों को यह डर सताता रहता है। |
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Ex-Moderator
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बेरहम बिल्डर! बेजुबान जीडीए
फ्लैट बुकिंग के समय बिल्डर दिखाते हैं सब्जबाग, पजेशन के बाद सुविधाएं नदारद •कई प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों ने किया है घालमेल •समय पर पजेशन नहीं मिलने से चुकानी पड़ रही अतिरिक्त किस्त •जहां फ्लैट लिया वहां रोज तरह तरह के पंगे, वायदाखिलाफी बिल्डरों का खेल गाजियाबाद। फ्लैट खरीदते समय हजारों सब्जबाग और खरीदने के बाद बिल्डरों के बदले तेवरों से रेजीडेंट्स बेहद परेशान हैं। शहर में बसने का ख्वाब पाले रेजीडेंट्स के हकों पर डाका डालकर बिल्डर करोड़ाें के वारे न्यारे करते हैं और जीडीए इस सब पर खामोश है। नतीजा यह है कि सभी सोसायटी में बिल्डर और रेजीडेंट्स में विवाद चल रहे हैं। रेजीडेंट्स के मुताबिक जीडीए सिर्फ आदेश जारी करता है उसकी मॉनीटरिंग करने की जहमत नहीं उठाता। गाजियाबाद आरडब्लूए फेडरेशन के चेयरमैन कर्नल टीपी त्यागी ने बताया कि जीडीए के शांत होने से बिल्डर अपने पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। जीडीए ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए बिना नए प्रोजेक्ट का नक्शा पास कराने का अच्छा नियम बनाया है, लेकिन यह भावी प्रोजेक्ट पर लागू होता है। जब तक बिल्डर पुराने प्रोजेक्ट की समस्याओं को दूर न कर दें, जीडीए को उनके जारी नए प्रोजेक्ट के काम पर रोक लगानी चाहिए। इससे बिल्डर प्रोजेक्ट में रहने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी। जीडीए उपाध्यक्ष संतोष यादव ने कहा कि बिल्डरों ने प्रोजेक्ट में फ्लैट बेचते समय जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करना होगा। रेजीडेंट्स को भी उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। प्राधिकरण स्तर पर रेजीडेंट्स और बिल्डर्स के बीच समय-समय पर बैठकें कराई जाती हैं। समस्याएं दूर न करने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई जारी है। पहले प्रोजेक्ट का कंप्लीशन सर्टिफिकेट न लेने वाले बिल्डरों के नए प्रोजेक्ट का नक्शा पास नहीं होगा। बेसमेंट में होनी चाहिए पार्किंग: शहर के अधिकतर बेसमेंट में बने हैं एक्सट्रा फ्लैट, दुकानें या फिर बिल्डरों के ऑफिस, ग्रीन एरिया की जगह पार्किंग, कई प्रोजेक्ट्स में तो ओपेन स्पेस में भी बनी हैं इमारतें। • पांच मंजिल स्वीकृत नक्शे पर बनती अतिरिक्त दो मंजिलें। बाद में हो जाती है कंपाउंडिंग। सामुदायिक सुविधाओं में नहीं होता इजाफा। • 50 फीसदी आक्यूपेंसी के बाद बिल्डर को आरडब्लूए को सोसायटी हैंडओवर करना अनिवार्य। फिलहाल तो बिल्डर नहीं कर रहे हैंडओवर। मेंटीनेंस चार्ज के करोड़ों रुपये बिल्डर लगाते दूसरे प्रोजेक्ट में। बुकिंग करते समय होता क्लब, पूल, ग्रीन एरिया आदि सामुदायिक सुविधाओं का वादा। पजेशन के बाद कुछ और ही बना मिलता है।
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Ex-Moderator
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8 बिल्डरों पर बकाया 22 करोड़
गाजियाबाद। जीडीए ने बड़े बकाएदार आठ बिल्डरों के खिलाफ आरसी जारी कर दी है। इन पर जीडीए का करीब 22 करोड़ रुपया बकाया है। जीडीए ने बिल्डरों के खिलाफ जारी आरसी जिला प्रशासन को भेज दी है। अब बिल्डरों को 10 फीसदी अतिरिक्त धनराशि चुकानी पड़ेगी। बाह्य और आंतरिक विकास शुल्क की मद में जीडीए का 18 बिल्डरों पर करीब 76 करोड़ रुपये बकाया था। बीते माह जीडीए उपाध्यक्ष ने इन बिल्डरों को 15 दिन का नोटिस जारी किया था। इस पर बिल्डरों ने करीब 18 करोड़ रुपया जीडीए में जमा भी कराया है। |
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जीडीए का डंडा : प्रोजेक्ट्स पर पड़ी मार तो कंप्लीशन सर्टिफिकेट की दरकार
125 प्रोजेक्ट सिर्फ आठ परफेक्ट • आदर्श त्रिपाठी गाजियाबाद। शहर में करीब 125 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के नक्शे जीडीए ने पास किए, लेकिन ढाई सालों में सिर्फ आठ बिल्डरों ने ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिया। अभी भी करीब 117 सोसायटी के रेजीडेंट्स बिल्डरों के झूठे वादों की प्रताड़ना झेल रहे हैं। कई बार हुए अवैध निर्माणों के सर्वे और नोटिस के बावजूद अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया। गौरतलब है कि बीते तीन वर्षों में शहर में करीब एक हजार से अधिक एकल यूनिट पर बहुमंजिला इमारतें बनी हैं। बिल्डिंग बाइलॉज का उल्लंघन करने वाले बिल्डर कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लेते। जीडीए ने भी कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिना अपार्टमेंट्स खड़े करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। बीते दिनों जीडीए उपाध्यक्ष ने पुराने प्रोजेक्ट का कंप्लीशन सर्टिफिकेट न लेने वाले बिल्डरों के नए प्रोजेक्ट रोके, तो उन्हें इसकी याद आई। बीते एक माह में कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने के लिए करीब आधा दर्जन बिल्डरों ने जीडीए में आवेदन किया है। जीडीए उपाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि बिल्डर फ्लैट्स बेचकर अगला प्रोजेक्ट शुरू कर देते हैं, मुसीबत गाढ़ी कमाई से फ्लैट खरीदने वालों को होती है। ऐसी इमारतों में रिहायश होने के कारण तोड़फोड़ की कार्रवाई जनविरोधी साबित होती है। भविष्य में ऐसे निर्माण रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वाले बिल्डरों को समय पर सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए हैं। आरडब्लूए फेडरेशन के चेयरमैन कर्नल टीपी त्यागी ने कहा कि जीडीए के इस कदम से बिल्डरों के लिए बाइलॉज की धज्जियां उड़ाना आसान न होगा। शहर में बिल्डर प्रोजेक्ट्स में फ्लैट खरीदने वाले लोगों का राहत होगी। बैंकों में नहीं मिले योजना के फार्म गाजियाबाद। जीडीए की मधुबन-बापूधाम फ्लैट योजना पर फार्म बेच रहे बैंक पानी फेर रहे हैं। बृहस्पतिवार को अनुबंधित कई बैंक शाखाओं में फार्म नहीं पहुंचे। योजना में आवेदन करने वाले लोगों ने जीडीए के कॉल सेंटर में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जीडीए अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने बैंक अधिकारियों को फोन कर फार्म पहुंचवाने के निर्देश दिए। जीडीए ने फार्म बेचने के लिए 14 बैंकों को अनुबंधित किया है। ये हैं नियम 300 वर्गमीटर वाले सभी निर्माणों के लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के मुताबिक ग्रुप हाउसिंग में बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के न तो भवन स्वामी इमारत का इस्तेमाल कर सकता है और न ही किसी और को दे सकता है। n पार्किंग की जगह होता कुछ और निर्माण n कंपाउंडिंग के बाद भी किया जाता अतिरिक्त निर्माण n प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही दे दिया जाता पजेशन n वर्षों बीतने के बाद भी नहीं दी जाती सामुदायिक सुविधाएं n एकल यूनिट के नक्शे पर बनती कई-कई मंजिलें
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Ex-Moderator
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17 बिल्डरों के फ्लैटों पर लगा बैन
फ्लैट पर कब्जा देने से पहले बिल्डरों को पानी, बिजली जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। इसके पालन के लिए जीडीए ने अब कड़ा रुख अपनाया है। सभी सुविधाएं मानक के मुताबिक हैं या नहीं इसका सत्यापन करने के बाद ही जीडीए बिल्डरों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट देगा। जीडीए से कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए बिना बिल्डर अलॉटी को फ्लैट का कब्जा नहीं दे सकेंगे। जीडीए के चीफ टाउन प्लानर एस. के. जमान ने बताया कि बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए कई बिल्डरों को फ्लैट पर अलॉटी को कब्जा देने पर प्रतिबंधित लगा दिया गया है। ऐसे बिल्डरों की संख्या 17 तक पहुंच चुकी है। क्या है नियम जमान के मुताबिक बिल्डर को पहले जीडीए से ग्रुप हाउसिंग का नक्शा पास कराना होता है। निर्माण नक्शे के हिसाब से होना चाहिए। बिल्डिंग में यूनिट के हिसाब से पार्किंग, वॉटर सप्लाई, डे्रनेज, बिजली, पार्क, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट आदि की फैसिलिटी डिवेलप की जाती है। अलॉटी को कब्जा देने से पहले बिल्डर को इन सब फैसिलिटी को डिवेलप करना अनिवार्य है। इन सब फैसिलिटी का सत्यापन करने के बाद ही अथॉरिटी से कंप्लीशन जारी होता है। बशर्ते अवैध निर्माण नहीं हुआ हो। क्या हुआ खेल कई बिल्डरों ने प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले फ्लैट की प्री-लॉचिंग कर बुकिंग की। ग्रुप हाउसिंग डिवेलप करने के साथ ही बाकी बेसिक सुविधाएं जैसे पार्क, वाहनों की पार्किंग, मार्केट, वॉटर सप्लाई, सीवर ट्रीटमेंट के लिए प्लांट, ड्रेनेज सिस्टम, पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि मानक के अनुरूप डिवेलप करनी थी। कई बिल्डरों ने नक्शे से भी ज्यादा का निर्माण कर लिया। कुछ बिल्डरों ने पार्किंग की जगह पर फ्लैट बनाकर बेच दी, जो नियम के विरुद्ध है। कई बिल्डरों ने कई तरह की सुविधा डिवेलप ही नहीं की। ऊपर से नियम और कानून को ताक पर रखकर अलॉटी को फ्लैट पर कब्जा दे कर पल्ला झाड़ लिया। होगी कार्रवाई जीडीए ने ऐसे बिल्डरों का पता लगा लिया है जिन्होंने जीडीए से कंप्लीशन नहीं लिया और फ्लैट बेचकर अलॉटियों को कब्जा दे दिया। सिटी में ऐसे बिल्डरों की संख्या दो दर्जन से ज्यादा हैं। जमान के मुताबिक इन बिल्डरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्हें जवाब देने के लिए पन्द्रह दिनों का समय दिया गया है। इसके बाद जीडीए कार्रवाई करेगा। Navbharat times |
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Complete projects before giving possession: GDA
GHAZIABAD: The Ghaziabad Development Authority (GDA) has directed all builders and developers in the city to refrain from handing over possession of housing and commercial units without obtaining 'completion certificates' of projects. The directions have been issued after detection of increasing number of cases where buyers had moved into premises of under-construction projects that did not have completion certificates. Officials at the GDA said that due to lack of proper civic amenities within and around such under-construction projects, several occupants who have already moved in have been making rounds of the development authority's office complaining about lack of basic provisions like water supply, streetlights, etc. GDA officials say that punitive action might be taken against developers who have been resorting to the practice of handing over possession of properties even though it is mandatory to obtain 'completion certificates' under the Uttar Pradesh Urban Planning and Development Act, 1973. "Immediately upon completion of a project, the concerned developer should apply for obtaining a completion certificate. Allottees should be handed over possession of properties and encouraged to move in only after the project is certified as complete by the authority," said RK Singh, secretary of GDA. Section 15-A of the urban planning and development Act, besides making it mandatory upon developers to obtain certificates of completion from the development authority, also prohibits allottees in projects from occupying any portion of it until the project has been certified by the authority to have been completed as per plan. GDA has also appealed to buyers to ensure that the projects they move into have obtained the necessary 'completion certificates' so that any kind of inconveniences or accidents, caused due to non-completion of works, are avoided in the future. Through a notice, the GDA has distanced itself away from any onus likely to be placed upon it for any untoward incident reported to have occurred due to occupancy in under-construction projects. "Allottees in projects of private developers should insist upon completion certificates before taking possession of properties. Developers would be forced to obtain these certificates if buyers put up the pressure for it," added Singh. TOI |
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Senior Member
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This is all Bul***t and Bakwas.
Why make flat buyers responsible for every thing? If GDA VC is so honest and transparent, he can simply put all GDA building plan approvals on web on line with all details. It is a very simple and cost-effective solution, can be implemented within days. Many Authorities have done that. As regards CC, GDA can simply prohibit registration of flats without CC being attached to the sale deed. It is simple. This will put the onus on builders. Quote:
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| buyers, gda, good, working |
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