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Default मकान किराये पर लेना, मकान खरीदने से अधिक फा

मकान किराये पर लेना, मकान खरीदने से अधिक फायदेमंद!


नागपुर के दीपक पौराणिक को जब मुंबई में नई नौकरी मिली तो सबसे पहले उन्होंने वहां नए मकान की तलाश शुरू की। उनकी मासिक तनख्वाह 1 लाख रुपये से कुछ अधिक थी और अगर वह मकान खरीदने के लिए 35 लाख रुपये का कर्ज लेते हैं तो उनकी समानुपातिक मासिक किस्त (ईएमआई) तकरीबन 40,000 रुपये बनती। मकान खरीदने के लिए उनका बजट 50 लाख रुपये था, मगर जिस हिसाब से प्रॉपर्टी की कीमतों में आग लगी हुई है, उसे देखकर तो यही लगता है कि इतने बजट के साथ वह मुंबई के किसी कस्बाई इलाके में ही मकान खरीद पाएंगे।

हालांकि पौराणिक ने मकान खरीदने के बजाय किराये पर मकान लेने का फैसला किया। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा, 'कस्बाई इलाकों में मकान खरीदने का मतलब है रोजाना कई घंटों का सफर कर ऑफिस पहुंचना। इस कारण से मैंने बांद्रा में अपने ऑफिस के नजदीक मकान किराये पर लेना बेहतर समझा।' उन्होंने 35,000 रुपये किराये पर एक मकान ले लिया।

जब खरीदना हो मकान
सालों से लोगों की सोच यही रही है कि वे किराये पर मकान लेने के बजाय मकान खरीदना अपनी प्राथमिकता मानते हैं। हालांकि आज की तारीख में प्रॉपर्टी के भाव जिस हिसाब से आसमान छू रहे हैं उसे देखकर तो किराये पर मकान लेना ही एकमात्र विकल्प नजर आता है। स्टॉक ब्रोकरेज कंपनी प्रभुदास लीलाधर की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक इस साल मुंबई में 8,580 लीज के सौदे हुए जो पिछले साल के मुकाबले 58 फीसदी अधिक है।
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दरों में बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के संकेत दिए हैं और 2011 में मुंबई, एनसीआर, बेंगलूर और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी कीमतें 10 फीसदी तक घटी हैं। तो क्या इस मौके का लाभ उठाकर मकान की खरीदारी करना
सही रहेगा।

पिछले 18 महीनों में आवासीय ऋण पर ब्याज दरें औसतन 9 फीसदी से बढ़कर 11.5 फीसदी तक पहुंच गई हैं, हालांकि इसके बाद भी पूंजी का मूल्य बढऩे से मकान खरीदने की सलाह दी जा सकती है। अगर कोई फिलहाल ऊंची ब्याज दरों पर भी आवासीय ऋण ले लेता है तो भी इस कर्ज की मियाद आमतौर पर 15 से 20 साल की होती है और इस अवधि में ऐसे चक्र जरूर आएंगे जब ब्याज दरें नीची होंगी।

जोंस लांग लासॉल में आवासीय सेवाओं के सीओओ मोहम्मद असलम बताते हैं कि अगले कुछ महीनों में ही ब्याज दरों के ऐसे निचले चक्र की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने बताया, 'कमजोर मांग की वजह से डेवलपर 15 से 20 फीसदी की छूट देने को तैयार हैं, बशर्ते एकमुश्त मकान की बड़ी रकम का भुगतान किया जा रहा हो। पर जैसे ही ब्याज दरें नीची होना शुरू होंगी तो मांग में एक बार फिर से तेजी आने लगेगी और प्रॉपर्टी के दाम फिर से चढऩे लगेंगे।'

मगर यह कहना जितना आसान है, करना उतना ही मुश्किल। आमतौर पर कोई ग्राहक संपत्ति मूल्य का अधिकतम 80 फीसदी तक कर्ज ले सकता है। बाकी 20 फीसदी रकम का एकमुश्त भुगतान अपनी जेब से करना होगा। आमतौर पर बैंक किसी की तनख्वाह का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा ईएमआई के तौर पर नहीं रखते, पर अगर आपने फ्लोटिंग दर पर कर्ज लिया है तो यह अनुपात घट-बढ़ सकता है।

कीमतों की तुलना
जिन लोगों का नौकरी में स्थानांतरण होता रहता है, वे अगर दूसरा मकान नहीं खरीदने जा रहे हों तो उनके लिए मकान किराये पर लेना ही सही रहेगा। नाइट फ्रैंक इंडिया में आवासीय क्षेत्र के राष्ट्रीय निदेशक आनंद नारायण ने बताया, 'किराये से होने वाली आय और मौजूदा प्रॉपर्टी के मूल्य के बीच के अंतर को समझना भी जरूरी है।' मुंबई में प्रॉपर्टी के दाम इतने अधिक हैं कि किराये से मिलने वाली रकम उसके सामने काफी कम नजर आती है। यह संपत्ति मूल्य का 1.5 से 2 फीसदी तक होती है। ऐसे में मकान किराये पर लेना, मकान खरीदने से कहीं अधिक किफायती नजर आता है। वहीं बंगलोर और दिल्ली जैसे दूसरे प्रमुख शहरों में किराये से होने वाली आमदनी 3.5 से 4.5 फीसदी तक है।

ठीक इसी तरह जब आवासीय कर्ज पर ब्याज दरों और किराये में बहुत अधिक अंतर नहीं हो तो कोई खुद का मकान खरीदने के बारे में सोच सकता है। इसका मतलब है कि वह व्यक्ति जितना किराया चुकाएगा लगभग उतनी ही रकम ईएमआई के तौर पर अदा कर वह अपना मकान खरीद सकता है। मगर मुंबई में ब्याज दरों (11.5 फीसदी) और किराये से आमदनी (1.5 से 2 फीसदी) के बीच का अंतर काफी अधिक (9 फीसदी) है और इस कारण से यहां मकान किराये पर लेना बेहतर विकल्प है।

कर छूट
आप चाहे मकान किराये पर लें या फिर खुद का मकान खरीदें, दोनों ही के लिए आपको कर में छूट का लाभ मिल सकता है। नौकरीपेशा लोग पूरे साल मकान का जितना किराया चुकाते हैं, उसमें से एचआरए के बराबर की रकम पर कर में छूट हासिल कर सकते हैं। वहीं मकान खरीदने के लिए आवासीय कर्ज लेने पर आयकर की धारा 80सी के तहत मूल रकम के भुगतान पर 1 लाख रुपये तक और ब्याज भुगतान पर धारा 24बी के तहत 1.5 लाख रुपये तक कर छूट का लाभ उठा सकते हैं।

-Business Standard
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Originally Posted by fritolay_ps View Post
मकान किराये पर लेना, मकान खरीदने से अधिक फायदेमंद!


नागपुर के दीपक पौराणिक को जब मुंबई में नई नौकरी मिली तो सबसे पहले उन्होंने वहां नए मकान की तलाश शुरू की। उनकी मासिक तनख्वाह 1 लाख रुपये से कुछ अधिक थी और अगर वह मकान खरीदने के लिए 35 लाख रुपये का कर्ज लेते हैं तो उनकी समानुपातिक मासिक किस्त (ईएमआई) तकरीबन 40,000 रुपये बनती। मकान खरीदने के लिए उनका बजट 50 लाख रुपये था, मगर जिस हिसाब से प्रॉपर्टी की कीमतों में आग लगी हुई है, उसे देखकर तो यही लगता है कि इतने बजट के साथ वह मुंबई के किसी कस्बाई इलाके में ही मकान खरीद पाएंगे।

हालांकि पौराणिक ने मकान खरीदने के बजाय किराये पर मकान लेने का फैसला किया। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा, 'कस्बाई इलाकों में मकान खरीदने का मतलब है रोजाना कई घंटों का सफर कर ऑफिस पहुंचना। इस कारण से मैंने बांद्रा में अपने ऑफिस के नजदीक मकान किराये पर लेना बेहतर समझा।' उन्होंने 35,000 रुपये किराये पर एक मकान ले लिया।

जब खरीदना हो मकान
सालों से लोगों की सोच यही रही है कि वे किराये पर मकान लेने के बजाय मकान खरीदना अपनी प्राथमिकता मानते हैं। हालांकि आज की तारीख में प्रॉपर्टी के भाव जिस हिसाब से आसमान छू रहे हैं उसे देखकर तो किराये पर मकान लेना ही एकमात्र विकल्प नजर आता है। स्टॉक ब्रोकरेज कंपनी प्रभुदास लीलाधर की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक इस साल मुंबई में 8,580 लीज के सौदे हुए जो पिछले साल के मुकाबले 58 फीसदी अधिक है।
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दरों में बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के संकेत दिए हैं और 2011 में मुंबई, एनसीआर, बेंगलूर और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी कीमतें 10 फीसदी तक घटी हैं। तो क्या इस मौके का लाभ उठाकर मकान की खरीदारी करना
सही रहेगा।

पिछले 18 महीनों में आवासीय ऋण पर ब्याज दरें औसतन 9 फीसदी से बढ़कर 11.5 फीसदी तक पहुंच गई हैं, हालांकि इसके बाद भी पूंजी का मूल्य बढऩे से मकान खरीदने की सलाह दी जा सकती है। अगर कोई फिलहाल ऊंची ब्याज दरों पर भी आवासीय ऋण ले लेता है तो भी इस कर्ज की मियाद आमतौर पर 15 से 20 साल की होती है और इस अवधि में ऐसे चक्र जरूर आएंगे जब ब्याज दरें नीची होंगी।

जोंस लांग लासॉल में आवासीय सेवाओं के सीओओ मोहम्मद असलम बताते हैं कि अगले कुछ महीनों में ही ब्याज दरों के ऐसे निचले चक्र की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने बताया, 'कमजोर मांग की वजह से डेवलपर 15 से 20 फीसदी की छूट देने को तैयार हैं, बशर्ते एकमुश्त मकान की बड़ी रकम का भुगतान किया जा रहा हो। पर जैसे ही ब्याज दरें नीची होना शुरू होंगी तो मांग में एक बार फिर से तेजी आने लगेगी और प्रॉपर्टी के दाम फिर से चढऩे लगेंगे।'

मगर यह कहना जितना आसान है, करना उतना ही मुश्किल। आमतौर पर कोई ग्राहक संपत्ति मूल्य का अधिकतम 80 फीसदी तक कर्ज ले सकता है। बाकी 20 फीसदी रकम का एकमुश्त भुगतान अपनी जेब से करना होगा। आमतौर पर बैंक किसी की तनख्वाह का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा ईएमआई के तौर पर नहीं रखते, पर अगर आपने फ्लोटिंग दर पर कर्ज लिया है तो यह अनुपात घट-बढ़ सकता है।

कीमतों की तुलना
जिन लोगों का नौकरी में स्थानांतरण होता रहता है, वे अगर दूसरा मकान नहीं खरीदने जा रहे हों तो उनके लिए मकान किराये पर लेना ही सही रहेगा। नाइट फ्रैंक इंडिया में आवासीय क्षेत्र के राष्ट्रीय निदेशक आनंद नारायण ने बताया, 'किराये से होने वाली आय और मौजूदा प्रॉपर्टी के मूल्य के बीच के अंतर को समझना भी जरूरी है।' मुंबई में प्रॉपर्टी के दाम इतने अधिक हैं कि किराये से मिलने वाली रकम उसके सामने काफी कम नजर आती है। यह संपत्ति मूल्य का 1.5 से 2 फीसदी तक होती है। ऐसे में मकान किराये पर लेना, मकान खरीदने से कहीं अधिक किफायती नजर आता है। वहीं बंगलोर और दिल्ली जैसे दूसरे प्रमुख शहरों में किराये से होने वाली आमदनी 3.5 से 4.5 फीसदी तक है।

ठीक इसी तरह जब आवासीय कर्ज पर ब्याज दरों और किराये में बहुत अधिक अंतर नहीं हो तो कोई खुद का मकान खरीदने के बारे में सोच सकता है। इसका मतलब है कि वह व्यक्ति जितना किराया चुकाएगा लगभग उतनी ही रकम ईएमआई के तौर पर अदा कर वह अपना मकान खरीद सकता है। मगर मुंबई में ब्याज दरों (11.5 फीसदी) और किराये से आमदनी (1.5 से 2 फीसदी) के बीच का अंतर काफी अधिक (9 फीसदी) है और इस कारण से यहां मकान किराये पर लेना बेहतर विकल्प है।

कर छूट
आप चाहे मकान किराये पर लें या फिर खुद का मकान खरीदें, दोनों ही के लिए आपको कर में छूट का लाभ मिल सकता है। नौकरीपेशा लोग पूरे साल मकान का जितना किराया चुकाते हैं, उसमें से एचआरए के बराबर की रकम पर कर में छूट हासिल कर सकते हैं। वहीं मकान खरीदने के लिए आवासीय कर्ज लेने पर आयकर की धारा 80सी के तहत मूल रकम के भुगतान पर 1 लाख रुपये तक और ब्याज भुगतान पर धारा 24बी के तहत 1.5 लाख रुपये तक कर छूट का लाभ उठा सकते हैं।

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मात्र 5.0% सालाना किराये में Increment के हिसाब से हमारे पप्पू दीपक पौराणिक जी अगर इसी तरह किराये पर रहते रहे तो आज के 35000/- के हिसाब से अगले १० साल में 52.83 Lakh का स्वाहा कर चुके होंगे !!!
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मात्र 5.0% सालाना किराये में Increment के हिसाब से हमारे पप्पू दीपक पौराणिक जी अगर इसी तरह किराये पर रहते रहे तो आज के 35000/- के हिसाब से अगले १० साल में 52.83 Lakh का स्वाहा कर चुके होंगे !!!
warna 10 saal me... 1crore to byaj me hi de denge...agar khareed lenge...
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warna 10 saal me... 1crore to byaj me hi de denge...agar khareed lenge...

नहीं बाजपेयी जी यह सब अमेरिकेन स्टाइल के हिसाब किताब में होता इंडियन स्टाइल में नहीं !!!
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For SELF USE / END USER purchasing own home is BEST OPTION.... No Maths + Mental Satisfaction can DENY it....

Let us say however it is possible to take Flat at RENT near to Office every time when IT job Changed ie change RENT home every time in Gurgaon / Noida / Delhi after few years as IT jobs mostly changed after every 2-3 years.... but let me know HOW It is possible to change good schools every time of KIDS. At this time Admission of KIDs in Good School is Costly & Very Tough Exercise....

Person can travel 1-2 Hr return drive daily (using Company CAB or Metro) for Job to Reach office but if family is living in their own home then his family / kids can enjoy much better life style with no tension of shift home after every 11 months or 2 years... , and no headache to admission kids in new good schools every time , no tension of changed neighbors for family/kids friends .......
LChand, Nilesh Dhore and Designer like this.
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Saurabh bhai...very well explained
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These news reporters portray as if Mr Deepak (of the above story) had both the options and he chose renting. The fact is that he didn't have enough means (or aukaat) to buy a flat.

Angoor khatte hain.
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Old 02-01-12   #9
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yes makaan khareedna will also be beneficial in case one needs to shift the city for new job .. one can try to sell off the existing house or if thats not possible then rent out the house and use the rental income to take a house on rent in the new city ..

fayeda hee fayeda !!
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Originally Posted by saurabh2011 View Post
For SELF USE / END USER purchasing own home is BEST OPTION.... No Maths + Mental Satisfaction can DENY it....

Let us say however it is possible to take Flat at RENT near to Office every time when IT job Changed ie change RENT home every time in Gurgaon / Noida / Delhi after few years as IT jobs mostly changed after every 2-3 years.... but let me know HOW It is possible to change good schools every time of KIDS. At this time Admission of KIDs in Good School is Costly & Very Tough Exercise....

Person can travel 1-2 Hr return drive daily (using Company CAB or Metro) for Job to Reach office but if family is living in their own home then his family / kids can enjoy much better life style with no tension of shift home after every 11 months or 2 years... , and no headache to admission kids in new good schools every time , no tension of changed neighbors for family/kids friends .......

एकदम सही लिखा है सौरभ भाई !

यह सब इधर से उधर फ्लैट बदलना और दुसरे के मकान में किराये पर बिना सामाजिक जिम्मेदारी के साथ रहना सिर्फ Bachelor लाइफ तक ही सिमित हो तो अच्छा है, एक शादी शुदा बीवी बच्चो वाले पारिवारिक इंसान के लिए नहीं !!!!
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