देश के छोटे शहरों में घरों की मांग बढ़ने से बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां अब इन शहरों की ओर आकर्षित हो रही हैं। भोपाल, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, इंदौर, जयपुर, लखनऊ, नागपुर, सूरत, वडोदरा और विशाखापत्तनम जैसे शहरों में अगले तीन वर्षों में 35.4 करोड़ वर्ग फुट रेजिडेंशियल डेवलपमेंट होने की उम्मीद है।

क्रिसिल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार डीएलएफ, यूनिटेक, पार्श्वनाथ, ओमैक्स, अंसल और एमजीएफ जैसे बडे़ बिल्डरों ने भविष्य में कारोबार में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए पहले ही इन शहरों में प्रोजेक्ट शुरू कर दिए हैं। इन शहरों में वृद्धि की काफी संभावनाएं हैं और 2011-12 में इनमें 18,000 करोड़ रुपए की बिक्री होने का अनुमान है।

ये शहर कीमतों में स्थिरता और वृद्धि की संभावनाओं की वजह से बड़े डिवेलपरों को आकर्षित कर रहे हैं। मेट्रो शहरों में घरों की कीमतों में पिछले दो वर्षों में जहां 25-30 फीसदी का उछाल आया है, वहीं छोटे शहरों में दाम केवल 10-12 फीसदी बढ़े हैं। क्रिसिल रिसर्च के हेड (इंडस्ट्री एंड कस्माइज्ड रिसर्च), प्रसाद कोपारकर ने कहा, 'ये बाजार रियल एस्टेट डेवलपरों को डायवसिर्फाइ करने के लिए स्थिर और कम उतार-चढ़ाव वाले विकल्प देंगे।'

रिसर्च में इन शहरों के 500 डिवेलपर को शामिल किया गया। इसमे कहा गया है कि अगर अगले कुछ महीनों में बड़े शहरों में कीमतों में बड़ी गिरावट आती है तो भी छोटे शहरों में दाम स्थिर रहेंगे या इनमे मामूली गिरावट आएगी।

रिपोर्ट में 10 में से 7 छोटे शहरों में कीमतें बढ़ने का अनुमान लगाया गया है जबकि 10 बड़े शहरों में से केवल 4 में दाम बढ़ने की बात है।

इन शहरों में आर्थिक गतिविधियां जोर पकड़ रही हैं और छोटे इलाकों से स्थानांतरण बढ़ने के साथ अपार्टमेंट की संस्कृति विकसित हो रही है। कोपारकर ने कहा, 'इससे भविष्य में बड़े डिवेलपरों के लिए वॉल्यूम बढ़ेगी।'

नई मांग को देखते हुए बैंक और वित्तीय संस्थान भी इन शहरों में अपना विस्तार कर रहे हैं। इस समय छोटे शहरों में होम लोन लेने वालों का अनुपात कम है। होम लोन की पहुंच बढ़ने के साथ ही मांग में भी इजाफा होगा।

छोटे शहरों में वृद्धि की संभावनाएं कई शहरों में मौजूदगी रखने वाले बड़े डिवेलपरों को आकर्षित कर रही हैं। अंसल एपीआई के असिस्टेंट वाइस-प्रेजिडेंट (इनवेस्टर्स रिलेशंस), दिनेश सी गुप्ता ने बताया, 'हमने टियर दो शहरों में मांग को पहले ही भांप लिया था और इनमें वृद्धि को लेकर निश्चित थे। आर्थिक वृद्धि अब केवल मेट्रो तक ही सीमित नहीं है। छोटे शहरों में भी क्रय शक्ति, उपभोग बढ़ने के साथ ही जीवनशैली में बदलाव हो रहे हैं। इससे छोटे शहरों में कारोबार बढ़ाने की हमारी रणनीति मजबूत हुई है।'

-navbharat times
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