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राष्ट्रीय राजधानी में एक अदद मकान का सपना संजोने वाले सभी तबके के लोगों के लिए अच्छी खबर है। डीडीए एक बार फिर सभी तबके के लिए फ्लैट्स बनाने में जुट गया है। जल्द ही डीडीए बड़ी तादाद में हाउसिंग स्कीम की घोषणा करने वाला है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण एक बार फिर सभी तबके के लिए फ्लैट्स बनाने में जुट गया है। जहां निम्न आय वर्ग के लिए 40 हजार से ज्यादा फ्लैट्स बनाए जा रहे हैं वहीं, नई हाउसिंग स्कीम के लिए 19 हजार से अधिक फ्लैट्स की घोषणा की बात की जा रही है। इनमें 4264 फ्लैट्स तैयार हो चुके हैं और 15857 फ्लैट्स पर अभी काम चल रहा है। जल्द ही डीडीए हाउसिंग स्कीम की घोषणा करने वाला है। इस साल के बजट में मकानों और दुकानों के निर्माण पर डीडीए 1377.85 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। डीडीए अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में 15 हजार से अधिक फ्लैट्स पर तेजी से काम चल रहा है। इनमें से एक चौथाई फ्लैट्स 31 मार्च तक तैयार कर लिए गए हैं। वित्त वर्ष 2010-11 का बजट पेश करते हुए बताया गया था कि 15857 मकान का निर्माण विभिन्न चरणों में है जिसमें 25 फीसदी फ्लैट्स 31 मार्च 2011 तक पूरे करने का लक्ष्य था जिसे करीब-करीब तैयार कर लिया गया है।
वहीं सिरसपुर में 4060 ईडब्ल्यूएस आवास जेएनएनयूआरएम योजना के अंतर्गत तैयार हो रहे हैं। 17,780 ईडब्ल्यूएस आवासीय इकाई नरेला, रोहिणी और द्वारका वगैरह में बनाए गए है। सूत्रों के अनुसार पिछले हाउसिंग स्कीम के सभी मकान पर आवंटियों को कब्जे मिलने के साथ ही अगली स्कीम की घोषणा कर दी जाएगी ।
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  • प्री-फेब तकनीक से बनेंगे मकान

    डीडीए के आवासीय फ्लैट अब फटाफट तैयार होंगे। आवासीय स्कीम में मकान देने में हुई देरी के बाद पहली बार नई तकनीक(प्री-फेब तकनीक) को अपनाया जाएगा। शुरुआत में इस तकनीक के जरिये दो एवं एक कमरे वाले फ्लैट का निर्माण किया जाएगा। बाद में इसे अन्य में भी अपनाया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि प्री-फेब तकनीक की मदद से मकान बनाने की लागत और समय दोनों में बचत होगी। इस तकनीक में मकान का खांचा कहीं और तैयार कर उसे निर्धारित जगह पर फिट कर दिया जाता है।

    अब तक डीडीए पहले से चली आ रही सीमेंट-गारे आदि भवन सामग्री का इस्तेमाल कर मकान का निर्माण करता रहा है। लेकिन 2010 आवासीय फ्लैट स्कीम में मकान के निर्माण में हुई देरी से सबक लेते हुए डीडीए पहली बार मकान बनाने के लिए प्री-फेब तकनीक को अपनाने में जुटा है। इसमें मकान को बनाने में अधिकतम दो से तीन माह तक का समय लगता है। जानकारों के अनुसार आमतौर पर अब तक धनाढय़ वर्ग फार्म हाउस में तथा पहाड़ी इलाके या अधिक बारिश वाले इलाके में ऐसे मकान तैयार किये जाते हैं। चूंकि इसके निर्माण में जितना कम समय लगता है उतना ही इसकी मरम्मत करने में कम खर्च भी आता है।
    डीडीए के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पहली बार इस तकनीक का प्रयोग डीडीए अपने आवासीय फ्लैट में करेगा। शुरुआत में दो व एक कमरे वाले फ्लैट में इसे प्रयोग के तौर पर अपनाया जाएगा। सफल रहने पर इसे अन्य श्रेणी में भी आजमाया जा सकता है। धन व समय की बचत को देखते हुए इस तकनीक को अपनाने पर विचार किया गया है।
    क्या है प्री-फेब तकनीक
    इस तकनीक में निर्धारित जगह के अनुपात में नेचुरल सीमेंट बोर्ड, लकड़ी व अन्य इको फ्रेंडली सामान का उपयोग करते हुए मकान का बाहरी व आंतरिक हिस्सा किसी अन्य स्थान पर तैयार किया जाता है। बाद में उसे निर्धारित स्थान पर लाकर फिट कर दिया जाता है। मजबूती, खर्च और समय सभी में यह उचित माना जाता है।

    क्या होंगी खूबियां
    -इको फ्रेंडली सामान से होगा तैयार
    -25-40 प्रतिशत तक होगी खर्च में बचत
    -उमस व गर्मी में देंगे राहत
    -आग व पानी के कारण होने वाली दिक्कत से भी मिलेगी लोगों को राहत

    -LiveHindustan
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