जिला नगर योजनाकार विभाग के डेवलपमेंट प्लान को एक बार फिर खतरा पैदा हो गया है। नहरपार डेवलप हो रहे सेक्टर्स के बीचोंबीच किसान अपनी जमीन पर मकान बना रहे हैं। यह खुलासा भूमि अर्जन कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा की गई वीडियोग्राफी में हुआ है। वीडियोग्राफी का पता लगते ही किसानों ने अपना विरोध दर्ज कराया है। प्लानिंग के तहत यहां सारी जमीन को सेक्टर्स के डेवलपमेंट के लिए सुरक्षित रखा हुआ है। हालांकि यह जमीन किसानों की है लेकिन यहां कंट्रोल एक्ट लागू है। इस एक्ट के अनुसार बिना परमिशन के कोई भी व्यक्ति खेत पर मकान नहीं बना सकता।


मुआवजे की लड़ाई
किसानों का कहना है कि दोहरे रवैये के कारण वे किसी भी हालत में यहां जमीन पर कब्जा नहीं लेने देंगे। सेक्टर-७५ व ८० को भी किसी हालत में विकसित नहीं होने दिया जाएगा। इसके अलावा यहां किसी भी नए सेक्टर की प्लानिंग को वे सफल नहीं होने देंगे। जब तब इन दोनों सेक्टर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन का उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी। इससे पहले भी कई बार कब्जा लेने आए हुडा के दस्ते को किसान खदेड़ चुके हैं और यदि यहां पर फिर से अधिकारी आए तो वे पीछे नहीं हटेंगे।
नहरपार किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शिवदत्त वशिष्ठ का कहना है कि यहां हुडा नए सेक्टर्स विकसित करने की योजना तैयार कर रहा है। इससे पहले बिल्डर्स ने किसानों को एक एकड़ के ढाई से तीन करोड़ रुपए दिए हैं लेकिन अब हुडा जबरन उनकी जमीन पर कब्जा कर रहा है और कौडिय़ों के भाव दे रहा है। इन सेक्टर्स के बीच में काफी जमीन ऐसी है जो न तो बिल्डर ने खरीदी और न ही हुडा ने इसका अधिग्रहण किया है। इसके अलावा सरकार द्वारा लाल डोरा न बढ़ाए जाने के कारण किसान अपने खेतों पर मकान बनाने पर मजबूर हैं।

Source: bhaskar.com
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  • Looks like Farmers are the king and no future for Buiders and customers ...

    Also Government is not doing any thing in Naharpar developmenent.

    Poor Customers are suffering the problems.
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