नोएडा एक्सटेंशन पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जीडीए अफसरों के भी होश उड़े हैं। जीडीए की मधुबन - बापूधाम कॉलोनी स्कीम की करीब 42 प्रतिशत जमीन पर विवाद है और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। विवाद के कारण कॉलोनी में पानी , बिजली , सड़क जैसी बेसिक फैसलिटी डिवेलप नहीं हो सकी है।

जबरन अधिग्रहण का आरोप
मधुबन - बापूधाम कॉलोनी के लिए जीडीए ने करीब 1200 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव वर्ष 2007 में तैयार किया था। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन को जीडीए ने भू अर्जन अधिनियम की धारा चार , छह के बाद 17 को लागू कर अधिग्रहीत कर ली गई। उनकी आपत्ति तक नहीं सुनी गई और मुआवजे का रेट 1100 रुपये प्रति वर्गमीटर तय कर दिया। बाद में कुछ प्रभावित किसानों को जमीन का करार भरवाकर उन्हें मुआवजा दे दिया गया। इसके बाद कई किसान जीडीए के खिलाफ कोर्ट चले गए। जीडीए के भू अर्जन अधिकारी ज्ञानेंद्र वर्मा के मुताबिक मधुबन - बापूधाम स्कीम की करीब 42 प्रतिशत जमीन पर विवाद है। कई केस हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

मधुबन - बापूधाम में कई स्कीम लॉन्च
जीडीए वर्ष 2009 से अब तक कई स्कीमों को लॉन्च कर चुका है। जीडीए ने जनवरी 2009 में 5024 ईडब्ल्यूएस फ्लैट , 500 एलआईजी , 1000 एमआईजी की स्कीम लॉन्च की थी। सितंबर 2009 में 300 प्लॉट की स्कीम निकाली , जनवरी 2010 में 619 एलआईजी फ्लैट स्कीम लॉंन्च की गई। फरवरी 2010 में विधायकों के लिए 272 प्लॉट की स्कीम लॉन्च की गई। दिसंबर 2010 में जीडीए ने मधुबन में 16 मंजिला टावर बनाने का ऐलान किया था।

आवंटियों को कब्जे का इंतजार
जीडीए के ओएसडी आर . पी . पांडे के मुताबिक जीडीए स्कीम में अब तक 7990 प्रॉपर्टी का आवंटन कर चुका है। जीडीए अभी तक किसी भी प्रॉपर्टी पर कब्जा नहीं दे पाया है। पांडे का कहना है कि विवाद के कारण पानी , बिजली , सड़क जैसी फैसिलिटी डिवेलप नहीं हो सकी है।

-navbharat times
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