यमुना पार बनेगा पिकनिक स्पॉट
29 Jul 2011, 0400 hrs IST

Google Maps - Route at Loni Road from Mohan Nagar GZB to Wazirabad (11.8 KM)

Navbharat Times - वजीराबाद सिग्नेचर ब्रिज दिसंबर 2013 में बनकर तैयार होगा, सिग्नेचर ब्रिज के नीचे 200 एकड़ में वॉटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

दिल्ली सरकार का टूरिस्ट डिपार्टमेंट पुराने वजीराबाद पुल के आसपास के इलाके का पूरा कायाकल्प कर रहा है। यमुना के ऊपर सिग्नेचर ब्रिज तो बनाया ही जा रहा है , साथ ही इसके पश्चिमी छोर ( तिमारपुर ) पर तिमारपुर की ओर ही गे्रड सेपरेटर भी बनाया जा रहा है। इस साल के अंत में गे्रड सेपरेटर शुरू हो जाएगा। यह सेपरेटर तिमारपुर , वजीराबाद और मुखर्जी नगर इंटरसेक्शन के ऊपर से निकल जाएगा। यमुनापार की तरफ की सड़कें भी चौड़ी कर दी जाएंगी और चौराहों का फैलाव कर दिया जाएगा। सिग्नेचर ब्रिज दिसंबर 2013 में बनकर तैयार हो जाएगा। पश्चिमी छोर पर सिग्नेचर ब्रिज के नीचे वॉटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा , जो दिल्ली का पहला ऐसा प्रोजेक्ट होगा जिसमें वह सभी खेल आयोजित किए जा सकेंगे , जो पानी से जुड़े हुए हैं। लेकिन बड़ा प्रोजेक्ट पूर्वी छोर पर बनेगा , जिसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा।

पूर्वी छोर पर सिग्नेचर ब्रिज के नीचे और आसपास करीब 200 एकड़ में टूरिस्ट डेस्टिनेशन पार्क बनाया जाएगा। यह साउथ दिल्ली के कालिंदी कुंज पार्क जैसा तो होगा , लेकिन उसके फीचर और रंगत राजधानी के दूसरे पार्कों से बिल्कुल अलग होगी। टूरिज्म डिपार्टमेंट के एक आला अधिकारी के अनुसार , यह खजूरी चौक से उस्मानपुर गांव के बीच की जमीन पर बनाया जाएगा। जैसे ही सिग्नेचर ब्रिज का काम पूरा हो जाएगा , इस पार्क को बनाने की कवायद शुरू कर दी जाएगी। विचार यह भी किया जा रहा है कि इस पार्क का नाम ' यमुना पार्क ' रखा जाए। चूंकि यह यमुना नदी के एकदम किनारे होगा , इसलिए यह यमुनापार के लोगों के अलावा पूरी दिल्ली के निवासियों को भी आकर्षित करेगा। यहां मेडिटेशन सेंटर , स्कल्पचर गार्डन , बर्ड वॉच टावर और बर्ड फीडिंग प्लेस , रॉक गार्डन , चिल्ड्रन प्ले पार्क , ओपन एयर ऑडिटोरियम , रिलेक्सेशन स्पेस , टी हाउस , फ्लावर गार्डन , फूड स्टॉल बनाए जाएंगे। रात में इस पार्क को जगमगाने के लिए विशेष लाइटिंग का प्रावधान भी रखा जाएगा , जो राजधानी में अभी तक किसी पार्क या अन्य स्थल पर नहीं हैं।

ओपन एयर ऑडिटोरियम
इस पार्क में बिल्कुल यमुना के मुहाने पर ओपन एयर ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा फिल्में भी दिखाई जाएंगी। प्रगति मैदान में ऐसे ऑडिटोरियम हैं और दिल्ली की सबसे ऊंची इमारत सिविक सेंटर में भी इसका निर्माण चल रहा है। लेकिन यह अपने आप में अनूठा होगा और इसका डिजाइन भी अलग तरह का होगा।

स्कल्पचर गार्डन
पार्क में दो अलग - अलग तरह के गार्डन बनाए जाएंगे। एक रॉक गार्डन होगा , जिसे पत्थरों के विशेष आकार और मुद्राओं से संवारा जाएगा। साथ ही स्कल्पचर गार्डन में पत्थरों से बनी विभिन्न प्रकार की मूर्तियों , ढांचों और आकारों को स्थापित किया जाएगा। राजधानी मंे कहीं - कहीं ऐसी मूर्तियां या पत्थर तो दिख जाएंगे लेकिन ऐसे गार्डन पहली बार बनेंगे।

बर्ड वॉच टावर
इस पार्क में एक ऐसा टावर बनाया जाएगा जिस पर चढ़कर लोग उड़ते या पार्क में घूमते पक्षियों को देख सकेंगे। पार्क में एक ऐसी जगह भी होगी जहां लोग पक्षियों को दाना खिला सकें। यह इसलिए बनाया जाएगा ताकि लोग एक स्थान पर कई पक्षियों को देख सकें।

टी हाउस और फूड स्टॉल
200 एकड़ में फैले इस पार्क में लोगों के लिए खाने - पीने का इंतजाम भी होगा। इसके लिए पार्क में टी हाउस और फूड स्टॉल भी बनाए जाएंगे जिससे वहां आकर लोग आराम कर सकें और कुछ खा - पी सकें। टी हाउस में हर्बल टी का खास इंतजाम किया जाएगा और फूड स्टॉल में फ्रेश फूड परोसा जाएगा।
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  • दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज, मेड इन चाइना
    नवभारत टाइम्स | Oct 6, 2012, 07.00AM IST

    नई दिल्ली ।। पिछले 8 सालों से चर्चा में यमुना पर बनने वाला सिग्नेचर ब्रिज मेड इन चाइना होगा। सिग्नेचर ब्रिज की पहचान के लिए बनाए जाने वाले 150 मीटर ऊंचे टावर का निर्माण इन दिनों चाइना में चल रहा है। यह टावर स्टील का होगा। कुछ सालों बाद दिल्ली की पहचान सिग्नेचर ब्रिज से भी होगी। दिल्ली सरकार के टूरिजम डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक , टावर के साथ - साथ यमुना पर बनने वाले पुल के लिए 250 मीटर लंबा स्पैन भी चाइना में ही बनाया जा रहा है। टावर और स्पैन को गुजरात के कांदला पोर्ट तक शिप में और वहां से बड़े ट्रकों में दिल्ली लाया जाएगा।

    टावर को वजीराबाद बैराज के सामने दो बड़े पिलरों पर खड़ा किया जाएगा। टावर को बांधने के लिए दो बड़े फाउंडेशन वेल बनाए जा रहे हैं। टावर का सारा बोझ ये ही फाउंडेशन वेल संभालेंगे। ये वेल एक - एक हजार टन के लोहे और कंकरीट भरकर बनाए जा रहे हैं। इनकी गहराई 39 मीटर तक रखी गई है। यमुना के इस इलाके में 39 मीटर नीचे जाने पर चट्टानी जमीन आ जाती है। इस जमीन पर ही इन फाउंडेशन को बनाया गया है। टावर के वायरों को इन फाउंडेशन वेल में बांधा जाएगा। टावर सीधे खड़ा न करके थोड़ा झुकाकर खड़े किए जाएंगे। इनकी लाइफ 100 मीटर तक बनाई जा रही है। सिग्नेचर ब्रिज के लिए वेस्ट और ईस्ट दो फ्लाईओवर कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं , जिनमें वजीराबाद चौक पर बनाया गया फ्लाईओवर तो शुरू कर दिया गया है , जबकि खजूरी खास पर फ्लाईओवर का काम चल रहा है। वजीराबाद चौक पर 1.5 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बनाया गया है , जबकि खजूरी खास में 850 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। इन फ्लाईओवर से सिग्नेचर ब्रिज के बनने के बाद इस एरिया की ट्रैफिक व्यवस्था और सूरत दोनों ही सुधर जाएगी।

    शुक्रवार को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी पी . के . त्रिपाठी ने मौके पर जाकर ब्रिज के निर्माण का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने आशा जताई कि जून , 2013 तक ब्रिज का काम पूरा कर लिया जाएगा और इसे दिसंबर , 2013 तक चालू कर दिया जाएगा। लेकिन ब्रिज के निर्माण की रफ्तार देखकर नहीं लगता कि यह तय तारीख तक पूरा हो पाएगा। पिछले 8 सालों में लगातार ब्रिज की तारीखें बदलती रही हैं। यही कारण है कि इसके निर्माण की लागत भी बढ़कर 4 गुना हो गई है। अब इसका खर्चा 1131 करोड़ बताया जा रहा है। पहले इसके निर्माण की तारीख दिसंबर , 2011 तय की गई थी।
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