Another Flat scheme in Sidharth Vihar (NH-24)
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  • Originally Posted by shah_techno
    if the amount decreases by 30-40% , only then I am interested..

    warna awas vikas ko :bab (59):


    Perhaps awas vikas was not aware that Mr. "Shah_Techno" was also interested else they would have launched it 30-40% lesser amount....:bab (59):
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  • किसानों ने रुकवा दिया सिद्धार्थ विहार का काम


    विजयनगर। मुआवजे से नाराज किसानों ने आवास विकास की सिद्धार्थ विहार का चार स्थानों पर कार्य रुकवाकर हंगामा किया। दो दिन से चल रहे आंदोलन को अब अनिश्चित कालीन धरने में बदल दिया गया है। किसानों और जिला प्रशासन के बीच हुई दो चरणों की वार्ता में रविवार को कोई हल नहीं निकल सका।
    महानगर के प्रतापविहार में आवास विकास परिषद कार्यालय के सामने किसान कई दिन से आंदोलन पर हैं। कैला, मिर्जापुर, अकबरपुर, बहरामपुर और मिट्ठेपुर के सैकड़ों किसान मुआवजा राशि का विरोध कर रहे हैं।
    किसान संघर्ष समिति के बैनर तले धरनारत किसानों की समस्याओं को जिला प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया तो रविवार को किसान भड़क उठे। कई ट्रैक्टर-ट्रालियों में लाठी-डंडों से लैस किसानों ने आवास विकास परिषद का चार स्थानों पर चल रहा कार्य रुकवा दिया। किसानों ने अब अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी है।

    किसान संघर्ष समिति मुआवजे से ज्यादा सम्मान की लड़ाई लड़ रही है। धरने का नेतृत्व कर रहे अजीत बैसला ने कहा कि आवास विकास को वर्ष 2006 में भू अधिग्रहण के दौरान प्रशासन ने 800 रुपये मीटर का मुआवजा तय किया था। इस सिद्धार्थ विहार योजना के लिए 703 एकड़ जमीन अधिग्रहण की जानी थी। इसमें से 325 बीघा जमीन पर विवाद है। मात्र 35-40 किसानों ने भूमि अधिग्रहण मंजूर किया था। जबकि 2006 में ही दिल्ली-सहारनपुर योजना के लिए 1100 रुपये मीटर का मुआवजा दिया गया। इसी साल जीडीए ने मधुबन बापूधाम के लिए 1100 रुपये का मुआवजा दिया। आविप ने संतोष मेडिकल कालेज की जमीन अधिग्रहण सूची में रखने के बाद वापस कर दी। कालेज प्रशासन ने वर्ष 2006 में ही चड्ढा ग्रुप को 4200 रुपये मीटर के रेट पर जमीन बेच दी। उस समय किसान सर्किल रेट के मुआवजे, 10 फीसदी आवासीय भूखंड और एक व्यवसायिक भूखंड की मांग कर रहे थे। आवि ने 22 मंजिला फ्लैट बनाकर तैयार किए हैं, जिनमें सिंगिल बेडरूप का फ्लैट 27 लाख रुपये का है। किसान 4200 रुपये मीटर मुआवजा, पांच फीसदी आवासीय भूखंड देने, इसका 50 फीसदी भूखंड 18 मीटर वाले मार्ग किनारे देने, एक व्यावसायिक भूखंड देने, आवासीय भूखंड में भी व्यावसायिक स्वीकृति देने और आवासीय-व्यावसायिक भूखंड की रजिस्ट्री सौ रुपये के स्टांप पर करने की मांग कर रहे हैं। दो दिन बाद अनिश्चित कालीन धरने में बदला आंदोलन
    प्रशासन केसाथ हुई वार्ता में नहीं निकला हल
    मुआवजे से ज्यादा भेदभाव से हैं नाराज

    -amar ujala
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  • आवास विकास और किसानों के बीच वार्ता विफल
    नाराज किसानों ने मांगें पूरी होने तक निर्माण कार्य रोकने का ऐलान किया
    गाजियाबाद। सिद्धार्थ विहार योजना के प्रभावित किसानों और आवास विकास परिषद के बीच विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा। एक बार फिर सोमवार को किसान प्रतिनिधि मंडल और आवास विकास परिषद के अधिकारियों के बीच वार्ता विफल हो गई। नाराज किसानों ने मांगे न मानने तक निर्माण कार्य रोके रखना का ऐलान किया है।

    मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर मिर्जापुर, मिट्ठेपुर, अकबरपुर बहरामपुर और कैला गांवों के किसान चार दिन से प्रताप विहार स्थित आवास विकास के साइट ऑफिस पर प्रदर्शन कर रहे है। आविप के रुख से नाराज किसानों ने रविवार को योजना का काम रुकवा दिया था। सोमवार को किसानों से बात करने के लिए उप आवास आयुक्त एसबी सिंह, अधीक्षण अभियंता ज्ञानेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता एसके श्रीवास्तव और ललता प्रसाद पहुंचे। एक घंटे से अधिक समय तक आविप अफसरों और किसानों के बीच वार्ता चली। बावजूद इसके नतीजा नहीं निकल सका। किसान नेता अजीत बैसला ने बताया कि आवास विकास परिषद के अधिक ारी 11 सौ रुपये से अधिक मुआवजा देने को तैयार नहीं हैं जबकि हम42 सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर से कम मुआवजा नहीं लेंगे। मंगलवार को फिर आवास विकास परिषद अधिकारियों के साथ वार्ता होगी।
    -amar ujala
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  • आश्वासन पर किसानों ने धरना समाप्त किया


    मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गुरुवार को आवास विकास परिषद की दिल्ली बुलंदशहर आवासीय योजना के लिए अधिग्रहित की गई भूमि पर ट्रैक्टर चलाए। परिषद के उप-आवास आयुक्त विमल कुमार किसानों से बातचीत के लिए पहुंचे। किसानों ने अधिकारियों के आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया।

    धरने मंे शामिल किसान नेता अजित बैंसला का कहना है कि मुआवजे को लेकर अधिकारियों ने चुनाव के बाद स्थायी समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा कई मांगों पर सहमति बन गई है, जिसमें 12 प्रतिशत आवासीय जमीन देने, 18 मीटर से चौड़ी सड़क पर प्लॉट देने तथा 15 व 25 मीटर के व्यावसायिक भूखंड देने जैसी बात शामिल हैं। गौरतलब है कि परिषद ने 1998 में दिल्ली बुलंदशहर आवासीय योजना के तहत किसानों की जमीनें अधिग्रहित कर ली थी। किसानों का आरोप है कि जिन शर्तों पर जमीनें ली गई थीं, उन नियम शर्तों को पूरा नहीं किया गया था। किसान लंबे समय से इस पर संघर्ष कर रहे थे। मुआवजे को लेकर हल न निकल पाने से निराश किसानों ने प्रताप विहार मंे परिषद की अधिग्रहत जमीन पर धरना शुरू कर दिया। किसान नेता बैंसला ने बताया कि उप-आयुक्त से मुआवजे की मांग पर बातचीत हुई पर इस मसले पर चुनाव आचार संहिता के चलते कोई फैसला नहीं हो सका। विमल कुमार ने चुनाव समाप्त होने के बाद ही इस मंाग पर किसी तरह के फैसले लेने की बात कही। इस बातचीत में हरीश, ओमप्रकाश चौधरी, हरिराम यादव आदि मौजूद रहे।


    -nb times
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  • आयुक्त के आश्वासन पर ही माने किसान

    वसुंधरा/गाजियाबाद। मांगें न माने जाने के विरोध में सिद्वार्थ विहार योजना का काम रुकवाने वाले किसानों का धरना बृहस्पतिवार को समाप्त हो गया। उप आवास आयुक्त ने किसानों से वार्ता की। उनके मौखिक आश्वासन के बाद किसानों ने परिषद को दो माह का समय दिया है। चुनाव के बाद अगर मांगें नहीं मानी गईं तो धरना फिर शुरू होगा।
    मुआवजा बढ़ाने और अन्य मांगों को लेकर किसान 23 दिसंबर से आवास विकास की सिद्वार्थ विहार योजना पर धरने पर बैठे थे। किसानों ने योजना का काम रुकवा दिया था। परिषद के अधिकारियों का दल बृहस्पतिवार को भी किसानों से मिलने पहुंचा। आयुक्त विमल शर्मा ने किसानों की मांगें सुनीं। आचार संहिता लागू होने के चलते उन्होंने किसी भी लिखित आश्वासन अथवा वायदे से इंकार कर दिया। हालांकि किसानों की बात सुनते हुए उन्होंने चुनाव खत्म होने तक का समय मांगा। उन्होंने ज्यादातर मांगों पर मौखिक सहमति जताई। इसके बाद किसान धरना-अनशन खत्म करने को तैयार हो गए। किसानों ने अपना धरना खत्म करने के साथ ही अनशन खोला। इससे पहले सुबह किसानों ने योजना की जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर जुताई की और यहां खेती करने की चेतावनी परिषद को दी।

    सिद्वार्थ विहार के किसानों ने परिषद को दिया दो माह का समय

    -Amar Ujala
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  • if i am not wrong this project is just behind antriksh sanskriti project and over there rates are very low
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  • लोनी प्रोेजेक्ट पर किसानों से मीटिंग अगले हफ्ते


    वसुंधरा

    लोनी हाउसिंग स्कीम में मुआवजे की अड़चन खत्म करने के लिए अगले हफ्ते आवास-विकास परिषद की किसानों के साथ मीटिंग होगी। परिषद के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर नरसिंह प्रसाद ने कहा कि इस बार मीटिंग में कोई फैसला कर लिया जाएगा। कोशिश की जा रही है कि मीटिंग में जिला प्रशासन के सीनियर अफसर मौजूद रहें, ताकि फैसले लेने में कोई दिक्कत न हो। किसानों की तरफ से भी सकारात्मक रुख दिख रहा है, जिसे मीटिंग में कामयाबी की उम्मीद की जा सकती है।

    परिषद जिस तेजी से प्रताप विहार और दिल्ली-सहारनपुर स्कीम पर काम कर रहा है, उसके मुकाबले लोनी गृहस्थ योजना काफी स्लो चल रही है। इसकी बड़ी वजह मुआवजे पर किसानों का विरोध है। बीते एक साल से किसानों से सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। कुछ मीटिंग भी हुईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं आ सका। इससे नाराज किसानों ने मीटिंग में आना बंद कर दिया। हालांकि परिषद और किसानों में संपर्क बना रहा। लंबा वक्त गुजरने के बाद अब अगले हफ्ते मीटिंग करने का फैसला किया गया है। एसई नरसिंह प्रसाद ने बताया कि किसानों से बातचीत हो रही है। उनकी सहूलियत के हिसाब से अगले हफ्ते मीटिंग बुलाई जाएगी।

    -nbt
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  • अब 18 लाख रुपये में मिलेगा फ्लैट
    अमर उजाला ब्यूरो
    गाजियाबाद। सिद्धार्थ विहार योजना में सस्ते फ्लैट लेने की चाह रखने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। लोगों को अब बहुमंजिला इमारतों में भी सस्ता फ्लैट मिल सकेगा।

    एक बार फ्लॉप हो चुकी योजना को हिट करने के लिए आवास विकास परिषद इसके रेट बेहद कम करने जा रहा है। नए प्रस्ताव में योजना में वन बीएचके का रेट 18 लाख रुपये होगा। एलएनटी के सर्वे के बाद प्रस्ताव लखनऊ भेजा गया है, जहां से मुहर लगने के बाद इसे रीलांच किया जाएगा।

    एक दिसंबर को लांच हुई योजना में करीब 1400 फ्लैट के लिए आवेदन मांगे गए थे। फ्लैट महंगे होने के चलते बमुश्किल 500 आवेदन ही परिषद को प्राप्त हो सके। इसके बाद योजना को रीलांच करने का निर्णय लिया गया था। इससे पहले दावा किया जा रहा था कि कीमत 2-3 लाख रुपये घटाई जाएगी।

    पिछले दिनों निर्माण एजेंसी एलएंडटी के इंजीनियर ने साइट सर्वे किया था। इसके बाद से फ्लैट का दाम 8 लाख से 20 लाख रुपये तक कम करने की तैयारी है। परिषद भले ही रेट घटा रहा हो मगर अब लोगों को पहले की तुलना में छोटा फ्लैट मिलेगा।
    26 की जगह 18 लाख किया फ्लैट का मूल्य
    60 की जगह 35 वर्गमीटर का वनबीएचके
    94 की जगह 65 वर्गमीटर का टूबीएचके
    127की जगह 80 वर्गमीटर का ही थ्रीबीएचके
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  • परिषद ऑफिस पर किसानों का प्रदर्शन


    प्रताप विहार :
    सिद्धार्थ विहार हाउसिंग स्कीम ने किसानों की टेंशन बढ़ा दी है। रविवार को काफी संख्या में किसानों ने परिषद के साइट ऑफिस पर प्रदर्शन किया। उन्होंने 4200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन के मुआवजे और ग्रेनो की तरह रेजिडेंशल और कमर्शल प्लॉट्स की मांग की है। चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गई तो परिषद को काम नहीं करने देंगे।

    किसान संघर्ष समिति के बैनर तले हुए प्रदर्शन में कैला, मिर्जापुर, मिट्ठेपुर और अकबरपुर-बहरामपुर गांव के लोग शामिल थे। उन्होंने बताया कि जमीन का मुआवजा 4200 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से चाहिए। 5 पर्सेंट डिवेलप्ड जमीन दी जाए। इसमें 50 पर्सेंट जमीन कमर्शल यूज के लिए होनी चाहिए। रेजिडेंशल प्लॉट 15-25 मीटर चौड़ी रोड पर होने चाहिए। किसानों को 100 रुपये के स्टैंप शुल्क पर जमीन की रजिस्ट्री की छूट होनी चाहिए। प्लॉट की कीमत किसानों को दिए गए प्रतिकर के हिसाब से होनी चाहिए। चेतावनी दी कि जल्द फैसला नहीं किया गया तो महापंचायत कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। काम भी ठप कराएंगे। प्रदर्शन करने वालो में अजीत बैंसला, प्रताप यादव, हरिराम यादव, हरिकिशन, दयाराम, नरेश यादव, अब्बास अली आदि किसान थे।

    _navbharat times
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  • गुजरात से लाया जाएगा सस्ते मकान का कॉन्सेप्ट


    गाजियाबाद।। कम आय वाले लोगों को भी अपने मकान का सपना पूरा होने वाला है। इसके लिए सस्ते मकान के कॉन्सेप्ट पर जीडीए दो महीने से काम कर रहा है। सस्ते मकान के कॉन्सेप्ट पर पहले पूणे की एक कंपनी अपना प्रजेंटेशन दे चुकी है। अब गुजरात से सस्ते मकान का कॉन्सेप्ट लाया जाएगा। जीडीए वीसी संतोष कुमार यादव और चीफ इंजीनियर डी . आर . यादव गुजरात में बने सस्ते मकानों को देखने के लिए गए है। जीडीए वीसी सस्ते मकानों का मॉडल देखेंगे और सस्ते मकान बनाने के गुर भी गुजरात से सीखेंगे। देश में सस्ते मकानों का सबसे बड़ा सेक्टर गुजरात के अहमदाबाद में प्रयोग किया गया है। गुजरात सरकार के इस प्रयोग को जीडीए वीसी और इंजीनियरिंग विभाग बारीकी से समझना चाहता है।

    50 एकड़ जमीन में बनेंगे सस्ते मकान
    जीडीए के वीसी ने गाजियाबाद सिटी में सस्ते मकान बनाने के लिए नगर निगम से करीब 50 एकड़ जमीन की डिमांड की थी। नगर निगम ने नूर नगर सिंहानी और अकबरपुर बहरामपुर के पास करीब 50 एकड़ जमीन जीडीए को दे भी दी है।

    10 लाख से कम में मकान देने का प्लान
    जीडीए वीसी संतोष कुमार यादव का प्लान है कि गाजियाबाद सिटी में जहां महंगी जमीन है वहां लोगों को सस्ते ( दस लाख रुपये से कम में ) मकान बनाकर दिए जाएं। इसका सबसे बड़ा फायदा ऐसे लोगों को होगा जिनके पास पैसा कम है और सिटी में उन्हें मकान की जरूरत है। जीडीए खुद भी सस्ते मकान बनाएगा और निजी क्षेत्र की रीयल ऐस्टेट कंपनियों को इस प्लान के तहत सस्ते मकान बनाने के लिए एफएआर ( फ्लोर एरिया रेश्यो ) में भी कुछ छूट देने का प्लान तैयार किया है।

    -nbt
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  • फिर आ सकता है मुआवजे का भूत


    वसुंधरा
    सिद्धार्थ विहार हाउसिंग स्कीम पर आवास-विकास परिषद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। स्कीम के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के मुआवजे से किसान नाखुश हैं। किसान संघर्ष समिति के संयोजक अजीत बैंसला का कहना है कि कोयल एनक्लेव के लिए किसानों को जीडीए 1390 रुपये प्रति वर्ग मीटर के रेट से मुआवजा दे रहा है, जबकि सिद्धार्थ विहार के लिए 800 रुपये का रेट है। कुछ दिन पहले किसानों ने इस बारे में परिषद के कमिश्नर पी. वी. जगनमोहन से मुलाकात की। इसमें उन्हें अनदेखी नहीं करने का आश्वासन मिला है। किसानों ने मांग पूरी न होने पर काम न होने देने की चेतावनी दी है।
    आवास-विकास परिषद ने दिसंबर-2011 में सिद्धार्थ विहार हाउसिंग स्कीम लॉन्च की थी। मुआवजे पर किसानों के विरोध के मद्देनजर यहां काम रोक दिया गया था। किसानों-परिषद की कई दौर की मीटिंग के बाद परिषद मांगें मानने को तैयार हो गया, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। बैंसला ने बताया कि कोयल एनक्लेव के लिए जीडीए ने 1991 में जमीन अधिग्रहीत की थी, जबकि सिद्धार्थ विहार के लिए 1998 में जमीन अधिग्रहण हुआ था। उनका कहना है कि किसान को अधिग्रहीत जमीन का 15 पर्सेंट हिस्सा मिलना चाहिए, ताकि वे परिवार पाल सकें। उन्होंने बताया कि अभी भी कई किसानों ने मुआवजा नहीं उठाया है। परिषद के अधिकारी जल्द से जल्द मसले के हल में जुटे हैं। स्कीम से जुड़े अफसरों का कहना है कि मुआवजे की राशि डीएम लेवल से जुड़ा फैसला है। इसके लिए बातचीत चल रही है।


    nbt
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  • किसानों ने सिद्धार्थ विहार में रुकवाया काम


    प्रताप विहार में अधिगृहित भूमि के प्रभावित किसानों ने मुआवजे की राशि को लेकर गुरुवार को सर्कल के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर नरसिंह प्रसाद का घेराव किया और सिद्धार्थ विहार में चल रहे काम को रुकवा दिया। किसानों ने वहां बने साइट ऑफिस पर तालाबंदी कर दी।

    वसुंधरा स्थित सर्कल ऑफिस में करीब दो घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही। किसानों ने मुआवजे की मांग कर अपने विरोध में सर्कल ऑफिस में तालाबंदी की धमकी भी दी। किसान इस बात पर अड़े हुए थे कि उन्हें आश्वासन नहीं , फैसला चाहिए। उनकी शिकायत थी कि कमिश्नर डॉ . पी . वी . जगनमोहन ने एक हफ्ते के अंदर यहां आकर मिलने का समय दिया था , इसके बावजूद वह नहीं आए। एसई ने किसानों को किसी तरह समझा - बुझाकर दस दिन का समय मांगा।

    किसान संघर्ष समिति के संयोजक अजीत बैसला ने कहा कि जब तक मुआवजा घोषित नहीं हो जाता है तब तक सिद्धार्थ विहार में किसान काम नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि किसान शांति पूर्वक तरीके से ही विरोध जारी रखेंेगे। हालांकि उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि परिषद के रुख से नाराज किसानों ने सिद्धार्थ विहार मंे चल रहे काम को रुकवा दिया है। वहां बने साइट ऑफिस पर तालाबंदी कर दी गई है।


    आवास विकास परिषद ने सिद्धार्थ विहार में दिसंबर में अब तक की सबसे हाईटेक योजना लॉन्च की थी। यहां बनने वाली इमारतें मल्टीस्टोरी हैं। योजना के लॉन्च होते ही किसानों ने साइट पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। किसानों क मांगथी कि उनका मुआवजा बढ़ाया जाए। किसानों और परिषद के अधिकारियों के साथ हुई कई दौर की बैठक के बाद परिषद कई मांगों को मानने के लिए तैयार हो गया। अब तक इस पर फैसला नहीं होने से किसान गुस्से में है।

    nbt
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