good news for people travelling arnd meerut to bulandshaher.. A step fwd
एनएच-235 फोर लेन पर हुई लोक सुनवाई

Story Update : Thursday, April 19, 2012 12:09 AM
बुलंदशहर। एनएच-235 (मेरठ-बुलंदशहर मार्ग) को फोर लेन करने की भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की पहल पर लोगों से भी राय ली गई। योजना में आम जनता की पर्यावरण को लेकर क्या राय है, इसके लिए लोक सुनवाई हुई। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है।
लोक सुनवाई गुलावठी क्षेत्र की बराल पुलिस चौकी में मंगलवार की रात एडीएम प्रशासन दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में की गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने लोक सुनवाई के दौरान मौजूद लोगों को केंद्र वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधिनियमों की जानकारी दी।
नत्थूगढ़ी गांव के रूपवन सिंह ने कहा कि योजना में सड़क के किनारे चकरोड और जो फसल प्रभावित होंगी उसका क्या समाधान होगा। एनएचएआई के डीजीएम ज्ञान गुप्ता ने बताया कि रास्ते में आने वाले चक रोड़ों का ध्यान रखा जाएगा। किसानों की फसल की हुई हानि का मुआवजा दिया जाएगा। गांव हर्चना के विनोद पंडित ने छोटे नाले, आम के पेड़, ट्यूबवैल एवं जमीन के योजना में आने के बारे में पूछा। स्काट विल्सन इंडिया के कंसलटेंट विनोद कुमार गौतम ने बताया कि नालों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। अधिसूचना के अनुसार खेती से 60 मीटर एवं आबादी से 45 मीटर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। फलदार वृक्षों का मूल्याकंन उद्यान विभाग, बिना फलदार वृक्षों का मूल्याकंन वन विभाग, ट्यूबवैल का मूल्याकंन नलकूप विभाग एवं जमीन का मूल्याकंन राजस्व विभाग करेगा। उसके आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। नितिन त्यागी, सरफराज, लोकेंद्र सिंह, विकास आदि ने भी सवाल पूछे । एडीएम प्रशासन दिग्विजय सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण परियोजना में पर्यावरण संरक्षण और नियंत्रण के लिए सूझबूझ से काम करना है। उन्होंने बताया कि एनएच-235 के लिए सभी अधिकारियों के साथ आम जनता से राय ली गई है।
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  • सुगम होगा नोएडा से ग्रेनो का सफर
    Updated on: Sat, 21 Apr 2012 01:04 AM (IST)

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    सुगम होगा नोएडा से ग्रेनो का सफर

    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : नोएडा व ग्रेटर नोएडा की बेहतर परिवहन व्यवस्था को लेकर स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) कंपनी का गठन किया जाएगा। कंपनी दोनों शहरों के परिवहन व्यवस्था का संचालन करेगी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण व यूपीएसआरटी के अधिकारियों के बीच शुक्रवार को बैठक हुई, जिसमें परिवहन संचालन को लेकर कई मुद्दों पर सहमति बनी है। बैठक की अध्यक्षता परिवहन आयुक्त व उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटी) के प्रबंध निदेशक आलोक कुमार ने की।

    प्राधिकरण के चेयरमैन व मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमण ने बताया कि नोएडा व ग्रेटर नोएडा की आंतरिक परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए कई वर्षों से कवायद चल रही है। इसको अमलीजामा पहनाए जाने पर शुक्रवार यूपीएसआरटीसी के साथ सहमति बन गई है। उन्होंने बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण यूपीएसआरटीसी के साथ मिलकर एसपीवी कंपनी का गठन करेंगे। कंपनी में दस फीसदी अंशदान यूपीएसआरटीसी का होगा, नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 45-45 फीसदी हिस्सेदारी होगी। कंपनी की शुरुआत दस करोड़ रुपये से की जाएगी। कंपनी के नफा नुकसान में हिस्सेदारी के हिसाब से भागीदारी होगी। यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण का कोई अंशदान नहीं होगा। हालांकि, बसों का संचालन यमुना क्षेत्र में भी किया जाएगा।

    चेयरमैन ने बताया कि कंपनी गठन की प्रक्रिया पर मई तक काम पूरा हो जाएगा। दोनों शहर में आंतरिक बसें चलाने के लिए हर सेक्टर का प्वाइंट चिन्हित किया जाएगा। बसें जीपीआरएस सिस्टम से लैस होगी, जिससे डिपो में बैठे अधिकारियों को बसों का लोकेशन पता चलता रहेगा। बस स्टैंड भी जीपीआरएस सिस्टम में जुड़े रहेंगे। स्टैंड पर डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाएगा, जिससे यात्रियों का पता रहेगा कि बस कितनी देर में आने वाली है। उन्होंने बताया कि दोनों शहरों में अभी तक दोनों प्राधिकरण ने बसें खरीद कर रोडवेज को संचालन के लिए दिया है। इसके लिए ट्रैफिक सेल का गठन किया गया है। रोडवेज बसें चार करोड़ रुपये के घाटे में चल रही हैं। बैठक में घाटे से उबरने पर चर्चा हुई, जिस पर सहमति बनी कि चार करोड़ रुपये के घाटे को नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण मिलकर वहन करेंगे। बैठक में नोएडा प्राधिकरण के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी सीबी सिंह, मुख्य परियोजना अभियंता संतराम, वरिष्ठ नगर नियोजन राजपाल कौशिक, ट्रैफिक सेल अध्यक्ष संदीप चंद्रा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखिलेश सिंह, महाप्रबंधक परियोजना एसएसए रिजवी, महाप्रबंधक अर्बन आरके देव भी मौजूद थे।

    ग्रेनो में होगा एआरटीओ

    ग्रेटर नोएडा, सं : ग्रेटर नोएडा व आसपास देहात क्षेत्र के लोगों को अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए नोएडा एआरटीओ का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। ग्रेटर नोएडा में भी एआरटीओ खोलने पर सहमति बन गई है। शुक्रवार को प्रदेश के परिवहन आयुक्त आलोक कुमार ने ग्रेटर नोएडा में भी एआरटीओ कार्यालय खोलने को हरी झंडी दे दी है। एआरटीओ कार्यालय के लिए भवन देने को भी प्राधिकरण तैयार हो गया है। कासना स्थित रोडवेज डिपो परिसर के अंदर एआरटीओ का कार्यालय होगा। ग्रेटर नोएडा, दादरी, जेवर, दनकौर आसपास क्षेत्र के लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस व गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए नोएडा एआरटीओ कार्यालय तक चक्कर लगाना पड़ता है। नोएडा जाने पर लोगों का पूरा दिन बर्बाद हो जाता है। प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण ने बताया कि लोगों की समस्या को देखते हुए ग्रेटर नोएडा में एआरटीओ कार्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि मई तक कार्यालय चालू हो जाएगा।

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  • शहर में बनेगा एनसीआर का सबसे अत्याधुनिक बस डिपो
    Updated on: Sat, 21 Apr 2012 01:04 AM (IST)


    शहर में बनेगा एनसीआर का सबसे अत्याधुनिक बस डिपो

    नोएडा, संवाददाता : शहर में विश्वस्तरीय अंतरराज्यीय बस डिपो बनाने का रास्ता साफ हो गया है। डिपो के अत्याधुनिक मॉडल को मंजूरी देते हुए रोडवेज ने भी जमीन प्राधिकरण को वापस करने पर सहमति दे दी है। इस संबंध में शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अहम बैठक हुई। बैठक में नोएडा बस डिपो के प्रयोग और उसमें रोडवेज की भूमिका का निर्धारण कर दिया गया है।

    नोएडा के सेक्टर 34 में बने एकमात्र मोरना बस डिपो को अत्याधुनिक करने की कवायद लंबे समय से चल रही है। प्राधिकरण रोडवेज से यह जमीन वापस लेकर उस पर स्वयं बस डिपो विकसित करना चाहता है। फिलहाल यह जमीन उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) के पास लीज के तहत है। पूर्व में हुई बैठक और पत्राचार में रोडवेज ने बस अड्डे की बेशकीमती जमीन प्राधिकरण को सौंपने से इंकार कर दिया था। शुक्रवार को हुई बैठक में शामिल रोडवेज के अधिकारियों ने विश्वस्तरीय बस अड्डे के निर्माण के लिए जमीन प्राधिकरण को सौंपने पर सहमति प्रदान कर दी है।

    अब प्राधिकरण की योजना है कि बस डिपो की 34 हजार वर्गमीटर भूमि पर विश्वस्तरीय और एनसीआर का सबसे अत्याधुनिक बस डिपो तैयार किया जाए। नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ परियोजना अभियंता और ट्रैफिक सेल के अध्यक्ष संदीप चंद्रा ने बताया कि डिपो की इमारत बहुमंजिला होगी। इसके बेसमेंट में रोडवेज का वर्कशॉप होगा। भूतल पर रोडवेज बसों का संचालन किया जाएगा। इसके ऊपर चार या पांच मंजिल होगी, जिसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए विकसित किया जाएगा। मंजिलों की संख्या एफएआर के अनुसार निर्धारित की जानी है। भूतल के ऊपर जो व्यावसायिक जगह विकसित की जाएगी, उसे बेचकर प्राधिकरण डिपो के निर्माण का खर्च निकालेगा। व्यावसायिक जगह बेचने से जो लाभ होगा, उसका कुछ हिस्सा रोडवेज को भी दिया जाएगा। इसके लिए अहमदाबाद के बस डिपो का अध्ययन करने पर सहमति बनी है। जल्द ही कुछ अधिकारियों की टीम अहमदाबाद बस डिपो को देखने जाएगी। अत्याधुनिक डिपो में आम आदमी की जरूरत की सभी सुविधाएं होगी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। इसके निर्माण के लिए फिलहाल बजट निर्धारित नहीं किया गया है। बस अड्डे का नक्शा विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराया जाएगा। इसके लिए हो सकता है तकनीकी कंसल्टेंट भी नियुक्त किया जाए, जिसकी देखरेख में डिपो का निर्माण कार्य होगा।

    ज्ञात हो कि वर्तमान में मोरना बस डिपो की हालत बेहद दयनीय है। यहां यात्रियों के बैठने तक की सुविधा नहीं है। यात्रियों के लिए यहां न तो चुस्त-दुरुस्त शौचालय हैं और न ही पीने के पानी की व्यवस्था। बदहाली का आलम यह है कि डिपो से दिन भर उड़ने वाली धूल आसपास रहने वालों का भी जीना मुहाल किए हुए है। फिलहाल यहां से एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ नजदीकी इलाकों में ही बसों का संचालन होता है। नजदीक में सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन बनने के बाद से यहां से बसों का संचालन दूर-दराज के क्षेत्रों में भी करने की मांग उठने लगी है।
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  • IGI airport adjudged world's most improved airport
    PTI | Apr 21, 2012, 08.59PM IST
    NEW DELHI: The IGI airport has been adjudged the world's most improved airport as well as the number one airport in India by SKYTRAX-World Airport Awards.

    The Indira Gandhi International Airport took the top honours in 'Most Improved' category for this year leaving Ankara Esenboga airport at second spot, Chongqing Jiangbei International Airport at third, Sydney Airport at fourth and Recife International Airport at fifth place at the recently concluded 'SKYTRAX - World Airport Awards' in Vienna.

    "In the 'India's Best Airport' category, Delhi airport topped the chart after relegating Bangalore International Airport to second spot. Hyderabad's Rajiv Gandhi International Airport, also run by GMR Group, came at the third spot," a DIAL spokesperson said.

    Chhatrapati Shivaji International Airport in Mumbai was adjudged fourth, while Chennai International Airport secured the fifth place for airports in the sub-continent.

    "These awards speak volumes of our high service standards at IGIA. We are immensely proud of receiving these awards from SKYTRAX. Both these awards are a tribute to all those who have been a part of modernisation and operationalisation of Delhi airport," CEO of DIAL, I Prabhakara Rao said after receiving the award.

    The World Airport Awards are prestigious recognition for airports across the world, based on the annual SKYTRAX airport passenger satisfaction survey conducted at more than 388 airports world-wide.

    "The awards are global benchmark of airport excellence and quality ranking. 100 different nationalities of passengers evaluates their experiences across 39 different airport service and product factors - from check-in, arrivals, transfers, shopping, security and immigration through to departure at the gate during the nine month survey period in 2011-12," the spokesperson said.

    "Coinciding with the opening of the new Terminal 3, there has been a significant improvement in product standards for passengers travelling into Delhi International Airport. The enhanced air-side transit service, and better shopping and dining options has really improved the passenger experience and Delhi airport now provides a most competitive international standard," Chairman of SKYTRAX, Edward Plaisted said.
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  • एक्सप्रेस-वे : मिस प्लानिंग लगाएगी स्पीड पर ब्रेक
    May 2, 2012, 09.00AM IST

    आशीष दुबे॥ नोएडा : स्पीड का मजा लेकर महज दो घंटे में आगरा टु दिल्ली पहुंचने के किए जा रहे दावों की पोल मई में एक्सप्रेस - वे के शुरू होते ही खुल सकती है। एक्सप्रेस - वे खत्म होते ही गाडि़यों को महामाया फ्लाईओवर पर लंबे जाम से जूझना होगा। करीब 2 किलोमीटर लंबे इस इलाके में सिर्फ फोर लेन की सड़क और पुल हैं। वहीं , दिल्ली में सुबह और शाम की नो एंट्री खुलने के इंतजार में भारी वाहन कहां खड़े होंगे , इसे लेकर भी प्लानिंग नहीं की गई है। नोएडा ट्रैफिक पुलिस और अथॉरिटी अफसर भी दिल्ली में नो एंट्री के चलते एक्सप्रेस - वे पर लंबा जाम लगने की आशंका से घबराए हुए हैं। हालांकि लखनऊ से प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग के चलते खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। बता दें कि फरीदाबाद और गाजियाबाद आदि इलाकों के बॉर्डर एरिया में ट्रांसपोर्ट फैसिलिटी मौजूद है।

    नो एंट्री बनेगी मुसीबत

    दिल्ली में भारी वाहनों की एंट्री पर सुबह 9 से रात 10 बजे तक रोक है। इसके चलते दूर - दराज के इलाकों से सामान लेकर आने वाले ट्रक बॉर्डर पर एंट्री के लिए इंतजार करते हैं और एंट्री खुलने के बाद ही दिल्ली में जाते हैं। आगरा से एक्सप्रेस - वे के जरिए सामान लेकर आने वाले ट्रकों को दिल्ली में एंट्री खुलने तक एक्सप्रेस - वे पर ही इंतजार करना पड़ेगा। अभी तक कालिंदी कुंज पर बने पुल से दिल्ली जाने वाले ट्रकों के चलते वहां ज्यादातर जाम लगा रहता है। ट्रैफिक पुलिस डिपार्टमेंट के अफसरों के मुताबिक , एक्सप्रेस - वे खुलने से भारी वाहनों के चलते महामाया फ्लाईओवर से पहले जाम की स्थिति बन सकती है। गौरतलब है कि इसी महीने यमुना एक्सप्रेस - वे को खोलने की तैयारी की जा रही है।




    सिटी में भी नो एंट्री टाइम टेबल की मांग

    गाजियाबाद और दिल्ली की तर्ज पर शहर में भी भारी वाहनों की नो एंट्री लागू करने की मांग फिर उठने लगी है। फोनरवा , आरडब्ल्यूए , ट्रैफिक पुलिस आदि पीक आवर्स और स्कूल टाइमिंग के दौरान डंपर , हैवी ट्रक , बिल्डिंग मटीरियल और सरिया आदि से लदे वाहनों की एंट्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। ऐसा होने से कालिंदी कुंज से सेक्टर -62 स्थित मॉडल टाउन पुलिस चौकी तक के इलाके में सुबह और शाम भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लग जाएगी।

    कोट

    एक्सप्रेस - वे पर 45 मीटर की सर्विस रोड बनाने की प्लानिंग है। सर्विस रोड पर जाने के लिए कहां कट बनाए जाएं , इसकी प्लानिंग की जा रही है। तब ट्रक दिल्ली की एंट्री खुलने तक वहां पर इंतजार कर पाएंगे।

    संतराम सिंह , चीफ प्रोजेक्ट इंजीनियर , अथॉरिटी



    सिटी में भी नो एंट्री टाइम टेबल की मांग

    गाजियाबाद और दिल्ली की तर्ज पर शहर में भी भारी वाहनों की नो एंट्री लागू करने की मांग फिर उठने लगी है। फोनरवा , आरडब्ल्यूए , ट्रैफिक पुलिस आदि पीक आवर्स और स्कूल टाइमिंग के दौरान डंपर , हैवी ट्रक , बिल्डिंग मटीरियल और सरिया आदि से लदे वाहनों की एंट्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। ऐसा होने से कालिंदी कुंज से सेक्टर -62 स्थित मॉडल टाउन पुलिस चौकी तक के इलाके में सुबह और शाम भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लग जाएगी।

    कोट

    एक्सप्रेस - वे पर 45 मीटर की सर्विस रोड बनाने की प्लानिंग है। सर्विस रोड पर जाने के लिए कहां कट बनाए जाएं , इसकी प्लानिंग की जा रही है। तब ट्रक दिल्ली की एंट्री खुलने तक वहां पर इंतजार कर पाएंगे।

    संतराम सिंह , चीफ प्रोजेक्ट इंजीनियर , अथॉरिटी
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  • नोएडा, ग्रेटर नोएडा में फ्री होल्ड होगी जमीन

    नवभारत टाइम्स | May 1, 2012, 05.03AM IST
    विनोद शर्मा
    नोएडा।। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के सभी सातों औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले एरिया में जमीनों को फ्री होल्ड करने की तैयारी कर रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा समेत इन जगहों पर प्रॉपर्टी फिलहाल लीज पर ही ली जा सकती है। इस बारे में प्रदेश के औद्योगिक विकास विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी प्राथमिकता सूची में शामिल कर लिया है।

    उल्लेखनीय है कि नोएडा व ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी का अलॉटमेंट 90 साल की लीज पर होता है, जबकि इनसे सटे दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद आदि में प्रॉपर्टी फ्री होल्ड मिलती है। सूत्रों के मुताबिक, सीएम ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस वे, लखनऊ इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी (लीडा), गोरखपुर इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी (गीडा), सीडा (जौनपुर) व यूपीडा, लखनऊ में लीज पर आवंटित प्रॉपर्टी को फीस लेकर फ्री होल्ड करने के प्रस्ताव को प्राथमिकता सूची में शामिल किया है।

    इस पर जल्द फैसला लेने के लिए सभी प्राधिकरणों से राय ली जा रही है। जिले की तीनों अथॉरिटीज में भी इस बारे में प्रमुख सचिव कार्यालय से लेटर पहुंच गया है। नोएडा अथॉरिटी के डिप्टी सीईओ सी.बी. सिंह ने बताया कि अथॉरिटी शासन के लिए जवाब तैयार कर रही है। सूत्रों ने बताया कि अथॉरिटी प्रॉपर्टी की मौजूदा कीमत का 10-20 पर्सेंट चार्ज लेकर इसे फ्री होल्ड में बदलने के फॉर्म्युले पर विचार कर रही है।




    क्या होगा असर
    - इस प्रस्ताव के पास होते ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे में भी जमीनें फ्री होल्ड आधार पर खरीदी जा सकेंगी, जिससे प्रॉपर्टी का मालिकाना हक मिल सकेगा।

    - नोएडा व ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी बेचने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। इसके लिए न तो ट्रांसफर ऑफ मेंमोरेंडम की जरूरत होगी और न ही बैंक से लोन लेने के लिए अथॉरिटी से मॉर्गेज परमीशन लेने की। ट्रांसफर चार्ज से भी मुक्ति मिलेगी।



    क्या होगा असर
    - इस प्रस्ताव के पास होते ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे में भी जमीनें फ्री होल्ड आधार पर खरीदी जा सकेंगी, जिससे प्रॉपर्टी का मालिकाना हक मिल सकेगा।

    - नोएडा व ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी बेचने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। इसके लिए न तो ट्रांसफर ऑफ मेंमोरेंडम की जरूरत होगी और न ही बैंक से लोन लेने के लिए अथॉरिटी से मॉर्गेज परमीशन लेने की। ट्रांसफर चार्ज से भी मुक्ति मिलेगी।
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  • यमुनापार में लाइन पर आएगा ट्रैफिक
    नवभारत टाइम्स | May 2, 2012, 12.52AM IST
    नई दिल्ली।। ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में रहने वाले या हर दिन यहां से गुजरने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। अगर इलाके में तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने अपने सीनियर अफसरों के आदेश का ठीक तरह से पालन किया, तो अगले हफ्ते से पूरे यमुनापार की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके तहत लोगों को फुटपाथ और सर्विस लेन में होने वाले अतिक्रमण से लेकर अवैध रूटों पर चल रही ग्रामीण सेवाओं तक से मुक्ति मिल सकती है।

    दरअसल, ट्रैफिक पुलिस के जॉइंट कमिश्नर सत्येंद्र गर्ग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में ट्रैफिक नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और स्थानीय ट्रैफिक पुलिसकर्मी कुछ नहीं कर रहे। गर्ग को बताया गया था कि यहां धड़ल्ले से ग्रामीण सेवा उन रूटों पर चल रही हैं, जिनका उनके पास परमिट ही नहीं है। ग्रामीण सेवा के ड्राइवर चौराहों पर बेतरतीब ढंग से गाड़ी खड़ी करते हैं और सवारी उठाने के चक्कर में बस स्टॉप से गाड़ी इस तरह सटाकर रोकते हैं कि पीछे से आ रही बस को बीच सड़क पर रुकना पड़ता है। इसके कारण जाम तो लगता ही है, बस में चढ़-उतर रहे लोगों को भी काफी दिक्कत होती है। कई शोरूम ओनर्स सर्विस लेन और फुटपाथ पर अपना सामान सजा देते हैं। पुरानी गाडि़यों के कई डीलर सड़क किनारे ही गाडि़यांे की डेंटिंग पेंटिंग करते हैं, जिससे तीन लेन की सड़क दो लेन की रह जाती है।

    इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर गर्ग ने पिछले हफ्ते ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के कई इलाकों में सरप्राइज विजिट की और देखा कि उन्हें जितनी भी शिकायतें मिली थीं, उनमें से ज्यादातर सही थीं। गर्ग ने लक्ष्मी नगर, शकरपुर, प्रीत विहार, कड़कड़डूमा, शाहदरा, जगतपुरी, अर्जुन नगर, विश्वास नगर, कृष्णा नगर, वेलकम, मधु विहार, विनोद नगर, आईपी एक्सटंेशन, पांडव नगर, मदर डेरी, झील समेत यमुनापार के कई इलाकों का दौरा किया और वहां की समस्याओं को बारीकी से देखा। सोमवार को उन्होंने यमुनापार में तैनात सभी टीआई और एसीपी को तलब किया और उनकी जमकर क्लास ली। गर्ग ने उन्हें बताया कि उनकी नाक के नीचे किस तरह खुलेआम ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।




    हफ्तेभरमेंसुधरेंहालात, वरनाएक्शन
    गर्ग ने तमाम अधिकारियों को 4 पॉइंट फॉर्म्युला देकर अगले सोमवार तक उसे पूरी तरह लागू करने का आदेश दिया। उन्होंने साफ किया कि अगर हफ्ते भर में हालात नहीं सुधरे, तो लाइन हाजिर या सस्पेंड होने के लिए तैयार रहें। गर्ग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अवैध रूटों पर चल रही ग्रामीण सेवाओं को जब्त करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी ग्रामीण सेवा बस स्टॉप पर बस का रास्ता रोक कर न खड़ी हो। दुकानदारों और शोरूम वालों का सामान सर्विस लेन या फुटपाथ पर नजर नहीं आना चाहिए। फुटपाथ, सर्विस लेन और कैरिज वे में या सड़क के किनारे होने वाली वाहनों की रिपेयरिंग पूरी तरह बंद होनी चाहिए और पुरानी कारों के डीलरों के साथ गाडि़यों के जितने भी शोरूम हैं, उनकी गाडि़यां सर्विस लेन, फुटपाथ या कैरिज वे पर नजर नहीं आनी चाहिए। उन्होंने अवैध पार्किंग पर भी सख्ती से रोक लगाने का निर्देश दिया।


    हफ्तेभरमेंसुधरेंहालात, वरनाएक्शन
    गर्ग ने तमाम अधिकारियों को 4 पॉइंट फॉर्म्युला देकर अगले सोमवार तक उसे पूरी तरह लागू करने का आदेश दिया। उन्होंने साफ किया कि अगर हफ्ते भर में हालात नहीं सुधरे, तो लाइन हाजिर या सस्पेंड होने के लिए तैयार रहें। गर्ग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अवैध रूटों पर चल रही ग्रामीण सेवाओं को जब्त करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी ग्रामीण सेवा बस स्टॉप पर बस का रास्ता रोक कर न खड़ी हो। दुकानदारों और शोरूम वालों का सामान सर्विस लेन या फुटपाथ पर नजर नहीं आना चाहिए। फुटपाथ, सर्विस लेन और कैरिज वे में या सड़क के किनारे होने वाली वाहनों की रिपेयरिंग पूरी तरह बंद होनी चाहिए और पुरानी कारों के डीलरों के साथ गाडि़यों के जितने भी शोरूम हैं, उनकी गाडि़यां सर्विस लेन, फुटपाथ या कैरिज वे पर नजर नहीं आनी चाहिए। उन्होंने अवैध पार्किंग पर भी सख्ती से रोक लगाने का निर्देश दिया।
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  • 'Nearly five lakh houses under construction in NCR'
    PTI | May 2, 2012, 09.43PM IST

    NEW DELHI: Nearly 5,00,000 houses are under construction in the national capital market (NCR), the largest residential market in the country, and half of them are slated to be ready for possession by next year, according to property consultant Knight Frank.

    In its market overview, the consultant said that NCR did not witness a steep decline in launches last fiscal despite global economic slowdown and high mortgage rates in India.

    "Nearly 86,000 residential units entered the market in FY 2012... Nearly 40 per cent of the units launched, fall in the Rs 25-50 lakh ticket size," Knight Frank said in a report.

    Ghaziabad contributed to about 34 per cent of the number of project launched, followed by Gurgaon and Noida.

    "Developers were able to gauge the pulse of the market and launched more affordable and mid segment projects than premium projects in FY 2012," it added.

    Knight Frank research report found out that nearly 5,00,000 units were under various stages of construction in the NCR market as of March 2012.

    "NCR is the largest residential market in the country by sheer volume of residential units launched. It currently has higher number of units compared to the other five metropolitan cities of Mumbai, Chennai, Bangalore, Kolkata and Hyderabad put together," the consultant said.

    About 50 per cent of the upcoming supply in the NCR market is expected to be ready for possession by 2013, as a bulk of projects were launched towards the end of 2009 and early 2010.

    Nearly 57 per cent of the upcoming supply falls in Noida and Greater Noida. Gurgaon constitutes nearly 19 per cent of the upcoming supply and about 94,000 units are slated to enter this market by 2015.

    "The NCR being the largest residential market faces challenges at the unsold inventory levels. However the market has shown stability and there has been no drastic dip in the sales velocity in FY 2012.

    "The vacancy levels have improved and stand at 36 per cent in Q4 2012 as compared to 40 per cent in Q2 FY 2012," the report said.

    About 78 per cent of the unsold inventory is concentrated in Noida and Greater Noida, including Noida Extension that generated a controversy over land acquisition.
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  • दिल्ली में प्रॉपर्टी के 80 % बिजनेस पर ब्रेक

    रामेश्‍वर दयाल | May 3, 2012, 05.11AM IST
    नई दिल्ली।। दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के आदेश के बाद राजधानी में प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त का 80 प्रतिशत कारोबार रुक गया है। राजस्व विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, जीपीए, विल व एग्रीमेंट टु सेल की प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त पर रोक लगाई है, उससे फिलहाल सरकार का राजस्व घट सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि बाद में रेवेन्यू में इजाफा हो जाएगा, साथ ही प्रॉपर्टी की कालाबाजारी पर भी रोक लगेगी। दिल्ली सरकार को प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त से हर साल करीब 2 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलता है।

    सूत्रों अनुसार पिछले साल 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में जीपीए, विल व एग्रीमेंट टु सेल पर प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी, जिसका कई राज्यों ने पालन किया। लेकिन दिल्ली सरकार ने समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बना दी, लेकिन सभी प्रकार की प्रॉपर्टी की सेल परचेज जारी रखी। सूत्र बताते हैं कि हाल ही में इस कमिटी ने कहा कि अगर कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया तो सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस सुझाव के बाद डिविजनल कमिश्नर ने फ्री होल्ड को छोड़कर बाकी सभी प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त बंद करने के आदेश जारी कर दिए। साथ में जोड़ दिया कि 11 अक्टूबर के बाद हुई प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त भी रद्द कर दी जाए।

    प्रॉपर्टी एक्सपर्ट विजय सिंह कहते हैं कि इस फैसले के बाद फ्री होल्ड प्रॉपर्टी के दाम बढ़ेंगे क्योंकि अभी ज्यादातर फैसले पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए होते हैं। फ्री होल्ड पर लोन मिलना आसान होता है इसलिए इसके रेट ज्यादा होते हैं। उनके मुताबिक इस फैसले से दिल्ली के प्रॉपर्टी मार्केट में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिलेंगे।




    राजस्व विभाग इस आदेश को सही ठहरा रहा है। उसका कहना है कि राजधानी में जीपीए, विल एग्रीमंेट टु सेल से करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी बिक व खरीदी जा रही है, लेकिन विभाग को इससे पूरा रेवेन्यू नहीं मिल रहा है। ऐसे कारोबार में सरकार को स्टांप ड्यूटी तो कम मिलती ही है, साथ ही सर्कल रेट में भी घपलेबाजी की जाती है। विभाग का यह भी कहना है कि इस प्रकार की प्रॉपर्टी को कानूनी मान्यता भी नहीं है, जिसका नुकसान अंत में खरीदने-बेचने वाले को ही होता है। विभाग का मानना है कि इस आदेश के बाद लोग अपनी प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करवाने को प्रेरित होंगे, जिसका लाभ सभी को मिलेगा। दूसरी ओर सरकार का यह आदेश प्रॉपर्टी का धंधा करने वालों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। उनका कहना है कि सरकार को यह आदेश लागू करने से पहले लोगों को अपनी प्रॉपर्टी फ्री होल्ड करवाने के लिए समय तो देना चाहिए था, दूसरे बैक डेट से प्रॉपर्टी की खरीद को रद्द करने से लोग उन्हंे परेशान करने लग गए हैं।


    राजस्व विभाग इस आदेश को सही ठहरा रहा है। उसका कहना है कि राजधानी में जीपीए, विल एग्रीमंेट टु सेल से करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी बिक व खरीदी जा रही है, लेकिन विभाग को इससे पूरा रेवेन्यू नहीं मिल रहा है। ऐसे कारोबार में सरकार को स्टांप ड्यूटी तो कम मिलती ही है, साथ ही सर्कल रेट में भी घपलेबाजी की जाती है। विभाग का यह भी कहना है कि इस प्रकार की प्रॉपर्टी को कानूनी मान्यता भी नहीं है, जिसका नुकसान अंत में खरीदने-बेचने वाले को ही होता है। विभाग का मानना है कि इस आदेश के बाद लोग अपनी प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करवाने को प्रेरित होंगे, जिसका लाभ सभी को मिलेगा। दूसरी ओर सरकार का यह आदेश प्रॉपर्टी का धंधा करने वालों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। उनका कहना है कि सरकार को यह आदेश लागू करने से पहले लोगों को अपनी प्रॉपर्टी फ्री होल्ड करवाने के लिए समय तो देना चाहिए था, दूसरे बैक डेट से प्रॉपर्टी की खरीद को रद्द करने से लोग उन्हंे परेशान करने लग गए हैं।
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  • 2012 का मेट्रो मैपः 300 फीडर बसें और 8 कोच

    प्रशांत सोनी | May 3, 2012, 05.11AM IST
    नई दिल्ली।। दिल्ली मेट्रो के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगू सिंह ने फेज-3 के काम को अब तक का सबसे बड़ा चैलेंज बताया है। उन्होंने कहा कि फेज-2 का काम खत्म होने के बाद से लेकर अब तक हम फेज-3 की तैयारियों में लगे हुए थे। हमारा पहला टारगेट यही है कि हम 2016 में तय की गई डेडलाइन तक काम पूरा कर लें। अलग-अलग विभागों के बीच आपसी तालमेल कायम रखना हमारा सबसे बड़ा चैलेंज है। इसके लिए कई लेवल पर तैयारी की गई है।
    8 कोच वाली मेट्रो इसी साल
    सिंह ने बताया कि मेट्रो ट्रेनों में कोच की संख्या बढ़ाने के लिए नए कोच मंगाने का ऑर्डर दिया जा चुका है। जून से नए कोच आने शुरू हो जाएंगे और उसके बाद जल्द ही 4 कोच वाली ट्रेनों को 6 कोच में और 6 कोच वाली ट्रेनों को 8 कोच में बदलने का काम शुरू हो जाएगा। इस साल के अंत तक 68 ट्रेनों में नए कोच लगाकर उन्हें 8 कोच वाली ट्रेनों में तब्दील कर दिया जाएगा। अगले साल के अंत तक लाइन 2 (जहांगीरपुरी-हूडा सिटी सेंटर) और 3 (द्वारका-नोएडा) पर सभी ट्रेनें 6 और 8 कोच वाली हो जाएंगी, जबकि जून 2015 तक इन दोनों लाइन पर चलने वाली सभी ट्रेनें 8 कोच वाली होंगी। अभी लाइन-2 पर 60 और लाइन-3 पर 71 ट्रेनें चल रही हैं। इनमें से आधी से ज्यादा ट्रेनें 8 कोच वाली हो जाएंगी। इसी तरह लाइन-1 (दिलशाद गार्डन-रिठाला) पर चलने वाली ट्रेनें भी जून 2015 तक 6 कोच वाली हो जाएंगी, लेकिन उन ट्रेनों को 8 कोच वाली ट्रेनों में नहीं बदला जाएगा, क्योंकि लाइन-1 पर उतना रश नहीं है। फेज-3 की जरूरतों के मद्देनजर 3.2 मीटर चौड़े स्टैंडर्ड गेज वाले 486 नए कोच के लिए भी ग्लोबल टेंडर जारी किया जा चुका है, जबकि स्टैंडर्ड गेज वाली पुरानी ट्रेनों के लिए भी 2.9 मीटर चौड़े 92 कोच मंगाए जा रहे हैं।

    6 महीने में नई फीडर बसें
    सिंह के मुताबिक 300 नई फीडर बसों के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। 6 महीने में ये बसें आ जाएंगी और उसके बाद कनेक्टिविटी की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। वैसे तो ये सभी नॉन एसी फीडर बसें ही होंगी, लेकिन अभी जो फीडर बसें चल रही हैं, उनसे ये साइज में थोड़ी बड़ी, बेहतर, सुविधाजनक और आरामदेह होंगी। जीपीएस के जरिए इन बसों की मॉनिटरिंग भी की जाएगी। सिंह ने बताया कि मेट्रो स्टेशनों की कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए डीटीसी के बस रूटों में भी कुछ बदलाव करने की जरूरत है।


    6 स्टेशनों पर प्लैटफॉर्म स्क्रीन डोर
    मेट्रो स्टेशनों पर हो रहे हादसों और खुदकुशी की घटनाओं को रोकने के लिए लाइन -2 के 6 स्टेशनों पर प्लैटफॉर्म स्क्रीन डोर भी लगाए जा रहे हैं। कश्मीरी गेट , चांदनी चौक , चावड़ी बाजार , राजीव चौक , नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर हाफ हाइट वाले प्लैटफॉर्म स्क्रीन डोर लगाए जाएंगे। हालांकि सिंह ने कहा कि सुबह से लेकर रात तक ऑपरेशनल रहने वाले स्टेशनों पर इस तरह के डोर लगाना काफी चुनौती भरा काम है और इसी वजह से इस काम में कम से कम दो साल का वक्त लग जाएगा।


    मॉन्यूमेंट्स के आसपास मॉनिटरिंग
    तीसरे फेज के तहत बन रही केंद्रीय सचिवालय - कश्मीरी गेट लाइन कई ऐतिहासिक स्थलों के आसपास से गुजर रही है और इसे लेकर एएसआई भी कई बार ऐतराज जता चुका है। यह पूरी लाइन अंडरग्राउंड होगी और यहां बड़ी संख्या में टनल बोरिंग मशीनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। सिंह ने कहा कि जब फेज -3 का काम अपने पीक पर होगा , उस वक्त एक साथ 25-26 टनल बोरिंग मशीनें अलग - अलग जगहों पर काम कर रही होंगी। चूंकि ओल्ड दिल्ली में कई सारे ऐतिहासिक स्थान है। इस लिहाज से वहां का काम सबसे चैलेंजिंग होगा। इसी के मद्देनजर एक सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल सेंटर बनाया जा रहा है , जहां से ओल्ड दिल्ली समेत दिल्ली की जितनी भी जगहों पर टनल बोरिंग मशीनें काम कर रही होंगी , उन सबके काम की बारीकी से और बहुत प्रभावशाली ढंग से मॉनिटरिंग की जा सकेगी। इसके लिए सभी मशीनों में जीपीएस डिवाइस भी लगाए जाएंगे। इस तरह की मॉनिटरिंग केवल सेंट्रल लंदन में मेट्रो लाइन के निर्माण के दौरान की गई थी।

    लगेगा नया सिग्नलिंग सिस्टम
    6 और 8 कोच वाली ट्रेनें जब प्लैटफॉर्म पर आएं तो लोग कन्फ्यूज ना हों , इसके लिए भी कुछ नए बदलाव किए जा रहे हैं। सिंह के मुताबिक प्लैटफॉर्म पर ट्रेन कहां रुकेगी , इसे लेकर पैसेंजरों कोई कन्फ्यूजन ना हो , इसके लिए प्लैटफॉर्म पर लगे सिग्नलिंग सिस्टम में बदलाव किए जा रहे हैं। सभी ट्रेनों का पहला कोच एक ही जगह पर रुकेगा , चाहे वो 4 कोच वाली ट्रेन हो या 6 कोच वाली या फिर 8 कोच वाली। उन्होंने बताया कि लाइन -3 पर यह काम किया जा चुका है , जबकि लाइन -2 पर भी सिग्नल सिस्टम बदलने का काम जल्द ही काम पूरा हो जाएगा। लाइन -1 पर इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी , क्योंकि वहां इतना रश नहीं है।
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  • आखिर कहां अटक गई मेट्रो विस्तार परियोजना

    Story Update : Wednesday, May 02, 2012 1:53 AM
    नोएडा। नोएडा की विस्तारित मेट्रो परियोजना में दो महीने से लगा ब्रेक दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। इस परियोजना में लगातार हो रही देरी का कारण जानने के लिए डीएमआरसी के अधिकारी खुद नोएडा आएंगे।
    परियोजना को लेकर नोएडा प्राधिकरण की सुस्त चाल आने वाले दिनों में डीएमआरसी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है, क्योंकि बोटेनिकल गार्डन से जनकपुरी वेस्ट तक कॉरीडोर पर दिल्ली की सरहद में काम शुरू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। चार मई को कालिंदी कुंज सेक्शन के लिए भूमि पूजन होने जा रहा है, लेकिन नोएडा सेक्शन में परियोजना को लेकर कोई सुगबुगाहट तक नहीं है। इसपर नाराजगी जताते हुए डीएमआरसी पहले ही प्राधिकरण को पत्र लिख चुका है। डीएमआरसी सूत्रों के मुताबिक प्राधिकरण की तरफ से पत्र का भी कोई जबाव नहीं दिया गया है। इसी को ध्यान में रखकर अब डीएमआरसी के अधिकारी नोएडा आकर प्राधिकरण के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और परियोजना तेजी लाने के लिए कदम उठाने की मांग करेंगे। डीएमआरसी प्रवक्ता के मुताबिक निगम की तरफ से तैयारी पूरी है, लेकिन प्राधिकरण की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न मिलने से परियोजना अटकी हुई है। प्राधिकरण ने फरवरी के बाद से इस परियोजना में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। वहीं, सेक्टर-62 तक मेट्रो परियोजना के विस्तार को लेकर भी कोई जबाव प्राधिकरण ने नहीं दिया है। इसी सिलसिले में इस सप्ताह प्राधिकरण के अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की जाएगी।
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  • डीएमआरसी ने मांगी 15000 वर्गमीटर जमीन
    Story Update : Wednesday, May 02, 2012 1:53 AM
    नोएडा। कालिंदी कुंज मेट्रो विस्तार के एवज में डीएमआरसी ने नोएडा प्राधिकरण से पंद्रह हजार वर्गमीटर जमीन पर कॉमर्शियल राइट्स की मांग की है। डीएमआरसी ने मंगलवार को इस संबंध में प्राधिकरण को पत्र भेजा। साथ ही इस प्रस्ताव को एमओयू में सशर्त शामिल किया जाएगा।
    बॉटेनिकल गार्डन से कालिंदी कुंज तक चार किलोमीटर की लाइन को बढ़ाया जाना है। इसके लिए सभी कागजी कार्यवाही लगभग पूरी हो चुकी है। सिर्फ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग (एमओयू) बाकी है। इस लेटलतीफी के लिए डीएमआरसी प्राधिकरण के समक्ष नाराजगी जता चुका है। डीएमआरसी ने प्राधिकरण से 15000 वर्गमीटर कॉमर्शियल जमीन की मांग की है। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नोएडा की जमीन का भाव काफी अधिक है। इसमें भी कॉमर्शियल जमीन सबसे ऊंचे भाव पर बिकती है। ऐसे में डीएमआरसी को इतनी बड़ी भूमि देना नीतिगत फैसला है। प्राधिकरण में अभी सीईओ और चेयरमैन की कुर्सी खाली पड़ी हुई है, जिसकी वजह से इस पर निर्णय नहीं हो सकता। हालांकि, जमीन देने से पहले प्रस्ताव को शासन और बोर्ड दोनों से अनुमति लेनी पड़ेगी। इस संबंध में फिलहाल डीएमआरसी को कोई जवाब नहीं दिया गया है। उच्च अधिकारियों की नियुक्ति के बाद पूरे मामले को रखा जाएगा और फिर आगे की कार्रवाई होगी।
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  • ताजमहल क्षेत्र में विकसित होगा इको टूरिज्म
    Updated on: Wed, 02 May 2012 08:21 PM (IST)
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    - आठ किमी साइकिलिंग ट्रैक सहित कई अन्य योजनाएं मूर्त रूप लेंगी

    - मुख्य सचिव ने एक माह के भीतर परियोजना की रिपोर्ट मांगी

    लखनऊ, जाब्यू : आगरा में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए 'ताज नेचर वाक' के तहत इको टूरिज्म का विकास किया जाएगा। ताजमहल के रात्रि दर्शन के अलावा पर्यटकों के लिए आठ किमी लम्बा साइकिलिंग ट्रैक का भी निर्माण कराया जायेगा। साथ ही पास के वन्यजीव क्षेत्रो को संरक्षित करते हुए ताज सफारी, मुमताज इको-पार्क और कैमल सफारी का विकास किया जाएगा। वर्षाकाल के उपरान्त यमुना में नौकायन की व्यवस्था भी कराई जाएगी।

    प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने बुधवार को यहां शास्त्री भवन में इस पूरी परियोजना के संबंध में बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नये कायरें को शामिल करते हुए परियोजना की प्रोजेक्ट रिपोर्ट एक माह के अंदर उन्हें उपलब्ध कराई जाए। ताज नेचर वॉक क्षेत्र में हरित टनल का विकास, बीहड़ क्षेत्रों में जल संचयन, नये नेचर ट्रेल का निर्माण, पक्षियों हेतु प्राकृतिक वास का विकास भी कराया जाए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के लिए लागत धनराशि का वित्तीय अधिभार आगरा विकास प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश वन निगम, भारत सरकार के पर्यटन, संस्कृति, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सहित संबंधित विभाग वहन करेंगे। बैठक में सचिव वन एवं पर्यावरण आरके सिंह, प्रमुख स्टाफ आफिसर, मुख्य सचिव आशीष कुमार गोयल, प्रमुख वन संरक्षक जेएस अस्थाना, आयुक्त (प्रभारी) आगरा मण्डल अजय चौहान, वन संरक्षक आगरा बिवास रंजन, आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लाल बिहारी पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी थे।
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  • अवैध कब्जों का ड्राफ्ट तैयार करेगा जीडीए
    May 3, 2012, 09.00AM IST

    प्रमुख संवाददाता ॥ गाजियाबाद : जीडीए की जमीन पर अवैध कब्जों का पता लगाने के लिए सर्वे होगा। भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों , एकल यूनिट पर कई फ्लैट बनाने वालों की अब खैर नहीं है। हर कॉलोनी के एक - एक मकान का सर्वे कराया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि स्वीकृत मैप के अनुसार निर्माण किया गया है अथवा नहीं। चाहे मकान का निर्माण कितने ही वर्ष पहले हुआ हो। सर्वे के बाद कार्रवाई पर निर्णय होगा। जीडीए के उपाध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने तीनों संयुक्त सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा , प्रमोद कुमार , लाल चंद मौर्य और ओएसडी डी . पी . सिंह को निर्देश दिया है कि वह अपने - अपने क्षेत्रों में निरीक्षण कराकर सूचना निर्धारित ड्राफ्ट पर एकत्रित कराएं।

    कैसा है ड्राफ्ट

    जो ड्राफ्ट दिया गया है उसमें 11 बिंदु दिए गए हैं। इसमें कॉलोनी का नाम , किस इंजीनियरिंग डिवीजन के अंतर्गत आता है , भूमि पर किस प्रकार का निर्माण किया गया है और अवैध निर्माण कितने हैं। यह सब कुछ दर्शाना होगा। इसके अलावा अवैध कब्जा यदि हटा दिया गया है तब उस भूमि का अनुमानित मूल्य लिखना होगा। ड्राफ्ट में अवैध कब्जे के संबंध मेें सारी जानकारियां भरनी होंगी। अन्य विवरण वाले कॉलम में यह सब कुछ लिखा होगा कि कब्जा किसने कर रखा था।




    कंस्ट्रक्शन की भी चैक लिस्ट

    संतोष कुमार यादव ने इसी तरह की एक चैक लिस्ट जीडीए के क्षेत्र में चल रहे निर्माणों के लिए भी कराई है। उन्होंने आदेश दिया है कि वह स्थल का निरीक्षण कराकर , ड्राफ्ट में सारी जानकारी दर्ज कराएं। इस प्रारूप में 19 कॉलम बनाए गए है। इसमें योजना , क्षेत्र , गली , मोहल्ले का नाम , मकान अथवा प्लॉट संख्या , उसके मालिक का नाम और पता , मकान अथवा प्लॉट का क्षेत्रफल , मैप स्वीकृत है अथवा नहीं। यह सब कुछ दर्ज कराना होगा। इनके अलावा मैप स्वीकृति की संख्या , दिनांक , बेसमेंट की स्थिति , एफएआर की स्थिति , सेट बैक छूटा है अथवा नहीं , फ्रंट , रियर , साइट का जिक्र भी करना होगा। प्लॉट पर बनी मंजिलों व यूनिटों ने निर्माण होने के बाद कम्पलीशन सर्टिफिकेट लिया है या नहीं , रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कार्यशील है या नहीं , सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम , फायर फाइटिंग सिस्टम आदि के बारे में भी विवरण दर्ज कराना होगा।



    कंस्ट्रक्शन की भी चैक लिस्ट

    संतोष कुमार यादव ने इसी तरह की एक चैक लिस्ट जीडीए के क्षेत्र में चल रहे निर्माणों के लिए भी कराई है। उन्होंने आदेश दिया है कि वह स्थल का निरीक्षण कराकर , ड्राफ्ट में सारी जानकारी दर्ज कराएं। इस प्रारूप में 19 कॉलम बनाए गए है। इसमें योजना , क्षेत्र , गली , मोहल्ले का नाम , मकान अथवा प्लॉट संख्या , उसके मालिक का नाम और पता , मकान अथवा प्लॉट का क्षेत्रफल , मैप स्वीकृत है अथवा नहीं। यह सब कुछ दर्ज कराना होगा। इनके अलावा मैप स्वीकृति की संख्या , दिनांक , बेसमेंट की स्थिति , एफएआर की स्थिति , सेट बैक छूटा है अथवा नहीं , फ्रंट , रियर , साइट का जिक्र भी करना होगा। प्लॉट पर बनी मंजिलों व यूनिटों ने निर्माण होने के बाद कम्पलीशन सर्टिफिकेट लिया है या नहीं , रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कार्यशील है या नहीं , सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम , फायर फाइटिंग सिस्टम आदि के बारे में भी विवरण दर्ज कराना होगा।
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  • कस्टम ड्यूटी और एक्साइज में मिलेगी छूट?
    May 3, 2012, 09.00AM IST
    प्रमुख संवाददाता ॥ नोएडा

    कालिंदी कुंज से बॉटैनिकल गार्डन मेट्रो प्रोजेक्ट पर कस्टम और एक्साइज ड्यूटी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 3.962 किमी लंबे इस रूट पर करीब 874 करोड़ रुपये की लागत है। इसमें से सेंट्रल गवर्नमेंट के टैक्स कस्टम और एक्साइज में छूट मिलेगी या नहीं यह अभी तय नहीं है। यह रकम लगभग 132 करोड़ के करीब बैठती है। इसमें से 46 करोड़ स्टेट गवर्नमेंट का टैक्स है। यह छूट हासिल करने की जिम्मेदारी नोएडा अथॉरिटी की है।

    डीएमआरसी और नोएडा अथॉरिटी के बीच होने वाले एमओयू में यह साफ किया गया है कि यमुना पर पुल की वजह से इस प्रोजेक्ट की कुल लागत बढ़ी है। इसमें से 151 करोड़ रोलिंग स्टॉक के रूप में केंद्रीय अनुदान के रूप में मिलेगा। इसके अलावा 65 करोड़ का आंकलन जमीन की कीमत के आधार पर किया गया है। कस्टम एंड एक्साइज के रूप में 86 करोड़ रुपये का पेमेंट केंद्र सरकार को किया जाना है। यह कुल प्रोजेक्ट कीमत के 10.3 पर्सेंट के करीब है। इसके साथ ही बिल्डिंग मटीरियल व अन्य निर्माण सामग्री पर लगने वाले टैक्स का अनुमान लगभग 46 करोड़ के करीब आंका गया है। डीएमआरसी ने नोएडा अथॉरिटी से कहा है कि वह 30 जून तक मेट्रो के प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रही जमीन की अलाइनमेंट साफ कर उसे उनके हवाले कर दे ताकि निर्माण कार्य में देरी न हो।
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  • मेट्रो चलाने वालों के ही हाथ में मोनो का काम

    प्रशांत सोनी | May 4, 2012, 03.59AM IST
    मेट्रो भवन।। मेट्रो के जरिये दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की सूरत बदलने वाले दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को अब एक नई जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने यह साफ कर दिया है कि मेट्रो के बाद अब दिल्ली का पहला मोनो रेल प्रोजेक्ट भी डीएमआरसी ही संभालेगी। दिल्ली सरकार का मानना है कि डीएमआरसी ने जिस तरह फेज-1 और 2 में टाइट शेड्यूल के बावजूद तय समय में काम पूरा किया, उसी तरह मोनो रेल का काम भी डेडलाइन के अंदर और बेहतरीन ढंग से होगा।

    इससे पहले मोनो रेल बनाने की जिम्मेदारी दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन को दी गई थी। दरअसल, शुरुआत मंे डीएमआरसी मोनोरेल प्रोजेक्ट का विरोध कर रही थी। डीएमआरसी का मानना था कि मोनो रेल की पैसेंजर कपैसिटी काफी कम है और इस वजह से वह मेट्रो का बेहतर विकल्प नहीं बन पाएगी। गौरतलब है कि चार एयरकंडिशंड कोच वाली मोनो रेल में 692 पैसिंजर बैठेंगे। मोनो रेल लाइन के कई स्टेशन भी मेट्रो के स्टेशनों की राह में आ रहे थे।

    शीला के मुताबिक हमारा ड्रीम तो यही था कि मेट्रो दिल्ली के हर कोने तक पहुंचे, लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों में यह संभव नहीं है। इसी वजह से अब हम मोनो रेल ला रहे हैं, जो खंभों पर चलते हुए शार्प मोड़ ले सकेगी। इस तरह घनी आबादी वाले इलाकों में भी जा सकेगी और इसके जरिए मेट्रो स्टेशनों की कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। शास्त्री पार्क (दिलशाद गार्डन-रिठाला लाइन), निर्माण विहार (वैशाली-द्वारका लाइन)और त्रिलोकपुरी (प्रस्तावित मुकुंदपुर-यमुना विहार लाइन) में यह मेट्रो को कनेक्ट करेगी।




    1,665 करोड़ के मोनो रेल प्रोजेक्ट को दिल्ली सरकार ने इसी साल मंजूरी दी है। पहली मोनो रेल लाइन शास्त्री पार्क से त्रिलोकपुरी तक बनेगी। यह लाइन 10.8 किमी लंबी होगी और इस पर कुल 12 स्टेशन होंगे। इसके लिए 2017 की डेडलाइन भी तय की गई है। डीएमआरसी ने मोनो रेल प्रोजेक्ट के लिए स्टडी कर ली है और इस पर आगे काम कर रही है।

    स्टेशनों के नाम : शास्त्री पार्क , कैलाश नगर , गांधी नगर , ताज एन्क्लेव , गीता कॉलोनी , गुरु अंगद नगर , स्कोप टावर , गणेश नगर , मदर डेयरी , पटपड़गंज , कोटला , त्रिलोकपुरी।


    1,665 करोड़ के मोनो रेल प्रोजेक्ट को दिल्ली सरकार ने इसी साल मंजूरी दी है। पहली मोनो रेल लाइन शास्त्री पार्क से त्रिलोकपुरी तक बनेगी। यह लाइन 10.8 किमी लंबी होगी और इस पर कुल 12 स्टेशन होंगे। इसके लिए 2017 की डेडलाइन भी तय की गई है। डीएमआरसी ने मोनो रेल प्रोजेक्ट के लिए स्टडी कर ली है और इस पर आगे काम कर रही है।

    स्टेशनों के नाम : शास्त्री पार्क , कैलाश नगर , गांधी नगर , ताज एन्क्लेव , गीता कॉलोनी , गुरु अंगद नगर , स्कोप टावर , गणेश नगर , मदर डेयरी , पटपड़गंज , कोटला , त्रिलोकपुरी।
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