दिल्ली-एनसीआर में बढ़ेगी घरों की डिमांड
इकनॉमिक टाइम्स | Mar 5, 2013, 12.20PM IST


नई दिल्ली/बेंगलुरु/मुंबई।। बजट में फर्स्ट टाइम होम लोन लेने वालों को इनसेंटिव के एलान से बिल्डर्स खाली घरों के तेजी से बिकने की उम्मीद कर रहे हैं। इससे खासकर 30-40 लाख की कैटेगरी में घरों की डिमांड बढ़ेगी।

बजट प्रपोजल के मुताबिक, 25 लाख रुपए तक के लोन पर इंटरेस्ट में 1 लाख रुपए तक का एक्सट्रा टैक्स डिडक्शन मिलेगा। देश भर में 5,83,513 अनसोल्ड अपार्टमेंट्स हैं। इनमें से करीब 39 फीसदी 35 लाख रुपए से कम के हैं । प्रॉपर्टी रिसर्च फर्म लायसेस फोरास के मुताबिक, नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) के 50 फीसदी अनसोल्ड अपार्टमेंट्स इस सेगमेंट में आते हैं। वहीं, मुंबई में ऐसे 30 फीसदी घर हैं। 2012 में देश में 42 फीसदी अपार्टमेंट्स इसी कैटेगरी में बिके थे। इसके लिए बायर्स ने एवरेज 25 लाख रुपए का लोन लिया था।

डिवेलपर्स का कहना है कि एनसीआर में बजट प्रपोजल का असर दिखने लगा है। गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन, ग्रेटर नोएडा में नोएडा एक्सटेंशन और यमुना एक्सप्रेसवे में बायर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। एसजी एस्टेट्स के डायरेक्टर गौरव गुप्ता ने कहा, 'बजट के बाद हमें अच्छी इनक्वायरी मिली है। इससे हमें अनसोल्ड स्टॉक क्लीयर करने में मदद मिलेगी।' राजनगर एक्सटेंशन में एसजी एस्टेट्स के प्रोजेक्ट्स हैं। सुपरटेक के चेयरमैन आर के अरोड़ा ने कहा कि ज्यादातर इनक्वायरी ऐसे सेगमेंट से है, जिसे बजट से फायदा मिलने वाला है।

इनक्वायरी करने वाले कई लोग डेवलपर्स से बजट प्रपोजल से मिलने वाले फायदे को समझाने के लिए कह रहे हैं। लायसेस फोरास के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज कपूर ने बताया कि पहली बार होम लोन लेने वालों को 1 लाख रुपए तक का प्रपोज्ड डिडक्शन मौजूदा 1.5 लाख रुपए के डिडक्शन के अलावा होगा। (ie Total 2.5 Lac Income TAX FREE) उन्होंने कहा कि इससे 25 लाख रुपए के होम लोन पर पहले साल में चुकाए जाने वाला करीब 95 फीसदी इंटरेस्ट कवर हो जाएगा। :bab (42):

सालाना 10.5 फीसदी के करेंट इंटरेस्ट रेट पर 25 लाख रुपए के लोन अमाउंट पर कुल ईएमआई आउटफ्लो 3 लाख रुपए होगा। इसमें से 2.64 फीसदी पहले साल में इंटरेस्ट कंपोनेंट होगा। पहले के 1.5 लाख के बजाय 2.5 लाख डिडक्शन पर इंटरेस्ट के कुल बोझ का 95 फीसदी कवर हो जाएगा। पहले सिर्फ 57 फीसदी इंटरेस्ट कवर होता था। पिछले कुछ क्वार्टर्स में देश भर में घरों की बिक्री में गिरावट आई है। हाई इंटरेस्ट रेट और कमजोर कंज्यूमर सेंटीमेंट के चलते ऐसा हुआ है। प्रॉपर्टी एडवाइजरी फर्म कुशमैन एंड वेकफील्ड के एग्जिक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर (साउथ एशिया) संजय दत्त ने कहा, 'इस कैटेगरी में एडिशनल डिमांड पैदा होगी। स्मॉल डेवलपर्स के लिए मार्केट प्रजेंस बढ़ाने का यह शानदार मौका होगा। वे इस कैटिगरी में अफोर्डेबल होम बनाकर अपनी ब्रांडिंग कर सकते हैं।'
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  • 50 लाख से ज्यादा की प्रॉपर्टी पर टैक्स का झमेला बढ़ा
    इकनॉमिक टाइम्स | Mar 13, 2013, 11.44AM IST

    नई दिल्ली।। जिन लोगों ने बिल्डर्स से 50 लाख रुपए से ज्यादा के अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट्स खरीदे थे और अगर अभी तक उन्हें डिलीवरी नहीं मिली है, तो आगे चलकर उन्हें अच्छा टैक्स चुकाना पड़ सकता है।

    इस साल 1 जून के बाद बिल्डर को किए जाने वाले पेमेंट पर उन्हें 1 फीसदी का टैक्स काटना होगा और इसे टैक्स अथॉरिटी के पास जमा कराने का झंझट भी उन्हीं के मत्थे होगा। प्रॉपर्टी रिसर्च फर्म लायसेज फोरास, प्रॉपइक्विटी और प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म सीबी रिचर्ड एलिस के मुताबिक, 2013 में करीब 4.5-5 लाख घरों की डिलीवरी होनी है।

    फाइनेंस बिल 2013 में प्रस्ताव किया गया था कि एग्रीकल्चर लैंड को छोड़कर 50 लाख रुपए से ज्यादा की अचल संपत्ति खरीदने पर 1 फीसदी टीडीएस देना होगा। इस प्रपोजल का मकसद यह है कि ऐसी डील सरकार की नजर से बची न रहें। तब माना जा रहा था कि यह प्रपोजल सिर्फ तैयार प्रॉपर्टी पर ही लागू होगा। हालांकि, अब अफसर कह रहे हैं कि फाइनेंस बिल में अंडर-कंस्ट्रक्शन या तैयार प्रॉपर्टी का जिक्र नहीं है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एक अफसर ने कहा, 'टैक्स की रकम पूरी वैल्यू के हिसाब से काटी जाएगी। टैक्स फाइनेंस एक्ट लागू होने के बाद के बैलेंस अमाउंट पर नहीं लगेगा।' टीसीएस रूल्स के मुताबिक, बायर्स को टैक्स डिडक्शन एंड एकाउंट यानी टैन लेना होता है और उन्हें रिटर्न भी फाइल करना होता है। उन्हें सेलर को टीडीएस सटिर्फिकेट भी इश्यू करना पड़ता है।

    टैक्स काटने के बाद बिल्डर अपनी टैक्स लायबिलिटी पर टीडीएस के बदले क्रेडिट क्लेम कर सकेगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बारे में तस्वीर साफ करने की जरूरत है। जे सागर एसोसिएट्स में पार्टनर सुनील जैन ने कहा, 'इंडिविजुअल बायर को विदहोल्डिंग टैक्स रजिस्ट्रेशन या टैन, टैक्स पेमेंट, ई-टीडीएस रिटर्न, टैक्स क्रेडिट क्लेम करने के लिए सेलर को टीडीएस सटिर्फिकेट इश्यू करना होगा, बशर्ते इसके लिए कोई आसान रास्ता नहीं सुझाया जाता।'

    फाइनेंस बिल के इस प्रपोजल में यह भी साफ नहीं किया गया है कि लोन लेकर घर खरीदने पर क्या होगा? वहीं, प्रॉपटीर् की ज्वाइंट ओनरशिप होने पर क्या प्रोविजंस होंगे। पीडब्ल्यूसी इंडिया में डायरेक्ट टैक्स लीडर राहुल गर्ग ने कहा, 'इस प्रपोजल में यह माना गया है कि 50 लाख या इससे ज्यादा की डील एक बार में होती है। हालांकि, ऐसे ज्यादा ट्रांजैक्शंस की पेमेंट किस्तों में की जाती है। इनके लिए पेमेंट 3-5 साल के बीच होती है। बिल्डर को किस्तें भी सीधे बैंक से मिलती हैं।' इस प्रोविजन का मतलब यह है कि बायर को हर किस्त पर टीडीएस काटना होगा, बशर्ते इसकी जवाबदेही बैंकों पर नहीं डाली जाती।
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