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Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

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Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

Last updated: July 22 2011
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  • #91

    #91

    Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

    Originally posted by shridhar View Post
    NOIDA EXTENSION IMBROGLIO - Farmers for CBI probe into land allotment

    Farmers for CBI probe into land allotment

    Disgruntled farmers have filed a petition in the Allahabad high court demanding a Central Bureau of Investigation (CBI) inquiry into the allotment of plots in Noida Extension to private builders.
    They alleged that officials took bribe from builders and changed the land use from industrial to residential.
    At a meeting held on Saturday, farmer leader Inder Nagar said, “We have filed a petition in the Allahabad high court seeking a CBI inquiry into the allotment of plots to builders.
    Hearing on the petition is scheduled for Tuesday.“
    “In 2007, the Greater Noida Authority allotted 60% of the acquired land in Noida Extension to private builders though it was acquired for industrial purpose. Officials took huge bribe and converted the land to residential,“ said Nagar.
    The Bharatiya Janata Party has supported farmers' demand of the CBI inquiry. “It is a scam of crore of rupees. If properly investigated, it will expose the nexus between builders and authority,“ said Nawab Singh Nagar, former MLA.
    Authority officials, however, denied the allegations and claimed their motive was solely development of the area and the conversion was done following proper procedure.
    Meanwhile, the Greater Noida police launched a manhunt to arrest the four absconding farmer leaders accused in Bhatta Parsaul clash in which two policemen and two farmers were killed on May 7.
    The main accused Manvir Singh Tevatia was arrested in the Capital recently.
    The court has rejected his bail application few days ago.
    The police is also planning to register a case against those who provided shelter to Tevatia.
    Authority officials in court had claimed that the shifting was done so that industries should not be located near residential localities such as crossing republic. By the same logic FLEX INDUSTRIES which is the biggest industry in Noida/G Noida should not have been located near sector-62/63 which is the most densely populated area in Noida.

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    • #92

      #92

      Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

      नोएडा एक्सटेंशन: जमीन की जंग
      17 Jul 2011, 1115 hrs IST,नवभारत टाइम्स

      Navbharat Times - नोएडा एक्सटेंशन: जमीन की जंग


      ग्रेटर नोएडा में जमीन अधिग्रहण को लेकर जिस तरह का विवाद गहराया है, उसने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राज्यों के मौजूदा जमीन अधिग्रहण संबंधी नियम क्या वाकई पारदर्शी हैं, क्या यह किसानों के साथ-साथ जमीन खरीदने वालों के हितों की रक्षा करने में सफल हैं, क्या यह जरूरी है कि वक्त रहते इसमें इस तरह के बदलाव किये जाए ताकि किसान, बिल्डर्स, प्राइवेट कंपनियां, सरकार के साथ आम ग्राहक को भी कोई परेशानी न हो? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं :

      राज्य बनाम केंद्र

      सबसे पहला सवाल है कि जमीन किसका मामला है। जवाब है, जमीन पूरी तरह से राज्य का मामला है। बेशक केंद्र सरकार इसके नियम बनाती है, मगर उसके उप-नियम बनाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है। ऐसे में राज्यों के पास जमीन अधिग्रहण और आवंटन के ऐसे अधिकार होते हैं, जिसका वह सदुपयोग भी कर सकती है और दुरुपयोग भी।

      कैसी शर्तें

      राज्य सरकार के पास यह अधिकार है कि वह सरकारी उपयोग के लिए या आम आदमी की सुविधाओं वाली जमीन का अधिग्रहण कर सकती है। जैसे रेलवे लाइन बिछाने, सेना के लिए भवन बनाने या सरकारी संस्थान, अस्पताल बनाने के लिये वह जमीन अधिग्रहण कर सकती है। अधिग्रहण दो तरह का होता है। एक सामान्य अधिग्रहण और दूसरा इमरजेंसी अधिग्रहण। सामान्य अधिग्रहण की एक सेट प्रक्रिया है। प्रॉजेक्ट के बारे में लोगों को बताया जाता है। रेट तय किए जाते हैं और फिर अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ होती है। मगर इमरजेंसी अधिग्रहण में ऐसा नहीं होता। सरकार लोगों को नोटिस देती है और खुद ही रेट तय करके जमीन खरीदती है। इसके लिये उसे किसी की इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती। मगर यह काम सरकारी संस्थानों और आम आदमी की सुविधाएं देने वाले प्रॉजेक्टों के लिए कर सकती है।

      अलग-अलग नियम :

      देश के राज्यों में अलग-अलग नियम हैं। राजस्थान में यह नियम बना था कि किसानों से जमीन अधिग्रहण के बाद उनको प्रोजेक्टों में हिस्सेदारी दी जाए। इस मामले में हरियाणा के भूमि अधिग्रहण नियमों को बेहतर माना जाता है। हरियाणा सरकार ने यह छूट दी है कि खरीद-बिक्री करने वाले आपस में सौदा कर सकते हैं। मगर उसके लिए उसने कुछ शर्तें रखी हैं। अगर कोई टाउनशिप बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण करता है तो उसको जमीन की साइज की शर्तें को पूरा करना होगा। इसी तरह से हाउसिंग सोसायटी के लिए तय भूमि होने पर उसकी अनुमति दी जाएगी। सरकारी विकास की योजना के अलावा राज्य सरकार अन्य किसी कार्य के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं करती। बेशक हुड्डा हाउसिंग प्रोजेक्टों के लिए जमीन लेती है।

      ग्रेटर नोएडा का मामला

      एक्सपर्ट के अनुसार, ग्रेटर नोएडा का मामला इसलिए ज्यादा विवादित हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला दिया, क्योंकि इसका अधिग्रहण इमरजेंसी प्रक्रिया के तहत किया गया। रीयल स्टेट की रिसर्च कंपनी, आगटिक्स के एमडी मनोज मिश्रा कहते हैं कि ग्रेटर नोएडा के मामले में दो बातें अहम रही। इस भूमि का अधिग्रहण सामान्य तौर पर होना चाहिए था। मगर ऐसा नहीं हुआ। दूसरी बात, इसका अधिग्रहण यह कहकर किया गया था कि इस पर उद्योग बनेंगे। मगर बाद में इसे बिल्डर्स को दे दिया गया। इसके चलते फैसला सरकार के पक्ष में नहीं गया। उद्योग बनाने के नाम पर किसानों से कम दामों पर जमीन ली गई। मगर बाद में उसे बिल्डर्स को बहुत ऊंची कीमत पर बेच दिया गया। इससे किसानों को लगा कि उन्हें तो घाटा हुआ है।

      वैसे, ग्रेटर नोएडा में लंबे समय से इस एक्ट में बदलाव की मांग होती रही है। 1982 में किसान नेता और नोएडा जन सहयोग समिति के अध्यक्ष चौ. बिहारी सिंह की अगुवाई में किसानों ने सरकार से इस ऐक्ट में बदलाव की मांग की थी। बाद में जमीन का मुआवजा बढ़ाने और ऐक्ट में बदलाव को लेकर समिति के बैनर तले लंबा आंदोलन भी चलाया गया, पर किसानों का मानना है कि सरकार ने उनसे ज्यादा बिल्डरों के हितों को तवज्जो दी।

      डैमेज कंट्रोल

      किसानों के आंदोलन पर उतरने और भट्टा पारसौल में हिंसा भड़कने के बाद यूपीए सरकार ने डैमेज कंट्रोल करने के लिए किसानों का क्षतिपूर्ति मुआवजा बढ़ा दिया। जमीन के बदले प्लॉट देने की बात कही। यह भी आश्वासन दिया कि प्रॉजेक्ट बनने के बाद एन्यूटी (वार्षिक भत्ते) के तौर पर उन्हें हर साल कुछ धनराशि मिलती रहेगी। मगर किसानों ने सरकार के इन बदले नियमों को ज्यादा वजन नहीं दिया। उनकी मांग यही है कि उन्हें अपनी जमीन का वाजिब दाम दिया जाए।

      केंद्र का मॉडल

      केंद्र सरकार अब जमीन अधिग्रहण पर ऐक्ट लाने की बात कर रही है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार इसमें तीन प्रमुख प्रावधान करेगी। पहला, जमीन का अधिग्रहण मार्केट रेट पर किया जाए। दूसरा, प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। यानी जमीन अधिग्रहण में शामिल हर पक्ष को खरीददारी से लेकर बिक्री राशि के बारे में पूरी जानकारी दी जाए। तीसरा, किसानों के लिए सालाना भत्ते का इंतजाम हो।

      जहां पेंच है

      जमीन अधिग्रहण के इस मामले में पेंच यह है कि जमीन की मार्केट रेट तय करने का पैमाना क्या हो? सरकार जब किसान से जमीन खरीदेगी तो वह अनडिवेलप्ड (अविकसित) क्षेत्र के तहत होगा। स्वाभाविक बात है कि मार्केट रेट भी अनडिवेलप्ड क्षेत्र के अनुसार तय होगा। विनायक इंक के प्रमुख विजय सिंह का कहना है कि जब सरकार किसानों या किसी अन्य से जमीन खरीदती है तो उस वक्त क्षेत्र अविकसित होता है। बाद में सरकार उसको विकसित करती है। ऐसे में सरकार जो दाम किसानों को देगी और बाद में प्लॉट विकसित कर अन्य को बेचेगी, उसमें फर्क होगा। ऐसे में इस बात को पहले ही साफ कर देना चाहिए कि अगर खरीद और बिक्री राशि में फर्क हुआ तो ज्यादा विवाद नहीं होना चाहिए। ग्रेटर नोएडा में विवाद का यही कारण है।

      इसके लिये किसानों का वार्षिक भत्ता तय करने पर भी पेंच फंसा हुआ है। भत्ता कैसे तय होगा। अगर कोई उसमें इंडस्ट्रीज लगती है, तो क्या उससे मिलने वाले टैक्स के आधार पर सरकार वार्षिक भत्ता तय करेगी। जिस कंपनी ने वहां पर इंडस्ट्री लगाई, उसको किसानों और उसकी जमीन से कोई सरोकार नहीं होगा। तब यह वार्षिक भत्ता किस आधार पर तय होगा, उसको भी साफ कर देना चाहिए।

      प्राइवेट सेक्टर की चाहत

      जमीन अधिग्रहण मामले में नीतियां एकदम साफ होनी चाहिए। जब भी अधिग्रहण हो, हरेक पक्ष को उसमें बराबर शामिल किया जाए। चाहे वह किसान हो, बिल्डर्स, प्राइवेट कंपनियां हो या फिर संबंधित अथारिटी के नुमाइंदे। जमीन अधिग्रहण के समय सबको यह पता चल जाए कि किस उद्देश्य के लिए जमीन अधिग्रहण की जा रही है। इस उद्देश्य पर जमीन देने वाले की सहमति हो। बाद में उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाए। अगर सरकार इस पर रजामंद हो तो वह जमीन मालिकों और प्राइवेट सेक्टर को सीधे सौदे करने की इजाजत दे सकती है।

      बाद में राज्यों में तय कानून के तहत सौदे पूरे किए जाएं। इस तरह के सौदों में किसान, खरीददार कंपनी के प्रोजेक्टों में साझेदार भी बन सकते हैं। क्षेत्र को बुनियादी तौर पर विकसित करने का खर्चा सरकार उठाए। इससे प्राइवेट सेक्टर को दूर रखा जाए। एक बार किसानों या बेचने वालों के लिए मुआवजा तय होने पर, उसमें बदलाव न किया जाए। मुआवजे की राशि आपसी बातचीत के द्वारा तय की जाए। अविकसित क्षेत्र के माकेर्ट रेट पर मुआवजा तय हो। खरीद और बिक्री राशि तय होने और उसकी जानकारी देने के बाद ऐसा प्रावधान किया जाए कि इसको कही भी चुनौती नहीं दी जा सके। इसके अलावा एक नियम बनाया जाए कि अगर किसान कृषि भूमि नहीं बेचना चाहते तो उस पर कृषि ही होगी, उसका अन्य कामों के लिये इस्तेमाल नहीं होगा।
      अनिल शर्मा, बिल्डर्स असोसिएशन क्रेडाई के वाइस प्रेसिडेंट (एनसीआर)

      किसानों का पक्ष, धोखाधड़ी रुके

      भूमि अधिग्रहण के मामले में सबसे अधिक धोखाधड़ी किसानों के साथ हो रही है। मौजूदा नियम में यह साफ तौर पर लिखा है कि सरकार को अपने काम के लिए ही कृषि भूमि का अधिग्रहण करना चाहिए। साथ में उसे किसानों को जमीन की वाजिब कीमत मिलनी चाहिए। मगर ऐसा कहां हो रहा है? ग्रेटर नोएडा के मामले में किसानों को माकेर्ट रेट से कहीं कम दाम मिले। ऐसा कब तक चलेगा।

      इस मामले में कुछ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। पहले यह हो कि किसानों का मार्केट रेट पर जमीन मिले। दूसरे, सरकार अगर उस जमीन का इस्तेमाल अपने लिए नहीं कर रही है तो उसका खुलासा होना चाहिए। अगर वह किसी अन्य को बेच रही है तो जितने मार्केट रेट पर उसको बेचा गया, उसके अनुसार किसानों को उनकी जमीन की कीमत मिलनी चाहिए। तीसरी और सबसे अहम बात है कि किसानों से जिन उद्देश्यों के लिए जमीन ली जा रही है, उन प्रोजेक्टों को समय पर पूरा होना चाहिए। अगर वे प्रॉजेक्ट तय समय पर पूरे नहीं होते तो उस जमीन को वापस किसानों को लौटा देनी चाहिए। जाहिर है, किसान जमीन इसलिए बेच रहा है कि उद्योग लगे, कुछ अन्य प्रॉजेक्ट स्थापित किया जाएं ताकि उसको भी कुछ फायदा हो। होता यह है कि सरकार ने जमीन खरीद कर रख लिया, उस पर किया कुछ नहीं। बाद में जब कीमतें बढ़ गइंर् तो उसको अन्य प्रॉजेक्टों के लिए किसी दूसरी पार्टी को ज्यादा कीमत पर बेच दिया। यह भी तो किसानों के साथ धोखाधड़ी है।
      अजित सिंह,किसान नेता और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष

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      • #93

        #93

        Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

        Just saw Zee news.. Now Noida ext association/buyers will move to HC against previous order

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        • #94

          #94

          Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

          Originally posted by fritolay_ps View Post
          Just saw Zee news.. Now Noida ext association/buyers will move to HC against previous order
          CAVEAT APPLICATION! This is what should have been done in SC before in Shahberi case: But builders like Supertech kept customers in dark, and ruined both the customers and themselves.

          I was wondering why not caveat application till date by the customers? This is a good development, and believe me, customers will benefit.
          Best of luck.

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          • #95

            #95

            Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

            Greater Noida flat owners urge HC to hear their views

            Fearing cancellation of land acquired by development
            authorities in other parts of Noida Extension as well, around one lakh
            flat owners on Sunday demanded they should be given an opportunity to
            be heard by the Allahabad High Court when it takes up various
            petitions filed by the farmers.

            Earlier this month, the Supreme Court had upheld the Allahabad High
            Court's decision to quash 156 hectares of land in Sahberi village in
            Noida Extension, a part of Greater Noida , acquired from farmers by
            the local development authority.

            Noida Extension Flat-Buyers Welfare Association , formed to protect
            the interest of those who have booked flats in entire Noida Extension,
            said after Supreme Court's order farmers from adjoining villages have
            also approached Allahabad High Court through writ petitions
            challenging the acquisition of their land as well.

            The association pointed out that the total number of flat-buyers
            affected in Shahberi was only 6500, but the people who have booked
            flats in post-Shahberi cases are about one lakh.

            "The land in other parts of Noida Extension was also acquired with the
            same procedure which was followed in Shahberi village.

            "It is feared that the Allahabad High Court may take the same grounds
            and quash the land acquisition in other parts of Noida Extension as
            well... bonafide flat-buyers will suffer huge and irreparable losses
            on account of any hard decision in post-Shahbari cases," the
            association said in a statement.


            http://economictimes.indiatimes.com/news/politics/nation/greater-noida-flat-owners-urge-hc-to-hear-their-views/articleshow/9261403.cms

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            • #96

              #96

              Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

              फ्लैट बुकिंग पर निवेशक कोर्ट में रखेंगे अपना पक्ष


              बिल्डर मामले में निवेशक भी हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। इसके लिए रविवार को नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट बायर वेलफेयर एसोसिएशन के कोर समूह व अन्य सदस्यों ने बैठक की। बैठक में निर्णय लिया गया कि 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई से पहले निवेशक कानूनी तरीके से अपना पक्ष कोर्ट में रखेंगे। जिससे उनके अधिकारों का हनन न हो और उनकी बात भी कोर्ट के सामने पहुंचे।
              सेक्टर-61 में हुई खुली बैठक में निवेशकों ने कहा कि कोर्ट का निर्णय उन्हें मंजूर होगा, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन निवेशकों को अपना पक्ष सुनवाई से पहले रखना होगा। जिससे उनकी बात भी कोर्ट के संज्ञान में आए। फैसला आने के बाद निवेशकों के पास कोई रास्ता नहीं बचेगा। इसलिए सोमवार से इस प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए निवेशक अपनी लड़ाई कानूनी रूप से लड़ेंगे। निवेशकों के मुताबिक पिछली बार आए निर्णय को निवेशक मानते हैं, लेकिन अगर निवेशकों का पक्ष कोर्ट के सामने होता तो नतीजा कुछ और हो सकता था। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि नोएडा एक्सटेंशन के कई मामले कोर्ट में लंबित हैं। इनकी सुनवाई 21 जुलाई को होनी है। इस सुनवाई से पहले निवेशक लीगल काउंसिल के माध्यम से कोर्ट में जाएंगे। बैठक में चार सौ कोर समूह सदस्यों सहित लगभग आठ सौ निवेशक मौजूद रहे।

              -Dainik Jagran

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              • #97

                #97

                Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

                Farmers are now ready to sell their so called "Mother" at higher price.
                Attached Files

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                • #98

                  #98

                  Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

                  Land taken for public use cannot be re-allotted: Supreme Court

                  The Supreme Court has ruled that land acquired for “public purpose” cannot be further allotted to “other beneficiaries” who might be engaged in a private venture.

                  The apex court pulled up a division bench of Rajasthan high court which had approved a ‘so-called’ policy ignoring the fact that people with connection in the power corridors and the economically affluent had illegally taken possession of acquired land and raised construction.

                  “What the high court has done is to legitimise the transactions, which were declared illegal by this court and was clearly impermissible. The HC’s understanding of the so-called policy framed by the government was clearly erroneous,” a bench of Justice GS Singhvi and Justice AK Ganguly held last week.

                  This bench had earlier scrapped allocation of farmers’ land in Greater Noida area by the Mayawati government to some builders and realty players who wanted to construct to commercial complexes, sky-rocket residential buildings, formula race tracks and multiplexes.

                  In this case, the government took away land from farmers at a throw-away price, saying it was needed for “public purpose”, but later passed it on to the rich and politically influential builders for putting up their dream projects. The state then charged many times more from the builders

                  http://www.dnaindia.com/india/report...-court_1566738

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                  • #99

                    #99

                    Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

                    Let's wait and watch what's instore for this week. I think this is going to be a landmark week for the future of NE.
                    Hopefully...better sense prevails.

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                    • Re : Bisrakh Stay Order: NOIDA's Doomsday Starts Now!

                      नोएडा एक्सटेंशन में निवेशकों का बड़ा खेला

                      लाख टके का सवाल है कि नोएडा एक्सटेंशन में आशियाना चाहने वाले एंड यूजर हैं या निवेशक। दरअसल, दो का चार बनाने की कोशिश में इन प्रोजेक्टों में पैसा लगाने वाले अधिकांश निवेशक ही बताए जाते हैं। यही कारण है, कि करीब एक लाख फ्लैटों की बुकिंग शुरू हुए महीनों बीतने के बाद भी बैंक लोन के लिए आधे भी लोग नहीं पहुंचे। जबकि एक्सटेंशन में अभी तक हुआ एक लाख खरीदारों का भुगतान ही एक अनुमान के अनुसार ३० अरब के पार कर गया है। निवेशकों व बिल्डरों के लिए यह भी पहला अनुभव है, कि सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि विवाद में फंसी हो। जाहिर है कि मंदी के दौर से गुजरने के बाद निवेशकों के लिए यह एक और बड़ा झटका है। दूसरी ओर अधिकांश बिल्डर नोएडा एक्सटेंशन में ज्यादा एंड यूजर के आने का ही दावा कर रहे हैं।

                      नोएडा एक्सटेंशन में करीब २.२५ लाख फ्लैट प्रस्तावित हैं। इनमें से करीब एक लाख की बुकिंग हो चुकी है और शाहबेरी मामले में आए फैसले से ६००० से अधिक खरीदार प्रभावित हुए हैं। इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या यह वाकई मकान की चाह रखने वाले लोग थे, या अपना पैसा कई गुना करने वाले निवेशक। फ्लैट बुक कराने वाले लोगों से पूछा गया, तो उनमें बहुत लोगों का कहना था कि पहले से ही अपने मकान में रहने व सालों बाद पजेशन मिलने की संभावना के चलते उन्होंने निवेश के इरादे से पैसा लगाया था। जबकि कुछ निवेशक प्रॉपर्टी डीलर व बिल्डर से पूर्व में जुड़े होने के कारण यहां आए। एंड यूजर की संख्या भी एनसीआर में अन्य प्रोजेक्टों के मुकाबले यहां ज्यादा तो बताई जा रही है, लेकिन बहुतायत में निवेशक ही माने जाते हैं। मार्केट के जानकारों के अनुसार निवेशक एंड यूजर को मकान की फिनिशिंग के समय तलाश कर मुनाफा कमाते हैं, कुछ इस तरह की सोच नोएडा एक्सटेंशन के खरीदारों की थी।


                      हेजिंग यानि सेमी इंवेस्टमेंट
                      नोएडा एक्सटेंशन में हेजिंग यानि सेमी इंवेस्टमेंट करने वालों की संख्या भी कम नहीं है। दरअसल, १८ लाख रुपये तक में टू बेडरूम फ्लैट मिलने पर लोग इस संभावना को तलाशते हैं कि इतनी ही राशि खर्च पाने की हैसियत होने पर फिलहाल इसमें निवेश कर लिया जाए। ज्यादा जगह की जरुरत होने पर वे आने वाले दिनों में इस प्रॉपर्टी के रेट बढ़ने पर उससे कमाए लाभ में और धन जोड़कर किसी दूसरे स्थान पर प्रॉपर्टी खरीद लेंगे।

                      -Amar Ujala

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