Noida Extension Buyers Take on Builders

Home buyers who have invested in Noida Extension Real Estate projects are connecting online through discussion forums, facebook and other websites to vent out frustration against the builder lobby. Almost 100 people have signed up as members of a Facebook group that calls itself, 'Noida Extension Owners and Members Association'. The members include professionals from all walks of life.

NEOMA - Noida Extension Owners And Members Association is Noida extension owners and member association. The purpose and objective of NEOMA is to keep updated to all the Future residents of the Noida /Noida Ext. based on the users feedback. User can make their decision, owners can raise their voice in case of any issues.

------------------------------------------------------------------------
Supreme Court - Noida Extension News

Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।
Read more
Reply
543 Replies
Sort by :Filter by :
  • नोएडा एक्सटेंशन: 40 हजार निवेशक टेंशन में


    नोएडा एक्सटेंशन के शाहबेरी मामले में बुधवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के ऑफिसर, निवेश और प्रभावित बिल्डर्स टेंशन में आ गए हैं। नोएडा एक्सटेंशन में घर का सपना संजोने वाले हजारो निवेशक भी भारी टेंशन में हैं। अथॉरिटी के आला ऑफिसर सीनियर वकीलों के साथ फैसले को समझने में जुटे हैं। इधर बिल्डर रिव्यू पिटिशन डालने के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं। इस फैसले का असर अथॉरिटी की सेहत पर भी पड़ सकता है। इस फैसले के बाद नोएडा एक्सटेंशन के अलावा ग्रेनो और यमुना अथॉरिटी एरिया में निवेश करने वाले लोग घबरा गए हैं।

    ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी जनवरी 2010 में बिल्डरो के लिए स्कीम लाई थी। किसानों से अथॉरिटी ने 850 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से जमीन लेकर बिल्डरों को पहले 10,500 रुपये और बाद में 11 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से दिया था। अथॉरिटी ने बिल्डरो से 30 % रकम डाउन पेमेंट के रूप में लिए और बाकी बचा पेमेंट 10 साल के स्टॉलमेंट पर लिया जाना है। शाहबेरी में 8 बिल्डरों के प्रॉजेक्ट हैं, लेकिन अगर पूरे नोएडा एक्सटेंशन की बात करें तो यहां करीब 50 बिल्डरों के प्रॉजेक्ट पर काम चल रहा है। अथॉरिटी और बिल्डरो की सुप्रीम कोर्ट में याचिका रद्द होने से अब नोएडा एक्सटेंशन के सभी बिल्डरो में बेचैनी है।

    दूसरे बिल्डर भी चिंता में डूबे
    इस निर्णय से फिलहाल जो बिल्डर प्रभावित नहीं हैं उन्हें भी यह भय सता रहा है कि अगर किसान कोर्ट चले गए तो उनकी जान को भी आफत आ सकती है। इधर, अथॉरिटी ने भी सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन दायर करने से पहले एक महीने तक पूरी तैयारी की थी। अथॉरिटी को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट में फेवर में फैसला आएगा। लेकिन याचिका रद्द होने के बाद अब अथॉरिटी को बड़ा झटका लगा है। आगे का रुख तय करने के लिए अथॉरिटी के चेयरमैन मोहिंद्र सिंह और सीईओ रमा रमण सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकीलो के साथ मीटिंग कर राय-मशविरा कर रहे हैं। हालांकि अथॉरिटी कोई भी कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पूरा अध्ययन करने के बाद ही करेगी।

    क्या होगा निवेशकों का
    सुप्रीम कोर्ट में याचिका रद्द होने से उन 40 हजार निवेशको की सांसे थम गई हैं, जिन्होंने नोएडा एक्सटेंशन में निवेश किया है। निवेशको को अपने पैसे डूबने का भय सता रहा है। नोएडा एक्सटेंशन में थ्री बीएचके फ्लैट की बुकिंग कराने वाले पवन मंगल ने बताया कि अब वह अपनी बुकिंग कैंसल कराना चाहता है। लेकिन उसे इस बात का डर है कि बिल्डर उनके पैसे नहीं लौटाएगा। यदि लौटाएगा तो उसे पूरा पैसा नहीं मिलेगा। नोएडा एक्सटेंशन में करीब सवा लाख फ्लैट बनाए जा रहे हैं।

    अथॉरिटी को जोर का झटका
    सुप्रीम कोर्ट में याचिका रद्द होने का असर अथॉरिटी की सेहत पर भी पड़ना तय है। इस फैसले के बाद यदि जल्द कोई अन्य सेटलमेंट नहीं होता है तो सभी बिल्डर्स स्टॉलमेंट की पेमेंट रोक देंगे। फिलहाल अथॉरिटी के कमाई का सबसे बड़ा जरिया यही स्कीम हैं। अगर बिल्डरो से पैसा नहीं मिलता है तो पैसो की कमी के कारण मेट्रो व विकास संबंधित अन्य प्रोजेक्ट भी प्रभावित हो सकते हैं।

    _navbharat times
    CommentQuote
  • Yes. as rightly suggested we should have a list of all projects being affected by the ruling and what action is being taken in each project would be good information worth sharing with forum members.
    CommentQuote
  • नोएडा एक्सटेंशन में बढ़ी टेंशन

    ग्रेटर नोएडा: नोएडा एक्सटेंशन को लेकर प्राधिकरण सहित बिल्डरों और निवेशकों की टेंशन (चिंता) बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने साबेरी गांव में हाईकोर्ट के जमीन अधिग्रहण रद करने के फैसले पर मुहर लगा दी है। इससे खलबली मच गई है, हर कोई जानने में लगा है कि जिस प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था उसकी क्या स्थिति है। प्रभावित जमीन पर कुल आठ हजार फ्लैट बनने थे। अधिकांश की बुकिंग हो चुकी है और अब निवेशक बेचैन हैं। इस निर्णय से सात बिल्डरों की परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं तथा नोएडा एक्सटेंशन में वीरानी छा गई है। बुकिंग स्टॉल सूने पड़े हैं। बहरहाल इस मामले को लेकर गहमागहमी जारी है।

    सूत्रों के मुताबिक, प्राधिकरण व बिल्डर दोनों मिलकर किसानों से सीधे जमीन खरीदने का प्रयास कर रहे हैं। उधर, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद किसान जमीन न देने पर अड़ गए हैं। उनका कहना है कि वे किसी भी कीमत पर जमीन नहीं बेचना चाहते। वह इस पर खेती करेंगे।

    किन बिल्डरों पर पड़ेगा असर : सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सुपरटेक, आम्रपाली, महागुन, पंचशील, गुलशन होम, श्रीजी हाउस का एक-एक प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ है। शहर में चल रहे अन्य प्रोजेक्टों पर कोई असर नहीं पडे़गा। एम्स बिल्डर को भी साबेरी गांव में जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन उसने पहले ही जमीन प्राधिकरण को वापस कर दी है।

    किस बिल्डर का कितना क्षेत्रफल प्रभावित : साबेरी गांव में आम्रपाली को 35 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी, उसका संपूर्ण भाग प्रभावित हुआ है। सुपरटेक को 80 एकड़ जमीन आवंटित हुई थी, लेकिन उसकी सिर्फ पांच एकड़ जमीन प्रभावित हुई है। पंचशील की 20 एकड़ जमीन में से चार एकड़, महागुन की 40 में से करीब दस एकड़ जमीन प्रभावित हुई है। गुलशन होम को 15 एकड़ व श्रीजी हाउस को 50 एकड़ जमीन आवंटित हुई है, जो प्रभावित होगी।

    प्रभावित प्रोजेक्टों में कितने बनने थे फ्लैट : आम्रपाली बिल्डर के प्रभावित प्रोजेक्ट में पांच हजार फ्लैट बनाए जाने प्रस्तावित थे। प्रोजेक्ट में सभी फ्लैटों की बुकिंग भी हो चुकी है। सुपरटेक ने प्रभावित क्षेत्र पर योजना नहीं निकाली। महागुन ने भी साबेरी में प्रभावित भूखंड पर योजना नहीं निकाली। पंचशील बिल्डर 2500 फ्लैट बना रहा है, जिनमें से 400 फ्लैट प्रभावित हुए हैं। प्रभावित फ्लैटों में से सिर्फ 124 फ्लैट ही बुक हुए थे।

    प्रभावित जमीन के कितने क्षेत्रफल पर हुआ निर्माण : सात बिल्डरों को एक वर्ष पहले साबेरी गांव में भूखंड आवंटित किए गए थे। दो बिल्डरों ने अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है। पांच बिल्डरों का मौके पर 25 से 30 प्रतिशत निर्माण कार्य हो चुका है।

    बेहतर विकल्प को चुनेंगे निवेशक : विभिन्न बिल्डरों के प्रोजेक्टों में फ्लैट बुक कराने वाले निवेशकों का कहना है कि अभी तक वे कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे थे। अब बिल्डरों से बात की जाएगी। निवेशक जयवीर, राहुल, ओपी सिंह व राजेश ने बताया कि बिल्डर यदि दूसरे प्रोजेक्टों में बेहतर विकल्प देंगे तो वे फ्लैट लेने को तैयार हैं। दूसरे प्रोजेक्ट की लोकेशन देखी जाएगी। प्रोजेक्ट लोकेशन ठीक नहीं हुई तो वे रुपये वापस लेने की मांग करेंगे।

    कर्ज देने वाले बैंकों की चिंता भी बढ़ी : निवेशकों ने बैंकों से महंगी ब्याज दरों पर कर्ज लेकर फ्लैट बुक कराए थे। सूत्रों के मुताबिक निवेशक फ्लैट की कुल कीमत में से 30 से 40 प्रतिशत कीमत का भुगतान कर चुके हैं। कोर्ट के निर्णय ने बैंकों की चिंता भी बढ़ा दी है। ग्रेटर नोएडा स्थित कुछ बैंकों के प्रबंधकों ने कहा कि अभी वे यह पता लगा रहे हैं कि किन निवेशकों पर असर पड़ा है। उनसे बात कर रास्ता निकाला जाएगा। वे दूसरी जगह फ्लैट लेंगे तो बैंक कर्ज देने से पीछे नहीं हटेंगे। निवेशकों ने बिल्डरों से पैसा वापस मांगा तो वह भी अपनी धनराशि की मांग करेंगे।

    प्राधिकरण अधिकारियों ने साधी चुप्पी
    ग्रेटर नोएडा : जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। अधिकारी इस मुद्दे पर बात करने से कतराते रहे। जानकारी मिली है कि प्राधिकरण कोर्ट के फैसले की प्रति मिलने का इंतजार कर रहा है। आदेश का अध्ययन करने के बाद ही प्राधिकरण अधिकारी कोई बयान जारी करेंगे।

    -Dainik Jagran
    CommentQuote
  • Good to see that flat buyers in Noida Extension have already formed an Association named as NEOMA.

    Noida - Noida Ext Owners and Members Association

    I feel it is right step in the current scenario..
    CommentQuote
  • फैसले से जागे कई और गांवों के किसान


    नोएडा एक्सटेंशन में जमीन अधिग्रहण रद्द होने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे और यमुना अथॉरिटी एरिया में भी बिल्डरांे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नोएडा एक्सप्रेस-वे के किनारे बसे कई गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट की शरण ली है। वहीं, यमुना अथॉरिटी एरिया के किसान भी हाई कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।

    अधिग्रहण के खिलाफ झट्टा, कामनगर, डेरीन, शफीपुर आदि गांवांे के किसान हाई कोर्ट मंे याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। शफीपुर गांव के कई किसान पहले ही हाई कोर्ट से स्टे ले आए हंै। भट्टा-पारसौल गांव के किसान बंुदू खां का कहना है कि यमुना अथॉरिटी जबरन अधिग्रहण कर रही है। कई गांवांे में तो अभी तक जमीन अधिग्रहीत भी नहीं की गई है, लेकिन अथॉरिटी ने बिल्डरों को जमीन अलॉट कर दी है। वहीं, नोएडा एक्सटेंशन में कोर्ट के फैसले का बीएसपी को छोड़कर अन्य राजनैतिक दलांे के नेताआंे ने स्वागत किया है।

    बीजेपी के सीनियर लीडर नवाब सिंह नागर का कहना है अथॉरिटी ने किसानों की जमीन अधिग्रहीत करके बिल्डरों के लिए लूट मचा रखी थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से किसानों को लूट से बचाया जा सकेगा। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विक्रम भाटी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला देकर उन्हें न्याय देने का काम किया है। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करती है। आरएलडी के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का कहना है कि प्रदेश सरकार के इशारे पर अथॉरिटी किसानों की बेशकीमती जमीन को औने-पौने दामों में अधिग्रहीत कर बिल्डरों को दे रही थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शाहबेरी के किसानांे की तरह अन्य गांवों के किसानों को भी लाभ मिलेगा।


    मुआवजा लेने वाले किसान भी जोश में

    ग्रेटर नोएडा :

    अथॉरिटी से मुआवजा उठाने वाले किसान भी मुआवजा बढ़ाने के लिए अथॉरिटी पर दबाव बना सकते हैं। ऐसा न होने पर किसान कोर्ट जाने के विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं।

    शाहबेरी मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले किसानों की चांदी हो गई है। बिल्डर इन किसानों से जमीन खरीदने का पूरा प्रयास करेंगे। किसानों को उम्मीद है कि उन्हें मुंहमांगी कीमत मिल जाएगी। लेकिन वैसे किसान सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ठगा महसूस कर रहे हैं , जिन्होंने अथॉरिटी से मुआवजा उठा लिया था। जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन से जुड़े पवन शर्मा ने बताया कि किसान जल्द मीटिंग करेंगे। उन किसानों को भी लाभ मिलना चाहिए , जिन्होंने मुआवजा उठा लिया है। इस मामले में किसान अथॉरिटी पर यह कहकर दबाव बना सकते हैं कि यदि उन्हें बढ़ाकर मुआवजा नहीं दिया गया तो वह मुआवजा लौटा कर अपनी जमीन वापस ले लेंगे। किसान कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते है ं।

    -navbharat times
    CommentQuote
  • बिल्डर को है विकल्प की तलाश


    बिल्डरों की पहली प्राथमिकता निवेशकों के हितों की रक्षा करनी है। किसी भी निवेशक का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इस पूरे मामले में बिल्डर्स की कोई गलती नहीं है। बिल्डरों ने प्रदेश सरकार और अथॉरिटी के नियमों के तहत प्लॉट लिया है। प्रोजेक्ट में निवेशकों के अलावा बैंकों का पैसा भी लगा है। -मनोज गौड़, चेयरमैन, गौड़ संस


    ग्रेटर नोएडा

    शाहबेरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिल्डर विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। प्रभावित बिल्डर्स ने सभी रास्ते खुले रखे हैं। इसमें किसानों से सीधे जमीन लेने, अथॉरिटी से दूसरी जगह जमीन की मांगने और सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल करने पर विचार किया जा रहा है। बिल्डर्स असोसिएशन ने अथॉरिटी से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अथॉरिटी ने दो दिन का समय मांगा है।

    गॉड संस के चेयरमैन और सीआरईडीएआई (वेस्टर्न यूपी) के प्रेजिडेंट मनोज गौड़ का कहना है कि बिल्डरों की पहली प्राथमिकता निवेशकों के हितों की रक्षा करनी है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी निवेशक का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले में बिल्डर्स की कोई गलती नहीं है। बिल्डरों ने प्रदेश सरकार और अथॉरिटी के नियमों के तहत प्लॉट लिया है। उन्होंने बताया कि बिल्डरों के प्रोजेक्ट में निवेशकों के अलावा बैंकों का पैसा भी लगा है।

    आम्रपाली ग्रुप के इग्जेक्युटिव डायरेक्टर शिव प्रिय का कहना है कि उनके प्रोजेक्ट के निवेशकों को ग्रेटर नोएडा के ड्रीम वैली प्रोजेक्ट में शिफ्ट किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नोएडा एक्सटेंशन में निवेशकों को 1800 रुपये /स्क्वायर फीट के रेट से फ्लैट की बुकिंग की गई थी। वहीं ड्रीम वैली प्रोजेक्ट में 2200 रुपये/स्क्वायर फीट के रेट से फ्लैट दिया गया है। शिव ने बताया कि अथॉरिटी से किसी अन्य स्थान पर जमीन देने की मांग की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट में रिव्यू पिटिशन डालने पर भी विचार किया जा रहा है।

    अजनारा ग्रुप के चेयरमैन अशोक अजनारा का कहना है कि उनकी कंपनी और गुलशन होम ने संयुक्त रूप से प्लॉट लिया था। अजनारा ग्रुप की 56 हजार वर्गमीटर में से सिर्फ 500 वर्गमीटर जमीन प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि अगर किसान वार्ता के लिए आते हैं , तो उनका स्वागत है। सुपरटेक के जीएम कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन धनंजय श्रीवास्तव का कहना है विवादित प्लॉट पर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया गया है। प्रोजेक्ट पूरी तरह सुरक्षित है। कंपनी अब इस मामले में किसानों से डायरेक्ट बात नहीं करेगी। कंपनी ने टेंडर प्रकिया के तहत अथॉरिटी से जमीन ली है। इस मामले में अब अथॉरिटी से ही किसी अन्य जगह जमीन देने की मांग की जाएगी।

    -navbharat times
    CommentQuote
  • मेट्रो प्रोजेक्ट भी हो सकता है प्रभावित


    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अथॉरिटी की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। फाइनेंशल कंडिशन गड़बड़ाने से मेट्रो जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी प्रभावित हो सकते हैं। अगर जल्द कोई अन्य सेटलमेंट नहीं होता है, तो सभी बिल्डर्स पेमेंट रोक देंगे। फिलहाल अथॉरिटी के कमाई का सबसे बड़ा जरिया यही स्कीम हैं। इस निर्णय के बाद ग्रेनो और यमुना अथॉरिटी एरिया में निवेश करने वाले लोग भी घबरा गए हैं। अगले कदम के लिए अथॉरिटी के चेयरमैन मोहिंदर सिंह और सीईओ रमा रमण सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकीलों के राय-मशविरा कर रहे हैं। अथॉरिटी कोई भी कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पूरा अध्ययन करने के बाद ही उठाएगी।


    -Navbharat times
    CommentQuote
  • We have got our mother back,justice prevailed

    Farmers Celebrate SC Verdict,Some Say Theyre Open To Selling Land Directly To Builders At Higher Rates On Own Terms

    Greater Noida: A wave of celebration and joy swept through Sahberi village of Greater Noida as residents felt vindicated on Wednesday.The Supreme Court upheld the Allahabad High Court order quashing the Greater Noida Authoritys acquisition of land in this village.

    Villagers celebrated the news by bursting fire crackers and distributing sweets.At several choupals in the village,the young and the old alike danced to the beats of drums.It has been a long wait for us and we welcome the decision of the Supreme Court, said Sarafat Ali,one of the villagers.

    The court was right in saying that land is the mother of farmers.We have got our mother back, added Ali,who,along with other villagers,had been arrested while protesting against construction activity carried out by builders in Sahberi despite a status quo imposed by the Allahabad High Court last year.

    The battle they have been fighting finally paid off.Neither the Greater Noida Authority,nor the builders listened to us then.Our protests were suppressed.Justice has prevailed today, added Ali.

    For the past few years villagers have resisted tooth and nail all attempts by builders to acquire their land at throwaway prices.The villagers never accepted the compensation offered to them.In the past few days,builders had been going home to home in the village trying to appease farmers and even bribe them, said Shiv Kumar Sharma,another farmer of Sahberi.

    However,opinion seems to be divided among the young and old as to what they would do with their land now that they have got back possession.We are open to selling our land directly to builders at a higher cost,but on our own terms and conditions, said Pradeep Sharma,a young farmer from Shahberi.

    The older generation disagrees.We dont know anything other than farming and we will continue to farm our lands, said Sarafat Ali.

    Devender Kumar Sharma,one of the petitioners for the farmers in the Allahabad High Court,said,There were five builders Mahagun,Supertech,Amrapali,Panchsheel and Ajnara which were trying to erect boundary walls for their projects.But we protested and stopped their work.

    While the SC verdict has brought about relief for farmers,it has also set panic among thousands of middle-class households who had invested in flats in Greater Noida.

    Ravikant Pandey,a quality analyst with a firm,said,The Supreme Court decision is welcome but it should also cast its attention upon thousands of innocent middleclass families who have invested in flats in Greater Noida.Their dreams of owning a house have been crushed.
    Other villages of Greater Noida also plan to go the Sahberi way if land is forcibly taken.

    We will go to the Supreme Court when the urgency clause is applied on our lands for acquisition, said Sukhbir Pradhan from Roja Jalalpur village.Our lands were notified for acquisition even though Greater Noida Authority officials said they would have a thorough discussion with us, he added.

    Sukhbir said that villagers would not part with their lands,now that the Supreme Court has given a decision in favour of Sahberi.

    -TOI
    CommentQuote
  • Munish,

    Please do not repeat Manoj Kumar's line from Upkaar movie. It really frustrates me. That era and such feelings among farmers have gone.

    If land is really like mother for farmers, then farmer will neither sell it nor donate it even if it has to be used for hospital, bridge or any other public purpose coz no body donates his mother.

    And we all know the fact that farmers are not intersted in retaining their so-called "Mother".

    Even shahberi villagers are saying that they are happy to get their "Mother" back but are ready to negotiate and sell their "Mother" to builders directly.

    What a hypocricy?

    If parting with land for farmers is really so painful, let GNA declare the entire land agrictulture and impose complete ban on selling land again.

    Let us all campaign for complete ban on selling agricultural land or acquisition of agriculturual land even for public purpose if farmers of now-a-days indeed treat land as their mother.




    Originally Posted by Munish Malhautra
    Plz dont bash the poor farmers. understand their psyche, land is their mother and the only source of their living, this doesnt hold true for most of us here. For us land is an investment, place to stay and for some of us its small part of net worth, definitely not a source of our living and thats it.
    Yes there are some farmers who have other motives but not all of them.

    The issue is that in all this mayhem the guy who is suffering is the farmer, aam admi and to some extent builders.
    Authority, babu and bmw has already filled their pockets and washed off their hands.
    CommentQuote
  • CommentQuote
  • SC orders return of land to Greater Noida villagersBS Reporters / New Delhi July 7, 2011, 0:40 IST

    Sahberi village ruling to hit sentiment in Noida Extension, where projects worth Rs 40,000 crore are being executed.

    The Supreme Court today dismissed the appeal of the Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA) against an Allahabad High Court order quashing acquisition of 156 hectares (390 acres) land in Greater Noida’s Sahberi village.

    This was expected to hurt sentiment in the entire Noida Extension area and projects worth Rs 40,000 crore could be at stake, said industry players. The order will directly impact six projects in Sahberi village.
    The court asked GNIDA to return the land to the farmers and imposed a cost of Rs 10 lakh. A detailed judgment is awaited.

    The Supreme Court Bench, comprising Justice G S Singhvi and Justice A K Ganguly, said the land was acquired under an urgency clause, which denied farmers an opportunity to file their objections.

    Though the judgment affects only 392 acres, there is a perception that the whole of Noida Extension (2,500 acres) will be hit by low consumer sentiment. While new bookings have dried up, those who have booked flats in the area are nervous, say industry players.

    While the Supreme Court asked GNIDA to return the land, the farmers are keen to sell but want a much higher compensation. In Noida and Greater Noida, developers cannot acquire land directly. Now, they will have to buy at a higher price, which will eat into their wafer-thin profits.

    To break the logjam, GNIDA will have to negotiate with the farmers and buy afresh, says R K Arora, chairman, Supertech. ‘‘In Sahberi, the land was acquired at Rs 850 a square yard, but farmers are seeking Rs 3,000-4,000 a square yard. This means an increase of Rs 100-200 per square feet,’’ said an expert.

    About 200,000 flats are being built in Noida Extension. Taking a price of Rs 20 lakh per flat, the amount at stake is Rs 40,000 crore. Developers have already spent more than a third of this as land accounts for 20-25 per cent of their costs.

    ‘‘If the issue is resolved within six months, it’s fine. But if it lingers on for one-two years, it could lead to one of the biggest bankruptcies in real estate,’’ said Sunny Katyal, director (marketing), Investors Clinic, a real estate brokerage.

    Developers with exposure to Sahberi have contiguous land in the neighbouring villages. Supertech has 50 acres under development in the area (Eco Village), of which 10 acres is in Sahberi. The rest is in the neighbouring Etahera village.

    AIMS Group had 110 acres, which it surrendered. Amrapali has 105 acres under development (Smart City). It has decided to shift 1,200 buyers to its Dream Valley project. Mahagun (Mywoods) has 50 acres in the area, of which half is in Sahberi and half in the neighbouring Aibatpur village. Similarly, Gaursons has five acres in Sahberi and the remaining in the neighbouring Aibatpur village. These developers had not started construction.

    ‘‘The fate of over 1,50,000 buyers in Noida Extension hangs in balance. The court could have said how much compensation should be given. The authorities should come up with a list of projects and people who have been affected and break the deadlock as soon as possible,’’ said Katyal of Investors Clinic.

    One fear is about the 33-odd other villages which have moved court against land acquisition. These cases could go the Sahberi way, feared real estate experts. But they said the urgency clause was applied in only Sahberi and the farmers in other villages had taken compensation.


    Can anyone draw some inference of this media statement by Mr. Sanny Katyal.
    CommentQuote
  • Bhai Log

    Yeh India hai. Kuch nahi hone wala. Yaha builder baap hota hai.

    Kissan ne kheti karni hoti to Supreme Court thodi jata, Laxmi maa ki krioa dhristi aur chaiyee.

    Kissan Builder se lega --> Builder App see lega

    Aap saste mein broker ko bechoge dar keee.... ki kuch mil jaye..

    Broker wapas builder ko ---> Builder wapas aapko at higher rate.....post settlement....

    Its just matter of time... Its just like when Sen drops from 20K to 16K ---> Those who can hold, are in for very long term, have no effect...

    Those who are small time buyers wait till drop from 20K to 17K and move out booking losses, only to see it zip past again to 21K :)
    CommentQuote
  • I fully agree with you Zhakaas bhai....
    CommentQuote
  • END OF THE ROAD

    Buyers get jitters, over 5,000 units already sold

    TIMES NEWS NETWORK



    New Delhi: Of the seven builders in Noida Extension affected by the Supreme Court ruling, two — Amrapali and Mahagun — have told homebuyers that they are willing to refund the amount paid so far.
    Supertech and Gulshan Homes said they have not launched any project on the disputed land in Sahberi. Panchsheel, Auracity and Buland Buildtech were unavailable for comment to ascertain their future course of action.
    The verdict is, however, expected to delay projects in the area. Around 5,500 units in Sahberi have already been sold and builders have not raised the demand for second installment for payment.
    Satyendar Tomar, an IT professional and a buyer in Mahagun’s project in the affected area, said he had so far paid 10% of the cost, which adds up to Rs 5 lakh. He has spoken to his builder who has assured him that it will decide the future course of action only after going through the Supreme Court order.
    The ordinary homebuyer, including those who had booked apartments in nearby buildings, are feeling jittery. “There is a great deal of panic among middle-class investors like me who have put their money on buying houses in the area,” said Ravikant Pandey, a professional who had bought an apartment in Noida Extension.
    Pandey is now leading a campaign to seek refund from builders or get apartments in other locations. He has rallied together other buyers in the area to put up a joint front against builders. “The Authority should not have sold disputed land to builders and the builders should have made this clear to middle-class investors like us,” he said.
    The worry is that farmers from neighbouring villages, in what is now Noida Extension, might move court with a similar plea seeking cancellation of land acquisition.
    A senior official of the Greater Noida Authority said the court rulings would only affect projects that fall in Shahberi village. When farmers of Gulistanpur village approached Allahabad HC after its Sahberi verdict, the court had ruled that they had already taken compensation cannot and could not challenge the land acquisition process. In the case of Sahberi village, only 40% farmers had taken compensation from the government.
    Amrapali chairman and managing director Anil Sharma, who had bought around 40 hectare in the area, said his company stopped fresh sales the moment he heard about the land dispute. He said buyers in Smart Home, the project in Shahberi, have been given the option to shift to a nearby project, Dream Valley.
    Mahagun MD Dhiraj Jain said only one of his villa projects, Myra, was affected by the judgment and in any case a small portion of this was sold.
    Supertech’s R K Arora said that of the 3.2 lakh
    square metre project planned by the developer under the Eco Village II project, only 15,000 square meter fell in the Shahberi. At the time of launch of the project, he said, this portion had been kept out.
    Similarly, in the 50,000 square metre Gulshan Homes project, only around 3,000 square meter is in Shahberi.
    President of the Builders’ Association in the National Capital Region Manoj Gaur said the industry body would protect the interests of homebuyers.
    The total acquired in Shahberi was 161 hectare (around 400 acre).
    CommentQuote
  • Noida Extension disputed land-Gaur projects

    I have invested in Gaur City Project in Noida extn..cld anybody pls tell if Gaur project falls under disputed land. Gaur Projects have a good name and I hope they would return the entire amount incase its over disputed area
    CommentQuote