Noida Extension Buyers Take on Builders

Home buyers who have invested in Noida Extension Real Estate projects are connecting online through discussion forums, facebook and other websites to vent out frustration against the builder lobby. Almost 100 people have signed up as members of a Facebook group that calls itself, 'Noida Extension Owners and Members Association'. The members include professionals from all walks of life.

NEOMA - Noida Extension Owners And Members Association is Noida extension owners and member association. The purpose and objective of NEOMA is to keep updated to all the Future residents of the Noida /Noida Ext. based on the users feedback. User can make their decision, owners can raise their voice in case of any issues.

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Supreme Court - Noida Extension News

Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।
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  • वाजिब मुआवजा मिले तो बन सकती है बात


    साबेरी गांव के किसानों ने यूं ही न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटाया। उनके पड़ोस के गांव डूडाहेड़ा (गाजियाबाद) में बिल्डरों ने दो वर्ष पहले किसानों से सीधे चार से पांच हजार रुपये प्रति वर्ग गज में जमीन खरीदी थी, जबकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मुआवजे के रूप में 850 रुपये प्रति वर्गमीटर देने का प्रस्ताव किसानों के सामने रखा। दोनों में काफी अंतर होने की वजह से किसान आपने आपको ठगा सा महसूस करने लगे। नतीजतन उन्होंने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी जीत में गांव के 90 फीसदी किसानों द्वारा जमीन का मुआवजा न उठाना भी एक कारण रहा। गांव में अब तक मात्र दस फीसदी किसानों ने ही मुआवजा उठाया है। ऐसा नहीं है कि किसान विकास में रोड़ा बनना चाहते हैं। वह विकास योजनाओं के लिए जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन उसका वाजिब दाम चाहते हैं। किसानों का कहना है कि प्राधिकरण के मास्टर प्लान में जिस उद्देश्य के लिए जमीन आरक्षित थी, वही परियोजना जमीन पर लगनी चाहिए। इससे स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेंगे।
    कासिद हुसैन के परिवार के पास गांव में सबसे ज्यादा जमीन है। उनका कहना है कि जमीन के लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी है। मार्च 2009 से न्यायालय में मामला चल रहा है। इस दौरान भागदौड़ व आवागमन में आर्थिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। न्यायपालिका के आदेश से किसानों का हौसला बढ़ा है। वह अपनी जमीन पर अब खेती करना चाहते हैं। चंद्रदत्त शर्मा का कहना है कि प्राधिकरण और बिल्डरों को भविष्य में जमीन देने या न देने के बारे में पूरे गांव की पंचायत में निर्णय लिया जाएगा। किसान विकास में बाधक नहीं बनेंगे, लेकिन प्राधिकरण को उसकी मनमानी शर्तो पर भी जमीन नहीं देंगे। राजपाल सिंह का कहना है कि प्राधिकरण ने आनन फानन में धारा चार, छह व नौ की कार्रवाई कर जमीन अधिग्रहीत कर ली। किसानों की आपत्तियों की सुनवाई तक नहीं की गई। मजबूरी में किसानों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

    पड़ोस के गांव डूडाहेड़ा में बिल्डर किसानों को वाजिब दाम देकर सीधे जमीन खरीद रहे हैं, जबकि प्राधिकरण उनको सिर्फ साढ़े आठ सौ रुपये प्रति वर्गमीटर का मुआवजा दे रहा था। जमील अहमद का कहना है कि जमीन पर उद्योग लगते तो लोगों को रोजगार मिलता। उनकी जमीन को औने पौने-दामों में लेकर बिल्डरों को दे दिया गया। कोर्ट के फैसले से किसान खुश हैं। अब वे अपनी जमीन पर खेती करेंगे। जयपाल व नरसिंह ने कहा कि यदि किसानों को वाजिब दाम मिले तो तो वे जमीन देने के बारे में विचार कर सकते हैं। यह निर्णय गांव की पंचायत में लिया जाएगा।

    -Dainik Jagran
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  • कुछ ही भूमि पर शुरू हुआ था काम


    ग्रेटर नोएडा : यह बिल्डरों के लिए अच्छा ही रहा कि उन्होंने साबेरी गांव में निर्माण कार्य शुरू नहीं किया था। शायद वे किसानों की आपत्ति को देखते हुए भांप गए थे कि यहां बाजी पलट सकती है। यही वजह रही कि सात में से चार बिल्डरों ने ही काम शुरू किया। हालांकि, बिल्डरों ने जमीन के चारों ओर टीन जरूर लगा रखी थी।
    कोर्ट के फैसले से प्रभावित हुई 156 हेक्टेयर भूमि में से सिर्फ 20 -25 हेक्टेयर जमीन पर ही निर्माण कार्य शुरू हुआ था। गांव की जमीन का अधिग्रहण 2009 में हुआ था। पर अब तक सिर्फ 10 प्रतिशत किसानों ने ही मुआवजा उठाया है। 90 प्रतिशत किसानों द्वारा मुआवजा न उठाए जाने की वजह से बिल्डरों को इस बात का अहसास था कि जमीन पर दिक्कत आ सकती है। बिल्डरों ने जमीन के उसी भाग पर निर्माण कराया जहां विवाद नहीं था। प्रभावित जमीन पर इस समय जमीन में पानी का स्तर जांचने का कार्य चल रहा है। हालांकि, जमीन पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। किसानों को जमीन वापस की गई तो उनके लिए गड्ढों को भरना टेढ़ी खीर साबित होगा।

    ठेकेदार व मजदूरों को भी उठाना पड़ सकता है नुकसान
    कोर्ट के फैसले के बाद बिल्डरों ने प्रभावित जमीन से मिट्टी खुदाई व निर्माण कार्य बृहस्पतिवार को बंद कर दिया। इससे ठेकेदारों का कार्य भी बंद हो गया। एक ठेकेदार ने बताया कि निर्माण कार्य में सैकड़ों मजदूर लगे हुए थे। अचानक सभी का काम बंद हो गया है। बिल्डरों पर हजारों रुपये बकाया है। काम रुक जाने से पैसा फंस सकता है। उधर कई ठेकेदार निर्माण कार्य बंद होते ही भूमिगत हो गए हैं। उन पर मजदूरों के हजारों रुपये बकाया हैं। एक ठेकेदार ने बताया कि बिल्डरों पर फंसा पैसा अब जल्दी मिलने वाला नहीं है। लिहाजा, ठेकेदार भी मजदूरों को शायद ही पैसा दें।

    -Dainik jagran
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  • सोचेंगे, विचारेंगे, तभी फैसला करेंगे निवेशक


    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : किसानों को दी गई भूमि उन्हें लौटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसानों की तो खुशियां लौट आई हैं पर निवेशकों के अरमानों पर पानी फिर गया है। वे जानने के प्रयास में जुटे हैं कि अब क्या होगा। फिर भी वे इंतजार करना चाहते हैं। जल्दबाजी में कोई कदम उठाकर अपनी छत का सपना नहीं टूटने देना चाहते। यही कारण है कि अधिकतर निवेशक सोच समझकर ही कोई कदम उठाएंगे। कई निवेशकों को बिल्डरों ने अन्य स्थानों पर फ्लैट देने का आश्वासन दिया है।
    निवेशक सुनील चौहान का कहना है कि कोर्ट के फैसले से वह बैचेन नहीं हैं। बिल्डर को पैसा दिया है तो वह कोई न कोई व्यवस्था जरूर करेगा। कोई बिल्डर अपनी साख खराब नहीं करना चाहेगा, इसलिए वह अभी इंतजार करेंगे।
    पीआर मिश्रा का कहना है कि उनका सपना एनसीआर के नजदीक अशियाना बनाने का है। जल्दबाजी में बिल्डर से पैसा वापस ले लिया तो सपना अधूरा रह जाएगा। बिल्डर उन्हें नोएडा एक्सटेंशन की दूसरी परियोजनाओं में फ्लैट देने का आश्वासन दे रहे हैं। इंतजार करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। जाकिर हुसैन का कहना है कि फ्लैट की कीमत का आधा पैसा जमा कर दिया है। कोर्ट के फैसले से बेचैनी तो बढ़ी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि फ्लैट पर कब्जा समय से मिल पाएगा या नहीं। बिल्डर यदि दूसरी नोएडा एक्सटेंशन की दूसरी परियोजना में फ्लैट देने को तैयार है तो वह लोकेशन देखकर निर्णय करेंगे। नितिन गर्ग का कहना है बिल्डर दूसरी जगह फ्लैट देने का भरोसा दिला रहे हैं। ऐसे में उन्हें कोई समस्या नहीं है।

    -Dainik Jagra
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  • किसानों ने बढ़पुरा में की पंचायत


    ग्रेटर नोएडा, सं: अधिग्रहण से प्रभावित किसानों ने बृहस्पतिवार को गांव बढ़पुरा में एक पंचायत की। पंचायत में जिलाधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासनों पर विचार किया गया। साथ ही ग्रेटर नोएडा के गांव साकीपुर के किसानों को बिल्डर द्वारा बढ़ा हुआ मुआवजा देने के मुद्दे पर विचार विमर्श किया गया।
    किसानों ने एकमत से निर्णय लिया कि यदि अगले तीन दिन में प्रशासन हमारे मामले में फैसला कराने की पहल नहीं करता तो किसान इन कंपनियों का काम बंद कराएंगे।
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  • लीजबैक में किसानों को पांच प्रतिशत का लाभ


    नोएडा, संवाददाता : आबादी विनियमावली के तहत लीजबैक को लेकर किसानों में मौजूद भ्रम प्राधिकरण ने खत्म कर दिया है। प्राधिकरण के मुताबिक, लीज बैक के बाद भी किसान को पांच प्रतिशत के प्लॉट का लाभ मिलेगा। हालांकि यह नियम उन्हीं किसानों पर लागू होगा, जिनकी भूमि वर्ष 1997 के बाद अधिग्रहित हुई है।

    लीजबैक के बाद पांच प्रतिशत का लाभ शेष अर्जित भूमि पर ही मिलेगा। मसलन, अगर किसी किसान की एक हजार वर्गमीटर जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसमें से सौ मीटर पर उसका कब्जा या आबादी थी, जिसे लीजबैक कर दिया गया तो पांच प्रतिशत का लाभ शेष 900 वर्ग मीटर भूमि के सापेक्ष मिलेगा। नोएडा के कई गांवों के करीब ढाई हजार किसान इससे लाभांवित होंगे। सोमवार को इस संबंध में उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी (डीसीईओ) एनपी सिंह ने नायब तहसीलदारों के साथ बैठक कर उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। तहसीलदारों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे लीजबैक के साथ पांच प्रतिशत की पात्रता सूची भी बनाएं। सभी नायब तहसीलदार पांच प्रतिशत के दावों के लिए अब अलग-अलग आवेदन जमा नहीं करेंगे। इसकी जगह वह दो-दो गांव का चयन कर एक तारीख तय कर उसी तिथि तक आवेदन एकत्रित करेंगे। आवेदनों का निस्तारण 15 दिन में होगा। इस दौरान किसी ने आवेदन नहीं किया तो दूसरे दौर में उस गांव का नंबर आने पर लिया जाएगा। इन दावेदारों में मुख्य रूप से वह लोग शामिल होंगे, जिन्हें पूर्व में अतिक्रमण या किसी आपत्ति की वजह से पांच प्रतिशत का लाभ न मिला हो। पांच प्रतिशत प्लॉट के लिए एक प्रारूप निर्धारित किया गया है। उसके आधार पर आवेदन जमा होंगे।

    डीसीईओ एनपी सिंह ने बताया कि पहले आवेदकों की आपत्ति का निस्तारण कर अंतिम सूची सार्वजनिक नहीं की जाती थी। अधिकारी अब अंतिम सूची गांव में पढ़कर लोगों को सुनाएंगे और वहां चस्पा देंगे। बाद में इस पर तुरंत आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी। डीसीईओ ने प्रशासनिक अधिकारी दीपचंद्र, मुख्य परियोजना अभियंता संतराम सिंह और सभी तहसीलदारों को यह भी निर्देश दिया है कि किसान पांच प्रतिशत प्लॉट के लिए योग्य है या नहीं इसका सर्वे वह खुद मौके पर जाकर करेंगे। दरअसल जिस किसान की अधिग्रहित भूमि पर अतिक्रमण रहता है, उसे इस सुविधा से वंचित रखने का प्रावधान है।
    विकसित सेक्टर में प्लॉट दिलाने की मांग पर विचार

    किसानों की मांग है कि उन्हें पांच प्रतिशत के प्लॉट पूर्ण विकसित (ए, बी या सी वर्ग के) सेक्टर में दिए जाएं, जहां सभी सुविधा हो। डीसीईओ एनपी सिंह ने इस संबंध में बताया कि चूंकि वह नियोजन का काम नहीं देखते हैं, लिहाजा वह इस पर फैसला नहीं ले सकते। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों की इस मांग को मुख्य वास्तुविद नियोजक त्रिभुवन सिंह, वरिष्ठ नगर नियोजक राजपाल कौशिक और ओएसडी यशपाल सिंह सहित मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमन के संज्ञान में लाया जाएगा। वे ही इस मांग पर अंतिम निर्णय लेंगे।


    -Dainik jagran
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    सोचेंगे, विचारेंगे, तभी फैसला करेंगे निवेशक


    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : किसानों को दी गई भूमि उन्हें लौटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसानों की तो खुशियां लौट आई हैं पर निवेशकों के अरमानों पर पानी फिर गया है। वे जानने के प्रयास में जुटे हैं कि अब क्या होगा। फिर भी वे इंतजार करना चाहते हैं। जल्दबाजी में कोई कदम उठाकर अपनी छत का सपना नहीं टूटने देना चाहते। यही कारण है कि अधिकतर निवेशक सोच समझकर ही कोई कदम उठाएंगे। कई निवेशकों को बिल्डरों ने अन्य स्थानों पर फ्लैट देने का आश्वासन दिया है।
    निवेशक सुनील चौहान का कहना है कि कोर्ट के फैसले से वह बैचेन नहीं हैं। बिल्डर को पैसा दिया है तो वह कोई न कोई व्यवस्था जरूर करेगा। कोई बिल्डर अपनी साख खराब नहीं करना चाहेगा, इसलिए वह अभी इंतजार करेंगे।
    पीआर मिश्रा का कहना है कि उनका सपना एनसीआर के नजदीक अशियाना बनाने का है। जल्दबाजी में बिल्डर से पैसा वापस ले लिया तो सपना अधूरा रह जाएगा। बिल्डर उन्हें नोएडा एक्सटेंशन की दूसरी परियोजनाओं में फ्लैट देने का आश्वासन दे रहे हैं। इंतजार करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। जाकिर हुसैन का कहना है कि फ्लैट की कीमत का आधा पैसा जमा कर दिया है। कोर्ट के फैसले से बेचैनी तो बढ़ी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि फ्लैट पर कब्जा समय से मिल पाएगा या नहीं। बिल्डर यदि दूसरी नोएडा एक्सटेंशन की दूसरी परियोजना में फ्लैट देने को तैयार है तो वह लोकेशन देखकर निर्णय करेंगे। नितिन गर्ग का कहना है बिल्डर दूसरी जगह फ्लैट देने का भरोसा दिला रहे हैं। ऐसे में उन्हें कोई समस्या नहीं है।

    -Dainik Jagra


    You are real gem.. Thanks for such informative postings..
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  • Beware with Misleading post here

    Dear All
    My humble request to all of you is to beware from the post in this IRE forum which try to mislead you by false posting here.
    I saw someone saying-how it was comercial but converted into residential is a doubtfull abt NE as whole.
    NE will be finished......etc
    All crap. Shameull act by some useless fellow.

    I have alredy posted answer about all these point. These r point n not a issue. You freind just read all the post in this thread.

    What is more interesting is i have requested to please provide us link of detailed judgement of Supreme court but noboy posted link.Why? Fact is more tangible evidence than all rumour. I have also read Law and i know basic things.
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  • Originally Posted by Totaram
    Dear All
    My humble request to all of you is to beware from the post in this IRE forum which try to mislead you by false posting here.
    I saw someone saying-how it was comercial but converted into residential is a doubtfull abt NE as whole.
    NE will be finished......etc
    All crap. Shameull act by some useless fellow.

    I have alredy posted answer about all these point. These r point n not a issue. You freind just read all the post in this thread.

    What is more interesting is i have requested to please provide us link of detailed judgement of Supreme court but noboy posted link.Why? Fact is more tangible evidence than all rumour. I have also read Law and i know basic things.


    Totaram Ji,

    Why don't you find the court order and post a link for everyone to see?

    Since you have read the law, you must be aware of the website where one can find orders of court.
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  • Hello Everyone:

    I know there is lot of anxiety erupted after SC ruling, even in those folks who do not have invested in NE. I am copying an email below which is a "true" copy of an email received in yahoo group from gentleman Sachin Randev. Please read below and advise!

    "Hi All,

    Since many of us are a bit confused about what the Shahberi judgement means for
    other projects in NOIDA, I'm quoting this small extract from a TOI article of
    7.7.11-

    " A senior official of the Greater Noida Authority said the court rulings would
    only affect projects that fall in Shahberi village. When farmers of Gulistanpur village approached the Allahabad HC after its Shahberi verdict, the court had ruled that they had already taken compensation cannot and could not challenge the land acquisition process. In the case of Shahberi village, only 40% farmers had taken compensation from the government. "

    I presume in our case ( NOIDA), all the compensation would have been paid by now.

    Warm Regards,

    Sachin Randev
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  • Judgment Information system of Supreme Court
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  • Originally Posted by Totaram
    Dear All
    My humble request to all of you is to beware from the post in this IRE forum which try to mislead you by false posting here.
    I saw someone saying-how it was comercial but converted into residential is a doubtfull abt NE as whole.
    NE will be finished......etc
    All crap. Shameull act by some useless fellow.

    I have alredy posted answer about all these point. These r point n not a issue. You freind just read all the post in this thread.

    What is more interesting is i have requested to please provide us link of detailed judgement of Supreme court but noboy posted link.Why? Fact is more tangible evidence than all rumour. I have also read Law and i know basic things.


    Boss dont play for the gallery. If you are are so conversant in law why dont you fight for authority. Do you consider yourself Attorney General of India whose opinion is the final world. Boss so many people have burnt their money listening to people like you.

    People are quoting Builders and authority officials to support every thing is OK. But if they were correct this mess would have never started.
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  • Home loan hitch in Greater Noida,Noida Extension

    SBI Stops Fresh Lending,Others Tighten Norms

    There may be trouble finding a lender if you are scouting for a house in Noida Extension or even Greater Noida.Concerns over title of land are forcing banks such as State Bank of India (SBI) to hold back fresh sanctions.

    A senior SBI executive told TOI that they were not providing any loans to projects in Noida Extension as maps for several projects were unavailable.
    In case of Greater Noida,the problem is different.The executive said some builders had lobbied with the Greater Noida Authority and got an extension for paying the amount they owed the government agency.Now,you are staring at a situation where apartment owners would get possession in 2013 or 2014 on a plot of land for which the builder will get the rights in 2018 or 2020.If we have to enforce the security,we will face a problem.So,we stopped lending, the executive said.

    Some SBI associate banks such as State Bank of Travancore,builders said,are,however,still providing loans.

    The sales representative of a builder who had set up a stall for the second phase on an under-construction project said lenders such as HDFC,the countrys largest mortgage player,had suspended sanctioning loans recently.They are verifying the title deeds and doing their own investigation.They may resume lending soon, the sales executive said when asked about funding options.

    An email sent to an HDFC spokesperson in Mumbai late on Thursday afternoon remained unanswered.

    An IDBI Bank executive said the bank was still providing loans and was using the Right to Information (RTI) Act to get details of title deeds.That is the best way to find out the status.Wherever the Noida Authority or the Greater Noida Authority is telling us that the land is free of encumbrances,we are sanctioning loans, the executive in the banks home loan department said.Other lenders such ICICI Bank refused to comment,saying they were studying the verdict.

    -TOI
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  • Day after,panic as future uncertain

    Authority Officials Out Of Reach As Private Developers Try Calming Down Buyers Assuring Their Investments Are Safe

    Aday after the Supreme Courts ruling in the Sahberi case brought alive their worst fears,the affected homebuyers remained on tenterhooks.While they sounded resigned to the finality of the order on Thursday,they also swung between vague hopes of their dreams being salvaged,and dismay at the thought of losing their hardearned money.

    It did not help that senior Greater Noida Industrial Development Authority officials chose to remain under the radar throughout Thursday.However,property developers were at pains to calm down buyers,claiming that most of the investments in the so-called Noida Extension area were safe.The builders maintained that only six housing projects accounting for just 8,000 of the 2.5 lakh flats being built in the area were affected by the courts order.Some of the builders also offered their investors the choice of a refund or a flat at another location.

    Dhananjay Srivastava,general manager of the developer Supertech,said,Only about five acres of our project land falls in the said area,and at the time of land acquisition we knew that the small area was under dispute so we did not begin any construction there.Some bookings for the area have been made and we will return that money to buyers, he said.Supertechs Eco Village-II project falls in the Sahberi village area and it has offered to refund the booking money to buyers.

    Dhiraj Jain,director of another firm,Mahagun,also said the court decision had not affected their Mahagun Mywoods project.The order applies to only a small portion of the land,which has been set aside for future development.We havent planned anything there yet, he said.

    However,buyers remained apprehensive.Vinod Kumar,who had booked a 775-sq ft two-bedroom flat at Amrapali Smart City in Sahberi,said he had been offered an alternate flat in the same builders Dream Valley project.The developers are very sure of themselves.They are saying their project is safe,but for people like us who put all their lifes savings into buying a home,what if this project is also scrapped or runs into trouble What option will we be left with he said.

    Pallavi Singh Chauhan,who had also booked a flat in Amrapali Smart City,said,This was the first house I had bought.The builders are now saying that I will be shifted to another project.I had never thought that it would get into trouble in such a way.Now we are at the mercy of the builders.

    Another buyer,Vikrant Singh,who invested in the Supertech Eco Village-I project in March 2010,feared it would get delayed.I have a 1,000-sq ft house that I booked for Rs 1,750 per sq ft.The flat is to be handed over to me in 2013 but with all this shifting of other buyers and refund issues,I am scared that Eco Village-I might get delayed or run into similar disputes, he said.

    Some of the affected buyers have also got together to create a Facebook page and started blogging on the issue.An association with 500 members has also been created by the buyers to take up grievances.

    Amrapali Group,meanwhile,claimed it had started moving its homebuyers from the Smart City project to the Dream Valley project soon after the Allahabad High Court judgment in the case,in May.However,the shifted homebuyers didnt seem happy about the move.My house was to be ready and handed over to me by the end of this year.Now the Dream Valley project where I have been shifted will be handed over to me in 2013,which would mean I would face a delay of about a year and a half.Moreover,I will have to travel an additional distance to reach this new place, said buyer Vikas Chauhan.

    NERVOUSNESS RULES

    Amrapali

    According to the group,Smart City project at Sahberi is spread across 147,422.85 sqm Around 6,000 two,three & fourbedroom flats were to come up.Price was between Rs 10 lakh and Rs 15 lakh Amrapali has begun shifting these buyers to another project in Greater Noida,Dream Valley 3,000 buyers have been shifted and around 10% want their booking amount back

    Mahagun

    Mahagun India Pvt.Ltd has clarified on its website that Mahagun Mywoods Ph-I (Part 1 & Part 2) does not fall in the denotified area and in no way will be affected by the judgment
    The statement on behalf of director Dhiraj Jain claims: Only some portion of land,which has been set apart for future development,falls in the said area,but no construction work has taken off there
    It also says: Buyers can get refund

    Supertech


    Supertech is constructing Eco City II at Noida Extension
    CMD R K Arora claims there are no projects on the disputed land as Supertech knew during the land acquisition that a small 5% area was under dispute
    Some bookings for the area have been made and we will return that money to buyers, Arora says

    -TOI
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  • Prices may hold up,buyers wait & watch

    Greater Noida: What was a booming piece of real estate till about two months ago today wears a deserted look.Confusion prevails over Noida Extension.But property pundits remain optimistic even as they say that housing demand in the area has fallen by at least 20% following the earlier court order of May,2011 directing return of land acquired for residential development to the original owners.

    Developers and consultants said most prospective homebuyers are adopting a wait-and-watch policy before any further purchase in the Noida Extension area.Even areas in Noida and Greater Noida have not experienced any significant demand for residential housing either.And as property prices in Noida Extension are significantly lower than those in other NCR townships,realty rates there are unlikely to get affected.

    Noida as well as Greater Noida offer a wide range of affordable housing,so the demand cannot go down for such units.At present,there is confusion in the minds of buyers because of the SC order.This should settle down in the next fortnight, said Getamber Anand,vice-president CREDAI.
    However,while many property agents believe that realty prices in areas such as the belt along the Noida-Greater Expressway,Indirapuram and Greater Noida would see an upward trend in the next three-four months,many think the market trend would remain stabilized.It is difficult to say where the property market is headed.Also,the endusers would not want to block their money considering the prevailing scenario of the entire Noida Extension area, said an expert from a leading real estate consulting firm.

    The SC order is unlikely to have much impact on realty prices in the area as there are already fears of an excess supply of residential housing in the region.I do not think it is going to impact the prices as high interest costs have already slowed down demand and due to excess supply,buyers have many options, said the realtor.

    There may not be an immediate impact on property prices and demand in Ghaziabad,Noida,Faridabad and even Greater Noida,
    but once existing supply gets exhausted,property prices may go up, said Mubarak Ansari,a real estate consultant from Noida.Currently,prospective homebuyers are apprehensive despite assurances of developers.People are afraid to invest their hardearned money.But after things are clearer,end-users should once again start buying homes.One of the best features of Noida and Greater Noida is affordable housing and connectivity, he added.
    Client walk-ins have certainly plummeted in view of the SC order and the affect can be seen across Noida and Greater Noida.Demand has definitely slowed down,but it is difficult to quantify the drop in demand.We have not witnessed decline in property prices so far, said a property broker from Greater Noida.A realty expert claimed that if more such farmers looked for relief and the verdict given in their favour,the real estate business would definitely be hit.If farmers started selling their land directly to builders or started plotting their farmland,this would pave the way for illegal colonies and illplanned development, he said.

    -TOI
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  • Sahberi order may open floodgates

    Noida: While the Supreme Court order triggered a wave of celebration in Sahberi village,it also set off a ripple effect in neighbouring villages,where emboldened residents are now seeking to reclaim their land.The court order may be limited to 400 acres in Sahberi,but it may soon open the floodgates of litigation.And this could spell more trouble for buyers and developers who have invested in Noida Extension.

    Thousands of villagers of Bisrakh Patwadi,Khairpur,Iteda,Haibatpur and Ghanghoula,all part of Noida Extension,are now seeking legal help to move the Allahabad High Court,seeking reversal of acquisition of their land.
    Of the 120 petitions already submitted in the high court,35 were moved in May this year following the high court order on land acquisition.And now,more petitions could pile up.120 petitions cover an area of 2000 hectares,that villagers claim have been acquired by invoking the emergency clause.

    And just hours after the Supreme Court order came on Wednesday,a mahapanchayat was organised at Bisrakh village.Hundreds of farmers decided in one voice to reclaim their land.The Supreme Court order has offered a ray of hope to villagers who have been cheated by the Greater Noida Authority.At the time of acquisition,the officials said they wanted to set up industry and group housing societies,but instead the land was sold off to private builders at high rates, said advocate Parminder Singh,who is representing the petitioners.

    We are the actual owners of land where the Amrapali Smart City is being built.Till a couple of years back,we grew vegetables.Suddenly in late 2009,workers of the Amrapali group stopped us.We went to the Authority with our land papers only to be told that the land had been acquired, said Nadeem Hussain.He owns 42 hectares of the Smart City plot,while his two uncles Mohd Insaab and Naushad Ali own the remaining land.

    The Supreme Court has helped the poor.Our land is our means of livelihood.Our land has been dug up and construction has begun,but the builder told us today that he will fill up the land and return it to us soon.Once we till the land again we will again grow vegetables, Hussain said.

    Though Hussain wants to till his land again,but hes a minority in the crowd.Most of the 120 petitioners want to reclaim their land and sell it off again at a higher rate.

    Meanwhile,in Bisrakh,over 6,000 villagers have already moved the high court seeking denotification of over 570 hectares of land acquired by the authority.The court has fixed July 11 as the date for a final hearing.
    We are not against selling off our land to builders because if residential societies come up,commercial development will happen.But our land was taken over by several private builders who are now selling off flats at high rates, said Ajay Bhati,village Pradhan of Bisrakh.

    As per sources,over 15,000 hectares of land has been acquired in the Greater Noida in the last twenty years,using a controversial clause in the land acquisition act which allow governments to acquire land without giving landowners the right to a hearing.Authority officials were unavailable for comment.

    -TOI
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