Noida Extension Buyers Take on Builders

Home buyers who have invested in Noida Extension Real Estate projects are connecting online through discussion forums, facebook and other websites to vent out frustration against the builder lobby. Almost 100 people have signed up as members of a Facebook group that calls itself, 'Noida Extension Owners and Members Association'. The members include professionals from all walks of life.

NEOMA - Noida Extension Owners And Members Association is Noida extension owners and member association. The purpose and objective of NEOMA is to keep updated to all the Future residents of the Noida /Noida Ext. based on the users feedback. User can make their decision, owners can raise their voice in case of any issues.

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Supreme Court - Noida Extension News

Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।Guyz look at Zee news. Noida extn ko rahat nahi....

नोएडा एक्सटेंशन को नंदीग्राम बनते नहीं देख सकते: SC

*नई दिल्ली। *सुप्रीम कोर्ट ने आज नोएडा एक्सटेंशन जमीन अधिग्रहण मामले में कहा
कि नोएडा एक्सटेंशन को दूसरा नंदीग्राम नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने अपनी
टिप्पणी में कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि खेती की जमीन अधिग्रहण करने से
पहले क्या इस बात की कोशिश की गई कि बंजर जमीन का अधिग्रहण पहले किया जाए। इस
दौरान कोर्ट में सरकार और किसानों के तरफ के पक्ष कोर्ट में मौजूद थे। सुप्रीम
कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई 5
जुलाई को होगी।
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  • woowww, great....this is so nice. Impressed !!!
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  • Originally Posted by LChand
    Supertech :



    Hello Mr LChand,
    Where did you get thid letter, I mean source ?

    rgds
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  • Originally Posted by IMAKGUPTA
    Hello Mr LChand,
    Where did you get thid letter, I mean source ?

    rgds


    This is there in today paper. I saw in TOI.
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  • Originally Posted by IMAKGUPTA
    Hello Mr LChand,
    Where did you get thid letter, I mean source ?

    rgds

    Today's Times of India.
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  • अन्य गांवों के किसान भी देंगे अधिग्रहण को चुनौती


    नोएडा एक्सटेंशन में साबेरी के बाद अन्य गांवों के किसानों ने भी जमीन अधिग्रहण के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय किया है। रविवार को किसानों ने रोजा जलालपुर गांव में पंचायत की। किसानों ने कहा कि आबादी का निस्तारण किए बिना ही प्राधिकरण ने धारा-4 की कार्रवाई कर दी। आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। साबेरी गांव के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से किसानों का न्यायालय के प्रति विश्वास बढ़ा है। प्राधिकरण समस्या हल नहीं करेगा तो किसान कोर्ट जाएंगे।

    किसानों ने निर्णय लिया कि 17 जुलाई को महापंचायत बुलाई जाएगी। उसमें आंदोलन की रणनीति तैयार होगी। किसान कोर्ट और आंदोलन दोनों विकल्प खुले रखेंगे। अधिग्रहण के मुद्दे पर किसी भी बिल्डर से बात नहीं की जाएगी। प्राधिकरण से सीधी वार्ता होगी। मांग पूरी नहीं हुई तो किसान अपनी जमीन नहीं देंगे। समस्या का समाधान होने तक मुआवजा न उठाने व जमीन कब्जा न देने का भी निर्णय किया गया। किसानों ने कहा कि वे प्राधिकरण के सामने नहीं गिड़गिड़ाएंगे, लड़कर हक हासिल किया जाएगा।

    -Dainik Jagran
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  • फिर टेंशन देने के मूड में किसान


    ग्रेटर नोएडा के किसान एक बार फिर बिल्डरों और अथॉरिटी को टेंशन देने के मूड में हैं। बिसरख समेत चार गांवों के किसानें ने मीटिंग कर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट जाने का फैसला किया है। किसान हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए सोमवार को पेपर वर्क पूरा करेंगे। इसके बाद मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। अगर हाई कोर्ट किसानों की याचिका स्वीकार कर जमीन अधिग्रहण रद्द करने का फैसला दे देता है तो दर्जनों बिल्डरों के प्रॉजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है। ऐसा होने पर हजारों निवेशकों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।

    ग्रेटर नोएडा किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने को लेकर पंचायत की। समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी ने बताया कि बिसरख गांव के किसानों की अथॉरिटी ने करीब 608 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की है। अधिग्रहण के बाद अथॉरिटी ने जमीन बिल्डरों को अलॉट कर दी। किसानों ने पंचायत में आरोप लगाया कि अथॉरिटी ने किसानों की वर्षों पुरानी आबादी का भी अधिग्रहण कर लिया जिससे किसान बेघर हो गए।

    मनवीर ने बताया कि बिसरख की तरह ही रौजा , जलालपुर व पतवाड़ी गांव में भी किसानों ने पंचायत कर अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट जाने का निर्णय किया है। रौजा याकूबपुर में अथॉरिटी ने हाल ही में धारा -4 की कार्रवाई पूरी की है। बिसरख में हुई किसान पंचायत में प्रधान अजय भाटी , कर्ण सिंह , रिछपाल सिंह , रणबीर यादव , जलालपुर के पूर्व प्रधान जयप्रकाश , ग्रीस त्यागी आदि शामिल थे। उन्होंने बताया कि दो गांवों में 70 प्रतिशत किसान हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की बात कह रहे हैं जबकि 30 प्रतिशत किसान आपसी समझौते से ही मामले को निपटाने के पक्ष में हैं।

    -navbharat times
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  • 'मुआवजा खत्म, कहां से लौटाएं पैसा'


    नोएडा एक्सटेंशन एरिया के शाहबेरी गांव में कुल 341 किसानों में से 131 ने ही मुआवजा उठाया है। किसानों का कहना है कि अथॉरिटी ने 15 दिन में मुआवजा वापस जमा करने के लिए दबाव बना रही है। इसके खिलाफ भी किसान सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। किसानों का कहना है कि मुआवजा देने में गलती अथॉरिटी ने की है , किसानों की कोई गलती नहीं है। जो मुआवजा मिला , उसमें से कुछ में मकान बना लिया और कुछ को बच्चों की शादी आदि में लगा दिया। अब किसानों के पास मुआवजा बचा ही नहीं है। ऐसे में वे कहां से मुआवजा लौटाएं।

    अथॉरिटी अफसरों का कहना है कि शाहबेरी के किसानों को 17 करोड़ , 90 लाख , 31 हजार 838 रुपये का मुआवजा बांटा गया था। मुआवजे को लौटाने के लिए किसानों की लिस्ट बना ली गई है। इन सभी को नोटिस भेजे जाएंगे। किसानों को मुआवजा राशि 15 दिन में लौटानी होगी। अफसरों का कहना है कि अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसानों को जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अभिलेखों में जमीन ग्रेनो अथॉरिटी के नाम दर्ज हो गई थी। अब जमीन किसानों के नाम की जाएगी। इसके बाद फिर अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

    _navbharat times
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  • नोएडा एक्सटेंशनः निवेशक भी जाएंगे कोर्ट


    नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब वे अपना पैसा बिल्डरों से वापस मांग रहे हैं तो वे उन्हें गुमराह कर रहे हैं। इन निवेशकों का कहना है कि अथॉरिटी ने बिल्डरों को पैसा लौटाने के लिए जो निदेश दिए हैं, बिल्डर उसका पालन नहीं कर रहे हैं। रविवार को नोएडा एक्सटेंशन एरिया के गौड़ सिटी गोलचक्कर पर निवेशकों ने जमकर हंगामा किया। धरना-प्रदर्शन करने पहुंचे इन्वेस्टर रवि गर्ग ने बताया कि निवेशक भी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। सैकड़ों निवेशक कई घंटे तक गौड़ सिटी गोलचक्कर के पास हंगामा करने के बाद चुपचाप वापस चले गए। निवेशकों का कहना है कि हमने फेसबुक और गूगल से एक-दूसरे को ढूंढा। अब हम एक-दूसरे के संपर्क में हैं। हालांकि बिल्डर्स ने एक बार फिर यह दावा किया है कि वे निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए तैयार हैं और उनका कहना है कि अथॉरिटी से सेटलमेंट हो जाने के बाद वे निवेशकों का पैसा ब्याज के साथ लौटाएंगे।

    फिर टेंशन देने के मूड में किसान
    नोएडा एक्सटेंशन में चार गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ मंगलवार को हाईकोर्ट जाने का फैसला लिया है। यदि इन किसानों के पक्ष में फैसला हुआ तो दर्जनों बिल्डरों के प्रॉजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है। ग्रेटर नोएडा किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने रविवार को पंचायत की। समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी ने बताया कि बिसरख (608 हेक्टेयर अधिग्रहण), रौजा, जलालपुर व पतवाड़ी गांवों में किसानों ने हाईकोर्ट जाने का निर्णय लिया है। शाहबेरी में मुआवजा लेने वाले किसानों का कहना है कि अथॉरिटी 15 दिन में मुआवजा वापस जमा करने के लिए दबाव बना रही है। इसके खिलाफ भी किसान सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।


    -Navbharat times
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  • 'निवेशकों को ब्याज सहित लौटाएंगे पैसा'


    शाहबेरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद किसानों व ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के बीच बढ़ी दूरी और नोएडा एक्सटेंशन की स्थिति सामान्य करने के लिए अब बिल्डर भूमिका निभाएंगे। नोएडा एक्सटेंशन के बिल्डरों ने मीटिंग कर अथॉरिटी और किसानों के बीच ब्रिज की भूमिका निभाने का निर्णय किया है। तीन बिल्डरों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। बिल्डरों ने निवेशकों से धैर्य रखने की अपील की है। बिल्डरों के मुताबिक , अथॉरिटी से बिल्डरों का सेटलमेंट होने के बाद निवेशकों का पैसा ब्याज समेत वापस किया जाएगा।

    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहबेरी मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद जहां किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई , वहीं अथॉरिटी , बिल्डरों और निवेशकों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। नोएडा एक्सटेंशन के दूसरे गांव के किसान भी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर , अथॉरिटी व किसानों के बीच दूरी भी बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए नोएडा एक्सटेंशन एरिया के 50 बिल्डरों ने मीटिंग की। मीटिंग में निर्णय किया है कि अब बातचीत के आधार पर ही किसानों से जमीन ली जा सकती है। इसके लिए अथॉरिटी और किसानों को एक टेबल पर लाना जरूरी है। बिल्डरों ने तय किया है कि सुपरटेक के चेयरमैन आर . के . अरोड़ा , आम्रपाली ग्रुप के चेयरमैन अनिल शर्मा और गौड़ सिटी के चेयरमैन मनोज गौड़ किसानों और अथॉरिटी को बातचीत के लिए तैयार करेंगे। बिल्डरों ने निवेशकों से धैर्य रखने की अपील की है। उनके मुताबिक , एक बार अथॉरिटी से सेटलमेंट होने के बाद निवेशकों को ब्याज सहित रुपये लौटाए जाएंगे।

    _navbharat times
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  • निवेशक मांग रहे हैं जवाब


    जमीन अधिग्रहण रद्द होने के फैसले से निराश निवेशकों ने रविवार को नोएडा एक्सटेंशन एरिया में गौड़ सिटी गोलचक्कर पर जमकर हंगामा किया। निवेशकों ने बिल्डरांे पर जमीन अधिग्रहण रद्द होने के बाद रुपये वापस न करने का आरोप लगाया है। निवेशकों का कहना है कि अब वे अथॉरिटी व बिल्डरों के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। इसके लिए निवेशक कोई संगठन तलाशेंगे। निवेशकों का कहना है कि उन्हांेने नोएडा एक्सटेंशन में यह सोचकर घर बसाने का सपना संजोया था कि बिल्डरांे ने जमीन ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से अलॉट कराई है। इस जमीन पर किसी प्रकार का विवाद नहीं होगा लेकिन मामला हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट चला गया। सुप्रीम कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए अधिग्रहण रद्द कर दिया। निवेशकों का कहना है कि उन्होंने जीवन भर की कमाई लगा दी है।

    आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पैसा मांगने पर बिल्डर निवेशकों को गुमराह कर रहे हंै। नोएडा एक्सटेंशन में गौड़ सिटी गोलचक्कर पर धरना प्रदर्शन करने पहंुचे निवेश रवि गर्ग ने बताया कि वे प्रदर्शन शांतिपूर्वक करने आए हैं। सरकार , अथॉरिटी व बिल्डर हजारांे निवेशकों के बारे में कुछ नहीं सोच रहे हंै। निवेशकों ने बिल्डरांे के प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराने के लिए लोन लिया है। बैंक लोन की किस्त बराबर ले रहे हैं। शाहबेरी में ही 8 हजार निवेशक हैं जिन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। रवि गर्ग का कहना है कि निवेशक भी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वे कोई संगठन या स्वयंसेवी संस्था तलाशंेगे। निवेशकों का कहना है कि उन्होंने फेसबुक व गूगल से आपस में संपर्क किया है।

    निवेशक डी . पी . सिद्घार्थ ने बताया कि बिल्डर कह रहे हंै कि जब ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी हमें पैसा लौटाएगी , तभी हम पैसा वापस करंेगे। बिल्डरांे की इस बात से लगता है कि 4 महीने बाद ही पैसा मिल पाएगा। वे ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

    आलोक गुप्ता का कहना है कि यह ठीक है कि सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के हित में फैसला दिया है। उन्हांेने कहा कि नोएडा एक्सटेंशन में हजारांे निवेशक हैं जिन्होंने बैंक से लोन लिया है। निवेशक भी अपना हक मांगने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हंै। सैकड़ांे निवेशक गोलचक्कर के पास हंगामा करने के बाद चले गए।
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  • नोएडा एक्सटेंशन पर फैसले से जीडीए को टेंशन


    नोएडा एक्सटेंशन पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जीडीए अफसरों के भी होश उड़े हैं। जीडीए की मधुबन - बापूधाम कॉलोनी स्कीम की करीब 42 प्रतिशत जमीन पर विवाद है और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। विवाद के कारण कॉलोनी में पानी , बिजली , सड़क जैसी बेसिक फैसलिटी डिवेलप नहीं हो सकी है।

    जबरन अधिग्रहण का आरोप
    मधुबन - बापूधाम कॉलोनी के लिए जीडीए ने करीब 1200 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव वर्ष 2007 में तैयार किया था। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन को जीडीए ने भू अर्जन अधिनियम की धारा चार , छह के बाद 17 को लागू कर अधिग्रहीत कर ली गई। उनकी आपत्ति तक नहीं सुनी गई और मुआवजे का रेट 1100 रुपये प्रति वर्गमीटर तय कर दिया। बाद में कुछ प्रभावित किसानों को जमीन का करार भरवाकर उन्हें मुआवजा दे दिया गया। इसके बाद कई किसान जीडीए के खिलाफ कोर्ट चले गए। जीडीए के भू अर्जन अधिकारी ज्ञानेंद्र वर्मा के मुताबिक मधुबन - बापूधाम स्कीम की करीब 42 प्रतिशत जमीन पर विवाद है। कई केस हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

    मधुबन - बापूधाम में कई स्कीम लॉन्च
    जीडीए वर्ष 2009 से अब तक कई स्कीमों को लॉन्च कर चुका है। जीडीए ने जनवरी 2009 में 5024 ईडब्ल्यूएस फ्लैट , 500 एलआईजी , 1000 एमआईजी की स्कीम लॉन्च की थी। सितंबर 2009 में 300 प्लॉट की स्कीम निकाली , जनवरी 2010 में 619 एलआईजी फ्लैट स्कीम लॉंन्च की गई। फरवरी 2010 में विधायकों के लिए 272 प्लॉट की स्कीम लॉन्च की गई। दिसंबर 2010 में जीडीए ने मधुबन में 16 मंजिला टावर बनाने का ऐलान किया था।

    आवंटियों को कब्जे का इंतजार
    जीडीए के ओएसडी आर . पी . पांडे के मुताबिक जीडीए स्कीम में अब तक 7990 प्रॉपर्टी का आवंटन कर चुका है। जीडीए अभी तक किसी भी प्रॉपर्टी पर कब्जा नहीं दे पाया है। पांडे का कहना है कि विवाद के कारण पानी , बिजली , सड़क जैसी फैसिलिटी डिवेलप नहीं हो सकी है।

    -Navbharat times
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  • Buyers protest, demand money back plus relief


    With Saturday's meeting between builders and buyers failing to clear clouds of uncertainty, about 300 buyers - who have booked flats in projects planned at village Shahberi- protested at Noida Extension and demanded immediate refund with compensation. They alleged both the authority and builders were not doing much to ensure their investments were safe.

    Noida Extension, billed to be a mega housing hub in the NCR, is in the midst of a major crisis after a court judgment quashed the forcible acquisition of entire land in Shahberi, causing the fate of thousands of under-construction and planned houses to hang in the balance.

    Ravi Garg, who has booked a flat in Panchsheel Green, said, "Farmers are rejoicing as they have got their land back. We don't have any problem. But what's our fault? We have also put in our hard-earned money. I had myself taken a loan of R15 lakh. No one is concerned about us."

    "The builder is saying when the authority returns money to builders, buyers will be refunded. They cannot put us on hold like this."

    Buyers who demonstrated at Noida Extension said they were pooling in money and bracing for a long-drawn battle. Manoj Indoria, general manager (sales) at Panchsheel, said, "Our project falls in two villages - Itaidha and Shahberi. Of the 29 towers, 12 are safe. We have already requested the buyers to get in touch with us before they can be relocated."

    Sushil Kumar Srivastav, who has booked a flat in Eco Village I with Supertech, said, "The builder is saying my money is safe. But there is no clarity. There is no guarantee." A resident of Delhi's Laxmi Nagar, Srivastav has taken a loan of R11.5 lakh. Om Prakash Mishra of Vaishali ( Ghaziabad ) had opted for the same project and took a loan of R10 lakh. He said, "Farmers of Bisrakh where the project is located has stopped construction work off and on. Panic has definitely set in."

    Amit Sarkar of Ghaziabad had taken a loan of R5.5 lakh and booked a flat in Panchsheel Green. "The builder is saying my money is safe. But there is a lot of uncertainty looming as farmers from other villages are moving court seeking quashing of land acquisition," he said.

    On Friday, Greater Noida CEO Rama Raman said those who have booked flats in Shahberi village would be relocated or refunded and told builders to approach each and every buyer and ensure speedy redressal of their problems. But his instructions have failed to help much. On Saturday too, hundreds of anxious buyers swamped developers' corporate offices as well construction locations and site offices in Noida Extension.

    The Greater Noida CEO has said builders have to relocate buyers but no relocation will be done without buyers' consent. "Builders must refund those who don't want to relocate. We will bail out builders too, mainly to ensure buyers get their money back if they so wish," he said. But despite frequent meetings with builders, buyers are looking anything but assured.

    -HT
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  • Gr Noida home-buyers face cuts in refunds

    Noida: Hundreds of homebuyers in Greater Noida took to the streets on Sunday,asking the Supreme Court and government to ensure that builders refund their deposits.

    The Greater Noida Industrial Development Authority has said it is open to renegotiation for land but costs will go up,a prospect neither developers nor buyers welcome.Buyers also say builders have offered to refund their money but with a deduction.

    The apex court,in ruling in favour of farmers,did not consider that this would jeopardize investments made by more than one lakh families, said Ravi Garg,a engineer.Garg,who booked a 3-BHK flat with Panchsheel Greens,added,The court should direct the builders to fully refund the money to those whose projects have been affected.My builder said we have to wait for our refund till builders are compensated for the losses by GNIDA. Panchsheel Greens was unavailable for comment.

    The best offer so far,said Ajay Sethi who has also booked a flat with Panchsheel Greens,is a slashed refund.The builder told me they will refund only part of the Rs 8 lakh I have invested, said the documentary filmmaker.


    -TOI
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  • Now,farmers to sell to highest bidder

    Greater Noida: Several farmers in adjoining villages of Sahberi,like Jalalpur,Iteda,Haivatpur and Roja,say that they are open to selling their land at higher costs to whoever is ready to pay for it.Residents of Jalalpur,where land has been notified for acquisition under Section 4 of the Land Acquisition Act,say that they would dispose of their land to builders if paid the right costs.

    We are open to sell our land directly to builders.We do not want to give it to the government at paltry amounts, said Sukhbir Pradhan,the headman of Jalalpur.Sukhbir said that they have had several meetings after land in the village was notified for acquisition.If builders discuss the issue with us and decide upon a rate similar to what the government has been selling land to them,we will sell to them directly, said Pradhan.Majority of villagers in Jalalpur have small land holdings which account for close to 80 per cent of the total land in the village.Villagers own small plots that will further reduce with each passing generation, he said.

    Uday Veer Singh,who owns 2.5 bighas of land in Jalalpur,runs a small eatery in the neighbouring village of Roja.I am least bothered as to who buys my small plot as long as I am compensated adequately, said Singh.
    The story in the villages of Chipiana Bujurg and Vaidpura is similar.Land has been notified for acquisition under Section 4 but farmers have expressed their unwillingness to part with it.

    Residents of the other nearby villages,where compensation has already been paid and land acquired,say that they want their land back as the government has paid many times more to builders after acquiring land from them at cheap rates.They feel short-changed too as the government acquired land from them citing industrial purposes and promised them jobs,but later the land was diverted to builders for residential purposes.
    The family of Mohit Yadav in Iteda village lost over 80 bighas of ancestral land to the government at a paltry Rs 850 per square metre.The government acquired land saying it was for industrial development.However,we learnt later that it had been sold to builders for as high as Rs 17,000 per sq m, said Yadav.

    We want our land back from the government.Whether we farm on it or re-sell it for higher prices will be decided in the future, echoes Avneesh Sharma of neighbouring Haivatpur.His family lost more than 120 bighas of ancestral farmland to land acquisition.

    -TOI
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  • बीस जुलाई से किसान रोकेंगे बिल्डरों का काम

    एक दर्जन गावों के किसान अपनी मांगों को लेकर आगामी २० जुलाई से बिल्डरों का काम रोककर धरने पर बैठेंगे। रविवार को सोरखा जाहिदाबाद, सरफाबाद, बरौला, परथला, ककराला, सलारपुर, गढ़ी चौखंडी, बहलोलपुर और मोरना गांवों के किसानों ने सोरखा में महापंचायत की।
    इन गांवों के किसान प्राधिकरण द्वारा बेची जा रही जमीन के भाव का ५० फीसदी हिस्सा मुआजा देने, राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का मालिकाना हक किसानों के नाम दर्ज करने, गांव की आबादी को जहां है, वहीं छोड़ने और गांव के चारों ओर पेरीफेरल रोड बनाने, पांच प्रतिशत के आवासीय प्लॉट से अतिक्रमण हटाकर कब्जा दिलाने, भूमिहीन किसानों केलिए सौ-सौ मीटर का प्लॉट देने और सोरखा गांव में इंटर कालेज बनाने की मांग कर रहे हैं। पंचायत में किसानों ने अपनी मांगें मनवाने के लिए उनकी जमीन पर चल रहे बिल्डरों केकाम को रोकने और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने का निर्णय लिया है। सोरखा के ग्राम प्रधान नरेश यादव का कहना है कि बीते १५ मई को डीसीईओ ने धरने पर बैठे किसानों से उनकी मांगे जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया था, मगर अभी तक उनकी एक भी मांग पूरी नहीं हुई है। इस कारण किसान २० जुलाई से शांतिपूर्ण धरना देंगे।
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    -Amar Ujala
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