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Noida Extension Buyers Unite Against Builders

Last updated: August 29 2012
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  • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

    नोएडा एक्स.: पब्लिक को भरोसा दिलाने की कोशिश



    ग्रेटर नोएडा।। हाल के बरसों में नोएडा एक्सटेंशन किफायती घर चाहने वालों के लिए सबसे पसंदीदा ठिकाना बन चुका था। यहां करीब ठाई लाख फ्लैट बन रहे हैं। एक लाख लोग इनमें बुकिंग करा चुके हैं। लेकिन इसके एक हिस्से शाहबेरी गांव में जमीन का कब्जा रद्द होने के अदालती फैसले ने इन तमाम लोगों की नींद उड़ा दी है। आगे क्या होगा, कहना मुश्किल है, क्योंकि दूसरे गांवों के लोग भी अदालत पहुंच रहे हैं। लोगों का सामना मुश्किल सवालों से हो रहा है- शिफ्ट करें, पैसा वापस लें या इतंजार करें? तस्वीर साफ होने में कुछ वक्त लग सकता है, लेकिन इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- सरकार और किसानों की इस लड़ाई में आम आदमी को क्यों पिसना पड़ रहा है ? इसीबीच अथॉरिटी ने कहा है कि निवेशकों को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और उन्हें पूरा पैसा वापस किया जाएगा।

    पूरा पैसा वापस देना होगा
    नोएडा एक्सटेंशन में निवेशकों के रविवार के हंगामे के बाद ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी अपनी साख बचाने में जुट गई है। सीईओ रमा रमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया कि किसी भी निवेशक का पैसा फंसने नहीं दिया जाएगा। बिल्डरों को निवेशकों का पूरा पैसा लौटाना होगा। अगर कोई बिल्डर पैसा लौटाने में आनाकानी करता है तो उसके खिलाफ अथॉरिटी से शिकायत कर सकते हैं। सीईओ ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर कोई बिल्डर अथॉरिटी से अपना पैसा वापस लेना चाहे, तो वह तुरंत ले सकता है। शाहबेरी में अधिग्रहण रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद करीब सात बिल्डरों के प्रॉजेक्ट प्रभावित हुए हैं। प्रॉजेक्ट में निवेश करने वाले सैकड़ों निवेशकों ने रविवार को नोएडा एक्सटेंशन में प्रदर्शन कर अथॉरिटी और बिल्डरों को कटघरे में खड़ा कर दिया।

    निवेशकों ने बिल्डरों पर बुकिंग अमांउट नहीं लौटाने का भी आरोप लगाया। सीईओ ने कहा कि कुछ बिल्डरों ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है कि वे निवेशकों का पैसा ब्याज समेत लौटाएंगे। सीईओ ने साफ कर दिया कि किसी भी निवेशक के पैसे में कटौती नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि अगर बिल्डर अपना पैसा वापस नहीं लेते हैं तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पैदा हुई समस्या से निपटने के लिए अथॉरिटी बिल्डर्स, बैंकर्स और किसानों के साथ मीटिंग करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की फाइनल कॉपी मिलने के बाद शाहबेरी में फिर से अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

    जमीन पर दोबारा कब्जा लेंगे
    शाहबेरी में नए सिरे से जमीन लेने की कवायद शुरू होने वाली है। शाहबेरी की जमीन का कब्जा अदालत ने इसलिए रद्द किया था कि अथॉरिटी ने इमरजेंसी क्लॉज के तहत किसानों कि बात नहीं सुनी। लिहाजा अब धारा-5 ए के तहत सभी किसानों के ऐतराज सुनने के बाद ही जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। गौरतलब है कि इस प्रोसेस में कई महीने लग जाते हैं। लेकिन इस बीच कई नई बातें हो रही हैं। किसानों से सीधे जमीन लेने की कोशिश तो हो ही रही है, कई गांव अपनी जमीन देने खुद आगे आ रहे हैं। यहां के चार गांवों के 20 किसानों ने अपनी जमीन को देने के लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से सीधे करार किया है। किसानों ने कहा है कि वे जमीन अपनी मर्जी से दे रहे हैं। इस इलाके में जमीन लेने का प्रोसेस शुरू ही नहीं हुआ है।

    -Navbharat times

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    • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

      ग्रेनो अथॉरिटी किसानों को देगी प्लॉट


      6 पर्सेंट विकसित प्लॉट पर अतिक्रमण से परेशान हजारों किसानों के लिए अच्छी खबर है। ऐसे किसानों को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी दूसरी जगह पर प्लॉट देगी। इसके साथ ही अतिक्रमण हटाने के लिए भी विशेष अभियान चलेगा। लीजबैक की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अथॉरिटी ने 3 सीनियर अफसरों की एक कमिटी बनाई है।

      ग्रेटर नोएडा एरिया के हजारों किसानों को 6 पर्सेंट विकसित एरिया में प्लॉट तो मिल गया है , लेकिन उस जमीन पर अवैध अतिक्रमण होने के कारण किसानों को अब तक कब्जा नहीं मिल सका है। तुगलपुर , सूजरपुर , एच्छर , बिरौंडी और हबीबपुर समेत ऐसे तमाम गांवों के किसान परेशान हैं। ऐसे किसानों को जल्दी राहत मिल जाएगी। अथॉरिटी ने ऐसे किसानों को अन्य स्थानों पर प्लॉट देने का फैसला किया है। नोएडा - ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ रमा रमण ने बताया कि जो किसानों की 6 पर्सेंट जमीन पर अवैध अतिक्रमण हैं , उन्हें अन्य स्थान पर प्लॉट विकसित कर दिए जाएंगे। प्रभावित किसान अपनी समस्या लेकर अथॉरिटी अफसर से मिल सकते हैं। इसके साथ ही अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ भी अथॉरिटी अभियान शुरू करने जा रही है। सीईओ ने बताया कि ग्रेटर नोएडा एरिया में सुनियोजित विकास के लिए यह जरूरी है कि अवैध अतिक्रमण पर रोक लगाई जाए। इसके लिए अतिक्रमण हटाओ दस्ता जल्द अभियान शुरू करेगी।

      लीजबैक में आएगी तेजी
      लीजबैक की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए 3 अफसरों की कमिटी गठित की गई है। कमिटी में एसीईओ विमल चंद्र श्रीवास्तव , डीसीईओ पी . के . गुप्ता और डीसीईओ अखिलेश सिंह शामिल हैं। सीईओ ने बताया कि अब हर दिन अधिकारी लीजबैक की समीक्षा करेंगे। जरूरत पड़ने पर गांवों में कैंप भी लगाएंगे।

      नोएडा एक्सटेंशन के अन्य बिल्डर लें टेंशन
      नोएडा एक्सटेंशन एरिया में शामिल बिसरख , पतवाडी , हैबतपुर समेत अन्य गांवों के हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी पर सीईओ का कहना है कि एक्सटेंशन के अन्य बिल्डर और निवेशक इसके लिए टेंशन न लें। शाहबेरी व अन्य गांवों की स्थिति बिल्कुल अलग है। शाहबेरी में लैंड यूज चेंज करने का मसला था। दूसरी ओर वहां सिर्फ 20 फीसदी किसानों ने ही मुआवजा लिया था इसलिए कोर्ट ने किसानों के हक में फैसला दिया। अन्य गांवों में स्थिति अलग है। हालांकि सीईओ ने कहा कि वह किसी भी गांव में सामूहिक पंचायत कर किसानों की समस्याओं को सुलझाने के लिए तैयार हैं।

      -Navbharat times

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      • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

        मुआवजा लेने वाले किसानों को राहत



        शाहबेरी में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा लेने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ ने साफ कर दिया है कि मुआवजे की राशि लेने के लिए किसानों को परेशान नहीं किया जाएगा। जो किसान मुआवजे का पैसा लौटाने में असमर्थ हैं उनका मुआवजा दोबारा जमीन अधिग्रहण के समय ऐडजस्ट कर दिया जाएगा।

        शाहबेरी में करीब 20 फीसदी किसानों ने जमीन का मुआवजा अथॉरिटी से ले लिया है। जमीन का अधिग्रहण रद्द होने के बाद मुआवजा उठाने वाले किसानों पर अथॉरिटी को मुआवजा राशि लौटाने की तलवार लटक रही थी। रुपये लौटाने के लिए अथॉरिटी का नोटिस मिलने के बाद किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसान इस मामले में भी हाई कोर्ट में याचिका दायर करने पर विचार करने लगे , लेकिन सोमवार को सीईओ रमा रमण ने यह कहकर किसानों को भारी राहत दी है कि किसानों से मुआवजा वसूलने के लिए किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाया जाएगा। सीईओ ने बताया कि इस मसले पर जल्द ही किसानों से बातचीत की जाएगी। जो किसान मुआवजा का पैसा लौटाने में सक्षम हैं वह मुआवजा लौटा सकते हैं , लेकिन जो किसान फिलहाल रुपये वापस करने में सक्षम नहीं है , उन्हें इसके लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।

        सीईओ ने बताया कि शाहबेरी में फिर से जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अगर किसान चाहें तो उनके रुपये उस समय भी ऐडजस्ट किया जा सकते हैं। अगर उस समय मुआवजे का रेट ज्यादा होगा तो किसानों को बढे़ हुए रेट से मुआवजा दिया जाएगा।
        -navbharat times

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        • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

          Association got invitation from Aajtak

          Hello NEOMA,

          Today we have received a invitation from Delhi AAJ Tak to join their special program on problem of Noida extension which is scheduled on Wednesday 13th July 2011.

          Below is the content of mail received from Aaj Tak.

          ----------------------------------------------------------------------------------------
          Hi,
          To whom so ever it may concern
          We are planning a show on “Noida Extension Farmers-Builders Land Disputes” on 13th July 2011, Wednesday for our Delhi & NCR channel Dilli Aaj Tak. This show is discussion based show in which there are 4-5 eminent panelists and selected 40-50 audiences. And this time we want to invite members of your organization who are suffering in between.
          Kindly let us know if 20-25 members can participate in our show.
          Hope to get a positive response.
          Kindly let us know who all can come and join the show. Please do reply via Email to adminneoma.in (Admin"at"Neoma.in) Please mention the subject line “Available For Invitation from Aaj Tak.


          Thanks,
          ADMIN NEOMA.

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          • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

            Originally posted by fritolay_ps View Post
            मुआवजा लेने वाले किसानों को राहत



            शाहबेरी में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा लेने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ ने साफ कर दिया है कि मुआवजे की राशि लेने के लिए किसानों को परेशान नहीं किया जाएगा। जो किसान मुआवजे का पैसा लौटाने में असमर्थ हैं उनका मुआवजा दोबारा जमीन अधिग्रहण के समय ऐडजस्ट कर दिया जाएगा।

            शाहबेरी में करीब 20 फीसदी किसानों ने जमीन का मुआवजा अथॉरिटी से ले लिया है। जमीन का अधिग्रहण रद्द होने के बाद मुआवजा उठाने वाले किसानों पर अथॉरिटी को मुआवजा राशि लौटाने की तलवार लटक रही थी। रुपये लौटाने के लिए अथॉरिटी का नोटिस मिलने के बाद किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसान इस मामले में भी हाई कोर्ट में याचिका दायर करने पर विचार करने लगे , लेकिन सोमवार को सीईओ रमा रमण ने यह कहकर किसानों को भारी राहत दी है कि किसानों से मुआवजा वसूलने के लिए किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाया जाएगा। सीईओ ने बताया कि इस मसले पर जल्द ही किसानों से बातचीत की जाएगी। जो किसान मुआवजा का पैसा लौटाने में सक्षम हैं वह मुआवजा लौटा सकते हैं , लेकिन जो किसान फिलहाल रुपये वापस करने में सक्षम नहीं है , उन्हें इसके लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।

            सीईओ ने बताया कि शाहबेरी में फिर से जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अगर किसान चाहें तो उनके रुपये उस समय भी ऐडजस्ट किया जा सकते हैं। अगर उस समय मुआवजे का रेट ज्यादा होगा तो किसानों को बढे़ हुए रेट से मुआवजा दिया जाएगा।
            -navbharat times
            There is a bad news in side it for investors. Till date several builder MDs saying that where former's has taken compensation will not effect as HC / SC will not hear their cases. But above lines clearly shows that HC / SC also canceling the acquisition of those farmers land who has taken compensation, only point is that former has to return back the compensation money to authority and the way this news of authority is written it shown that now BMW also showing soft corner to farmers (elections effect). If BMW started to show soft corner to farmers then only GOD can save COMMON MAN invested in NE.

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            • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

              please let us know when is this show going to be telecaste

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              • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

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                • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

                  Affordable housing dream takes a knock


                  GREATER NOIDA: The middle-income buyer has borne the brunt of the Noida Extension crisis. As property rates soared 2003-onwards in Delhi, followed by the suburbs of Gurgaon, Noida and Ghaziabad, the Noida Extension-Greater Noida area held forth the promise of affordable housing.

                  Realty experts say the area accounted for a very large percentage of the total property market in the National Capital Region ( NCR) by the end of 2010.

                  For a buyer like Rajiv Aggarwal, who bought a flat in Mahagun My Woods, the big question now is, "If I am left with no choice but to cancel my booking, how will I ever find another affordable home?" Another buyer, who has invested in Gaur City II, said he was worried although his builder had promised to allot him a house in another project if the existing project had to be abandoned. "What if I do not like the location of my substitute flat? Secondly, will I get possession on time? I am really confused about whether I should wait or pull out my money".

                  Amit Singh, who has invested in an Ajnara project, said, "If I withdraw, how will I be compensated for the time and interest lost? Moreover, where will I find another home which will be as reasonably priced as this one?"

                  However, developers told TOI the present crisis would blow over and the area would once again attract buyers on a tight budget. "We are pretty sure that the land acquisition row is a temporary situation and the moment things get sorted out, buyers and investors will once again rush to book property," said Getamber Anand, vice-president, Confederation of Real Estate Developers' Associations of India ( CREDAI).

                  -TOI

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                  • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

                    Farmers to move court for CBI probe


                    NOIDA: Farmers from Noida Extension villages now want Central Bureau of Investigation (CBI) to probe the alleged irregularities in the acquisition and allotment of their land by Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA). They are likely to approach the Allahabad High Court in this connection on Tuesday.

                    Encouraged by the Supreme Court's verdict upholding cancellation of GNIDA's land acquisition in Sahberi village, the Noida Extension farmers had convened a meeting of village representatives in Bisrakh village on Sunday. The farmers alleged that, before acquiring their land, the authority had assured them it would develop the area as an industrial zone but its true intentions were exposed when the land was sold to builders at high rates.

                    "With the intent to expose the land acquisition exercise of GNIDA, we are going to file a case in Allahabad High Court seeking a CBI probe into their role," said farmer leader Manvir Bhati. "The officials have wronged not only the farmers but also the innocent homebuyers, who booked flats in Noida Extension after depositing their hard earned money," said Bhati.

                    "We will file a writ in the Allahabad High Court and request it to order a judicial inquiry into the roles played by these officials. We will demand at least a CBI inquiry into the whole affair," said Naresh Yadav, another farmer leader. The farmers said they would also seek a thorough assessment of the properties owned by the relatives of several Greater Noida officials in the region

                    -TOI

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                    • Re : Noida Extension Buyers Unite Against Builders

                      Steep cost of exit has buyers in a quandary


                      NOIDA: Fearful of a Sahberi like end to their housing dreams , many homebuyers in the Noida Extension area are now in a dilemma about pulling out of their housing projects .

                      Given the uncertainty over the fate of projects , investors are faced with the choice of exiting now , and paying a penalty to their builders , or staying invested and claiming a full refund in future , if their project is struck down by a court order . But the money so returned , they fear , will not be enough to buy another house, given the rapid appreciation in property prices .

                      Most buyers TOI spoke to said they would happily remain invested in their respective projects if only the government would guarantee the title of land . But with only their builders ' words for assurance , they have been forced to weigh the exit option .

                      "We do not want to exit , and even if we have to do so — in the worst case — we want to be relocated to similar projectsin nearby areas ," saidR a- vi Gaur , who has bought a three-bedroom flat in Panchsheel Greens housing project . "We do not want our money backif the projectis not affected by litigation ," said Gaur , adding , "property rates have increasedso muchthatwewill not be able to book a new flat even if thebuilder refundsour money with interest" .

                      "Even if I retain the flat that I have booked, I have no guarantee that the project will notbecancelledin the manner in which the Sahberi land acquisition was struck down ," said Ajay Shetty , a documentary filmmaker who has also bought a house in Panchsheel Greens .

                      The only factor restraining Shetty from cashing out is the penalty clause in his contract with the builder . "My builder says that my project is unaffected , and if I exit it will be as per the terms and conditions of the agreement ," said Shetty . As per the contract , he will have to pay the builder Rs 50,000 and 10 per centof thebasic cost of the project - altogether Rs 2.5 lakh .

                      Meanwhile , even staying invested has become difficult for homebuyers as many banks have stopped disbursing their home loans . Debjyoti Biswas , an investor in Amrapali's La Residentia project , says the builder has been sending him reminders to pay up the installment or face a penalty for delay in payment . "Thebuilder wants 18 per cent penalty in case of non-payment . The next 30 per cent of the payment is to come from the bank , and it has stopped issuing cheques," said Biswas .

                      -TOI

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