UP govt has created a law of oppression: SC on land acquisition :

UP govt has created a law of oppression: SC on land acquisition

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SC: Govt is snatching farm land from farmers and land act should be changed.

SC : villeges are being removed for govt proffit.


NA verdict will also be done tomorrow by SC.
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  • SC slams UP govt's land acquisition policy


    The Supreme Court on Tuesday hit out at the Mayawati government in Uttar Pradesh over its land acquisition policy, observing that the "state was driving out the poor".
    Maintaining that the "Land Acquisition Act is an engine of oppression", the court said Uttar Pradesh had become a "land-grabbing state"
    Calling the policy "anti-people" and a "sinister campaign", the court observed that the state was acquiring land for multiplexes in the name of development while the land owners were getting a pittance.

    SC slams UP govt's land acquisition policy : North: India Today
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  • Supreme Court to Uttar Pradesh Govt: Sinister campaign to grab land



    New Delhi: On a day when Rahul Gandhi is on a padyatra against Mayawati government on the issue of land acquisition in Uttar Pradesh, the Supreme Court has made scathing observations on the Greater Noida land acquisition.

    The Supreme Court has questioned the Uttar Pradesh government for changing the land use from industrial to residential within 11 days.

    In its order, the Supreme Court asked, "What prompted Greater Noida Authority to change their mind in 11 days for changing the land use? Land acquisition Act has become engine of oppression for common man. The state is taking advantage of this law and driving the farmers out of the village. This is a sinister campaign.

    Supreme Court to Uttar Pradesh Govt: Sinister campaign to grab land
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  • नोएडा एक्सटेंशन पर सुप्रीम कोर्ट ने की सरकार की खिंचाई


    सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर भूमि अधिग्रहण मामले में यूपी सरकार की जमकर खिंचाई की है। ग्रेटर नोएडा में फ्लैटों के निर्माण के लिए खेती योग्य जमीन के अधिग्रहण किए जाने को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा कि सरकार को आम लोगों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए लेकिन यह नहीं हो रहा। आप मल्टीप्लेक्स और मॉल के लिए जमीन का अधिग्रहण कर रहे हैं। यह नीति जनता के खिलाफ है।

    सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी, सूरजपुर और गुलिस्तानपुर के जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। इस फैसले को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण और बिल्डरों ने चुनौती दी है।

    जस्टिस जी. एस. सिंघवी और जस्टिस ए. के. गांगुली की बेंच ने कहा कि विकास के नाम पर आप क्या कर रहे हैं। यह बात तो समझ में आती है कि सरकार कोई जमीन अधिग्रहण कर उसमें कैनाल, बैराज आदि बनाए लेकिन आप मॉल और कमर्शल टाउनशिप के लिए ऐसा कर रहे हैं। आप कहते हैं कि यह रिहायशी इलाका है लेकिन यह किसके लिए है। जिन लोगों की जमीन ली गई है क्या वे जरूरतमंद नहीं है। बिल्डर की ओर से पेश वकील को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप अपना ब्रोशर देखें। उसमें जो कुछ भी है क्या वह गरीब व आम आदमी के लिए है। जो बिल्डिंग बनाई जा रही है उसके बारे में बताया गया है कि वहां स्विमिंग पूल, आयुर्वेदिक मसाज और हेल्थ क्लब आदि होंगे क्या यह गरीब लोगों के लिए है?

    अदालत ने अपनी टिप्पणी में आगे कहा कि अधिग्रहण के कारण लोग जब अपनी जीविका खोते हैं तो वे इसके लिए लड़ाई लड़ते हैं और इसके लिए वकीलों को भुगतान करते रहते हैं। विकास की बात पूरी तरह से स्पष्ट होनी चाहिए कि किस तरह के विकास किए जाएंगे। अदालत ने कहा कि कई राज्य कानून का सहारा लेकर गरीब आदमी से जमीन लेते हैं और वह बिल्डरों को दे रहे हैं ताकि मल्टीप्लेक्स और मॉल आदि बन सके। इस तरह का अभियान कपटपूर्ण है। यह अभियान जनता के खिलाफ है।

    सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि जरूरतमंदों के लिए घर बनाए जा रहे हैं इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि आप बताएं कि किसके लिए ये घर हैं। आप होटेल और मॉल बना रहे हैं जो आम आदमी के पहुंच से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को स्टे नहीं कर रहे। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

    -navbharat times
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  • 15 वर्षो से चल रहा है किसानों का संघर्ष


    ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण के विरोध में शुरू हुई यह लड़ाई एक दिन में नहीं छिड़ी। किसान 15 वर्षो से संघर्ष कर रहे हैं। इस लड़ाई में न केवल किसानों को जेल की हवा खानी पड़ी, बल्कि कुछ किसानों को जान भी गंवानी पड़ी। किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण ने कम कीमत पर जमीन लेकर बिल्डरों को बेच दी। बिल्डर अब इस पर मुनाफा कमा रहे हैं। प्राधिकरण का गठन औद्योगिक विकास के लिए हुआ था लेकिन वह मूल उद्देश्य से भटक गया है। उद्योग की जगह रिहायशी सेक्टरों के लिए जमीन आवंटित की जा रही है। नतीजतन उपजाऊ भूमि के जाने से किसान बेरोजगार हो रहे हैं, जमीन के बदले उन्हें रोजगार नहीं मिला। प्रदेश सरकार ने किसानों के गुस्से को भांपकर 2 जून को नई जमीन अधिग्रहण नीति घोषित की, लेकिन इससे किसान खुश नहीं हुए।

    दरअसल, यमुना एक्सप्रेस प्राधिकरण का गठन ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबी व 100 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए किया गया था। वर्ष 2001 से 2007 तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। सड़क का निर्माण भी विवादों में रहा। 2007 में प्राधिकरण ने प्रस्तावित सड़क के किनारे ग्रेटर नोएडा से आगरा तक एक शहर बसाने का निर्णय किया। आनन-फानन में जेवर तक 34 हजार हेक्टेयर भूमि का मास्टर प्लान बनाकर एक्सप्रेस-वे के किनारे आवासीय योजनाएं घोषित कर दी गई। एक ही झटके में प्राधिकरण ने 300, 500, 1000 व 4000 वर्ग मीटर के 21 हजार भूखंडों की योजना निकाल दी। इसके अलावा कई नामी बिल्डर, आइटी कंपनी व शैक्षिक संस्थानों को जमीन दे दी गई। प्राधिकरण ने इसके लिए भट्टा पारसौल समेत करीब दो दर्जन गांवों की जमीन अधिगृहीत की। इसके बदले में किसानों को 800 रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दिया गया। अहम पहलू यह रहा है कि किसानों को पूरी तरह मुआवजा भी नहीं मिला था और बिल्डरों ने ऊंचे दामों पर भूखंडों को बेचना शुरू कर दिया। जिस जमीन पर 21 हजार आवासीय भूखंडों की योजना निकाली गई, उसका किसान को मुआवजा मिलने से पहले ही बाजार में भूखंडों की दर 15 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई।

    यही बात किसानों के गुस्से का कारण बनी। किसानों को लगा कि उन्हें ठग लिया गया है। किसान चाहते हैं कि उन्हें बाजार दर पर मुआवजा मिले। साथ ही बिल्डरों को हो रहे मुनाफे में भागीदारी, अर्जित भूमि के एवज में सात के बजाय 25 प्रतिशत जमीन, विस्थापित किसानों को रोजगार व गांवों में शहर की तर्ज पर बिजली, पानी, सड़क, सीवर आदि सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।



    -Dainik Jagran
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    नोएडा एक्सटेंशन पर सुप्रीम कोर्ट ने की सरकार की खिंचाई


    सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर भूमि अधिग्रहण मामले में यूपी सरकार की जमकर खिंचाई की है। ग्रेटर नोएडा में फ्लैटों के निर्माण के लिए खेती योग्य जमीन के अधिग्रहण किए जाने को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा कि सरकार को आम लोगों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए लेकिन यह नहीं हो रहा। आप मल्टीप्लेक्स और मॉल के लिए जमीन का अधिग्रहण कर रहे हैं। यह नीति जनता के खिलाफ है।

    सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी, सूरजपुर और गुलिस्तानपुर के जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। इस फैसले को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण और बिल्डरों ने चुनौती दी है।

    जस्टिस जी. एस. सिंघवी और जस्टिस ए. के. गांगुली की बेंच ने कहा कि विकास के नाम पर आप क्या कर रहे हैं। यह बात तो समझ में आती है कि सरकार कोई जमीन अधिग्रहण कर उसमें कैनाल, बैराज आदि बनाए लेकिन आप मॉल और कमर्शल टाउनशिप के लिए ऐसा कर रहे हैं। आप कहते हैं कि यह रिहायशी इलाका है लेकिन यह किसके लिए है। जिन लोगों की जमीन ली गई है क्या वे जरूरतमंद नहीं है। बिल्डर की ओर से पेश वकील को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप अपना ब्रोशर देखें। उसमें जो कुछ भी है क्या वह गरीब व आम आदमी के लिए है। जो बिल्डिंग बनाई जा रही है उसके बारे में बताया गया है कि वहां स्विमिंग पूल, आयुर्वेदिक मसाज और हेल्थ क्लब आदि होंगे क्या यह गरीब लोगों के लिए है?

    अदालत ने अपनी टिप्पणी में आगे कहा कि अधिग्रहण के कारण लोग जब अपनी जीविका खोते हैं तो वे इसके लिए लड़ाई लड़ते हैं और इसके लिए वकीलों को भुगतान करते रहते हैं। विकास की बात पूरी तरह से स्पष्ट होनी चाहिए कि किस तरह के विकास किए जाएंगे। अदालत ने कहा कि कई राज्य कानून का सहारा लेकर गरीब आदमी से जमीन लेते हैं और वह बिल्डरों को दे रहे हैं ताकि मल्टीप्लेक्स और मॉल आदि बन सके। इस तरह का अभियान कपटपूर्ण है। यह अभियान जनता के खिलाफ है।

    सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि जरूरतमंदों के लिए घर बनाए जा रहे हैं इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि आप बताएं कि किसके लिए ये घर हैं। आप होटेल और मॉल बना रहे हैं जो आम आदमी के पहुंच से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को स्टे नहीं कर रहे। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

    -navbharat times


    Ye kab tab kichayi hi karte rehenge, 1.5 month se yahi sun rehe hain. ek bar mai bol ke khatam kyon nahi karte hai :bab (59):

    At least we can understand then which projects are safe in Noida and GN
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