Watch Zee news... HC has cancel 589 Hct land acquisition of Patwari village so 17 builder projects are now on verge of danger.
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  • Dost,

    Where have you read this news Are you even aware how much work has been done at the sites affected by Patwari decisioin? Supertech in Eco village has completed construction till 7 and 8th Floor. Amarpali has constructed many villas in Lesser Valley. Though I have not read the judgement yet but dont think court even considered level of construction to decide the matter.

    Patwari village is spread over 560 hectares and if court was of the view that if construction in the entire area had reached till 7 or 8th floor, then balance of convenience would be different, then it does not make any difference. Coz in entire NE region, there are only four projects where significant construction has been done and those are Gaur City, Stellar jeevan, Amarpali Lesser Valley and Supertech Eco village - 1

    Originally Posted by StudRawk
    It did come as a surprise but one must realize that five or six projects, which have been affected, not much work had actually progressed at the site. In my personal opinion, the court might have a different opinion if the work had actually progressed to, say, the fourth floor or the seventh floor. And, they would have then factored in third party interests and the balance of convenience would have actually lied in favour of the developers and the end customers.

    But in this case, the court in its wisdom has decided that the balance of convenience was not that big a factor and they said that not much work has been done. In fact, they actually said that because not much work has been done at the site there was no reason to invoke the emergency clause. What was the hurry, the sites are lying fallow or some bare minimum work has been done. So it is not such a great deal to reverse the situation and give it back to the land owners. I do believe that if the work had actually happened, the judgment might not have come out the way it has.
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  • Originally Posted by stpdcomonman
    Dost,

    Where have you read this news Are you even aware how much work has been done at the sites affected by Patwari decisioin? Supertech in Eco village has completed construction till 7 and 8th Floor. Amarpali has constructed many villas in Lesser Valley. Though I have not read the judgement yet but dont think court even considered level of construction to decide the matter.

    Patwari village is spread over 560 hectares and if court was of the view that if construction in the entire area had reached till 7 or 8th floor, then balance of convenience would be different, then it does not make any difference. Coz in entire NE region, there are only four projects where significant construction has been done and those are Gaur City, Stellar jeevan, Amarpali Lesser Valley and Supertech Eco village - 1


    You are right, situation is really tough for end users. Today as per news now builders are saying that its government responsibility to cover the losses of everyone.

    नोएडा : बिल्डर बैक फुट पर, कहा सरकार करे नुकसान की भरपाई
    20 Jul 2011, 0805 hrs IST,नवभारत टाइम्स

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    नोएडा ।। पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण रद्द किए जाने के फैसले को बिल्डरों ने बड़ा झटका माना है। शाहबेरी से अलग परिस्थितियों के बावजूद हाई कोर्ट द्वारा पतवाड़ी का अधिग्रहण रद्द किए जाने के बाद बिल्डर अब सरेंडर की स्थिति में आ चुके हैं। अन्य गांवों के मामले में भी हाई कोर्ट में आगे होने वाली सुनवाई में भी इसी तरह के निर्णय आने की उम्मीद के चलते अब बिल्डर बैक फुट पर आ गए हैं।

    मंगलवार देर शाम सेक्टर - 58 में हुई क्रेडाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अथॉरिटी और सरकार से बिल्डरों और आम आदमी को होने वाले नुकसान की भरपाई करने को कहा है। उनके अनुसार देश में सरकार की मध्यस्थता से हुए अधिग्रहण इतने बडे़ पैमाने पर अन्य कहीं राज्य में रद्द नहीं हुए हैं।

    कोर्ट का फैसला आने के बाद क्रेडाई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसके असर के बारे में जानकारी दी। कॉन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डिवेलपर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया ( क्रेडाई ) के वेस्टर्न यूपी के पदाधिकारियों गीतांबर आनंद , अनिल शर्मा , आर . के . अरोड़ा व मनोज गौड़ ने सरकार और अथॉरिटी से आगे की लाइन ऑफ एक्शन बताने की मांग की है जिसमें फ्लैट बुक कराने वालों के साथ - साथ बिल्डरों के भी नुकसान की भरपाई की जा सके।

    पढें : नोएडा एक्सटेंशन में अभी और हो सकती है टेंशन

    उन्होंने बताया कि मंगलवार को हाई कोर्ट के निर्णय से 11 बड़े बिल्डरों के प्रॉजेक्ट प्रभावित हुए हैं जिनमें 20 हजार से ज्यादा फ्लैट बनाए जाने थे , इससे करीब 200 करोड़ का इनवेस्टमेंट भी प्रभावित हुआ है। इसके अलावा अथॉरिटी द्वारा अलॉट किए गए 2597 व्यक्तिगत प्लॉट भी आदेश के चलते रद्द हो गए हैं। इनमें स्कूल , हॉस्पिटल और सड़कें भी शामिल हैं।

    प्रेस कांफ्रेंस के दौरान फ्लैट बुक कराने वालों के हितों का पूरा ध्यान रखे जाने का दावा करने पर वहां पर बड़ी संख्या में पहुंचे निवेशक भड़क गए। बिल्डर द्वारा फ्लैट बुक कराने वाले फोन नहीं उठाने , मेल पर कंप्लेंट करने पर जवाब नहीं मिलने और फेस बुक पर रोजाना 900 शिकायतों के बावजूद कोई जवाब नहीं मिलने के सवालों का जवाब मांगने पर माहौल गर्म हो गया। इसके बाद बिल्डरों ने निवेशकों को वैकल्पिक साइट का ऑप्शन देने के बजाए रुपये 15 दिनों में बायर फ्रेंडली निर्णय के आधार पर वापस करने का आश्वासन दिया। शाहबेरी मामले में निर्णय के बाद एक नामी कंपनी ने निवेशकों को दूसरी साइट में शिफ्ट करने का ऑप्शन दिया था। यह साइट भी हाईकोर्ट के फैसले के चलते मंगलवार को प्रभावित हो गई है।
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  • बिसरख, घंघोला और इटेहरा पर सुनवाई 21 को



    ग्रेटर नोएडा।। इलाहाबाद हाई कोर्ट में 21 जुलाई को तीन गांवों के किसानों की याचिका पर सुनवाई होनी है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की ओर से सोमवार को कोर्ट में काउंटर फाइल दाखिल कर की गई। बिल्डर्स, बैंकर्स और निवेशक भी कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहते हैं। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि सुनवाई की तारीख टल सकती है।

    21 जुलाई को हाई कोर्ट में बिसरख, इटेहरा और घंघोला गांव के किसानों की याचिका पर सुनवाई होनी है। हाई कोर्ट ने इस मामले में अथॉरिटी को एक हफ्ते में काउंटर दाखिल करने का आदेश दिया था। जानकारी के मुताबिक, अथॉरिटी की ओर से काउंटर दाखिल कर दिया गया है। काउंटर दाखिल होने के बाद किसानों की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा जा सकता है। दूसरी ओर बिल्डर्स, नोएडा एक्सटेंशन के निवेशक और बैंकर्स भी अथॉरिटी में अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं। बुधवार तक वह भी कोर्ट की शरण में जा सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि सुनवाई की तारीख टल सकती है। अथॉरिटी अफसरों का कहना है कि बिल्डर, बैंकर्स और निवेशक अपना पक्ष कोर्ट में रखेंगे तो केस के फैसले में यह अहम होगा।

    -navbharat times
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  • कहीं इतिहास न बन जाए नोएडा एक्सटेंशन

    भविष्य का शहर नोएडा एक्सटेंशन अब इतिहास बनने के करीब पहुंच चुका है। करीब ढाई लाख परिवारों को आवास मुहैया कराने की पूरी योजना अब खटाई में पड़ती नजर आ रही है। इसके संकेत अब मिलने लगे हैं। एक्सटेंशन में न सिर्फ शाहबेरी और पतवाड़ी गांव में बन रहे प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले पीछा छुड़ाने को बेताब हैं, बल्कि अन्य प्रोजेक्ट के निवेशक भी पीछे हटने लगे हैं।
    14 गांवों की जमीन अधिग्रहित कर नोएडा एक्सटेंशन की नींव रखी गई। शाहबेरी, पतवाड़ी, बिसरख, इटैहड़ा, हैवतपुर, रौजा, जलालपुर, मिलखलच्छी (छोटी व बड़ी), खैरपुर, सादुल्लापुर, वैदपुरा, चौगानपुर, ऐमनाबाद और तुस्याना की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन पर धारा 17 (राज्य-राष्ट्र हित में जमीन अधिग्रहित की जाने वाली धारा) का इस्तेमाल कर जमीन ले ली गई। इसके बदले किसानों को मुआवजा सिर्फ 7.11 लाख रुपये बीघा दिया गया, जबकि बिल्डरों को जमीन 21 लाख रुपये (किसानों के अनुसार) में बेची गई। किसानों के अनुसार एक तो मिट्टी के भाव जमीन खरीद कर उसे सोने के भाव में बेचा जा रहा है, दूसरे उद्योग भी नहीं लगे। उनके बच्चों को रोजगार नहीं मिलेगा।
    यह पीड़ा लेकर एक-एक कर ये सभी 14 गांव के किसान कोर्ट में शरण में जा रहे हैं। शाहबेरी और पतवाड़ी के फैसले का व्यापक असर अब आने वाले दिनों में दिखेगा। बिसरख का फैसला भी 21 जुलाई को आना है। अगर यह फैसला भी शाहबेरी और पतवाड़ी की तर्ज पर हुआ, तो लगभग नोएडा एक्सटेंशन (अब तक जिन पर प्रोजेक्ट लांच हुए हैं) ही फंस जाएगा।
    शेष गांवों के किसान भी कोर्ट की राह पर चल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि चूंकि सभी गांवों की जमीन एक ही जैसी प्रक्रिया के तहत अधिग्रहित की गई है, ऐसे में कोर्ट का फैसला भी पहले जैसा रहने वाला है। ऐसे में निवेशक तो यहां से दूर भागने ही लगे हैं, बिल्डर भी दूर रहेंगे। नोएडा एक्सटेंशन बसने से पहले ही उजड़ने की राह पर चल पड़ा है। आम्रपाली के प्रमुख अनिल शर्मा भी कहते हैं कि देश में पहला ऐसा मामला है कि जब नोएडा प्राधिकरण से अधिग्रहित जमीन पर इतना विवाद हुआ है। इससे सभी बिल्डर्स सकते में हैं।
    एक और फैसला
    21 जुलाई को बिसरख के फैसले पर टिका भविष्य
    एक्सटेंशन से पीछे हटने का मन बना रहे निवेशक
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  • today's hearing postponed !!!

    today's hearing postponed to 26th july....
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  • Noida Extn: HC delays hearing on 2 villages’ land


    The Allahabad High Court, Wednesday, postponed its verdict on the legality of land acquisition in two villages of the Greater Noida area popularly known as Noida Extension.

    The High Court will announce its verdict on July 26 on the plea of farmers and villagers from Roja Yaqubpur and Bisarakh Jalalpur villages, who went to court against the Noida Authority’s decision to acquire their land.

    The court had already cancelled land acquisition in some other villages of Greater Noida in earlier judgements. And tomorrow the HC will hear pleas of farmers from Itheda, Haidarpur and four other villages.

    On Tuesday, the High Court had quashed acquisition of nearly 600 hectare of land in Patwari and Dewla villages, falling under Dadri tehsil of Gautambuddh Nagar district.

    The verdicts have come as a big jolt to builders and prospective home owners. Several builders have launched their housing projects in affected villages and thousands of people have made bookings in the upcoming dwelling units, some of which are either in various phases of construction or in the drawing board stage.

    In total, pleas challenging the acquisition of almost 2,000 acres of land in Greater Noida and surrounding areas, popularly called Noida Extension, have been filed in the HC. It is believed that around 2.5 lakh flats are to be built on the land in question.


    Yesterday’s order came barely a fortnight after the Supreme Court had struck down acquisition of 156 hectare of land by the state government in village Shahberi in the area, saying the authorities were “subserving” private builders in the name of public interest.

    The apex court had on July 6 upheld the Allahabad HC order which had quashed the land acquisition by the Greater Noida authority under the urgency clause of the Land Acquisition Act and directed that the property be returned to the farmers.

    It had also said the builders should return back the money collected towards the sale of flats in the village.

    The issues being dealt by the HC include acquisition of farming and other land by the state government without giving farmers and villagers an opportunity to raise their objections and without being offered adequate compensation.

    -Zee news
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  • is amrapali saffire effected or would be effected by the verdict?
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  • If this project is in Noida ext.. than sooner Or later... will be impacted (max by 26th July)...But wait for final hearing
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  • Amrapali saffire is located on noida expressway which is not in dispute at all as of now.

    Originally Posted by aarora
    is amrapali saffire effected or would be effected by the verdict?
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  • not sure about noida extension, it is in sector 45
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  • saare noida xxx ke projects unsafe hai - bhag sako to bhag lo waha se

    BMW ne to apni jholi bhar le - this is the fraud of the century - bechare end users

    rohit
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  • The concerned project is in Sector 45 and will not be affected directly. But. Amrapali group as a whole will bear major losses on account of it's proposed projects in Noida Extension.

    Builders with major presence in Noida Extension will bear the brunt of HC's order.
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  • Originally Posted by rohit_warren
    saare noida xxx ke projects unsafe hai - bhag sako to bhag lo waha se

    BMW ne to apni jholi bhar le - this is the fraud of the century - bechare end users

    rohit


    I agree with you. No point waiting for some miracle. There is lot of mirth that's gonna come up and lot of stay orders in different courts. So people with limited risk taking appetite should take money and quit.
    No one who invested in scams like Sterling Trees etc got money.
    Builder is a businessman not God that will bear the burden of losses.
    He will sue Greater Noida Authority and then refuse to give money saying the case is pending in courts or will run away leaving the project behind taking whatever cash he has accumulated to Switzerland :(
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  • Originally Posted by Gagan Singh
    Rohit,

    Nothing could justify your comments like 'i m lovin it' on this topic.


    Hey,

    You need to put yourself in Rohit's ......few months back, when everything was green about NE, he was badly bashed whenever he talked -Ve about NE ......wasn't he...."Indian warren buffet" n all that jazz.....nobody came to police morals then.....he has all the rights for loving it......It's YOU, who bashed him then, gave it to him

    Rajeev
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  • You can not change facts by insulting & making fun of somebody......HUDA has upper hand in in FBD...as compensation given by HUDA to farmers is the maximum in the country. HUDA has not been as greedy as NA because it did not acquire sector land itself and sold it to builders at higher rate like NA did. In Naherpar builders acquired land directly from farmers.

    HUDA has acquired land for sector roads & other amentias at their rate which is highest from any other state.

    The point that farmers of Naherpar has been making is “ Compensations granted by HUDA is nothing as compared to money they got from builders “ & “Compensations granted to them by HUDA is less then what HUDA is now giving to other farmers”

    Originally Posted by Mogammo
    Oye, Faridabad ke Broker(sorry Jokar) , Most of times you only write nonsense and write lies to show your status which is actually nothing. but this time you write correct that "my gf is out of India" , you are right because only a cheap Nepali outsider girl can be a girl friend of a 3rd class person like you.

    Problem is only in NE and not in Noida or any FREEHOLD societies of Ghaziabad like RNE , CR , IP..... so keep shut up.

    Aur tumhare Neharpar (sorry Naalapar) Faridabad ka haal to aur bhi bura hai. Read below recently News and start to save yourself from now.

    https://www.indianrealestateforum.com/forum/city-forums/ncr-real-estate/faridabad-real-estate/16904-in-greater-faridabad-farmers-have-intensified-their-demand-for-return-of-land-ht?t=19102

    https://www.indianrealestateforum.com/forum/city-forums/ncr-real-estate/faridabad-real-estate/16868-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%AB%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6?t=19060
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