Watch Zee news... HC has cancel 589 Hct land acquisition of Patwari village so 17 builder projects are now on verge of danger.
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  • नोएडा एक्सटेंशन के भविष्य पर सवाल उठाना जल्दबाजी


    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रमा रमन ने कहा कि नोएडा एक्सटेंशन के भविष्य का लेकर सवाल खड़े करना अभी जल्दबाजी होगा। कानूनी राय लेने के बाद प्राधिकरण समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। वह नोएडा एक्सटेंशन में आने वाले दो गांवों में हुए अधिग्रहण रद होने और अन्य गांवों के मामले कोर्ट में होने के कारण इसके भविष्य पर उठाए जा रहे सवालों के परिप्रेक्ष्य में बोल रहे थे।

    सीईओ ने बताया कि नोएडा एक्सटेंशन को लेकर प्राधिकरण के पास कई विकल्प हैं। इसलिए निवेशकों व बिल्डरों को घबराने की जरूरत नहीं है। पतवाड़ी मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद प्राधिकरण कानूनविदों की राय ले रहा है। इसके बाद प्राधिकरण अगला कदम उठाएगा। हाईकोर्ट में प्राधिकरण को मजबूती से अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिल पाया। इस फैसले के खिलाफ प्राधिकरण हाईकार्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा या सुप्रीम कोर्ट जाए, इस पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। निवेशकों व बिल्डरों को सब्र से काम लेने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि अधिग्रहण रद होने से प्राधिकरण की कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हुई हैं, लेकिन योजनाएं बंद नहीं हुई हैं। इतना जरूर है कि परियोजनाएं देर से साकार हो सकती हैं। प्राधिकरण के पास अगर कोई विकल्प नहीं बचा तो फिर से जमीन अधिग्रहण कर परियोजनाएं पूरी की जाएंगी। नोएडा एक्सटेंशन के सेक्टर दो व तीन में प्राधिकरण के ढाई हजार आवासीय भूखंड व चार सौ निर्मित मकानों की योजना प्रभावित होने के बारे में सीईओ ने बताया कि आवंटियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनके हितों को ध्यान में रखते हुए दूसरी जगह पर भूखंड आवंटित करने का विकल्प बचा हुआ है

    -Dainik Jagran
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  • Had this person been sensible and had clear vision...this situation wud hav never arised in NE. What legal advice will he take now when he has made 'mother sister one' (read d inverted words in hindi) of entire land acquisition law.
    At least now on, dont believe their words and decide smartly as per situation/ law.
    One suggestion..'there is no typewriter in the sky'
    means...no laws were made by god. A group of people decided what is right and made law. But its high time now n these law/ rules needs revision. For e.g. aaj bhi train ki chain kheechane pe 100 rupee ka jurma ya 3 months ki kaid ho sakti hai. now tell me how far is this relevant in present senario??? 3 months ke against kam se kam 3 thousand to rakho. warna shayad hi koi hoga jo 100 rupees na deke 3 months ki jail yatra karega. 100 rupees to train ka bhikhari bhi dedega.
    i say this is d right time guys..let make 1 voice against bhrasht laws n i believe kuch khas nahien hua to kam se kam NE to bacha hi lenge.

    Dj

    QUOTE=fritolay_ps;212815]नोएडा एक्सटेंशन के भविष्य पर सवाल उठाना जल्दबाजी


    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रमा रमन ने कहा कि नोएडा एक्सटेंशन के भविष्य का लेकर सवाल खड़े करना अभी जल्दबाजी होगा। कानूनी राय लेने के बाद प्राधिकरण समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। वह नोएडा एक्सटेंशन में आने वाले दो गांवों में हुए अधिग्रहण रद होने और अन्य गांवों के मामले कोर्ट में होने के कारण इसके भविष्य पर उठाए जा रहे सवालों के परिप्रेक्ष्य में बोल रहे थे।

    सीईओ ने बताया कि नोएडा एक्सटेंशन को लेकर प्राधिकरण के पास कई विकल्प हैं। इसलिए निवेशकों व बिल्डरों को घबराने की जरूरत नहीं है। पतवाड़ी मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद प्राधिकरण कानूनविदों की राय ले रहा है। इसके बाद प्राधिकरण अगला कदम उठाएगा। हाईकोर्ट में प्राधिकरण को मजबूती से अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिल पाया। इस फैसले के खिलाफ प्राधिकरण हाईकार्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा या सुप्रीम कोर्ट जाए, इस पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। निवेशकों व बिल्डरों को सब्र से काम लेने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि अधिग्रहण रद होने से प्राधिकरण की कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हुई हैं, लेकिन योजनाएं बंद नहीं हुई हैं। इतना जरूर है कि परियोजनाएं देर से साकार हो सकती हैं। प्राधिकरण के पास अगर कोई विकल्प नहीं बचा तो फिर से जमीन अधिग्रहण कर परियोजनाएं पूरी की जाएंगी। नोएडा एक्सटेंशन के सेक्टर दो व तीन में प्राधिकरण के ढाई हजार आवासीय भूखंड व चार सौ निर्मित मकानों की योजना प्रभावित होने के बारे में सीईओ ने बताया कि आवंटियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनके हितों को ध्यान में रखते हुए दूसरी जगह पर भूखंड आवंटित करने का विकल्प बचा हुआ है

    -Dainik Jagran
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  • Originally Posted by rohit_warren
    saare noida xxx ke projects unsafe hai - bhag sako to bhag lo waha se

    BMW ne to apni jholi bhar le - this is the fraud of the century - bechare end users

    rohit


    Rohit.. tu bada lucky hai.. ki yahan net par baith kar kuch bhi likh sakta hai.. warna mhare gaam mein tere jaise ke haal karein hain.. tanne pata bhi na hoga...


    Few days back you were talking about a NP Flat.. then a plot in some unapproved colony.. now you are saying abt a plot in NP...

    Bhai, jhoot to kam se kam soch kar bolna chahiye..

    Internet ek dum mast jagah hai... har koi apne aap ko raja show kar sakta hai..
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  • प्राधिकरण ने प्रभावित जमीन पर बंद कराया काम


    इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पतवाड़ी गांव में जमीन अधिग्रहण रद करने के फैसले के बाद नोएडा एक्सटेंशन से रौनक व चहल-पहल गायब हो गई है। बुधवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने प्रभावित जमीन पर चल रहे विकास एवं निर्माण कार्य बंद करा दिए। इनमें मुख्य रूप से 130 मीटर, 60 मीटर, 45 मीटर व 30 मीटर चौड़ी सड़कों के साथ सेक्टर दो व तीन में हो रहे आंतरिक विकास कार्य शामिल हैं। प्रभावित जमीन पर इमारतें खड़ी हो चुकी है, उन्हें एक दिन में हटाना मुश्किल है। बिल्डरों के प्रतिनिधियों का कहना है कि निर्माण सामग्री को समेटना आसान नहीं है। इस कार्य में दो से तीन माह का समय लग सकता है।


    न्यायालय के फैसले से पतवाड़ी गांव की जमीन पर बसाए जा रहे सेक्टर दो व तीन में आंतरिक सड़क, सीवर लाइन, पानी की टंकी व पाइप लाइन, बिजली की तार एवं सेक्टर तीन के निर्मित भवनों में फिनिशिंग कार्य को प्राधिकरण ने बंद करा दिया। कोर्ट के फैसले से दो इंजीनियरिंग व एक अस्पताल समेत 14 शैक्षिक संस्थान प्रभावित हुए हैं। बुधवार को सभी बिल्डरों ने निर्माण कार्य और बुकिंग सेंटर बंद कर दिए हैं। सड़कों पर मीडिया के वाहनों के अलावा कोई गाड़ी नजर नहीं आ रही थी। जबकि कोर्ट के फैसले से पहले नोएडा एक्सटेंशन की सड़कों पर सैकड़ों कारें दौड़ती थीं। एक्सटेंशन से रौनक अचानक गायब हो गई है।


    रोजा याकूबपुर के किसान गिरिश त्यागी व ग्रामीण पंचायत मोर्चा के संयोजक प्रधान रणवीर सिंह का कहना है कि किसान क्षेत्र के विकास में रोड़ा नहीं बनना चाहते हैं, लेकिन जमीन जाने से पहले किसानों की मांग पूरी होनी चाहिए। तभी किसान जमीन देंगे। निवेशक जितेंद्र व प्रवीण ने बताया कि नोएडा एक्सटेंशन के विवाद से उन्हें गहरा धक्का लगा है। दो वर्ष पहले सेक्टर दो में भूखंड निकले थे। भूखंड की आधी कीमत प्राधिकरण में जमा करा दी गई है, लेकिन कोर्ट के फैसले से अचानक भूखंड रद हो गया है। इससे वे दुखी हैं।

    -daiinik jagran
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  • चार हजार करोड़ कर्ज में डूबा है प्राधिकरण


    नोएडा एक्सटेंशन के अंतर्गत आने वाले गांवों पर कोर्ट के फैसलों व लंबित मामलों ने प्राधिकरण की परेशानी बढ़ा दी है। आंख मूंदकर प्राधिकरण को कर्ज देने वाले बैंक भी अब सोचने लगे हैं। पहले से चार हजार कर्ज करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे प्राधिकरण को 35 करोड़ रुपये प्रति माह ब्याज देना पड़ रहा है। इसके लिए भी प्राधिकरण को बैंकों का मुंह देखना पड़ता है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि प्राधिकरण को अगर निवेशकों व बिल्डरों को पैसा वापस करना पड़ा तो 34 सौ करोड़ रुपये का कहां से इंतजाम करेगा?


    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण जमीन बेच कर ही शहर के विकास के लिए पैसा एकत्र करता है। एक के बाद एक गांव की जमीन का अधिग्रहण रद होने से प्राधिकरण के आय का स्रोत बंद हो रहा है। ऐसे में प्राधिकरण को अन्य परियोजनाओं के लिए पैसा इकट्ठा करना भी मुश्किल हो जाएगा।

    तीन साल पूर्व रीयल एस्टेट में आई मंदी का असर प्राधिकरण पर भी पड़ा था। इस दौरान शहर में निवेश करने को निवेशक तैयार नहीं थे। प्राधिकरण ने किसी तरह बैंकों से कर्ज लेकर जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा दिया था। वर्ष 2008 में नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डर ग्रुप हाउसिंग की योजना लाने पर निवेशकों ने रुचि दिखाई। भूखंड आवंटित होने पर प्राधिकरण की आर्थिक हालत थोड़ी सुधरी। ढाई हजार हेक्टेयर जमीन का आवंटन करने पर दस फीसदी रजिस्ट्रेशन राशि व किश्तों के रूप में प्राधिकरण को तीन हजार करोड़ रुपये मिले। पांच साल के दौरान प्राधिकरण को 31 हजार करोड़ रुपये मिलने थे। लेकिन साबेरी व पतवाड़ी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद होने से प्राधिकरण को मिलने वाले 31 हजार करोड़ रुपये की उम्मीद टूट गई है। वहीं प्राधिकरण को तीन हजार आवंटियों को चार सौ करोड़ रुपये व बिल्डरों को तीन हजार करोड़ रुपये लौटाने पड़ सकते हैं। जमीन आवंटन से मिलने वाले पैसे को प्राधिकरण विकास योजनाओं पर खर्च कर देता है। अगर प्राधिकरण को आवंटियों व निवेशकों को पैसा लौटाना पड़ा तो बैंक से कर्ज लेने के सिवाय दूसरा कोई चारा नहीं है। वहीं बैंक भी प्राधिकरण को अधिग्रहीत जमीन को देखकर ही कर्ज देते हैं। एक के बाद एक गांव की जमीन प्राधिकरण के हाथ से निकलने के कारण बैंक भी कर्ज देने के बारे में विचार करने लगे हैं। सिर्फ निवेशकों व बिल्डरों को पैसे वापस करने की चिंता नहीं है, बल्कि बोड़ाकी रेलवे स्टेशन, नाइट सफारी, मेट्रो जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं हैं। इसके लिए प्राधिकरण कहां से पैसे का इंतजाम करेगा, यह भी एक बड़ी समस्या है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमन ने बताया कि नोएडा एक्सटेंशन को लेकर चल रहे विवाद की वजह से काफी असर पड़ा है। बैंक भी कर्ज देने से पहले सोचने लगे हैं। फिर भी आवंटियों व बिल्डरों को पैसा लौटाने की नौबत आने पर प्राधिकरण इसका इंतजाम कर लेगा। महत्वाकांक्षी परियोजनाएं थोड़ी देर से शुरू होंगी।

    -dainik jagran
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    चार हजार करोड़ कर्ज में डूबा है प्राधिकरण


    नोएडा एक्सटेंशन के अंतर्गत आने वाले गांवों पर कोर्ट के फैसलों व लंबित मामलों ने प्राधिकरण की परेशानी बढ़ा दी है। आंख मूंदकर प्राधिकरण को कर्ज देने वाले बैंक भी अब सोचने लगे हैं। पहले से चार हजार कर्ज करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे प्राधिकरण को 35 करोड़ रुपये प्रति माह ब्याज देना पड़ रहा है। इसके लिए भी प्राधिकरण को बैंकों का मुंह देखना पड़ता है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि प्राधिकरण को अगर निवेशकों व बिल्डरों को पैसा वापस करना पड़ा तो 34 सौ करोड़ रुपये का कहां से इंतजाम करेगा?


    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण जमीन बेच कर ही शहर के विकास के लिए पैसा एकत्र करता है। एक के बाद एक गांव की जमीन का अधिग्रहण रद होने से प्राधिकरण के आय का स्रोत बंद हो रहा है। ऐसे में प्राधिकरण को अन्य परियोजनाओं के लिए पैसा इकट्ठा करना भी मुश्किल हो जाएगा।

    तीन साल पूर्व रीयल एस्टेट में आई मंदी का असर प्राधिकरण पर भी पड़ा था। इस दौरान शहर में निवेश करने को निवेशक तैयार नहीं थे। प्राधिकरण ने किसी तरह बैंकों से कर्ज लेकर जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा दिया था। वर्ष 2008 में नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डर ग्रुप हाउसिंग की योजना लाने पर निवेशकों ने रुचि दिखाई। भूखंड आवंटित होने पर प्राधिकरण की आर्थिक हालत थोड़ी सुधरी। ढाई हजार हेक्टेयर जमीन का आवंटन करने पर दस फीसदी रजिस्ट्रेशन राशि व किश्तों के रूप में प्राधिकरण को तीन हजार करोड़ रुपये मिले। पांच साल के दौरान प्राधिकरण को 31 हजार करोड़ रुपये मिलने थे। लेकिन साबेरी व पतवाड़ी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद होने से प्राधिकरण को मिलने वाले 31 हजार करोड़ रुपये की उम्मीद टूट गई है। वहीं प्राधिकरण को तीन हजार आवंटियों को चार सौ करोड़ रुपये व बिल्डरों को तीन हजार करोड़ रुपये लौटाने पड़ सकते हैं। जमीन आवंटन से मिलने वाले पैसे को प्राधिकरण विकास योजनाओं पर खर्च कर देता है। अगर प्राधिकरण को आवंटियों व निवेशकों को पैसा लौटाना पड़ा तो बैंक से कर्ज लेने के सिवाय दूसरा कोई चारा नहीं है। वहीं बैंक भी प्राधिकरण को अधिग्रहीत जमीन को देखकर ही कर्ज देते हैं। एक के बाद एक गांव की जमीन प्राधिकरण के हाथ से निकलने के कारण बैंक भी कर्ज देने के बारे में विचार करने लगे हैं। सिर्फ निवेशकों व बिल्डरों को पैसे वापस करने की चिंता नहीं है, बल्कि बोड़ाकी रेलवे स्टेशन, नाइट सफारी, मेट्रो जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं हैं। इसके लिए प्राधिकरण कहां से पैसे का इंतजाम करेगा, यह भी एक बड़ी समस्या है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमन ने बताया कि नोएडा एक्सटेंशन को लेकर चल रहे विवाद की वजह से काफी असर पड़ा है। बैंक भी कर्ज देने से पहले सोचने लगे हैं। फिर भी आवंटियों व बिल्डरों को पैसा लौटाने की नौबत आने पर प्राधिकरण इसका इंतजाम कर लेगा। महत्वाकांक्षी परियोजनाएं थोड़ी देर से शुरू होंगी।

    -dainik jagran


    This situation is actually doubtful for New and Small Builders.

    I wish all investors get back his/her hard money ASAP.
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  • Even if Authority will return that money to builders do not expect that anyone will get it from builder easily.

    First charge on that amount will be of the bank that has approved/disbursed the loan to builder on that land. Remaining will goes to builder.

    Then builder will say I have already spent X amount in marketing, Boucher, architecture, construction, advertisements and staff salary.

    If in case he will be agree to return some amount to you then he will ask original documents from you which are already mortgaged in your bank and they will return you only when you will settle the loan with them first.


    Am I wrong here?
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  • Originally Posted by ashokyadav
    Rohit.. tu bada lucky hai.. ki yahan net par baith kar kuch bhi likh sakta hai.. warna mhare gaam mein tere jaise ke haal karein hain.. tanne pata bhi na hoga...


    Few days back you were talking about a NP Flat.. then a plot in some unapproved colony.. now you are saying abt a plot in NP...

    Bhai, jhoot to kam se kam soch kar bolna chahiye..

    Internet ek dum mast jagah hai... har koi apne aap ko raja show kar sakta hai..


    Bhaya.... Rohit ke naam ke aage Waren laga hai, sirf 1 flat thore hoga...kya pata, BPTP ki parent company ke malik ho Rohitji. Saare flat/plot neherpaar ki inke ho to honge
    CommentQuote
  • Originally Posted by ankur.jain83
    Bhaya.... Rohit ke naam ke aage Waren laga hai, sirf 1 flat thore hoga...kya pata, BPTP ki parent company ke malik ho Rohitji. Saare flat/plot neherpaar ki inke ho to honge

    Nahi dost etna bhi nahi hai - I add just one property to my kitty every year and exit one every 2 years so for last 6 years I have added 6 and exited 3.

    I have some stake in naharpar then ofcourse in an unauthorised colony of delhi, a very old investment of farm house in nagpur and a small plot in Agra - thats it.

    I have flipped some property in naharpar and North delhi well if that looks too much to you guys - I am flattered

    yadav babu mhaare gaam mai taare jaise to jaban bhi nahi kholte khusnaseeb ho jo internet pe ho ;)

    Rohit
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  • Originally Posted by finstar
    Very well said...unfortunately this is the way things work in our country. Simply make one issue (onions or noida extension) to win the elections!
    But we must give full credit to Rahul baba for his meticulous planning of playing the farmer card! It shows he is learning the ropes of the politics.

    With this fiasco, he has put UP govt in lot of trouble. as now farmers will be with him, builders will also be against UP govt and buyers who have suffered the most will definitely want someone else in the govt.. Well Played Mr. Gandhi... reminds me of Ranbir Kapoor's character from Rajneeti!


    Wow! So people can now even blame judiciary instead of accepting the fact that justice has been delivered. Remember, Judiciary is here to uphold the truth and not to take care of urbane middle class people at the cost of rightful owners i.e. farmers (rich/poor).
    Its so easy to blame everyone for your own greed! But at least direct your anger towards correct place. It was BMW and the IAS people sitting in GNIDA who ate/gulped hundreds/thousands of crores in bribes from builders. If anyone protested, the innocent farmers were slapped with 10-15 court cases. The farmers who were vocal were sent to jails. Did anyone of you investors cry when u saw the police brutality on villagers? I think the chairman post of GNIDA would be most costly post for IAS's in UP. If the investors really have guts - take on GNIDA and BMW rather than trying to be a party in SC and begging for mercy, Its so easy to create a NEOMA on facebook and another thing is to accept that we have been greedy. If all the bribes that has been paid to these guys by builders are taken back - the investors can hope to get their money back. Else, the only option with these builders is to declare all those companies bankrupt - there is no way supertech would be able to pay back the money to any of its investors.
    As for BMW, you guys were not going to vote her anyway - So, why should she bother.
    I wish you guys had paid heed to some senior boarders here rather than making fun of them.
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  • Next is Greater Faridabad, Farmers becoming GREEDY.

    https://www.indianrealestateforum.com/forum/city-forums/ncr-real-estate/faridabad-real-estate/16904-in-greater-faridabad-farmers-have-intensified-their-demand-for-return-of-land-ht?t=19102

    ANOTHER BREAKING NEWS: Vijay Mallaya is behind Farmers agitation for more money. As he is ultimately going to benefitted by whatever money these Farmers will earn:bab (4):
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  • Farmers don't want land back, prefer better compensation


    It was a verdict that went their way. Yet, the farmers who met in Bisrak on Wednesday, after the Allahabad High Court ordered the Greater Noida Authority and builders to return 600 hectares acquired from farmers, were not exactly happy.

    They say the HC order has not given any direction or options for recourse. The farmers here do not want their land back as it cannot be used for farming in the next 10 years with all the concrete having gone into it. The water table too has dropped from 30 feet to about 120 feet in the area.

    The farmers who received compensation for the land in 2008 and 2009, have spent it all on buying land further ahead, on flats in Noida, on doing up their homes, on fancy cars and bikes, on extravagant marriages and repaying debts. Most of them today do not have the wherewithal to return the money for their land. For about 600 hectares in Patwari, the total compensation paid to farmers was over 450 crore.

    Hence, the famers want the authority to compensate them better and also make them shareholders in the future development of the area. "We want compensation equal to 50% of the value at which the developer was given land from the authority," says Pradeep Yadav of Patwari village, who has 250 bighas in the village. Apart from this, according to the rehabilitation policy, they want a fixed share in the land price increase in the area for the next 33 years. They also want the village land (abadi land) that was acquired earlier to be given back on lease without pre-conditions by the authority.

    "We are not against development here. But we want to be part of the development too," says Balraj Yadav, an ex-pradhan of Patwari village. They want schools, hospitals and colleges to be set up for them.

    In Patwari, of the 600 hectares denotified, only 15% land was given to builders. About 15% were Noida authority plots, about 15% was IT parks and another 15% for educational institutes. The rest 40% went for roads, bridges, parks, and other public services.

    Brig RR Singh, Director-General of National Real Estate Development Council says that since construction by developers and external infrastructure by Greater Noida Development Authority are already in progress and substantial expenditure has been made, the courts at this juncture should take into account the larger issue of protecting the interest of all stakeholders - the farmers, home buyers and developers. He suggests a reasonable enhancement in the compensation package for farmers and reacquisition of land by the authority.

    Builders who are stuck at Noida Extension due to the high court order had a four-hour meeting on Wednesday to chalk out a strategy. "We have decided that developers can refund the money to buyers only after the Greater Noida Authority decides to return our money along with the money we have spent on construction so far," says Shiv Priya, executive director of Amrapali Developers, which has been hard hit by the recent court decision on Noida Extension.

    Homebuyers, who have bought flats in the area, though do not want their money back. They want to own homes. Now the Noida Extension Flat Buyers Welfare Association, which has about 2,600 members, has put in its application in the Allahabad HC to be made a party in the pending cases related to Noida Extension so that their voices are also heard by the court. "We don't want our money back. We want our flats. Today, there is no other option to buy a home at this rate. If we take our money back, our dream of owning a house will be shattered," says GL Sagar, secretary of the association.

    Farmers don't want land back, prefer better compensation - The Economic Times
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  • यमुना अथॉरिटी एरिया के बिल्डर अलर्ट


    नोएडा एक्सटेंशन का हाल देखकर यमुना अथॉरिटी एरिया में भी बिल्डर फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। यमुना अथॉरिटी एरिया के सेक्टर 1, 2,16,17 व 17 बी में 4500 एकड़ एरिया में बसाई जाने वाली एशिया की मेगा रेजिडेंशियल टाउनशिप की बकाया 10 फीसदी धनराशी जमा करने से पहले बिल्डर ने जमीन की वर्तमान स्थिति से अवगत करने को कहा है।

    यमुना अथॉरिटी ने बिल्डर को मेगा रेजिडेंशियल सिटी बसाने के लिए 4500 एकड़ जमीन तो अलॉट कर दी है। लेकिन अभी तक जमीन अथॉरिटी के कब्जे में नहीं है। यमुना अथॉरिटी के सीईओ कैप्टन एस. के. द्विवेदी का कहना है कि जमीन की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने के लिए बिल्डर का लेटर अथॉरिटी के पास आया है। बिल्डर ने पूछा है कि जमीन कब तक देंगे? सीईओ का कहना है कि बिल्डर के साथ बात चल रही है। उन्होंने बताया कि एशिया की सबसे बड़ी सिटी बसाई जानी है। इसके लिए 4500 एकड़ जमीन का इंतजाम करने में अथॉरिटी को थोड़ा वक्त लग रहा है।

    यमुना अथॉरिटी के सीईओ कैप्टन एस. के. द्विवेदी ने बताया कि यमुना अथॉरिटी ने मार्च 2011 में मेगा रेजिडेंशियल स्कीम लॉन्च की थी। स्कीम का रिजर्व प्राइज 4250 रुपये स्क्वायर मीटर रखा गया था। अरनेस्ट मनी 50 करोड़ रुपये है। प्रोसेसिंग फीस 25 लाख रुपये है जो नॉन रिफंडेबल है। मेगा सिटी मंे कुल एरिया में से 6 प्रतिशत इंस्टिट्यूशनल, 2 प्रतिशत कमर्शल, 35 प्रतिशत पर रोड, पार्क, ओपन एरिया रखना है। 57 प्रतिशत एरिया में बिल्डर रेजिडेंशियल प्लॉट व फ्लैट बना सकता है। इसमें सबसे बड़ी बोली देश के एक बड़े नामी बिल्डर ने लगाई। उन्होंने बताया कि बिल्डर को आवंटन के बाद कुल धनराशी का 10 प्रतिशत यानी 750 करोड़ रुपये 27 अप्रैल तक जमा करने का समय दिया गया। बिल्डर ने इसके लिए और समय मांगा। अथॉरिटी ने बिल्डर को 27 जून तक का समय दे दिया। उन्होंने बताया कि अब बिल्डर ने लेटर भेजकर अथॉरिटी से पूछा है कि जमीन पर कब्जा कब तक मिल जाएगा।


    -Navbharat times
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  • अथॉरिटी ऑफिस में निवेशकों का तांता

    बुधवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में दिनभर निवेशकों का तांता लगा रहा। निवेशक फोन पर भी अपने प्लॉट या फ्लैट की जानकारी अथॉरिटी अफसरों से लेते रहे। ऑफिस आने वाले निवेशकों को अथॉरिटी अफसरों ने आश्वासन दिया कि इस फैसले के खिलाफ वह हाई कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर करेंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन (एसएलपी) भी दायर करने का विकल्प खुला है।

    गौरतलब है कि मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से फैसले से करीब 10 बिल्डरों के प्रोजेक्ट व सेक्टर-2 और सेक्टर-3 में अथॉरिटी के प्लॉटों की स्कीम प्रभावित हुई है। इन प्रोजेक्टों में निवेश करने वालों और रेजिडेंशल प्लॉट्स की स्कीम के अलॉटियों की गहमागहमी बुधवार को दिनभर अथॉरिटी के ऑफिस में रही। एसीईओ और दोनों डीसीईओ अथॉरिटी आने वाले निवेशकों व अलॉटियों को समझाते रहे। अथॉरिटी अफसरों ने बताया कि शाहबेरी से पतवाड़ी का मामला एकदम अलग है। पतवाड़ी में बसाए गए सेक्टरों में अथॉरिटी की ओर से करोड़ों रुपये इंटरनल डिवेलपमेंट पर खर्च किए जा चुके हैं।

    -Navbhart times
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  • पतवाड़ी गांव में 83 पर्सेंट किसान ले चुके मुआवजा


    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को जिस पतवाड़ी गांव का अधिग्रहण रद्द किया है, उस गांव के करीब 83 पर्सेंट किसान मुआवजा ले चुके हंै। अब तक ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी यह मान रही थी कि जिस गांव में 80 पर्सेंट से अधिक किसानों ने मुआवजा ले लिया है, वहां खतरे की बात नहीं है। लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से अथॉरिटी को झटका लगा है। इस फैसले से करीब एक दर्जन प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। इनमें रेजिडेंशल के अलावा इंस्टिट्यूशनल और कमर्शल प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

    ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिसूचित एरिया में शामिल जिन गांवों के 80 पर्सेंट किसान मुआवजा ले चुके होते हैं, वहां अथॉरिटी लीज-बैक समेत अन्य सुविधाएं देना शुरू कर देती हैं। अथॉरिटी अफसरों का मानना था कि जिन गांवों में 80 पर्सेंट किसानों ने मुआवजा ले लिया, वहां अधिग्रहण रद्द होने जैसे किसी खतरे की आशंका नहीं है। लेकिन मंगलवार को पतवाड़ी गांव का अधिग्रहण कैंसल कर हाई कोर्ट ने अथॉरिटी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अथॉरिटी से मिली जानकारी के मुताबिक, पतवाड़ी गांव में करीब 83 पर्सेंट किसानों ने मुआवजा ले लिया है। सिर्फ 17 पर्सेंट किसानों ने अब तक मुआवजा नहीं लिया है। इनमें से 36 किसानों ने जमीन अधिग्रहण निरस्त करने संबंधित याचिका हाई कोर्ट में दायर किया। मंगलवार का निर्णय सिर्फ एक किसान की याचिका पर आया है। अथॉरिटी अफसरों का कहना है बहुत से कम ही ऐसे गांव हैं जहां 100 फीसदी किसानों ने मुआवजा लिया हो। तकरीबन हर गांव में दो चार किसान ऐसे मिल जाएंगे जिन्होंने मुआवजा नहीं लिया। बहुत पहले से यह धारणा बनी है कि जिन गांवों में 80 पर्सेंट किसानों ने मुआवजा लिया है, वहां अधिग्रहण रद्द नहीं हो सकता। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब इस पर नए सिरे से विचार किया जाएगा।

    -navbharat times

    हाईकोर्ट के इस फैसले से करीब एक दर्जन प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। सेक्टर-2, सेक्टर-3 और टेक जोन-4 में रेजिडेंशल और इंस्टिट्यूशनल प्लॉट हैं। ये सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा सेक्टर-1 और सेक्टर-11 भी आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है।
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