Watch Zee news... HC has cancel 589 Hct land acquisition of Patwari village so 17 builder projects are now on verge of danger.
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  • सपनों के घर के लिए निवेशक सड़क पर उतरे


    सपनों के घर के लिए पांच हजार से ज्यादा निवेशक शनिवार को सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां व बैनर लिए थे, जिन पर लिखा था, हमें इंसाफ चाहिए, पैसा नहीं। हमें सपनों का घर चाहिए। यह पहला मौका है जब नोएडा एक्सटेंशन के फ्लैट खरीदार इतनी बड़ी तादात में अपनी आवाज सरकार और प्राधिकरण तक पहुंचाने के लिए एकजुट हुए। इससे नोएडा-दिल्ली में काफी देर तक यातायात बाधित रहा। शांति मार्च के बाद निवेशकों ने मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट संजय चौहान को ज्ञापन दिया। साथ ही घोषणा की कि अगर उनकी मांग पर जल्द फैसला न लिया गया तो वह दोबारा सड़क पर उतरेंगे।

    निवेशकों ने शाम साढ़े चार बजे सेक्टर 14ए स्थित नोएडा गेट से डीएनडी फ्लाई ओवर की तरफ शांति मार्च शुरू किया। पहली बार सभी सेक्टर 15ए के सामने से यू-टर्न लेकर वापस लौट आए। दोबारा निवेशक डीएनडी फ्लाई ओवर के नीचे से यू-टर्न लेकर नोएडा गेट पहुंचे। इससे नोएडा और दिल्ली में तकरीबन पौने दो घंटे यातायात पूरी तरह से ठप रहा। शाम करीब सवा छह बजे पुलिस और प्रशासन ने लोगों को समझा-बुझाकर वाहनों की आवाजाही चालू कराई।

    शांति मार्च का नेतृत्व कर रहे नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट बायर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी त्यागी ने कहा कि सभी खरीदारों की एक ही मांग है कि उन्हें पैसा नहीं सपनों का घर चाहिए। वह भी उसी कीमत पर। उन्होंने कहा कि निवेशकों को किसानों से पूरी सहानुभूति है, लेकिन इसके लिए उन्हें सजा नहीं दी जा सकती। एसोसिएशन के अमर दीप चौधरी ने बताया कि अगर उनकी मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 25 जुलाई को वह दोबारा सड़क पर उतरकर धरना देंगे। आगे की रणनीति और धरने के बारे में निवेशकों को एसएमएस और फेसबुक के जरिए सूचित किया जाएगा। सिटी मजिस्ट्रेट संजय चौहान ने कहा कि इस बड़े मार्च के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई, प्रशासन आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।

    -Dainik Jagran
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  • मुआवजा लौटना किसानों के लिए टेढ़ी खीर


    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने साबेरी गांव में भले ही जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन मुआवजा उठा चुके छोटे किसानों के लिए रकम लौटाना आसान नहीं होगा। कुछ किसानों ने मुआवजे की रकम से कन्याओं के विवाह तो कुछ ने दूसरी जगह प्रापर्टी खरीद ली है। हालांकि बड़े किसान रकम लौटने का दम भर रहे हैं। उनका कहना है कि मुआवजे की रकम लौटाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।

    साबेरी गांव के 341 में से 131 किसान 17.3 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि उठा चुके हैं। 210 किसानों ने मुआवजे की रकम नहीं ली थी। पतवाड़ी गांव में करीब 1600 में से 83 फीसदी किसान 410 करोड़ रुपये का मुआवजा ले चुके हैं। साबेरी गांव में प्राधिकरण ने मुआवजे की रकम लौटने के लिए किसानों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। किसानों को नोटिस मिलने के 60 दिन के अंदर रकम लौटानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने तीन माह के अंदर किसानों को जमीन वापस लौटाने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले किसानों को प्राधिकरण के एडीएम एलए आफिस में मुआवजे की रकम लौटानी होगी। रकम जमा होते ही प्राधिकरण अभिलेखों में किसानों के नाम दर्ज कर देंगे। जिन किसानों ने मुआवजा नहीं उठाया है, उनके नाम 15 दिन के अंदर अभिलेखों में दर्ज कर दिए जाएंगे। पतवाड़ी गांव में अभी जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। प्राधिकरण का कहना है कि पतवाड़ी गांव के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद ही पतवाड़ी गांव के विषय में अगला कदम उठाया जाएगा।

    रकम लौटाने में नहीं होगी दिक्कत
    साबेरी गांव के राजपाल सिंह आर्य का कहना है कि छोटे किसानों को रकम लौटने में दिक्कत आ सकती है। बड़े किसानों को रकम लौटाने में कोई कठिनाई नहीं आएगी। हालांकि उनके परिवार ने मुआवजा नहीं उठाया है।

    मुआवजे का पैसा कर चुके हैं खर्च
    किशोरी जाटव का कहना है कि छोटे किसान मुआवजे की रकम खर्च कर चुके हैं। ऐसे में किसानों को रुपये की व्यवस्था करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए होगा।

    बड़े किसानों से कराएंगे मदद
    पतवाड़ी गांव के प्रधान रेशपाल यादव का कहना है कि जिन किसानों के पास रकम नहीं बची है। उनकी मदद बड़े किसानों से करा मुआवजे की रकम वापस कराई जाएगी।

    कर लेंगे पैसे की व्यवस्था
    किसान भीम सिंह का कहना है कि उन्हें अपनी जमीन वापस चाहिए। कहीं न कहीं से पैसे की व्यवस्था कर लेंगे।

    किसानों को मिल सकता है अतिरिक्त समय : सीईओ
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन का कहना है कि जो किसान मुआवजा उठा चुके हैं, उन पर प्राधिकरण रकम लौटाने के लिए अधिक दबाव नहीं बनाएगा। उन्हें रकम लौटाने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यता पड़ेगी तो प्राधिकरण उनकी मदद करेगा। भूमि का नए सिरे से अधिग्रहण होगा। समझौते के तहत पुरानी रकम को नई मुआवजा राशि में शामिल करने का प्रस्ताव भी किसानों को दिया जा सकता है।

    -Dainik Jagran
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    सपनों के घर के लिए निवेशक सड़क पर उतरे


    सपनों के घर के लिए पांच हजार से ज्यादा निवेशक शनिवार को सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां व बैनर लिए थे, जिन पर लिखा था, हमें इंसाफ चाहिए, पैसा नहीं। हमें सपनों का घर चाहिए। यह पहला मौका है जब नोएडा एक्सटेंशन के फ्लैट खरीदार इतनी बड़ी तादात में अपनी आवाज सरकार और प्राधिकरण तक पहुंचाने के लिए एकजुट हुए। इससे नोएडा-दिल्ली में काफी देर तक यातायात बाधित रहा। शांति मार्च के बाद निवेशकों ने मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट संजय चौहान को ज्ञापन दिया। साथ ही घोषणा की कि अगर उनकी मांग पर जल्द फैसला न लिया गया तो वह दोबारा सड़क पर उतरेंगे।

    निवेशकों ने शाम साढ़े चार बजे सेक्टर 14ए स्थित नोएडा गेट से डीएनडी फ्लाई ओवर की तरफ शांति मार्च शुरू किया। पहली बार सभी सेक्टर 15ए के सामने से यू-टर्न लेकर वापस लौट आए। दोबारा निवेशक डीएनडी फ्लाई ओवर के नीचे से यू-टर्न लेकर नोएडा गेट पहुंचे। इससे नोएडा और दिल्ली में तकरीबन पौने दो घंटे यातायात पूरी तरह से ठप रहा। शाम करीब सवा छह बजे पुलिस और प्रशासन ने लोगों को समझा-बुझाकर वाहनों की आवाजाही चालू कराई।

    शांति मार्च का नेतृत्व कर रहे नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट बायर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी त्यागी ने कहा कि सभी खरीदारों की एक ही मांग है कि उन्हें पैसा नहीं सपनों का घर चाहिए। वह भी उसी कीमत पर। उन्होंने कहा कि निवेशकों को किसानों से पूरी सहानुभूति है, लेकिन इसके लिए उन्हें सजा नहीं दी जा सकती। एसोसिएशन के अमर दीप चौधरी ने बताया कि अगर उनकी मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 25 जुलाई को वह दोबारा सड़क पर उतरकर धरना देंगे। आगे की रणनीति और धरने के बारे में निवेशकों को एसएमएस और फेसबुक के जरिए सूचित किया जाएगा। सिटी मजिस्ट्रेट संजय चौहान ने कहा कि इस बड़े मार्च के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई, प्रशासन आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करेगा

    -Dainik Jagran


    Idher bhi प्रशासन ki dadagiri. Pahele farmers ke sath dadagiri dikhakar barbaad kar diya sari situations ko, aur ab flat buyers ke sath wahi dadagiri. BMW ke din aa gaye lagte hai.
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  • ग्रेटर नोएडा में पूंजी निवेश पर लग सकता है ब्रेक

    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : नोएडा एक्सटेंशन में प्राधिकरण व किसानों के बीच चल रही मुआवजे की जंग शहर में पूंजी निवेश पर ब्रेक लगा सकती है। जानकारों का कहना है कि शीघ्र समाधान न निकला गया तो इसका दूरगामी प्रभाव ग्रेटर नोएडा के विकास और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर पड़ेगा। निवेशक अचानक शहर से गायब होने लगे हैं। जो लोग यहां पूंजी निवेश करना चाहते थे, उनके मन में जमीन न मिलने की चिंता घर कर गई है। स्थिति सामान्य करने के लिए अगर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के 11 गांवों में फिर से जमीन अधिग्रहीत करनी पड़ी तो उसे करीब 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ेगा। प्राधिकरण ने 2008 व 09 में जिन गांवों के किसानों की जमीन अधिगृहीत की थी, उन्हें 850 रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दिया गया था। इस समय मुआवजा राशि 1050 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से दी जा रही है। प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के गांवों में फिर से जमीन अधिग्रहण करनी पड़ी तो किसानों को 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अतिरिक्त मुआवजा देना पड़ेगा। अब नई जमीन अधिग्रहण नीति के हिसाब से अधिग्रहण होगा, यानि किसानों को 33 वर्ष तक मिलने वाले 23 हजार रुपये प्रति एकड़ वार्षिकी का भी लाभ दिया जाएगा। नोएडा एक्सटेंशन में करीब ढाई हजार हैक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हुआ है। अतिरिक्त मुआवजा, वार्षिकी व अधिग्रहण प्रक्रिया पर होने वाले खर्च को मिलाकर प्राधिकरण को करीब 700 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। प्राधिकरण को सबसे ज्यादा इस बात की चिंता है कि बोझ को सहन करते हुए किसानों को अतिरिक्त मुआवजा दे भी दिया गया और किसान उस पर सहमत नहीं हुए तो वो फिर आंदोलन कर सकते हैं। इसका असर शहर के दूरगामी विकास पर पड़ेगा। जमीन न मिलने व धन के अभाव में एयरपोर्ट, नाइट सफारी, बोड़ाकी रेलवे स्टेशन, सरकारी अस्पताल, मेट्रो रेल परियोजना, खेल स्टेडियम, ग्रेटर नोएडा की लाइफलाइन कहे जाने वाली 130 मीटर चौड़ी सड़क व दादरी से दिल्ली के तुगलकाबाद के लिए बनाए जाने वाला रेलवे ट्रेक आदि महत्वकांक्षी परियोजनाएं प्रभावित हो सकती है। शहर में पूंजी निवेश रुक गया तो प्राधिकरण के पास विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए कहा से धनराशि आएगी। किसानों को जमीन का मुआवजा कहा से दिया जाएगा। प्राधिकरण पर इस समय करीब चार हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। जमीन आवंटित होनी बंद हो जाएगी तो बैंक भी प्राधिकरण को कर्ज देना बंद कर सकते हैं। सीईओ रमा रमन का कहना है कि प्राधिकरण न नफा न नुकसान की नीति पर चलता है। जमीन नहीं बिकेगी तो परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा आना बंद हो जाएगा।

    जागरण प्रकाशन
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  • Quite likely that some builders started construction without approvals to lure bookings. They will be in bigger problem now....may not get any compensation.
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  • Left in the lurch,home buyers out on the road


    Dont Want Refund Or Relocation

    New Delhi: Lured with promises of a beautiful home,but soon trapped and left to fend for themselves,homebuyers of Noida Extension came together on Saturday to put up a united front.It was a fervent plea to save their homes they didnt want a refund and didnt wish to be relocated.
    Thousands marched from the Gautam Buddh Nagar entrance in Sector 14A towards Film City and back.

    Their desperation to catch the eye of the authorities and courts without being at odds with the farmers was obvious.Many of the placards they were carrying called for all the parties to sit together and find a solution.Some said they had sympathy for the farmers but didnt want to become victims in the quest for a home.

    Meanwhile,hundreds of villagers gathered in sector 74 and around 200 others held a panchayat at Wazidpur village in Sector 135 along the expressway,demanding more money and developed plots as promised.They threatened to obstruct construction in sectors 74,75,76,78,112,115 and 122,besides others.They didnt want their land back.

    GNIDA team back at Shahberi

    Following the Supreme Court order annulling acquisition of 156 hectares of land in Noida Extensions Shahberi village,officials of the Greater Noida authority visited the area on Saturday to demarcate the boundaries of the village.All construction work has come to a stop in Shahberi.P 4

    Mahapanchayat of 54 Noida villages

    Farmers from 54 villages in Noida have been invited to a mahapanchayat on Sunday at Sorkha village in Sector 74,where they will demand a better land acquistion deal from the Noida Authority.The farmers want developed land equal to 5% of the land acquired and higher compensation.




    -TOI
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  • टेंशन खरीददारों-इनवेस्टरों को!


    ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण को लेकर जो विवाद चल रहा है, उसमें बात बिल्डर्स, नोएडा अथॉरिटी और किसानों की हो रही है, मगर इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक चोट लगी है उन लोगों को जिन्होंने इनवेस्टमेंट या फिर आशियाने का सपना संजोया था और बैंकों से कर्ज लेकर फ्लैट बुकिंग करवाई थी।

    अब हालात यह हो गई है कि इस विवाद पर अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो इन लोगों को अपने आशियाने से हाथ धोना पड़ेगा। अगर मुआवजा बढ़ाने पर समझौता भी हो गया, तब भी इनको अपने आशियाने के लिए अडिशनल पैसा देना होगा। यह तय है कि मुआवजा बिल्डर्स की जेब से जाएगा और वे इसकी वसूली आम ग्राहक से ही करेंगे। चाहे इसको अन्य किसी मद में वसूला जाए।

    इसके अलावा अब इनवेस्टरों पर बैंकों की तलवार भी लटकी हुई है। उन्हें अपने कर्ज की ईएमआई भी देनी पड़ रही है। हालांकि केनरा बैंक की कार्यकारी निदेशक अर्चना भार्गव का कहना है, बैंक व्यावहारिक रुख अपनायेंगे। बैंक से कर्ज लेकर इन परियोजनाओं में फ्लैट बुक कराने वाले ग्राहकों को दोतरफा नुकसान नहीं होने देंगे, उनके लिये यह कठिन स्थिति होगी कि कर्ज पर ब्याज भी चुकाएं और उन्हें मकान भी न मिले। मामले में आगे की कार्रवाई पर बैंक की नजर होगी।

    दूसरी तरफ बैंकिंग सेक्टर के सूत्रों का कहना है कि बैंक इस मामले में ज्यादा नरम रुख अपना नहीं सकते। उनको आरबीआई का सख्त आदेश है कि वे अपना एनपीए न बढ़ाए। ग्रेटर नोएडा में जितने फ्लैटों की बिक्री हुई है, उसमें से 90 पर्सेंट बैंकों से कर्ज लेकर लिए गए हैं। उनको इन कर्जों की समय पर वसूली करनी होगी। बैंक अब इनकी वसूली पर पहले से ज्यादा सतर्कता बरतेंगे।

    मार्केट एक्सपर्ट और वित्तीय सलाहकार संजय गुप्ता का कहना है कि इस वक्त इन इनवेस्टरों की स्थिति काफी अजीब है। उनको इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि उनको मकान मिलेगा का नहीं। मगर उनको इसके लिये गए कर्ज का भुगतान करना होगा। इसके अलावा अगर उनको अपनी राशि वापस मिली तो वह भी एक साथ नहीं मिलेगी। बिल्डर्स अगर देंगे तो किस्तों में देंगे। ऐसे में उन्हें ब्याज भी मिलता है तो वह उस धन से कहीं और फ्लैट ले नहीं सकते।

    सबसे अहम बात यह है कि जब तक उनका एक लोन चल रहा है, तब तक वे दूसरे बैंक से लोन नहीं ले सकते, क्योंकि अन्य बैंक इस मामले में फंसे होने के कारण उन्हें लोन देने से कराएंगे। वैसे बैंकों ने यह भी फैसला किया है कि वे विवादित क्षेत्रों, खासकर नोएडा और उससे सटे इलाकों में कर्ज देने में अब कोई रिस्क नहीं उठाएंगे।

    -Navbharat times
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  • Give share in developed land: Farmers

    Fanned by the hot winds of agitation blowing from neighbouring Noida Extension villages,a simmering years-old land dispute has got revived in Noida.As baffled homebuyers wonder whether their investments in a city settled years ago can really go the way of projects in Sahberi and Patwari villages across Hindon river,the point that is lost is that the agitating farmers in Noida are not seeking a return of their acquired lands.
    The agitation by this section of farmers that got revived only last week and is threatening to halt work at housing projects in several sectors is about higher compensation for acquired lands,other rehabilitation benefits and a share of the developed land for eligible villages.The last demand has been intermittently voiced ever since land acquisition started in Noida in 1976.

    Continuing with their protests for the third consecutive day on Saturday,hundreds of villagers gathered in Sector 74,and around 200 others held a panchayat at Wazidpur village in Sector 135 along the Noida-Greater Noida Expressway.Both groups demanded more money and developed plots from the Noida Authority and threatened to obstruct construction work in sectors 74,75,76,78,112,115,122,among others,in the vicinity of the Noida Extension-Greater Noida belt.

    Led mainly by Kisan Sansh Samiti,a self-proclaimed farmers organisation,the protesting Noida farmers listed 21 demands for the Authority that range from higher compensation for acquired land to construction of community halls and stadia in villages and providing jobs to the unemployed village youth.

    The crux of the Noida farmers agitation,though,is the demand for developed plots in lieu of their acquired abadi (inhabited) lands.Noida Authority was supposed to give villagers developed plots equalling 5% of their acquired abadi lands.

    Around a dozen villages across Noida have been demanding their share of developed plots and the Authority has been dilly-dallying for the past one year.We have now set July 31 as a deadline to meet our demands.After that,we will obstruct construction work and approach Allahabad High Court for relief, said Mahesh Awana of Kisan Sansh Samiti.

    Farmers of villages around the expressway were paid a paltry compensation of Rs 450 per square metre.They now want higher compensation, said Raghuvar Chauhan,another villager at the Wazidpur panchayat.

    The Noida Authority,meanwhile,is desperately trying to dispel fears of residents,investors and developers.The Authoritys new chairperson and CEO,Balwindar Kumar,has already held two rounds of talks with farmers and has sought time till Monday to draw up a concrete plan.

    Sorkha and Shahdara are the two main villages where farmers have to get 5% developed plots.A few villages along the expressway,too,are yet to get the developed land,but we are yet to ascertain that, said Kumar.That is why we have sought some time to ascertain which villages are affected and we will return the developed plots within the next three-four days, he added.

    Abadi lands were kept out of the acquisition process.A large number of claims (for rehabilitation and compensation ) of owners of abadi lands could not be settled as the built-up clusters surveyed before acquisition kept expanding illegally.We could not give up the entire encroached area to farmers and it remained disputed.Now,the whole issue has escalated as farmers are encouraged by the recent court orders (in connection with Noida Extension ), said an Authority official.

    We have been trying to conduct surveys to figure out the actual inhabited area prior to acquisition, said Kumar.He has assured farmers that the Authority will organise special camps and allot the 5% plots.




    -TOI
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  • Center can’t Intervene in Greater Noida Land Acquisition Matter: Kapil Sibal

    Human resource development minister and senior Congress leader, Kapil Sibal, said on Friday that the Centre had no powers to intervene in the problems arising out of land acquisition in Greater Noida, but it was up to the Uttar Pradesh government to come up with a “fair” solution. “Land is a State subject. We have no jurisdiction over that. It is obviously a problem and in fact if you look at scams across the country, most of them are centred around land and wealth around land,” Sibal told reporters at a press conference.

    Builders and home buyers were hit hard by a Supreme Court order earlier this month, quashing the acquisition of 156 hectares in the Shahberi village. Farmers alleged that the land was acquired by Greater Noida Industrial Development Authority in the garb of using it for industrialisation but was the sold to developers at exorbitant rates. In another case involving land in the Greater Noida region, the Allahabad High Court sided with farmers, quashing land acquisition of 598 hectares in Patwari village.

    “This is a result because land was allotted as the High Court says without reference to rules, procedure, any law. This is the consequence and people have to suffer… so it is up to the UP government to evolve a solution which in the circumstances is fair, just and equitable,” said Sibal. “We can deal with corruption as a Central subject but we can’t deal with the issue of land. We can deal with the corruption that arises out of dealing with land, but we cannot deal with re-distribution of land,” he added.


    Center can
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  • Home buyers safe?
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  • Originally Posted by king_jsr
    Please brush up your Economics you wouldn't be surprised anymore. If you can't understand quality, don't pass it off as quantity.

    Now coming to your questions. I'll skip the first question as it is a much wider debate which is not possible in this forum. But let me state just one thing. Any court in India can give judgments only on pleas made before it. So far the plea of the buyers is yet to be heard by the court.

    As regards your 2nd question, well here it goes:

    I come from a family of an erstwhile Zamindar, my maternal grand father was a zamindar in the pre-independence period. When the land reforms were introduced during 50s and 60s my grand father gave up all the surplus land. Now most of my uncles live on the rental income generated from the properties they have in a "developed city".

    Now that I have answered your questions, I have one question for you.

    As per the UP Zamindari Abolition and Land Reform Act, the ceiling on land holding was fixed at 40 acres in UP. How come these land owners still have more than 300-500 acres of land in their possession???


    King_jsr,
    I also come from a zamindar family and thats from my paternal grandfather side, but not from UP. Just in one generation - that is coming to my dad's, we sold out most on realizing that farming was least ROI business, if you keep in account the uncertainties involved - weather vagaries, pests etc etc. Our means still mostly come from paltry rental that we get of our little bit of our agricultural property and orchard. Believe me, its not guaranteed income at all. If you have not noticed yet, the veg. produce prices do jump in some years, but hardly much has changed in even last 10 years. There is also a big big emotional value of land to the buyers, which govts. take out some bill and use that to forcibly acquire land. It was prevalent a lot before 2000.

    And, as much/little as i have heard from childhood or know - It was something like - The ceilings applied only when your land involved in anything else than agriculture, viz. near to city/residential/ Industrial townships planned/ Even the agriculture farms planned by govts.
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  • Originally Posted by king_jsr
    Only two or three farmers have more than 50 acres???? Read the following lines from a news article:


    Rizwana, who has 500 acres of land in Noida Extension.
    Rangi Lal of Bisrakh village has 300 acres of land given to Paramount, Earth and Stellar developers.

    here's the link to the news.
    Farmers win land, but its fertility lost - Express India

    You are partially right when you say majority of Landowners have less than <20 acres land size. The real situation is a lot worse than that. According to this REPORT out of the total 116,000 Hectares of cultivable land in GB Nagar, more than 68% are less than 1 Hectare in size. And this report was prepared in 2001, since then I am sure this percentage would have increased.

    I do not need to say anything about the kind of life these Marginal Farmers have been living. Just search on google and you will find a tonne of farmer suicide cases. These people would have actually benefited from development in the region.

    As regards your comments on making losses in stock market. Well I have incurred losses in the stock market but I have never blamed anyone for that loss.

    I hope I have made my points clear. Now if you can present some data to back your frivolous statements, I would be more than happy to engage you in a debate. :)


    I don't know which statement of mine is looking frivolous to you. See, All I am saying is that the flat buyers have no business blaming SC, Everyone, of course have sympathies with them. Rather to accept that they overlooked the fine print which was there in all the builders ads - "*subject to transfer of land from GNIDA", And please don't forget that everyone is not an investor there. there are so many NRI's who have booked 2-3 flats at one go.
    yesterday's protest also din't help anything. The flat owners are treating this as if it was a lottery that they got it at that price and want the flats at that price only, whatever the situation. The Farmers were wronged, they need to be paid for this piece of land. Just because authority did a mistake and you dint care for the fine print - don't start blaming SC and farmers.
    Everyone talks of fighting corruption, But when it comes to personal benefits - everyone convenietly forgets.
    Flat owners at this point are not even realizing that the money itself is in danger. Developers are just a private company, they declare bankruptcy based on adverse business conditions.
    I can only give one nonsense advice to people - Please don't pay the August month installment until and unless you are ready to acquire the flats at the inevitable double the original price of flat in the end. GNIDA itself will fall into severe financial crisis if the builders and farmers demands are met.
    This Game is over for the builders and Authority, and the flat owners are just indirectly helping the builders on not asking for refund and just wanting the flat at old price.
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  • Dhoke Ka Extension

    Catch Special TV Show On Sahara Samay Dhoke Ka Extension at Noida Extension 7:30 PM, July 24, 2011.
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  • Just few days back, I watched a movie called PAA .. the great movie by Amitabh.

    There was quite a similar situation and Abhishek (a MP in that movie) handles the situation very nicely... thats the thing all these Barkha Dutt or Vir Sangvi deserves.
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