Watch Zee news... HC has cancel 589 Hct land acquisition of Patwari village so 17 builder projects are now on verge of danger.
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  • Yamnua Expressway CEO shifted

    LUCKNOW: In less than a week after shifting the chairman of Noida Authority, the Mayawati government on Sunday removed Yamnua Expressway Industrial Development Authority CEO Santosh Kumar Dwiwedi.

    He has been replaced by Pratapgarh district magistrate Pandhari Yadav, an official spokesman said here.

    Dwiwedi will now be additional commissioner, entertainment tax department.

    Noida Authority chairman Mohinder Singh was removed on Tuesday and replaced by Balvinder Kumar, who was principal secretary, social welfare department.
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  • Originally Posted by dhanam
    Yamnua Expressway CEO shifted

    LUCKNOW: In less than a week after shifting the chairman of Noida Authority, the Mayawati government on Sunday removed Yamnua Expressway Industrial Development Authority CEO Santosh Kumar Dwiwedi.

    He has been replaced by Pratapgarh district magistrate Pandhari Yadav, an official spokesman said here.

    Dwiwedi will now be additional commissioner, entertainment tax department.

    Noida Authority chairman Mohinder Singh was removed on Tuesday and replaced by Balvinder Kumar, who was principal secretary, social welfare department.



    Whimsical transfer of govt officials is hallmark of BMW.
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  • ‘Ex-post facto approval biggest problem before SC’

    Sunday, July 24, 2011, 20:14

    New Delhi: Against the backdrop of the Noida land controversy, Chief Justice of India SH Kapadia on Sunday termed as the "biggest problem" the situation in which the Supreme Court is called upon to give ex-post facto approval to buildings and projects after crores have been invested.

    "The most acute problem over the years the Supreme court has faced is that the plans, the buildings, the projects come up and suddenly at the end a PIL comes and we are required to decide ex-post facto approval."


    "This is the biggest problem the which Supreme Court is facing. Should crores of investment be just thrown out or should we give ex-post facto approval. If so, in what cases?" he said at an international seminar here.

    His remarks came as buyers of flats in Greater Noida prepare to move the Supreme Court challenging Allahabad High Court orders quashing acquisition of about 750 hectares of land acquired by the UP government from farmers and given to builders for setting up multi-storeyed residential apartments.

    The Allahabad High Court had recently cancelled the land allotments in Noida Extension- Shahberi and Patwari villages- on the charge that the state government had not given adequate compensation to farmers whose fields were bought and later sold to private builders.

    Some of these projects are nearing completion and the order would lead to demolition of flats and loss of crores of rupees.

    The CJI was apparently referring to such cases though he did not name the projects.

    Kapadia said local bodies also create problems for the Supreme Court when they first approve a project but backtrack later.

    "We have village durbars and some local bodies which give OK, NOC but after sometime they object to the project coming up. How do we deal with this? Even in public participation views can change for certain reasons at a later date," he said.

    The Chief Justice suggested that the British legal system could give India some directions in this regard as UK has devised some concepts to face this challenge.

    PTI
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  • Greater Noida contractors hold protest


    After farmers, home buyers and builders, contractors protested in Noida on Sunday against stoppage of construction work at various housing projects in Greater Noida following court orders. About 36 contractors who were working with various builders and for the Greater Noida authority joined hands and highlighted the repercussion of the courts' orders on their livelihood.

    “The farmers, builders and the authority, everybody is talking about their own condition. Nobody is talking about us, who are the biggest victims of the court judgments. Who will speak for the labourers who have no voice of their own,” said Vikas Gupta, a contractor and member of Noida Extension Contractors and Suppliers Association.

    The protesters said around 500 contractors would suffer losses and about 60,000 labourers would be virtually rendered jobless due to the restrictions on construction. They claimed their capital investments were also at stake.

    An atmosphere of uncertainty and panic plagued home buyers and builders in Greater Noida after a Supreme Court order earlier this month quashing the acquisition of land in the district's Shahberi village. A total of 156 hectares of village land was acquired by Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA) in Shahberi and then sold to developers at exorbitant rates.

    The Allahabad high court sided with farmers, quashing the acquisition of 598 hectares in Patwari village - the second acquisition struck down by the court this month.

    -HT
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  • अथॉरिटी को 5 अगस्त तक का अल्टिमेटम


    सेक्टर-74 में रविवार को हुई किसान महापंचायत में अथॉरिटी को मांगों को पूरा कराने के लिए 5 अगस्त का वक्त दिया गया है। इस तारीख तक किसान कोटे के 5 पर्सेंट प्लांटों के आवंटन और आबादी को छोड़ना दो प्रमुख मांगों को पूरा किया जाना है। किसानों के मुताबिक, इस दिन तक मांगों के पूरा नहीं होने पर शहर के सभी स्थानों पर बिल्डरों का काम बंद कराकर अथॉरिटी के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। उधर, महापंचायत को लेकर सेक्टर में दिन भर गहमागहमी का माहौल रहा। लोकल पुलिस के अलावा संभावित खतरे को देखते हुए बड़ी संख्या में पीएसी को तैनात रखा गया।

    किसानों ने रविवार को बिल्डरों की साइटों पर जारी काम नहीं बंद कराया, लेकिन एहतियातन ज्यादातर साइटों पर काम नहीं हुआ। सोहरखा गांव के चारों तरफ पेरिफेरल रोड बनाने की मांग पर मंगलवार से अथॉरिटी ने काम शुरू करा दिया। पंचायत ने किसान संघर्ष समिति की 11 सदस्यीय कमिटी को शहर के 54 गांवों की समस्याओं का निस्तारण कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।

    महापंचायत के लिए सुबह से ही काफी संख्या में किसान सेक्टर-74 धरनास्थल पर पहुंचने शुरू हो गए। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष दलबीर यादव ने बताया कि अथॉरिटी को किसान कोटे के 5 पर्सेंट प्लॉटों की लिस्ट सभी गांवों में चस्पा करना, आबादी की समस्या का निस्तारण करना और मौजूदा सर्कल रेट पर मुआवजा तय कराना होगा। साथ ही किसानों के उत्पीड़न को रोकने के लिए अधिकारियों को गांव में आकर मामलों का निस्तारण करना होगा। उन्होंने बताया कि ये प्रमुख मांगें शहर के ज्यादातर गांवों से जुड़ी हैं। इनके अलावा अलग-अलग गांवों से संबंधित अन्य समस्याओं का भी इलाके के हिसाब से निस्तारण कराना होगा।

    उन्होंने कहा कि अथॉरिटी को सोहरखा समेत कई गांवों की 800 एकड़ जमीन टेक्निकल फॉल्ट के चलते राज्य सरकार में निहित करने के मामले, एक्सप्रेस-वे पर जेपी ग्रुप की ओर से गांवों का रास्ता रोके जाने के मामलों का भी निपटारा करना होगा। उन्होंने बताया कि जिस जमीन का वर्षों पहले अधिग्रहण कर अब बिल्डरों को बेचा जा रहा है, उस जमीन का मुआवजा सर्कल रेट 5500 वर्गमीटर के हिसाब से मिलना चाहिए।

    उधर , सेक्टर -74 इलाके में सोहरखा गांव के चारों तरफ पेरिफेरल रोड बनाने का काम रविवार से शुरू कर दिया गया। अथॉरिटी के अधिकारी टीम के साथ सुबह से ही गांव में रोड बनाने की तैयारी करते रहे। अथॉरिटी अधिकारियों के मुताबिक , पेरिफेरल रोड बनाने का सर्वे 2005 और 2009 में कराया गया था जिसके आधार पर अब काम शुरू किया गया है।


    किसानों की प्रमुख मांगें
    - 5 पर्सेंट प्लॉटों की लिस्ट गांवों में चस्पा करना व आबादी की समस्या सुलझे
    - मौजूदा सर्कल रेट के हिसाब से मुआवजा तय करना
    - अधिकारियों को गांव में आकर समस्याओं को निस्तारण करना होगा
    - जेपी ग्रुप की ओर से रास्ता रोके जाने का मामला सुलझाया जाए
    - 800 एकड़ जमीन के टेक्निकल फॉल्ट के चलते राज्य सरकार में निहित करने का मामला सु लझे

    -navbharat times
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    अथॉरिटी को 5 अगस्त तक का अल्टिमेटम


    सेक्टर-74 में रविवार को हुई किसान महापंचायत में अथॉरिटी को मांगों को पूरा कराने के लिए 5 अगस्त का वक्त दिया गया है। इस तारीख तक किसान कोटे के 5 पर्सेंट प्लांटों के आवंटन और आबादी को छोड़ना दो प्रमुख मांगों को पूरा किया जाना है। किसानों के मुताबिक, इस दिन तक मांगों के पूरा नहीं होने पर शहर के सभी स्थानों पर बिल्डरों का काम बंद कराकर अथॉरिटी के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। उधर, महापंचायत को लेकर सेक्टर में दिन भर गहमागहमी का माहौल रहा। लोकल पुलिस के अलावा संभावित खतरे को देखते हुए बड़ी संख्या में पीएसी को तैनात रखा गया।

    किसानों ने रविवार को बिल्डरों की साइटों पर जारी काम नहीं बंद कराया, लेकिन एहतियातन ज्यादातर साइटों पर काम नहीं हुआ। सोहरखा गांव के चारों तरफ पेरिफेरल रोड बनाने की मांग पर मंगलवार से अथॉरिटी ने काम शुरू करा दिया। पंचायत ने किसान संघर्ष समिति की 11 सदस्यीय कमिटी को शहर के 54 गांवों की समस्याओं का निस्तारण कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।

    महापंचायत के लिए सुबह से ही काफी संख्या में किसान सेक्टर-74 धरनास्थल पर पहुंचने शुरू हो गए। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष दलबीर यादव ने बताया कि अथॉरिटी को किसान कोटे के 5 पर्सेंट प्लॉटों की लिस्ट सभी गांवों में चस्पा करना, आबादी की समस्या का निस्तारण करना और मौजूदा सर्कल रेट पर मुआवजा तय कराना होगा। साथ ही किसानों के उत्पीड़न को रोकने के लिए अधिकारियों को गांव में आकर मामलों का निस्तारण करना होगा। उन्होंने बताया कि ये प्रमुख मांगें शहर के ज्यादातर गांवों से जुड़ी हैं। इनके अलावा अलग-अलग गांवों से संबंधित अन्य समस्याओं का भी इलाके के हिसाब से निस्तारण कराना होगा।

    उन्होंने कहा कि अथॉरिटी को सोहरखा समेत कई गांवों की 800 एकड़ जमीन टेक्निकल फॉल्ट के चलते राज्य सरकार में निहित करने के मामले, एक्सप्रेस-वे पर जेपी ग्रुप की ओर से गांवों का रास्ता रोके जाने के मामलों का भी निपटारा करना होगा। उन्होंने बताया कि जिस जमीन का वर्षों पहले अधिग्रहण कर अब बिल्डरों को बेचा जा रहा है, उस जमीन का मुआवजा सर्कल रेट 5500 वर्गमीटर के हिसाब से मिलना चाहिए।

    उधर , सेक्टर -74 इलाके में सोहरखा गांव के चारों तरफ पेरिफेरल रोड बनाने का काम रविवार से शुरू कर दिया गया। अथॉरिटी के अधिकारी टीम के साथ सुबह से ही गांव में रोड बनाने की तैयारी करते रहे। अथॉरिटी अधिकारियों के मुताबिक , पेरिफेरल रोड बनाने का सर्वे 2005 और 2009 में कराया गया था जिसके आधार पर अब काम शुरू किया गया है।


    किसानों की प्रमुख मांगें
    - 5 पर्सेंट प्लॉटों की लिस्ट गांवों में चस्पा करना व आबादी की समस्या सुलझे
    - मौजूदा सर्कल रेट के हिसाब से मुआवजा तय करना
    - अधिकारियों को गांव में आकर समस्याओं को निस्तारण करना होगा
    - जेपी ग्रुप की ओर से रास्ता रोके जाने का मामला सुलझाया जाए
    - 800 एकड़ जमीन के टेक्निकल फॉल्ट के चलते राज्य सरकार में निहित करने का मामला सु लझे

    -navbharat times


    "जेपी ग्रुप की ओर से रास्ता रोके जाने का मामला सुलझाया जाए" Yeh konse raste ki baat ho rahi hai ?
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  • Thanks ondabhai for your appreciation. It feels good to get appreciation amid all the negative news. :)

    Originally Posted by ondabhai
    stpdcomonman and king_jsr

    Great bro... after a very long time seeing two gentlemen agreeing to disagree in a most professional way.

    You both are great ... probably first time in IREF I am seeing two knowledgeable and well writer are arguing logically. Thanks both
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  • ग्रेनो के आधे हिस्से पर संकट के बादल


    नोएडा एक्सटेंशन के गांवों में न्यायालय के फैसले से उत्साहित कई अन्य गांवों के किसानों ने भी जमीन अधिग्रहण के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की घोषणा की है। किसानों का यह निर्णय प्राधिकरण व शहर दोनों के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है। कोर्ट ने साबेरी व पतवाड़ी के निर्णय को आधार मानकर यदि अन्य गांवों में भी जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना रद कर दी तो आधे ग्रेटर नोएडा पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। प्राधिकरण की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रभावित हो सकती है। इनमें कई गांव ऐसे हैं, जिनमें प्राधिकरण आवासीय, आइटी व औद्योगिक सेक्टर विकसित कर चुका है। जमीन अधिग्रहण रद हुआ तो इन्हें हटाना पड़ेगा।

    दरअसल, प्राधिकरण ने इमरजेंसी क्लॉज लगाकर जमीन अधिग्रहण की जो प्रक्रिया नोएडा एक्सटेंशन के गांवों में अपनाई थी, वहीं प्रक्रिया बाकी गांवों में भी अपनाई गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिस तरह से साबेरी, पतवाड़ी, मकोड़ा, सूरजपुर व गुलिस्तानपुर गांव में जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना रद किया है, उसे देखते हुए अन्य गांवों के किसान भी हाईकोर्ट का रुख कर रहे हैं। जुनपत के रामेश्वर सरपंच का कहना है कि प्राधिकरण ने किसी भी गांव में किसानों की आपत्तियों का निराकरण नहीं किया। सभी में इमरजेंसी क्लॉज लगाकर अधिग्रहण किया गया।

    इन गांवों के किसानों ने की कोर्ट जाने की घोषणा
    ऐमनाबाद, तुस्याना, सैनी, खेड़ा चौगानपुर, मायचा, साकीपुर, जैतपुर वैसपुर, घोड़ी बछेड़ा, डाढ़ा, क्यामपुर, डाबरा, रिठौड़ी, सिरसा, मुरस्दपुर, खानपुर, खैरपुर गुर्जर, रामपुर फतेहपुर
    कब हुआ था इन गांवों में जमीन अधिग्रहण

    इन सभी गांवों में वर्ष 2006 से 2009 के बीच जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की गई। घोड़ी बछेड़ा, सैनी, डाबरा व रामपुर गांव के किसानों को 339 रुपये प्रति वर्गमीटर का मुआवजा व 310 रुपये प्रति वर्गमीटर का अतिरिक्त बोनस दिया गया था। बाकी सभी गांवों के किसानों को 850 रुपये प्रति वर्गमीटर का मुआवजा मिला था।

    इन गांवों की याचिका स्वीकार होने पर प्रभावित होने वाली योजनाएं
    घोड़ी बछेड़ा, रामपुर फतेहपुर, जैतपुर वैसपुर, डाढ़ा व साकीपुर गांव की जमीन पर आवासीय सेक्टर ओमीक्रान, जू व म्यू है। इनमें व्यक्तिगत भूखंड व मकानों के साथ कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बनी हुई हैं। खैरपुर गुर्जर गांव में आवासीय सेक्टर तीन, खेड़ा चौगानपुर, मुरस्दपुर व तुस्याना में शैक्षिक संस्था व आइटी कंपनियों के भूखंड, सैनी व ऐमनाबाद में ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के भूखंड, मायचा, सिरसा, रिठौड़ी व डाबरा में औद्योगिक भूखंड योजना प्रभावित हो सकती है।

    -Dainik Jagran
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  • जमीन लौटाने के लिए बिल्डरों को नोटिस


    नोएडा एक्सटेंशन के गांव साबेरी में जमीन अधिग्रहण रद होने पर सोमवार प्राधिकरण ने जमीन खाली करने के लिए बिल्डरों को नोटिस जारी किया है। पंद्रह दिन के अंदर जमीन वापस कर बिल्डरों को अपना पैसा वापस लेना होगा।

    मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर मोहर लगाते हुए छह जुलाई को नोएडा एक्सटेंशन के गांव साबेरी में 156 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। प्राधिकरण ने इस गांव में 157 एकड़ जमीन दस बिल्डरों को आवंटित कर दिया था। करीब छह हजार निवेशकों ने फ्लैट बुक कराया था। बिल्डरों ने फ्लैट का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आम्रपाली, सुपरटेक, पंचशील, एवीबीपी, गुलशन होम्स, श्रीजी होम्स, गौड़ एंड संस, महागुन सहित दस बिल्डरों की योजनाएं प्रभावित हुई है। इनमें सबसे कम गौड़ एंड संस व महागुन योजनाएं प्रभावित हुई है। गौड़ एंड संस का 12 हजार वर्गमीटर व महागुन का एक लाख वर्गमीटर भूखंड साबेरी क्षेत्र में आता है, जबकि सबसे ज्यादा अम्रपाली की योजना प्रभावित हुई है। प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बिल्डरों से जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमन ने बताया कि बिल्डरों को जमीन खाली करने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। 15 दिन के अंदर उन्हें जमीन खाली करनी होगी। जमीन खाली करने के बाद बिल्डरों को पैसा वापस कर दिया जाएगा। प्राधिकरण में बिल्डरों ने अभी सिर्फ पंजीकरण राशि के 55 करोड़ रुपये जमा करा रखे हैं, यह राशि उन्हें वापस की जाएगी। सीईओ ने बताया कि जमीन खाली करने पर बिल्डरों को तुरंत चेक सौंप दिया जाएगा। जमीन खाली होते ही किसानों को वापस कर दिया जाएगा। जमीन का सीमांकन चल रहा है। जिन किसानों ने मुआवजा नहीं उठाया है, राजस्व अभिलेखों में उनका नाम जल्द ही दर्ज करा दिया जाएगा। जिन्होंने मुआवजा उठा लिया, पैसा वापस करने के बाद ही उन किसानों का नाम अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा। जमीन अधिग्रहण की पहली प्रक्रिया (धारा-चार) की भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    -Dainik Jagran
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  • अथॉरिटी ने 7 बिल्डरों को दिया नोटिस


    शाहबेरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने सोमवार को सात बिल्डरों को नोटिस जारी कर 1 हफ्ते में प्लॉट खाली करने का निर्देश दिया है।

    अथॉरिटी जमीन समतल करने के बाद किसानों को सौंपेगी। अथॉरिटी के सीईओ रमा रमण ने बताया कि शाहबेरी में सुपरटेक , आम्रपाली , महागुण , अजनारा और पंचशील समेत सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट हैं। सभी बिल्डरों को नोटिस जारी कर 1 हफ्ते में प्लॉट खाली करने को कहा गया है। सात दिन में बिल्डरों को शाहबेरी से अपना साइट ऑफिस , टीनशेड आदि हटाना होगा।

    जिस बिल्डर ने कंस्ट्रक्शन कर रखा है , उसे कंस्ट्रक्शन ढहाना होगा। सीईओ ने बताया कि अथॉरिटी जमीन समतल करने के बाद किसानों को सौंप देगी। उधर , शाहबेरी के किसान भी मांग कर रहे हैं कि दोबारा जमीन अधिग्रहण करने से पहले किसानों को जमीन समतल कर वापस की जाए। उसके बाद अथॉरिटी अफसर किसानों से बातचीत कर जमीन का नया रेट तय करें। इसके बाद ही अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू होनी चाहिए।

    -navbharat times
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  • Biggest Joke

    After 15 yrs,Gheza awakes to meagre compensation

    As the farmers agitation here entered the fifth day on Monday,hundreds of villagers from across the city gathered at Gheza village in Sector 93 to demand higher compensation for the acquired lands and other rehabilitation benefits.

    Manoj Tyagi,a Gheza resident and member of Kisan Sansh Samiti thats heading the campaign,said Noida Authority had acquired land in his village in two phases at the rate of Rs 270 per square metre.Half of the total of 52,000 bighas of land in Gheza was acquired in 1983 while the rest was acquired over the years 1997-98.The villagers were paid a meagre compensation at a rate of Rs 270 per square metre,and even 27 years after the land in our village was acquired,we are yet to get developed plots, said Tyagi.Noida Authority gives farmers developed plots equalling 5% of the area of their acquired residential lands.

    Gheza village was acquired to make way for private housing and development in sectors 91,92,93,105,108,and the area near the Expressway where Genesis Public School is now situated.

    We had to sacrifice our land so that luxury housing could come up instead.In turn,our abadi (residential) land has been reduced to a slum.We now want greater land compensation and 5% developed land,which the Authority has not given yet.We have demanded compensation for land at the rate of Rs 10,000 per square metre, said Kisan Sansh Samiti chairperson Dalveer Yadav.The state government must intervene now and assure us that we will be given a fair treatment this time, he added.
    Mondays meet was part of the farmers jan jagran (awareness campaign).Another panchayat is scheduled at Ajgarpur Jagir village on Tuesday.

    -TOI
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  • lol... so prude, the authorities and the governments have become!! only for the vote bank! Otherwise, I wonder, why these threats (stopping construction work) to law and order, even being illegal are not crushed!


    Best Regards,
    Ravi

    Originally Posted by fritolay_ps
    Biggest Joke

    After 15 yrs,Gheza awakes to meagre compensation

    As the farmers agitation here entered the fifth day on Monday,hundreds of villagers from across the city gathered at Gheza village in Sector 93 to demand higher compensation for the acquired lands and other rehabilitation benefits.

    Manoj Tyagi,a Gheza resident and member of Kisan Sansh Samiti thats heading the campaign,said Noida Authority had acquired land in his village in two phases at the rate of Rs 270 per square metre.Half of the total of 52,000 bighas of land in Gheza was acquired in 1983 while the rest was acquired over the years 1997-98.The villagers were paid a meagre compensation at a rate of Rs 270 per square metre,and even 27 years after the land in our village was acquired,we are yet to get developed plots, said Tyagi.Noida Authority gives farmers developed plots equalling 5% of the area of their acquired residential lands.

    Gheza village was acquired to make way for private housing and development in sectors 91,92,93,105,108,and the area near the Expressway where Genesis Public School is now situated.

    We had to sacrifice our land so that luxury housing could come up instead.In turn,our abadi (residential) land has been reduced to a slum.We now want greater land compensation and 5% developed land,which the Authority has not given yet.We have demanded compensation for land at the rate of Rs 10,000 per square metre, said Kisan Sansh Samiti chairperson Dalveer Yadav.The state government must intervene now and assure us that we will be given a fair treatment this time, he added.
    Mondays meet was part of the farmers jan jagran (awareness campaign).Another panchayat is scheduled at Ajgarpur Jagir village on Tuesday.

    -TOI
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  • Originally Posted by noidaa
    lol... so prude, the authorities and the governments have become!! only for the vote bank! Otherwise, I wonder, why these threats (stopping construction work) to law and order, even being illegal are not crushed!


    Best Regards,
    Ravi


    Oh dear!!

    Half of Mumbai is illegal encroachments

    We had tough time to get a ration card ... illegal foreign nationals living in encroachments has not one but few

    Half of Sanjay Gandhi national park is converted to residential areas without paying a cent to the government
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  • Sector 2/3 plots may be safe in coming verdict in Aug
    Attachments:
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  • Hi Any idea about sector 117 ? is this in dispute , what village it falls ?

    Originally Posted by Totaram
    My Dear
    Chek the fact before speak. It did nt take 2-3 years in hearing. These greedy so called farmers had filled case just after 6 July verdict by SC.
    HC Judges are very active because they have vested interest...............
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