कनेक्ट होंगे गुड़गांव, दिल्ली और फरीदाबाद


Oct 9, 2012, 06.00AM IST
एनबीटी न्यूज ॥ ग्रेटर नोएडा
पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बदनाम ग्रेटर नोएडा जल्द इस दाग को धो देगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के मामले में अपना शहर एनसीआर के अन्य शहरों से आगे होगा। अथॉरिटी ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रोजेक्ट से दिल्ली , गुड़गांव और फरीदाबाद ग्रेटर नोएडा से सीधे जुड़ जाएंगे। अथॉरिटी के सीईओ रमा रमण ने बताया कि डीएमआईसी प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार के साथ ही अब यूपी गवर्नमेंट भी गंभीर है। इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए शासन स्तर पर कई बार मीटिंग और प्रेजेंटेशन हो चुके हैं। ग्रेटर नोएडा को इस प्रोजेक्ट का एक इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट रीजन के तौर पर चिह्नित किया गया है। इसी के तहत रैपिड ट्रांजिट सिस्टम बनाया जाएगा। इससे रेल लिंक के माध्यम से ग्रेटर नोएडा , दिल्ली , गुड़गांव और फरीदाबाद शहर आपस में जुड़ जाएंगे। जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा।
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  • डिवेलप होंगे मेगा फूड पार्क, इनमें स्टोरेज, प्रॉडक्ट निर्माण, पैकेजिंग और सप्लाई की होगी व्यवस्था



    Oct 9, 2012, 08.00AM IST
    श्यामवीर चावड़ा ॥ सूरजपुर
    जिले में मेगा फूड पार्क डिवेलप करने की प्लानिंग की जा रही है। 50 से 100 हेक्टेयर जमीन पर मिनी एसडीजेड (स्पेशल डिवेलपमेंट जोन) बनेंगे। यहां एग्रीकल्चर और डेरी संबंधित उत्पाद पैदा कर इसी जगह स्टोरेज, प्रॉडक्ट निर्माण, पैकेजिंग और सप्लाई तक का काम होगा। यानी खेत से लेकर प्लेट तक का इंतजाम एक ही स्थान पर होगा। उद्यमियों को इस योजना में निवेश करने के लिए मेरठ मंडल के कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण ने इनवाइट किया है। ग्रेटर नोएडा की न्यू हॉलैंड कंपनी में हाल ही में उद्यमियों के साथ मीटिंग कर उन्हें इस संबंध में पूरी जानकारी दी जा चुकी है।
    जिले में योजना के संचालन की जिम्मेदारी हॉर्टिकल्चर विभाग को दी गई है। डिस्ट्रिक्ट हॉर्टिकल्चर ऑफिसर एन. के. सहानिया ने बताया कि मेगा फूड पार्क योजना मिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की है। इसे यूपी में लागू किया जा रहा है। इसके तहत 50 से 100 हेक्टेयर जमीन पर मेगा फूड पार्क डिवेलप किए जाएंगे। इनमें फल, सब्जी, मछली, डेयरी उत्पाद, हर्बल दवाइयां, जड़ी-बूटी आदि का उत्पादन किया जा सकेगा। नोएडा एरिया में जमीन कम है, लिहाजा माना जा रहा है कि ग्रेटर नोएडा या यमुना अथॉरिटी के एरिया में ये पार्क डिवेलप किए जा सकते हैं।
    उन्होंने बताया कि इस योजना के अनुसार खेत से प्लेट तक की चेन को एक ही स्थान पर मेंटेन करना है। यह 250 से 500 करोड़ का प्रोजेक्ट होगा और इस पर 50 करोड़ रुपये की सब्सिडी सरकार से मिलेगी। कोई भी कंपनी, व्यक्ति या सोसायटी इसे चला सकती है। इसके लिए जमीन की व्यवस्था उन्हें खुद करनी होगी। इसमें फलों, सब्जियों जैसे उत्पादों को खराब होने से बचाया जा सकेगा और रेट भी मेंटेन रहेंगे। इससे कृषि क्षेत्र पुनर्जीवित होगा और हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। इस योजना के मुताबिक, लैब, वेयरहाउसिंग फैसिलिटीज, कूलिंग स्टोर, पैकेजिंग व फूड प्रोसेसिंग आदि की सुविधाएं एक ही स्थान पर होंगी। सहानिया ने बताया कि योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी चल रही है। शासन से जल्द ही इस संबंध में नए दिशा-निर्देश आने वाले हैं।
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  • कनेक्ट होंगे गुड़गांव, दिल्ली और फरीदाबाद


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    Oct 9, 2012, 08.00AM IST
    एनबीटी न्यूज ॥ ग्रेटर नोएडा
    पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बदनाम ग्रेटर नोएडा जल्द इस दाग को धो देगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के मामले में अपना शहर एनसीआर के अन्य शहरों से आगे होगा। अथॉरिटी ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रोजेक्ट से दिल्ली, गुड़गांव और फरीदाबाद ग्रेटर नोएडा से सीधे जुड़ जाएंगे। अथॉरिटी के सीईओ रमा रमण ने बताया कि डीएमआईसी प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार के साथ ही अब यूपी गवर्नमेंट भी गंभीर है। इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए शासन स्तर पर कई बार मीटिंग और प्रेजेंटेशन हो चुके हैं। ग्रेटर नोएडा को इस प्रोजेक्ट का एक इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट रीजन के तौर पर चिह्नित किया गया है। इसी के तहत रैपिड ट्रांजिट सिस्टम बनाया जाएगा। इससे रेल लिंक के माध्यम से ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, गुड़गांव और फरीदाबाद शहर आपस में जुड़ जाएंगे। जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा।
    मेट्रो मिटाएगी दूरी
    नोएडा के सेक्टर-32 से ग्रेटर नोएडा के परी चौक तक मेट्रो लाने के लिए अथॉरिटी ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। सीईओ ने बताया कि मेट्रो का डीपीआर फाइनल हो गई है। अथॉरिटी की मंशा इसे पीपीपी मॉडल पर तैयार करने की थी। यदि कोई पार्टनर नहीं मिलता है तो इसे अथॉरिटी अपने खर्चे पर बनवाएगी। जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
    :)
    स्पेशल पर्पज वीइकल कराएंगे नोएडा से दोस्ती
    सीईओ ने बताया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नोएडा और ग्रेनो अथॉरिटी यूपीआरटीसी के साथ मिलकर एक कंपनी गठित कर रही हैं। कंपनी गठित होने के बाद बसें खरीदी जाएंगी। बसें नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सभी सेक्टरांे में जाएंगी। बसों में जीपीएस लगा होगा और अथॉरिटी इसकी मॉनिटरिंग करेगी। उन्होंने बताया कि एक महीने में कंपनी का गठन कर लिया जाएगा।

    नई दिल्ली से बड़ा बोडाकी रेलवे जंक्शन
    सीईओ ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई इंडिस्ट्रयल कॉरिडोर की जरूरत के मुताबिक, बोडाकी रेलवे स्टेशन को अपग्रेड कर जंक्शन बनाया जाएगा। यह जंक्शन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से काफी बड़ा होगा। जंक्शन बनने के बाद तमाम ट्रेन यहां रुकंेगी। जंक्शन के निकट बहुत बड़े साइज का एक बस अड्डा भी होगा। यहां से विभिन्न शहरों के लिए बसें चलेंगी। इस प्रोजेक्ट पर काम अगले महीने तक शुरू होने की संभावना है।
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  • स्पेशल पर्पज वीइकल कराएंगे नोएडा से दोस्त

    स्पेशल पर्पज वीइकल कराएंगे नोएडा से दोस्ती
    सीईओ ने बताया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नोएडा और ग्रेनो अथॉरिटी यूपीआरटीसी के साथ मिलकर एक कंपनी गठित कर रही हैं। कंपनी गठित होने के बाद बसें खरीदी जाएंगी। बसें नोएडा - ग्रेटर नोएडा के सभी सेक्टरांे में जाएंगी। बसों में जीपीएस लगा होगा और अथॉरिटी इसकी मॉनिटरिंग करेगी। उन्होंने बताया कि एक महीने में कंपनी का गठन कर लिया जाएगा।
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  • नई दिल्ली से बड़ा बोडाकी रेलवे जंक्शन
    सीईओ ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली - मुंबई इंडिस्ट्रयल कॉरिडोर की जरूरत के मुताबिक , बोडाकी रेलवे स्टेशन को अपग्रेड कर जंक्शन बनाया जाएगा। यह जंक्शन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से काफी बड़ा होगा। जंक्शन बनने के बाद तमाम ट्रेन यहां रुकंेगी। जंक्शन के निकट बहुत बड़े साइज का एक बस अड्डा भी होगा। यहां से विभिन्न शहरों के लिए बसें चलेंगी। इस प्रोजेक्ट पर काम अगले महीने तक शुरू होने की संभावना है।
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  • संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से भूखंड को खाली रखने के मामले में कई आवंटियों को कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है। नोटिस का जवाब देने की समयावधि लगभग पूरी हो गई है, लेकिन उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआइडीसी) की नोटिस का जवाब नहीं दिया है। अब अधिकारी उनके खिलाफ शासन को लिखने की तैयारी में हैं।

    ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि कार्रवाई के तहत उनके आवंटन के रद्द करने की संस्तुति भी शासन से की जा सकती है। इसके अतिरिक्त उनपर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यही नहीं, कुछ आवंटियों के जवाब से भी अफसर संतुष्ट नहीं हैं। यूपीएसआइडीसी ने पिछले माह 225 से अधिक आवंटियों को नोटिस जारी किया था। उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना था, लेकिन 40 से 50 फीसद तक आवंटियों ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। अब उन पर कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। जिन आवंटियों के प्लॉट पांच या उससे अधिक वर्षो से खाली है उनपर सबसे पहले कार्रवाई हो सकती है। उन्हें आवंटन के दो वर्ष के भीतर-भीतर औद्योगिक इकाई लगानी थी, लेकिन उन्होंने लापरवाही बरतते हुए आज तक उद्योग नहीं लगाए। अब उनपर यूपीएसआइडीसी का डंडा चलना प्रारंभ हो गया है। यूपीएसआइडीसी ग्रेनो के क्षेत्रीय प्रबंधक मयंक श्रीवास्तव का कहना है कि कार्रवाई के तहत आवंटन रद कर भूखंड का लैंड यूज भी बदला जा सकता है। उन्होंने बताया कि पुरानी फाइलें खगाली जा रही है, नोटिस भेजने का सिलसिला जारी रहेगा।
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  • संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : मुआवजा वितरण में पारदर्शिता न बरतने पर मंगलवार किसानों ने सेक्टर बीटा-एक एडीएम भू अध्याप्ति कार्यालय पर जमकर हंगामा किया। तीन घंटे तक किसानों ने एडीएम का घेराव किया। एडीएम ने मौके पर आकर जब किसानों को आश्वासन दिया कि मुआवजा वितरण में पूरी तरह पारदर्शिता बरती जाएगी, इसके बाद जाकर लोग शांत हुए। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें मुआवजा के लिए परेशान किया गया, तो कर्मचारियों व अधिकारियों का मुंह काला किया जाएगा।

    किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में करीब 12 बजे मायचा, जुनपत, बिसरख, घोड़ी बछेड़ा, सैनी, खैरपुर, तुस्याना रौजा, ऐमनाबाद, अजायबपुर, सिरसा, खानपुर आदि गांव के किसान एडीएम कार्यालय पर इकट्ठा हुए। किसानों में एडीएम द्वारा मुआवजा वितरण में बरती जा रही धांधली को लेकर नाराजगी थी। किसानों का आरोप है कि मुआवजा लेने के लिए उन्हें एडीएम कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। मुआवजा देने के नाम पर बाबुओं द्वारा पांच फीसद रिश्वत की मांग की जाती है। मुआवजा के नाम पर किसानों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। एक तरफ प्राधिकरण किसानों को मुआवजे के नाम पर बहुत थोड़ी रकम देकर उनके साथ नाटक कर रहा है और दूसरी तरफ एडीएम कार्यालय में बिना रिश्वत दिए मुआवजा नहीं मिल रहा है। तीन घंटे तक कार्यालय का घेराव करने के बाद एडीएम बाहर निकल कर किसानों के बीच आए। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि बीस दिन के अंदर 150 करोड़ रुपये को गांवों में कैंप लगाकर बांटा जाएगा। गांवों में कैंप से पहले क्रमांकनुसार कार्यालय में सूची को चस्पा कर दिया जाएगा। जिस फाइल में कोई त्रुटि रहेगी तो उसे कैंप से चार दिन पहले कार्यालय में सूचना चस्पा करके किसान को निस्तारण का मौका दिया जाएगा। एडीएम के आश्वासन पर किसानों ने घेराव समाप्त किया। इस दौरान मनवीर भाटी, सूबेदार रमेश रावल, जिन्दर प्रधान, प्रमोद भाटी, अजब सिंह भाटी, अजय, मान सिंह, सतवीर शर्मा, भीम सिंह नागर, कपिल गुर्जर, पवन शर्मा, बलराज, कर्ण सिंह, विनोद भाटी, रणवीर यादव, बिजेंद्र, पप्पू भाटी, आनंद, अमित भाटी आदि किसान मौजूद थे।
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  • एफ-वन के टिकट पर होगा एक्सप्रेसवे टोल फ्री
    Story Update : Wednesday, October 10, 2012 2:00 AM
    ग्रेटर नोएडा। 26 अक्तूबर से शुरू होने वाली फॉर्मूला-वन रेस देखने आने वाले दर्शकों को जेपीएसआई यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल फ्री यात्रा की सुविधा दे सकता है। इसके लिए वाहन चालकों के पास इंडियन ग्रां.प्री. की टिकटें होनी चाहिए। जेपीएसआई के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि 26, 27 और 28 अक्तूबर को बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर देश की दूसरी फॉर्मूला-वन रेस का आयोजन किया जाएगा। एक्सप्रेसवे खुलने के बाद से इस रास्ते से जुड़े शहरों मसलन आगरा, मथुरा, अलीगढ़, फरीदाबाद, पलवल के लोगों के भी रेस देखने बीआईसी पहुंचने की उम्मीद है। यह भी माना जा रहा है कि रेस देखने आने वाले विदेशी आगरा, मथुरा, जयपुर जैसे पर्यटन स्थलों का रुख भी कर सकते हैं। ऐसे में योजना बनाई जा रही है कि 25 से 29 अक्तूबर तक जो भी वाहन चालक इंडियन ग्रां.प्री. का टिकट लिए होंगे और यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरेंगे, उनसे टोल नहीं वसूला जाएगा। इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है।
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  • एडीएम भूमि अध्याप्ति के दफ्तर पर किसानों का हंगामा
    Story Update : Wednesday, October 10, 2012 1:57 AM
    ग्रेटर नोएडा। किसान संघर्ष समिति ने मंगलवार को बीटा सेक्टर स्थित एडीएम (भूमि अध्याप्ति) के दफ्तर में हंगामा किया। किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण मुआवजा वितरण के लिए पैसा नहीं दे रहा है। कुछ पैसा पहुंचा भी है, उसमें अनियमितता बरती जा रही है। दलाल लोग किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए कमीशन की मांग करते हैं। किसान नेता मनवीर भाटी ने नेतृत्व में मायचा, जुनपत, बिसरख, घोड़ी बछे़ड़ा, सैनी, खैरपुर, तुस्याना, रोजा, एमनाबाद, अजयाबपुर, सिरसा, खानपुर आदि गांवों के किसानों ने दफ्तर की गैलरी में धरना दिया। उन्होंने दफ्तर का घेराव करके एडीएम हरिश्चंद्र से मौके पर आकर किसानों से बात करने की मांग की। ऐसा न होने पर दफ्तर में ताला जड़ने की चेतावनी भी दी। इसके बाद एडीएम ने किसानों से बात की और आश्वासन दिया कि उनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। वार्ता में तय किया गया कि गांवों में कैंप लगाकर मुआवजा बांटा जाएगा। फाइलों में क्रम संख्या डाली गई है, उसी के मुताबिक सूची चस्पा की जाएगी। फाइलों में अगर कोई विवाद है, तो उसके निस्तारण का मौका किसानों को दिया जाएगा। धरना-प्रदर्शन करने वालों में रमेश रावल, जिंदर, प्रमोद भाटी, अजब सिंह भाटी, अजय, मान सिंह, सतवीर शर्मा, भीम सिंह नागर, कपिल शर्मा, पवन शर्मा, बलराज, कर्ण सिंह, रणवीर यादव, विजेंद्र, अमित भाटी और पप्पू भाटी आदि शामिल रहे।
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  • हैबतपुर में आबादी की समस्या का निस्तारण


    Oct 10, 2012, 08.00AM IST
    एनबीटी न्यूज ॥ ग्रेटर नोएडा : अथॉरिटी की हाई पावर कमिटी की मीटिंग में मंगलवार को हैबतपुर गांव के किसानों की आबादी की समस्याओं का निस्तारण किया गया। कुछ मामलों का निस्तारण नहीं हो सका है। इसके लिए दोबारा मीटिंग होगी। एसीईओ सी. के. पांडे की अध्यक्षता में बुधवार को हाई पावर कमिटी की मीटिंग हुई। गांव के प्रदीप यादव ने बताया कि आबादी के करीब सात मामलों का निस्तारण हो गया है। करीब इतने ही मामलांे का निस्तारण नहीं हो सका। अथॉरिटी और किसानों के डॉक्युमेंट पूरी तरह से तैयार नहीं थे। अफसरों ने किसानों को डॉक्युमेंट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदारांे को भी कागजी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। एसीईओ ने बताया कि बुधवार को लुक्सर के किसानों के आबादी संबंधित समस्याआंे का निस्तारण किया जाएगा।
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  • संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : भूखंड आवंटित करने के बाद कंपनी न चालू करने वाले औद्योगिक आवंटियों पर प्राधिकरण ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। आवंटन निरस्त करने के लिए प्राधिकरण ने डेढ़ सौ आवंटियों को नोटिस जारी किया है। 15 दिन के अंदर नोटिस का जवाब नहीं देने पर आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 21 साल के दौरान 2245 औद्योगिक भूखंड आवंटित किया है, जिसमें सिर्फ 715 भूखंडों पर कंपनी चालू हो पाई है। इनमें 1530 भूखंड अब भी खाली पड़े हुए हैं। इनमें करीब 50 फीसद आवंटियों ने अब तक भूखंड की रजिस्ट्री भी नहीं कराई है। जिन लोगों ने रजिस्ट्री करा भी ली है, उन्होंने अब तक कंपनी चालू नहीं की है। खाली पड़े औद्योगिक भूखंडों को प्राधिकरण ने चिन्हित करना शुरू कर दिया है, जिसमें साढ़े तीन सौ भूखंड ऐसे निकले हैं। इनका आवंटन दस साल पूर्व हो चुका है। कंपनी चालू करने का समय पांच साल पूर्व निकल चुका है। प्राधिकरण ने ऐसे साढ़े तीन सौ आवंटियों को नोटिस जारी किया है। आवंटियों को पंद्रह दिन के अंदर लिखित में जवाब देने के लिए कहा गया है कि अभी तक कंपनी क्यों नहीं चालू की? पंद्रह दिन के अंदर जवाब न देने पर प्राधिकरण भूखंड का आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जबाव न देने पर भूखंड का जमा पैसा भी जब्त कर लिया जाएगा।

    कागजों में चालू कर दिया उद्योग

    कुछ औद्योगिक आवंटियों ने प्राधिकरण कर्मचारियों से मिलीभगत करके प्राधिकरण ने कंपनी चालू करने का कम्पलीशन सर्टिफिकेट हासिल कर लिया। जांच के दौरान पता चला कि मौके पर खाली भूखंड पड़ा हुआ है। प्राधिकरण के रिकार्ड में कंपनी चालू है। कागजों में कंपनी चालू करके दूसरे को ट्रांसफर भी कर दिया। ऐसे ही एक कंपनी खरीदने वाले ने जब प्राधिकरण में बैंक से ऋण लेने के लिए एनओसी के लिए आवेदन किया तब जाकर पता चला कि बिना कंपनी चालू किए बेच दिया गया। प्राधिकरण के संज्ञान में आया है कि इस दर्जनों कंपनियों सिर्फ कागजों में चल रही है। जिला उद्योग प्रबंधक की तरफ से इसका सत्यापन कर दिया गया कि कंपनी चालू है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी हरीश वर्मा ने जांच करने का निर्देश दिया है। कारखाना निदेशक को पत्र भेज कर तत्कालीन जिला उद्योग प्रबंधक के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कहा है। बिना कंपनी चालू हुए कंपलीशन जारी करने वाले प्राधिकरण अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू हो गई है।

    बिना सत्यापन के नहीं मिलेगा एनओसी

    बिना कंपनी चालू हुए एनओसी जारी करने पर प्राधिकरण ने सख्त कदम उठाया है। बुधवार को प्राधिकरण ने आदेश जारी कर दिया है कि उद्योग व नियोजन विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे कि कंपनी चालू हो गया है, इसके बाद एनओसी जारी किया जाएगा। सत्यापन करने वाले प्राधिकरण अधिकारियों को लिखित में जवाब भी देना होगा कि मौके पर सत्यापन करने के बाद कंपनी चालू करने का पत्र जारी किया किया।
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  • गांवों में कैंप लगाकर बांटा गया मुआवजा

    Oct 11, 2012, 08.00AM IST
    एक संवाददाता ॥ ग्रेटर नोएडा
    किसानों के हंगामे और एडीएम लैंड को दफ्तर में बंद किए जाने के बाद अब गांवांे में जाकर मुआवजे का चेक बांटना शुरू कर दिया गया है। एडीएम लैंड दफ्तर के बाबुओं की दो टीम बुधवार को घोड़ी-बछेड़ा और मायचा गांव पहुंची। दोनांे टीमों ने गांवों में ग्राम प्रधान की चौपाल पर कैंप लगाया। इसके बाद किसानों को घर से बुला बुलाकर मुआवजे के चेक बांटे।
    एडीएम लैंड हरीशचंद्र ने बताया अब किसानांे को दफ्तर में चेक नहीं दिए जाएंगे। गांवों में ही कैंप लगाकर मुआवजा बांटा जाएगा। एडीएम लैंड ने बताया कि जैसे-जैसे अथॉरिटी से पैसा मिलता रहेगा वैसे-वैसे किसानों को मुआवजा बांटा जाता रहेगा। उन्होंने बताया कि घोड़ी-बछेड़ा गांव के 72 किसानों को 10 करोड़ 13 लाख का मुआवजा दिया गया। मायचा गांव में 53 किसानों को 10 करोड़ के मुआवजे के चेक बांटे गए।
    किसान नेता मनवीर भाटी ने कहा कि यदि पहले से ही गांवांे मंे कैंप लगाकर एडीएम लैंड मुआवजा बांटते तो किसानांे को इतना हो हल्ला नहीं करना पड़ता। किसानों को अब अपने अधिकारों के लिए हर दफ्तर में लड़ाई लड़नी पड़ रही है। उन्हांेने मांग की है कि किसानों को मुआवजा फाइल के नंबर से और गांवांे में कैंप लगाकर बांटा जाए। इससे किसान लुटने से बच जाएगा और दलालों पर रोक लगाई जा सकेगी।
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  • गुड न्यूज : अथॉरिटी से मिला ग्रीन सिग्नल, शुरू में चलेंगे 25 रिक्शे

    Oct 12, 2012, 08.00AM IST
    एनबीटी न्यूज ॥ ग्रेटर नोएडा
    ग्रेटर नोएडा में रहने वाले लोगों को इस महीने के अंत तक बैटरी ऑपरेटेड ईको फ्रेंडली रिक्शे का तोहफा मिलेगा। शहर में रिक्शा सम्मान फाउंडेशन नामक एनजीओ चलवाएगी। अथॉरिटी से इसके लिए ग्रीन सिग्नल मिल चुका है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू में 25 रिक्शे चलाए जाएंगे। रिक्शा घर पर बुलाने के लिए कॉल सेंटर की सुविधा होगी। इसके अलावा प्री-पेड बूथ की भी व्यवस्था होगी। रिक्शे को चार्ज करने के लिए शुरू में दस से अधिक चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इनकी स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। रिक्शे में माइलोमीटर भी लगा होगा। सवारियों को मुफ्त में न्यूजपेपर पढ़ने को मिलेगा।
    फाउंडेशन के फाउंडर इरफान आलम ने बताया कि आईआईटी कानपुर और आईआईटी खड़गपुर के पास आउट स्टूडेंट्स के साथ मिलकर यह एनजीओ शुरू किया गया था। एनजीओ शुरू करने का मकसद देश भर के रिक्शा चालकांे के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि अथॉरिटी की पहल पर शहर में ईको फ्रेंडली रिक्शा चलाया जा रहा है। रिक्शे का नाम सम्मान पैडी कैब रखा गया है।
    रिक्शे की खासियत
    बैटरी फुल चार्ज होने के बाद रिक्शा 80 किलोमीटर तक 250 किलोग्राम भार उठाकर चल सकता है। किसी कारण से यात्री के गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही रिक्शे की बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है तो रिक्शा चालक पारंपरिक रिक्शा की तरह उसे खींच सकता है।
    शहर के लोगांे को होगा फायदा
    सम्मान पैडी कैब शुरू होने के साथ ही एक कॉल सेंटर बनाया जाएगा। कॉल सेंटर में फोन कर घर पर रिक्शा मंगाया जा सकेगा। इसके साथ ही शहर में जगह-जगह प्री-बेड बूथ भी खोले जाएंगे। अगर कोई अनजान व्यक्ति शहर में आता है तो प्री-पेड बूथ पर पर्ची कटाकर गंतव्य तक पहुंच सकता है। रिक्शे का किराया अथॉरिटी तय करेगी और यह सामान्य रिक्शा के किराए से अधिक नहीं होगा। बाद में प्रति किलोमीटर के हिसाब से रिक्शे का किराया तय किया जाएगा।
    रिक्शा चालकों का होगा ड्रेस कोड
    सम्मान पैडी कैब के रिक्शा चालक हाईटेक होंगे। दिल्ली के ऑटो चालकों की तरह पैडी कैब के चालकांे का ड्रेस कोड होगा। उन्हें पहचान पत्र दिया जाएगा। हर रिक्शा चालक को मोबाइल फोन दिया जाएगा। चालकों का बैंक में अकाउंट खुलवाया जाएगा। इसके अलावा उनका स्वास्थ्य और जीवन बीमा भी कराया जाएगा।
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  • डबल गेट पर अथॉरिटी की नजर टेढ़ी

    Oct 12, 2012, 08.00AM IST
    एनबीटी न्यूज॥ ग्रेटर नोएडा
    ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के बिल्डिंग बायलॉज को ठेंगा दिखाकर कमर्शल एरिया में शॉप के दोनों तरफ गेट खोलने वालों पर अथॉरिटी ने निगाहें टेढ़ी कर दी हैं। ऐसे सभी दुकानदारों को नोटिस जारी कर 3 दिन में एक तरफ का गेट बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। 3 दिन बाद अथॉरिटी फिर से चेकिंग अभियान चलाएगी। दोनो तरफ का गेट खुला होने पर अथॉरिटी उसे खुद से बंद करा देगी और पैसा दुकानदार से वसूल करेगी।
    ग्रेटर नोएडा के जगतफार्म मार्केट स्थित गामा शॉपिंग मॉल में कई दुकानदारों ने आगे और पीछे दोनों तरफ से गेट खोल दिए हैं। अथॉरिटी के बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक, कमर्शल एरिया में सिर्फ एक तरफ से दुकान का गेट खोला जा सकता है। नियमों का पालन न करने वाले दुकानदारों को गुरुवार से नोटिस जारी करने का काम शुरू कर दिया गया है। अथॉरिटी के ओएसडी योगेंद्र यादव ने बताया कि गुरुवार को जगतफार्म मार्केट में नियमों का उल्लंघन करने वाले कुछ दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया है। दुकानदारों को एक तरफ का गेट बंद करने के लिए 3 दिन का समय दिया गया है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो कार्रवाई होगी। इसके अलावा सभी मैनेजरों को अपने-अपने एरिया में नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। कहीं भी यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित दुकानदारों को नोटिस जारी किया जाएगा। बता दें कि कमर्शल एरिया में जहां शॉप के आगे और पीछे दोनों तरफ सड़क हैं, वहां अधिकतर दुकानदारों ने दोनो तरफ से गेट खोल दिए हैं।
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  • एफ वन : रफ्तार के रोमांच के लिए शानदार ट्रैक &

    अभिषेक सिंह, ग्रेटर नोएडा

    बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (बीआइसी) पर होने वाले 26, 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली फॉर्मूला वन एयरटेल इंडियन ग्रांड प्रिक्स की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। इस बार बीआइसी ट्रैक फॉर्मूला वन के ड्राइवरों के लिए और भी शानदार होगा। ट्रैक के कुछ कर्व (घुमाव) के साइज में बदलाव किया गया है। इससे ड्राइवरों को रफ्तार पकड़ने में और भी आसानी होगी। कर्व की चौड़ाई और ऊंचाई दोनों बढ़ाई गई है। इसके अतिरिक्त धूल के कणों से निपटने के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

    बीआइसी की लंबाई तकरीबन 5.14 किलोमीटर है। जिस पर करीब 16 टर्न हैं। इसमें से कर्व नंबर आठ व नौ पर चौड़ाई और ऊंचाई दोनों बढ़ाई गई है। चौड़ाई तकरीबन पांच से 15 मीटर तक बढ़ाया गया है, जबकि ऊंचाई 25 मिली मीटर कर दी गई है। इसके अतिरिक्त टर्न दो, तीन, सात और आठ पर एस्ट्रोटर्फ लाइनिंग दी गई है। इस परिर्वतन से फॉर्मला वन ड्राइवरों को काफी सहूलियत होगी। गत वर्ष कुछ ड्राइवरों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।

    इसके अलावा, पिछले वर्ष जेपी स्पो‌र्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड (जेपीएसआइ) के लिए फॉर्मूला वन टै्रक व आसपास धूल के कणों की भारी समस्या उत्पन्न हुई थी। इस बार इससे निपटने के लिए काफी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बीआइसी के बाहर और भीतर पेड़, पौधों और घास से हरियाली प्रदान की गई है। इससे काफी हद तक धूल की समस्या दूर कर ली गई है। इसके अतिरिक्त फॉर्मूला वन ट्रैक की सफाई की तैयारी है। इसकी शुरुआत 15 अक्टूबर से कर दी जाएगी, ताकि रेस के दौरान धूल कणों की वजह से कोई भी बाधा न पहुंच सके। जेपीएसआइ रेस ऑपरेशन के महाप्रबंधक फहरान बोहरा ने बताया कि एफ-वन ट्रैक से धूल कणों को दूर करने के लिए बहरीन देश से स्पेशल मैकेनाइज्ड डस्टर मशीन मंगाई गई है। जो एफ-वन ट्रैक पर छोटे से छोटे धूल कणों को साफ करेगा, जो एक सामान्य डस्टर मशीन से संभव नहीं है। धूल के कणों को लेकर पिछले वर्ष के रेस के दौरान काफी शिकायतें मिली थीं। इस बार फॉर्मूला वन ट्रैक ड्राइवरों के लिए और भी शानदार अनुभव वाला होगा।

    बीआइसी फॉर्मूला वन ट्रैक एक नजर

    दर्शक क्षमता - एक लाख

    सर्किट लेंथ - 05.14 किमी.

    पिट गैरेज - 41

    रेस डाइरेक्शन - क्लॉक वाइज

    स्पीड - 318 किमी. प्रति घंटा

    टर्न - 16
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  • घर का नक्शा चेंज करना पड़ेगा महंगा

    Oct 12, 2012, 08.00AM IST
    प्रमुख संवाददाता ॥ ग्रेटर नोएडा
    ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के बने बनाए मकानों या फ्लैटों के नक्शे में परिवर्तन अलॉटियों को महंगा पड़ सकता है। सेक्टर पाई-1 के चार अलॉटियों को अथॉरिटी ने नक्शे मंे परिवर्तन करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब 15 दिन में न देने वाले अलॉटियों का आवंटन रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा मकान तोड़कर दोबारा उसे बनाने वाले को मलबे के लिए मौके पर ही नोटिस थमाने का प्रावधान किया जा रहा है।
    अर्बन सर्विसेज डिपार्टमेंट के प्रभारी व ओएसडी योगेंद्र यादव ने बताया कि अथॉरिटी के बायलॉज के मुताबिक, बिना अथॉरिटी से अनुमति लिए बने बनाए फ्लैटों व मकानों के नक्शे में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। वर्क सर्कल के मैनेजरांे को यह जिम्मेदारी दी गई कि वह सभी सेक्टरों में जाकर यह चेक करें कि किसी अन्य सेक्टर में बने बनाए मकानों के नक्शे में परिवर्तन तो नहीं किया गया है।
    मलबे के लिए थमाया जाएगा नोटिस
    शहर में मकान बनाने वालों को अपने खर्चे पर मलबा हटवाना होगा। घर के आसपास मलबा छोड़ने या पार्क के निकट मलबा डालने पर अथॉरिटी का नोटिस मिल सकता है। अथॉरिटी अफसरांे ने बताया कि सभी वर्क सर्कल के मैनेजरांे को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे सेक्टरों में मकानों के कंस्ट्रक्शन पर नजर रखें। कहीं कोई कंस्ट्रक्शन होता है तो तत्काल अलॉटी को नोटिस थमाकर मलबा अपने खर्चे पर हटाने का निर्देश दिया जाएगा। अलॉटी मलबा नहीं हटाता है तो अथॉरिटी मलबे को हटाएगी, लेकिन इसके लिए अलॉटी को एक्स्ट्रा कीमत चुकानी होगी।
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