पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • 4 गांव के किसान रोकेंगे बिल्डर का काम


    चूहड़पुर में चार गांवों के किसानों ने शुक्रवार को पंचायत की। इसमें चाईफाई एक्सटेंशन में बिल्डरों के प्रोजेक्ट का काम रविवार को बंद कराने का फैसला लिया गया। किसानों ने यह भी तय किया है कि अब वे जमीन अधिग्रहण के खिलाफ होई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

    किसानों ने कहा कि अथॉरिटी ने 2003 में चूहड़पुर, लड़पुरा, अट्टापीर और भागमलपुरम के किसानों की जमीन अर्जेंसी क्लॉज लगाकर आईटी इंडस्ट्री और मनोरंजन के लिए अधिग्रहीत की थी। किसान नेता व एडवोकेट देशपाल भाटी ने कहा कि किसानों से अधिग्रहीत की गई जमीन को अथॉरिटी ने बिल्डरों को अलॉट कर दिया। बिल्डर जमीन पर टावर बना रहे हैं। इससे किसानों के बच्चों को रोजगार भी नहीं मिल पाया है।

    किसान महावीर सिंह ने कहा कि अथॉरिटी ने किसानों के साथ धोखा किया है। किसानों ने फैसला किया है कि वे बिल्डरों को जमीन से खदेड़कर ही दम लेंगे और उन्हें काम नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा कि बिल्डरों का काम बंद कराने के बाद किसान 18 अगस्त को हाई कोर्ट में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।

    -Dainik jagran
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  • चेक मिलने में देरी हुई तो किसानों ने किया हंगामा


    पतवाड़ी गांव के किसानों ने मुआवजे को लेकर एमडीएम (एलए) कार्यालय में हंगामा किया। हंगामा की सूचना मिलते ही प्राधिकरण के अधिकारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और किसानों को समझाकर शांत कराया।
    समझौता शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद किसानों को सेक्टर बीटा-एक स्थित एडीएम (एलए) कार्यालय से मुआवजे का चेक दिया जा रहा है। मुआवजे का चेक लेने के लिए एक किसान के साथ तीन-चार लोग पहुंच रहे हैं। चेक देने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी करने में पंद्रह से बीस मिनट लग जाता है। मुआवजे लेने के लिए किसानों को लाइन लगानी पड़ रही है। एक दिन में सौ से डेढ़ किसानों को चेक देने में रात के ग्यारह बज रहे हैं। बृहस्पतिवार की देर रात किसानों ने चेक मिलने में देरी होने पर हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पाकर प्राधिकरण के डीसीईओ पीसी गुप्ता व अखिलेश सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों को समझाया कि कागजी कार्रवाई करने में देर लग जाता है, इसलिए थोड़ा इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों को चेक देने के लिए देर रात कार्यालय खोला जा रहा है। अधिकारियों के समझाने पर किसान शांत हुए। बाद में कर्मचारियों की संख्या बढ़ा कर सभी किसानों को देर रात तक मुआवजा का चेक बांटा गया।


    -Dainik jagran
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  • अन्य गांवों के किसानों को मनाना टेढ़ी खीर

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पतवाड़ी गांव के किसानों को मनाने में भले ही कामयाब हो गया है, लेकिन नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों के किसानों को मनाने में काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे। इन गांवों के किसानों का कहना है कि वे पतवाड़ी गांव के समझौते की शर्तो पर नहीं मानेंगे। समझौते के लिए उनकी अपनी शर्त होंगी। किसानों का यह रुख प्राधिकरण के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। बिल्डर परियोजनाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।

    दरअसल, नोएडा एक्सटेंशन में प्राधिकरण ने पतवाड़ी व साबेरी के अलावा बिसरख, हैबतपुर, इटेड़ा, रोजा याकूबपुर, खैरपुर गुर्जर, चिपियाना आदि 11 गांवों की जमीन अधिग्रहीत की है। इन गांवों की जमीन पर करीब तीन दर्जन बिल्डर परियोजनाएं प्रस्तावित हैं अधिकतर बिल्डर फ्लैटों की बुकिंग कर चुके हैं और मौके पर काफी निर्माण भी हो चुका है। इन गांवों में बिल्डर योजनाएं प्रभावित हुई तो करीब 80 से 90 हजार निवेशकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ग्रेटर नोएडा के सीईओ रमा रमन का कहना है कि प्राधिकरण सभी गांवों के किसानों के साथ सहमति बनाने का प्रयास करेगा। फिलहाल पतवाड़ी गांव में किसानों के साथ हुए समझौते को हाईकोर्ट के समक्ष रखा गया है। कोर्ट का जो भी फैसला होगा, प्राधिकरण उसका पालन करेगा।

    हालांकि प्राधिकरण के सीईओ भले ही अन्य गांवों के किसानों के साथ समझौता करने का दंभ भर रहे हैं, लेकिन यह आसान भी नहीं है। कोर्ट के निर्णय के बाद किसानों का उत्साह दुगना है। अब वे अपनी शर्तो पर समझौता चाहते हैं। रोजा याकूबपुर के प्रधान अजय कुमार व किसान वरुण नागर का कहना है कि प्राधिकरण स तभी समझौता होगा, जब उनकी सभी मांगें मानी जाएंगी। यही बिसरख के प्रधान अजय भाटी का भी कहना है। उन्होंने कहा कि वे प्राधिकरण के साथ समझौता कर सकते हैं, लेकिन पतवाड़ी गांव के समझौते की शर्तो पर नहीं।

    -Dainik Jagran
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  • wait for 17th Aug
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  • 535 in Patwari accept relief, more in queue: Greater Noida to HC




    The Greater Noida Authority on Friday submitted the list of farmers of Patwari who have signed the affidavit and agreed to take the increased compensation, before the Allahabad High Court.


    The Authority said till Thursday night, 535 villagers of Patwari had claimed increased compensation. The officials said out of 90 petitioners, who have approached High Court against the acquisition, 62 have taken increased compensation and signed the affidavit for settlement.


    “There are other petitioners who are willing to accept our offer. We will give them their cheques. We believe more farmers would come to us as the new compensation is higher than what any other state is offering,” said P K Gupta, DCEO, Greater Noida Authority.


    Till 5 pm on Friday, more than 120 farmers had signed the affidavit and claimed the increased compensation, officials said.




    “Approximately, 700 farmers have claimed compensation (over two days) and more are waiting to sign the settlement clause with us. We want more farmers to accept the offer,” said a senior official of the Authority.


    The Authority’s office is likely to be open even on Raksha Bandhan and Independence Day.


    “We know that villagers are queuing up in large numbers. We will submit the affidavits signed by the villagers in the High Court on August 16. As there are more farmers who want to claim their money as promised under new settlement, we would be open on August 13 (Raksha Bandhan), August 14 (Sunday), and August 15,” said the official.



    The Authority expects 1,000 farmers, out of 1,400, to accept the new compensation package till August 16. On August 17, Allahabad High Court is expected to announce a verdict on the land acquisition in Patwari.

    -Indian Express
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  • मुआवजा तो ठीक, पर आबादी का मसला भी सुलझे

    पतवाड़ी गांव से नोएडा एक्सटेंशन को बचाने के लिए जमीन तैयार कर रहा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सफलता मिलती दिख रही है। बढ़ी दरों पर मुआवजा मिलने और आबादी का विवाद मिलने से किसान समझौते को राजी हो रहे हैं। ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में पतवाड़ी के किसानों ने समझौते को मानने की मंशा जाहिर की। बशर्ते उनकी आबादी का मसला भी सुलझा दिया जाए।

    हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन मामले में १२ अगस्त तक समझौते की राह तलाशने का मौका दिया था। इसकी पहल पतवाड़ी गांव से की गई। प्राधिकरण ने अब तक इस गांव के करीब आधे किसानों को ४६० रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से मुआवजे का चेक दे दिया है, जबकि इतने ही किसानों को बढ़ी दर का मुआवजा मिलना बाकी हैं। अब तक जिन किसानों को मुआवजा मिल चुका है और प्राधिकरण ने उनकी आबादी की जस की तस छोड़ने की मांग मान ली है, वे समझौते को राजी हैं। वे चाह रहे हैं कि इस समझौते से विवाद का खात्मा हो जाए। हालांकि कुछ किसान ऐसे भी मिले, जो आठ प्रतिशत आवासीय प्लॉट मिलने पर समझौते की बात कह रहे हैं। आबादी की जमीन की लीज कराने की बात पर भी किसान एकमत दिखे। उनका कहना है कि बिना अतिरिक्त शुल्क लिए ९९ साल की लीज पर प्राधिकरण आबादी की जमीन दे रहा है। किसान कहते हैं कि इतने अर्से रहने के बाद भला अपनी जमीन से हमें कौन हटा देगा।

    -Amar Ujala
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  • रक्षा बंधन के चलते कम संख्या में हुए समझौते


    नोएडा एक्सटेंशन के पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ समझौता करने लिए शनिवार को छुट्टी के दिन भी प्राधिकरण कार्यालय खोला गया। राखी के त्योहार के चलते किसान कम संख्या में प्राधिकरण पहुंचे। सिर्फ एक दर्जन किसानों ने मुआवजा का चेक उठाकर शपथ पत्र जमा किए। रविवार व सोमवार को भी प्राधिकरण कार्यालय खोला जाएगा।

    पतवाड़ी गांव के 530 किसानों के समझौते के शपथ पत्र प्राधिकरण हाईकोर्ट में जमा कर चुका है। बाकी किसानों के साथ समझौते के प्रयास जारी है। प्राधिकरण अधिकारी दावा कर रहे हैं कि कोर्ट में 17 अगस्त को होने वाली सुनवाई से पहले गांव के सभी किसानों के साथ समझौता हो जाएगा। गांव के अभी 400 से अधिक किसानों के साथ समझौता होना बाकी है। सूत्रों के अनुसार कुछ किसानों का आबादी विस्थापन को लेकर प्राधिकरण के साथ विवाद है। ये किसान अन्य गांवों के रहने वाले हैं। प्राधिकरण इन किसानों को आबादी का उतना लाभ नहीं देना चाहता हैं, जितना गांव के मूल किसानों को दिया गया है। हालांकि इन्हें मुआवजा वृद्धि का पूरा लाभ दिया गया है। ये किसान चाहते हैं कि शपथ पत्र जमा करने से पहले प्राधिकरण उनकी आबादी की समस्या निस्तारित कर दे। शनिवार को सीईओ रमा रमन ने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ बैठक कर बाकी किसानों को मनाने के प्रयासों पर मंथन किया। डीसीईओ पीसी गुप्ता ने बताया कि रविवार व सोमवार को भी प्राधिकरण बंद नहीं रहेगा। किसान सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक मुआवजे के चेक उठाकर शपथ पत्र दाखिल कर सकते हैं।


    -Dainik Jagran

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  • GNIDA files affidavit, seeks more time

    The Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA) filed an affidavit in the Allahabad High Court on Friday on the Patwari settlement and sought more time for settlement with all farmers in Patwari village and awarding compensation to them.

    According to the affidavit, the authority had reached a settlement with 530 farmers in Patwari till Thursday that includes 56 of the 91 petitioners from the village. GNIDA has sought more time to reach a settlement with other farmers, as the process is extremely time-consuming: It has to hear each farmer and verify and reconcile his land records.

    On July 26, while hearing a petition from a farmer in Patwari, the Allahabad High Court had directed the Greater Noida Authority and the farmers to find an out-of-court settlement in the land acquisition row by August 12. The court will hear the case on August 17 with other cases where land was acquired using the urgency clause.

    Over 650 farmers out of the 1,400 eligible had taken higher compensation till Thursday.

    An estimated 80 per cent of the farmers had accepted compensation till Friday. Patwari villagers had initially rejected the settlement reached last Saturday, which provided a 65 per cent rise in compensation for land, two per cent more developed land in lieu of their acquired land and resolution of all abadi land-related issues.

    The settlement with Patwari farmers could be the basis for settlements with farmers in other 10 other villages in Greater Noida, which constitutes an affordable housing hub called Noida Extension. The Allahabad High Court had quashed land acquisition in Sahberi and Patwari villages and petitions from other villages are pending in the court.

    The land row has derailed projects in Noida Extension, where 225,000 apartments are being constructed at an average price of Rs 20 lakh. Around 100,000 of these units have been sold to buyers, who have paid, on an average, 30-40 per cent of the cost of these flats though financial institutions have suspended disbursements of loans

    GNIDA files affidavit, seeks more time
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  • Another village in Greater Noida challenges land acquisition in HC


    Farmers of Ghodi Bachheda village, where six persons were killed in a clash between villagers and the police, on Saturday, observed the third anniversary of the agitation and claimed that the abadi land issue was still unresolved. Many farmers moved the Allahabad high court early this month, challenging the land acquisition by the Greater Noida Authority.
    “Though three years have passed, our abadi land issue is still unresolved. Besides, we have not yet been given the developed land as per the Acquisition Act,” said a farmer.

    “Around 350 abadi land cases are still pending. The police had lodged FIR against 1,100 farmers. The cases are still not withdrawn, though the government officials had promised to do so,” Kisan Sansh Samiti representative Ramesh Rawal said.

    On August 13, 2008, six farmers were killed and over a dozen people, including some policemen, were injured in a police firing outside the authority office.

    The state government had pacified the farmers by giving additional compensation of Rs 310 per sqm to the farmers of Ghodi Bachheda whose land was acquired by the authority.

    The deceased farmers’ kin were also given a compensation of Rs 21 lakh each. Besides, the authority had given employment to one member of each family of the six killed in the violence.

    In 2006, the authority acquired 680 hectare land in Ghodi Bachheda. The farmers were given a compensation of Rs 339 per sqm. The authority had promised that they would be given hiked compensation if the government took any such decision.

    -HT
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  • किसान 17 के बाद तैयार करेंगे आंदोलन की रणनीति


    नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी में समझौता होने के बाद किसानों का आंदोलन अभी थमा नहीं है। अन्य गांव के किसान 17 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे। कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए किसानों ने पूरी तैयार कर ली है। उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट का फैसला किसानों के हित में रहेगा।
    नोएडा एक्सटेंशन के 11 गांवों के अलावा अन्य गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। पतवाड़ी गांव के किसानों का प्राधिकरण से समझौता हो गया है। इस समझौते से अन्य गांवों के किसान खुश नहीं हैं। उनमें इस बात की ज्यादा नाराजगी है कि प्राधिकरण के अधिकारियों ने पतवाड़ी के अलावा अन्य गांवों में जाकर किसानों से वार्ता नहीं की। समझौते पर बातचीत करने के लिए किसानों से अपनी कमेटी गठित करने के लिए कहा था। समझौते पर प्राधिकरण से वार्ता करने के लिए उन गांव के किसानों ने कमेटी भी गठित कर लिया था। पतवाड़ी से समझौता होते ही प्राधिकरण उनको भूल गया है। जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन के प्रवक्ता डा.रूपेश वर्मा का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिए सभी गांवों के किसानों को एकजुट किया जा रहा है। हर गांव के एक-एक किसान को मिलाकर कमेटियां गठित की जा रही हैं। 14 अगस्त को गुर्जर शोध संस्थान में बैठक कर आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। मनवीर भाटी का कहना है कि 17 अगस्त को हाईकोर्ट के फैसले का किसान इंतजार करेंगे, इसके बाद आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। अन्य गांवों के किसान पतवाड़ी की तर्ज पर प्राधिकरण से फैसला नहीं करेंगे। किसानों को अपनी जमीन का उचित कीमत चाहिए।

    -Dainik Jagran
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  • साकीपुर के किसान भी दायर करेंगे याचिका


    नोएडा से सटे साकीपुर गांव के किसानों ने भी जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय किया है। अपने वकील के साथ किसान शनिवार को इलाहाबाद रवाना हो गए हैं। गांव के 22 किसान 16 अगस्त को याचिका दायर करेंगे। इन किसानों की 34 हेक्टेयर जमीन अथॉरिटी ने अधिग्रहीत की है।

    किसानों का कहना है कि 2005 में इंडस्ट्री के नाम पर अर्जेंसी क्लॉज लगाकर अथॉरिटी ने जमीन का अधिग्रहण किया था लेकिन बाद में जमीन बिल्डरों को दे दी गई। इसके अलावा अथॉरिटी ने दो सेक्टरों में रेजिडेंशल प्लॉटों की स्कीम के तहत प्लॉट आवंटित किए हैं। किसानों का कहना है कि अब भी गांव की 60 पर्सेंट जमीन खाली पड़ी है। अथॉरिटी ने कुल 143.280 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की है। मुकेश रावल ने बताया कि 16 अगस्त को कोर्ट खुलते ही याचिका दायर कर जमीन अधिग्रहण निरस्त करने की गुहार लगाई जाएगी।

    -navbharat times
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  • जारी रहा चेक बांटने का सिलसिला


    ग्रेटर नोएडा : रक्षाबंधन के दिन भी ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और पतवाड़ी गांव के किसानों के बीच समझौते का सिलसिला जारी रहा। मुआवजे का चेक लेने के लिए एडीएम (एलए) ऑफिस में किसानों की भीड़ लगी रही। अब तक गांव के 650 खातेदारों के साथ अथॉरिटी का समझौता हो गया है। किसानों से समझौते के लिए रविवार को भी अथॉरिटी और एडीएम एलए ऑफिस खुले रहेंगे। अथॉरिटी अफसरों ने बताया कि शुक्रवार तक 534 खातेदारांे के साथ समझौता हुआ था। शनिवार को यह बढ़कर 650 हो गया है। साथ ही हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 64 किसानों से समझौता हो गया है। अन्य किसानांे से समझौते के लिए रविवार को भी अथॉरिटी और एडीएम ऑफिस खुला रहेगा। शनिवार तक करीब 1250 किसानों ने मुआवजा उठा लिया। अफसरों को उम्मीद है कि 16 अगस्त तक गांव के सभी किसानांे से समझौता हो जाएगा और उन्हें बढ़ा हुआ मुआवजा दे दिया जाएगा।


    _navbharat times
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  • Holidays are working days for GNIDA babus


    The Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA) is racing against the time.

    Despite Saturday being a holiday, the office of the additional district magistrate (land and acquisition) was functioning, along with the main office, for the Patwari farmers who are ready to take the increased compensation of Rs 1,400 per sqm.

    The ADM (L&A) office will remain open on Sunday and Monday too, as the authority wants to give cheques to the farmers before August 17, the date on which the Allahabad high court will hear all acquisition-related matters from Noida Extension.

    “Besides the authority office, the L&A office was open today. They will remain open on Sunday and Monday too. Before August 17, the authority wants to hand over cheques to the maximum number of farmers,” said ADM (L&A) Harnam Singh.

    “Today being Raksha Bandhan, a few farmers came here to submit their applications. About 300 more farmers are expected in the next two days,” said Singh.

    “Around 650 farmers have received their cheques till date,” he added.
    “Of the 91 farmers who had filed petitions in the high court, 55 have signed the Patwari pact,” said an authority officer.

    Last Saturday, the GNIDA had struck a deal with Patwari village, hiking the compensation from Rs 850 per sqm to Rs 1,400 per sqm.

    Of the 1,400-odd farmers, 1,000 are said to have signed the pact and most of them have accepted the increased compensation. Courts have set aside land acquisition in Patwari and Shahberi villages, affecting 26,500 homebuyers.

    Other villages have also moved court.
    “The problem is with the farmers who have land in Patwari, but live in other villages. They too want abadi land benefit, while GNIDA officials have denied such benefits to them,” said Reshpal Yadav, Patwari village pradhan.

    -HT
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  • साकीपुर के किसान भी गए हाईकोर्ट

    औद्योगिक नगरी में उद्योग लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण करके बिल्डर्स को देने के खिलाफ साकीपुर के २२ किसानों का दल हाईकोर्ट में रिट दायर करने के लिए रवाना हो गया। उनका कहना है कि गुमराह करके जमीन अधिग्रहण की गई। बिल्डर्स को जमीन देकर प्राधिकरण ने हेराफेरी की है।

    अधिवक्ता मुकेश रावल ने बताया कि २००५ में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अर्जेंसी क्लाज लगाकर उद्योग स्थापित करने के लिए साकीपुर की जमीन को अधिग्रहण किया था। किसानों को केवल ३२२ रुपये वर्ग गज की दर से मुआवजा दिया गया। लेकिन, प्राधिकरण ने इस जमीन पर एक भी उद्योग स्थापित नहीं किया है। किसान की जमीन को अधिग्रहण करके कई बिल्डर्स को आवंटित कर दिया गया है। प्राधिकरण ने १०५०० रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से आवंटित किया है। किसानों को बहुत कम दर पर मुआवजा देकर जबरन जमीन को अधिग्रहण कर लिया गया। किसान को अपनी आपत्ति दायर करने का समय नहीं दिया गया। कई बार साकीपुर के किसानों ने आंदोलन किया। लेकिन, प्रशासन और प्राधिकरण द्वारा उनके आंदोलन को हर बाद दबा दिया गया। प्रशासन और प्रदेश सरकार से न्याय नहीं मिलने पर शनिवार को २२ किसानों का एक दल इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए रवाना हो गया है।

    -Amar Ujala
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  • अब कोर्ट के फैसले का इंतजार

    प्राधिकरण ने पतवाड़ी के किसानों के साथ समझौता करके मुआवजा दर की एक सीमा रेखा खींच दी है। यानि कुल १४०० रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा किसानों को दिया गया। फिलहाल पुश्तैनी के लिए १०५० और गैरपुश्तैनी किसान के लिए ९१५ रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा देने की हरी झंडी पिछले बोर्ड बैठक में दी गई थी। फिलहाल, किसान कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट के आदेश पर किसानों के साथ समझौता किया। कोर्ट ने कोई सीमा रेखा भी तय नहीं की थी। यह सीमा तो पतवाड़ी गांव के किसानों और प्राधिकरण के बीच ही तय हुई है। आंदोलन तो बिसरख, हैबतपुर, रोजा याकूबपुर, इटैड़ा, खैरपुर गुर्जर समेत अन्य गांवों में भी चल रहा है। किसानों ने फिलहाल आंदोलन थाम रखा है। फिलहाल, इंतजार १७ अगस्त को कोर्ट के फैसले के बाद प्राधिकरण के अगले कदम का है। पतवाड़ी के अलावा अन्य गांवों के किसान मानकर चल रहे हैं कि उन्हें भी इतना ही लाभ मिलेगा। यदि प्राधिकरण ऐसा नहीं करता है तो किसान किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं होंगे। प्राधिकरण अधिकारी भी मानते हैं कि वह पीछे कदम खींच नहीं सकते हैं। विवादों को सुलझाना है तो समझौतावादी रुख ही अपनाना होगा। प्राधिकरण की मजबूरी यह है कि बिल्डरों को जमीन आवंटित की जा चुकी है और करीब ढाई लाख निवेशक एवं अन्य हजारों लोग प्रभावित होंगे। यदि सभी सड़क पर उतर आए तो इनको संभालना भी बहुत मुश्किल होगा।

    -Amar Ujala
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