पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
Read more
Reply
16355 Replies
Sort by :Filter by :
  • dear members

    Please dont make a thread to discuss specif project(s).
    CommentQuote
  • 1991 से 2002 तक के आवंटियों को भी देना पड़ेगा पैसा

    नोएडा के सरथलपुर गांव में औद्योगिक विकास के नाम पर अधिग्रहीत भूमि बिल्डर्स को सौंपने के खिलाफ वहां के किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। अधिग्रहण वर्ष 2000 में किया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका भूलेराम और करीब अस्सी किसानों की ओर से दाखिल की गई है। याची के अधिवक्ता शिवाकांत मिश्र के मुताबिक सरकार ने वर्ष 2000 में नोएडा के सेक्टर 74 में स्थित सरथल खंजरपुर गांव में 425.1875 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण औद्योगिक विकास के नाम पर किया था। अधिग्रहण के लिए अर्जेंस क्लाज का उपयोग किया गया। किसानों की आपत्तियों को नहीं सुना गया। अब सरकार ने यह जमीन बिल्डर्स को दे दी है। याचिका पर तीन सप्ताह में राज्य सरकार का जवाब आने के बाद सुनवाई होगी।
    कई घंटे की मैराथन बैठक में लिया फैसला
    ग्रेटर नोएडा। मंगलवार को सीईओ/चेयरमैन रमा रमन की अगुवाई में प्राधिकरण बोर्ड रूम में दर्जनों बिल्डरों के साथ बैठक हुई। नोएडा एक्सटेंशन के बिल्डरों ने तर्क किया कि अभी वह प्राधिकरण को कुल आवंटन का पांच फीसदी भुगतान कर चुके हैं। अब 2015 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से और भुगतान की कैसे व्यवस्था होगी। प्राधिकरण ने भी साफ कहा कि वह अपने लिए नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए प्राधिकरण को पैसों की जरूरत है। इसलिए आवंटियों पर भी भार डाला जाएगा। चूंकि समस्या का समाधान प्राधिकरण और बिल्डर चाहते हैं, इसलिए भारी मन से बिल्डरों ने फिलहाल हामी भर दी।
    CommentQuote
  • कल सांसद से मिलेंगे एक्सटेंशन के बायर्स

    नोएडा एक्सटेंशन के बायर्स कल सुबह दस बजे क्षेत्रीय सांसद से मिलने जाएंगे। वे फ्लैटों की बकाया धनराशि पर ब्याज सहित भुगतान करने को लेकर बिल्डरों से मिल रही चेतावनी से सांसद को अवगत कराएंगे।
    नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स मेंबर्स एसोसिएशन (नेफोमा) के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि सांसद ने 24 नवंबर को सुबह दस बजे अपने दिल्ली स्थित आवास पर मिलने का समय दिया है। नेफोमा से जुड़े सभी बायर्स सांसद से मिलकर अपनी समस्या से अवगत कराएंगे और सांसद को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण व बिल्डरों से मिलकर इन समस्याओं का हल निकालने के लिए भी राजी करेंगे। उन्होंने बताया कि एक्सटेंशन के बिल्डर फ्लैट बायर्स से ब्याज सहित भुगतान के लिए दबाव डाल रहे हैं। कुछ बिल्डर दस फीसदी तो कुछ 30 फीसदी भुगतान एक सप्ताह में करने की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसा न करने फ्लैट का आवंटन रद्द करने और अब तक जमा धनराशि में कटौती कर रिफंड करने की भी धमकी दे रहे हैं। बिल्डर बायर्स को अपने दफ्तर में बुलाकर दबाव डाल रहे हैं।
    वहीं, 24 व 25 नवंबर को दिल्ली में बिल्डरों की प्रस्तावित सेमिनार में भी नोएडा एक्सटेंशन का मुद्दा छाया रहेगा। बिल्डरों की संस्था क्रेडाई के एनसीआर प्रमुख अनिल शर्मा ने बताया कि प्रस्तावित सेमिनार में कोर्ट के फैसले के बाद नोएडा एक्सटेंशन में उपजी परिस्थितियों में बिल्डरों के सामने आई चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। सेमिनार में फ्लैटों के बायर्स से शेष धनराशि का भुगतान प्राप्त करने के लिए बीच का रास्ता निकाले जाने पर भी चर्चा होगी। उन्होंने इसमें कोई ठोस फैसला लिए जाने की उम्मीद जताई।

    ग्रेटर नोएडा। हाईटेक शहर के आवंटियों के लिए अच्छी खबर नहीं है। अगर वे आवंटी खुश हो रहे हैं जिनका नंबर अतिरिक्त भुगतान करने में नहीं आया है, तो वे भी तैयार रहें। क्योंकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के अधिग्रहीत गांव 58 में से 39 गांवों का फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर चुका है। इसके अलावा शेष बचे किसान भी लगातार याचिकाएं डाल रहे हैं। यदि कोर्ट ने एक समान फैसला रखा तो अन्य गांवों की जमीन पर आवंटियों को अतिरिक्त भुगतान करना होगा। प्राधिकरण स्थापना 1991 से लेकर 2011 तक के जितने आवंटी हैं, सभी पर अतिरिक्त भार डाला जा सकता है। चूंकि प्राधिकरण पिछले 2003 से लेकर 2011 तक के आवंटियों पर 2015 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से पहले ही भार डालने का फैसला ले चुका है।
    दरअसल, प्राधिकरण ने अभी तक कुल 58 गांव की जमीन को अधिग्रहीत करके उस पर करीब 45 हजार आवंटन किए हैं। इसमें आवासीय, उद्योग, संस्थागत और कामर्शियल आवंटन शामिल हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 2003 से लेकर 2011 तक जिन गांवों की जमीन ली गई थी, वही किसान कोर्ट गए थे। इसलिए कोर्ट ने फैसला कर दिया। लेकिन फैसले में यह नहीं कहा गया है कि 2003 ही सीमा रहेगी, इससे पहले के किसान की बात नहीं सुनी जाएगी।
    जब कोर्ट का फैसला हो गया तो उसके बाद से 1991 से लेकर शेष बचे किसान भी याचिकाएं डाल रहे हैं। अगर कोर्ट ने पहले जैसा ही फैसला रखा तो फिर प्राधिकरण ने अब तक जितनी जमीन आवंटित की है, उनसे अतिरिक्त पैसा लेना होगा। प्राधिकरण ने मान लिया है कि जिस गांव की जमीन पर जिनका आवंटन होगा, किसानों का अतिरिक्त मुआवजा उन्हीं से लिया जाएगा।
    CommentQuote
  • Originally Posted by KABTAK
    which tower/building within gaur city is best as of today?


    Hi,

    You can look for GC6 and GC1. both of them are having good location in gaur city 1.

    flats facing internal road are good in GC1
    For GC 6 you can look for any side one side is internal township road and other is stadium..so in short GC6 is best located in Gaurcity1 and no. 2 is GC 1.

    GC6 is not completly launched so you will get some gud option there.....not sure on GC1 availabilty..as all the tower are already launched way back in 2010.

    i know all this as i my brother is having a flat here.
    CommentQuote
  • हाईकोर्ट में सुनवाई पर टिकीं निगाहें


    ग्रेटर नोएडा: नोएडा एक्सटेंशन का फैसला हाईकोर्ट से आने के बाद अन्य गांवों के किसान भी अब कोर्ट की तरफ रुख करने लगे हैं। हाईकोर्ट में करीब साढ़े चार सौ याचिकाएं और दाखिल हो चुकी है। एक्सटेंशन की तर्ज पर अगर इन गांवों पर भी फैसला आया, तो प्राधिकरण पर भार और बढ़ जाएगा।

    गौरतलब है कि नोएडा एक्सटेंशन समेत 39 गांवों के किसानों को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद अब शेष गांव के किसान भी अपने को ठगा महसूस करने लगे हैं। अन्य गांवों के किसानों को उम्मीद बढ़ी है कि अगर उन्होंने हाईकोर्ट में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर की, तो उन्हें भी 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसदी विकसित भूखंड मिल सकता है। 21 सितंबर को हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद अन्य गांवों की तरफ से साढ़े चार सौ याचिकाएं दायर हो चुकी है। कोर्ट जाने का सिलसिला जारी है। कोर्ट में अन्य गांवों की सुनवाई भी शुरू हो गई है। 1991 से लेकर 2011 तक प्राधिकरण 58 गांवों की जमीन का अधिग्रहण कर चुका है। इसमें 39 गांवों का फैसला आ चुका है। अब तक जिन गांवों का फैसला आया है उनमें 2003 से लेकर 2011 तक अधिग्रहीत गांवों की जमीन का मामला शामिल है। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नोएडा एक्सटेंशन की तर्ज पर अगर अन्य गांवों का भी फैसला आया, तो निर्णय लेना बड़ा ही मुश्किल भरा कदम होगा। प्राधिकरण के सामने सिर्फ एक विकल्प बचेगा कि 1991 से लेकर अब तक के सभी आवंटियों पर अतिरिक्त पैसे का भार डाला जाएगा। कोर्ट ने अपने फैसले में यह निर्धारित नहीं किया है कि कब से कब तक के किसानों को लाभ दिया जाए। अगर कोर्ट ने अन्य याचिकाओं की सुनवाई के दौरान निर्धारित कर दिया कि किस वर्ष तक के किसानों की बात सुनी जाएगी तो इससे प्राधिकरण, बिल्डरों व आवंटियों को राहत मिल सकती है।

    -D. Jagran
    CommentQuote
  • update...............
    Attachments:
    CommentQuote
  • दो और गांव के किसानों को भी जल्द मिलेगा मुआवजा


    ग्रेटर नोएडा :रोजा याकूबपुर व मायचा गांव के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण हैबतपुर व इटैड़ा गांव के किसानों को बढ़ी दरों पर मुआवजा बांटेगा। अब तक 39 गांवों के एक हजार से अधिक किसान मुआवजा लेने के लिए फाइल जमा कर चुके हैं। प्राधिकरण का कहना है कि मुआवजे के लिए धन की व्यवस्था की जा रही है। दो बैंकों से कर्ज लेने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कर्ज मिलते ही एडीएम एलए आफिस को राशि भेज दी जाएगी।

    अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि प्राधिकरण ने बिल्डरों को मूलधन का पांच प्रतिशत हिस्सा नवंबर के अंतिम सप्ताह तक जमा करने के निर्देश दिए थे। इससे प्राधिकरण को करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये मिल जाएंगे, लेकिन अभी तक मात्र डेढ़ सौ करोड़ रुपये ही बिल्डरों ने जमा कराए हैं। इसमें से प्राधिकरण पचास करोड़ रुपये रोजा याकूबपुर व मायचा गांव के किसानों को बांट चुका है। एडीएम एलए आफिस में करीब सौ करोड़ रुपये जमा है। इस राशि में से हैबतपुर व इटेड़ा गांव के किसानों को भी मुआवजे के चेक दिए जाएंगे। प्राधिकरण ने बृहस्पतिवार को नामोली, चूहड़पुर खादर, सैनी, रायपुर बांगर, खानपुर व मुरस्दपुर गांव में शिविर लगाकर मुआवजे की फाइल तैयार कराई। एडीएम एलए हरनाम सिंह ने बताया कि शुक्रवार को बादलपुर, रसूलपुर राय व कासना गांव में शिविर लगाकर फाइल तैयार कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि किसान अधूरी फाइल जमा कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जल्दबाजी में अधूरे अभिलेखों के साथ फाइल जमा न करे, इससे उन्हें मुआवजे का चेक मिलने में देरी हो सकती है। फाइल के साथ सीसी फार्म पर दो फोटो, हस्ताक्षर, रसीदी टिकट, बैंक एकाउंट नंबर, बैंक प्रबंधक द्वारा सत्यापित हस्ताक्षर, खसरा खतौनी की नकल व शपथ पत्र भी साथ लगाना होगा।

    -D.Jagran
    CommentQuote
  • किसान महापंचायत चार को छोटी मिलक में


    ग्रेटर नोएडा: किसान अपनी मांगों को लेकर 4 दिसंबर को नोएडा एक्सटेंशन के गांव छोटी मिलक में महापंचायत करेंगे। किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण हाईकोर्ट के फैसले पर पूरी तरह अमल नहीं कर रहा है। किसानों को गुमराह कर समझौते के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका विरोध होगा। प्राधिकरण को पहले किसानों की आबादी, बैकलीज, रोजगार व विकास कार्यो की मांगों को पूरा करना होगा, तभी किसान समझौते पर अपनी सहमति देंगे।

    किसानों ने बृहस्पतिवार को जलालपुर गांव में बैठक की। इसमें कई गांवों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। किसानों का कहना है कि प्राधिकरण उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट चुनौती देने से रोक रहा है। कई गांवों में आबादी की समस्या निस्तारित होना बाकी है। बैकलीज की शर्तो को हटाने के लिए ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। किसानों का कहना है कि यदि बैकलीज की शर्ते को नहीं हटाया गया तो वे आबादी की जमीन पर अपनी मर्जी से मकान तक नहीं बना पाएंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि किसानों को जागरूक करने के लिए 4 दिसंबर को छोटी मिलक गांव में महापंचायत होगी। इसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

    -D.Jagran
    CommentQuote
  • क्यामपुर के किसानों ने भी मांगा मुआवजा

    ग्रेटर नोएडा, सं : क्यामपुर गांव के किसानों ने बृहस्पतिवार को पंचायत कर प्राधिकरण ने बढ़ी दरों पर मुआवजा मांगा। किसानों का कहना है कि बिरौंडा व क्यामपुर गांव में एक साथ 2002 में अधिग्रहण किया गया था। दोनों गांवों के किसानों को समान मुआवजा राशि 203 रुपये प्रति वर्ग गज दिया गया। प्राधिकरण बिरौंडा गांव के किसानों को 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा दे रहा है, लेकिन क्यामपुर गांव के किसानों को बढ़ी दरों का लाभ नहीं दिया गया है।

    इस फैसले के खिलाफ गांव के किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। इस पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है। प्राधिकरण को पत्र देकर बढ़ी दरों की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएंगे।

    -D.Jagran
    CommentQuote
  • छपरौली गांव में भी दिए पांच फीसदी के प्लॉट


    नोएडा: प्राधिकरण की तरफ से किसानों को दिए गए आश्वासन अब जमीनी हकीकत के रूप में सामने आने शुरू हो गए। पूर्व में हुए समझौते के तहत प्राधिकरण ने बृहस्पतिवार को भी एक गांव के 83 कास्तकारों को उनकी अर्जित भूमि के एवज में पांच प्रतिशत के आवासीय भूखंड का तोहफा दे दिया। जल्द ही इन्हें प्राधिकरण आबादी बैकलीज करने का भी प्रस्ताव दे देगा। साथ ही गांव में करीब पांच करोड़ रुपये की विकास योजनाओं को भी एक माह के भीतर शुरू करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

    ज्ञात हो कि प्राधिकरण ने वर्ष 1997 के बाद जिन किसानों की भूमि अर्जित की है, उन्हें कुल अर्जित भूमि के पांच प्रतिशत के बराबर आवासीय भूखंड का लाभ देता है। लंबे समय से क्षेत्र के किसानों को लाभ नहीं मिला था। साथ ही प्राधिकरण ने पूर्व में भूमि अर्जित करने में जो मनमानी बरती, उसमें किसानों की आबादी भी अर्जित दर्शा दी गई। लिहाजा किसान काफी समय से पांच प्रतिशत के प्लॉट और अपनी आबादी नियमित कराने की मांग कर रहे थे। पूर्व में हुए किसान आंदोलन की भी यही मुख्य वजह थी। इस पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौता कर उन्हें जल्द ही दोनों लाभ देने का आश्वासन दिया था।

    इसकी शुरुआत प्राधिकरण ने पिछले सप्ताह मंगलवार (15 नवंबर 2011) को कर दी थी। पहले दिन प्राधिकरण ने पर्थला-खंजरपुर गांव में किसानों को करीब 70 हजार वर्ग मीटर भूमि का तोहफा दिया था। इसमें से 85 किसानों को पांच प्रतिशत के एवज में सेक्टर 121, 33 व 73 में कुल 111 आवासीय भूखंड आवंटित किए गए थे। इनका कुल क्षेत्रफल करीब 27 हजार वर्ग मीटर था। साथ ही गांव के 45 किसानों को कुल 42715 वर्ग मीटर भूमि लीज बैक करने के लिए भी प्रस्ताव पत्र दिया गया था।

    इसी तर्ज पर बृहस्पतिवार को भी प्राधिकरण ने छपरौली गांव के किसानों को लाभांवित किया। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रमा रमण खुद अधिकारियों संग छपरौली गांव में गए। यहां उन्होंने गांव के 83 कास्तकारों को पांच प्रतिशत के आवासीय भूखंड के आवंटन पत्र दिए। सभी भूखंड सेक्टर-144 में हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 15967.55 वर्ग मीटर है। साथ ही किसानों को आश्वासन दिया गया कि कुछ दिनों के अंदर ही उन्हें आबादी बैकलीज करने का भी प्रस्ताव दे दिया जाएगा। इस मौके पर गांव के किसानों ने सीईओ और उनके साथ मौजूद अधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया।

    इस मौके पर सीईओ ने गांव वालों की भी समस्याएं सुनीं। उन्होंने नाली व सीसी रोड का काम पूरा करने के लिए 108 लाख रुपये, बारातघर के लिए 184 लाख रुपये, प्राइमरी स्कूल एवं जच्चा-बच्चा केंद्र की मरम्मत और चारदिवारी के लिए 21 लाख व मुख्य रोड के नाले के निर्माण के लिए 162 लाख रुपये का बजट मंजूर कर दिया। सीईओ ने सीवर संबंधी समस्या के निदान के लिए भी जल एवं सीवर विभाग का तत्काल सर्वे करके कार्य योजना बना सीवर की उचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया। उन्होंने मुख्य मार्ग का बजट व निविदा तैयार कर एक माह में काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

    -D.jagran
    CommentQuote
  • निवेशक करेंगे भूख हड़ताल!

    नोएडा एक्सटेंशन की आवासीय परियोजनाओं में मेहनत की कमाई लगा चुके निवेशक बिल्डरों के अधिक ब्याज वाले फरमान से परेशान है। इन निवेशकों ने बिल्डरों की शिकायत क्षेत्रीय सांसद सुरेंद्र नागर से की है। निवेशकों से नागर से 15 दिन के भीतर निर्माण कार्य शुरू करवाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी योजना बोर्ड से मंजूरी दिलवाने की भी मांग की है। ऐसा न होने पर निवेशकों ने धरना-प्रदर्शन के साथ भूख हड़ताल की भी धमकी दी है।

    निवेशकों की मांग पर नागर ने सहमति जताते हुए जल्द ही निवेशक, प्राधिकरण और बिल्डरों की वार्ता कराने का भरोसा दिलाया। निवेशकों का संगठन नोएडा एक्सटेंशन फ्लेट ऑनर ऐंड मेंबर एसोसिएशन (एनईएफओएम) इससे पहले बिल्डरों द्वारा ज्यादा ब्याज मांगने की शिकायत बिल्डरों के संगठन कंफेडेरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई ) से भी कर चुका है, पर क्रेडाई के आश्वासन के बाद भी उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।

    इस बारे में नागर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि न्यायालय में मामला चलने के कारण बैंकों ने कर्ज की राशि का भुगतान नहीं किया है। ऐसे में निवेशकों के ऊपर समय पर पैसा न देने का आरोप लगाकर बिल्डरों द्वारा अधिक ब्याज की मांग अनुचित है। इस समस्या के समाधान के लिए बिल्डर, निवेशक और प्राधिकरण की एक साथ जल्द वार्ता कराई जाएगी। साथ ही जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं स्वयं ऐसे बिल्डरों पर लगाम लगाने की कोशिश करूंगा। नागर ने योजना बोर्ड से मंजूरी के सवाल पर कहा कि प्रक्रिया चल रही है और जल्द की निर्माण कार्य की मंजूरी मिल जाएगी।

    इस बारे में नोएडा एक्सटेंशन फ्लेट ऑनर मेंबर एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि सांसद ने निवेशकों की सभी मांगों पर सहमति जताते हुए मदद करने का भरोसा दिसा है। बकौल कुमार पाम ओलंपिया समेत कुछ और बिल्डरों ने समय पर किश्त न देने के कारण 18-24 फीसदी ब्याज के साथ जल्द बकाया राशि का भुगतान करने को कहा है, जबकि बैंक मामला विवादों में होने के कारण कर्ज की राशि नहीं दे रहे है।

    -Business Standard
    CommentQuote
  • update...............
    Attachments:
    CommentQuote
  • More update.....................
    Attachments:
    CommentQuote
  • NEOMA - Noida extension Owners and Members Association Upate

    We will Appeal to all of you that please ask with Mr. J.N.Burman (Director, NCRPB) on no. 011-24628179 (direct no.) and 011-24642284 & 011-24642287 (office)... when Noida Extension will get NCRPB approval... Similarly you can ask with Soniya Gandhi, Rahul Gandhi and Media cell of Congress at below given link. Tele ring of NCRPB office should and mails to Congress should not be stop.... It is our fight... Every member could do this work from your place... We have to struggle unity….
    So please make maximum no. of call to Mr. J.N.Burman (Director, NCRPB) and mail to congress leaders every day for your dream house….
    CommentQuote
  • नोएडा के चार और गांव को मिलेगा पांच फीसदी का लाभ

    चेयरमैन मोहिंदर सिंह ने बताया कि नोएडा के चार और गांव को पांच फीसदी के आवासीय भूखंड का लाभ देने पर बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। ये गांव हैं होशियारपुर, आगाहपुर, गेझा-तिलपताबाद और हाजीपुर। यहां कुछ किसानों की जमीन 1997 में अधिगृहित की गई थी, लेकिन अवार्ड बाद में हुआ। नियमानुसार नोएडा प्राधिकरण पहली अप्रैल, 1997 तक अर्जित भूमि के एवज में किसानों को आवासीय योजना में 17.50 फीसदी का आरक्षण देता है। इसके बाद जिन किसानों की जमीन अधिगृहित हुई है, उन्हें पांच फीसदी के आवासीय भूखंड का लाभ दिया जाता है, जिन चार गांवों को पांच प्रतिशत के भूखंड का लाभ दिया जा रहा है, इनका मामला कुछ अलग था। इनमें से होशियारपुर, गेझा-तिलपताबाद और आगाहपुर के किसानों को लाभ दिया जा चुका है। अब हाजीपुर गांव के 40 किसानों को लाभ दिया जाना है।
    नोएडा के पांच गांव की आबादी बैक लीज अनुमोदित

    नोएडा, सं : बोर्ड बैठक में नोएडा के भी पांच गांव की आबादी नवीन आबादी विनियमावली के तहत बैक लीज करने को मंजूरी दे दी गई है। इसमें पर्थला-खंजरपुर, शहदरा, बादौल-बांगर, वाजिदपुर व सुल्तानपुर गांव शामिल हैं। इसमें से पर्थला-खंजरपुर गांव के किसानों को आबादी बैक लीज करने का प्रस्ताव भी सौंपा जा चुका है।



    -Dainik jagran
    CommentQuote