पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • किसान हित में दो योजनाओं को मंजूरी


    नोएडा यमुना एक्सप्रेस-वे विकास प्राधिकरण ने 43वीं बोर्ड बैठक में किसानों के हित के लिए दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दिलाई है। इनमें किसानों की आबादी नियमित करने और अर्जित भूमि के एवज में सात प्रतिशत के विकसित भूखंड आवंटित करने की मांग शामिल है।

    बोर्ड बैठक के बाद प्रेसवार्ता के दौरान चेयरमैन मोहिंदर सिंह और यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पंधारी यादव ने बताया कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के छह गांवों की जमीन को लीज बैक करने पर सहमति बन गई है। साथ ही 11 गांव के किसानों को सात फीसदी के भूखंड आवंटित करने को भी मंजूरी दे दी गई है। सीईओ पंधारी यादव के मुताबिक दोनों मंजूरी से सैकड़ों किसान लाभांवित होंगे। किसान हित में यह बड़ा निर्णय है।

    इन्हें मिला सात फीसदी का लाभ
    डंगरपुर-रेलिका, पारसौल, रामपुर-बांगर, गुनपुरा, बेलाकला, अट्टा-गुजरान, मुंज-खेड़ा, सालारपुर, औरंगपुर, फतेहपुर-अट्टा और मथुरापुर।



    आगरा व टप्पल के किसान भी होंगे लाभांवित

    प्रेसवार्ता में यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के सीईओ पंधारी यादव ने बताया कि बोर्ड बैठक में आगरा व टप्पल के किसानों को भी लाभांवित करने पर सहमति बन गई हैं। प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले इन क्षेत्र के गांव के किसानों की मांग थी कि अर्जित भूमि के एवज में उन्हें दिए जाने वाले सात प्रतिशत के आवासीय भूखंड विकसित क्षेत्र में दिए जाएं। इस पर बोर्ड ने मोहर लगा दी है। बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया है कि किसानों से अर्जित की गई पांच सौ हेक्टेयर भूमि में से 110 हेक्टेयर (55-55 हेक्टेयर के दो टुकड़े) भूमि किसानों को विकसित कर सात फीसदी के आवासीय भूखंड के रूप में वापस की जाएगी।
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  • धरने पर बैठे ग्रामीण, आज से रोकेंगे काम


    नोएडा, सं : अपनी मांगों को लेकर कई गांवों ने ग्रामीणों ने शुक्रवार को धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो शनिवार से वे काम रोकेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों को पांच फीसदी के प्लॉटों का आवंटन नहीं किया जा रहा है। आबादी को अभी भी नहीं छोड़ा जा रहा है। गांव व कॉलोनियों में विकास नहीं किया जा रहा है। इन मांगों को लेकर शुक्रवार को सदरपुर, मंगरौली, झट्टा, बादौली, कोंडली व असगरपुर सहित कई गांवों के किसान सेक्टर-45 की पानी की टंकी के सामने धरने पर बैठ गए। किसानों का कहना है कि शनिवार को वे सेक्टर-45 में चल रहे बिल्डरों के काम बंद कराएंगे। मांगे न माने जाने तक धरना जारी रहेगा।
    -d.jagran
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  • किसानों ने फिर दिया काम रोकने का अल्टिमेटम


    सेक्टर-45

    सिटी के किसान नोएडा अथॉरिटी की टेंशन फिर से बढ़ाने में जुट गए हैं। आंदोलन के पहले दिन शुक्रवार को ग्राम प्रधान समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने सेक्टर-45 स्थित पानी की टंकी के पास धरना दिया। आबादी बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने शनिवार से बिल्डरों का काम ठप कराने की घोषणा की है। इसके लिए शनिवार सुबह 11 बजे किसान एक्सप्रेस-वे समेत सदरपुर गांव के आसपास चल रही बिल्डर साइटों का काम रुकवाएंगे। किसानों ने अथॉरिटी से जुड़े सभी मसले हल नहीं होने तक कंस्ट्रक्शन शुरू नहीं होने देने का अल्टिमेटम दिया है।

    शुक्रवार सुबह किसानों ने सेक्टर-45 स्थित पानी की टंकी के पास दिनभर धरना दिया। इस दौरान समिति के सदस्य व सदरपुर के पूर्व प्रधान सुरेंद्र ने बताया कि गांवों की आबादी, 5 पर्सेंट के प्लॉट और विकास कार्यों के पूरा नहीं होने देने तक बिल्डरों का काम नहीं चलने दिया जाएगा। किसान अब अथॉरिटी अधिकारियों की बहकाने की नीयत से पूरी तरह वाकिफ हो गए हैं।

    -NB times
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  • ग्रेनो के मास्टर प्लान 2021 को शासन से मिली मंजूरी


    ग्रेटर नोएडा नोएडा एक्सटेंशन का विवाद अब हल होने की दिशा में अग्रसर है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद प्राधिकरण अधिकारी मास्टर प्लान 2021 को स्वीकृत कराने में जुटे हैं। प्राधिकरण को इसमें कामयाबी भी मिली है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की उत्तर प्रदेश सब डिवीजन से हरी झंडी मिलने के बाद शासन ने भी इसे मंजूरी दे दी। मास्टर प्लान को अब राष्ट्रीय राजधानी नियोजन परिक्षेत्र (एनसीआर प्लानिंग बोर्ड) के पास भेजा जाएगा। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार मास्टर प्लान 2021 में आवास के लिए 23.2 प्रतिशत, उद्योग के लिए 19.16 प्रतिशत, व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 5.6 प्रतिशत, संस्थागत के लिए 16.2 प्रतिशत, हरित पट्टी के लिए 23.2 प्रतिशत, ट्रांसर्पोटेशन के लिए 12.1 प्रतिशत एवं एसईजेड के लिए 0.2 प्रतिशत जमीन आरक्षित रखी गई है। प्राधिकरण आवासीय योजनाओं के लिए 2021 तक करीब पांच हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करेगा। इसमें तीन हजार हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है। शेष दो हजार हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का लक्ष्य अगले दस वर्षो में पूरा किया जाएगा। 2021 तक प्राधिकरण कुल 21570 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत करेगा। इसमें से 13570 हेक्टेयर भूमि अब तक अधिग्रहीत की जा चुकी है। प्राधिकरण ने औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी 2021 तक 4227 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का लक्ष्य रखा है। प्राधिकरण इसमें करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत कर उद्यमियों को आवंटित कर चुका है। एक सप्ताह तक मास्टर प्लान को आम जनता की जानकारी के लिए प्राधिकरण के कस्टम रिलेशन सेल पर चस्पा रखा जाएगा। इसके बाद इसे एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    -d.jagran
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  • more update,..,........
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  • Thanks fritolay_ps bhai, so finally good news started coming up regarding Noida extesion. Now we can expect work will start soon.

    Thanks again for all your efforts to keep us updating on daily !!


    Thanks,
    Flat seeker
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    ग्रेनो के मास्टर प्लान 2021 को शासन से मिली मंजूरी


    ग्रेटर नोएडा नोएडा एक्सटेंशन का विवाद अब हल होने की दिशा में अग्रसर है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद प्राधिकरण अधिकारी मास्टर प्लान 2021 को स्वीकृत कराने में जुटे हैं। प्राधिकरण को इसमें कामयाबी भी मिली है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की उत्तर प्रदेश सब डिवीजन से हरी झंडी मिलने के बाद शासन ने भी इसे मंजूरी दे दी। मास्टर प्लान को अब राष्ट्रीय राजधानी नियोजन परिक्षेत्र (एनसीआर प्लानिंग बोर्ड) के पास भेजा जाएगा। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार मास्टर प्लान 2021 में आवास के लिए 23.2 प्रतिशत, उद्योग के लिए 19.16 प्रतिशत, व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 5.6 प्रतिशत, संस्थागत के लिए 16.2 प्रतिशत, हरित पट्टी के लिए 23.2 प्रतिशत, ट्रांसर्पोटेशन के लिए 12.1 प्रतिशत एवं एसईजेड के लिए 0.2 प्रतिशत जमीन आरक्षित रखी गई है। प्राधिकरण आवासीय योजनाओं के लिए 2021 तक करीब पांच हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करेगा। इसमें तीन हजार हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है। शेष दो हजार हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का लक्ष्य अगले दस वर्षो में पूरा किया जाएगा। 2021 तक प्राधिकरण कुल 21570 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत करेगा। इसमें से 13570 हेक्टेयर भूमि अब तक अधिग्रहीत की जा चुकी है। प्राधिकरण ने औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी 2021 तक 4227 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का लक्ष्य रखा है। प्राधिकरण इसमें करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत कर उद्यमियों को आवंटित कर चुका है। एक सप्ताह तक मास्टर प्लान को आम जनता की जानकारी के लिए प्राधिकरण के कस्टम रिलेशन सेल पर चस्पा रखा जाएगा। इसके बाद इसे एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    -d.jagran



    This is an old news,,,,,issue has always been pending at NCR planning board.
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  • Originally Posted by Jai_Singh
    This is an old news,,,,,issue has always been pending at NCR planning board.


    Yeah, but sometimes its goof to see old news, specially with nothing new coming up :)
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  • एक-तिहाई किसानों को मिलेंगे दस फीसदी भूखंड


    ग्रेटर नोएडा
    इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद किसान यह सोचकर खुश नजर आ रहे हैं कि उन्हें अर्जित भूमि की एवज में दस प्रतिशत जमीन मिलेगी। वहीं यह आदेश अभी फलीभूत होता नजर नहीं आ रहा है। प्राधिकरण के पास जमीन का भारी टोटा है। कई गांव ऐसे हैं, जिनमें भूखंड आवंटित करने के लिए जमीन नहीं बची है। ऐसे में प्राधिकरण किसानों को सिर्फ छह प्रतिशत जमीन ही दे पाएगा। शेष चार प्रतिशत का बाजार भाव पर मूल्य दिए जाने का खाका तैयार किया गया है। शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा भी हुई। हालांकि इस संबंध में बोर्ड से कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ, लेकिन अंदरखाने यह तय हो चुका है कि 39 गांवों के दो-तिहाई किसानों को चार प्रतिशत जमीन का मूल्य दिया जाएगा। इससे प्राधिकरण पर करीब चार हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

    किसानों को अब तक अर्जित भूमि के बदले कुल क्षेत्रफल का छह प्रतिशत हिस्सा विकसित सेक्टर में मिलता है। हाईकोर्ट ने अपने 21 अक्टूबर के फैसले में इसे बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया था। कोर्ट के इस निर्णय से 39 गांवों के करीब 30 हजार किसानों के लाभांवित होने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार, प्राधिकरण सिर्फ उन्हीं गांवों में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कर पाएगा, जहां अबी तक किसानों को छह प्रतिशत के भूखंड आवंटित नहीं किए गए हैं। ऐसे गांवों की संख्या मात्र एक दर्जन है। जिन दो दर्जन गांवों में पूर्व में भूखंड आवंटित हो चुके हैं, वहां प्राधिकरण के पास शेष चार प्रतिशत हिस्से को देने के लिए जमीन नहीं बची है। प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यहीं खड़ी हो गई है कि अब भूखंड कहां आवंटित किए जाए। जिन गांवों में जमीन बची है, वहां गांव के मूल किसानों को भूखंड देने लायक है क्षेत्रफल बचा है।

    किस आधार पर तय होगा बाजार भाव
    अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, किसानों के दस प्रतिशत भूखंड देने के लिए उसके सामने सड़क व रास्ते भी बनाकर देने होंगे। सड़क व रास्तों पर प्राधिकरण की 8 प्रतिशत अतिरिक्त जमीन खर्च होगी। किसानों को 1450 रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा मिल रहा है। अधिग्रहण की कार्रवाई पर तीन तरह के शुल्क पर 348 रुपये प्रति वर्गमीटर खर्च होते हैं। इसे मिलाकर जमीन की कीमत 1798 रुपये प्रति वर्ग मीटर बनती है। इस पर एक वर्ष का 13 प्रतिशत की ब्याज दर जोड़कर जमीन की कीमत हो गई 2032 रुपये प्रति वर्ग मीटर। आंतरिक विकास पर तीन हजार व बाहरी विकास पर प्राधिकरण का करीब दो हजार रुपये खर्च होता है। इसको मिलाकर जमीन की कुल कीमत 7 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास बैठती है। इसी को बाजार भाव मानकर किसानों को चार प्रतिशत जमीन का मूल्य दिया जा सकता है।

    एक अन्य योजना पर भी विचार कर रहा प्राधिकरण
    अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि प्राधिकरण भूखंड आवंटित करने के लिए दो योजना बना रहा है। पहली योजना के तहत दो दर्जन गांवों में किसानों को छह प्रतिशत जमीन व शेष चार प्रतिशत का बाजार भाव पर मूल्य दिया जाएगा। किसान इसके लिए तैयार नहीं होते हैं तो प्राधिकरण दूसरी योजना के तहत ग्रेटर नोएडा फेस दो (दादरी) के गांवों में एक सेक्टर बसाकर किसानों को जमीन आवंटित करेगा। इसमें सभी किसानों को एक साथ भूखंड दिए जाएंगे।

    - हाईकोर्ट ने किसानों को दस प्रतिशत जमीन देने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण को इस पर अमल करना चाहिए अन्यथा किसान फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
    किसान भगत सिंह, बिसरख

    - किसानों को अपने परिवार के सदस्यों की रोजी रोटी चलाने के लिए भविष्य में कारोबार के लिए जमीन की जरूरत पड़ेगी। जमीन पास होगी तो बच्चों का भविष्य सुरक्षित है, इसलिए हमें पैसा नहीं जमीन चाहिए।
    किसान अनवर नागर, रोजा याकूबपुर

    - बाजार भाव किसानों से तय कराया जाए, तभी किसान चार प्रतिशत का पैसा लेने को तैयार हो सकते हैं, अन्यथा प्राधिकरण की यह योजना सफल नहीं होगी।
    किसान अजीत सिंह खोदना खुर्द


    -dainik jagran
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  • ग्रामीणों ने रोका बिल्डरों का कार्य, नारेबाजी


    नोएडा। सदरपुर के ग्रामीणों ने गांव में सीवर-जल की लाइन बिछाने और हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करने की मांग को लेकर सेक्टर-४५ में धरना-प्रदर्शन किया। इससे पूर्व ग्रामीणों ने गु्रप हाउसिंग प्रोजेक्टों का काम कुछ देर के लिए रुकवा दिया। पुलिस कर्मियों ने स्थिति पर नियंत्रण किया। चार घंटे तक चली वार्ता के बाद नोएडा अफसरों ने आश्वासन दिया कि १५ दिसंबर तक आबादी निस्तारित हो जाएगी। साथ ही एक सप्ताह में पांच फीसदी विकसित जमीनें दे देंगे। ग्राम विकास के लिए दस दिन का समय लिया गया है। ग्रामीणों ने मांगें पूरी होने तक प्राथमिक स्कूल, सदरपुर के बाहर शांतिपूर्वक बैठने का निर्णय लिया।

    शनिवार की सुबह सदरपुर गांव के ग्रामीण ने सेक्टर-४५ में चल रहे करीब चार बिल्डर प्रोजेक्टों को रुकवा दिया। साथ ही प्राधिकरण विरोधी नारे लगाए। यह घटनाक्रम आधे घंटे तक चला। इसी बीच एसपी सिटी अनंत देव, सीओ प्रथम बृजेश सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट कंचन सरन मौके पर पहुंच गए और स्थिति को नियंत्रित करते हुए प्राधिकरण के प्रशासनिक अधिकारी दीप चंद्रा को मौके पर बुलाया गया। इनके साथ ग्राम विकास के पीई एमडी पांडेय और मोहम्मद इशरत भी पहुंचे। ग्रामीणों के साथ वार्ता हुई। इसमें सभी पात्र किसानों को एक साथ पांच फीसदी के भूखंड मांगे। एओ दीपचंद्रा ने आश्वासन दिया कि १५ दिसंबर तक आबादी निस्तारित हो जाएगी। साथ ही एक सप्ताह में पांच फीसदी के प्लॉट आवंटित हो जाएंगे।

    ग्राम विकास के संबंध में कहा गया कि रविवार से सीवर-जल का सर्वे शुरू होगा, जिसके बाद सोमवार चार दिसंबर से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। अफसरों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने दावों पर अमल होने तक प्राथमिक विद्यालय के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने का निर्णय लिया। इस मौके पर मुकेश प्रधान, महेश चौहान, सुरेंद्र प्रधान और सत्यपाल त्यागी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों के समर्थन में मौके पर सपा के विधानसभा प्रत्याशी सुनील चौधरी भी कार्यकर्ताओं सहित पहुंचे थे।

    -Amar Ujala
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  • किसानों ने रोका 4 साइटों का काम


    नोएडा॥ आबादी संबंधी व अन्य समस्याओं के समाधान के लिए लगातार मिल रही तारीखों ने शनिवार को किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया। इसके चलते उन्होंने सेक्टर-45 की 3 और सेक्टर-96 की 1 साइट पर धरना शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में किसानों को देखकर साइट पर काम कर रहे कर्मचारी भाग खड़े हुए। मौके पर पहुंचे पुलिस, प्रशासन और अथॉरिटी के अधिकारियों ने उन्हें मनाने की कोशिश की पर सफल नहीं हुए। अधिकारियों के सदरपुर में सोमवार से समस्याओं का निस्तारण कराने के वादे पर किसान शांत हो गए पर शांतिपूर्ण धरना देने का फैसला बरकरार रखा। निस्तारण का काम शुरू न होने पर किसानों ने मंगलवार से अन्य साइटों पर काम रोकने का अल्टिमेटम दिया है।

    आबादी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले शनिवार को सिटी के सैकड़ों किसान सेक्टर- 45 स्थित पानी की टंकी के पास जुटे। इसके बाद करीब 11:30 बजे सेक्टर- 45 की 3 बिल्डर साइटों और सेक्टर-96 की 1 साइट का काम रुकवा दिया। भारी संख्या में लोगों की भीड़ देखकर साइट पर कार्यरत कर्मचारी भाग खड़े हुए। इस दौरान किसानों ने कोई तोड़फोड़ नहीं की लेकिन मुद्दों का समाधान नहीं होने तक काम चालू नहीं होने देने का अल्टिमेटम दिया।

    मौके पर पहुंचे अथॉरिटी के प्रशासनिक अधिकारी दीपचंद ने 12 दिसंबर तक किसानों के मसले हल कराने की बात कही पर किसानों ने इनकार कर दिया। इसके बाद सदरपुर गांव के 5 पर्सेंट प्लॉटों की आवंटन प्रक्रिया सोमवार से शुरू करने, जल-सीवर लाइन बिछाने का काम चालू करने व गांव की आबादी संबंधी समस्या का समाधान 15 दिसंबर तक कराने पर किसान शांत हुए। वहीं, अधिकारियों ने अन्य गांवों से जुड़े मामले भी इस बीच हल कराने का आश्वासन दिया। इस दौरान किसानों ने अथॉरिटी की कार्रवाई से संतुष्ट न होने पर मंगलवार से एक्सप्रेस-वे समेत अन्य बिल्डर साइटों पर काम बंद कराने का अल्टिमेटम दिया है। फिलहाल किसानों ने शांतिपूर्वक धरना जारी रखा है। इस दौरान सिटी मैजिस्ट्रेट कंचन सरन, एसपी सिटी अनंत देव तिवारी, सदरपुर प्रधान मुनेश, मंगरौली प्रधान चमन समेत बड़ी तादाद में ग्रामीण मौजूद थे।

    बिल्डरों ने मामले को जल्द सुलझाने और निवेशकों पर इसका असर नहीं पड़ने का वादा किया है लेकिन निवेशकों के माथे की सिलवटों को घटा नहीं पाए हैं। आम्रपाली ग्रुप के एमडी और क्रेडाई के एनसीआर वाइस प्रेजिडेंट अनिल शर्मा ने कहा कि अथॉरिटी को किसानों से जुड़े मसलों को हल कराना चाहिए। किसान निस्तारण में तेजी की मांग कर रहे हैं और बिल्डर भी इसके पक्ष में हैं। वहीं, बीजेपी नेता और छलेरा के किसान महेश चौहान ने कहा कि अथॉरिटी अधिकारियों का टालने वाला रवैया मौजूदा समस्या की जड़ है। अगर बिल्डरों को जमीन अलॉट करने वाली तेजी किसानों के साथ भी की होती तो यह दिक्कत आती।

    इन प्रोजेक्टों का रोका काम
    शनिवार को किसानों ने सेक्टर -45 स्थित आम्रपाली सफायर , एनआरआई रेजिडेंसी , प्रतीक स्टायलोम और सेक्टर -96 में यूनिटेक ग्रैंड का काम रोका। यहां 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के हजारों 2, 3, 4 बीएचके फ्लैट बनाए जा रहे हैं। इन फ्लैटों में ही निवेशकों के 2500 करोड़ रुपये लगे हुए हैं।


    किसानों की मांगें
    1. 5 पर्सेंट किसान कोटे के भूखंड तत्काल आवंटित हो। इसके बाद 10 पर्सेंट जमीन दी जाए।

    2. 64.7 पर्सेंट बढ़ा हुआ मुआवजा तुरंत दे अथॉरिटी।

    3. आबादी का समाधान जहां है जैसी के आधार पर किया जाए।

    4. कोर्ट में लंबित मामलों में समझौते के आधार पर लीज बैक कार्यवाही हो।

    5. सदरपुर गांव में जल - सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू कराया जाए।


    अथॉरिटी का पक्ष
    1. 5 पर्सेंट जमीन का समाधान गांवों के रोस्टर के हिसाब से कराया जा रहा है। सदरपुर के किसानों को सोमवार से पेपर दिए जाएंगे।
    2. बढ़ा हुआ मुआवजा पहले चरण में केवल हाई कोर्ट गए गांवों को दिया जाएगा।
    3. आबादी मसलों का समाधान भी ग्रामवार बने रोस्टर के हिसाब से कराया जा रहा है। सदरपुर गांव की आबादी समस्या 15 दिसंबर को फाइनल की जाएगी।
    4. आबादी मसले के साथ ही लीज बैक की कार्यवाही की जाएगी।
    5. सोमवार से सदरपुर की जल - सीवर से जुड़ी समस्या पर काम शुरू होगा।

    -Navbharat times
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