पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • नोएडा Ext. में नए फ्लैट की कीमतें 25% तक बढ़ाएंगे डिवेलपर


    नई दिल्ली।। नोएडा एक्सटेंशन में नए फ्लैट खरीदारों को 25 प्रतिशत अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी क्योंकि डिवेलपरों ने 3,000 करोड़ रुपए के भुगतान नोटिस का बोझ नए ग्राहकों पर डालने का निर्णय किया है। ये नोटिस उत्तर प्रदेश सरकार ने भूखंड आबंटियों को जारी किए थे।

    कन्फेडरेशन ऑफ रीयल एस्टेट डिवेलपर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) एनसीआर के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा ने बताया, 'हमारे पास ग्राहकों पर बोझ डालने के अलावा कोई और चारा नहीं है। मौजूदा खरीददारों पर कोई असर नहीं होगा, लेकिन भावी ग्राहकों को 15 से 20 प्रतिशत अधिक कीमत चुकानी होगी।'

    उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) ने प्रति वर्ग मीटर 2,015 रुपए का अतिरिक्त भुगतान करने के लिए मांग का नोटिस भेजा है। इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए सुपरटेक के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक आरके अरोड़ा ने कहा, 'हमने क्षेत्र में जो फ्लैट नहीं बिके हैं, उनके दाम 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना बनाई है। हम प्राधिकरण को भुगतान करने के लिए अतिरिक्त राशि जुटा रहे हैं।'

    अरोड़ा ने कहा कि प्राधिकरण ने सभी भूमि आबंटियों जैसे डिवेलपर, उद्योग मालिकों और व्यक्तियों को नोटिस भेजे हैं।' प्राधिकरण ने कुल करीब 3,500 करोड़ रुपए इकट्ठा करने के लिए नोटिस भेजे हैं।


    -Navbharat times
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  • विकास कार्य शुरू करने के लिए रिट दायर करेगा ग्रेनो प्राधिकरण



    ग्रेटर नोएडा। मास्टर प्लान को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी मिलने तक विकास कार्यों पर लगी रोक हटाने के लिए ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट में अगले सप्ताह एक याचिका दायर करेगा। याचिका के जरिए प्राधिकरण कोर्ट से बंद पड़े विकास कार्यों को शुरू करने की इजाजत मांगेगा।


    प्राधिकरण कोर्ट में दलील पेश करेगा कि मास्टर प्लान को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी मिलने में अभी वक्त लगेगा। रोक लगने के कारण रजिस्ट्री आदि कार्य भी बाधित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि बीते २१ अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी बेंच ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के ३९ गांवों के किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।


    जिसके अनुसार, प्राधिकरण के विकास कार्यों पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने साफ कहा था कि मास्टर प्लान २००१ के तहत अधूरे विकास कार्य नहीं प्रभावित होंगे, लेकिन मास्टर प्लान २०२१ के तहत किए जा रहे विकास कार्य तभी शुरू किए जा सकेंगे, जब प्राधिकरण एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से इसकी अनुमति ले लेगा।

    -Bhasker
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  • जन जागरण अभियान पहुंचा झट्टा


    किसान संघर्ष समिति का जन जागरण अभियान रविवार को झट्टा गांव पहुंच गया। यहां किसानों के साथ समिति के सदस्यों ने बैठक की। जन जागरण अभियान का मकसद किसानों को दोबारा अपने हक के लिए जागरूक करना है। समिति के सदस्यों के मुताबिक, प्राधिकरण किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इसके कारण आबादी की बैक लीज, पांच प्रतिशत के प्लॉटों के आवंटन में लगातार देर हो रही है। जिस गांव में धरना-प्रदर्शन होता है या जहां बिल्डर का काम रुकवाया जाता है, वहीं अधिकारी ध्यान देते हैं। किसानों के काम रोकने के डर से प्राधिकरण किसानों की मांगों को पूरा करने की कार्रवाई शुरू करते हैं। समिति दस दिसंबर तक गांव-गांव जाकर जन संपर्क अभियान चलाएगी। इसके बाद 11 दिसंबर को नगली-बाजिदपुर गांव में महापंचायत होगी। इस दौरान अगर प्राधिकरण ने क्षेत्र के किसानों के हित में उनकी 11 सूत्रीय मांग पर कार्रवाई शुरू नहीं की तो जिन सेक्टरों में बिल्डरों के काम चल रहे, उन सभी जगह काम रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। काम रोकने के लिए सिटी सेंटर व एक्सप्रेस-वे के प्रोजेक्ट को चिन्हित किया गया है।

    -Dainik Jagran
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  • किसानों ने की आबादी निस्तारण की मांग

    आबादी के लंबित प्रकरणों के निस्तारित होने तक किसान प्राधिकरण के साथ समझौता नहीं करेंगे। रविवार को बिसरख व सादुल्लापुर गांव में हुई किसानों की पंचायत में निर्णय लिया गया कि शत-प्रतिशत मामलों के निस्तारण व बैकलीज शुरू होने तक सुलह नहीं करेंगे। प्राधिकरण ने इनमें देरी की, तो किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

    किसान संघर्ष समिति का कहना है कि गांवों में अभी कई लोगों के आबादी के मामले निस्तारित होने बाकी हैं। समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी का कहना है कि बिसरख, इटैड़ा व पतवाड़ी में प्राधिकरण के कहने पर किसानों ने जमीन पर कब्जा दे दिया। प्राधिकरण अब आबादी निस्तारण में देरी कर रहा है। इससे किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है। प्राधिकरण को शीघ्र बोर्ड बैठक बुलाकर लंबित प्रकरणों को सुलझाना चाहिए, अन्यथा किसान समझौते से पीछे हट जाएंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व में निस्तारित हो चुके प्रकरणों की तत्काल बैकलीज (आबादी की रजिस्ट्री) शुरू हो जानी चाहिए। प्राधिकरण द्वारा बैकलीज में देरी किए जाने से किसानों में अविश्वास की भावना आ रही है। ग्रामीण पंचायत मोर्चा की सादुल्लपुर गांव में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि संसद में भूमि अधिग्रहण बिल पास होने तक किसान सुलह नहीं करेंगे। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। मोर्चा के संयोजक रणवीर प्रधान का कहना है कि किसानों की मांगों को पूरा किए बिना समझौता परवान नहीं चढ़ सकता। प्राधिकरण किसानों को गुमराह कर समझौता कर लेता है। बाद में उस पर अमल नहीं होता

    -Dainik jagran
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  • Gaon waalo
    lelo lelo....:bab (59): election ke baan hum lenge AAPKI aachae tareeke se.......:bab (4):
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  • Originally Posted by cookie
    Gaon waalo
    lelo lelo....:bab (59): election ke baan hum lenge AAPKI aachae tareeke se.......:bab (4):


    Cookie bhai,

    loge to tab jab lene ke kabil bachoge itni dene ke baad...
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  • Originally Posted by amitgupta00
    Cookie bhai,

    loge to tab jab lene ke kabil bachoge itni dene ke baad...

    Authority wale sabke baap hai......... koi na koi jugaad nikal lenge. They are not taking any stern action due to Election. warna aaj tak kaha soye hue the ye gaonwale??
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  • जमीन दिलाने के नाम पर किसानों के साथ धोखा


    ग्रेटर नोएडा। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्राधिकरण ने एक बार फिर मुआवजा बांटना शुरू कर दिया है। मुआवजे के रूप में करोड़ों की रकम पाए किसान ठगों के खास निशाने पर हैं। किसानों को जमीन, प्लाट और किराए की संपत्ति दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही है।

    ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में किसानों को जमीन के बदले ठीकठाक मुआवजा मिल रहा है। इस बात की जानकारी एनसीआर समेत आसपास के जनपदों मेें सक्रिय ठगों को भी है। गौतमबुद्ध नगर में जमीन महंगी है और अन्य जनपदों में अभी कुछ सस्ती भूमि मिल रही है। इसी के चलते क्षेत्र के लोग दूसरे जनपदों में जाकर जमीन खरीदते हैं। लेकिन, वहां पर ज्यादातर किसानों को जमीन के बदले धोखा ही मिला है।

    केस-1
    घोड़ी-बछैड़ा के एक किसान को एक करोड़ रुपये बतौर जमीन का मुआवजा मिला। उसे पड़ोसी गांव के एक प्रापर्टी डीलर ने गाजियाबाद की गोविंदपुरी कालोनी से सटी हुई जमीन दिखाकर बैनामा करा दिया। उसकी कीमत करीब ८० लाख रुपये दी गई थी। प्लाट खरीदने के बाद जब किसान प्लाट पर चारदीवारी करने पहुंचा तो उसे गांव की जमीन में पाया। उस प्लाट की कीमत मात्र बारह लाख रुपये की है।

    केस-2
    दूसरी घटना भी घोड़ी गांव के किसान के साथ घटी। उनके रुपये तो गए ही जमीन भी नहीं मिली। किसान रविंद्र (बदला हुआ नाम) ने किसी प्रापर्टी डीलर के माध्यम से एटा के भोगांव कसबे में ३१ बीघा जमीन का सौदा ४० लाख रुपये में किया था। जमीन की रजिस्ट्री कराने गए तो पहले दिन दस्तावेजों की कमी के चलते बैनामा नहीं हो सका। मोटी रकम के साथ रात मेें वापस गांव लौटना खतरे से खाली नहीं था। जिसके चलते किसान ने ४० लाख रुपये एटा के किसान को दे दिए। चूंकि अगले दिन भी जमीन के रुपये उसी किसान को देने थे। दूसरे दिन सुबह फिर बैनामा कराने की बात आई किसान ने जमीन बेचने से इंकार कर दिया और कहा कि अगर खेत लेना है तो वह रुपये दें। किसान रविंद्र ने उससे कहा कि खेत की एवज में उसने कल ४० लाख रुपये दिए थे। लेकिन, एटा का किसान रुपये देने की बात से मुकर गया और कहा कि जान की सलामती चाहते हो तो चुपचाप घर चले जाओ।

    केस-3
    बोड़ाकी के खलीफा खचेडू सिंह के ६६ लाख भी जाते-जाते बचे। दरअसल, महेंद्र सिंह ने गुलावटी के पास सिंह गांव में २२ बीघा जमीन ठहराई थी। लेकिन, इस जमीन को बेचने वाला किसान ही फर्जी था और किसी अन्य की जमीन का बैनामा कर रहा था। लेकिन, रजिस्ट्री कराने से मात्र आधा घंटे पहले इस धोखाधड़ी का भेद खुल गया और महेंद्र ने जमीन खरीदने से इंकार करते हुए सभी को पुलिस को सौंप दिया। हालांकि, बाद में धोखाधड़ी करने वाले लोगों ने उनके पेशगी के रूप में लिए ३५ लाख रुपये वापस दे दिए।

    बरते सावधानियां
    - किसान जमीन खरीदने से पहले उसकी राजस्व के कर्मचारियों से लेकर अफसरों तक दस्तावेजों की जानकारी कराएं।
    - जिस गांव में जमीन खरीदनी है वहां के लोगों से भी खेत के बारे में जानकारी हासिल करें।
    - प्रापर्टी डीलर और अन्य लोगों के बहकावे में आने से बचें।
    - जमीन खरीदने और रुपये देने में जल्दबाजी न करें, बल्कि पूरी जांच पड़ताल के बाद ही रुपये दें।
    - किसान की पुलिस से वेरीफिकेशन भी कराएं एवं अन्य स्रोत से भी जानकारी करें।
    - जमीन खरीदते समय नकदी का प्रयोग करने के बजाए डिमांड ड्राफ्ट या चेक देने का ही प्रयास करें।
    - जान पहचान के लोगों को बीच में लेकर ही मोटी रकम को प्रापर्टी में लगाएं।

    -Amar Ujala
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  • Rush is back, flat buyers throng Noida Extn again


    Greater Noida: Flat bookings and enquiries for housing units in Noida Extension have suddenly picked up pace after a lull, buoyed by the Allahabad High Court verdict of October 21.

    Homebuyers had stopped enquiring about housing units in the region, following the verdicts Shahberi and Patwadi verdicts. But after the latest court verdict, which did not quash land acquisitions in villages where projects are underway, there has been a steady rise in enquiries and bookings.

    New canopies and makeshift tents, acting as sales offices of builders, have come up at the Gol Chakkar at the entrance of Noida Extension. A TOI team visited Noida Extension and found several buyers from the NCR region making enquiries for bookings at makeshift tents set up by builders.

    "Flat prices are going to rise manifold once construction begins in the area," said Mahendra Verma, an employee of a private Noida-based university, who was in Noida Extension with his family to make enquiries. "There will be a rush for bookings once construction resumes which would push prices further up. The proposed township is excellent with good connectivity and I want to book a flat in advance," said Verma.

    "I am here to look for a flat because this is the only region where I can get an affordable rate home," said Pawan Pandey, employee with a security company. "I am confident it's a matter of time before the issue in Noida Extension gets settled," added Pandey.

    Sales agents hired by builders can be seen on the roads, once again, trying to lure prospective homebuyers. "Enquiries began once the high court verdict was out. Though the average number of bookings has not been as robust as it used to be, I have managed to book three to four flats last month," said Sandeep Amroha, a sales official. "Telephonic enquiries have also picked up. There could be a rush for bookings soon," said Amroha. "It's mostly on weekends that enquiries pick up pace," said Amresh Jha, another sales official.

    "Bookings had come to a standstill during the critical phase when a large number of petitions were pending in the high court," said CREDAI-NCR vice president, R K Arora. "However, there has been about 15 per cent rise in bookings over the one-and-half months. Construction work would begin after the NCR Planning Board hurdle is cleared. We will increase the price of new flats in our projects by around 25 per cent to offset the cost of compensation burden that we have to share with the state government," said Arora, who is also the director of Supertech Developers.

    Existing homebuyers are also making rounds to enquire about the status of their projects. "I am still in doubt about the approval from NCRPB, but I have to be patient and wait till construction begins again," said A K Srivastava, an employee of a Delhi-based offshore company who was in Noida Extension to know about the fate of his 2 BHK flat in Gaur City - I. "When I retire, I want to shift with my family to this place," he said. Even as enquiries increase, builders have begun setting up more canopies to meet prospective buyers. Crowds are slowly rising at these makeshift offices, which had become desolate after the Shahberi verdict.

    -TOI
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  • Builders release hiked rates for new bookings in Noida Extn

    Though the crisis in Noida Extension is not over, builders have announced the new rates. “Our firm, Supertech, has announced the new rates. It’s Rs 2,900 per sqft,” said RK Arora of real estate body CREDAI. Before the Noida Extension project got mired in a legal tangle, the rates ranged between Rs 1,600 and Rs 2,000 per sqft. This is a 50% hike since the Noida Extension crisis began. Arora, however, said existing buyers would get flats at committed rates.


    Greater Noida authority has asked Rs 1,800 crore from 95 builders so that increased compensation, as told by the court, could be paid to farmers. “This is the main reason for the hike,” said Anil Sharma, another office-bearer of CREDAI.

    This is not alone. In case of fresh auctions, the authority has hiked, in two strokes in three months, the residential land price by more than 50%. Sharma said CREDAI could not control the new rates, as the buyers would have the option of going for the projects suiting their budget. On an average, new flat buyers in Noida Extension will have to pay 25% more. Builders have to deposit money with the authority in three installments. About R200 crore has already been deposited.

    -HT
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  • नोएडा एक्सटेंशन में 25 फीसदी महंगे होंगे फ्लैट

    नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट खरीदने के इच्छुक नए ग्राहकों को अब 25 फीसदी तक ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। रियल एस्टेट डेवलपरों ने किसानों को दिए जाने वाले 3,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त मुआवजे का भार ग्राहकों पर डालने का फैसला किया है। कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई), एनसीआर के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि हमारे पास ग्राहकों पर बोझ डालने के अलावा कोई और चारा नहीं है। मौजूदा खरीदारों पर कोई असर नहीं होगा लेकिन भावी ग्राहकों को 15 से 20 प्रतिशत अधिक कीमत चुकानी होगी। शर्मा रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली के चेयरमैन भी हैं। वहीं सुपरटेक के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक आरके अरोड़ा ने कहा कि हम फ्लैट की कीमत 20 से 25 फीसदी बढ़ाने जा रहे हैं। प्राधिकरण को हम 25 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं और बाकी राशि जुटा रहे हैं। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआइडीए) ने डेवलपर्स को प्रति वर्ग मीटर 2,015 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने का नोटिस भेजा है। आवासीय, औद्योगिक और व्यक्तिगत श्रेणियों की जमीनों पर मांगी गई रकम की दर अलग-अलग है। अनिल शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी को 110 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान का नोटिस मिला है और वह 25 फीसदी राशि जमा कर चुके हैं। प्राधिकरण ने डेवलपर्स को अतिरिक्त राशि विभिन्न किस्तों में जमा करने की छूट दी है। डेवलपर्स को उम्मीद है कि प्राधिकरण उन पर पड़ रहे आर्थिक बोझ में कुछ कमी करेगा। शर्मा ने कहा कि हमने प्राधिकरण से ब्याज हटाने और भुगतान की अवधि को अधिक लचीला बनाने की अपील की है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले महीने गौतम बुद्ध नगर जिले के तीन गावों असदुल्लापुर, यूसुफपुर चक शाहबेरी और देवला का अधिग्रहण रद कर दिया था। साथ ही किसानों को ज्यादा मुआवजा देने का सरकार को आदेश दिया था।

    -Dainik jagran
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  • किसानों ने की झट्टा बादौली में पंचायत


    झट्टा बादौली

    किसान संघर्ष समिति के बैनर तले सोमवार को ग्राम झट्टा बादौली में पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें अथॉरिटी की वादा खिलाफी के बारे में किसानों को बताया गया। साथ ही नगली वाजिदपुर में 11 दिसंबर को होने वाली ऐतिहासिक महा पंचायत की रणनीति पर विचार विमर्श किया गया। महा पंचायत में किसान बचाओ बिल्डर भगाओ आंदोलन चलाने का निर्णय लिया जाना है। इसके तहत मांगे पूरी नहीं होने पर बिल्डरों का काम रोक दिया जाएगा। सोमवार को हुई पंचायत में इलाके के करीब आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के किसानों ने भाग लिया।

    पंचायत की अध्यक्षता करते हुए चौधरी भूपन सिंह ने कहा कि अथॉरिटी अधिकारियों ने वादा खिलाफी कर किसानों के साथ विश्वासघात किया है। किसानों की मांग है कि पहले उन्हें 10 पर्सेंट जमीन मिले और आबादी जहां है-जैसी है के आधार पर छोड़ी जाए। समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने कहा कि किसानों को जागरूक बनाने के लिए जन जागरण अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि किसान 1997 के बाद सभी किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा और 10 पर्सेंट जमीन दिए जाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही अथॉरिटी से मूल निवासियों के लिए कमर्शियल और इंडस्ट्रीज के छोटे भूखंडों की स्कीम लाकर प्राथमिकता के आधार पर अलॉट किया जाए। अथॉरिटी में मूल निवासियों को नौकरी दी जाए। साथ ही समूचे गौतमबुद्ध नगर इलाके में पुश्तैनी और गैर पुश्तैनी के बीच का भेदभाव खत्म किया जाए। अपीलीय मुकदमों का मुआवजा उच्चतम दर के हिसाब से दिया जाए। साथ ही 30 जुलाई 2011 को हुई सहमति के आधार पर गांवों से जुड़े मामलों को निपटाया जाए। गांवों से जुड़ी समस्याओं का समाधान अथॉरिटी ऑफिस नहीं बल्कि गांवों में कैंप लगाकर किया जाए।

    -NB times
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  • मुआवजे के लिए 125 करोड़ रुपए और दिए



    ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों को मुआवजा बांटने के लिए एडीएम कार्यालय को १२५ करोड़ रुपए और दे दिए हैं। इस पैसे से पांच गांवों के किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। इससे पहले प्राधिकरण १५० करोड़ रुपए किसानों में वितरित कर चुका है।


    प्राधिकरण के डीसीईओ अखिलेश सिंह ने बताया कि किसानों को अतिरिक्त मुआवजा वितरण का कार्य जारी है। प्राधिकरण के पास जैसे-जैसे पैसे की व्यवस्था हो रही है। उसे किसानों में बांटा जा रहा है। उधर, नोएडा में किसान संघर्ष समिति के बैनर तले सोमवार को झट्टा बदौली गांव में पंचायत हुई।


    जिसमें नगली बाजिदपुर गांव में 11 दिसंबर को होने वाली महापंचायत पर विचार विमर्श किया गया। निर्णय लिया गया कि यदि किसानों की मांग शीघ्र पूरी नहीं हुई तो किसान बिल्डरों का काम रोकेंगे।

    -Bhaskar
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  • प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी मिलने तक बंद रहेंगे आवंटन
    ग्रेटर नोएडा, सं : प्राधिकरण किसानों को अर्जित भूमि की एवज में मिलने वाले भूखंडों के आवंटन के लिए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा। कोर्ट द्वारा एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी मिलने तक किसी भी तरह के आवंटन न करने के निर्देश से किसानों को आवंटित होने वाले भूखंड भी अटक गए हैं। किसान समझौते से पहले भूखंड आवंटन चाहते हैं, लेकिन एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी न मिलने की वजह से मामला अधर में अटक गया है। बोर्ड से स्वीकृति मिलने तक किसानों को आवंटन के लिए इंतजार करना होगा। किसानों के अर्जित भूमि की एवज में छह प्रतिशत भूखंड मिलते हैं। हाईकोर्ट ने इसे बढ़ाकर अब 10 प्रतिशत करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन यही आवंटन किसानों के साथ अब सुलह करने में रोड़ा बन रहा है। किसान तत्काल भूखंड की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्राधिकरण गांव में अच्छी लोकेशन की जमीन को अन्य संस्थाओं को आवंटित कर देता। किसानों को खराब लोकेशन की जमीन दी जाती है। प्राधिकरण गांवों में संस्थाओं को जमीन बेचने से पहले किसानों को भूखंड आवंटित करे। यह भी आरोप है कि प्राधिकरण भूमि अधिग्रहण के कई वर्ष बाद किसानों को भूखंड देता है। प्राधिकरण के सामने ताजा समस्या यह है कि हाईकोर्ट ने एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मास्टर प्लान को मंजूरी मिलने तक सभी तरह के आवंटन पर रोक लगा रखी है। इससे प्राधिकरण किसानों को भी भूखंड आवंटन नहीं कर पा रहा है।

    -dainik Jagran
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