पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • अभी राहत का इंतजार कर रहे हैं निवेशक


    ग्रेटर नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों ने अपने अपने टेंट लगा दिए हैं। कोर्ट का स्टे होने के कारण कोई निर्माण तो नहीं चल रहा है, लेकिन निवेशकों में विश्वास रखने के लिए पर्थलाखंजपुर हिंडनपुल गोलचक्कर पर काउंटर खोल दिए गए हैं। जैसे ही वाहन चालक गुजरते हैं तो युवक हाथ में बिल्डरों की पुस्तिका को लेकर दौड़ते हैं, लेकिन कोई रुकता नहीं है।

    दरअसल, निवेशक इंतजार कर रहे हैं और चाहते हैं कि कोर्ट या एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से पहले राहत मिले। इसके बाद ही फ्लैट की बात सोची जाए। हालांकि, जानकार मानते हैं कि जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, उसके बाद नोएडा एक्सटेंशन में फिर रौनक आ जाएगी। यह भी सही है कि अब पहले जैसा सस्ते में फ्लैट मिलने वाला नहीं है। ध्यान देने वाली बात है कि कुछ माह पहले उन काउंटरों पर अच्छी खासी भीड़ रहती थी और शनिवार-रविवार को तो निवेशकों का मेला लगता था। लेकिन, जब विवाद कोर्ट में पहुंचा तो सबकुछ बंद हो गया था। 21 अक्टूबर के बाद बिल्डरों और निवेशकों ने राहत की सांस ली थी। हालांकि, बाधा दूर करने के लिए प्राधिकरण ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।

    अनुरोध किया है कि स्टे हटा लिया जाए। इसके अलावा कोर्ट के आदेश पर ही एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मास्टर प्लान 2021 को मंजूर कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    -Amar ujala
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  • निस्तारित आबादी को छोड़ दिया जाएगा मुआवजा


    ग्रेटर नोएडा, सं :
    आबादी के जिन प्रकरणों में किसानों के साथ सहमति बन चुकी है, उतने क्षेत्रफल को छोड़कर बाकी का मुआवजा दिया जाएगा। वारिसान के आधार पर मुआवजा देने में भी प्राधिकरण लचीला रुख अपनाएगा। जिन किसानों की कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी है, उनके वारिसों को वारिसान प्रमाण पत्र के आधार पर मुआवजा देने में अड़चन आ रही थी। किसान चाहते हैं कि प्राधिकरण प्रमाण पत्र के आधार पर मुआवजा दे। प्राधिकरण इस पर भविष्य में नरम रुख अपनाएगा। आबादी के निस्तारित हो चुके मामलों में पार्ट पेमेंट की दिक्कत को भी दूर कर लिया गया है। किसानों को उतने क्षेत्रफल का मुआवजा छोड़कर दिया जाएगा, जितने को आबादी माना गया है। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इसका पत्र शुक्रवार को प्राधिकरण ने एडीएम एलए ऑफिस को भेज दिया। पार्ट पेमेंट व वारिसान प्रमाण पत्र की वजह से सैकड़ों किसानों का मुआवजा कई माह से फंसा हुआ था। शीघ्र ही इन किसानों को मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा। जिन किसानों ने पूर्व में मुआवजा नहीं उठाया था, उन्हें मूल मुआवजे के साथ 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा भी दिया जाएगा, लेकिन दोनों के लिए अलग-अलग फाइल बनवानी होगी।

    -Dainik jagran
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  • चुनाव प्रक्रिया से प्रभावित हुआ मुआवजा वितरण


    ग्रेटर नोएडा, :
    प्राधिकरण व एडीएम एलए ऑफिस के कर्मचारियों की चुनावों में ड्यूटी लग जाने की वजह से मुआवजा वितरण प्रक्रिया प्रभावित होने लगी है। पिछले एक सप्ताह में प्राधिकरण मात्र दो गांवों के 80 किसानों को मुआवजा के चेक बांट पाया है। मुआवजे में हो रही देरी से किसानों में भी रोष बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि उन्हें समय से चेक नहीं मिले तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

    जिला प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए करीब सात हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। इनमें प्राधिकरण और एडीएम एलए ऑफिस में तैनात तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपाल व अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है। एडीएम एलए को भी जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया है। दिनभर चुनावी तैयारियों में व्यस्त रहने की वजह से अधिकारी व कर्मचारी मुआवजे की फाइलों को तैयार नहीं कर पा रहे हैं। नतीजतन गत सप्ताह प्राधिकरण सिर्फ खैरपुर गुर्जर गांव के 35 किसानों को मुआवजे के चेक दे पाया। इससे पहले सैनी गांव के करीब तीन दर्जन किसानों को भी मुआवजा दिया गया था। बृहस्पतिवार को एडीएम एलए ने कई गांवों में मुआवजा बांटने की योजना बनाई थी। बाबू व अमीनों को भी गांवों में जाकर फाइल तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे, लेकिन निर्वाचन आयोग का फरमान आ जाने की वजह से एडीएम को अचानक कलेक्ट्रेट जाना पड़ा। सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक चली विडियो कांफ्रेंसिंग में व्यस्त रहने की वजह से एडीएम किसी भी गांव में नहीं जा सके। शुक्रवार को भी यही हाल रहा। एडीएम व तहसीलदारों के चुनाव ड्यूटी में व्यस्त रहने की वजह से किसानों को मुआवजे के चेक नहीं बांटे जा सके।

    -Dainik Jagran
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  • अदालती मामलों में उलझा नोएडा

    नोएडा। प्राधिकरण इन दिनों अदालती पचड़ों में उलझ कर रह गया है। शहर की कुल संपत्तियों में से 20 फीसदी मुकदमों के घेरे में हैं, जबकि भूमि संबंधी मामलों की संख्या 4000 के आंकड़े को पार कर चुकी है। यही नहीं कई विकास संबंधी परियोजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में प्राधिकरण अधिकारी कोई भी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं, जिससे इनकी संख्या में कमी की जा सके।

    नोएडा प्राधिकरण का कानून विभाग इन दिनों काफी ज्यादा व्यस्त है। विधि विभाग अधिकांश समय परियोजनाओं और अन्य मामलों पर राय देने का काम कर रहा है। पिछले छह महीनों से विभाग के कानून अधिकारी जिला अदालतों से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ और सुप्रीम कोर्ट के चक्कर काटने में जुटे हैं। विभाग के अनुसार प्राधिकरण में जमीन से जुड़े मामलों की संख्या चार हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा विवाद आबादी और अतिक्रमण के संबंध में है। इसके अलावा पिछले दिनों बढ़े हुए मुआवजे को लेकर भी 300 से ज्यादा याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर हो चुकी हैं। यहीं नहीं वर्ष 2004 और 2006 आवंटन प्रक्रिया की जांच सीबीआई के पास पहुंची, जिसके मामले भी कोर्ट के माध्यम से प्राधिकरण आ रहे हैं। कई मामलों में ऐसी स्थिति बन चुकी है कि प्राधिकरण अपने स्तर से कोई भी निर्णय लेने में असमर्थता जता रहा है। ऐसे में मामलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से शहर के कई विकास कार्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

    वर्तमान में सेक्टर-37 पर बनने वाले ट्रैफिक जंक्शन के अंडरपास की निकासी को लेकर भी मामला कोर्ट में लंबित रहा। हालांकि निर्माण से जुड़े अधिकारियों की पैरवी ने रंग दिखाया और रास्ता मिल गया।

    जमीन संबंधी मामलों की संख्या पहुंची चार हजार

    शहर में विकास संबंधी परियोजनाओं पर पड़ा असर

    -Amar Ujala
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  • Buyers face delays in getting apartments

    http://www.livemint.com/2012/01/14001524/Buyers-face-delays-in-getting.html?h=B

    New Delhi: As developers across the country go slow on construction due to the shortage of labour, costlier building materials and liquidity drying up, home buyers are hurting, especially those who have purchased residences in the Noida-Greater Noida area.

    File Photo
    More than 1 lakh were affected last year in the land-acquisition controversy that led to developers having to pay higher compensation to farmers—money that will be raised from those who purchase residences there.Also hit are buyers of homes in one of the largest real estate developments in the area, Jaypee Wish Town in Sector 128 of Noida being developed by Jaypee Greens, the real estate arm of Jaiprakash Associates Ltd. (JAL), an infrastructure company that also runs hotels, cement plants, utilities and recently opened the Buddh International Race Circuit, which successfully hosted India’s first Formula One Grand Prix in October last year.
    The Jaypee Wish Town Flat Owners Association, which groups about 600 of them, was formed to lobby with the company’s promoters and has been in talks with them since last year. It said the developer has not given any clarity on completion dates of projects, possession or compensation for delay.
    “Some had invested their savings, paying a lump sum upfront, some had borrowed money to invest, some are still paying interest on borrowings and others moved into rented accommodation in anticipation of delivery—a variety of issues are faced by members whose liabilities continue to accrue with project completion being nowhere in sight,” said D.V.S Trehan, president of the association.
    Jaypee Greens is developing a total of around 25 projects comprising 30,000 units in the Noida-Greater Noida Region. Around 2,000 of these are in four mid-segment to upscale residential projects, Kalypso Court, Imperial Court, Pavilion Courts and Pavilion Heights, which have been delayed by one-two years already.
    Launched in early 2007 and 2008, the first three were scheduled to be completed by 2011. Pavilion Heights was launched in 2009 and expected to be ready in 2012.
    “Pavilion Heights is also running behind schedule by a year,” said Ajit Kumar, director, Jaypee Greens. “The other projects are running behind schedule by 1.5-2 years.”
    Kumar wasn’t able to get any more specific on completion dates or the number of affected home buyers. Mint was directed to Kumar after seeking to reach Manoj Gaur, executive chairman of JAL.
    While buyers face interminable delays, they have seen their payments increase due to changes in the regulatory policies. In 2010, the government imposed a service tax on construction activity, further penalising home buyers, already coping with relentlessly rising interest rates. Service tax, which was passed on by developers to customers, has led to property costs rising by around 2.6%.
    “Since these projects are delayed and still under-construction, we have to pay service tax from 2010,” Trehan said. “In an ideal situation, buyers would have been out of the service tax ambit. Buyers are now demanding a fair compensation, as mentioned in their builder-buyer agreements,” added Trehan.
    Jaypee Greens will provide compensation for delays, Kumar said.
    “Each customer has his own date of completion, as per his builder-buyer agreement from the time of booking,” he said. “Every such agreement in our case mentions three years and three months of time for possession. Therefore, each customer has a different date. And the compensation that will be given to buyers will be adjusted in the last payable installment.”
    Given the current liquidity crunch, developers have been going slow on execution, resulting in construction delays and higher unsold inventories, according to a recent study by Gurgaon-based property research firm PropEquity Analytics Pvt. Ltd. As of September 2011, the Delhi-National
    Capital Region had the maximum unsold inventory levels of residential real estate at 102,758 units, followed by the Mumbai Metropolitan Region (90,512 units), Bangalore (46,596 units) and Pune (40,734 units).
    A Delhi-based consultant who does not want to be named said that developers went slow on construction after 2009, as funds that came into the market in 2005 to mid-2008 had dried up. “Later, in the last part of 2010, the economic situation became uncertain,” he said. “Developers are currently facing problems such as a rise in labour cost, shortage of labour and rise in cost of building materials.”
    Developers are also affected by regulatory bottlenecks such as delays in project approvals and land-acquisition related uncertainty (especially in Noida and Greater Noida).
    The PropEquity study estimated that the delivery of 480,000 residential units across affordable, mid and luxury housing segments, scheduled for completion in 2011-13, will be delayed in 11 cities. The cities mentioned in the study are Gurgaon, Noida, Greater Noida, Mumbai, Navi Mumbai, Thane, Pune, Bangalore, Chennai, Hyderabad and Kolkata (east).
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  • अधिकारियों ने किसानों को दिलाया भरोसा

    ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण और किसानों के बीच शुक्रवार को वार्ता हुई। किसानों ने आबादी का निस्तारण और मुआवजा दिलाने की बात रखी। प्राधिकरण अधिकारियों ने किसानों से कहा कि मुआवजा वितरण का काम जारी है, लेकिन आबादी का निस्तारण चुनावी आचार संहिता के चलते बंद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों ने अपनी जमीन दी है, इसलिए उनको जितना लाभ मिलना चाहिए, उसमें कमी नहीं छोड़ी जाएगी।


    -Amar Ujala
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  • hello all, yesterday i went to Greater noida authority with my colleague to have a clearer picture on ne issue, some officials there told me that ncrpb approval work is going on and it has nothin to do with political game. they said most probably they will get the permission by 20th feb. i dont know how true are these government babu's but lets hope for the best.
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  • मुआवजा नहीं मिला तो काम रोकेंगे किसान

    मुआवजा नहीं मिला तो काम रोकेंगे किसान
    Jan 15, 09:13 pm
    बताएं
    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : तुस्याना गांव के किसानों ने मुआवजा न मिलने के विरोध में रविवार को पंचायत की। किसानों ने कहा कि उन्हें शीघ्र मुआवजे के चेक नहीं दिए गए तो वे प्राधिकरण का विकास एवं निर्माण कार्य बंद करा देंगे। किसान सोमवार को चेयरमैन व सीईओ से मिलकर अपना विरोध प्रकट करेंगे।
    गांव के पूर्व प्रधान रवि भाटी व पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रामनिवास भाटी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर प्राधिकरण कई गांवों के किसानों को 64.7 प्रतिशत मुआवजा बांट चुका है। तुस्याना गांव के किसानों ने दो माह पहले मुआवजे के लिए फाइल जमा की थी। प्राधिकरण ने अभी तक गांव के एक भी किसान को मुआवजा नहीं दिया है। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है। पंचायत में निर्णय लिया गया है कि किसानों को शीघ्र मुआवजे के चेक नहीं दिए गए तो गांव की जमीन पर जगह-जगह चल रहे प्राधिकरण और बिल्डरों के निर्माण कार्य को बंद करा दिया जाएगा। किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देने के लिए मजबूर होंगे। पूर्व प्रधान ने बताया कि सोमवार को किसान एक ज्ञापन प्राधिकरण चेयरमैन रमा रमण को सौंपकर शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग करेंगे। पंचायत में छह के बजाय 10 प्रतिशत जमीन देने का मामला भी उठाया गया। किसानों का कहना है कि उनके गांव में पर्याप्त जमीन बची है। किसानों को भूखंड की कीमत नहीं चाहिए।
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  • Guys

    what about farmers going to SC since it has been almost 3 months to go to SC after HC order came.
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  • Originally Posted by harpreetsg_delhi
    मुआवजा नहीं मिला तो काम रोकेंगे किसान
    Jan 15, 09:13 pm
    बताएं
    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : तुस्याना गांव के किसानों ने मुआवजा न मिलने के विरोध में रविवार को पंचायत की। किसानों ने कहा कि उन्हें शीघ्र मुआवजे के चेक नहीं दिए गए तो वे प्राधिकरण का विकास एवं निर्माण कार्य बंद करा देंगे। किसान सोमवार को चेयरमैन व सीईओ से मिलकर अपना विरोध प्रकट करेंगे।
    गांव के पूर्व प्रधान रवि भाटी व पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रामनिवास भाटी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर प्राधिकरण कई गांवों के किसानों को 64.7 प्रतिशत मुआवजा बांट चुका है। तुस्याना गांव के किसानों ने दो माह पहले मुआवजे के लिए फाइल जमा की थी। प्राधिकरण ने अभी तक गांव के एक भी किसान को मुआवजा नहीं दिया है। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है। पंचायत में निर्णय लिया गया है कि किसानों को शीघ्र मुआवजे के चेक नहीं दिए गए तो गांव की जमीन पर जगह-जगह चल रहे प्राधिकरण और बिल्डरों के निर्माण कार्य को बंद करा दिया जाएगा। किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देने के लिए मजबूर होंगे। पूर्व प्रधान ने बताया कि सोमवार को किसान एक ज्ञापन प्राधिकरण चेयरमैन रमा रमण को सौंपकर शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग करेंगे। पंचायत में छह के बजाय 10 प्रतिशत जमीन देने का मामला भी उठाया गया। किसानों का कहना है कि उनके गांव में पर्याप्त जमीन बची है। किसानों को भूखंड की कीमत नहीं चाहिए।

    What work would these farmers stop when there is no work?
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  • Originally Posted by cookie
    What work would these farmers stop when there is no work?


    hahahhaa good one !
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  • Originally Posted by cookie
    What work would these farmers stop when there is no work?


    :D Good One .... Lagta hai Farmers ko raat mai sapne aata hai ki builder unki jammen par kaam kar rahe hai.....

    Builders/Authority, farmers se dar rahe hai.... aur Farmers, builders/authority se dar rahe hai.... ;) dono sapne mai ek doosro ko he dekhte rahete hai....
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  • Originally Posted by saurabh2011
    :D Good One .... Lagta hai Farmers ko raat mai sapne aata hai ki builder unki jammen par kaam kar rahe hai.....

    Builders/Authority, farmers se dar rahe hai.... aur Farmers, builders/authority se dar rahe hai.... ;) dono sapne mai ek doosro ko he dekhte rahete hai....


    san sanna san saaayen saaayen ho rahi thi khet mein ... (old govinda song) :D
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  • Originally Posted by trialsurvey
    hahahhaa good one !

    Bro

    It seems that you were busy somewhere hunting your home in the field, away from PC. No posts from your side for the last couple of days otherwise most of the time I saw online.
    So finally decided or still hunting?
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  • cookie bro, trialsurvey bhai only believe in MISSING THE BUS every time.... soch rahe hai kab Noida mai 3000 PSF mai kuch malega..... All Bus , Auto , Riksha , Vikram has missed and missing one by one.

    Just Kidding..... trialsurvey ji serious ho jao if you are Really want to purchase as END USER POV. After Problem solved NE will also be not cheap if you are thinking. So better to buy in Noida Resale NOW.
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