पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
Read more
Reply
16355 Replies
Sort by :Filter by :
  • Simple rule.. जिसकी लाठी उसकी भेस

    Many guys have same intention that NCR planning board is working with very casual approach with this master plan approval process and passing time till election (we know which party has instructed).

    Did you know that GNoida Master plan 2031 was made in 2009 and amended many times by authority. Final MP-2031 was ready in 2011. This MP-2031 has Yamuna Expressway area (new sectors), G.Noida Phase-2 and many more area under authority’s table.

    Anyone has any idea..if MP -2031 was ready than why authority sent MP-2021 for approval with some amendments… this MP 2021 was ready even before 2009… and still authority has taken 3-4 months to JUST sent to NCR planning board…

    As per NCR Planning board RTI’s reply.. they will take at-least 3-4 months… means result will come after election and based on NEW Govt… they will decide whether they approve it or just play…pass pass game…


    No idea… who will come…. But that is sure that Congress/BJP can not be BIG party to make own govt without any support.. they might be able to increase seats but final race will be in between SP-BSP only..

    I will not post more political analysis as we already have one thread in Noida forum on this… If I post more… people start voting own party and putting own comments on politics and this thread will become useless which was meant for NE updates…

    Expect to see more drama and sure that NCR planning board will sure send this MP-2021 back to authority for amendments… unless any big turn is come in picture in UP govt.
    CommentQuote
  • Originally Posted by fritolay_ps
    somehow I feel that if BSP come in power than NCR planning board may have to approve it within week time... if Congress OR SP alliance come in power.. than NCR planning board may send master plan back to authority for some amendment.. and again 4-5 months gone....and than again same story... and NCR board will just to timepass and play with authority

    But Bhai

    Authority is under UP Govt. and one of the sources of revenue to Govt.
    In case of private company, I could have though like you.

    What do you say?
    CommentQuote
  • Authority is just a very good tool to be used by Govt.and politicians. Only Govt can decide whether to allot plot to builders and make money OR put any SEZ/industry policy...


    like SP has allotted many land to Reliance but BSP has taken back..... and tool was authority.

    UP planning board is under UP Govt (BSP) and NCR planning board works on Congress's instructions...

    I am sure that you have not noticed that UP planning board has approved this 2021 plan in within 19 working days (1 month 7 days with holidays).. why there is so much delay in NCR planning board since all basic work has been done same legal entity in UP..so NCR planning board to just need to put stamp and pass it on...
    CommentQuote
  • नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले में शार्ट लिस्टिंग


    इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा नोएडा एक्सटेंसन के लिए राज्य सरकार व प्राधिकरण के भूमि अधिग्रहण मामले की अगली सुनवाई की तिथि 27 मार्च नियत की है। हाईकोर्ट ने किसान तथा बिल्डरों आदि की तरफ से पूर्णपीठ के 21 अक्टूबर के फैसले पर पुनर्विचार की अर्जी की शुक्रवार को सुनवाई की। सुनवाई न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसयू खान तथा न्यायमूर्ति बीके शुक्ल की पूर्णपीठ ने की।

    पूर्णपीठ के समक्ष नोएडा व अन्य की तरफ से चार्ट दिया गया कि कई याचिकाएं ऐसी हैं जो पूर्णपीठ को संदर्भित मुद्दे के अन्तर्गत नहीं आती। कोर्ट ने सैकड़ों की संख्या में दाखिल याचिकाओं में से ऐसी याचिकाओं को अलग कर लिया जो पूर्णपीठ के फैसले से संबंधित नहीं थीं। इन्हें खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यमुना एक्सप्रेस वे मामले को अलग कर दिया। अर्जेन्सी क्लाज में अधिग्रहण की वैधता की चुनौती याचिकाओं को स्वीकार करते हुए पूर्णपीठ ने किसानों को अधिक मुआवजा सहित प्लाट देने का आदेश दिया था। साथ ही बिल्डरों तथा अथॉरिटी को राहत पहुंचाया था। अब जब निर्णय के अनुपालन की बारी आई तो पता चला कई याची इस मुद्दे से अलग हैं जिस पर अर्जी दी गई है।

    -Jagran.com
    CommentQuote
  • नोएडा एक्सटेंशन की टेंशन
    पुनर्विचार याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई 27 मार्च को
    बाद में अदालत पहुंचे 200 किसानों को भी मिलेगा लाभ

    ग्रेटर नोएडा/इलाहबाद। नोएडा एक्सटेंशन के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण व कुछ बिल्डरों द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका की सुनवाई अब 27 मार्च को होगी। इसके अलावा पूर्व के फैसले में शामिल 57 गांवों के बाद में पहुंचे करीब 200 किसानों को भी पूर्व के फैसले का लाभ मिलेगा और इन याचिकाएं को भी 27 मार्च की सुनवाई में शामिल किया जाएगा। कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले अन्य नए 19 गांवों की याचिकाओं पर भी इसी दिन सुनवाई होगी। इन सभी पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति अशोक भूषण, एसयू खान और वीके शुक्ला की पूर्णपीठ फिर से बनी।

    किसानों के वकील मुकेश रावल ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 57 गांवों की सुनवाई करते हुए 21 अक्तूबर 2011 को फैसला दिया था कि किसानों को 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए और 10 फीसदी जमीन मिले। साथ ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि जब तक मास्टर प्लान 2021 को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड मंजूर न कर दे, उससे पहले कोई विकास कार्य आगे न बढ़ाया जाए। इससे नोएडा एक्सटेंशन समेत वर्ष 2003-10 के करीब 30 हजार आवंटी प्रभावित हो गए।
    जिन 57 गांवों के किसानों को लाभ दिया गया था, बाद में उन्हीं गांव के करीब 200 किसानों ने याचिका दाखिल की थी, जिनकी उस दौरान सुनवाई नहीं हो सकी थी।

    इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि बाद में पहुंचे किसानों के लिए भी 21 अक्तूबर का फैसला लागू माना जाए। 27 मार्च को पुनर्विचार याचिका पर होने वाली सुनवाई में अब लाभ पाने वाले किसानों की याचिकाओं को भी शामिल रखा जाएगा।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इसके लिए कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। जिसमें अनुरोध किया था कि विकास कार्य में लगी रोक हटाई जाए और गैर पुश्तैनी किसान को जमीन देने का प्राधिकरण में कोई नियम नहीं है। इस मुद्दे पर 17 फरवरी को इसकी सुनवाई हुई। कोर्ट ने अगली सुनवाई 27 मार्च कर दी है।
    चूंकि कोर्ट में नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 57 गांव के अलावा नए 19 गांव के किसान भी पहुंच चुके हैं, उनकी सुनवाई भी 27 मार्च को की जाएगी। हालांकि जब कोर्ट ने 21 अक्तूबर 2011 को आदेश दिया था तो प्राधिकरण से कहा था कि वह चाहे तो उन किसानों को भी लाभ दे दे जो किसान याचिका दाखिल नहीं कर सके थे। प्राधिकरण ने उसी समय स्पष्ट कर दिया था कि जो कोर्ट में किसान नहीं गए हैं, उनको भी समान लाभ मिलेगा। लेकिन अब कोर्ट ने उन किसानों को लाभ देने का आदेश दे दिया है। पहले यह प्राधिकरण की मर्जी पर था।

    विकास कार्य से रोक हटाने का था अनुरोध
    19 नए गांवों की याचिकाओं पर भी होगी सुनवाई
    नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले पर फिर बनी फुल बेंच

    -Amar Ujala
    CommentQuote
  • नोएडा भूमि अधिग्रहण पर फिर बनी फुल बेंच

    इलाहाबाद (ब्यूरो)। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किसानों की जमीनें अधिग्रहीत करने का मामला एक बार फिर अदालत पहुंच गया है। इस बार हाईकोर्ट के 21 अक्टूबर 2011 के फैसले पर पुनर्विचार की अर्जी अथॉरिटी और कई बिल्डरों तथा किसानों की ओर से दी गई हैं। भूमि अधिग्रहण के मामले में फैसले के बाद भी सैकड़ों याचिकाएं दाखिल की गईं। इन सभी पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के आदेश से शुक्रवार को न्यायमूर्ति अशोक भूषण, एसयू खान और वीके शुक्ला की पूर्णपीठ एक बार फिर बैठी।

    सुनवाई के समय ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिवक्ता ने एक चार्ट अदालत को सौंपा, इसमें ऐसी याचिकाओं की सूची थी जो 21 अक्टूबर के आदेश से संबंधित नहीं थीं। न्यायालय ने इन सभी याचिकाओं को अलग कर दिया। इन सभी को अलग सुनवाई के लिए खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है। पूर्णपीठ उन्हीं मामलों की सुनवाई करेगी जिनमें पुनर्विचार प्रार्थनापत्र दिया गया है, या जो मामले 21 अक्टूबर के आदेश से प्रभावित हैं। उल्लेखनीय है कि नोएडा अथॉरिटी की ओर से दिए गए प्रार्थनापत्र में पूर्णपीठ के आदेश के कुछ हिस्से को संशोधित करने की मांग की गई है। इसी प्रकार से अन्य पक्षकारों ने आदेश में संशोधन या स्पष्टीकरण की मांग की है।

    21 अक्टूबर के आदेश में पूर्णपीठ ने भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाले तमाम मामलों का निस्तारण करते हुए किसानों को और अधिक मुआवजा तथा विकसित आबादी क्षेत्र में भूमि देने का निर्देश दिया था। पूर्णपीठ ने नोएडा अथॉरिटी और बिल्डरों को भी राहत दी थी। आदेश दिया कि जहां विकास कार्य प्रारंभ हो चुका है वहां अधिग्रहण रद्द नहीं होगा। निर्णय के अनुपालन के समय कुछ व्यवहारिक समस्याएं आ गई। जैसे पता चला कि कई याची इस पूरे मामले की परिधि में नहीं आते हैं। इसके बाद पक्षकारों की ओर से पुनर्विचार प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया।
    नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के पुनर्विचार प्रार्थनापत्रों पर होगी सुनवाई

    -amar ujala
    CommentQuote
  • Bad news for authority... HC asked G.Noida authority to pay 10% develop land and 64% additional compensation to ALL FARMERS and it does not matter... in which year land was acquired....

    G.Noida Authority now has to pay approx 4-5k crores to farmers and they will charge us from allottees.. so guys..ready to pay more
    Attachments:
    CommentQuote
  • fritoley SIR,

    suppose SP-Congress coalition comes into power. do u think this all mess wil be solved?
    and secnodly, what exactly is ur profession. you seems to be keeping a tight vigil on developments?
    CommentQuote
  • Important Notice from NEFOMA
    *************************


    Dear Members,

    We NEFOMA has been invited in "Noida First Conclave" organized by HINDUSTAN TIMES.

    In this conclave,four political parties – BJP, BSP, Congress and SP will speak their plans for Noida and Noida extension.

    We,buyer can raise our problem of Noida Extension in this event.

    ... You are requested to attend the conclave in large number to add to our voice and make it a success.

    Date: 20/02/2012 (Monday)

    Time: 3.30 pm

    Venue: Army Public School, near Shaheed Smarak, Noida,Sec 37

    For more detail ,one can contact on mob no. 8595071867,9818151814 (Admin-NEFOMA)


    Location: noida army public school - Google Maps
    CommentQuote
  • Masterplan delay a jolt for Noida Extn homebuyers




    In a fresh jolt to homebuyers in the stuck Noida Extension projects, the NCR Planning Board has refused to set a deadline for clearing the Greater Noida Masterplan 2021, without which the projects cannot take off. Four months ago, however, the Allahabad high court gave a compromise formula, saying while the land would remain with the builders, farmers would get increased benefits.

    The trouble began in May 2011, when the HC returned the land to farmers in the Shahberi village and the Supreme Court upheld the order. The HC quashed acquisition in the Patwari village too.

    Although the Shahberi projects could not be revived because of the SC order, a larger HC bench said in October that realty projects could go on only if the masterplan was approved by the NCR planning board, a central body.

    The board has blamed the UP government for delay, as the Greater Noida authority moved court with a review petition, saying the NCR planning board did not have the powers to approve the state's plans.

    Now, the authority wants to resume the projects without the NCR board's nod. Of the 2.5 lakh housing units planned in Noida Extension, one lakh have already been booked.

    The home-buyers quoted the board's member secretary Naini Jayaseelam as saying: “We received the complete Greater Noida Masterplan 2021 only in January 2012. The UP government itself delayed matters.“

    Abhishek Kumar, president of a buyers' association, said, “Buyers are suffering because of a Centre-state tussle.“

    Replying to an RTI plea, the board said the masterplan would be placed before the statutory planning committee and its recommendations would be sent to the NCR board. The process could take two-three months.

    hey staged demonstrations, took out protest rallies, argued with officials and filed RTI applications. And, while doing all this, they have been gradually losing hope. Nine months after the affordable housing dreams in Noida Extension received the first setback, life for thousands of homebuyers has changed forever.

    Shweta Bharti (40) is an IT professional. She lives in a rented flat in Delhi's Janakpuri and works there. “It's a multipronged battle. We are paying monthly rents. EMIs are draining us. After five months of battle, a judgment in October raised hopes, but construction has not yet started,“ she said.

    Devendra Kumar (35), another IT professional, said, “I stay and work in Mayur Vihar. But much of my time is consumed in pursuit of my house. We have formed a group with our office in Noida sector 5. We know this fight is taking a toll on our personal and professional life.“

    For an average house cost of R20 lakh, a buyer has deposited 10% -R2 lakh. He was supposed to deposit 10% more at a later stage. His bank has financed 40% (R8 lakh). Forty per cent more was to be financed later. The monthly EMI is between R10,000 and R15,000.

    An equally big amount goes in rentals per month.
    Abhishek Kumar, president of a buyers' association, said, “Going by the builders' promises, buyers should have got the possession by now. Without rentals, we could have managed EMIs. But everything looks so uncertain now. No bank has offered us any relief.“

    A larger bench of the HC raised hopes of a realty revival in October last year when it ruled that land would remain with builders and farmers would get increased benefits. But there was a catch. The court also said construction would not begin till land use changes made to Greater Noida's master plan to create a Noida Extension housing hub were cleared by the NCR planning board in Delhi.

    Four months have gone by but the approval has not come.

    FRESH TROUBLE Meanwhile, builders have stopped giving money to the authority (to be distributed among farmers) and the authority is not giving plots of developed land to farmers as it cannot undertake development activity. Farmers have moved the Supreme Court, seeking their land back. LAND ACQUISITION ROW Dreams of affordable housing have been caught in legal hassles In Noida Extension, 2.5 lakh houses have been planned and 1 lakh units booked.

    Considering the average cost of a house (R20 lakh), the idea was to rake in R50,000 crore.

    Nearly 1,00,000 flats worth R20,000 crore have been booked.

    Banks have sanctioned R2,166.2 cr as home loans and other construction loans for real estate projects in the THE STANDS “As soon as the NCR board approval comes, we will start construction. Immediate delivery of flats is our priority“ -ANIL SHARMA a builders' representative “Noida Extension has become a battleground for UP and the Centre. Both are playing vote-bank politics.“ --DEVENDRA KUMAR a buyers' representative “We received the Greater Noida master plan only in January 2012.

    The Uttar Pradesh government itself delayed matters. We cannot set a deadline for the approval --NAINI JAYASEELAM, NCR board “We have filed a review petition in the high court, seeking early resumption of Noida Extension projects“ --RAMA RAMAN Greater Noida authority QUESTIONS THAT NEED ANSWERS Why the Greater Noida authority has failed to get its master plan cleared Why builders did not stop bookings after farmers challenged acquisition If land use was changed, resulting in halting of projects, whose fault is this Why the banks sanctioned loans when the title of the land was not clear





    -HT
    CommentQuote
  • Flat buyers' life changed forever



    In a fresh jolt to homebuyers in the stuck Noida Extension projects, the NCR Planning Board has refused to set a deadline for clearing the Greater Noida Masterplan 2021, without which the projects cannot take off.

    Four months ago, however, the Allahabad high court gave a compromise formula, saying while the land would remain with the builders, farmers would get increased benefits.

    The trouble began in May 2011, when the HC returned the land to farmers in the Shahberi village and the Supreme Court upheld the order. The HC quashed acquisition in the Patwari village too.

    Although the Shahberi projects could not be revived because of the SC order, a larger HC bench said in October that realty projects could go on only if the masterplan was approved by the NCR planning board, a central body.

    The board has blamed the UP government for delay, as the Greater Noida authority moved court with a review petition, saying the NCR planning board did not have the powers to approve the state's plans.

    Now, the authority wants to resume the projects without the NCR board's nod. Of the 2.5 lakh housing units planned in Noida Extension, one lakh have already been booked.
    The home-buyers quoted the board's member secretary Naini Jayaseelam as saying: “We received the complete Greater Noida Masterplan 2021 only in January 2012. The UP government itself delayed matters.“

    Abhishek Kumar, president of a buyers' association, said, “Buyers are suffering because of a Centre-state tussle.“

    Replying to an RTI plea, the board said the masterplan would be placed before the statutory planning committee and its recommendations would be sent to the NCR board. The process could take two-three months

    -HT
    CommentQuote
  • Originally Posted by fritolay_ps
    Flat buyers' life changed forever



    In a fresh jolt to homebuyers in the stuck Noida Extension projects, the NCR Planning Board has refused to set a deadline for clearing the Greater Noida Masterplan 2021, without which the projects cannot take off.

    Four months ago, however, the Allahabad high court gave a compromise formula, saying while the land would remain with the builders, farmers would get increased benefits.

    The trouble began in May 2011, when the HC returned the land to farmers in the Shahberi village and the Supreme Court upheld the order. The HC quashed acquisition in the Patwari village too.

    Although the Shahberi projects could not be revived because of the SC order, a larger HC bench said in October that realty projects could go on only if the masterplan was approved by the NCR planning board, a central body.

    The board has blamed the UP government for delay, as the Greater Noida authority moved court with a review petition, saying the NCR planning board did not have the powers to approve the state's plans.

    Now, the authority wants to resume the projects without the NCR board's nod. Of the 2.5 lakh housing units planned in Noida Extension, one lakh have already been booked.
    The home-buyers quoted the board's member secretary Naini Jayaseelam as saying: “We received the complete Greater Noida Masterplan 2021 only in January 2012. The UP government itself delayed matters.“

    Abhishek Kumar, president of a buyers' association, said, “Buyers are suffering because of a Centre-state tussle.“

    Replying to an RTI plea, the board said the masterplan would be placed before the statutory planning committee and its recommendations would be sent to the NCR board. The process could take two-three months

    -HT


    This seems delay of year for Noida Extn...projects seems to get delivered in five years now. The place was developed for middle class now the buyers are jostling to make their ends meet....pathetic situation
    CommentQuote
  • सुप्रीम कोर्ट में बिसरख के किसानों की सुनवाई 21 को


    ग्रेटर नोएडा, : सुप्रीम कोर्ट बिसरख गांव के किसानों की याचिकाओं पर 21 फरवरी को सुनवाई करेगा। गांव के करीब एक दर्जन किसानों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। किसानों का कहना है कि उन्होंने अतिरिक्त मुआवजा नहीं मांगा था। किसान अपनी जमीन वापस चाहते हैं। याचिका दायर करने वालों में हरिसिंह, रिछपाल सिंह, जगमाल, सुखवीर, गुलबीर, गंभीर, गौरव, अभिनव, मंजू, पदम आदि शामिल हैं। किसानों की याचिकाओं पर कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तिथि मंगलवार तय की है। वहीं प्राधिकरण का कहना है कि गांव के अधिकतर किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट के 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा लेने पर अपनी सहमति जता चुके हैं। गांव के कई किसानों को अतिरिक्त मुआवजे के चेक बांटे जा चुके हैं। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने प्राधिकरण के मास्टर प्लान को मंजूरी मिलने के बाद किसानों को अर्जित भूमि की एवज में भूखंड आवंटित कर दिए जाएंगे।

    तुस्याना के किसानों को बांटा मुआवजा
    प्राधिकरण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशानुसार तुस्याना गांव के किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के चेक बांटे। करीब 15 किसानों को करीब तीन करोड़ रुपये के चेक बांटे गए। गांव में अब तक 20 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका हैं। एडीएम एलए हरनाम सिंह ने बताया कि छह अन्य गांवों में मुआवजा बांटने के लिए किसानों की फाइल तैयार कराई जा रही है। जांच के उपरांत किसानों को चेक वितरित कर दिए जाएंगे।

    -Dainik Jagran
    CommentQuote
  • Originally Posted by fritolay_ps
    सुप्रीम कोर्ट में बिसरख के किसानों की सुनवाई 21 को


    Today is 21st Feb, can anybody inform, what happened in SC in Bisrakh case.
    CommentQuote
  • किसानों की याचिकाओं पर कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तिथि मंगलवार तय की है।

    updated
    CommentQuote