पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Today is 21'st Feb. So is the hearing going on?
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  • Thank fritolay_ps, but since this news item was published on 19th Sunday

    And it clearly mentions 21st as next date, I have reason to believe it is today. However, clearly there is some confusion as it also mentions "next Tuesday" as the hearing date.
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  • Lets wait for more 2-3 hours...we sure have news else worst case.. by tomorrow news.. we will have updates
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  • Noida Board: Bring in public representation

    A section of voters and representatives of UP’s three main opposition parties — BJP, SP and Congress — are on the same page regarding the need to bring in public participation in the Noida authority board. Speakers and participants at HT’s Noida First conclave said public representation was a must in a body that decides policy matters and clears development projects for the city. The conclave was held to bring candidates of all major political parties together ahead of the Assembly elections and discuss how to realise Noida’s true potential.

    Noida Board has been an all-bureaucrat board. RWA representatives said though projects worth thousands of crores were executed, there was no accountability.

    “We have been demanding the representation of RWAs for years. The authority does not pay attention to our demands and suggestions on civic issues,” said Munna K Sharma, sector 71 RWA president.

    Not only RWAs and MLAs, even village panchayat heads also should be members in the board because villagers have a major stake in this city,” said Dalbir Yadav, who represented Noida Samajwadi Party candidate Sunil Chaudhary at the conclave.

    “If our party forms the next state government, we will change the way the authority board functions,” said Dr VS Chauhan, Congress candidate from Noida.

    BJP candidate Dr Mahesh Sharma replied, “MLA’s job is to raise issues related to people. If I get elected I will work towards democratisation of the authority board and also ensure plots in Noida are allotted on free-hold basis on not on lease.”

    A safe tomorrow
    For the BSP — bijli (electricity), sadak (road) and paani (water) — factor often reigns supreme in elections, but in the context of Noida, ‘s’ stands for ‘suraksha (security) and not sadak.”

    Hindustan Times on Monday provided an interface between the candidates of important political parties — BJP, Congress and Samajwadi Party (BSP candidate Om Datt Sharma could not make it and SP candidate sent his representative) — and voters of the city.

    A fairly large gathering comprising representatives of RWAs, working professionals, industrialists, retired defence personnel and even schoolchildren asked some tough questions and the three politicians, after initially getting into ‘political squabbling’ with each other, spelt out their vision for the city.

    Mahesh Sharma (BJP), VS Chauhan (Congress) and Dalvir Yadav (SP) admitted there was a change in the political atmosphere Noida had become an assembly seat, and an urban one at that, for the first time.

    -HT
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  • Originally Posted by fritolay_ps

    Not only RWAs and MLAs, even village panchayat heads also should be members in the board because villagers have a major stake in this city,” said Dalbir Yadav, who represented Noida Samajwadi Party candidate Sunil Chaudhary at the conclave.



    If Farmers leader come in Noida Board... than forget about any new land acquisation....farmers either want market rate OR other thousands of demands.... :bab (45):
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  • Hearing in land cases deferred


    ALLAHABAD: A three-judge full bench of the Allahabad High Court on Friday deferred the hearing of the writ petitions filed by the farmers challenging the notifications issued for acquisition of their agricultural lands by the Noida and Greater Noida authorities in Noida, Greater Noida and Noida Extension areas.

    This order was passed by the full bench of Justice Ashok Bhushan, Justice SU Khan and Justice V K Shukla, after hearing the counsels for the farmers, Noida and Greater Noida authorities, and chief standing counsel, who represented the state government.

    Passing the order, the bench said that those writ petitions of the farmers, which are not covered by the earlier judgment of the full bench given in respect of land acquisition of farmers in Noida, Greater Noida and Noida Extension areas, shall be heard separately by the appropriate bench on March 27.

    The court deferred the hearing of these writ petitions till March 27, as the chief standing counsel of the state, M C Chaturvedi, requested the court to adjourn the hearing "as the officers are busy in state assembly elections."


    -TOI
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  • Thanks Sir

    Originally Posted by fritolay_ps
    पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता



    जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है


    -Dainik Jagran.


    Thank you so much sir ...
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  • एनसीआर के जवाब से संतुष्ट नहीं नेफोमा
    आरटीआई के माध्यम से पूछा गया था सवाल

    नोएडा। एक्सटेंशन में आशियाने सजाने वालेे अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में जुट गए हैं। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की दशा में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। नेफोमा ने आरटीआई के माध्यम से प्लानिंग बोर्ड से कुछ सवाल पूछे थे, जिसके जवाब में गोलमोल उत्तर दिया गया है। इसके बाद ही एसोसिएशन के सदस्य अगली रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

    नोएडा एक्सटेंशन पर ग्राहकों की टेंशन कम होती नजर नहीं आ रही है। दीपावली के मौके पर अक्तूबर-2011 को हाईकोर्ट ने एक्सटेंशन पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी लिए बिना निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने फाइल बोर्ड के पास भेज दी, जिसमें कुछ संशोधन का आदेश दिया गया। इन्हें भी पूरा करते हुए प्राधिकरण ने फिर फाइल प्लानिंग बोर्ड को सौंप दी। इसके बाद तीन महीने से ज्यादा समय गुजर गया, लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया।

    नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स मेंबर एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने इस संबंध में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में आरटीआई दाखिल की और एक्सटेंशन के संबंध में जवाब मांगे। सभी जवाब में प्लानिंग बोर्ड ने गोलमोल उत्तर दिया है। एक जवाब में बोर्ड ने कहा कि एक्सटेंशन संबंधी फाइल एक अधिकारी के पास है, जो अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि लाखों लोगों के सपनों से जुड़े हुए प्रोजेक्ट पर किस तरह से मनमानी की जा रही है।

    अभिषेक कुमार का कहना है कि मार्च में अगर प्लानिंग बोर्ड ने निर्णय नहीं लिया तो अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

    -amar ujala
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  • निवेशकों को अभी करना होगा इंतजार
    ग्रेटर नोएडा।
    नोएडा एक्सटेंशन समेत ग्रेटर नोएडा के करीब 30 हजार आवंटियों को अभी और इंतजार करना होगा। क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट 27 मार्च को फिर से प्राधिकरण की पुनर्विचार याचिका सुनेगा। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड कब बैठक करेगा और मास्टर प्लान 2021 को हरी झंडी देगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है। देरी का खामियाजा एक नहीं सभी पक्ष उठा रहे हैं। जिन 70 से ज्यादा बिल्डरों ने एक्सटेंशन में जमीन लेकर प्रोेजेक्ट लांच किए थे, कोर्ट के स्टे के कारण सभी जहां के तहां रुके पड़े हैं । करीब दो हजार करोड़ रुपये बिल्डरों ने निर्माण सामग्री में लगा दिया था, वह ज्यादातर बेकार हो चुका है। लोहे में जंग लग चुकी है। माना तो यह जा रहा है कि करीब एक लाख से ज्यादा निवेशकों ने पैसा लगा दिया था, उसमें काफी लोगों ने किस्तें रोक दी हैं। करीब 3.5 लाख फ्लैट बनने थे, अब बुकिंग का काम बंद पड़ा है। इतना ही नहीं प्राधिकरण ने भी करीब 1600 करोड़ रुपये सड़क समेत अन्य विकास कार्यों में लगा दिया था, वह भी रुका हुआ है। इसमें किसानों को भी अगर देखा जाए तो मुआवजा का अतिरिक्त 64 फीसदी और 10 फीसदी जमीन देने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया था। कुछ किसानों को छोड़कर मुआवजा नहीं मिल पाया है और कोर्ट के स्टे के कारण 10 फीसदी जमीन का मामला भी उलझा पड़ा है। आबादी की जमीन छोड़ी तो गई है लेकिन जब तक उसकी बैक लीज न हो जाए, पूर्व रूप से मालिकाना हक नहीं मिलेगा। अगर क्षेत्र में विकास भी रूक जाता है तो किसानों को आबादी समेत अन्य का लाभ भी कम ही मिल सकेगा। जितना ज्यादा क्षेत्र का विकास होगा, उतनी ही लाभ किसानों को अधिक मिलेगा, यह बात किसान भी बखूबी जानते हैं। ब्यूरो

    -Amar Ujala
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  • नोएडा एक्सटेंशनः घर के लिए अब rti और धरने की राह

    ग्रेटर नोएडा
    नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट बुक कराने वालों को अपने घर का सपना पूरा होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इस इलाके में कंस्ट्रक्शन शुरू करने के लिए ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी मिलनी जरूरी है। बोर्ड ने एक आरटीआई के जवाब में कहा है कि मंजूरी देने की प्रक्रिया में अभी कम से कम 2-3 महीने लग जाएंगे। जाहिर है, इससे निवेशकों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उनका गुस्सा और मायूसी चुनाव के बाद धरने की शक्ल ले सकते हैं। इसकी चेतावनी उन्होंने दे दी है।

    दरअसल, नोएडा एक्सटेंशन मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के कई महीने गुजर जाने के बावजूद बायर्स को तुरंत कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। इस बीच, किसानों को ज्यादा मुआवजा देने के कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए कई बिल्डरों की तरफ से फ्लैट की कीमत बढ़ाने और पुराने बायर्स से भी ज्यादा रकम वसूलने के मामले भी सामने आ रहे हैं। उस पर मन में यह डर भी है कि यूपी में सरकार बदलने पर हालात जाने क्या शक्ल लें! बीएसपी की बजाय किसी दूसरी पाटीर् की सरकार मामले की नई जांच न बैठा दे। हालांकि अथॉरिटी अफसरों का कहना है कि यह मामला हाई कोर्ट ने सेटल कर दिया है, इसलिए इस प्रोजेक्ट में अब कोई अड़चन नहीं आएगी। बहरहाल, मायूस हो चले निवेशकों ने थक-हारकर आरटीआई का रास्ता चुना। उन्होंने 23 जनवरी को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के दिल्ली ऑफिस में आरटीआई दायर की, लेकिन जवाब से उनमें रोष है। नेफोमा प्रेसिडेंट अभिषेक कुमार ने बताया कि अब निवेशक विधानसभा चुनाव के बाद एनसीआर बोर्ड के दिल्ली ऑफिस के बाहर मास्टर प्लान की मंजूरी तक धरने पर बैठेंगे।
    -nbt
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    उस पर मन में यह डर भी है कि यूपी में सरकार बदलने पर हालात जाने क्या शक्ल लें! बीएसपी की बजाय किसी दूसरी पाटीर् की सरकार मामले की नई जांच न बैठा दे।


    This is very important point ... you can not trust other party... SP for sure... they will revenge for Reliance land deal cancelation.
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  • नेफोमा ने आरटीआई के माध्यम से प्लानिंग बोर्ड से कुछ सवाल पूछे थे, जिसके जवाब में गोलमोल उत्तर दिया गया है। इसके बाद ही एसोसिएशन के सदस्य अगली रणनीति बनाने में जुट गए हैं।


    This is what I have been telling many times.. NCR planning board aka Congress is waiting for election result...
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  • जनता चाहे प्राधिकरण में मांगे हिस्सेदारी

    नोएडा, कार्यालय संवाददाता। नोएडा के विकास की योजना बनाने में जनभागीदारी, हरेक को मीठा पानी, नोएडा एक्सटेंशन में घर, सस्ता इलाज और हर वक्त बिजली। ये पांचों चीजें कब तक मिल जाएंगी, इनका जवाब जानने के लिए नोएडा की जनता कितनी बेचैन है। इसकी बानगी सोमवार को आर्मी पब्लिक स्कूल में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ द्वारा आयोजित ‘नोएडा फर्स्ट’ कांक्लेव में देखने को मिली। ज्यादातर लोगों ने इन्हीं पांच मुद्दों पर नोएडा विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों से सवाल किए।



    उम्मीदवारों ने कुछ सवालों के सीधे जवाब दिए तो कुछ के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया। भाजपा प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा, कांग्रेस के उम्मीदवार डॉ. वीएस चौहान खुद अपना पक्ष रखने कांक्लेव में शरीक हुए। जबकि सपा प्रत्याशी ने पूर्व महानगर अध्यक्ष दलबीर यादव को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा। बसपा की ओर से कोई शरीक नहीं हुआ। तीनों दलों के लोगों ने नोएडा के विकास के प्रति अपना नजरिया भी शहरियों के बीच रखा। इस दौरान तीनों ने एक-दूसरे पर आरोप जड़े। मगर कार्यक्रम के संचालक राजेश महापात्रा और लोगों ने नोएडा से जुड़े मुद्दों पर बात करने की ताकीद प्रत्याशियों को की। फिर लोगों ने अपनी समस्याओं से जुड़े सवाल उम्मीदवारों से किए। लोगों के लहजे और सवालों से साफ झलक रहा था कि विकास की योजनाएं बनाते समय जनता की कोई राय नहीं लिए जाने से उनमें रोष है।

    लोगों का कहना था कि बिना जनभागीदारी के विकास का उतना लाभ नहीं मिल पा रहा है, जितना कि मिलना चाहिए। बुजुर्ग एमएस बटालिया ने मार्मिक अंदाज में प्रत्याशियों से पूछा, ‘36 साल हो गए नोएडा को बसे हुए, हमें कब टैप से पीने का पानी मिलेगा? कब तक रोजाना इसके लिए पैसे खर्च करेंगे?’ कार्यक्रम में दो दर्जन से अधिक ऐसे लोग भी मौजूद थे, जिनकी गाढ़ी कमाई नोएडा एक्सटेंशन में फंस गई है। अभिषेक और विजय त्रिवेदी ने प्रत्याशियों से पूछा कि कब तक हमें हमारा घर मिल जाएगा।

    आरटीआई एक्टिविस्ट एयर कॉमोडोर (सेवानिवृत्त) लोकेश बत्रा ने पूछा कि 104 बैंक शिफ्ट होने जा रहे हैं। हर आदमी इससे परेशान होना है। पर प्रत्याशी इसके लिए क्यों कुछ नहीं कर रहे हैं। कक्षा 11 की छात्रा अमृत बरार ने भी मासूमियत के साथ प्रत्याशियों से सवाल किया कि कानून बन जाते हैं, उनका पालन क्यों नहीं होता है।

    उनके सेक्टर की गंदगी हर रोज स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए मुसीबत बनी हुई है। सबसे ज्यादा पूछे गए पांच सवाल-नोएडा प्राधिकरण बोर्ड में अभी तक जन प्रतिनिधियों, आरडब्ल्यूए और ग्राम प्रधानों की भागीदारी क्यों नहीं हो पाई ?जवाब-कमोबेश तीनों लोगों ने एक ही जवाब दिया। वह था भागीदारी होनी चाहिए। सरकार बनने पर मुख्यमंत्री से यह बदलाव करवाएंगे। -शहर बसने के 36 साल बाद भी बोतलबंद पानी पर क्यों जिंदा हैं लोग ? जवाब- तीनों पार्टियों का एक ही जवाब था। कहा, कब तक मिल पाया अभी कहना मुश्किल, मगर सभी लोगों को मीठा पानी दिलाना प्राथमिकता होगी।

    -नोएडा एक्सटेंशन का भविष्य क्या है? हमें लगता है कि सरकार बदल गई तो एक लाख लोगों का पैसा फंस जाएगा। जवाब- कांग्रेस- मामला कोर्ट में है, टिप्पणी नहीं कर सकता है। पर मैं निवेशकों के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।

    बीजेपी:- बिल्डरों और सरकार की मिलीभगत से लाखों लोगों का रुपया फंसा है। मैं लड़ाई में साथ हूं। मैं निवेशकों को पहले स्थान पर रखूंगा।

    सपा:- न्यायालय का आदेश मान्य होगा। किसानों को भी न्याय मिलेगा और किसी निवेशक का पैसा भी नहीं फंसने दिया जाएगा। -नोएडा में इलाज बहुत महंगा है। लीज डीड में लिखा होने के बावजूद अस्पतालों में गरीबों का मुफ्त में इलाज नहीं हो पा रहा है।

    सपा:-हम तो शुरू से ही इसकी मांग कर रहे हैं।

    कांग्रेस:- लीज डीड के मुताबिक अस्पताल गरीबों और किसानों का मुफ्त में इलाज करेंगे। स्कूलों में भी किसानों के बच्चों को दाखिले में आरक्षण मिलेगा।

    बीजेपी:-मैं पिछले 30 वर्षो से नोएडा की जनता की सेवा में लगा हूं। घोड़ी बछेम्डा और भट्टा पारसौल में घायल हुए लोगों के इलाज में करीब 50 लाख रुपये का इलाज मुफ्त किया है। कोई गरीब पैसा नहीं होने की वजह से इलाज किए बगैर अस्पताल से नहीं लौटाया जाता है। -नो पावर कट जोन है, पर एक भी दिन ऐसा नहीं होता, जब बिजली न जाए। उद्यमी सबसे ज्यादा परेशान हैं। कब तक बिजली संकट से मुक्ति मिलेगी।

    कांग्रेस:- पिछले 22 सालों में यूपी में एक भी पावर प्लांट नहीं लगा। दूसरी सरकारों ने कांग्रेस के लगाए प्लांट भी बेच दिए। बगैर बिजलीघर लगे। संकट दूर नहीं होगा। हमारी प्राथमिकता बिजली उत्पादन बढ़ाना होगी।

    सपा:- कांग्रेस जिम्मेदार है। दादरी में पावर प्लांट की तैयारी थी। पर केंद्र सरकार ने गैस नहीं दी। हम सत्ता में लौट रहे हैं। फिर से नए पावर प्लांट लगाएंगे।

    बीजेपी:- संकट दूर करने के लिए ईमानदारी से प्रयास की जरूरत है। सपा सरकार यदि बिजली संकट दूर करना चाहती थी, तो पहले गैस का इंतजाम करती। दरअसल पावर प्लांट के नाम पर अंबानी परिवार को कई सौ एकड़ जमीन पर कब्जा कराना प्राथमिकता थी सपा सरकार की। ग्राफिक्स के लिएपूछे गए प्रश्नों का प्रतिशतअथॉरिटी में भागीदारी- 25 प्रतिशतमीठा पानी- 20 प्रतिशतनोएडा एक्सटेंशन- 15 प्रतिशतस्वास्थ्य- 10 प्रतिशतबिजली- 10 प्रतिशतराष्ट्रीय मुद्दों में नहीं दिखाई ज्यादा दिलचस्पीशहरियों ने प्रत्याशियों से राष्ट्रीय मुद्दों पर बात करने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। कुछ लोगों ने प्रश्न पूछने भी चाहे तो उनके बगल में बैठे शहरियों ने बीच में ही टोक दिया और नोएडा से जुड़े सवाल करने की सलाह दी। टोकाटाकी के बावजूद कुछ लोगों ने ओबीसी श्रेणी में मुसलमानों का कोटा, सभी पार्टियों का भ्रष्टाचार में लिप्त होना, कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी द्वारा किसानों के मुद्दों को यूपी चुनाव के पहले ही क्यों उठाने के कुछ सवाल जरूर पूछे गए। प्रत्याशियों ने भी राष्ट्रीय महत्व के सवालों के जवाब देने में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। चाय-नाश्ते पर भी शहरियों ने प्रत्याशियों पर दागे सवालजो लोग प्रश्नकाल में सवाल नहीं कर पाए थे, उन्होंने कांक्लेव के बाद चाय के दौरान प्रत्याशियों से सवाल पूछे। ये सवाल सेक्टरों की गंदगी से लेकर अथॉरिटी में जनता की सुनवाई नहीं होने तक थे। प्रत्याशियों ने भी मौके की नजाकत समझते हुए धैर्यपूर्वक हर सवाल का जवाब दिया।

    -Hindustan
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  • Again GOLI from our politicians to digest. BTW yesterday what happened in Supreme Court as yesterday was 21st.
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  • If things are taking place at this pace and if this is the political will then Noida Extension looks all set to doom.
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