पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • I have been saying this for a long long time.....This is India..and HC, SC...all are influenced.

    UP Elections once over and Winner decided will clear matters...any winner...no problem...BSP, SP, doesnt matter...the govt. or coalition should be stable

    Hung parliament, weak coalitions, Presidential rules..will Delay things

    Its all related to elections..nothing else....

    Wait for election results...then talk about this matter...
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  • Agree with fieldworker
    News can't be blindly trusted.
    Although I do think SC Will carve out a 'middle way'
    And please, no one is spreading panic on NE
    its as spread as it can be, and none of it is factually wrong
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  • Originally Posted by zohaib2012
    I have been saying this for a long long time.....This is India..and HC, SC...all are influenced.

    UP Elections once over and Winner decided will clear matters...any winner...no problem...BSP, SP, doesnt matter...the govt. or coalition should be stable

    Hung parliament, weak coalitions, Presidential rules..will Delay things

    Its all related to elections..nothing else....

    Wait for election results...then talk about this matter...


    BUT ...... What if Congress or a Coalition supported by it comes to power.....

    It is open secret that Gandhi family have ownerships (via vadhera) in various Real Estate Builders (like DLF etc) in Gurgaon.

    ........So the assumption that they will not like any other real estate market in NCR to give competition to Gurgaon RE.
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  • अखिलेश ने किसानों पर डाले डोरे


    समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को नोएडा के सेक्टर-121 में एक जनसभा में किसान और मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने का भरपूर प्रयास किया। उन्होंने किसानों को सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा देने की बात कही

    जिले में हाल ही में जबरदस्त किसान आंदोलन हुआ था, लिहाजा उन्होंने किसानों के अधिकार की भी बात की। अखिलेश ने कहा कि सपा की सरकार बनने पर किसानों की आबादी जस की तस नियमित की जाएगी। उनकी जमीन जबरन अधिग्रहीत नहीं की जाएगी। विकास के लिए अगर अधिग्रहण होता है तो किसान को सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा मिलेगा नोएडा के किसानों पर वर्षों से चल रहे मुकदमे वापस लिए जाएंगे। उन्होंने नोएडा को फ्री होल्ड कराने का भी आश्वासन दिया।

    -Dainik jagran
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  • अधिग्रहण के ‘साइड इफेक्‍ट’

    मुख्यमंत्री के ड्रीमलैंड और यूपी का शो विन्डो कहे जाने वाले जिला गौतमबुद्धनगर में मुद्दे कुछ अलग हैं। यहां सड़क, बिजली और पानी की राजनीति नहीं दिख रही है। यहां तो बस भूमि अधिग्रहण और जमीनी विवाद के मामलों के ‘साइड इफैक्ट’ ही देखने को मिल रहे हैं।

    गगनचुंबी इमारतों की चकाचौंध बिखेरने वाले जिले में बीते साल ऐसे मुद्दे उपजे जो सड़क से लेकर संसद तक पहुंच गए। नोएडा एक्सटेंशन, भट्टा पारसौल, बैंक व व्यवसायिक स्थलों की सीलिंग ने जनता को झकझोर दिया। देशभर में सुर्खियां बने इन विवादों ने चुनाव से ठीक पहले कई दलों को बैठे बिठाए ऐसे मुद्दे दे दिए, जिन्हें वे लगे हाथ कैश कर सकें।

    जरा एक नजर जिले की चुनावी मांगों पर डालिए। जिले के उद्यमी, आरडब्ल्यू, किसान व व्यापारी सभी चारों वर्ग चाहते हैं कि उनका कोई अपना प्रतिनिधि नोएडा व ग्रेटर नोएडा (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) की बोर्ड की बैठकों में बैठे। दूसरी मांग है कि नोएडा की जमीन लीज होल्ड से बदलकर फ्री होल्ड की जाए। इसके बाद आबादी के प्लाटों की मांग का नंबर आता है। किसानों के दर्जनों संगठन इसको लेकर प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोले हैं। आगे बढ़ते ही उचित मुआवजे की मांग के अफसाने हैं। फिर प्रॉपर्टी मालिकों की एफएआर बढ़ाने की मांग है। इन सब के बावजूद समूची अधिग्रहण नीति को नए सिरे से लिखे जाने तक की भी मांग है। कहने का मतलब है कि मांगों की लिस्ट पर जमीन से जुड़ा असंतोष हावी है। वोटरों को लगता है कि प्राधिकरणों पर नकेल कसी गई तो यहां की बेशकीमती जमीनों पर बंदरबांट रुक सकता है और अथॉरिटी भी अपने असल काम को गंभीरता से करने लगेगी। बाकी तमाम तरह के मुद्दों का नंबर बहुत बाद में आता है। यहां भ्रष्टाचार, ट्रैफिक जाम, रोजगार व इंफास्ट्रैक्चर मुद्दे तो हैं ही लेकिन वोटरों के जेहन में सबसे आखिर में उनका मुकाम है।

    गौतमबुद्ध नगर जिले का एक सच यह भी है कि बीते वर्षों में यहां विकास की प्रभावशाली झांकी देखने को मिली है। एक से बढ़कर एक बुलंद आलीशान इमारतें यहां आकार ले रही हैं। देश में पहली बार फार्मूला रेस की मेजबानी करने का सेहरा ग्रेटर नोएडा के सिर बंधा है। यमुना एक्सप्रेस-वे का निर्माण, नोएडा दलित प्रेरणा पार्क, वातानुकूलित सुपर स्पेशलिटी जिला अस्पताल भी उपलब्धियों में शुमार हैं। इनके अलावा हजारों करोड़ रुपये के दूसरे विकास कार्यों को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता लेकिन अगर पीछे मुड़कर देखें तो नोएडा एक्सटेंशन विवाद से जुड़ा किसानों और निवेशकों का असंतोष उपलब्धियों का रंग अवश्य फीका करता नजर आएगा।

    लोगों के मुख्य मुद्दे
    नोएडा व ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की बोर्ड बैठक में जनता के प्रतिनिधि को शामिल किया जाए।
    •शहर की प्रॉपर्टी लीज होल्ड पर है, उसे फ्री होल्ड किया जाए।
    •जमीन अधिग्रहण कानून में शीघ्र बदलाव हो।
    •भूमिहीन किसानों को 120 मीटर का प्लॉट मिले।
    •1976 से 1997 तक अधिग्रहीत भूमि के बदले शीघ्र प्लॉट मिले।
    •उद्योगों, शैक्षिक संस्थाओं व नौकरियों में किसान परिवारों का आरक्षण तय किया जाए।
    •जहां जैसी आबादी हो उसे वैसा मुआवजा अतिशीघ्र बांटा जाए
    •सेक्टरों में विकास संबंधी कार्य के बाद ठेकेदार का भुगतान तभी किया जाए जब आरडब्ल्यू उसके कार्य पर लिखित में संतुष्टि दे। 
    •ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में सुधार करते हुए मेट्रो को सेक्टर 62 तक शीघ्र लाने, फीडर बसें शुरू करने, इंटर सेक्टर कनवेंस और दिल्ली के ऑटो को परमिट दिए जाएं।
    •पुराने आवंटियों को भी नए आवंटियों की तरह एफएआर की छूट मिले।
    •प्राधिकरण के कामकाज के ऑडिट को महालेखा परीक्षक (सीएजी) के दायरे में लाया जाए।

    -Amar Ujala
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  • Urban-rural divide comes to fore in Noida Extn realty hub

    he realty hubs of Noida Extension in Greater Noida and adjoining Noida sectors witnessed a clear urbanrural divide on issues with the turnout going up by a substantial 17%.
    In Dadri, which includes Noida Extension and Greater Noida areas, the turnout went up to 57% from 42%.
    ...
    Different aspirations came to the fore as land acquisition concerned voters in the rural belt while urban sectors voted for development and better law and order.

    “I voted for a candidate who will ensure development. I want roads, footpaths, drains and cleanliness,“ said Raj Khurana of Noida sector 52.

    On the other hand, farmers said they want a party that could either get their land back or ensure compensation at market rates and create jobs for their children.

    “The state government grabbed our land and created a concrete jungle,“ said Girish Tyagi, 46, a farmer at village Roza Yakubpur in Noida Extension. About 20 other farmers like Tyagi, sitting at a chaupal, echoed similar sentiments.

    About 30,000 farmers in about a dozen villages in Noida Extension have been affected in the land acquisition row. These areas registered a good voter turnout right from the morning.

    “I do not think farmers have forgotten how the state government put them behind bars for protesting against land acquisition,“ said Muntazir Hussain, a farmer of Shahberi village.

    -HT
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  • किसी में नहीं दिखा एक्सटेंशन का टेंशन
    क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में55-60 फीसदी पड़े वोट
    •अमर उजाला ब्यूरो
    ग्रेटर नोएडा। दादरी विधानसभा क्षेत्र के सबसे चर्चित नोएडा एक्सटेंशन में मतदान के दिन उत्साह देखा गया। ज्यादातर गांवों में 55-60 फीसदी तक मतदान हुआ। खास बात यह रही कि वोटरों के मन में एक्सटेंशन विवाद का कोई फर्क नहीं पड़ा। देवला गांव के लोगों की शिकायत रही कि उनका पोलिग बूथ सात किलोमीटर दूर रख...ा गया, जिसके कारण परेशानी हुई।

    करीब एक साल पहले नोएडा एक्सटेंशन में जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद शुरू हुआ था। किसानों का आरोप था कि उनकी जमीन फैक्टरी लगाने के लिए ली गई थी, लेकिन इसे बिल्डरों को बेच दिया गया। एक्सटेंशन समेत क्षेत्र के 39 गांवों के किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए। 21 अक्तूबर 2011 को कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला दिया। इसमें 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और 10 फीसदी जमीन देने की बात थी। ज्यादातर गांवों के लोग सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं और एक-एक करके सुनवाई हो रही है।

    एक्सटेंशन क्षेत्र के सबके बड़े गांव बिसरख में करीब 3400 वोट हैं। इनमें 2022 वोट पड़े और 60 फीसदी मतदान रहा। इसी तरह वैदपुरा में 65, खेड़ी में 65, खैरपुर गुर्जर में 63 फीसदी के करीब वोट पड़े। पतवाड़ी में शिकायत रही कि करीब एक हजार वोट लिस्ट से गायब थे। रोजा याकूबपुर और ऐमनाबाद आदि गांवों में भी 55-60 फीसदी मतदान रहा। किसानों का कहना है कि एक्सटेंशन विवाद के कारण मतदान पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। इससे किसी के पक्ष-विपक्ष की लहर भी नहीं बनी। लोगों ने प्रत्याशियों और पार्टी के आधार पर वोट डाले।

    उधर, देवला के लोग इसलिए परेशान रहे, क्योंकि उनका पोलिंग बूथ खेड़ी के पास था। वहां तक जाने के लिए करीब सात किलोमीटर चलना जाना पड़ा। इसके लिए लोगों ने निजी वाहनों का सहारा लिया।
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  • DEVELOPMENT VS LAND ROW IN MAYA'S NATIVE VILLAGE

    Even 25-metre-long queues and 40-50 minutes of waiting did not deter residents of Badalpur, the native village of Uttar Pradesh chief minister Mayawati, from exercising their right to vote. Their enthusiasm was reflected in numbers as the turnout in the Dadri assembly seat, which includes Badalpur, went up from 42 per cent in the last elections to 57 per cent.

    While a large number of villagers feel Badalpur was “a perfect example of development“, those affected by the land row say the high turnout was “a vote for change.“

    A total of 243 hectares of land was acquired from about 1,000 farmers in Badalpur in 2008.

    During acquisition, farmers gheraoed the Greater Noida authority office, clashed with policemen and even threatened self-immolation. They said their land was acquired for industrial development but no projects in public interest were launched.

    To date, the Greater Noida authority is only building two parks and a helipad, they said.

    Along with farmers of Noida Extension, those in Badalpur also moved the high court to get their land back. The Allahabad High Court in October last year ruled that land would remain with builders and farmers would get increased benefits.

    But many farmers have now moved the Supreme Court. The apex court has issued a notice to the state government asking it to explain why the high court order should not be quashed.

    On the other hand, many still rally behind Mayawati. “Five years ago, Badalpur had no facilities. Now, we have concrete roads and a sewage system. We have two new hospitals and a university nearby. It's a vote for development,“ said young voter Amit Nagar.

    Dadri has nearly 3.33 lakh voters. Only 60,000 come from urban sectors of Greater Noida.

    The fate of BSP's sitting MLA Satbir Singh Gurjar, BJP's former minister Nawab Singh Nagar, Congress's Samir Bhati and Samajwadi Party's Rajkumar Bhati has been locked in EVMs.
    -HT
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  • Recent photo of Mr Kamalnath (NCR Planning board head) with Anil Sharma (Amrapali group) at Start Realty Award...

    shall we assume that NCRPB will give approve soon....:)
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    Recent photo of Mr Kamalnath (NCR Planning board head) with Anil Sharma (Amrapali group) at Start Realty Award...

    shall we assume that NCRPB will give approve soon....:)


    I think the 3rd person is an IIPM-something.
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  • Yes he is Arindham Chaudhary
    Originally Posted by anantv
    I think the 3rd person is an IIPM-something.
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  • He is founder of IIPM Mr. Arindhum Chaudhry
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  • बिना मर्जी किसानों से जमीन नहीं ले सकेगी सरकार
    टप्पल टाउनशिप: हाईकोर्ट के फैसले से किसान खुश

    अलीगढ़। टप्पल टाउनशिप के मसले पर प्रदेश सरकार को जबरदस्त झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 150 किसानों की ओर से दायर चार याचिकाओं पर कहा है कि जमीन किसानों की बिना मर्जी न ली जाए। जब तक यह विवाद नहीं निपटता, तब तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। अदालत के इस फैसले से टाउनशिप के लिए जमीन देने का विरोध कर रहे किसानों में खुशी की लहर है।


    प्रशासन ने मान-मनौव्वल कर टप्पल टाउनशिप के लिए ज्यादातर किसानों की जमीन अधिग्रहीत कर ली थी। लेकिन 150 किसानों ने टाउनशिप के लिए जमीन देने से मना कर दिया था। वे ज्यादा मुआवजा की मांग कर रहे थे। चूंकि 80 फीसदी से ज्यादा किसानों ने जमीन दे दी थी इस आधार पर सरकार ने जमीन अधिग्रहण कानून को आधार बना कर बाकी किसानों की जमीन का जबरन अधिग्रहण शुरू कर दिया। इस पर ये किसान अदालत चले गए। इन किसानों ने चार अलग-अलग याचिकाएं दायर करते हुए कहा था कि एक तो सरकार ने ज्यादा मुआवजा की मांग को खारिज कर दिया। फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर उनकी जमीन का जबरन अधिग्रहण करने लगी। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में साफ आदेश दिया था कि किसानों की मर्जी के बिना जमीन अधिग्रहीत नहीं की जा सकती।

    जस्टिस अशोक भूषण व सुनीता अग्रवाल की संयुक्त खंडपीठ ने बुधवार को इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया। किसानों के अधिवक्ता पीके सिंह ने इलाहाबाद से मोबाइल पर बताया कि 68 पेज के जजमेंट में तीन आदेश दिए हैं, जिनमें एक तो सरकार के प्रत्यावेदन निरस्त करने के आदेश को रद किया है। दूसरा 27 अगस्त 2010 के आदेश को निरस्त किया गया है और तीसरा बिना मर्जी किसानों की जमीन लेने व किसानों से विवाद निपटने तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

    विवाद के हल तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा

    -Amar Ujala
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  • बिना मर्जी जमीन नहीं लेगी सरकार
    अलीगढ़। टप्पल टाउनशिप के मसले पर प्रदेश सरकार को जबरदस्त झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 150 किसानों की ओर से दायर चार याचिकाओं पर कहा है कि जमीन किसानों की बिना मर्जी न ली जाए। जब तक यह विवाद नहीं निपटता, तब तक मौके पर यथा स्थिति बनाए रखी जाए।

    प्रशासन ने मान-मनौव्वल कर टप्पल टाउनशिप के लिए ज्यादातर किसानों की जमीन अधिग्रहित कर ली थी। लेकिन 150 किसानों ने टाउनशिप के लिए जमीन देने से मना कर दिया था। वे ज्यादा मुआवजा की मांग कर रहे थे। चूंकि 80 फीसदी से ज्यादा किसानों ने जमीन दे दी थी इस आधार पर सरकार ने जमीन अधिग्रहण कानून को आधार बना कर बाकी किसानों की जमीन का जबरन अधिग्रहण शुरू कर दिया। इस पर ये किसान अदालत चले गए। इन किसानों ने 4 अलग-अलग याचिकाएं दायर करते हुए कहा था कि एक तो सरकार ने ज्यादा मुआवजा की मांग को खारिज कर दिया।

    जस्टिस अशोक भूषण व सुनीता अग्रवाल की संयुक्त खंडपीठ ने बुधवार को इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया। ब्यूरो
    विवाद के निपटारे तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा, दो जजों की खंडपीठ ने सुनाया फैसला

    -Amar Ujala
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  • सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करने की तैयारी

    ग्रेटर नोएडा (ब्यूरो)। प्राधिकरण को अब एक और परीक्षा देनी होगी। पहले उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किए थे। हालांकि कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण रद्द न करके राहत दे दी थी। किसान अब सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं और कोर्ट ने प्राधिकरण से जवाब तलब किया है। इसके लिए अधिकारियों ने तैयारी शुरू कर दी है।
    मालूम हो कि 21 अक्तूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 39 गांवों के करीब छह हजार किसानों की सुनवाई करके फैसला दिया था कि उन्हें 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और 10 फीसदी जमीन दी जाए। प्राधिकरण ने उस फैसले को लागू कर अतिरिक्त मुआवजा बांटना शुरू कर दिया है। बाद में कोर्ट ने जिन दर्जनभर से ज्यादा गांवों की सुनवाई नहीं की थी, उनको भी आदेश में शामिल कर लिया गया था।

    एक तरफ किसान मुआवजा उठा चुके हैं तो काफी संख्या में किसान कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। वहां एक-एक गांव की सुनवाई की जा रही है और प्राधिकरण से जवाब तलब किया जा रहा है। पिछले दिनों चुनाव प्रक्रिया के चलते कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी लगी हुई थी। इसके कारण जवाब तैयार करने में देरी हो गई थी। चूंकि अब मतदान हो चुका है, इसलिए प्राधिकरण ने अफसरों और कर्मियों को जवाब तैयार करने में लगा दिया है। अधिकारी मानते हैं कि इसमें काफी सावधानी बरतनी होगी।

    -Amar Ujala
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