पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • मास्टर प्लान को लेकर निवेशक बनाएंगे दबाव


    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : शहर के मास्टर प्लान 2021 को लेकर नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट खरीदारों की चिंता बढ़ने लगी है। अप्रैल तक एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी न मिलने पर निवेशक सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। निवेशकों ने पहले प्राधिकरण में आरटीआइ दाखिल कर मास्टर प्लान में हो रही देरी के बारे में जानकारी मांगी है। दबाव को देखते हुए प्राधिकरण ने भी एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में प्रयास तेज करने के साथ ही हाईकोर्ट में दाखिल पुनर्विचार याचिका की पैरवी करना शुरू कर दिया है। प्राधिकरण को उम्मीद है कि कोर्ट में पुनर्विचार याचिका पर मार्च में सुनवाई हो सकती है।
    विधानसभा चुनाव के चलते प्राधिकरण भी एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मास्टर प्लान मंजूर कराने के लिए प्रयास तेज नहीं कर पाया था। दिसंबर 2011 में प्राधिकरण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर निर्माण कार्य रोके जाने के फैसले पर विचार करने का अनुरोध किया था। तीन माह बीत जाने के बाद भी हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की तिथि निश्चित नहीं हो पाई। नोएडा एक्सटेंशन के निवेशक जनवरी में दिल्ली जाकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के अधिकारियों से मिले थे। इस पर उन्हें अप्रैल तक इंतजार करने के लिए कहा गया था। अक्टूबर 2011 में जमीन अधिग्रहण को लेकर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों का निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ है। कोर्ट ने अपने फैसले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का मास्टर प्लान 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया था। एक्सटेंशन में करीब एक लाख लोगों ने फ्लैट बुक करा रखा है। निर्माण कार्य बंद होने से निवेशकों के मकान का सपना अधर में लटका हुआ है। नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर एंड मेंबर एसोसिएशन के संस्थापक देवेंद्र का कहना है कि अप्रैल तक मास्टर प्लान मंजूर न होने पर फ्लैट खरीदारों को एकजुट करके आंदोलन शुरू करने की रणनीति तैयार करेंगे।



    -Dainik Jagran
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  • धन की कमी से अटकी परियोजनाएं


    ग्रेटर नोएडा: जिले में विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद नौ मार्च को आचार संहिता भी खत्म हो जाएगी। ऐसे में प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी समस्या महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शुरू कराने की है। प्राधिकरण को शहर का मास्टर प्लान 2021 एनसीआर बोर्ड से पास कराना है। इसके साथ ही धन की कमी भी बड़ी समस्या है।

    प्राधिकरण का पूरा ध्यान अब मास्टर प्लान को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर कराने पर है। इसके बाद ही प्राधिकरण परियोजनाओं को शुरू कराने की तरफ ध्यान दे पाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमीन अधिग्रहण को लेकर अभी 34 गांवों का मामला अटका हुआ है। नोएडा एक्सटेंशन की तर्ज पर अगर इन गांवों को भी प्राधिकरण को अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसदी भूखंड देना पड़ा तो प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति पूरी तरह डांवाडोल हो जाएगी। प्राधिकरण अब तक सभी 39 गांवों के किसानों को अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसदी विकसित भूखंड नहीं दे पाया है। इन हालत में परियोजनाओं को लेकर प्राधिकरण अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। प्राधिकरण इन परियोजनाओं को कैसे पूरा करेगा, यह एक महत्वपूर्ण सवाल हो गया है? कई परियोजनाओं पर शहर के विकास का भविष्य निर्भर है। अगर ये परियोजनाएं परवान चढ़ती तो लोगों के शहर में बसने का सपना पूरा होता। प्राधिकरण की आर्थिक हालत को देखते हुए नहीं लगता कि परियोजनाएं जल्द परवान चढ़ पाएंगी।

    नाइट सफारी परियोजना
    पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे मुरशदपुर गांव के पास प्राधिकरण ने 260 एकड़ में नाइट सफारी के लिए जमीन चिन्हित की थी। वर्ष 2005 में प्राधिकरण ने यह योजना तैयार की थी। यह एशिया का दूसरा व देश का पहला नाइट सफारी होगा। इस पर एक हजार करोड़ रुपये का खर्च प्रस्तावित है। परियोजना ने सभी बाधाओं को पार कर लिया है। सिर्फ निर्माण कार्य शुरू होने की देरी है। आर्थिक कमी से जूझ रहा प्राधिकरण इस योजना पर काम शुरू नहीं करा पा रहा है।

    मेट्रो रेल परियोजना
    नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक मेट्रो को लेने के लिए पिछले पांच साल से माथापच्ची चल रही है। नोएडा के सिटी सेंटर से नोएडा एक्सप्रेस-वे होकर मेट्रो को ग्रेटर नोएडा तक लाने की योजना तैयार हो चुकी है। परियोजना पर पांच हजार करोड़ रुपये खर्च का प्रस्तावित है। प्राधिकरण पांच हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था कहां से करेगा, यह एक सवाल है? मेट्रो को नोएडा के सेक्टर 72 से नोएडा एक्सटेंशन होते हुए बोड़ाकी स्टेशन तक ले जाने का प्रस्ताव है।

    बोड़ाकी स्टेशन का विस्तार
    नोएडा व ग्रेटर नोएडा अब तक रेलवे रूट से नहीं जुड़ पाया है। इसके लिए बोड़ाकी स्टेशन का विस्तार करने की योजना चल रही है। योजना पर करीब 16 सौ करोड़ रुपये खर्च होने हैं।

    दादरी रेलवे ओवरब्रिज
    दादरी क्षेत्र को ग्रेटर नोएडा फेस-दो के रूप में विकसित किया जा रहा है। विकास में सबसे बड़ा रोड़ा दादरी रेलवे ओवरब्रिज है। इसके निर्माण की योजना चार साल पूर्व तैयार कर ली गई थी। इस पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। ऐसे में ओवरब्रिज का निर्माण भी अधर में लटक सकता है।

    अपर गंगा कैनाल एक्सप्रेस-वे
    ग्रेटर नोएडा को सीधे देहरादून तक जोड़ने के लिए अपर गंगा कैनाल एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित है। बोड़ाकी के पास 105 मीटर रोड से एक्सप्रेस-वे को जोड़ा जाना प्रस्तावित है। ऐसे में यह योजना भी प्रभावित हो सकती है।

    गांव के विकास कार्यो पर असर
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण गांवों का शहर की तर्ज पर विकास कार्य करा रहा है। वर्ष 2011-12 में गांव के विकास पर ढाई सौ करोड़ रुपये का खर्च प्रस्तावित है। ऐसे में आर्थिक स्थिति खराब होने पर गांवों के विकास पर भी असर पड़ेगा।

    -Dainik Jagran
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  • आबादी नियमित करने को दबाव बनाने लगे किसान


    ग्रेटर नोएडा: विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही किसानों ने आबादी नियमित करने की मांग को लेकर प्राधिकरण पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। आचार संहिता लगने से पूर्व जिन किसानों की आबादी का निस्तारण हो चुका है, उसे बोर्ड से मंजूर कराने की मांग किसान कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद ही प्राधिकरण बोर्ड बैठक बुलाए।

    विधानसभा चुनाव से पहले प्राधिकरण ने आधा दर्जन गांवों के किसानों की आबादी का निस्तारण किया था। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने आबादी निस्तारण को हरी झंडी दे दिया था। जिन किसानों की आबादी का निस्तारण हो गया था, उसे प्राधिकरण बोर्ड से मंजूर कराना था। बोर्ड बैठक होने से पहले प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई, आचार संहिता लगने पर प्राधिकरण चुनाव तक बोर्ड बैठक को टाल दिया। इससे किसानों के आबादी का मामला अधर में लटक गया था। अब विधानसभा चुनाव समाप्त हो चुका है, आचार संहिता अभी खत्म नहीं हुई। इससे पहले किसान आबादी को लेकर प्राधिकरण कार्यालय का चक्कर लगाने लगे हैं। किसानों का कहना है कि नौ मार्च को आचार संहिता खत्म हो जाएगी। इसलिए प्राधिकरण नौ मार्च के बाद बोर्ड बैठक बुलाकर उनकी आबादी का निस्तारण कर दे। किसान संशय के कारण प्राधिकरण पर आबादी का जल्द निस्तारण का दबाव बना रहे हैं। किसानों का मानना है कि अगर चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होता है तो इसका असर प्राधिकरण के कामकाज पर भी पड़ सकता है। सत्ता परिवर्तन होने की दशा में अधिकारियों का भी तबादला हो सकता है। ऐसे में अगर कोई नया अधिकारी आता है तो पुराने अधिकारियों के फैसले पर मोहर लगाने में आनाकानी कर सकता है। आबादी का निस्तारण नए सिरे से हो सकता है। इसलिए किसान अधिकारियों पर दबाव बनाकर जल्द आबादी का निस्तारण कराना चाहते हैं।

    -Dainik Jagran
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  • जुनपत गांव के किसान पहुंचे सुप्रीम कोर्ट


    ग्रेटर नोएडा, सं : जमीन अधिग्रहण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ जुनपत गांव के किसान भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। किसानों की तरफ से दायर अपील सुप्रीम कोर्ट में मंजूर कर लिया है। सुनवाई की तिथि अभी सुनिश्चित नहीं हो पाई है।

    नोएडा एक्सटेंशन समेत 39 गांवों में जमीन अधिग्रहण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2011 में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने अपने फैसले में किसानों को 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसदी विकसित भूखंड देने का निर्देश दिया था। जुनपत गांव के किसानों ने हाईकोर्ट का फैसला मानने से इंकार कर दिया था। किसानों का कहना है कि 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा कम है, फैसले में आबादी निस्तारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। पूर्व प्रधान रामेश्वर सरपंच ने बताया कि हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। किसानों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, उन्हें मंजूर होगा।

    -Dainik Jagran
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  • सुप्रीम कोर्ट ने यूपी से मांगा जवाब
    ग्रेटर नोएडा के कासना और जुनपत के किसानों ने लगाई गुहार

    नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा में अधिग्रहण के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार और प्राधिकरण को कारण बताओ नोटिस जारी किया। किसानों की ओर से कासना और जुनपत गांव में हुए अधिग्रहण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को शीर्षस्थ अदालत में चुनौती दी गई है।

    जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किसान कूरे व अन्य की ओर से दायर याचिका पर राज्य सरकार व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है। किसानों के वकील सूरत सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से उठाए गए गलत कदम के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने ठीक से गौर नहीं किया। हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण को निरस्त करने की बजाय मुआवजे की रकम को 67 प्रतिशत बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को मुआवजा बढ़ने से खास राहत नहीं मिलने वाली, क्योंकि गांव की जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं और राज्य सरकार ने कौड़ियों के दाम पर जमीन खरीदी है।

    अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि हाईकोर्ट ने 21 अक्तूबर, 2011 को जारी आदेश में 850 रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजे को 1450 रुपये तय कर दिया, जबकि सरकार ने बिल्डरों को 20,000 रुपये प्रति वर्ग गज से भी ज्यादा कीमत पर यह जमीन बेची है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी भूमि वापस गी जानी चाहिए या फिर मुआवजा बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाना चाहिए। जमीन का बाजार भाव 10,000 रुपये प्रति वर्ग गज से कम नहीं है। पीठ ने अधिवक्ता के तर्क पर सहमति जताते हुए राज्य सरकार और प्राधिकरण से जवाब मांगा है।

    -Amar Ujala
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  • फैसले तक रोका जमीन अधिग्रहण
    यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के 45 गांवों के किसान हाईकोर्ट पहुंचे

    ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा से लेकर आगरा तक यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई का इंतजार है। करीब 45 गांवों के किसान कोर्ट पहुंच चुके हैं। उनकी याचिकाओं को सूचीबद्ध करने का काम चल रहा है। प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण, विकास कार्य और किसी नई योजना पर काम रोक रखा है। प्राधिकरण कोर्ट के फैसले के बाद ही आगे कदम बढ़ाना चाहता है। उधर, एडवोकेट मुकेश रावल का कहना है कि सभी गांवों की सुनवाई के लिए कोर्ट में अभी वक्त लगेगा।

    मालूम हो कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 39 गांवों के लिए आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसान भी कोर्ट पहुंच गए थे। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के निर्णय तक अधिग्रहण का काम रोक दिया गया है। किसी नई योजना की रूपरेखा भी तैयार नहीं की जा रही है। चूंकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया एक जैसी ही है, इसलिए इस मामले का फैसला भी ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की तरह ही आने की संभावना है।

    अफसर मानते हैं कि यमुना प्राधिकरण ने फिलहाल छह हजार हेक्टेयर जमीन ही अधिगृहीत की है। इसमें ग्रेटर नोएडा से आगरा तक यमुना एक्सप्रेस-वे, आवासीय योजना एवं शिक्षा संस्थानों समेत अन्य योजनाओं में दी गई जमीन ही शामिल है। प्राधिकरण के पास 2.57 लाख हेक्टेयर जमीन है। 1199 गांवों की जमीन प्राधिकरण की सीमा में है। फिलहाल कोर्ट का फैसला लागू करने में प्राधिकरण को ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।

    -Amar Ujala
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  • हाईकोर्ट के फैसले तक रोका जमीन अधिग्रहण

    ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा से लेकर आगरा तक यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई का इंतजार है। करीब 45 गांवों के किसान कोर्ट पहुंच चुके हैं। उनकी याचिकाओं को सूचीबद्ध करने का काम चल रहा है। प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण, विकास कार्य और किसी नई योजना पर काम रोक रखा है। प्राधिकरण कोर्ट के फैसले के बाद ही आगे कदम बढ़ाना चाहता है। उधर, एडवोकेट मुकेश रावल का कहना है कि सभी गांवों की सुनवाई के लिए कोर्ट में अभी वक्त लगेगा।
    मालूम हो कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 39 गांवों के लिए आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसान भी कोर्ट पहुंच गए थे।
    ब्यूरो

    -Amar Ujala
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  • ABADI SET TO BE REGULARIZED


    The abadi lands of the villages of Greater Noida are being regularized and farmers in the land acquisition row will receive enhanced compensation in line with the judgment of the Allahabad high court. ABHIGYAN writes


    The abadi lands of all the disputed villages are set to be regularized under Abadi Niyamawali (Abadi bylaws) of June 30, 2011.


    For this, the files of disputed land of the villages concerned are being completed after the Allahabad high court verdict on the Greater Noida land row, which provides for an additional 64.7% of cash compensation and 10% of the developed plot. This will help in the resumption of construction work. With the court direction, the authorities of Noida, Greater Noida and Yamuna have raised the price for land allotted to the builders and other allottees in the region. Most of the demands like increased compensation and plotted development have also been met.


    The latest verdict of the Allahabad high court has resolved the contentious issue of land acquisition from farmers. While the verdict has regularized the land acquisition done by authority, it has simultaneously directed the award of higher compensation to farmers.


    However, the issue is not limited to compensation only. Farmers are also seeking resolution of disputes related to abadi land. Under abadi land, farmers and residents of a village are entitled to land, which they have been using for residential purpose. Consequently, the authority is obliged to give 10% of the total acquired land in the developed area to the farmers. As a result, the authorities have decided to regularize the abadi land in the possession of farmers effective from June 30, 2011.


    Out of 54 villages, where disputes regarding abadi land arose, the issue has been resolved in 34 villages. In addition, demands of special quota for farmers' children in educational institutions have also been accepted. Like Noida, Greater Noida authority and Yamuna Authority, too, have been resolving the land rows over abadi disputes under the Abadi Niyamawali of June 30, 2011.


    Rama Raman, chief executive officer of Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA), says: "We are offering 7% of the total acquired land in the developed area as abadi benefit to the farmers of 18 villages, up to Jewar. In Greater Noida, 6% of the total acquired land in the developed area is being offered as abadi benefit to the farmers of more two dozen villages. After the court verdict, GNIDA has to disburse Rs 9,500 crore to the farmers of the 38 villages, while Noida authority has to disburse Rs 1,100 crore to the farmers of 15 villages. For this, both authorities have decided to pass on 50% of the burden upon the builders."


    "Demanding expeditious settlement of abadi land disputes (land offered in developed sectors as compensation) and adequate cash compensation, farmers resorted to agitation. And finally, they moved various courts challenging the authorities' decision to acquire their land. On the farmers' petition, the Allahabad high court, in its earlier judgment, had quashed the land acquisition in Shahberi and Patwari village in Greater Noida region, where a number of housing projects were planned," Raman says.


    Farmers had challenged the authorities' decision to acquire the land invoking urgency clause of Land Acquisition Act, 1894, which dispenses with the hearing required to be given to the farmers (landowners) under the act.


    In order to save the various projects under construction and provide adequate compensation to the farmers, the Allahabad high court gave farmers of Patwari village and GNIDA time to arrive at an amicable settlement. Under the new settlement, GNIDA pays an additional 64.7% cash compensation and 10% of the total acquired land in the developed area to farmers.

    -TOI
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  • Watch NEFOMA team live on Total TV tomorrow on Sunday 4th March from 9:30am. discussing Noida extension issue accompanied with builder and legal experts.
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    Watch NEFOMA team live on Total TV tomorrow on Sunday 4th March from 9:30am. discussing Noida extension issue accompanied with builder and legal experts.

    Thanks Dude

    You are Gem.
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    Watch NEFOMA team live on Total TV tomorrow on Sunday 4th March from 9:30am. discussing Noida extension issue accompanied with builder and legal experts.


    Total TV ?? I think it will be India Today
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  • No... there is local TV news channel "Total TV"... This news channel is in available in Tata sky and dish TV...not sure about airtel
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    No... there is local TV news channel "Total TV"... This news channel is in available in Tata sky and dish TV...not sure about airtel

    Total TV is available on Airtel Digital TV too I have Airtel so I know.
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