पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • मुलायम की वापसी से नोएडा एक्सटेशन में बढ़ì

    मुलायम की वापसी से नोएडा एक्सटेशन में बढ़ी टेंशन
    नोएडा एक्सटेंशन।
    टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Mar 7, 2012, 09.54AM IST

    नोएडा।। नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट बुक करने वाले खरीदार यूपी में मुलायम यादव की सत्ता में वापसी से खासे चिंतित हैं। खरीदार इस बात को लेकर परेशान हैं कि कहीं समाजवादी पार्टी अपने एजेंडे के तहत प्रदेश से ' ब्रैंड मायावती ' को खत्म करने की कवायद तो शुरू नहीं कर देगी ? या अखिलेश के होने से उनके लिए कुछ राहत होगी। गौरतलब है कि 2004 में मुलायम ने जिले को भंग कर दिया था और सारे प्रॉजेक्ट्स पर रोक लगा दी थी।

    गलत तरीके से किसानों से जमीन अधिग्रहण को लेकर नोएडा एक्सटेंशन के प्रॉजेक्ट्स पहले ही अधर में लटके हुए हैं। लेकिन अब यहां बन रहे 2 लाख फ्लैट्स पर तलवार लटक गई है। अगर नई सरकार सुप्रीम कोर्ट में रुख बदलती है तो बिल्डरों और खरीदारों के लिए बहुत ही बुरी खबर होगी। हो सकता है कि किसान भी दोबारा सौदेबाजी करें।

    इसके अलावा, नोएडा एक्सटेंशन ही नहीं बल्कि दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स के लिए स्थिति अच्छी नजर नहीं आ रही है। यमुना एक्सप्रेस-वे तैयार है लेकिन टोल, स्पीड और सिक्युरिटी पर कुछ तय नहीं हो पाने की वजह से एक्सप्रेस-वे अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। साथ ही, एक्सप्रेस-वे के आसपास टाउनशिप का प्लान भी अभी तक कागजों के ढेर में ही दबा है। यमुना एक्सप्रेस-वे के बिल्डर जयप्रकाश असोसिएट्स लिमिटेड, जो बीएसपी चीफ मायावती के खासे नजदीकी माने जाते हैं, प्रदेश में बदली सरकार को लेकर खासे चिंतित होंगे।

    वहीं, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निवासी इस बात से परेशान हैं कि जिस तरह 2004 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने जिले को भंग कर दिया था और सारे प्रॉजेक्ट्स रोक दिए थे, कहीं इस बार भी उनके साथ ऐसा ही न हो। हालांकि अखिलेश यादव के प्रोग्रेसिव आउटलुक को देखकर कुछ उम्मीद है कि वह डिवेलपमेंट के काम में रोड़ा नहीं अटकाएंगे और यहां विकास कार्य जारी रखेंगे।
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  • Buyers write to SP seeking fate of Noida Extension projects

    NOIDA: Dreading further setback to the fate of housing projects, work on which has been in limbo for months, the Noida Extension homebuyers' body has sent an open letter to the Samajwadi Party head office in Lucknow enquiring about the fate of the 2 lakh upcoming housing units in the area.

    The buyers' inquiry also comes ahead of the NCR Planning Board meeting scheduled for March 26. During the meeting approval of the Greater Noida Master Plan 2021, a mandatory requirement for the Noida Extension projects to resume, might be discussed.

    "News reports are rife with speculation on whether the new government in UP will stall Mayawati's pet projects. Besides, in 2004, the SP government had disbanded the district and stalled numerous projects. We decided it was best to apprise the new government of our situation," said Abhishek Kumar of Noida Extension Flat Owners and Members Association.

    "We have requested the new government to think of the one lakh middle-class buyers who have pumped their savings into these housing units. SP seems to have revamped itself and seems more progressive this time, so we hope that the government will keep our interests in mind," said Devendra Kumar, another buyer.

    In the letter, the buyers' body has requested SP leaders Mulayam and Akhilesh to help them. "We believe that the fate of Noida Extension now depends on the new government completely. In the past, the Greater Noida Authority as well as the BSP government did little to sort out the issue. But we hope that the new government will help us tide over the crisis soon," Kumar added.


    TOI
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  • फिर उठने लगीं किसानों की मांगें


    नोएडा।। नई सरकार बनने का रास्ता साफ होने ही किसानों ने फिर आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर दी है। इसके चलते 10 पर्सेंट के प्लॉट और 64.7 पर्सेंट बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों ने बुधवार को सदरपुर गांव में पंचायत की। साथ ही, 9 मार्च को अथॉरिटी सीईओ को उक्त मांगों के बाबत मांगपत्र देने का फैसला लिया है। इसमें एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर बिल्डरों का काम रोकने का फैसला लिया गया है।

    सदरपुर गांव के पूर्व प्रधान सुरेंद्र चौहान ने बताया कि अथॉरिटी अफसरों ने दोनों बार हुई किसान आंदोलन को मांगें जल्द पूरी करने का आश्वासन देने के बाद बंद कराया था। पहले 21 से 28 नवंबर तक चले आंदोलन में 3 सेक्टर-46, 45, 96 के बिल्डरों का काम रुकवाया गया था। उस दौरान अथॉरिटी के प्रशासनिक अधिकारी दीपचंद ने 9 दिसंबर तक मामला हल कराने का आश्वासन दिया था। तय तारीख तक कार्रवाई न होने पर 10 दिसंबर से दोबारा धरना शुरू किया गया था। इसके चलते सेक्टर-45, 46, 96, 99, 100 की करीब एक दर्जन बिल्डर साइटों का काम 5 जनवरी तक ठप रहा था।

    इस बार अथॉरिटी अफसरों ने 13 जनवरी तक काम पूरा कराने का वादा किया था। इसके बाद चुनाव आचार संहिता के चलते मांगों पर कोई काम नहीं हो सका। सुरेंद्र चौहान ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसानों को 64.7 पर्सेंट मुआवजा और अधिग्रहित जमीन के बदले 10 पर्सेंट प्लॉट देने का आदेश दिया था। इसके अलावा अथॉरिटी को सदरपुर कॉलोनी में जल और सीवर लाइन बिछाने का काम भी कराना था, जो अभी तक नहीं हुआ।

    -nbt
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  • राहत या आफत : नई सरकार का रुख तय करेगा

    ग्रेटर नोएडा: कोर्ट व दिल्ली-एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के पचड़े में फंसे नोएडा एक्सटेंशन की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने पर नोएडा एक्सटेंशन को लेकर निवेशकों, बिल्डरों और प्राधिकरण की चिंता बढ़ने लगी है। चिंता का कारण भी लाजिमी है। नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों को भूखंड आवंटन को लेकर सपा नेताओं ने जोर-शोर से मुद्दा उठाया था। सत्ता में आने पर इसकी जांच कराने की बात कही थी। अब प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सपा की सरकार बनने जा रही है। एक्सटेंशन में भूखंड आवंटन की जांच हुई तो टेंशन लंबा खिंच सकता है।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2008 व 2009 के बीच दो साल में नोएडा एक्सटेंशन में करीब चार सौ हेक्टेयर जमीन का आवंटन किया। इनमें दो सौ हेक्टेयर जमीन ग्रुप हाउसिंग के लिए 70 बिल्डरों को आवंटित की। सौ हेक्टेयर जमीन आवासीय अन्य उपयोग के लिए आवंटित की गई थी। नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों को जमीन आवंटन होते ही हंगामा होने लगा। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को नोएडा में बताकर बिल्डरों ने फ्लैट की प्री लांचिंग भी शुरू कर दी। पतवाड़ी, बिसरख, हैबतपुर, साबेरी में बिल्डरों को आवंटित जमीन पहले प्राधिकरण ने औद्योगिक योजना के लिए मास्टर प्लान में आरक्षित कर रखा था। भू उपयोग बदले जाने पर किसानों ने खूब हाय-तौबा मचाया। यहां तक आरोप लगा कि प्राधिकरण ने भूखंड आवंटन करने के बाद भू उपयोग बदला। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने बिल्डरों को भूखंड आवंटन में धांधली बरतने का आरोप लगाया। इस मुद्दे को लेकर किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने साबेरी, पतवाड़ी समेत कई गांवों में जमीन अधिग्रहण रद कर दिया। इससे पहले बिल्डरों ने अपने प्रोजेक्ट शुरू कर दिया। लाखों लोगों ने नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट बुक करा लिया था।

    हालांकि, अक्टूबर 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राधिकरण, बिल्डरों व निवेशकों को राहत प्रदान करते हुए किसानों को 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसदी विकसित भूखंड देने का आदेश दिया। प्राधिकरण का मास्टर प्लान 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर कराने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने करने का निर्देश दिया। प्राधिकरण का मास्टर प्लान अभी तक एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में लटका हुआ है। इससे बिल्डरों का प्रोजेक्ट व निवेशकों के फ्लैट का सपना अधर में लटका हुआ है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने पर बिल्डरों व निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है। उनकी चिंता का कारण भूखंड आवंटन की जांच को लेकर है।
    नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर एंड मेंबर एसोसिएशन के संस्थापक देवेंद्र कुमार ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को पत्र भेज कर निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई फैसला लेने का अनुरोध किया है। अब देखना यह है कि प्रदेश की नई सरकार नोएडा एक्सटेंशन के मामले में रुख अपनाता है।
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  • The farmers did not vote for SP from this area. Inspite of promises by Akhilesh for the farmers, these people voted for BSP and therefore I dont think the UP Govt will gonna do much here.
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  • Important Notice : NEFOMA

    All noida extension flat buyers are hereby informed that NEFOMA is organizing a meeting of buyers at Star City Mall,Near Mayur Vihar Extn-1 Metro Station, Mayur Vihar-1, on 11 March'2012 ,SUNDAY at 12.30 noon .We request all of you to come n join the meeting with your valuable suggestions on the current NE issue .
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  • Noida Extension buyers worries : Dreading further setback to the fate of housing projects, work on which has been in limbo for months, the Noida Extension homebuyers' body has sent an open letter to the Samajwadi Party head office in Lucknow enquiring about the fate of the 2 lakh upcoming housing units in the area.The buyers' inquiry also comes ahead of the NCR Planning Board meeting scheduled for March 26. During the meeting approval of the Greater Noida Master Plan 2021, a mandatory requirement for the Noida Extension projects to resume, might be discussed.

    NEFOMA update on NE issue :

    1. We are trying to fix-up a meeting with Mr. Akhilesh Yadav

    2. When the new govt. is formed on 12th….. it is very much possible that CEO of Noida/ Greater Noida will be changed …… how effectively the new CEO will be able to raise his point in the Court.

    3. Next NCRPB is scheduled for 26 March …… so we Nefoma is planning to protest at their office before that on large scale …. So you all are requested to please come in full numbers with family and join this protest march.

    4. We, Nefoma is planning to file a case in HC against NCRPB for delay. We want approval should be given in a time bound
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  • Noida authority to start compensating farmers

    Vinod Rajput, Hindustan Times
    Noida, March 09, 2012
    In order to sort out the long-pending land row, the Noida Authority will start disbursing the hiked compensation and developed plots to farmers of 23 villages from Monday.
    "Sorting out the compensation issue will be done on a war footing. Hopefully, it will be completed in the next 15-20 days," said SK Dwivedi, chief executive officer (CEO), Noida Authority.
    The authority officials had a meeting with additional district magistrate Harnam Singh on Friday. As per the plan, the district administration along with the authority staff will visit all the 23 villages one by one and take up individual farmer’s issues for appropriate redressal.
    Officials said they have already distributed about Rs 350 crore among farmers since October 2011, when the Allahabad high court had granted them 64% additional compensation and 10% (instead of earlier 5-6%) share in the developed land. But due to paucity of land, the authority has been struggling to provide increased share of developed plots.
    The increased cash payment mean a burden of more than Rs 1,000 crore. The required land for farmers, not visible though, will cost more than Rs 2,000 crore. "We have sufficient funds,” said the Noida CEO.
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  • अधिग्रहण संबंधी मामलों की सुनवाई में होगी देरी!


    ग्रेटर नोएडा,: प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। बसपा की जगह अब समाजवादी पार्टी के हाथों में प्रदेश की कमान होगी। नई सरकार बनने के साथ ही नीतिगत फैसलों में भी बदलाव होगा और अधिकारियों के तबादले भी होंगे। इस कड़ी में सबसे पहले जिला प्रशासन, नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों के तबादले हो सकते हैं।

    माना जा रहा है कि 12 मार्च को सपा सरकार द्वारा सत्ता संभालते ही अधिकारियों के तबादले की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अधिकारियों के तबादले से तीनों प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों के हाईकोर्ट में चल रहे जमीन अधिग्रहण के मामलों की सुनवाई पर असर पड़ सकता है। हाईकोर्ट में 34 गांवों के प्रकरणों की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी। उस दिन प्राधिकरण को भी अपना जवाब दाखिल करना है। मौजूदा अधिकारी इसकी तैयारी में लगे हुए थे, लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ उनकी भी रवानगी तय हो गई है। ऐसे में नए तैनात होने वाले अधिकारियों को कार्य समझने में समय लगेगा। इससे हाईकोर्ट में सुनवाई आगे खिसक सकती है।

    नोएडा एक्सटेंशन का जमीनी विवाद हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद ग्रेटर नोएडा में जमीन अधिग्रहण पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। कोर्ट द्वारा 39 गांवों के किसानों को 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा देने के निर्देश के बाद 34 और गांवों के किसानों ने भी अतिरिक्त मुआवजे के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इन पर 27 मार्च को सुनवाई होनी है। प्राधिकरण अपना जवाब दाखिल करने की तैयारी में लगा था। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यहां तैनात अधिकारियों ने भी अपना बोरिया-बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है। कई दिन की छुट्टी के बाद शुक्रवार को प्राधिकरण और प्रशासनिक कार्यालय खुले तो अधिकारी सीधे आफिस पहुंचे और अपनी मेजों से फाइलों को हटवा दिया। कई अधिकारियों ने मेज के अंदर दराज में रखे जरूरी कागजों को अपने सूटकेस में रखवाया। कुछ अधिकारियों ने तो शुक्रवार को ही प्राधिकरण में अपना अंतिम दिन मानकर कार्य किया और अपने अधीनस्थों से मुलाकात की।

    -Dainik Jagran
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  • आर्थिक हालात बिगड़ने से प्राधिकरण अधिकारी चिंतित


    ग्रेटर नोएडा। बसपा सरकार द्वारा बनाई गई भूमिअधिग्रहण नीति को सपा सरकार लागू करेगी या नहीं ? ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की हालत का निर्णय इसी सवाल पर निर्भर है।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की आर्थिक हालत खस्ता चल रही है। प्राधिकरण की स्थिति कैसे सुधरेगी, किसी के पास फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। इन सबके पीछे नोएडा एक्सटेंशन का विवाद ही रहा है। जिसका समाधान होने में कितना वक्त लगेगा, किसी को पता नहीं है।

    नोएडा एक्सटेंशन का जब विवाद चल रहा था तो उसके समाधान के लिए अधिकारियों ने सारे प्रयोग किए। कोर्ट ने समाधान का रास्ता निकाला, लेकिन इसके लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये किसानों को देने हैं। किसानों को मनाने के लिए 500 करोड़ रुपये नोएडा से उधार लिए गए थे और कोर्ट के आदेश पर अतिरिक्त मुआवजा का वितरण शुरू किया जा चुका है।

    प्रदेश में सरकार बदल चुकी है। नई सरकार के अफसरों को पूरा माजरा समझने में देर लगेगी। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जमीन अधिग्रहण का काम एकदम रुका हुआ है। किसान जमीन देने को तैयार नहीं हैं। जब प्राधिकरण को जमीन ही नहीं मिलेगी तो बात बननी मुमकिन नहीं है। ग्रेनो फेस वन में अब अधिग्रहण के लिए जमीन बची भी नहीं है।

    जमीन अधिग्रहण की नई नीति लागू होगी या नहीं, असमंजस
    मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल
    नोएडा सेक्टर-30 और ग्रेटर नोएडा में मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू हो जाने के अलावा इसके विस्तार हेतु निर्माण कार्य जारी है। मायावती के ड्रीम प्रोजेक्टों में शुमार होने वाले इस प्रोजेक्ट को नई सरकार किस तरह पूरा करती है, यह समय ही बताएगा।

    -Amar Ujala
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  • PROGRESS MUST BE SUSTAINED
    Builder and buyers at Noida, Greater Noida and Noida Extension are apprehensive about the change of guard in UP.


    The spectacular return of Mulayam Singh Yadav at the helm of Uttar Pradesh is haunting most developers, builders and buyers of apartments in Noida, Greater Noida and Yamuna Expressway, a hub of affordable housing in the NCR.


    Most of them believe tough times are round the corner. They expect a backlash from the new government, as Mayawati had an emotional connect with the area. Her ancestral village is in Badalpur in Greater Noida and she also braved the Noida jinx — any CM who visits Noida is bound to lose the job goes the belief.


    Buyers of property in Noida Extension, in particular, are a worried lot. However, some builders feel that with the rise of Akhilesh Yadav, son of Samajwadi Party chief Mulayam Singh and the young face of the party, as the second most powerful leader in the party, may change the equation this time. Akhilesh’s stated determination for development of the region, realtors feel, may bring some solace to the construction industry.


    Noida and Greater Noida have a unique model to develop townships in the country. In Noida and Greater Noida, it is the authority which acquires land, develops infrastructure and then sells it to developers through auctions. Because of this model, it has been found that these townships have world-class infrastructure, which will help the country in attracting foreign investments.


    Stakeholders like developers and buyers feel that, ultimately, growth and development are key to solve the problem of unemployment. The most heartening thing is that Noida and Greater Noida do not require any financial help from the exchequer for their development.


    The authority raises funds from end users to develop and maintain the area. The only thing that the townships require from the government is the maintenance of law and order, which is paramount for doing business.


    Akhilesh’s promise to maintain law and order in the state augurs well for the growth of commercial activities in Noida and Greater Noida.


    However, the issues related to land acquisition have not been completely resolved yet. The UP state government has already approved the development plan of Noida Extension and forwarded it to the NCR Planning Board according to the direction of the Allahabad high court.


    The developers’ community hopes that the UP government would not change its stand on the issue, as the entire plan was approved by the Greater Noida Authority, which is also a government body.


    Also, the authority has already settled the compensation with the farmers, on the high court’s orders. The issue of land acquisition is not likely to be raked again. Therefore, buyers and developers should not be apprehensive about any further delay in starting the construction of condominiums in the area. Developers feel that the NCR Planning Board is likely to give its go ahead by the end of March.


    The Mayawati government was censured by the judiciary for the manner in which it acquired around 3,000 acres of land in Noida Extension. But her policy to increase the floor area ratio and the number of units that can be built on the given land enabled developer to sell flats in the affordable price range of Rs 10-20 lakh. Around 50,000 apartments have already been sold.


    A total of around 2,00,000 flats are to be built in the area.


    Following a series of court judgments, the authority settled with the farmers and paid an additional amount, almost 50% of the original price. But some of the farmers have now gone to the Supreme Court, though the majority has agreed to accept the new compensation package.


    There are other pressing issues which require the state government’s support for the development of the region. The commissioning of Yamuna Expressway and the permission to construct an airport at Jewar are two issues which are directly linked with the development of Noida and Greater Noida. If the state government wants growth in the region, it must extend support for these projects.


    QUICK BITES


    MOST OF THE BUILDERS AND BUYERS OF APARTMENTS IN NOIDA, GREATER NOIDA AND YAMUNA EXPRESSWAY BELIEVE TOUGH TIMES ARE ROUND THE CORNER. THEY EXPECT A BACKLASH FROM THE NEW GOVERNMENT, AS MAYAWATI HAD AN EMOTIONAL CONNECT WITH THE AREA PROGRESS MUST BE SUSTAINED
    -TOI
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  • बजट स्वीकृत होने तक मुआवजा पर पड़ेगा असर


    प्राधिकरण के पास नहीं बची है मुआवजे के लिए धनराशि
    - नए अधिकारियों की तैनाती के बाद ही होगी बजट के लिए बोर्ड बैठक


    ग्रेटर नोएडा : प्राधिकरण इस माह के अंत तक अपना बजट स्वीकृत कराएगा। इसके लिए बोर्ड बैठक बुलाई जानी आवश्यक है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मौजूदा अधिकारियों का अगले सप्ताह तबादला तय माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान अधिकारी तबादले के मद्देनजर बोर्ड बैठक नहीं बुलाएंगे। नए अधिकारियों को ही बजट की रूपरेखा बनानी होगी। इसके लिए समय लगेगा। सूत्रों का कहना है कि मार्च के अंत तक ही बजट पास कराने के लिए बैठक बुलाई जाएगी। तब तक मुआवजा वितरण प्रभावित हो सकता है। प्राधिकरण के पास इस समय धन का भारी अभाव है। बैंकों से कर्ज लेकर मुआवजा बांटा जा रहा है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार 39 गांवों के किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के लिए प्राधिकरण को करीब पांच हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इसमें से अभी तक मात्र छह सौ करोड़ रुपये ही बांटे जा सके हैं। प्राधिकरण बाकी धनराशि की व्यवस्था में लगा है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि व्यवस्था होने तक मुआवजे का वितरण बंद हो सकता है। इस समय प्राधिकरण के पास मात्र सवा सौ करोड़ रुपये हैं। यह धनराशि अगले सप्ताह दो-तीन गांवों के किसानों में ही बंट जाएगी। जमा धनराशि समाप्त होते ही मुआवजा वितरण बंद हो सकता है। नए अधिकारियों के लिए पैसे की व्यवस्था करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। अधिकारियों को तैनाती के बाद कार्य को समझने में समय लगेगा। बैंकों से कर्ज के लिए भी नए सिरे से आवेदन किया जाएगा। यह प्रक्रिया बजट मंजूर होने के बाद ही शुरू होगी।

    -Dainik Jagran
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  • यूपी में सपा की 'सत्ता' ने बढ़ाई नोएडा एक्सटेंशन में टेंशन!


    नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट बुक करने वाले खरीदार यूपी में मुलायम यादव की सत्ता में वापसी से खासे चिंतित हैं। खरीदार इस बात को लेकर परेशान हैं कि कहीं समाजवादी पार्टी मायवती के इस प्रोजेक्ट को खत्म करने की कवायद तो शुरू नहीं कर देगी? या अखिलेश के होने से उनके लिए कुछ राहत होगी। गौरतलब है कि 2004 में मुलायम ने जिले को भंग कर दिया था और सारे प्रोजेक्ट्स पर रोक लगा दी थी।

    गलत तरीके से किसानों से जमीन अधिग्रहण को लेकर नोएडा एक्सटेंशन के प्रोजेक्ट्स पहले ही अधर में लटके हुए हैं। लेकिन अब यहां बन रहे 2 लाख फ्लैट्स पर तलवार लटक गई है। अगर नई सरकार सुप्रीम कोर्ट में रुख बदलती है तो बिल्डरों और खरीदारों के लिए बहुत ही बुरी खबर होगी। हो सकता है कि किसान भी दोबारा सौदेबाजी करें।

    नोएडा एक्सटेंशन ही नहीं बल्कि दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए भी स्थिति अच्छी नजर नहीं आ रही है। यमुना एक्सप्रेस-वे तैयार है लेकिन टोल, स्पीड और सिक्योरिटी पर कुछ तय नहीं हो पाने की वजह से एक्सप्रेस-वे अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।

    एक्सप्रेस-वे के आसपास टाउनशिप का प्लान भी अभी तक कागजों के ढेर में ही दबा है। यमुना एक्सप्रेस-वे के बिल्डर जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड, जो बीएसपी चीफ मायावती के खासे नजदीकी माने जाते हैं, प्रदेश में बदली सरकार को लेकर खासे चिंतित होंगे।
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