पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • धन के अभाव में फिर रोका बिलों का भुगतान


    ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में फिर से आर्थिक संकट पैदा हो गया है। धन के अभाव में प्राधिकरण ने सभी तरह के बिलों के भुगतान रोक लगा दी है। धन की व्यवस्था होने तक किसी भी ठेकेदार को भुगतान नहीं किया जाएगा। नए कार्यो के लिए टेंडर भी नहीं छोड़े जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि मार्च के अंत में होने वाली बोर्ड बैठक में बजट स्वीकृत होने के बाद ही बिलों का भुगतान किया जाएगा। बोर्ड बैठक में ऐसे निर्णय लिए जाने की संभावना है, जिनसे आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।

    बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 39 गावों के किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने के निर्देश के प्राधिकरण पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा है। किसानों को अब तक 700 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद के बाद बिल्डर व अन्य आवंटियों ने भी प्राधिकरण को दी जाने वाली किश्तों का भुगतान रोक दिया है। इससे प्राधिकरण को पैसा मिलना बंद हो गया है। बैंक भी कर्ज देने में आनाकानी कर रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण ने 500 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था, वह किसानों को दिया जा चुका है। बताया जाता है कि प्राधिकरण के पास इतनी धनराशि भी नहीं बची कि ठेकेदारों को निर्माण कार्य के बिलों का भुगतान किया जा सके। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्राधिकरण में तैनात अधिकारियों का भी यहां से जाना तय हो गया है। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह तक नए अधिकारियों की तैनाती हो जाएगी। प्राधिकरण का बजट तैयार करने के लिए बोर्ड बैठक भी नए अधिकारियों की देखरेख में होगी। बजट के लिए मार्च के अंत में या अप्रैल के प्रथम सप्ताह में बोर्ड बैठक होगी।

    -Dainik Jagran
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  • कोर्ट में दाखिल करने को प्राधिकरण का जवाब तैयार


    ग्रेटर नोएडा : इलाहाबाद हाईकोर्ट में 27 मार्च से शुरू होने वाली 34 गांवों के किसानों की याचिकाओं पर प्राधिकरण ने जवाब तैयार कर लिया है। सुनवाई से दो-तीन दिन पहले प्राधिकरण अपना जवाब दाखिल कर देगा। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सात गांवों के मामलों की पूर्व में सुनवाई हो चुकी है, जबकि पांच गांवों में सिर्फ धारा-4 की कार्रवाई हुई है। इनमें प्राधिकरण को जवाब दाखिल करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कोर्ट में सिर्फ 22 गांवों के मामलों में जवाब दाखिल किया जाएगा।

    ज्ञात हो कि हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर को अपने एक अहम फैसले में ग्रेटर नोएडा के 39 गांवों के किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा व अर्जित भूमि की एवज में छह के बजाय दस प्रतिशत जमीन देने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के इस निर्णय के बाद लखनावली, हबीबपुर, क्यामपुर, सिरसा, वैदपुरा, जलालपुर, चिपियाना, अच्छेजा, रूपवास, कैलासपुर, कुलेसरा, घोड़ी बछेड़ा, जैतपुर वैसपुर आदि 34 और गांवों के किसानों ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बढ़ी दरों का लाभ मांगा है। कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ याचिकाओं पर 27 मार्च से सुनवाई शुरू करेगी।

    अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वैदपुरा, जलालपुर व चिपियाना समेत पांच गांवों में गत वर्ष मार्च के अंतिम सप्ताह में अधिग्रहण की प्रथम कार्रवाई धारा-4 की हुई थी। नियमानुसार एक वर्ष के अंदर यदि धारा-6 की कार्रवाई नहीं होती है तो धारा-4 की कार्रवाई स्वत: रद हो जाती है। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों में कोर्ट में जवाब दाखिल करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसी तरह रूपवास, घोड़ी बछेड़ा व जैतपुर वैसपुर समेत सात गांवों में पूर्व में सुनवाई हो चुकी है। जिन नए किसानों ने याचिका दायर की है, उन्हें पूर्व के आदेश को आधार मानकर स्वत: लाभ मिल जाएगा।



    -Dainik Jagran
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  • POST-POLL SCENARIO UP WANTS CLARITY

    The mood in Noida realty market is that of cautious optimism as Ghaziabad prices move up

    Stability is always welcome. This was how Getamber Anand, vice president, Confederation of Real Estate Developers' Associations of India (CREDAI) reacted when asked about the change of guard in the Uttar Pradesh government. While the developer community is optimistic about young turk Akhilesh Yadav lending a helping hand to the growth of Noida's real estate market and help resolve pressing issues such as the land acquisition row in Noida Extension, home buyers seem to be in a wait and watch mode.

    Real estate experts too prefer to be cautiously optimistic because of “ambiguity“ over land policy matters.

    Until such issues are sorted out, investors will not be buoyant about the Noida market.

    Investor confidence now depends on how the new government executes its promises. The fate of projects undertaken by the previous government still remains uncertain, with more clarity expected in another three to six months.

    “Our hope is that the new chief minister will not turn us down. Investor confidence depends on his actions.

    Everybody is in wait and watch mode. The number of enquiries has substantially gone down. Once there is clarity on the land policy, I'm hoping my phones will start to ring again,“ says Kamal Batra of Buniyad properties.

    Developers such as Manoj Gaur, managing director, Gaursons India Ltd are optimistic. “I hope that the What are your plans Are you bullish about Noida?

    Present government will resolve the Noida Extension issue as soon as possible as that will l benefit all the concerned parties buyers and developers. I am also confident that various issues of public concern such as widening of NH 24 and the power generation project at Dadri will materialise soon,“ he adds.

    Even those who are believed to be ousted chief minister Mayawati loyalists are confident. “We do not see any problem. We have been active for more than five decades in the state.

    The change in the political scenario will not have any impact on our projects,“ says Manpreet Singh Chadha, joint managing director of Wave Infratech.

    At an event to announce the launch of a 152-acre township in Noida this week, he said, “However, if there are any pressing issues, we will leave it to time.“

    P N Mishra, executive director, business development, Ansal API, hopes the new government will carry forward its earlier vision of policy-based development.
    In 2005, Uttar Pradesh was the only state in India that had initiated the hi-tech township policy. The policy was based on the central government's National Housing and Habitat Policy 1998. “The government had also maintained transparency in awarding land to developers. But land trading was witnessed in the later regime.

    People who had no expertise were given land to develop townships. They resorted to land trading which caused great inconvenience to buyers as well as the farmers. That was a very unfortunate development and that's the reason issues like Noida Extension came up,“ he says.

    Homebuyers who have invested in projected in Noida and Noida Extension are worried about the future of their projects and are keeping their fingers crossed.

    According to Vineet Relia, chief operating officer, SARE Homes, home buyers are more conscious in the present scenario. The situation in Noida may enable Ghaziabad to reap gains.

    However, this flux will last only for three to six months and confidence will return to the Noida market once there is more clarity.

    Experts say that buyers' worries could be unfounded as developers will work out their equations with the new government and things will settle down. The main cause of worry is whether projects undertaken and cleared during the previous regime will be undone. Everything will fall in place in the next three to six months when the picture will become clear.

    “There is uncertainty about where loyalties lie.
    These are temporary issues that will crop up but things

    -HT
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  • Noida Extension buyers live on in hope

    Send an open letter to Akhilesh Yadav apprising him of the fate of over a lakh home buyers

    destiny had been kind to 35ear-old Gopi Raman Alok, he would have now been getting ready to take over his Noida Extension apartment.

    That has not happened. In fact, work on the project he is invested in has not even started. Alok, who works for an IT firm in Noida, has already paid 20% of the total cost of the 2BHK apartment he booked more than a year ago and is hoping things work out finally.

    Ask him about the change of guard in Uttar Pradesh following the state elections and he says, “I can only hope that the new government does something to ensure that Noida Extension is saved.“

    Another buyer, Mahesh Kumar Jha, has received a cancellation letter from his builder.
    Though he has paid up the mandatory 10% booking amount, he has recently been sent a letter by the builder informing him that his booking has been cancelled because he has not paid up. “I paid the 10% amount calculated on the basic selling price. The developer has now included preferential location charges as part of the cost and is claiming that I have not paid up,“ he says. Other buyers feel that if there is a major administrative shake-up, efforts directed at resolving the issue will go off track. “If government officials change, it will impact the ongoing efforts in court to solve the issue,“ says Abhishek Kumar of Noida Extension Flat Owners and Members Association (NEFOMA), adding “the new government may only talk in favour of the farmers and raise the compensation amount. We have run out of patience,“ he says.

    The association has also sent an open letter to the Samajwadi Party head office in Lucknow to apprise the new chief minister Akhilesh Yadav of the fate of the two lakh-plus home buyers and “we are hoping that they will keep our interests in mind. We hope the new government will help us tide over the crisis soon,“ says the founder of the association, Devender Kumar.

    “We will also be filing a review petition in the Allahabad High Court, a reminder that we are the aggrieved party. We are currently waiting for the March 26 decision by the National Capital Region Planning Board (NCRPB) and the hearing to come up in the Allahabad High Court on March 27 before deciding the final course of action.

    There is no clarity on the issue yet,“ he adds.

    The builders, too, are optimistic. “I hope issues in Noida Extension get resolved soon,“ adds Anil Kumar Sharma, chairman and managing director of the Amrapali Group.
    Four months have passed since the Allahabad High Court order raised hopes of revival of projects in Noida Extension.

    It had directed the Greater Noida Authority to pay the hiked land compensation to farmers and 10% of developed land.

    The work could not restart as the court had also directed the authority to first get the NCRPB's approval of the Master Plan 2021 and then begin construction. The approval is awaited.

    The Greater Noida Authority had acquired 3000 hectares of land between 2005 and 2010 for industrial development in Noida Extension. In 2008 it had changes the land use to residential and continued with the acquisition.

    -HT
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  • अब किसानों का हक मांगेंगे अन्ना हजारे

    नोएडा। अन्ना हजारे अब किसानों की मांग को लेकर आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं। इसे लेकर टीम अन्ना के साथ उन्होंने देश के कुछ किसान प्रतिनिधियों को बुलाकर लंबी मंत्रणा की। सूत्राें ने बताया कि किसानों की भूमि अधिग्रहण की मांग को लेकर अन्ना ने किसान प्रतिनिधियों से वार्ता कर आंदोलन की जरूरत बताई। अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में भी किसानों का समर्थन मांगा।

    सेक्टर 43 में टीम के सदस्यों के साथ अन्ना ने किसानों के साथ मंत्रणा भी की। इसमें मुख्य रूप से भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा, उत्तर प्रदेश के बैनर तले करीब आधा दर्जन किसान पहुंचे थे। इसके अलावा जेवर सहित एनसीआर के काफी किसान टीम अन्ना के निमंत्रण पर पहुंचे। मोर्चा के अध्यक्ष चौधरी ऊधम सिंह ने बताया कि भूमि अधिग्रहण व किसानों की फसल का उचित दाम न मिल पाने पर अन्ना में काफी रोष दिखा। उन्होंने कहा कि जल्द ही किसानों के मुद्दों को उनके आंदोलन में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने व जन लोकपाल बिल के समर्थन में किसानों को आगे आना होगा। यह मुद्दे देश के अलावा उनके लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

    बताया जाता है कि नोएडा में बनाए गए बेस कैंप में किसानों को बुलाकर अन्ना ने उनके लिए आंदोलन करने की नींव आज डाल दी है। किसान नेताओं ने आश्वासन दिया है कि वे जंतर-मंतर के आंदोलन में बड़ी संख्या में पहुंचेंगे।

    कई किसान प्रतिनिधियों से बेस कैंप नोएडा में की लंबी मंत्रणा

    -Amar Ujala
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  • अब जमीं के लिए 'जंग' लड़ेंगे हजारे


    नोएडा :
    भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने वाले अन्ना हजारे अब किसानों की जमीन के लिए भी 'जंग' लड़ेंगे। अपने 2 दिवसीय प्रवास के लिए नोएडा पहुंचे अन्ना ने कहा कि आज से 64 साल पहले जो स्थितियां थी, वे अब भी बदली नहीं हैं। उस वक्त अंग्रेज संसद-विधान सभाओं मंे कानून बनाकर मनमर्जी से जमीन छीन लेते थे। आज डंडे के बल पर किसानों से जमीन ले ली जाती है। देश का अन्नदाता पहले भी लुटता था और अब भी लुट रहा है।

    अपने सहयोगी प्रशांत भूषण के सेक्टर-43 स्थित मकान में ठहरे अन्ना ने कहा कि उद्योगपतियों ने राजनीतिक दलों पर प्रभाव डालकर भूमि अधिग्रहण की पॉलिसियां अपने मन मुताबिक बनवा रखी हैं। इसके चलते उद्योगपतियों को जब भी जमीन की जरूरत होती है, वे सत्ता में मौजूद अपने खास नेताओं को इशारा कर देते हैं। सरकार उनके लिए औने- पौने दाम में जमीन छीन लेती है। अन्ना हजारे ने कहा कि अब यह नाइंसाफी नहीं चलेगी। उद्योगपतियों की तरह किसानों को अपनी जमीन मर्जी से खरीदने-बेचने का हक मिलना चाहिए। यदि सरकार या उद्योगपतियों को डिवेलपमेंट के लिए जमीन की जरूरत हो तो वे ग्रामसभा से बात करके अपना प्रस्ताव दें। इसके बाद ग्राम सभा फैसला करे कि जमीन देनी है या नहीं।

    इस दौरान अन्ना से हरियाणा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के किसानांे ने मुलाकात की। सभी ने सरकारों के इकतरफा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ अपना दुखड़ा सुनाया। किसानों ने कहा कि मुआवजा लेने से इंकार करने पर सरकार ट्रेजरी में उनके नाम मुआवजा डालकर जमीन पर कब्जा कर लेती है। सरकारें बदलीं लेकिन भूमि अधिग्रहण की पॉलिसी बदस्तूर पहले वाली चली आ रही है। इसके खिलाफ कोर्ट मंे भी केस किए गए, लेकिन 30 साल से मुकदमा चलने के बावजूद आज तक मामला पेंडिंग है। अन्ना हजारे ने उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे हिम्मत न हारें। एक न एक दिन इंसाफ को जीत जरूर हासिल होगी।

    -nbt
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  • RBI's RTI REPLY to NEFOMA on Pvt bank
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  • Anna should also fight for Flat Buyers

    Originally Posted by fritolay_ps
    अब जमीं के लिए 'जंग' लड़ेंगे हजारे


    नोएडा :
    भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने वाले अन्ना हजारे अब किसानों की जमीन के लिए भी 'जंग' लड़ेंगे। अपने 2 दिवसीय प्रवास के लिए नोएडा पहुंचे अन्ना ने कहा कि आज से 64 साल पहले जो स्थितियां थी, वे अब भी बदली नहीं हैं। उस वक्त अंग्रेज संसद-विधान सभाओं मंे कानून बनाकर मनमर्जी से जमीन छीन लेते थे। आज डंडे के बल पर किसानों से जमीन ले ली जाती है। देश का अन्नदाता पहले भी लुटता था और अब भी लुट रहा है।

    अपने सहयोगी प्रशांत भूषण के सेक्टर-43 स्थित मकान में ठहरे अन्ना ने कहा कि उद्योगपतियों ने राजनीतिक दलों पर प्रभाव डालकर भूमि अधिग्रहण की पॉलिसियां अपने मन मुताबिक बनवा रखी हैं। इसके चलते उद्योगपतियों को जब भी जमीन की जरूरत होती है, वे सत्ता में मौजूद अपने खास नेताओं को इशारा कर देते हैं। सरकार उनके लिए औने- पौने दाम में जमीन छीन लेती है। अन्ना हजारे ने कहा कि अब यह नाइंसाफी नहीं चलेगी। उद्योगपतियों की तरह किसानों को अपनी जमीन मर्जी से खरीदने-बेचने का हक मिलना चाहिए। यदि सरकार या उद्योगपतियों को डिवेलपमेंट के लिए जमीन की जरूरत हो तो वे ग्रामसभा से बात करके अपना प्रस्ताव दें। इसके बाद ग्राम सभा फैसला करे कि जमीन देनी है या नहीं।

    इस दौरान अन्ना से हरियाणा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के किसानांे ने मुलाकात की। सभी ने सरकारों के इकतरफा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ अपना दुखड़ा सुनाया। किसानों ने कहा कि मुआवजा लेने से इंकार करने पर सरकार ट्रेजरी में उनके नाम मुआवजा डालकर जमीन पर कब्जा कर लेती है। सरकारें बदलीं लेकिन भूमि अधिग्रहण की पॉलिसी बदस्तूर पहले वाली चली आ रही है। इसके खिलाफ कोर्ट मंे भी केस किए गए, लेकिन 30 साल से मुकदमा चलने के बावजूद आज तक मामला पेंडिंग है। अन्ना हजारे ने उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे हिम्मत न हारें। एक न एक दिन इंसाफ को जीत जरूर हासिल होगी।

    -nbt

    Anna main supporters are same middle class people who has purchased / booked flat in Noida extension / Y.E. etc
    Can he go against his own supporter to loose all the core base he has.
    I am surprise by his wisdom.
    Let Anna Hazare fight with his core supporter.
    (Binash Kaale Biprit Budhi)
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  • एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर टिकी निगì

    एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर टिकी निगाहें
    Mar 19, 01:03 am
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    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : एक लाख निवेशकों की निगाहें अब एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर टिकी हुई है। 26 मार्च को होने वाली बैठक में नोएडा एक्सटेंशन का भविष्य तय होगा। बैठक में अगर शहर के मास्टर प्लान 2021 को मंजूरी मिली तो छह माह से रुका विकास कार्य एक बार फिर शुरू हो जाएगा। निवेशकों का कहना है कि बोर्ड बैठक में अगर इस बार मास्टर प्लान को मंजूरी न मिली तो आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे।
    दिल्ली-एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की तकनीकी कमेटी की बैठक 16 मार्च को हुई। बैठक में शासन की तरफ से कोई अधिकारी नहीं पहुंच पाया था। अब बोर्ड की बैठक 26 मार्च को प्रस्तावित है, जिसमें शहर का मास्टर प्लान 2021 मंजूरी के लिए रखा जाएगा। प्लानिंग बोर्ड की तरफ से मास्टर प्लान 2021 को लेकर की गई आपत्तियों को प्राधिकरण ने पहले निराकरण कर संशोधित प्रस्ताव जमा कर दिया था। मास्टर प्लान की कमियों को भी दूर कर दिया था। बोर्ड की बैठक नही हो पाने के कारण मास्टर प्लान पर कोई निर्णय अब तक नहीं हो पाया था। प्राधिकरण को उम्मीद है कि इस बार बोर्ड बैठक में मास्टर प्लान मंजूर हो जाएगा। मास्टर प्लान को लेकर प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दायर कर रखी है। इस पर 27 मार्च को सुनवाई है। माना जा रहा है कि नोएडा एक्सटेंशन का भविष्य 26 व 27 मार्च को तय हो जाएगा। मास्टर प्लान को लेकर सबसे ज्यादा चिंता एक लाख निवेशकों में है। निवेशक मास्टर प्लान को लेकर कई बार प्राधिकरण अधिकारियों पर दबाव बना चुके है और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड कार्यालय का घेराव कर चुके हैं।
    नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर एंड मेंबर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अनू खान का कहना है कि इस बार बोर्ड बैठक में मास्टर प्लान मंजूर न होने पर बैठककर आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि निवेशकों के हित को देखते हुए बोर्ड सकारात्मक निर्णय लेगा। मालूम हो कि शहर का मास्टर प्लान 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर न होने के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2011 में निर्माण कार्य पर रोक लगा दिया था। मास्टर प्लान मंजूर होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया था। नोएडा एक्सटेंशन में निर्माण कार्य बंद होने से एक लाख खरीदारों के अपने घर का सपना अधर में लटक गया।

    एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर टिकी निगाहें - Jagran Yahoo! India
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  • बिना मुआवजा दिए जमीन पर कब्जे का विरोध

    बिना मुआवजा दिए जमीन पर कब्जे का विरोध
    Mar 19, 01:03 am
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    दादरी, संवाद सहयोगी : सिलारपुर गांव में रविवार को किसानों की पंचायत हुई। इसमें किसानों ने आरोप लगाया कि बिना मुआवजा दिए जमीन पर हाईटेंशन बिजली की लाइन लगाई जा रही है। निर्णय लिया गया कि गांव में विकास कार्य, जमीन का ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर मुआवजा, आबादी से हटकर लाइन लगाने का निर्णय और ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमा वापस नहीं होगा, तब तक कार्य नहीं चलने दिया जाएगा।
    गांव सिलारपुर में सार्वजनिक स्थान पर आसपास गांवों के किसानों की पंचायत हुई। पंचायत में किसानों ने कहा कि इंडियन आयल कारपोरेशन की गैस पाइपलाइन जिन गांवों से होकर निकाली गई है,उन गांवों में कंपनी ने विकास कार्य कराए हैं। कंपनी के अधिकारियों ने उपजिलाधिकारी के समक्ष किसानों के साथ बैठक कर उनके गांव का विकास कराने का आश्वासन भी दिया था। बाद में बिना मुआवजा दिए कंपनी के लिए हाईटेंशन की लाइन ले जाया जाने लगा। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों के साथ पुलिस ने ज्यादती कर ग्राम प्रधान समेत कई लोगों पर लाठीचार्ज के बाद उन्हीं के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज की है, जो सरासर अन्याय है। जब तक किसानों को ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर जमीन, गांव में विकास कार्य, हाईटेंशन की लाइन आबादी से अलग करने और ग्रामीण पर दर्ज मुकदमा वापस लेने का निर्णय नहीं होगा, हाईटेंशन लाइन को नहीं बनने दिया जाएगा। पंचायत में विजय प्रधान, सतीश, ओमप्रकाश सिंह, राजेंद्र शिशौदिया, बिजेंद्र सिंह, मूलचंद प्रधान, शंकर लाल, अश्वनी, रमेश प्रधान, योगेंद्र भाटी, लखीराम, बिजेंद्र, उदयराज समेत आसपास गांवों के ग्रामीण मौजूद थे।

    -dianik jagran
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  • NEFOMA letter to UP CM on NE issue...
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  • Part 2
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  • yes.. AVJ Platinum guys have said the same to me also..
    I have also booked a two BHK Flat at AVJ Platinum...
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  • अधिग्रहण संबंधी याचिकाओं पर एक साथ होगी सुनवाई


    ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के खोदना खुर्द गांव के किसानों ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 13 किसानों की दायर याचिकाओं पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्राधिकरण से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट अब 27 मार्च से सभी गांवों के प्रकरणों पर एक साथ सुनवाई करेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी 27 मार्च से 34 अन्य गांवों के किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू होगी। प्राधिकरण ने जवाब दाखिल करने की तैयारी कर ली है। इस सप्ताह भूमि विभाग व एडीएम एलए आफिस के आला अफसरों को इलाहाबाद रवाना किया जाएगा।

    ज्ञात हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर के अपने फैसले में ग्रेटर नोएडा के 39 गांवों के किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा व अर्जित भूमि की एवज में छह के बजाय दस फीसदी जमीन देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्राधिकरण 39 गांवों में शिविर लगाकर करीब 700 करोड़ रुपये का मुआवजा बांट चुका है। वहीं बिसरख, घोड़ी बछेड़ा, सैनी, जुनपत आदि 30 गांवों के करीब 70 किसानों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को खोदना खुर्द गांव के लेखराज, अनिल, उमेश, समसुद्दीन, बत्तन देवी, पतराम आदि 13 किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। किसानों के वकील फतेह सिंह चौहान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट एक साथ सभी गांवों के प्रकरणों पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने प्राधिकरण से खोदना खुर्द के मामलों में जवाब मांगा है। वकील परमिंद्र भाटी ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट भी 34 गांवों के किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।

    -Dainik Jagran
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