पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    Lates update - Noida extension..No tension

    Good news for Noida extension investors - YouTube


    Mr Frito - it is delighting - extremely delighting. Thank you !!
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  • नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों को मिली राहत


    ग्रेटर नोएडा : लंबे समय से तनाव झेल रहे नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों, बिल्डरों व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के लिए राहत की खबर है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2021 पर किसी चर्चा करते हुए किसी तरह की आपत्ति से इनकार किया है। साथ ही इस पर उत्तर प्रदेश सरकार से राय मांगी है। सरकार की टिप्पणी मिलते ही मास्टर प्लान को मंजूरी दे दी जाएगी। इसके लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। बोर्ड ने 20 सदस्यीय प्लानिंग कमेटी को इसके लिए अधिकृत कर दिया है। इस निर्णय से नोएडा एक्सटेंशन की बाधा काफी हद तक दूर हो गई है। प्रदेश सरकार ने भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए निवेशकों के हितों का पूरा ख्याल रखने का आश्वासन दिया है।

    एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक 26 मार्च को होनी है। इसमें रखे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा के लिए बृहस्पतिवार को दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रोटोकॉल मंत्री अभिषेक मिश्रा, प्रबंध निदेशक यूपीएसआरटीसी व परिवहन आयुक्त आलोक कुमार प्रथम, प्रदेश के चीफ टाउन प्लानर एनआर वर्मा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण भी शामिल हुए। बैठक में ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2021 पर चर्चा करते हुए बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि मास्टर प्लान को मंजूरी देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। छोटी-मोटी कमियां है, इन्हें एक-दो दिन में दूर करा लिया जाए। बोर्ड का मानना था कि उत्तर प्रदेश में कुछ दिन पहले ही सत्ता परिवर्तन हुआ है। नई सरकार को पता होना चाहिए कि मास्टर प्लान में क्या प्रावधान किए गए हैं। मंजूरी दिए जाने से पहले एक बार नई सरकार के सामने मास्टर प्लान को रखा जाए और उस पर सरकार की राय मांगी जाए। सभी सदस्य इस पर सहमत हो गए। बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार से 15 दिन के अंदर अपनी राय देने को कहा है।

    हालांकि, बोर्ड के इस निर्णय से 26 मार्च को होने वाली बैठक में मास्टर प्लान स्वीकृत नहीं हो पाएगा। बोर्ड की अगली बैठक छह माह बाद होगी। तब तक प्राधिकरण को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बोर्ड ने मास्टर प्लान स्वीकृत करने के लिए प्लानिंग कमेटी को अधिकृत किया है। इस कमेटी में 20 सदस्य है और हर माह इसकी बैठक होती है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्लानिंग कमेटी अपनी सुविधानुसार कभी भी बैठक बुला सकती है।

    इस बारे में प्रदेश सरकार के प्रोटोकॉल मंत्री अभिषेक मिश्रा ने बयान जारी कर कहा है कि सरकार निवेशकों के हितों का पूरा ध्यान रखेगी। माना जा रहा है कि 15 दिन के अंदर प्रदेश सरकार प्लानिंग कमेटी को अपनी राय दे देगी। इसके बाद मास्टर प्लान को मंजूरी दे दी जाएगी।

    एक लाख निवेशकों को राहत
    प्राधिकरण अधिकारी मानकर चल रहे हैं कि अप्रैल में मास्टर प्लान को मंजूरी मिल जाएगी। ऐसा हो गया तो नोएडा एक्सटेंशन के करीब एक लाख निवेशकों को भारी राहत पहुंचेगी। मास्टर प्लान स्वीकृत नहीं होने की वजह से ग्रेटर नोएडा में भूखंडों की रजिस्ट्री, निर्माण व कंप्लीशन का कार्य बंद है। मास्टर प्लान मंजूर होते ही बिल्डरों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

    किसानों को भी मिलेगी राहत
    मास्टर प्लान मंजूर नहीं होने से किसानों की आबादी की बैकलीज व छह प्रतिशत भूखंडों का आवंटन रुका पड़ा है। मास्टर प्लान स्वीकृत होते ही बैकलीज व छह प्रतिशत भूखंडों का आवंटन शुरू हो जाएगा।



    -Dainik Jagran
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  • नोएडा एक्सटेंशन का विवाद सुलझने के आसार


    नोएडा एक्सटेंशन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। नोएडा एक्सटेंशन को लेकर चल रहा विवाद जल्द सुलझने का आसार बन रहे हैं। बृहस्पतिवार को हुई एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में मास्टर प्लान-2021 को जल्द मंजूरी के संकेत मिले हैं। बैठक में प्राधिकरण के मास्टर प्लान-2021 के नियम-कायदों को काफी हद तक सही बताया गया। इस पर बोर्ड ने प्रदेश सरकार से 15 दिन में टिप्पणी मांगी है।0

    बोर्ड ने एक कमेटी को अधिकृत किया
    बोर्ड ने एक कमेटी को अधिकृत किया है कि वह 15 दिन में होने वाली बैठक में औपचारिकताएं पूरी करे। बैठक में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रोटोकॉल मंत्री अभिषेक मिश्रा, सचिव आलोक कुमार, प्रदेश के चीफ टाउन प्लानर एनके वर्मा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन/सीईओ रमा रमन मौजूद थे।

    तीन महीने से जारी थीं कोशिशें
    प्राधिकरण के मास्टर प्लान पर काफी दिन से माथापच्ची चल रही थी। बृहस्पतिवार को प्रदेश सरकार और प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हुए, तभी मंथन हो सका। प्लानिंग बोर्ड तक पहुंचाने के लिए प्राधिकरण तीन माह से प्रयास कर रहा था। अब बैठक 26 मार्च को प्रस्तावित है। इसमें कुछ फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    देनी होगी लिखित सहमति
    मास्टर प्लान 2021 में एक पेंच फंस गया है। यह तैयार पिछली सरकार ने किया था, लेकिन मंजूरी की नौबत नई सरकार में आई है। इसलिए बोर्ड ने साफ कहा कि प्लान मंजूर होने से पहले सरकार को लिखकर देना होगा कि हम सहमत हैं। इसलिए 15 दिन का समय भी दिया गया है।

    कमेटी अधिकृत हुई
    सूत्रों के मुताबिक, प्राधिकरण के लिए सबसे अच्छी बात यह रही कि अब अलग से गठित कमेटी ही मास्टर प्लान को मंजूर कर देगी। इस कमेटी की एक माह में दो बार बैठक होती है, जबकि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक करीब छह माह में एक बार होती है। गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 39 गांवों के किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे। सभी गांवों की सुनवाई के बाद 21 अक्तूबर 2011 को कोर्ट ने फैसला दिया था कि किसानों को 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और 10 फीसदी जमीन दी जाए। साथ ही आदेश था कि मास्टर प्लान-2021 के तहत आवंटन और विकास को एनसीआर बोर्ड से मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ाया जाए। इसके बाद ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन क्षेत्र में तमाम विकास कार्य रोक दिए गए थे।


    -Amar Ujala
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  • G. Noida realty projects may resume in a month

    an important step towards resolving a year-long realty crisis in Noida Extension, the NCR planning board in Delhi on Thursday said it had examined Greater Noida’s master plan 2021 and sent it to its statutory planning committee for recommendations and consideration. The NCR cell of the UP government cleared the plan late last year.

    The planning board has sought comments from the UP government on certain points.

    Now, the planning committee will examine the reply before a no-objection note can be issued. This clearance is a prerequisite to resumption of housing projects in Noida Extension, where 2.5 lakh houses are planned and, of them, one lakh were booked long back.

    Greater Noida authority chairman Rama Raman told Hindustan Times, “Unlike the NCR board, the plan committee meets frequently. We’re hopeful of getting a go-ahead in a month.”

    Realty projects have remained halted for five months despite the Allahabad high court on October 21 last year raising hopes of a revival, when it ruled that land would remain with builders and farmers would get increased benefits.

    The NCR board came into picture as the court also said construction would not begin till it approved the master plan.

    Some feel that a change of guard at Lucknow seems to be working. On Thursday, UP minister Abhishek Mishra represented chief minister Akhilesh Yadav. The meeting was also attended by top officials and ministers of the Centre, Delhi government, besides those of Haryana and Rajasthan.
    “During the BSP regime, UP ministers and officials in Lucknow never recognised the importance of the NCR board,” said a senior official present at the meeting.

    The planning board comprises members of the governments of four states — Delhi, Rajasthan, Haryana and Uttar Pradesh — apart from the ministries of central government.

    Mishra made it clear that the interests of thousands of homebuyers would be protected.

    -HT
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  • Noida Extension buyers to join Anna’s fast


    NOIDA: Even after the NCR Planning Board meeting on Thursday gave some hope for resumption of projects in Noida Extension, homebuyers are sceptical over the assurance being given to them from several quarters. Buyers feel that it is high time that a time-bound action plan is put in place for all agencies involved in the process of approving the Master Plan 2021 of the Greater Noida Authority. While their petition for putting a timeframe on NCRPB is scheduled for hearing on March 27 in Allahabad high court, several homebuyers have now decided to join Anna Hazare in his fast at Jantar Mantar on Sunday as a mark of protest.

    Buyers feel that time limits should be imposed not only on the Greater Noida Authority to ensure that NCRPB's recommendations are properly incorporated into its Master Plan, but also on the courts to dispose the numerous cases filed by farmers in Greater Noida.

    "In order to avoid pushing thousands of middle-income families into financial disarray, it is important that a particular time limit is now put on all concerned parties to work towards winding up this dispute," said Ravi Garg, a homebuyer in Panchsheel Greens project in Noida Extension. "We have been assured several times in the past that projects would resume soon. The fact, however, remains that nothing positive has happened so far and we have lost a lot of time. With burdens of home loans over our heads, any further delay might reduce us to bankruptcy," added Garg.

    Several homebuyers have also decided to join Anna Hazare's fast at Jantar Mantar in New Delhi on Sunday in protest against the apathy shown towards them. "Of all parties involved in this imbroglio, we are the ones who have been affected the most," said Abhisek Kumar, a member of another homebuyers' group, NEFOMA. "We have decided to join Anna Hazare in his fast in order to make our grievances felt at the highest levels in the country," said Kumar.

    In addition to the NCRPB hurdle, there are also a number of petitions against land acquisition which are pending in various courts. "If any of these cases go in favour of farmers and land acquisition is quashed, certain projects might get affected," said Sumit Bansal, who has booked a villa in Amrapalli Dream Valley. "It is not possible for us to hang on to our investments in these projects if we are not assured of a time limit within which the cases are resolved and construction would begin. The prospect of making an exit from the project after staying put for so long is not at all viable because the returns on these investments would be nil," added Bansal.

    The Noida Extension Flat Buyers' Welfare Association (NEFBWA) has already filed a petition in the Allahabad high court to impose a time limit on NCRPB to give its sanctions to Master Plan 2021. "It does not seem that agencies would expedite work for resumption of construction until there is a legal obligation on them to do so," said secretary of NEFBWA, GL Sagar.

    "The hearing to our petition is less than a week away and we think that the only outcome to this is through the court," said Sagar.

    -TOI
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  • अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़ेंगे बायर्स
    नोएडा। अपनी परेशानी को अन्ना के आंदोलन से जोड़ने के लिए नोएडा एक्सटेंशन के बायर्स 25 मार्च को दिल्ली जाएंगे। वहां न सिर्फ अन्ना केआंदोलन का समर्थन करेंगे, बल्कि अन्ना से नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों की परेशानी बताएंगे और आंदोलन में इस मुद्दे को शामिल करने के लिए अन्ना से अपील करेंगे।
    नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स एंड मेंबर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि अपने मेंबरों और अन्य खरीदारों से मोबाइल एसएमएस के जरिए संपर्क कर 25 मार्च को दिल्ली चलने की अपील की जा रही है, ताकि हजारों निवेशकों की इस समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर लाया जा सके। एसोसिएशन ने नोएडा एक्सटेंशन मुद्दा सुलझने तक ग्रेटर नोएडा के सीईओे का स्थानांतरण न करने की अपील प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की है।

    -amar Ujala
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  • INVESTORS MAY FIND ROAD LESS BUMPY
    Noida Extn relief by April

    NCR Planning Board Proposes Changes In Master Plan


    New Delhi: The uncertainty surrounding the fate of the Noida Extension housing projects seems to be almost over.The NCR Planning Board (NCRPB) has suggested certain changes to be incorporated in the master plan before it could be approved by the boards technical committee,which,the sources said,could be done by this April.
    On Thursday,Union urban development minister Kamal Nath said the state government would no longer need the boards approval on the changes made in the Greater Noida Master Plan 2021,which is prerequisite for any work on the development projects in the area to resume.Instead,the government and the Greater Noida Authority will have to incorporate suggestions made by the board,including the provision to increase the green belt and protect the Dadri wetland.

    The authority then has to submit the master plan to the technical committee of the board for final approval.Sources said the issue was likely to be resolved by April.The UP government,too,on Thursday said interest of investors would be protected.
    These decisions were taken at the meeting held in the capital attended by UP chief minister Akhilesh Yadavs trusted aide and minister of state (CM protocol),Abhishek Mishra.He told TOI,We want to work with the Centre.The government has come to power recently.We will soon consider the suggestions made by the board and will get back to the technical committee.

    Mishra said interests of the people who had invested their lifetime savings would be safeguarded.People should have no fear of Noida losing its importance under the new regime, he said.

    NCRPB member-secretary Naini Jayseelan said they would not take long to clear the plan once the state had incorporated the changes.The Noida Extension issue can easily be sorted out, she said.

    Mishra attending the meeting has also sent some feelers that the state is serious about reviving the plan in which around 50,000 home buyers have already invested.This is perhaps the first time in the recent years when a UP minister participated in an NCRPB meeting.

    These developments have come as a huge relief to the Greater Noida Authority officials.It is a positive step towards resolving the Noida Extension chaos and we are hopeful that the whole matter will be resolved by April, said authority CEO Rama Raman.

    Sources said changes proposed by the board would also be incorporated in the sub-regional plan of UP.The master plan was presented to NCRPB earlier this year following an Allahabad high court order that had made it mandatory for the authority to get all changes made in the master plan approved by the board.

    The approval mainly pertains to the change in land use of around 2,500 hectares in Greater Noida that the authority claims was approved by the state government.In 2007,the authority had created Noida Extension by diverting 2,500 hectares of 3,000 hectares of industrial land for residential use.The same area of land was arranged for the industrial use from the land earmarked for residential purposes in the other part of Greater Noida.

    But the change in land use has sparked off a controversy.Around 40 villages approached courts,including the Supreme Court,for better compensation or return of their land.HC then ordered for mandatory approval from NCRPB for the projects.
    MD of Gaursons Manoj Gaur said the decision would help the developer reduce the delay in delivering flats to buyers.He said the builder would expedite the construction work.

    Amrapali CMD Anil Sharma said the amicable solution of the issue would instill confidence among the investors.Supertech CMD RK Arora said the active participation of the state government in getting the approval from the board augured well for development of Noida and Greater Noida.


    TOI
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  • जल्द दूर होगी नोएडा एक्सटेंशन की टेंशन


    ग्रेटर नोएडा
    नोएडा एक्सटेंशन की टेंशन अगले 15 दिन में दूर हो सकती है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक गुरुवार को केंदीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई। इसमें नोएडा एक्सटेंशन में घर खरीदने वालों के हितों का ख्याल रखने के संकेत दिए गए।

    बोर्ड मीटिंग में मौजूद ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के चेयरमैन व सीईओ रमा रमण ने बताया कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के मास्टरप्लान-2021 को बोर्ड ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। प्लानिंग बोर्ड ने मास्टरप्लान में जो कमियां बताई थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है और बोर्ड ने इसे मान लिया है। अब इस पर यूपी सरकार से 15 दिन में सुझाव मांगे गए हैं। मास्टरप्लान के मामले को जल्दी निपटाने के लिए बोर्ड ने एक कमिटी बनाई है, यूपी सरकार के सुझावों को इसी कमिटी में रखा जाएगा। यही कमिटी मास्टरप्लान पर अंतिम फैसला लेगी। इसकी मीटिंग 15 दिन बाद होगी। उम्मीद है कि पहली ही मीटिंग में मास्टरप्लान को अप्रूवल मिल जाएगा।

    यूपी के प्रोटोकॉल मिनिस्टर अभिषेक मिश्रा ने कहा कि निवेशकों को राहत देने के इरादे से प्राथमिकता के आधार पर यूपी सरकार जल्द ही अपने सुझाव देगी।


    कहां अटका काम
    इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश है कि ग्रेटर नोएडा मास्टरप्लान-2021 के एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को अप्रूवल मिलने तक इस इलाके में कोई कंस्ट्रक्शन न हो। इसके बाद से काम ठप है।

    उम्मीद की रोशनी
    प्लानिंग बोर्ड ने संशोधित मास्टरप्लान को सैद्धांतिक मंजूरी देते हुए यूपी सरकार से 15 दिन में सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर फैसले के लिए बोर्ड ने नई कमिटी बनाई है। कमिटी 15 दिन में बैठक करेगी।

    -nbt
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  • Construction in Greater Noida may take another month to resume

    Members of the NCR Planning Board (NCRPB) on Thursday said they had sent revised proposals for the Greater Noida Master Plan to the new Uttar Pradesh government and a final decision on pending construction projects would be taken in a month’s time. Union Urban Development Minister Kamal Nath said, “This issue was also discussed in NCR Planning Board meeting. A solution is likely soon. The Master Plan is under review and the revised proposals will now be looked into by the new government. The issue should be sorted out by next month.”
    Greater Noida Authority CEO Rama Raman said, “The court’s direction was clear that until we get clearance for the projects from the NCRPB, construction cannot continue. The Minister said the matter would be finalised in a month and we are hopeful that all the housing projects will begin again soon. There should be no more hurdles. The ministers concerned, including the Minister of State for UP Abhishek Mishra, said the clearance process would be expedited. The Master Plan has been sent to the UP government by the NCRPB and once they give the go-ahead, everything will be sorted out.”
    For flat buyers, however, who were expecting an announcement that the clearance had been given and work could start immediately, the decision means that they will have to wait at least another month.
    “Officials have said that clearance would only take a little longer several times before. We have been told that the proposal have been sent to the UP government. However, it does not necessarily mean that they will be approved and the wait could even get longer. Construction has been stalled for months now. First by agitating farmers, and now by the delay in clearances. The buyers have been caught in the middle. The financial estimates of several thousand buyers who counted on these flats being built by a particular time have all been thrown off. The next meeting of the NCRPB is in a month’s time. But we hope that clearances will be given before then,” said an official of the Noida Extension Flat Buyers’ Welfare Association.

    -Indian Express
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  • मास्टर प्लान के प्रावधानों की से रूबरू होगी सरकार

    ग्रेटर नोएडा,

    एनसीआर प्लानिंग बोर्ड द्वारा ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान-2021 पर प्रदेश सरकार की राय लेने के निर्णय के बाद प्राधिकरण अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। सरकार को मास्टर प्लान में दिए गए प्रावधानों की जानकारी मुहैया कराने के लिए अधिकारियों का एक दल शीघ्र लखनऊ रवाना होगा। शुक्रवार को प्राधिकरण में दिनभर बैठकों का दौर चला। मास्टर प्लान से संबंधित सभी जानकारी एकत्र की गई। मसलन, कितने क्षेत्रफल पर आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत और वाणिज्यिक है और कितना क्षेत्रफल हरित पट्टी के लिए छोड़ा गया है? शासन अपनी राय देने से पहले मास्टर प्लान का बारीकी से अध्ययन करेगी। कमी पाए जाने पर तत्काल उसे दूर करने के लिए प्राधिकरण अधिकारी भी शासन में मौजूद रहेंगे।

    गौरतलब है कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान को मंजूरी देने से पहले प्रदेश सरकार की राय ले ली जाए। बोर्ड का मानना था कि राज्य में सत्ता परिर्वतन हुआ है, इसलिए नई सरकार की राय आवश्यक है। हालांकि, प्राधिकरण, बिल्डर व निवेशकों के लिए राहत देने वाली बात रही है कि बोर्ड ने मास्टर प्लान में दिए गए प्रावधानों पर कोई आपत्ति नहीं लगाई। बोर्ड की बैठक छह माह बाद होती है। मास्टर प्लान शीघ्र स्वीकृत हो जाए, इसके लिए बोर्ड ने 20 सदस्यीय प्लानिंग कमेटी को मास्टर प्लान पास करने के लिए अधिकृत कर दिया। प्रदेश सरकार को 15 दिन के अंदर अपनी राय देने का आग्रह किया गया है। सूत्रों का कहना है कि सरकार की राय मिलते ही कमेटी मास्टर प्लान को मंजूरी देने पर निर्णय कर देगी। संभावना व्यक्त की जा रही है कि अप्रैल के मध्य तक शहर के मास्टर प्लान को मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद भूखंडों पर निर्माण करने, कंप्लीशन देने, नए आवंटन, रजिस्ट्री करना व किसानों की आबादी की बैकलीज करने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

    -Dainik Jagran
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  • Allahabad, Mar 23: In yet another case of annulment of land acquisition by Uttar Pradesh government in Greater Noida, the Allahabad High Court today directed authorities to return five hectares of land to two farmers from Gautam Buddh Nagar district.

    The court also imposed a cost of Rs 25,000 on the state government and the Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA).

    A division bench comprising justices Sunil Ambawani and Manoj Mishra gave the verdict on the writ petition of Ram Singh and another farmer, who owned 4.9 hectares of land in village Briandi Chakrasenpur under Pargana Dadri tehsil which had not been taken possession of despite a notification for acquisition being issued over three years ago.

    The petitioners had moved the court challenging acquisition of their land, on which they had been carrying out farming besides having built houses, vide notification dated November 19, 2008 whereby a total of 9.8 hectares of land was acquired in the village for the purpose of “planned industrial development”.

    The petitioners had submitted that their land was acquired without the district authorities or the GNIDA having discussed the matter with them and stated that they were not interested in compensation or a share in the developed land but only wanted back their plot, which had so far not been taken possession of.

    The court allowed the petition while holding that the respondents’ objection to returning the land to petitioners on the ground that “leaving a plot will raise concrete jungle and will affect the planning” was “totally devoid of force”.

    The court also underscored that a specially-constituted three-judge Bench had in its order in October last year, whereby thousands of similar petitions were decided, agreed to an enhanced compensation and a share of the developed land being provided to farmers “only in respect of land on which development had taken place or had started and third party rights had intervened”.

    The acquisition of thousands of hectares of land in Gautam Buddh Nagar district during the previous Mayawati government in Uttar Pradesh for the development of Greater Noida and Noida Extension areas has repeatedly drawn flak from the High Court which has set aside a number of such acquisitions and some of the orders have been later upheld by the Supreme Court as well.
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  • 32nd Meeting of NCR Planning Board Held, Several Key Decisions Taken


    Speaking at the NCR Planning Board meeting, Mr Kamal Nath as Chairman of the Board stated that “the NCR Planning Board is a unique experiment in inter-State and inter-agency coordination. It involves the implementation of development policies and programmes over four federal units and 108 cities & towns as stakeholders”. He said that “ the NCR Planning Board’s strategy has always been to assist State Governments at all levels to make the Region more equitable, efficient, sustainable and environmentally friendly.”

    Mr Kamal Nath urged the State governments to move towards the PPP model for infrastructure development in order to benefit from the financial and human resources of the private sector. Towards this, for the first time, the Board approved Viability Gap Funding, on the basis of the Ministry of Finance guidelines for PPP projects.

    In order to assist the State governments to bridge the huge infrastructure deficit, for the first time, the Board approved a grant of upto 15% of project cost for water and sewerage projects in NCR & CMA towns. This grant would be in addition to the long term soft loan of up to 75% of the project cost so that service level benchmarks can be met.

    The NCR Planning Board will be undertaking programmes and projects worth Rs.2145 crore during the Twelfth Five Year Plan. In addition to tapping the domestic capital market, resources for infrastructure projects will also be made available from multi-lateral/bi-lateral aid agencies, i.e. ADB as well as KfW for long term soft loans. A loan of USD 150 million from ADB has been approved for financing infrastructure projects in NCR and it’s Counter Magnet Areas (CMAs), of which USD 78 million will be available as the first tranche. Agreement for loan of Euro 100 million from KfW for environment friendly infrastructure projects has also been signed.

    Mr Nath stressed on the need of an economic and efficient mass transportation system as an essential driver of regional economic development. The Board was briefed on the Delhi Metro work having commenced on Phase III. Connectivity between Gurgaon, Ghaziabad and Noida has already been achieved and connectivity to Faridabad has been sanctioned for implementation. Proposals for extension of Delhi Metro to Faridabad-Ballabhgarh are also in the pipeline. The extension of Mundka line to Bahadurgarh in Haryana is being considered for inclusion under Phase III and surveys are being carried out by DMRC for Extension of Metro from Rithala to Bawana. The States were urged to expedite the work on the Eastern and Western Peripheral Expressway.

    Mr. Nath highlighted the need for Regional Rapid Transit System in NCR. The Board was informed that feasibility reports of three prioritized Regional Rapid Transit System (RRTS) corridors have been prepared for implementation in consultation with participating states, namely: Delhi-Meerut (90 kms), Delhi-Panipat (111 kms), and Delhi-Alwar (180 kms). These projects costing roughly Rs.70,000 crore would lead to reduction in travel time within NCR, reduction of number of vehicles on roads, decongestion of both National Highways and arterial roads and tremendous reduction in pollution levels and ultimately improvement in the quality of life in NCR.

    The Board reviewed the progress made consequent to signing of the Reciprocal Common Transport Agreements for Contract Carriage and Stage Carriage for facilitating seamless travel in NCR. More than 11,000 NCR taxis and 240 buses are now plying under the Reciprocal Common Transport Agreement for Contract Carriage.

    The Board noted that upto December 2011, loan financing for 265 social and physical infrastructure projects worth Rs. 18,069 crore has been provided by the NCRPB. Against these projects, loans worth Rs 347 crore have been sanctioned to Rajasthan sub-region, Rs 882 crore to UP sub-region, Rs. 5089 crore to Haryana sub-region, Rs 609 crores to NCT-Delhi and Rs 1108 crore to the Counter – Magnet areas. The Board appreciated the mobilization of funds amounting to Rs.1100 crores from the domestic capital market in the form of taxable bonds during the 11th Plan period.

    In conclusion the Minister for Urban Development reiterated that cooperation and active participation of the NCR States is not only necessary, but imperative for the balanced and harmonious development of NCR. The participating State Governments, concerned Central Ministries and their agencies agreed to cooperate for ensuring success of all the new initiatives which will ensure a better quality of life for the residents of NCR.

    National Capital Territory of Delhi, the core of the NCR, is one of the fifteen major urban agglomerations in the World. As per 2011 census, the total population of Delhi is 16.75 million. The NCR has an urbanization of 62%. The Board noted that the decadal population growth rate of Delhi has come down from 47% in 1991-2001 to 21% during 2001-11 as per the Census 2011 data. Rate of growth of Delhi Sub-region was the lowest among all the four Sub-regions of NCR which collectively grew at the rate of 24% during the same decade. This shows that the aim and objectives of setting up the NCR Planning Board are well on the way to being achieved.

    The meeting was attended by Chief Minister of Haryana, Lieutenant Governor of Delhi, Union Minister of State for Urban Development, Minister, Govt of Uttar Pradesh, Secretary, Ministry of Urban Development, Secretary, Ministry of Housing and Urban Poverty Alleviation, Chief Secretary, Govt. of NCT-Delhi, and other senior officers of Central and State Governments.

    Press Information Bureau English Releases
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  • मास्टर प्लान के प्रावधानों की सरकार को दी जाएगी जानकारी

    ग्रेटर नोएडा, : राष्ट्रीय राजधानी परिक्षेत्र (एनसीआर प्लानिंग बोर्ड) द्वारा ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2021 पर प्रदेश सरकार की राय लेने के निर्णय के बाद प्राधिकरण अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। सरकार को मास्टर प्लान में दिए गए प्रावधानों की जानकारी मुहैया कराने के लिए अधिकारियों का एक दल शीघ्र लखनऊ रवाना होगा। शुक्रवार को प्राधिकरण में दिनभर बैठकों का दौर चला। मास्टर प्लान से संबंधित सभी जानकारी एकत्र की गई। मसलन, कितना क्षेत्रफल आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत, वाणिज्यक है और कितना हरित पट्टी के लिए छोड़ा गया है। शासन राय देने से पहले मास्टर प्लान का अध्ययन करेगा। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की गुरुवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान को मंजूरी देने से पहले प्रदेश सरकार की राय ले ली जाए। बोर्ड का मानना था कि राज्य में सत्ता परिर्वतन हुआ है, इसलिए नई सरकार की राय आवश्यक है। प्राधिकरण, बिल्डर व निवेशकों के लिए राहत देने वाली बात रही है कि बोर्ड ने मास्टर प्लान में दिए गए प्रावधानों पर कोई आपत्ति नहीं लगाई। बोर्ड की बैठक छह माह बाद होती है। मास्टर प्लान शीघ्र स्वीकृत हो जाए, इसके लिए बोर्ड ने 20 सदस्यीय प्लानिंग कमेटी को मास्टर प्लान पास करने के लिए अधिकृत कर दिया। शासन को 15 दिन में राय देने का आग्रह किया गया है।

    -Dainik Jagran
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  • पतवारी गांव के मामले में सरकार से जवाब मांगा

    इलाहाबाद। पतवारी गांव के संबंध में गजेंद्र सिंह और अन्य की ओर से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और विनय माथुर ने शुक्रवार को सुनवाई की। याचिका में कहा गया कि पूर्णन्यायपीठ ने न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी के 19 जुलाई 2011 केे आदेश को सही ठहराया था, मगर उसके संबंध में आगे कोई आदेश नहीं दिया है। इस स्थिति में किसानों को उनकी जमीन वापस की जानी चाहिए। न्यायालय ने इस संबंध में राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। पूछा है कि पतवारी गांव के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का कोई आदेश तो नहीं है। यदि ऐसा नहीं है तो राज्य सरकार ने भूमि के संबंध मेें क्या फैसला लिया है। याचिका में पांच हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण को चुनौती दी गई है।
    भूमि अधिग्रहण मामला
    राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया
    किसानों की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश
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