पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • नोएडा एक्सटेंशन पर सुनवाई 29 को

    नोएडा एक्सटेंशन में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों द्वारा दायर याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी बेंच 29 अगस्त को सुनवाई करेगी। पतवाड़ी, रोजा याकूबपुर, बिसरख, हैबतपुर व इटेड़ा समेत सभी गांवों के किसानों की याचिकाओं की सुनवाई एक साथ होने की संभावना है। सुनवाई से पहले प्राधिकरण ने पतवाड़ी गांव के बचे किसानों के साथ समझौते की कोशिशें तेज कर दी है। प्राधिकरण के साथ मंगलवार को 20 और किसानों ने समझौता कर मुआवजे के चेक उठा लिए। सीईओ रमा रमन ने समझौता प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि बचे किसानों के साथ वार्ता कर सुलह के प्रयास किए जाएं।


    ग्रेटर नोएडा में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ जितनी भी याचिकाएं कोर्ट में दाखिल की गई हैं, उन सबकी सुनवाई अब एक साथ बड़ी बेंच करेगी। हाईकोर्ट ने 26 जुलाई की सुनवाई में प्राधिकरण को पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ न्यायालय से बाहर समझौते की सलाह दी थी। प्राधिकरण अब तक पतवाड़ी गांव के 1141 किसानों के साथ सुलह कर चुका है। इनमें से 530 किसानों के शपथ पत्र 12 अगस्त को कोर्ट में जमा कर दिए गए थे। अन्य किसानों के शपथ पत्र सुनवाई शुरू होने से पहले कोर्ट में जमा करने की योजना बनाई गई है। वहीं प्राधिकरण व किसानों के पास समझौता करने के लिए अब पांच दिन शेष है। सीईओ रमा रमन ने रविवार तक भूमि व परियोजना विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की छुट्टी रद कर दी है। किसानों से समझौता करने के लिए प्राधिकरण व एडीएम एलए कार्यालय पांचों दिन खुले रहेंगे।


    सीईओ ने याचिकाकर्ताओं से की समझौते की अपील
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने पतवाड़ी गांव में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर करने वाले किसानों से समझौते की अपील की है। कोर्ट में गांव के 91 किसानों द्वारा 19 याचिका दाखिल की गई थी। सीईओ का कहना है कि पतवाड़ी गांव की रहने वाली हंसो देवी, शाहपुर बम्हेटा गांव के जागेश्वर, मिलक गांव के इंद्र नागर, गाजियाबाद लालकुंआ के राम सिंह एवं रणवीर सिंह व प्रेमराज के साथ अभी समझौता नहीं हुआ है। सीईओ ने इन किसानों से अपील की है कि वे शनिवार तक प्राधिकरण के साथ वार्ता करने के लिए आगे आएं। प्राधिकरण उनकी समस्या का समाधान करने को तैयार है। क्षेत्र के विकास की खातिर किसानों को सुलह के लिए प्राधिकरण के साथ वार्ता करनी चाहिए।

    -Dainik Jagran
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  • I pray to god. this time, HC makes this a good final hearing for all the parties.. and bring end to this mess.
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  • Any update / hearing / news for writ filed for 7x sectors sarokha village ?

    Originally Posted by fritolay_ps
    नोएडा एक्सटेंशन पर सुनवाई 29 को

    नोएडा एक्सटेंशन में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों द्वारा दायर याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी बेंच 29 अगस्त को सुनवाई करेगी। पतवाड़ी, रोजा याकूबपुर, बिसरख, हैबतपुर व इटेड़ा समेत सभी गांवों के किसानों की याचिकाओं की सुनवाई एक साथ होने की संभावना है। सुनवाई से पहले प्राधिकरण ने पतवाड़ी गांव के बचे किसानों के साथ समझौते की कोशिशें तेज कर दी है। प्राधिकरण के साथ मंगलवार को 20 और किसानों ने समझौता कर मुआवजे के चेक उठा लिए। सीईओ रमा रमन ने समझौता प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि बचे किसानों के साथ वार्ता कर सुलह के प्रयास किए जाएं।


    ग्रेटर नोएडा में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ जितनी भी याचिकाएं कोर्ट में दाखिल की गई हैं, उन सबकी सुनवाई अब एक साथ बड़ी बेंच करेगी। हाईकोर्ट ने 26 जुलाई की सुनवाई में प्राधिकरण को पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ न्यायालय से बाहर समझौते की सलाह दी थी। प्राधिकरण अब तक पतवाड़ी गांव के 1141 किसानों के साथ सुलह कर चुका है। इनमें से 530 किसानों के शपथ पत्र 12 अगस्त को कोर्ट में जमा कर दिए गए थे। अन्य किसानों के शपथ पत्र सुनवाई शुरू होने से पहले कोर्ट में जमा करने की योजना बनाई गई है। वहीं प्राधिकरण व किसानों के पास समझौता करने के लिए अब पांच दिन शेष है। सीईओ रमा रमन ने रविवार तक भूमि व परियोजना विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की छुट्टी रद कर दी है। किसानों से समझौता करने के लिए प्राधिकरण व एडीएम एलए कार्यालय पांचों दिन खुले रहेंगे।


    सीईओ ने याचिकाकर्ताओं से की समझौते की अपील
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने पतवाड़ी गांव में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर करने वाले किसानों से समझौते की अपील की है। कोर्ट में गांव के 91 किसानों द्वारा 19 याचिका दाखिल की गई थी। सीईओ का कहना है कि पतवाड़ी गांव की रहने वाली हंसो देवी, शाहपुर बम्हेटा गांव के जागेश्वर, मिलक गांव के इंद्र नागर, गाजियाबाद लालकुंआ के राम सिंह एवं रणवीर सिंह व प्रेमराज के साथ अभी समझौता नहीं हुआ है। सीईओ ने इन किसानों से अपील की है कि वे शनिवार तक प्राधिकरण के साथ वार्ता करने के लिए आगे आएं। प्राधिकरण उनकी समस्या का समाधान करने को तैयार है। क्षेत्र के विकास की खातिर किसानों को सुलह के लिए प्राधिकरण के साथ वार्ता करनी चाहिए।

    -Dainik Jagran
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  • नोएडा एक्सटेंशन की सुनवाई 29 अगस्त को
    ग्रेटर नोएडा- नोएडा एक्सटेंशन में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी बेंच 29 अगस्त को सुनवाई करेगी। पतवाड़ी, रोजा याकूबपुर, बिसरख, हैबतपुर व इटेड़ा समेत सभी गांवों की सुनवाई एक साथ होने की संभावना है। सुनवाई से पहले प्राधिकरण ने पतवाड़ी गांव के शेष किसानों के साथ समझौते की कोशिश तेज कर दी है। मंगलवार को 20 और किसानों ने प्राधिकरण के साथ समझौता कर मुआवजे के चेक उठाया। सीईओ रमा रमन ने समझौता प्रक्रिया की समीक्षा की। ग्रेटर नोएडा में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ जितनी भी याचिका कोर्ट में दाखिल की गई है, उन सबकी सुनवाई अब एक साथ बड़ी बेंच करेगी। हाईकोर्ट ने 26 जुलाई की सुनवाई में प्राधिकरण को पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ न्यायालय से बाहर समझौते की सलाह दी थी। प्राधिकरण अब तक पतवाड़ी गांव के 1141 किसानों से सुलह कर चुका है।

    -Dainik jagran
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  • 29 को होगी 27 गांवों की सुनवाई


    जमीन अधिग्रहण मामले में 29 अगस्त को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। पतवाड़ी समेत 27 गांवों में जमीन अधिग्रहण का भविष्य अब इस सुनवाई पर टिक गया है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी अफसरों को उम्मीद है कि पतवाड़ी गांव के किसानों से समझौता होने के बाद फैसला उनके हक में आएगा। निवेशकांे और बिल्डरांे को भी फैसले का बेसब्री से इंतजार है।

    जमीन अधिग्रहण मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को 12 अगस्त तक किसानों से समझौता करने का वक्त दिया था। अथॉरिटी पतवाड़ी गांव के ज्यादातर किसानों से समझौता करने में सफल हो गई है। अब अथॉरिटी के लॉ डिपार्टमेंट ने अपना पक्ष कोर्ट में मजबूती से रखने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। अथॉरिटी अफसरों के मुताबिक, 28 अगस्त तक जितने किसानों सेे समझौते होंगे, उनके रेकॉर्ड समेत हाई कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया जाएगा। दूसरी ओर, जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का सिलसिला अब भी जारी है। किसानों का कहना है कि जितनी जमीन अर्जेंसी क्लॉज लगाकर ली गई है, उसका अधिग्रहण निरस्त होना चाहिए।

    हाई कोर्ट की सुनवाई पर नोएडा एक्सटेंशन समेत क्षेत्र में तमाम जगहों पर अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहे बिल्डरांे और निवेशकों की भी निगाहें टिकी हुई हैं। अगर फैसला किसानों के हक में आता है तो बिल्डर और निवेशकों को भारी झटका लगेगा। हालांकि, बिल्डर यही उम्मीद कर रहे हैं कि अथॉरिटी ने जिस प्रकार किसानों से समझौता किया है, उसे देखते हुए फैसला अथॉरिटी के हक में आने की उम्मीद है।

    ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और पतवाड़ी के किसानों के बीच समझौते का सिलसिला मंगलवार को फिर शुरू हो गया। मंगलवार को 30 किसानों ने मुआवजे का चेक लिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई की डेट फिक्स होने के बाद अब अथॉरिटी अफसर जल्द से जल्द बचे हुए किसानों से समझौते का प्रयास कर रहे हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सोमवार को अथॉरिटी और एडीएम लैंड ऑफिस में छुट्टी होने के कारण सोमवार को किसानों से समझौता नहीं हो सका। अथॉरिटी के डीसीईओ अखिलेश सिंह ने बताया कि मंगलवार को किसानों से समझौते का सिलसिला फिर से शुरू हुआ है। खबर लिखे जाने तक मंगलवार को 30 किसानों से समझौता हो गया। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 200 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा जा चुका है। अथॉरिटी ने एडीएम एलए ऑफिस को मुआवजा बांटने के लिए अब तक 250 करोड़ रुपये दिए हैं। अगर गांव के सभी किसान समझौता कर मुआवजा लेते हैं तो अथॉरिटी को 324 करोड़ रुपये एडीएम ऑफिस को देने होंगे। अफसरों को उम्मीद है कि 28 अगस्त तक सभी किसानों से समझौता हो जाएगा। अब तक 1600 में से 1130 किसानांे से समझौता हो गया है।


    -navbharat times
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  • अफसरों-किसानों की बैठक रही बेनतीजा


    आबादी के मसले पर यमुना अथॉरिटी मंे हुई किसानों और हाई पावर कमिटी की मीटिंग बेनतीजा रही। कम आबादी छोडे़ जाने से नाराज किसान मीटिंग का बहिष्कार कर चले गए। गुस्साए किसानांे ने बुधवार को अट्टा गुजरान गांव के पास यमुना अथॉरिटी का काम बंद कराने का ऐलान किया है। यमुना अथॉरिटी के सीईओ पंधारी यादव का कहना है कि कुछ किसानों के साथ बात बन गई है। बाकी किसानों को शनिवार को दोबारा बुलाया गया है।

    यमुना अथॉरिटी ने पुरानी आबादी के मामलों का निस्तारण करने के लिए किसानांे को मंगलवार को बीटा-2 स्थित यमुना अथॉरिटी दफ्तर बुलाया था। किसानांे के मामले निपटाने के लिए बनी हाई पावर कमिटी मंे शामिल डीएम व एसएसपी भी पहंुच गए। अट्टा गुजरान गांव के रवींद्र नागर ने आरोप लगाया कि अथॉरिटी ने किसानांे के साथ मीटिंग नहीं की और किसानों को एक-एक कर अंदर बुलाया। नागर का आरोप है कि अफसर किसानों पर दबाव बनाकर जबरन हस्ताक्षर कराने लगे। किसानांे ने बाद मंे कम से कम 5 हजार से लेकर 7 हजार वर्गमीटर आबादी छोडे़ जाने की मांग की। अधिकारी ज्यादा आबादी छोड़े जाने को तैयार नहीं थे। मामला लटकाने से परेशान होकर किसान अब बुधवार को यमुना अथॉरिटी का काम बंद कराएंगे। यमुना अथॉरिटी किसान संघर्ष समिति के संयोजक सगुन नागर ने कहा कि किसानों के साथ धोखा किया गया है।


    -navbharat times
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  • Another action by HC on Noida-G.Noida
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  • HC stays development work in Dadri, GNIDA told to reply


    ALLAHABAD: A division bench of the Allahabad High Court on Tuesday stayed development work on 4.93 hectares of land in Barandi Chakrasenpur village in Dadri tehsil of Gautam Budh Nagar.

    A bench of Justice Sunil Ambwani and Justice Pankaj Mithal also directed the Greater Noida Authority and the state government to file counter-affidavit in the case by September 27, the next date of hearing.

    While challenging the notification for acquisition of their land, petitioners Ram Singh and others of Barandi Chakrasenpur stated in the writ petition that they are 'bhumidhar' with transferable rights and possess plot number 230 (4.93 hectares) in the said village. They have also constructed houses on the plot which is being used as 'abadi' land, they added.

    The farmers alleged that "though there was no urgency to acquire the land, notification for the same was issued without application of mind under the urgency clause". They further prayed that as they are still in physical possession of the land, "there should be no interference in this peaceful possession".

    A notification for acquisition of the land (under Section 4 along with 17 (1) of the Land Acquisition Act) was issued on November 19, 2008, for planned industrial development of the area. Later, notification under Section 6 of the Act was issued on March 23, 2009.

    -TOI
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  • Greater Noida Authority to convince unwilling farmers


    Greater Noida: In a bid to woo the farmers of Patwari village, the Greater Noida Authority will start an identification campaign from Tuesday to find out those farmers who are still not ready to accept the compensation amount finalized by the government.

    The Authority is also trying to seek their opinion and reach an agreement with them before hearing date of the case is finalized.

    It may be noted that about 1100 farmers have already received additional compensation so far after signing the agreement paper.

    The Authority is also trying to locate those outsiders who have falsely got themselves registered as the natives of Patwari village and has clarified that only those farmers will be considered eligible for compensation who are the original inhabitants of the village.

    There are altogether 1600 farmers in the village out of which 1100 have already received the compensation.


    -Dainik Jagran
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  • Land row dwarfs good work by Greater Noida
    authority


    The Greater Noida Authority may have erred with its land acquisition policies,which is responsible for the current stalemate in Noida Extension, but it has done good work in promoting affordable housing in the National Capital region.

    A developed infrastructure has enabled the builders to sell at prices of Rs
    1,800-2,000 per sq ft in Noida Extension, the cheapest close to Delhi.
    This was possible by increasing the floor area ratio (FAR) from 1.75 to 2.75,increasing the population density norm to 1,600 people per acre from 654people per acre, and partly funding builders by allowing them to pay for theland cost over 10 years.


    This brought down the land cost to Rs 510 per sq ft. With a construction cost of Rs 1,200 per sq ft, and other expenses such as brokerages and marketing of Rs 200 per sq ft, builders could sell at Rs 1,800 per sq ft. The floor area ratio and the population density norm have been changed for the entire state, and these have been adopted by Noida and Greater Noida authorities.

    “You can buy a 2 BHK in Greater Noida for Rs 25-30 lakh, a 3 BHK for Rs 35-40 lakh. Where else can you buy at these prices close to Delhi?’’asks a developer. Noida and Greater Noida are industrial authorities and are not
    governed by the housing laws in the state. So, there’s no property tax and a buyer does not pay IDC or EDC (internal and external development charges),which can cost Rs 4.5 lakh for a 1,500 sq ft flat in Gurgaon.
    “Increasing the population density norm and the FAR allows the developers toconstruct more and help builders to bring down the pro-rata land costs,” says Navin Raheja, CMD, Raheja Developers.


    Gurgaon allows a density of 300 people per acre, which is why the average flat size is bigger at 1,600 per sq ft. Assuming 4.5 people stay per flat, and a density norm of 300 people per acre, one can have 66-67 flats per acre. If the density norm is doubled, the number of flats too will double, but will be smaller. Noida and Greater Noida Authority not only increased the density norm by 144.65 per cent, but also increased floor area ratio by 57.14 per cent from 1.75 to 2.75 two years back. While a higher density enabled smaller flats, the increase in the floor area ratio enabled builders to construct more, and bring down the pro-rata cost.
    Pankaj Bajaj, MD, Eldeco Housing says at these rates, builders do not make a profit. Or, rather they hoped to sell at a higher price in the next phases of the project, and make money. “There’s no margin in the entire chain. (What the authority buys for Rs 850 per sq m, costs it Rs 10,500 per sq m if one factors in the cost of developing infrastructure and 50 per cent of the land which goes into it) Noida Extension has emerged as the hub of affordable housing. It is under threat today,” said Bajaj.


    According to realtors, Noida and Greater Noida authorities have done good
    work in developing infrastructure. “They have done phenomenal work, which is closest to good urban infrastructure. Gurgaon has no sewage, no electricity.


    But look at the quality of roads in Noida and Greater Noida. Every road has a sector lane. In Gurgaon, even the sector roads are missing,” quips Bajaj, who is also president, CREDAI (Confederation of Real Estate Developers'
    Associations of India) (Western UP). IDC and EDC are levied by builders and deposited to the town authorities like Haryana Urban Development Authority for developing basic infrastructure within a sector and bigger projects like highways, flyovers, and metros that connect sectors or cities.

    -Business Standard
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  • Originally Posted by fritolay_ps

    This was possible by increasing the floor area ratio (FAR) from 1.75 to 2.75 , increasing the population density norm to 1,600 people per acre from 654 people per acre currently in NE



    Is it JOKE!!! 1,600 people per Acre (~400+ flats per acre) , After this every society will be a city in its own, as few societies of NE are even of 100+ Acre. I think later on NE will need 5-6 Hindon bridges which will connect NE from Noida.
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  • But one can not consider the entire area of society to calculate the number of people living per acre. I would like to explain, suppose a society is being developed on a plot of 19 acre(Stellar Jeevan being developed on 19 acre), then builders will not be constructing towers on the entire area. Even if it leaves 70% open area, builder will be left with 5.7 acre of land to erect towers.

    Let's take example of Stellar. It is proposed to construct around 18,00 flats on 18 acre land. Assuming 4 people will occupy one flat, total people living in the society will be approximately 7200. So number of people living per acre will be close to 378.

    But still 7200 people living in a society developed on 18 acre is huge.

    I may have missed certain points while making calculation. Others may pls correct it.

    Originally Posted by saurabh2011
    Is it JOKE!!! 1,600 people per Acre (~400+ flats per acre) , After this every society will be a city in its own, as few societies of NE are even of 100+ Acre. I think later on NE will need 5-6 Hindon bridges which will connect NE from Noida.
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  • Originally Posted by stpdcomonman
    But one can not consider the entire area of society to calculate the number of people living per acre. I would like to explain, suppose a society is being developed on a plot of 19 acre(Stellar Jeevan being developed on 19 acre), then builders will not be constructing towers on the entire area. Even if it leaves 70% open area, builder will be left with 5.7 acre of land to erect towers.

    Let's take example of Stellar. It is proposed to construct around 18,00 flats on 18 acre land. Assuming 4 people will occupy one flat, total people living in the society will be approximately 7200. So number of people living per acre will be close to 378.

    I may have missed certain points.


    As per your own calculation it is close to 7200 public in 19 Acre in Stellar, As per above article now "GN is increasing the population density norm to 1,600 people per acre from 654 people per acre currently in NE" . So those Max. 7200 public in 19 Acre of Stellar can be now around 18,000 public in 19 Acre. BTW I have seen in lots of NE societies there are actually 130-150 Flats per Acre right now ie already 1.5 times more than Stellar. Now what will be in them after "GN is increasing the population density norm to 1,600 people per acre from 654 people per acre currently in NE"

    Unbelievable. Builder ko kya hai vo to bana hi dega, vo to lalchi hai hi, Sochana to GN Authority ko hai. Kuch to LIMIT hone chahiye.
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  • Originally Posted by saurabh2011
    Unbelievable. Builder ko kya hai vo to bana hi dega, vo to lalchi hai hi, Sochana to GN Authority ko hai. Kuch to LIMIT hone chahiye.


    Read this word after many years :D
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  • Originally Posted by saurabh2011
    Is it JOKE!!! 1,600 people per Acre (~400+ flats per acre) , After this every society will be a city in its own, as few societies of NE are even of 100+ Acre. I think later on NE will need 5-6 Hindon bridges which will connect NE from Noida.


    Firstly, the report appears to be giving wrong facts. See master plan of NOIDA, even high density areas are defined as those having density of more than 500 persons per Hectare meaning 200 persons per acre. I aassume that this 1600 should be per hectare and not per acre.

    Secondly, density is not calculated project wise. It is for the whole area, say a particular Sector, and includes whole area of the Sector. For a particular project, FAR is more important factor and the builder has to adhere to it.

    Thirdly, while estimating density, no. of persons per residential unit are assumed as 5 and not 4.
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