पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • चेयरमैन के सामने रखी किसानों ने समस्या

    चेयरमैन के सामने रखी किसानों ने समस्या
    Apr 12, 08:48 pm
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    ग्रेटर नोएडा, सं : किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को प्राधिकरण चेयरमैन व सीईओ रमा रमण से मिलकर अपनी समस्या रखी। किसानों ने आरोप लगाया कि आबादी की समस्या निस्तारित किए जाने के बावजूद बैकलीज की कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिला प्रशासन ने जिस जमीन पर मिट्टी खनन के लिए अनुमति दी थी, उसका भी मुआवजा काटा जा रहा है। किसान ने रायल्टी जमा करने के बाद ही मिट्टी का खनन कराया था। ऐसे किसानों का मुआवजे में 25 से 30 प्रतिशत मुआवजा काटा जा रहा है। गांवों में शीघ्र मुआवजा वितरण शुरू कराने व विकास कार्यो का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदीप यादव, रामी प्रधान, बलराज प्रधान, भीम सिंह प्रधान आदि भी मौजूद रहे

    - dainik jagran
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  • UP tells Noida to zero in on 'top 5' projects


    The Samajwadi Party (SP) government in Uttar Pradesh has made it clear that development of Noida is top priority for the party.
    The state government has asked the Noida authority to provide a list of five development projects which are linked directly to the common man and need immediate attention from Lucknow as well as the local administration.

    Authority officials said the focus would be on decongesting the national highway-24, a new bridge over the Yamuna for better Noida-Delhi connectivity, new Metro lines, a solid waste management plant, a modern sewage treatment plant, besides some flyover and underpass projects.
    When Akhilesh replaced Mayawati as chief minister, there were apprehensions in certain quarters that Gautam Budh Nagar (home district of Bahujan Samaj Party chief and former CM Mayawati's home district) comprising Noida and Greater Noida would lose the special status.
    That the three assembly seats in the district did not elect even a single SP candidate in the recent assembly elections fuelled such feelings.


    The apprehensions further grew when all top officials of the Noida authority - replacements for chief executive officer and chairman are yet to come - and the police/civil administrations were changed and the government began a review of all of Mayawati's dream projects.
    "But the new government clarified that electoral politics aside, there will not be any comprise with infrastructure development and quality of life in Noida," said a senior authority official.

    The scene in Greater Noida is not much different. "The chief minister has sought a report on all stuck infrastructure development projects, especially the one for Metro expansion," said a Greater Noida authority official.

    A Metro expansion has been planned from Noida to Greater Noida. A detailed project report (DPR) is also ready. "The new government has put the Greater Noida Metro project on top of its priority. Fund crunch would not be allowed to halt the project any more. If need be, we will seek assistance from the Noida authority," said authority CEO Rama Raman.
    The new industrial development commissioner of Uttar Pradesh, Anil Kumar Gupta, also recently visited Noida and asked senior officials here to accelerate the pace of development. He met officials of all the three industrial development authorities in Noida, Greater Noida and Yamuna Expressway and reviewed various development projects.

    Areas of focus
    --National highway 24: The link which touches Noida, Ghaziabad and takes motorists to Delhi, is highly congested and needs to be widened. Underpasses also need to be built.
    --Construction of a bridge (addition of four lanes to the existing one) over the Yamuna. The Delhi-Noida connectivity project will be an alternative to DND toll flyway and will cost Rs. 300 crore.
    --The city generates 400 tones of waste every day but a solid waste management plant is yet to be put in place. Disposal has meant throwing garbage in vacant areas and pits.
    --The Noida authority has planned to use a modern technology for treatment of sewage water. Now, there will not be emission of harmful gases such as methane.
    --The focus will also be on building new flyovers, underpasses, besides adding green cover in the city.
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  • Hi I am new to this forum , but has been following some of threads related to noida/gnoida very closely .. Just wandering if there is any possibility of another hike in compensation to farmers ?? If that happens , it will be surely going to affect builders/buyers & authroty as well ..
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  • whatever it will be ... will be final from SC verdict ... lets c
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  • एफएनजी के नाम पर बन रही सड़क भी फंसी

    Latest Noida News, Breaking News Noida, News Headlines -Noida- Amar Ujala
    Story Update : Wednesday, April 11, 2012 1:37 AM

    नोएडा। छिजारसी से लेकर सेक्टर-121 और सिंचाई विभाग के नाले से लेकर एक्सप्रेस-वे, असदुल्लापुर होते हुए यमुना नदी तक जाने वाली नौ किलोमीटर की सड़क भी अवैध कब्जों में फंस गई है। बहलोलपुर, गढ़ी और सोरखा में सड़क के एलानमेंट में गांव वालों ने अतिक्रमण कर रखा है, जिसे तोड़ना प्राधिकरण के लिए टेढ़ी खीर हो रहा है। वहीं, एफएनजी की योजना समाप्त होने के बाद भी इस नाम से बन रही सड़क का समाचार अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद प्राधिकरण में खासी हलचल मच गई है।
    एक समस्या खत्म होती नहीं है कि दूसरी दिक्कत खड़ी हो जाती है। विकास की गाथा लिखने वाले प्राधिकरण के समक्ष यह दिक्कतें आम हो चुकी हैं। फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद के नाम से बनाई जाने वाली सड़क पर एक तरफ सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि दूसरी तरफ नोएडा के हिस्से में होने वालों निर्माण कार्य के बीच भी बाधाएं आ गई हैं। छिजारसी से लेकर सेक्टर-121 के मध्य बनाई जाने वाली सड़क का टेंडर 2010 में जारी किया गया। पूरी सड़क पर दिक्कत होने के कारण इसे टुकड़ों में अलग-अलग करके बनाने का निर्णय लिया गया। पंद्रह करोड़ के टेंडर को भी विभाजित करने का काम प्राधिकरण ने किया। टेंडर हुए और मौके पर काम शुरू किया गया, लेकिन डेढ़ वर्ष गुजर जाने के बाद भी अतिक्रमण की फांस को निकाल पाना प्राधिकरण अधिकारियों के बस में नहीं है। सबसे ज्यादा दिक्कत गढ़ी और सोरखा गांव में है। यहां पर किसान पीछे हटने की जगह आगे ही बढ़ते जा रहे हैं, जो नोएडा के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ एफएनजी को लेकर मंगलवार को दिनभर संबंधित विभागों में चर्चाएं होती रहीं। साथ ही इसको लेकर अन्य प्राधिकरणों से भी वार्ता शुरू हो गई है।

    सीईओ की नियुक्ति के बाद होगा ठोस फैसला
    ‘एफएनजी को लेकर नोएडा में कोई भी सूचना नहीं है। शुरुआती दौर से ही इस पर काम चल रहा है। इस संबंध में जल्द ही सूचनाएं एकत्र कर ली जाएंगी। वहीं, अतिक्रमण की बात सीसीडी ने स्वीकार कर ली है। सीईओ की नियुक्ति होते ही मामले पर ठोस फैसला किया जाएगा।’
    -अनिल राजकुमार, कार्यवाहक सीसीईओ, नोएडा



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  • Not related to NE...but on same subject.


    जेपी का जमीन आवंटन रद्द, किसानों को लौटानी होगी मुआवजे की रकम ः हाईकोर्ट
    इलाहाबाद (ब्यूरो)। करछना में पावर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को आखिरकार जीत हासिल हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करछना में प्रस्तावित जेपी ग्रुप के थर्मल पावर प्लांट के लिए भूमि का अधिग्रहण रद कर दिया है।

    न्यायालय ने कहा है कि किसानों को मुआवजा लौटाना होगा, इसके बाद उनकी जमीनें वापस कर दी जाएंगी। इसी प्रकार बारा पावर प्रोजेक्ट के मामले में किसानों की याचिकाएं खारिज करते हुए न्यायालय ने बारा प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है।

    दोनों ही मामलों में भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली अवधेश प्रताप सिंह और कई अन्य किसानों की याचिकाओं पर शुक्रवार को एक साथ सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।

    बारा में जेपी ग्रुप के पावर प्रोजेक्ट के मामले पर न्यायालय ने कहा कि बारा प्लांट में निर्माण का कार्य काफी आगे बढ़ चुका है। इन हालात में वहां भूमि अधिग्रहण रद करना मुमकिन नहीं है।

    करछना अधिग्रहण में कब क्या हुआ
    करछना में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना 23 नवंबर 2007 को अधिग्रहण अधिनियम की धारा चार, 17(1) और 17(4) के तहत जारी की गई थी। इसके बाद धारा छह के तहत अधिसूचना तीन मार्च 2008 को जारी की गई।

    सरकार ने करछना के देवरीकला, कचरी, कचरा, मेरड़ा, टोलीपुर, देलही भगेसर, भिटार और खई गांवों की 571 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करके थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए जेपी ग्रुप को हस्तांतरित किया था।

    Amar Ujala
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  • Master plan freeze puts Ganga water project in limbo


    NOIDA: Uncertainty over approval of Master Plan 2021 of Greater Noida Authority has had its collateral impacts beyond housing projects in Noida Extension. The much-awaited Ganga Water Project of the Authority, which would have brought immediate relief to around 3 lakh residents of the city in terms of improved water quality, now hangs in limbo. A loan of Rs 300 crore made by the Authority to the NCR Planning Board, to carry out necessary civil works for the project, is pending approval because the Master Plan is yet to be passed. This has delayed the project, the initial completion date of which was scheduled to be in 2013.

    At present, residents of Greater Noida are supplied groundwater pumped and cleaned by the Authority. This water is difficult to use because of the hardness of its quality. The Ganga Water Project, which has been devised in line with a similar project in Noida to reduce hardness of water, is expected to supply groundwater blended with water from the Ganges to over 3 lakh residents of Greater Noida in the first phase. In the subsequent phase, it would supply water to over 12 lakh residents, which is the projected population of the city as per Master Plan 2021.

    "For carrying out necessary civil works, we had applied to the NCR Planning Board for a loan of Rs 300 crore. However, this application is still pending with them. As the Master Plan is yet to be approved, the water project is itself in limbo and would now be pushed beyond its deadline of 2013," said a Greater Noida Authority official.

    The loan amount would be utilized to set up numerous underground reservoirs in the city as well as for laying of water distribution pipelines for the project, which is being set up with consultancy of the Uttar Pradesh Rajkiya Nirman Nigam Limited. The main reservoir, having a capacity of 180 million litres per day, is to be set up near Jaitpur village.

    "Work has been delayed in floating tenders for setting up reservoirs, laying distribution pipelines and for the main conduit through which Ganga water would be brought from Masuri-Dasna in Ghaziabad," said the official. "All works on the project are now subject to the approval of the Master Plan," he added.

    TOI
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  • Allahabad high court quashes land acquisition for UP plant


    ALLAHABAD: The Allahabad high court on Friday quashed the notifications for the acquisition of 650 hectare of land for the construction of an ambitious Rs 20,000 crore project for producing 2,640MW of power. The court allowed the writ petitions of farmers of Karchana and stalled the work given to Sangam Power Generation Company Ltd (SPGCL), an undertaking of the Jaypee Group in 2007.

    However, the high court dismissed the writ petitions of farmers of Bara tehsil, challenging the notification issued by the state government for acquisition of their 777 hectare of land for the establishment of 3,200MW (three units of 660MW, expandable to two more units) of thermal power plant. The total cost of the project is around Rs 30,000 crore.

    While allowing the writ petitions of farmers of Karchana, the HC quashed the state government notifications dated November 23, 2007, issued under Section 4 of the Land Acquisition Act-read with Section 17 (1) and 17 (4)-and also the notification (dated March 3, 2008) issued under Section 6 of the Act.

    The judgment was delivered by a division bench of Justice Ashok Bhushan and Justice Sunita Agarwal on a bunch of writ petitions filed by Awadesh Pratap Singh and others of Bara as well as Karchana tehsils.

    Dismissing the writ petitions of Bara farmers, the HC gave a green signal for the project on the ground that "work at the site for establishment of thermal power plant was substantially undertaken". The bench said: "Dismissal of these writ petitions shall not preclude the farmers from seeking their statutory remedy regarding amount of compensation granted to them."

    While the Sangam Power Generation Company Limited (SPGCL) was entrusted with the work for designing, constructing and operating the Karchana power plant, Bara plant was to be handled by the Prayagraj Power Generation Company Limited (PPGCL). Both the companies are Jaypee Group undertakings.

    "There is nothing on record to indicate that any development towards the project has been undertaken. The cases pertaining to Karchana tehsil are on a different footing, and relief for quashing the notification by the farmers cannot be denied," the court observed. The court made it clear that quashing of notification was subject to the deposit of compensation, if any, received by the farmers.


    TOI
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  • WORK TO RESUME AT NOIDA EXTENSION

    The uncertainty over completion of projects launched in Noida Extension is lifting, as the Greater Noida authority is planning to re-schedule developmental work in and around Noida Extension.

    Encouraged by positive indications from the NCR Planning Board to go ahead with the Master Plan 2021, the Greater Noida authority is planning to re-schedule developmental work in and around Noida Extension.


    There is also a clear indication from the Allahabad high court on a review petition filed by the Greater Noida authority. So, you may now breathe easy about that dream house of yours. The uncertainty over completion of projects launched in Noida Extension appears to be lifting.


    If the trend of these positive developments continues, developers and builders can restart construction work this month itself. They have been waiting for this moment since the Allahabad high court verdict over the land row. Sources say that the Master Plan 2021 of Greater Noida has almost been cleared and is awaiting a formal announcement of the sub-regional cell, Uttar Pradesh.


    Anil Sharma, the vice president of Credai and the chairman and managing director of Amrapali Group, says: "This is a relief for builders and developers whose projects have been delayed since the dispute erupted over land acquisitions. After the Supreme Court verdict, which quashed the land acquisition of Shahberi, a number of projects were in limbo."


    In a writ petition number, Ramesh Kumar Bhagchandka versus UP and others, it has been said that the Master Plan 2021 does not have any approval of the NCR Planning Board, which is a statutory body constituted under the an act of 1985. According to the act, a plan must first be prepared and if necessary land acquisition would be done.


    In the present case of Noida Extension, the acquisition proceedings have been undertaken and thereafter the land was sought to be utilized by allotment to builders for raising construction that go contrary to the plan. Under these circumstances, the petition says the proposed acquisition is illegal be set aside. In this context, the Allahabad high court has directed the Greater Noida authority to obtain clearance from the NCR Planning Board for its master plan, and then go ahead with the development process.


    Experts say there is no provision for approval of the master plan prepared by the development authority from the NCR Planning Board. The provision is only for sub-regional plan; the Master Plan of 2021 was sent to the NCR Planning Board for approval in 2006 and 2009, though.


    According to the rules, the NCR Planning Board can raise objections to the plan within 60 days from the time the plan was submitted to them by the development authority. After the expiry of this period, it cannot be challenged. It was thus that the Greater Noida authority urged the Allahabad high court for review of the decision over the master plan.


    The Greater Noida authority has now clubbed its Master Plan 2021 with the newly drafted Master Plan 2031 and sent it to the Housing and Urban Planning Department, Lucknow, for approval, to avoid a similar situation in future.


    The Housing and Urban Planning Department is preparing sub-regional plans for development authorities like Yamuna, Noida-Greater Noida and Ghaziabad Authority. The sub-regional plans of Noida and Greater Noida have almost been cleared.


    Impact of court’s verdict


    After the court verdict that awarded 64.7% additional amount and 10% of the developed plot as compensation to farmers, Noida and Greater Noida authorities have been issuing notices to all the developers and builders whose projects come under the disputed areas.


    In line with the court verdict, the Noida authority has to disburse Rs 1,100 crore more to the farmers, as compensation. The Noida authority has decided to pass on 50% of this burden to the builders. Besides, facing heavy financial crunch, an extra burden of Rs 9,500 crore including cost of developed plots, the Greater Noida authority is already in the process of collecting money at the rate of Rs 2,015 per sq metre from builders and Rs 1,465 per sq metre from individual residential plot allottees of Noida Extension. An extra Rs 550 per sq metre will also be charged from educational and institutional allottees.


    Noida Extension, over 3,000 hectares, comprises Sectors 1, 2, 3 and Ecotech 13. The Greater Noida authority allotted land to more than three dozen builders like Amrapali, Supertech, Nirala, Eros, Antriksh, Earth, Ajnara, Gaursons, etc, at rates which ranged between Rs 10,000 and Rs 11,600 per sq metre through open tenders. In addition, a total of 4,250 residential plots were allotted through lucky draw at the rate of Rs 10,500 per sq metre.


    Builders are planning to increase prices in this area at the rate of Rs 500 per sq ft, to absorb the increased burden. Chetena Sharma, a buyer at Noida Extension, says: "The decision to levy an extra charge will hit the property market. It will not be affordable for middle-class salaried people. For the average middle class, a house will remain a dream."


    Rakesh Yadav, the managing director of Antriksh Group, says: "Undoubtedly, property in Noida Extension, which was earlier known for its affordable rates, will now be costlier. We are bound to revise prices owing to this extra burden coupled with increasing price of raw materials."


    QUICK BITES


    AFTER THE COURT VERDICT THAT AWARDED 64.7% ADDITIONAL AMOUNT AND 10% OF THE DEVELOPED PLOT AS COMPENSATION TO FARMERS, NOIDA AND GREATER NOIDA AUTHORITIES HAVE BEEN ISSUING NOTICES TO ALL THE DEVELOPERS AND BUILDERS WHOSE PROJECTS COME UNDER THE DISPUTED AREAS


    THE GREATER NOIDA AUTHORITY IS ALREADY IN THE PROCESS OF COLLECTING MONEY AT THE RATE OF RS 2,015 PER SQ METRE FROM BUILDERS AND RS 1,465 PER SQ METRE FROM INDIVIDUAL RESIDENTIAL PLOT ALLOTTEES OF NOIDA EXTENSION.

    TOI
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  • Seeking Advice (Seniors) :
    HELLO ALL!!!
    As the NE seems to be clearing now is it the right time to invest, as after getting the papers in black-white the prices are surely going to shoot... IF YES WHAT SHOULD BE THE CRITERIA ????
    Or We need to stay back and wait ?
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  • Originally Posted by amitbhandari1
    Seeking Advice (Seniors) :
    HELLO ALL!!!
    As the NE seems to be clearing now is it the right time to invest, as after getting the papers in black-white the prices are surely going to shoot... IF YES WHAT SHOULD BE THE CRITERIA ????
    Or We need to stay back and wait ?


    Watch Out!

    This seems to be PAID / FAKE NEWS spread by builders lobby to catch new murgaas in Noida Extension.


    If U are worried that prices will go out of hand once NE is clear, then U may look into alternatives like CR or RNE,......, or extend Yr budget and compromise in flat size and go for safe sectors in NOIDA. Noida Extension seems to be never ending mirage.
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  • I went thr today to hv a look.. and evry builder is yelling that the clearance is due for April, and some of the builders hv increased the rates as well...
    All this is adding up to confusion...

    please guide...
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  • Originally Posted by amitbhandari1
    I went thr today to hv a look.. and evry builder is yelling that the clearance is due for April, and some of the builders hv increased the rates as well...
    All this is adding up to confusion...

    please guide...


    bhai only person who can help u is the supreme court judge who is looking into the matter ! :D

    rest all is speculation only ... however looking at the positive developments which came out of the NCRPB meeting few weeks back ..... it seems that NE will be resolved in a month or two .. but again its just speculation :)
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  • मुआवजे पर निर्णय होने तक जमीन अधिग्रहण रहेगा बंद


    नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में जमीन के मुआवजे की दरों पर निर्णय होने तक अधिग्रहण की कार्रवाई बंद रहेगी। सूत्रों का कहना है कि आगामी बोर्ड बैठक में मुआवजा वृद्धि पर निर्णय लिया जा सकता है। मुआवजा कितना बढे़गा? यह प्रदेश सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। सरकार के घोषणा पत्र में सर्किल रेट का छह गुणा मुआवजा देने की बात कही गई थी। यह घोषणा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भी लागू होगी अथवा नहीं, यह सरकार ने अभी स्पष्ट नहीं किया है। स्थिति स्पष्ट होने तक तीनों प्राधिकरणों ने जमीन अधिग्रहण स्थगित रखने का फैसला किया है।

    नोएडा में मौजूदा मुआवजा दर करीब सवा ग्यारह सौ व ग्रेटर नोएडा में 930 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों प्राधिकरण क्षेत्र के 62 गांवों में 64.7 प्रतिशत और मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। पुराने किसानों को मूल व अतिरिक्त मुआवजे को मिलाकर 14 सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा मिल रहा है। भविष्य में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत होगी, उन्हें 14 सौ रुपये का मुआवजा मिलेगा अथवा पुरानी दरों पर मुआवजा राशि दी जाएगी। इस पर बोर्ड बैठक में निर्णय लिए जाने की संभावना है। मामला प्रदेश सरकार के घोषणा पत्र को लेकर भी अटक रहा है। सपा ने अपने घोषणा पत्र में किसानों को सर्किल रेट का छह गुणा अधिक मुआवजा देने की घोषणा की थी। आवास विकास प्राधिकरणों में इसकी कवायद भी शुरू हो गई है, लेकिन औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बारे में सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। सूत्रों का कहना है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे समेत प्रदेश में आठ औद्योगिक विकास प्राधिकरण हैं। इनमें करार नियमावली के आधार पर जमीन अधिग्रहण का प्रावधान है। यह आगे भी लागू रहने के संकेत हैं। सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा सिर्फ आवास विकास प्राधिकरणों में लागू किया जाएगा। जहां पर निजी बिल्डर सरकार से हाईटेक सिटी बसाने के लिए लाइसेंस की मांग करेंगे, वहां बिल्डरों को सर्किल रेट का छह गुणा जमीन की कीमत किसान को देनी होगी। प्रदेश के आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने जीडीए समेत आवास विकास प्राधिकरणों को पत्र भेजकर मुआवजे पर राय मांगी है, लेकिन नोएडा व ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से इस संबंध में अभी तक कोई राय नहीं मांगी गई है।
    माना जा रहा है कि इन प्राधिकरणों में पूर्व में बनाया गया करार नियमावली का नियम ही लागू रहेगा। इसके तहत किसानों से सहमति के आधार पर जमीन लेकर उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जिले के तीनों प्राधिकरणों ने स्थिति स्पष्ट न होने की वजह से जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कुछ दिन के लिए रोक दी है। सरकार का रुख स्पष्ट होने के बाद ही प्राधिकरण जमीन अधिग्रहण करेगा।



    -Dainik Jagran
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  • मुआवजे पर निर्णय होने तक जमीन अधिग्रहण रहेगा बंद


    सूत्रों का कहना है कि आगामी बोर्ड बैठक में मुआवजा वृद्धि पर निर्णय लिया जा सकता है। मुआवजा कितना बढे़गा? यह प्रदेश सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। सरकार के घोषणा पत्र में सर्किल रेट का छह गुणा मुआवजा देने की बात कही गई थी। यह घोषणा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भी लागू होगी अथवा नहीं, यह सरकार ने अभी स्पष्ट नहीं किया है। स्थिति स्पष्ट होने तक तीनों प्राधिकरणों ने जमीन अधिग्रहण स्थगित रखने का फैसला किया है।



    Six time more than circle rate.... than NE will be more costly...1000 Rs./psf...
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