पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Originally Posted by vijay.dhiman
    The case has been filed by Dharampal of Bisrakh village, along with nine others, versus the state government of Uttar Pradesh. Bishrakh village hold 60-70% land bank of NE... and have very important roll to play.... 16+Builder projects in Sector 1/3, Tec zone-IV belong to bishrakh.... authority XT001 scheme (120sqm builtup house) in sector 3 which are 99% completed....EWS flat in sector 3 (opposite balak inter college) possession given...

    I don’t think that SC can cancel land acquisition now since 1000+ unites are already constructed by authority and possession was also given... so very much positive of SC verdict.


    Dear Vijay,

    You have copied my lines which I posted in NEFOMA forum...:)

    FYI
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  • Originally Posted by indnefb
    Yes, all open possibilities are there but quashing land aquisition chances are very less due to inpractability. Reasons.
    1. Farmers do not have money to refund it to authority
    2. Authority has no any other land parcel to develop in future to pay its debt
    3. Builders do not have any financial viability to refund the money to buyers
    4. Banks have any other option to recover money from the buyers
    5. Government has no other option but to resolve this issue sooner or later because of keeping the sentiments alive of buyers otherwise this golden hen would die and nobody wants to do that.
    6. Buyers do not have any other option to buy flat anywhere else in this price after loosing lacks of rupees in NE.
    7. Supreme court cannot set an example for whole country as they did in Sahberi and regretting thereafter when thousands of petitions had been filed on daily basis. This issue is not related to only NE but it will effect whole country because emergency clause is used everywhere and by every state government.

    Let's see what happened.


    Most important point missed is that even if SC decides to cancel the LA and Govt decides to give the land back they cant do so as it is not practically possible now to return the land in original form.Huge constructions have been done on the land .. road bridges have been created.. sever lines have been laid. park has been made etc etc...
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  • Cases in Supreme Court against the High Court judgement of 21/10/2011

    So far, there are following two cases in Supreme Court against the HIGH COURT judgement of 21/10/2011

    1) Special Leave Petition (Civil) 30969 / 2011 ---- Next Hearing is on 04/05/2012


    2) Special Leave to Petition (Civil) 3772-3774 / 2012 ---- Next hearing in on 27/04/2012

    :(

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  • This wait is killing. Meanwhile all other reasonable opportunities are going out of reach. These legal battles are long drawn and tiring. I hope SC takes a quick decision. By the way anybody here believe in astrological predictions? In my case, the Stars predict disappointment in court related matters. Scary!
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  • Originally Posted by vijay.dhiman
    So far, there are following two cases in Supreme Court against the HIGH COURT judgement of 21/10/2011

    1) Special Leave Petition (Civil) 30969 / 2011 ---- Next Hearing is on 04/05/2012


    2) Special Leave to Petition (Civil) 3772-3774 / 2012 ---- Next hearing in on 27/04/2012

    :(


    Thanks for the Case ID's.

    If one looks at it from a purely legal POV, the stage is set for a landmark ruling by the SC.

    People should not forget that a crime has been committed here i.e. someone's property has been taken away from them forcibly and not for "public good" as per law.

    I agree that this is not a purely legal matter and many factors are involved... but the Indian SC - unlike our HC's or lower courts - is known for unusual judgements.

    Time will tell... until then I can only pray the SC decides to be a bit lenient towards both petitioners and respondents and doesn't get carried away by judicial perfectionism / activism.


    -v
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  • Originally Posted by Pradyot1315sqf
    Are u sure about a good inventory after 6 months in one of the following projects.

    1. Gaur (not considering GC-16)
    2. Arihant Arden
    2. Steller Jeeven
    4. Earth
    5. Gulshon

    Check the present status and think about it.

    The inventries are even available with sililar builder projects which are around 90% built and are in Noida ... check out Gaur Grandeur, Amrapali Plattinum, Zodiac etc etc

    If one has the will to buy, inventries are made available ... no inventory available scene is just a hype by brokers and 2 days later they will say with utter difficulties I found this out ...

    I still suggest, NE is good but no need to rush till SC verdict is available on NE
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  • I agree with you Saurabhji. However, I don't see the oversupply here. No number of flats will be sufficient for young aspiring Indians. If they don't stay then they rent out and earn rental income but never sell at depreciated rates. RE is not share market. Flat or land are assets. Their value will increase or stagnate but never go down.
    My friends living in Shipra Riviera, Indirapuram told me that there was no appreciation in prices of flats till 2003. People rented out their flats at 4k or 5k. Some sold in distress at the price at which they bought. But no body sold at loss. Till 2000, the age to own a flat was 35-40. Now it is 25-30. The young Indian poluation is on the rise. GNOIDA case is different. It is far off from the happening area and failed to create jobs for self sustaining. For Gurgaon, NOIDA and Gaziabad, it will be only growth story in the near future.
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  • नोएडा एक्सटेंशन का टेंशन बरकरार


    ग्रेटर नोएडा, : नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों को राहत की आस आहत में तब्दील होती दिख रही है। शहर के मास्टर प्लान-2021 को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। अप्रैल में मंजूरी मिलने की संभावना बहुत कम है। प्रदेश सरकार की तरफ से मास्टर प्लान को लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में अभी जवाब नहीं दाखिल किया गया। जवाब दाखिल करने के बाद ही मास्टर प्लान को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसी महीने एक कार्यक्रम में शिरकत करने शहर में आए प्रदेश के प्रोटोकॉल मंत्री अभिषेक मिश्रा ने नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों को भरोसा दिया था कि 15 दिन में परेशानी से निजात मिल जाएगी। अब जानकारी मिली है कि मास्टर प्लान को लेकर शासन स्तर पर अध्ययन चल रहा है। मास्टर प्लान की मंजूरी में हो रही देरी से नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
    मास्टर प्लान-2021 को लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में 20 मार्च को बैठक हुई थी। बैठक में प्रदेश के प्रोटोकाल मंत्री व प्राधिकरण की तरफ से चेयरमैन समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए थे। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने मास्टर प्लान को लेकर प्रदेश सरकार की राय मांगी थी कि उसे मास्टर प्लान को लेकर आपत्ति नहीं है। मास्टर प्लान 2021 पिछली सरकार में तैयार हुआ था। सत्ता परिवर्तन होने के बाद एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने नई सरकार से राय मांगी थी। उम्मीद किया जा रहा था कि अप्रैल तक मास्टर प्लान 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर हो जाएगा। प्राधिकरण के अधिकारी भी यह उम्मीद लगा कर बैठे थे। अब अप्रैल बीतने को है लेकिन प्रदेश सरकार की तरफ से एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में मास्टर प्लानिंग को लेकर जवाब नहीं दाखिल किया गया है। बताया जाता है कि प्रदेश सरकार मास्टर प्लान का पूरी तरह से अध्ययन करने के बाद ही जवाब दाखिल करेगी। मास्टर प्लान 2021 में पूर्ववर्ती सरकार में कई ऐसे भूखंड आवंटन किए गए, जिसको लेकर सपा की तरफ से अंगुलियां उठाई गई थी। इसलिए शासन स्तर पर मास्टर प्लान का अध्ययन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मई में शासन स्तर पर एनसीआर प्लानिंग में जवाब दाखिल किया जा सकता है। इसके बाद ही मास्टर प्लान पर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड अपने फैसला देगा। नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों व बिल्डरों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। मास्टर प्लान में हो रही देरी से नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों की चिंता बढ़ने लगी है। निवेशकों की तरफ से प्रदेश सरकार को पत्र भेज कर जल्द जवाब दाखिल करने की मांग की गई है।




    -Dainik Jagran
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  • Homebuyers move apex court


    GREATER NOIDA: In a last-ditch attempt, homebuyers of Noida Extension approached the Supreme Court seeking an opportunity to be heard before the court delivers a verdict on the petition filed by farmers of Bisrakh village. On Wednesday, Noida Extension Flat Buyers' Welfare Association (NEFBWA) filed a petition to be included as a party in the case involving Bisrakh farmers who have not accepted hiked compensation from Greater Noida Authority and demanded their land back. The case is slated to be heard on Friday.

    Thousands of homebuyers have invested money in booking housing units in the 15-odd residential projects in Sector 1 of Greater Noida, carved out by Greater Noida Authority from 608 hectares of land acquired from Bisrakh village. A portion of this land also comes under Sector 3 of Greater Noida. "Our investments would be jeopardized if land is taken away and the housing projects are scrapped," said G L Sagar, secretary of NEFBWA. "Many homebuyers were left in the lurch when land acquisition was quashed in Shahberi and Patwadi villages last year. We have urged the Supreme Court to consider the interests of homebuyers before taking a decision in the case," he added.

    Amit Khurana, who has booked a 2 BHK flat in Panchsheel Hynish, said, "We would not like our homes to get mired in another round of legal hassles. A judgement quashing land acquisition would have a ripple effect on the entire region. Construction work, which has been stalled for almost a year now, should begin immediately after the clearance of the Master Plan by NCR Planning Board (NCRPB)," added Khurana.

    Homebuyers have filed two separate petitions in the Allahabad high court urging it to set a timeframe for NCRPB to give its nod to the Master Plan at the earliest, so that construction can resume.

    Sources in Greater Noida Authority, which has also invested a sizeable amount of taxpayers' money in the Noida Extension region, however, say that the primary issue still remains that of land acquisition. "The regional planning cell of Uttar Pradesh is working upon the few modifications suggested in Master Plan 2021 and would submit it very soon to NCRPB," said an official of Greater Noida Authority. "The plan will be cleared sooner or later. But the fate of projects hinges on the verdict of the apex court, given the fact that developmental works have already reached an advanced stage in Noida Extension," added the official.

    TOI
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  • नोएडा एक्सटेंशन की राह में गड्ढे ही गड्ढे

    नोएडा (ब्यूरो)। नोएडा एक्सटेंशन के गुलजार होने की राह में तो रोड़े लगे ही हैं, यहां के रास्तों से गुजरना भी बहुत जोखिम भरा है। धूल, रोड़ी और गहरे गड्ढे यहां से गुजरने वालों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं।
    सेक्टर 71 चौक से लेकर हिंडन पुल के करीब तक का रास्ता आने जाने वालों को दिक्कत हो रही है। सेक्टर 71 के सामने, बसई और गढ़ी चौखंडी के सामने की रोड खराब है। हर वक्त धूल उड़ती रहती है। मरम्मत न होने के कारण सड़क से रोड़ी निकल रही है।


    इसी तरह नोएडा एक्सटेंशन से आते समय सर्फाबाद, पर्थला खंजरपुर और सेक्टर 70 के सामने कई जगह सड़क खुद गई है। लगभग पांच किलोमीटर के इस मार्ग पर एक दर्जन गड्ढे खुद गए हैं। रात में लाइट का इंतजाम न होने के कारण इन गड्ढों को लोग देख नहीं पाते। अचानक वाहन से झटका लगने पर पता चल पाता है। कार सवार तो फिर भी झटका खाकर संभल जाते हैं, मगर बाइक सवार के लिए तो जान पर आफत बन जाती है।

    नोएडा से इन इलाकों को जाने वाले लोग तो इस रास्ते का इस्तेमाल करते ही हैं, नोएडा एक्सटेंशन के आसपास बसे गांवों, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा की ओर जाने वाले हजारों वाहन रोजाना इस समस्या से जूझ रहे हैं। बाइक से लेकर ट्रक तक सभी इस रास्ते से गुजरते हैं। लोग मुश्किल का सामना कर रहे हैं। गढ़ी निवासी आरवी यादव व बसई के राम जतन कहते हैं, कि अगर नोएडा एक्सटेंशन बस गया होता, तो यह रोड भी बढ़िया रहती। वह विवाद में फंस गया तो प्राधिकरण रोड बनवाने पर ध्यान नहीं दे रहा।

    -Amar Ujala
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  • मास्टर प्लान 2021 का करना होगा इंतजार


    ग्रेटर नोएडा शहर के मास्टर प्लान 2021 को राष्ट्रीय एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। अप्रैल में मंजूरी मिलने की संभावना बहुत कम है। प्रदेश सरकार की तरफ से मास्टर प्लान को लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में अभी जवाब नहीं दाखिल किया गया। जवाब दाखिल करने के बाद ही मास्टर प्लान को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। मास्टर प्लान को लेकर शासन स्तर पर अध्ययन चल रहा है। मास्टर प्लान मंजूरी में हो रही देरी से नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों की चिंता बढ़ती जा रही है। मास्टर प्लान 2021 को लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में 20 मार्च को बैठक हुई थी। बैठक में प्रदेश के प्रोटोकाल मंत्री व प्राधिकरण की तरफ से चेयरमैन समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए थे। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने मास्टर प्लान को लेकर प्रदेश सरकार की राय मांगी थी कि उसे मास्टर प्लान को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। मास्टर प्लान 2021 पिछली सरकार में तैयार हुआ था। सत्ता परिवर्तन होने के बाद एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने नई सरकार से राय मांगी थी। उम्मीद किया जा रहा था कि अप्रैल तक मास्टर प्लान 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर हो जाएगा। प्राधिकरण के अधिकारी भी यह उम्मीद लगा कर बैठे थे, अप्रैल बीतने को है लेकिन प्रदेश सरकार की तरफ से एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में मास्टर प्लानिंग को लेकर जवाब नहीं दाखिल किया गया है। बताया जाता है कि प्रदेश सरकार मास्टर प्लान का पूरी तरह से अध्ययन करने के बाद ही जवाब दाखिल करेगा। मास्टर प्लान 2021 में पूर्ववर्ती सरकार में कई ऐसे भूखंड आवंटन किए गए जिसको लेकर सपा की तरफ से अंगुलियां उठाई गई थी। आंख मूंद कर मास्टर प्लान को हरी झंडी देने का मतलब पूर्ववर्ती सरकार के सभी आवंटन को सही ठहराना, इसलिए शासन स्तर पर मास्टर प्लान का अध्ययन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मई में शासन स्तर पर एनसीआर प्लानिंग में जवाब दाखिल किया जा सकता है। इसके बाद ही मास्टर प्लान पर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड अपने फैसला देगा। नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों व बिल्डरों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। मास्टर प्लान में हो रही देरी से नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों की चिंता बढ़ने लगी है। निवेशकों की तरफ से प्रदेश सरकार को पत्र भेज कर जल्द जवाब दाखिल करने की मांग की गई है।

    -Dainik jagran
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  • RTI filled by one of the buyer and reply from GN authority (info taken from NEFOMA)
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    मास्टर प्लान 2021 का करना होगा इंतजार


    ग्रेटर नोएडा शहर के मास्टर प्लान 2021 को राष्ट्रीय एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। अप्रैल में मंजूरी मिलने की संभावना बहुत कम है। प्रदेश सरकार की तरफ से मास्टर प्लान को लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में अभी जवाब नहीं दाखिल किया गया। जवाब दाखिल करने के बाद ही मास्टर प्लान को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। मास्टर प्लान को लेकर शासन स्तर पर अध्ययन चल रहा है। मास्टर प्लान मंजूरी में हो रही देरी से नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों की चिंता बढ़ती जा रही है। मास्टर प्लान 2021 को लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में 20 मार्च को बैठक हुई थी। बैठक में प्रदेश के प्रोटोकाल मंत्री व प्राधिकरण की तरफ से चेयरमैन समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए थे। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने मास्टर प्लान को लेकर प्रदेश सरकार की राय मांगी थी कि उसे मास्टर प्लान को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। मास्टर प्लान 2021 पिछली सरकार में तैयार हुआ था। सत्ता परिवर्तन होने के बाद एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने नई सरकार से राय मांगी थी। उम्मीद किया जा रहा था कि अप्रैल तक मास्टर प्लान 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर हो जाएगा। प्राधिकरण के अधिकारी भी यह उम्मीद लगा कर बैठे थे, अप्रैल बीतने को है लेकिन प्रदेश सरकार की तरफ से एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में मास्टर प्लानिंग को लेकर जवाब नहीं दाखिल किया गया है। बताया जाता है कि प्रदेश सरकार मास्टर प्लान का पूरी तरह से अध्ययन करने के बाद ही जवाब दाखिल करेगा। मास्टर प्लान 2021 में पूर्ववर्ती सरकार में कई ऐसे भूखंड आवंटन किए गए जिसको लेकर सपा की तरफ से अंगुलियां उठाई गई थी। आंख मूंद कर मास्टर प्लान को हरी झंडी देने का मतलब पूर्ववर्ती सरकार के सभी आवंटन को सही ठहराना, इसलिए शासन स्तर पर मास्टर प्लान का अध्ययन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मई में शासन स्तर पर एनसीआर प्लानिंग में जवाब दाखिल किया जा सकता है। इसके बाद ही मास्टर प्लान पर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड अपने फैसला देगा। नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों व बिल्डरों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। मास्टर प्लान में हो रही देरी से नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों की चिंता बढ़ने लगी है। निवेशकों की तरफ से प्रदेश सरकार को पत्र भेज कर जल्द जवाब दाखिल करने की मांग की गई है।

    -Dainik jagran



    Sometime these newspaper show noida extn is about to be solved n sometime they say it will take time. Ye news reporter bhi lagta hai hawa me hi sirf speculation kar news likh dete hai.

    Ab toh sayad may me kuch ho ye bhi nhi lagta
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  • Let the SC delivers the verdict hopefully tomorrow. End this Drama for good.
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  • Faislaa

    Originally Posted by cookie
    Let the SC delivers the verdict hopefully tomorrow. End this Drama for good.



    Absolutely .... "Is paar yaa us parr but not in majhdhaar"

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