पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • HC restrains govt from starting work on acquired land


    The Allahabad High Court Tuesday restrained the UP government from starting any development work on five hectares of land in a Greater Noida village, whose owners challenged the acquisition on the grounds that they have not received any compensation for their houses built on the plot though two years have elapsed.



    A division bench comprising justices Sunil Ambawani and Pankaj Mithal passed the order on a writ petition filed by Ram Singh and others and fixed September 27 as the next date of hearing while asking the state government to file a counter-affidavit.



    The petitioners, all residents of Barandi Chakrasenpur village of Gautam Budh Nagar, had moved the court challenging acquisition of 4.9 hectares of land by the state government on November 19, 2008 and March 23, 2009.



    The petitioners had contended that their land, where they had built their houses and were now living, was acquired “without application of mind”.

    - Indian Express
    Posted: Wed Aug 24 2011, 04:21 hrs
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  • पतवाड़ी गांव में बीस और किसानों ने किए समझौते


    नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी की कोर्ट में सुनवाई की तिथि नजदीक आने के साथ ही प्राधिकरण ने शेष बचे किसानों से समझौते का प्रयास तेज कर दिया है। बुधवार को बीस और किसानों ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है। समझौता करने वाले किसानों की संख्या करीब 12 सौ पहुंच गई है। प्राधिकरण का प्रयास है कि रविवार तक बचे सभी किसानों से समझौते हो जाए। समझौते के साथ प्राधिकरण ने अन्य गांव में आबादी की समस्या को सुलझाने पर जोर दे रहा है। बुधवार को साकीपुर व खोदनखुर्द गांव के आबादी का निस्तारण किया गया है।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी बैंच में 29 अगस्त को पतवाड़ी समेत अन्य गांव के जमीन अधिग्रहण मामले की सुनवाई है। सुनवाई से पहले प्राधिकरण पतवाड़ी गांव के सभी किसानों से समझौते का प्रयास कर रहा है। बुधवार को बीस और किसानों ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया। एडीएम एलए के लखनऊ में होने के कारण समझौते करने वाले किसानों को अतिरिक्त मुआवजा का चेक नहीं मिल पाया। बृहस्पतिवार को उन्हें चेक दिया जाएगा। उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि बचे किसानों से समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए संपर्क किया जा रहा है। उम्मीद है कि शनिवार तक सभी किसानों से समझौता हो जाएगा। सुनवाई से पहले समझौते का जवाब कोर्ट में दाखिल कर दिया जाएगा। डीसीईओ ने बताया कि अन्य गांवों में आबादी की समस्या का निराकरण किया जा रहा है। बुधवार को साकीपुर व खोदनखुर्द गांव के किसानों की समस्या का निराकरण किया गया। हर दिन दो गांवों के किसानों की आबादी की समस्या का निराकरण किया जा रहा है।

    -Dainik Jagran
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  • समझौते के बाद भी बढ़ रही प्राधिकरण की मुश्किलें


    नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी में किसानों से समझौता करने के बाद भी प्राधिकरण के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। बिरौंडी चक्रसेनपुर गांव में एक किसान को हाईकोर्ट से स्थगनादेश मिलने पर अन्य गांव के किसानों का हौसला बढ़ा है। आबादी को लेकर अन्य गांव के किसान कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

    नोएडा एक्सटेंशन को लेकर करीब 27 गांव के किसान जमीन अधिग्रहण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं। इन सभी गांवों की याचिका पर सुनवाई 29 अगस्त को होनी है। पतवाड़ी गांव में किसानों से समझौते करने के साथ प्राधिकरण कोर्ट में जवाब दाखिल करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में बिरौंडी चक्रसेनपुर गांव का मामला सामने आने से प्राधिकरण को किसान से समझौते का प्रयास करना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को भी कोर्ट में एक गांव की सुनवाई है। अगर कोर्ट से फैसला प्राधिकरण के खिलाफ गया तो मुश्किलें और बढ़ सकती है। हालांकि प्राधिकरण का पूरा ध्यान 29 अगस्त की सुनवाई पर है। कोर्ट ने अगर पतवाड़ी की तर्ज पर अन्य गांव के किसानों से समझौते करने का सुझाव दिया तो भी प्राधिकरण की मुश्किल बरकरार रहेगी। इन गांवों के किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देना प्राधिकरण के लिए आसान नहीं होगा।

    -Dainik Jagran
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  • पांच हजार किसानों को सात फीसदी भूखंड देने की तैयारी


    यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने किसानों की समस्या का निराकरण करने पर विशेष जोर दिया है। एक दर्जन गांव के किसानों को सात फीसदी भूखंड देने की प्राधिकरण ने तैयारी कर ली है। ऐसे पांच हजार किसानों की सूची तैयार की जा रही है। आबादी समस्या का निस्तारण करने के लिए प्राधिकरण किसानों के साथ बैठक कर उनकी समस्या दूर कर रहा है।

    यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पंधारी यादव ने बताया कि जब तक किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो जाता है, तब तक दूसरे गांवों में जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मिलने वाले सात फीसदी भूखंड देने के लिए गांव वार सूची तैयार की जा रही है। दर्जन गांवों के करीब पांच हजार किसानों की सूची तैयार हो रही है। सूची तैयार होने के बाद किसानों की आपत्ति मांगी जाएगी। आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद किसानों को आवंटन पत्र दिया जाएगा। सीईओ ने बताया कि भट्टा व पारसौल गांव में किसानों को सात फीसदी भूखंड देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जिन गांवों में आबादी का निस्तारण नहीं हो पाया है, उन गांवों में किसानों के साथ बैठक कर उनकी समस्या दूर की जा रही है। अधिकारियों की टीम गांवों में जाकर किसानों की समस्या सुन रही है।

    -Dainik Jagran
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  • हाईकोर्ट ने दिल्ली के दस गांवों को राहत दी

    नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामले में राजधानी के १० गांव के निवासियों को राहत प्रदान कर दी है। अदालत ने करीब ८३८ याचिकाओं का निपटारा करते हुए सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि के बदले प्रदान मुआवजे को गैरवाजिब बताया है। अदालत ने हर गांव की भूमि के लिए अलग-अलग मुआवजा तय कर दिया।

    न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग वाली खंडपीठ ने फैसले में कहा कि सरकार ने वर्ष २००० से २००५ के बीच उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली के गांव पूठ खुर्द, होलंबी कलां, होलंबी खुर्द, बबाना, खेरा खुर्द, नरेला, अलीपुर, राजापुर कलां, शाहपुर गढ़ी व संगौठ की भूमि का अधिग्रहण किया था। यह भूमि रोहतक रोड और जीटी करनाल रोड पर थी। यह भूमि विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी।

    खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण संबंधी पुराने कानून के तहत भूमि का मुआवजा प्रदान किया जो काफी कम थी। अदालत ने कहा कि अधिकांश भूमि कृषि योग्य थी और किसान या भूमि मालिकों ने मार्केट दर पर मुआवजे की मांग की है जिसे अनुचित नहीं करार दिया जा सकता। अदालत ने हर गांव में मुआवजे की राशि प्रति एकड़ अलग-अलग तय की है और १५ लाख प्रति एकड़ से १९ लाख प्रति एकड़ तय की है। अदालत के आदेश के बाद सभी को करीब दो से पांच लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का फायदा होगा।

    -Amar Ujala
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    हाईकोर्ट ने दिल्ली के दस गांवों को राहत दी

    खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण संबंधी पुराने कानून के तहत भूमि का मुआवजा प्रदान किया जो काफी कम थी। अदालत ने कहा कि अधिकांश भूमि कृषि योग्य थी और किसान या भूमि मालिकों ने मार्केट दर पर मुआवजे की मांग की है जिसे अनुचित नहीं करार दिया जा सकता। अदालत ने हर गांव में मुआवजे की राशि प्रति एकड़ अलग-अलग तय की है और १५ लाख प्रति एकड़ से १९ लाख प्रति एकड़ तय की है। अदालत के आदेश के बाद सभी को करीब दो से पांच लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का फायदा होगा।

    -Amar Ujala


    HC can ask authority to pay additional compensation in Noida ext case.
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  • Delhi Farmers Shortcharged - Where is Rahul Baba?

    Originally Posted by fritolay_ps
    हाईकोर्ट ने दिल्ली के दस गांवों को राहत दी

    नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामले में राजधानी के १० गांव के निवासियों को राहत प्रदान कर दी है। अदालत ने करीब ८३८ याचिकाओं का निपटारा करते हुए सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि के बदले प्रदान मुआवजे को गैरवाजिब बताया है। अदालत ने हर गांव की भूमि के लिए अलग-अलग मुआवजा तय कर दिया।

    न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग वाली खंडपीठ ने फैसले में कहा कि सरकार ने वर्ष २००० से २००५ के बीच उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली के गांव पूठ खुर्द, होलंबी कलां, होलंबी खुर्द, बबाना, खेरा खुर्द, नरेला, अलीपुर, राजापुर कलां, शाहपुर गढ़ी व संगौठ की भूमि का अधिग्रहण किया था। यह भूमि रोहतक रोड और जीटी करनाल रोड पर थी। यह भूमि विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी।

    खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण संबंधी पुराने कानून के तहत भूमि का मुआवजा प्रदान किया जो काफी कम थी। अदालत ने कहा कि अधिकांश भूमि कृषि योग्य थी और किसान या भूमि मालिकों ने मार्केट दर पर मुआवजे की मांग की है जिसे अनुचित नहीं करार दिया जा सकता। अदालत ने हर गांव में मुआवजे की राशि प्रति एकड़ अलग-अलग तय की है और १५ लाख प्रति एकड़ से १९ लाख प्रति एकड़ तय की है। अदालत के आदेश के बाद सभी को करीब दो से पांच लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का फायदा होगा।

    -Amar Ujala



    Seems Rahul Baba has no time to protest for Farmers in congress ruled states 15-19 Lacs per acre compensation being given in Delhi is meagre compared to what BMW is already paying in NE, Noida and other parts of UP!

    :bab (45): Why doesnt BMW's party organise protests in Delhi and encourage them to go to supreme court after they digest the increase compensation directed by HC! a perfect Payback to Rahul Baba's gimmiks
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  • आबादी के मामले जल्द सुलझाने का दावा


    आबादी छोड़े जाने के मुद्दे पर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने अब गांवों की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है। बुधवार को साकीपुर और खोदनाखुर्द गांव के किसानों के साथ मीटिंग कर अफसरों ने आबादी से संबंधित समस्याओं का निस्तारण किया। अथॉरिटी अफसरों के मुताबिक सभी गांवों की आबादी की समस्याओं का निस्तारण जल्द कर लिया जाएगा।

    किसानों की आबादी की समस्याओं के निस्तारण के लिए अथॉरिटी में एक हाई पावर कमिटी बनाई गई है। पिछले दिनों अथॉरिटी के सभी अधिकारियों के पतवाड़ी के किसानों से समझौते में व्यस्त रहने के कारण अन्य गांवों की आबादी की समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही थी। अथॉरिटी अफसरों ने बताया कि मंगलवार से किसानों की आबादी संबंधित समस्याओं की सुनवाई शुरू हो गई है। बुधवार को साकीपुर और खोदनाखुर्द के किसानों की समस्याएं निस्तारित की गईं। दोनो गांवों में करीब एक दर्जन किसानों की आबादी की समस्याएं बची थीं , जिन्हें निस्तारित किया गया। आबादी की समस्याओं के निस्तारण के लिए हर रोज दो - तीन गांवों के किसानों को बुलाया जा रहा है। जल्द सभी गांवों की आबादी की समस्याओं का निस्तारण कर लिया जाएगा।


    -Navbharat times
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  • तुस्याना के 76 किसान गए हाई कोर्ट


    नोएडा एक्सटेंशन के तुस्याना गांव के किसानांे ने जमीन अधिग्रहण के मामले में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गांव के 76 किसानांे ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर वर्ष 2006 में अर्जेंसी क्लॉज लगाकर किए गए अधिग्रहण को रद्द करने की मांग की है।

    याचिकाकर्ता किसान जुगेंद्र सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है। इस याचिका पर पतवाडी गांव के साथ ही सुनवाई की डेट तय की गई है। याचिका में अर्जेंसी क्लॉज लगाकर 2006 मंे इंडस्ट्री के नाम पर अधिग्रहण का जिक्र किया गया है। किसानांे ने जबरन हुए इस अधिग्रहण का विरोध भी किया था। किसानांे ने बताया कि अर्जेंसी क्लॉज लगाने के बावजूद चार साल में अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी की गई। इंडस्ट्री के नाम पर ली गई यह जमीन बिल्डरांे को अलॉट कर दी गई। जमीन देने वाले किसानों के बच्चांे को रोजगार नहीं मिला है।

    -navbharat times
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  • पाई सेक्टर में कंस्ट्रक्शन पर रोक


    नोएडा एक्सटेंशन के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के बिरोडी चक्रसेनपुर गांव के किसानांे की याचिका पर सुनवाई करते हुए वहां चल रहे कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। बिरोडी चक्रसेनपुर की जमीन को अथॉरिटी ने पाई -1 और 2 सेक्टर नाम दिया है। इस सेक्टर में अथॉरिटी बिल्डरांे को जमीन अलॉट कर चुकी है। हाई कोर्ट के स्टे से पाई सेक्टर मंे बिल्डरों के प्रोजेक्ट , अपार्टमेंट और 130 व 105 मीटर चौड़े एक्सप्रेस - वे का काम प्रभावित हो सकता है।

    अब अथॉरिटी उन किसानों की जमीन चिह्नित करने मंे जुटी है , जिनकी याचिका पर हाई कोर्ट ने स्टे दिया है। अथॉरिटी पता लगा रही है कि इससे कौन - कौन से प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हंै। याचिकाकर्ता से सीधे संपर्क करने की भी कोशिश हो रही है ताकि उनसे समझौता किया जा सके।

    ग्रेटर नोएडा अधिसूचित एरिया के बिरोडी चक्रसेनपुर के किसानांे की जमीन को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 2008 मंे अर्जेंसी क्लॉज लगाकर अधिग्रहीत किया था। अधिग्रहण के खिलाफ बिरोडी के राम सिंह समेत कई किसानों ने हाई कोर्ट मंे याचिका दी थी। किसानों के वकील पंकज दूबे ने बताया कि बिरोडी चक्रसेनपुर में 4.9330 हेक्टेयर जमीन पर किसानों का कब्जा है। आरोप है कि बाकी जमीन अथॉरिटी ने जबरन अधिग्रहीत की थी। इस मामले में अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।

    -navbharat times
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    तुस्याना के 76 किसान गए हाई कोर्ट


    नोएडा एक्सटेंशन के तुस्याना गांव के किसानांे ने जमीन अधिग्रहण के मामले में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गांव के 76 किसानांे ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर वर्ष 2006 में अर्जेंसी क्लॉज लगाकर किए गए अधिग्रहण को रद्द करने की मांग की है।

    याचिकाकर्ता किसान जुगेंद्र सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है। इस याचिका पर पतवाडी गांव के साथ ही सुनवाई की डेट तय की गई है। याचिका में अर्जेंसी क्लॉज लगाकर 2006 मंे इंडस्ट्री के नाम पर अधिग्रहण का जिक्र किया गया है। किसानांे ने जबरन हुए इस अधिग्रहण का विरोध भी किया था। किसानांे ने बताया कि अर्जेंसी क्लॉज लगाने के बावजूद चार साल में अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी की गई। इंडस्ट्री के नाम पर ली गई यह जमीन बिल्डरांे को अलॉट कर दी गई। जमीन देने वाले किसानों के बच्चांे को रोजगार नहीं मिला है।

    -navbharat times


    Tusiana villege farm land has been sold to Imperia Residency, Imperia Business Park, Earth Sapphire Court, Amrapali Tech Park so these projects may be impacted.
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  • NE farmers got approximately 50 lakhs per acre according to previous rate and HC/SC observed what poor farmers get in return? Their land is taken and they get nothing. And Delhi High Court fixed maximum 19 lakh per acre rate for the land acquired and that too in Delhi. Amazing.

    Originally Posted by fritolay_ps
    हाईकोर्ट ने दिल्ली के दस गांवों को राहत दी

    नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामले में राजधानी के १० गांव के निवासियों को राहत प्रदान कर दी है। अदालत ने करीब ८३८ याचिकाओं का निपटारा करते हुए सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि के बदले प्रदान मुआवजे को गैरवाजिब बताया है। अदालत ने हर गांव की भूमि के लिए अलग-अलग मुआवजा तय कर दिया।

    न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग वाली खंडपीठ ने फैसले में कहा कि सरकार ने वर्ष २००० से २००५ के बीच उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली के गांव पूठ खुर्द, होलंबी कलां, होलंबी खुर्द, बबाना, खेरा खुर्द, नरेला, अलीपुर, राजापुर कलां, शाहपुर गढ़ी व संगौठ की भूमि का अधिग्रहण किया था। यह भूमि रोहतक रोड और जीटी करनाल रोड पर थी। यह भूमि विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी।

    खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण संबंधी पुराने कानून के तहत भूमि का मुआवजा प्रदान किया जो काफी कम थी। अदालत ने कहा कि अधिकांश भूमि कृषि योग्य थी और किसान या भूमि मालिकों ने मार्केट दर पर मुआवजे की मांग की है जिसे अनुचित नहीं करार दिया जा सकता। अदालत ने हर गांव में मुआवजे की राशि प्रति एकड़ अलग-अलग तय की है और १५ लाख प्रति एकड़ से १९ लाख प्रति एकड़ तय की है। अदालत के आदेश के बाद सभी को करीब दो से पांच लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का फायदा होगा।

    -Amar Ujala
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    पाई सेक्टर में कंस्ट्रक्शन पर रोक


    नोएडा एक्सटेंशन के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के बिरोडी चक्रसेनपुर गांव के किसानांे की याचिका पर सुनवाई करते हुए वहां चल रहे कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। बिरोडी चक्रसेनपुर की जमीन को अथॉरिटी ने पाई -1 और 2 सेक्टर नाम दिया है। इस सेक्टर में अथॉरिटी बिल्डरांे को जमीन अलॉट कर चुकी है। हाई कोर्ट के स्टे से पाई सेक्टर मंे बिल्डरों के प्रोजेक्ट , अपार्टमेंट और 130 व 105 मीटर चौड़े एक्सप्रेस - वे का काम प्रभावित हो सकता है।

    अब अथॉरिटी उन किसानों की जमीन चिह्नित करने मंे जुटी है , जिनकी याचिका पर हाई कोर्ट ने स्टे दिया है। अथॉरिटी पता लगा रही है कि इससे कौन - कौन से प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हंै। याचिकाकर्ता से सीधे संपर्क करने की भी कोशिश हो रही है ताकि उनसे समझौता किया जा सके।

    ग्रेटर नोएडा अधिसूचित एरिया के बिरोडी चक्रसेनपुर के किसानांे की जमीन को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 2008 मंे अर्जेंसी क्लॉज लगाकर अधिग्रहीत किया था। अधिग्रहण के खिलाफ बिरोडी के राम सिंह समेत कई किसानों ने हाई कोर्ट मंे याचिका दी थी। किसानों के वकील पंकज दूबे ने बताया कि बिरोडी चक्रसेनपुर में 4.9330 हेक्टेयर जमीन पर किसानों का कब्जा है। आरोप है कि बाकी जमीन अथॉरिटी ने जबरन अधिग्रहीत की थी। इस मामले में अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।

    -navbharat times



    These proejcts are come under Villege Birondi Chakrasenpur. Dont know.. which one project construction is stopped after this HC decision...

    Parshavnath Privilege, Unitech verve, Unitech Cascades, Unitech Horizone, Parshavnath Palacia, Purvanchal Silver City III, Nitishri Alstonia
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  • बाजार मूल्य पर मिले मुआवजा

    सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण करते वक्त किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे पर फैसला जमीन के बाजार मूल्य के आधार पर किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने पंजाब के कुछ भू स्वामियों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह व्यवस्था दी। पीठ ने पंजाब सरकार द्वारा अधिग्रहण जमीन का आधार मूल्य 2.75 लाख प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 4.09 लाख प्रति हेक्टेयर करते हुए कहा, भूस्वामी अधिकतम मूल्य के हकदार हैं। शीर्ष अदालत ने यह आदेश भूस्वामियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। इसमें उन्होंने मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। यह जमीन अंबाला चंडीगढ़ राजमार्ग पर है। पीठ ने पूर्व के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा, आखिरकार जब किसी व्यक्ति से भूमि अनिवार्य रूप से ली जा रही हो तो वह यह कहने का हकदार है कि उसे अधिकतम मूल्य मिलना चाहिए,जितना कि उसी इलाके में इच्चुक क्रेता और इच्चुक विक्रेता के बीच हुए सही सौदे में अधिग्रहण के समय जमीन के लिए दिया गया। इस मामले में राज्य सरकार ने पटियाला जिले में एक औद्योगिक संयंत्र स्थापित करने के लिए 1992 में 550.03 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की थी।

    -Dainik jagran
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  • 4 गांवों के आबादी के मामले सुलझाए


    ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में किसानों की आबादी की समस्याएं निस्तारित करने के लिए हाई पावर कमिटी ने गंभीरता दिखाना शुरू कर दिया है। गुरुवार को चार गांवों के किसानों की आबादी से संबंधित समस्याएं निस्तारित की गईं। इनमें तुगलपुर , खैरपुर , हैबतपुर और इटेहरा शामिल हैं।

    अथॉरिटी अफसरों ने बताया कि चारों गांव में करीब चार दर्जन किसानों की आबादी की समस्याएं थीं , जिन्हें निस्तारित किया गया। अब तक आबादी के मामले में अथॉरिटी सख्त रुख अपना रही थी। लेकिन पतवाड़ी के किसानों से समझौते के बाद बाकी गांवों के लिए भी अथॉरिटी लचीला रुख अपना रही है। अब जो भी किसान कोर्ट जा रहे हैं वे आबादी की समस्याओं को लेकर नहीं बल्कि पतवाड़ी की तरह बढे़ हुए मुआवजे का लाभ लेने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। इधर , अफसरों के मुताबिक जिन गांवों में अभी आबादी की समस्याएं बची हैं , उनका भी जल्द निस्तारण किया जाएगा। अथॉरिटी अफसरों के मुताबिक अब तक 90 फीसदी किसानों की आबादी की समस्याओं का निस्तारण कर लिया गया है।


    -navbharat times
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