पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • HC rejection will somehow discourage Farmers to become Blackmailers. Rest Deepauls:D Knows..........
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  • And the best prize for "tit for tat" goes to these lines...

    नोएडा।
    इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसानों के बड़े तबके में गुस्सा है।
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  • नोएडा की पुनर्विचार अर्जियां खारिज


    भूमि अधिग्रहण मामला
    वि.सं.इलाहाबाद : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पूर्णपीठ ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार के लिए दाखिल की गयी नोएडा की अर्जियों को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया है। कुछ किसानों की याचिकाओं को सुनवाई के लिए जुलाई 12 में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

    यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसयू खान तथा न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की पूर्णपीठ ने नोएडा अथॉरिटी सहित अन्य की अर्जियों को निर्णीत करते हुए दिया है। याचिका पर अथॉरिटी के अधिवक्ता रामेंद्र प्रताप सिंह तथा किसानों की तरफ से कमल सिंह यादव, पंकज दुबे, मनीष गोयल आदि दर्जनों अधिवक्ताओं को दिए गए अपने फैसले में कहा था कि नोएडा को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से अनुमोदन लेकर योजना देनी चाहिए थी। न्यायालय ने किसानों को 10 फीसदी जमीन प्लाट के रूप में तथा 64.70 फीसदी बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश दिया था। नोएडा अथॉरिटी ने अपनी पुनर्विचार अर्जी में कहा कि एनसीआर बोर्ड का अनुमोदन लेना जरूरी नहीं है। चूंकि अधिगृहीत क्षेत्र का विकास हो चुका है। वहां पर किसान को उसकी अधिगृहीत जमीन का 10 फीसदी प्लाट देना संभव नहीं है। साथ ही प्राधिकरण के पास इतना बजट नहीं है कि वह किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा दे सके। न्यायालय ने अथॉरिटी की दलीलों को नहीं माना और अपने फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय के इस आदेश से किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा पाने सहित विकसित क्षेत्र में प्लाट मिलने की बाधाएं दूर हो गई हैं।


    -Dainik Jagran
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    नोएडा की पुनर्विचार अर्जियां खारिज


    भूमि अधिग्रहण मामला
    वि.सं.इलाहाबाद : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पूर्णपीठ ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार के लिए दाखिल की गयी नोएडा की अर्जियों को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया है। कुछ किसानों की याचिकाओं को सुनवाई के लिए जुलाई 12 में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

    यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसयू खान तथा न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की पूर्णपीठ ने नोएडा अथॉरिटी सहित अन्य की अर्जियों को निर्णीत करते हुए दिया है। याचिका पर अथॉरिटी के अधिवक्ता रामेंद्र प्रताप सिंह तथा किसानों की तरफ से कमल सिंह यादव, पंकज दुबे, मनीष गोयल आदि दर्जनों अधिवक्ताओं को दिए गए अपने फैसले में कहा था कि नोएडा को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से अनुमोदन लेकर योजना देनी चाहिए थी। न्यायालय ने किसानों को 10 फीसदी जमीन प्लाट के रूप में तथा 64.70 फीसदी बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश दिया था। नोएडा अथॉरिटी ने अपनी पुनर्विचार अर्जी में कहा कि एनसीआर बोर्ड का अनुमोदन लेना जरूरी नहीं है। चूंकि अधिगृहीत क्षेत्र का विकास हो चुका है। वहां पर किसान को उसकी अधिगृहीत जमीन का 10 फीसदी प्लाट देना संभव नहीं है। साथ ही प्राधिकरण के पास इतना बजट नहीं है कि वह किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा दे सके। न्यायालय ने अथॉरिटी की दलीलों को नहीं माना और अपने फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय के इस आदेश से किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा पाने सहित विकसित क्षेत्र में प्लाट मिलने की बाधाएं दूर हो गई हैं।


    -Dainik Jagran



    10 cent developed land kaha se layega authority.???
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  • सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा प्राधिकरण


    ग्रेटर नोएडा, सं : इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पुनर्विचार याचिका रद किए जाने पर प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा। प्राधिकरण के चेयरमैन व मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमण ने बताया कि शहर का मास्टर 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर नहीं होने के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ा है। इसलिए प्राधिकरण की प्राथमिकता मास्टर प्लान को मंजूर कराना है। हाईकोर्ट से पुनर्विचार याचिका रद किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। कुछ किसान पहले ही हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर चुके हैं, इसलिए प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट में अपील में सभी बिंदुओं को शामिल करेगा।

    मालूम हो कि जमीन अधिग्रहण को लेकर नोएडा एक्सटेंशन समेत 40 गांवों के किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट की तीन सदस्यीय बड़ी बेंच ने 21 अक्टूबर 2011 को फैसला सुनाया था कि किसानों को 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसदी विकसित भूखंड दिया जाए। शहर का मास्टर प्लान 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर न होने के कारण कोर्ट ने आपत्ति करते हुए नोएडा एक्सटेंशन में निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। बोर्ड से मास्टर प्लान को मंजूर कराने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। प्राधिकरण ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए किसानों का 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा देना शुरू कर दिया था। मास्टर प्लान मंजूर होने में देरी होते देख प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार दायर कर निर्माण कार्य शुरू करने की बंदिश हटाने व दस फीसद विकसित भूखंड देने के फैसले पर विचार करने का अनुरोध किया था। इधर, किसानों की तरफ से भी हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर कहा गया था कि उन्होंने जमीन अधिग्रहण को रद करने की मांग की थी। इसलिए उन्हें मुआवजा नहीं जमीन चाहिए। हाईकोर्ट ने सोमवार को प्राधिकरण व किसानों की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों की अपील खारिज कर दी।

    एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर निगाहें
    प्राधिकरण की पुनर्विचार याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने पर नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों की उम्मीद टूटी नहीं हैं, बल्कि उनकी निगाहें अब एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 22 मई को होने वाली बोर्ड बैठक पर टिकी है। निवेशकों का कहना है कि याचिका खारिज होने से नोएडा एक्सटेंशन पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। किसानों की याचिका भी खारिज हुई। इससे जरूरी राहत मिली है। मास्टर प्लान एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर होना है, अगर मास्टर प्लान मंजूर हो गया तो एक्सटेंशन में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

    नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट आनर एंड मेंबर एसोसिएशन (नेफोमा) अभिषेक कुमार का कहना है कि हाईकोर्ट ने किसानों की याचिका खारिज कर दी है, इससे राहत मिली है। एक्सटेंशन का भविष्य अभी एनसीआर प्लानिंग बोर्ड पर टिका हुआ है। उन्हें सिर्फ मास्टर प्लान से मतलब है, मास्टर प्लान मंजूर होना चाहिए।
    नेफोमा के उपाध्यक्ष अनू खान का कहना है कि लाखों निवेशकों के हित नोएडा एक्सटेंशन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने पहले ही एनसीआर प्लानिंग बोर्ड पर सब कुछ छोड़ दिया था, याचिका खारिज होने के बाद भी एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को अब मास्टर प्लान मंजूर करने में देरी नहीं करना चाहिए।




    -Dainik Jagran
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  • Unhappy farmers go on rampage


    NOIDA: After the Allahabad high court rejected the review petition of villagers in Noida Extension, a small section of farmers unhappy with the order went on a rampage targeting projects of several builders. Other farmers were, however, happy that the Allahabad high court had turned down the plea made by the Greater Noida Authority in its review petition to not dole out hiked compensation and developed plots to non-ancestral lands of villagers.

    Soon after news of the order reached Noida Extension, some agitated farmers took to the streets and targeted under-construction properties of developers. They blocked traffic at the Gol Chakkar in Noida Extension for a few hours. The angry crowd was dispersed following police intervention. "After getting news about farmers agitating in the region, we reached the spot and our officials managed to quell the agitation," said SP (Rural), Ashok
    Kumar.

    The police informed that no case has been filed into the incident of violence. "We are likely to register a case into the matter," Kumar added.

    Farmers' counsel, Pankaj Dubey, informed that after facing rejection from the high court, where they had sought land to be given back to farmers, they would now challenge the October 21 verdict in the Supreme Court.

    Other sections of farmers have expressed happiness over the fact that the plea made by Greater Noida Authority, vide its review petition, in which it had expressed its inability to pay hiked compensation and developed plots to all farmers has been turned down. The Authority had asked for relief from the high court in granting it order to pay compensation and plots only to those farmers who had 'ancestral lands' in the region as against 'non-ancestral lands' belonging to those who are not originally from the region but own land in different villages.

    "The Authority had been trying to make a difference between ancestral and non-ancestral land in the region in giving compensation to farmers," said Ranveer Pradhan, president of a farmers' organization, Grameen Panchayat Morcha. "Not only was the Authority shy of giving any developed plots in lieu of acquiring 'non-ancestral' lands, they had also been paying 10% less compensation to owners of such lands. It is a matter of great satisfaction that farmers across the board are eligible to get 64% hiked compensation and 10% developed plots now that the high court has upheld its original order delivered on October 21," said Pradhan.

    The Grameen Panchayat Morcha said that there is a vast amount of land in the Noida Extension region which the Authority had classified as 'non-ancestral'.

    TOI
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  • CEO pins hope on May 22 NCR Planning Board meet


    GREATER NOIDA: Allahabad high court, the Greater Noida Authority is now looking forward to the statutory planning committee meeting of the NCR Planning Board (NCRPB) scheduled on May 22. Greater Noida Authority chairman and CEO, Rama Raman, said that the court has asked the Authority to go for an appeal against the verdict instead of a review petition.

    "Our focus is on the statutory planning committee's meeting. We are confident of bringing relief to the homebuyers," Raman said. "At present, we are not worried about hiked compensation and developed plots to be given to non-ancestral land owners. We will file an SLP in the matter. Our main intention is to resume work in the region," he added.

    The Regional Plan of the NCRPB indicates the manner in which land in the National Capital Region shall be used. The planning committee had reportedly raised some points from the NCR Regional Plan. The Authority has already worked out these points and reportedly submitted its reply before the committee.

    Meanwhile, developers have also heaved a sigh of relief and considered it as a 'welcome decision'. Assocham member and managing director of Orris Infrastructure, Amit Gupta, said, "The Allahabad high court has maintained its earlier stand which is in the interest of all. It is a balanced decision delivered by the court. It was not just about Noida Extension, but the issue of development of the entire region, including Greater Noida and Yamuna Expressway. We hope, keeping the interest of all groups, now NCRPB will also consider the plea and give a go-ahead to the Master Plan."
    This order has raised hope of flat buyers that construction would resume once the NCRPB gives its clearance. "The order is very much in consistency with the earlier order that was beneficial for all stakeholders - builders, farmers and the flat buyers. This order has paved way for early resolution of the Noida Extension impasse," said RK Arora, CMD, Supertech Developers.

    CEO pins hope on May 22 NCR Planning Board meet - The Times of India
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  • भू-अधिग्रहण पर फैसला बरकरार

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक पूर्ण पीठ ने अपने एक फैसले को सोमवार को बरकरार रखा जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन के विकास के लिए उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के कुछ गांवों में भूमि अधिग्रहण को रदकर दिया गया था तथा जमीन मालिकों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश दिया था। पूर्णपीठ ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले में पुनर्विचार अर्जियों को खारिज कर दिया है। कुछ किसानों की याचिकाओं को सुनवाई के लिए जुलाई 2012 में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसयू खान तथा न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की पूर्णपीठ ने नोएडा अथॉरिटी सहित अन्य की अर्जियों को निर्णीत करते हुए दिया है। याचिका पर अथॉरिटी के अधिवक्ता रामेंद्र प्रताप सिंह तथा किसानों की तरफ से कमल सिंह यादव, पंकज दुबे, मनीष गोयल आदि दर्जनों अधिवक्ताओं को दिए गए अपने फैसले में कहा था कि नोएडा को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से अनुमोदन लेकर योजना देनी चाहिए थी। न्यायालय ने किसानों को 10 फीसदी जमीन प्लाट के रूप में तथा 64.70 फीसदी बढ़ा मुआवजा देने का आदेश दिया था। नोएडा अथॉरिटी ने अपनी पुनर्विचार अर्जी में कहा कि एनसीआर बोर्ड का अनुमोदन लेना जरूरी नहीं है। चूंकि अधिग्रहीत क्षेत्र का विकास हो चुका है। वहां पर किसान को उसकी अधिग्रहीत जमीन का 10 फीसदी प्लाट देना संभव नहीं है। साथ ही प्राधिकरण के पास इतना बजट नहीं है कि वह किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा दे सके। न्यायालय ने अथॉरिटी की दलीलों को नहीं माना और फैसले को बरकरार रखा। अदालत का मानना है कि याचिकाकर्ताओं को पुनरीक्षा याचिका के माध्यम से राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि वे उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में अपील दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं। किसानों ने दलील दी थी कि वे बढ़ाए गए मुआवजे के बावजूद अपनी जमीन वापस चाहते हैं। -
    Dainik Jagran
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  • प्राधिकरण को देने होंगे दस प्रतिशत भूखंड

    ग्रेटर नोएडा इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा प्राधिकरण की पुनर्विचार याचिका रद किए जाने से किसानों को अर्जित भूमि की एवज में दस प्रतिशत जमीन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। प्राधिकरण को अब जमीन देनी ही पड़ेगी। प्राधिकरण अर्जित भूमि की एवज में अभी तक छह प्रतिशत जमीन देता था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 21 अक्टूबर के फैसले में इसे बढ़ाकर दस प्रतिशत कर दिया था। प्राधिकरण ने इस निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करते हुए जमीन देने में असमर्थता जाहिर की थी। कोर्ट ने सोमवार को प्राधिकरण की याचिका को खारिज कर दिया। इससे किसानों को जमीन मिलनी तय हो गई है। हालांकि प्राधिकरण के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। अधिकांश गांवों में प्राधिकरण पहले ही जमीन का आवंटन कर चुका है। इस समय जमीन पर इमारतें खड़ी हैं। किसानों को भूखंड आवंटित करने के लिए विकसित गांवों में जमीन नहीं बची है। सवाल यह उठता है कि गांवों में जमीन ही उपलब्ध नहीं होगी तो प्राधिकरण किसानों को कहां भूखंड देगा। भविष्य में अधिग्रहीत किए जाने वाले गांवों में प्राधिकरण को दस प्रतिशत जमीन देने में कोई दिक्कत नहीं हैं। प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक साकीपुर, जैतपुर वैसपुर, बिरौंड़ी, बिरौंड़ा, तुस्याना, चूहड़पुर खादर, नामोली, मलकपुर, खेड़ा चौगानपुर, तुस्याना, रसूलपुर राय, मुरस्दपुर, घरबरा आदि डेढ़ दर्जन गांवों में विभिन्न संस्थाओं को जमीन का आवंटन हो चुका है। किसानों को भी छह प्रतिशत के भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं।

    -Dainik jagran
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  • Ajnara

    Looking for buyers,who has booked villa in ajnaras le-garden villa project.They are scraping villas..
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  • नोएडा एक्सटेंशन में देना ही होगा बढ़ा हुआ मुआवजा
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  • एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के निर्णय पर सभी की निगाहें
    एक्सटेंशन का फैसला
    किसान अब प्राधिकरण पर भरोसा करने वाले नहीं हैं। वह 22 मई तक का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद उन्हें मुआवजा, आबादी, प्लाट और जनसुविधाएं चाहिए। किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी पहले ही आंदोलन की घोषणा कर चुके हैं।

    सुप्रीम कोर्ट में एसएलपीदायर करेगा प्राधिकरण
    नोएडा। नेफोमा की हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई 16 मई को होगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि इससे पहले दस अप्रैल की तिथि तय की गई थी, लेकिन एनसीआर बोर्ड के प्रतिनिधि ने जवाब दाखिल करने के लिए एक माह का वक्त मांगा था। इस पर कोर्ट ने 16 मई की तिथि तय की है। उन्होंने बताया कि यह रिट नोएडा एक्सटेंशन के प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने में देरी करने के कारण करीब डेढ़ माह पहले दायर की गई है। अपील में बोर्ड को प्रोजेक्ट मंजूर करने के लिए टाइम फ्रेम बनवाने की अपील कोर्ट से की गई है।

    नेफोमा ने क्रेडाई को सौंपा ज्ञापन
    नोएडा। भुगतान न मिलने पर फ्लैटों को रद्द करने व मनमाना ब्याज मांगने सहित कई मुद्दों को लेकर नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स एंड मेबर्स एसोसिएशन (नेफोमा) ने सोमवार को क्रेडाई को ज्ञापन सौंपा। क्रेडाई के एनसीआर उपाध्यक्ष और आम्रपाली ग्रुप के एमडी अनिल शर्मा के दफ्तर में ज्ञापन सौंपा। हालांकि उनकी गैर मौजूदगी में कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट शिवप्रिय ने यह ज्ञापन लिया। नेफोमा अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि शिवप्रिय ने बायर्स और बिल्डर्स के साथ मिलकर गाइड लाइन तैयार किए जाने का भरोसा दिलाया। इसमें फ्लैटों के निर्माण, भुगतान और कब्जा देने तक की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। अभिषेक ने बताया कि आम्रपाली के वाइस प्रेसीडेंट ने पुराने बायर्स के फ्लैटों का आवंटन रद्द न किए जाने का आश्वासन दिया है। इस दौरान नेफोमा पदाधिकारी देवेंद्र कुमार, श्वेता भारती, विजय त्रिवेदी, अन्नू खान व इंद्रीश गुप्ता शामिल रहे।

    ग्रेटर नोएडा। सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज करने के बाद प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे पहले कोर्ट के आदेश का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। दूसरी तरफ, किसानों की याचिकाएं भी कोर्ट ने खारिज कर दी हैं। हालांकि नोएडा एक्सटेंशन समेत आसपास के 30 गांवों के किसान पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुके हैं।

    दरअसल, 21 अक्तूबर 2011 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से काफी किसान संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। इनकी याचिकाओं पर एक-एक करके सुनवाई हो रही है, जिसमें प्राधिकरण और प्रदेश सरकार से जवाब मांगा जा रहा है। सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा है कि प्राधिकरण इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में ले जा सकता है। आदेश आने के बाद ही प्राधिकरण ने अगली तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण का कहना है कि पहले कोर्ट के आदेश का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा।

    ग्रेटर नोएडा।
    सोमवार को प्राधिकरण की आस टूट गई। प्राधिकरण की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई। अब सिर्फ 22 मई को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के निर्णय पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं। हालांकि, प्राधिकरण और प्रदेश सरकार की तरफ से पूरी तैयारी की जा चुकी है। अगर 22 मई को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने मास्टर प्लान-2021 पर मोहर लगा दी, तो नोएडा एक्सटेंशन समेत विभिन्न सेक्टरों में विकास और निर्माण कार्य शुरू हो जाएंगे।

    -Amar Ujala
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  • Update,.
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  • Realtors welcome verdict


    The Allahabad HC order quashing claims of the farmers and upholding its October 2011 judgement has come as a relief to the developers who have invested in the various upcoming projects in Noida Extension and Greater Noida.


    Welcoming the order Manoj Gaur, Managing Director of Gaursons India Limited, said, “The HC order clarifies that no further review is needed and we are looking at it as a final decision. The decision of the court is very balanced and fair.” Gaur is hopeful that the prices of the flats will soon get a boost and the construction work will start by the end of this month.


    Confederation of Real Estate Developers Association of India (CREDAI) has also welcomed the judgement. Pankaj Bajaj, president CREDAI-NCR, said that the judgement had brought joy to the flat owners who have been waiting their dream home. “We are happy that the HC has upheld its order of October 2011. We hope that the litigation surrounding this matter will end and the developers can resume their projects,” he added.


    While praising the HC judgement, chairman and managing director (CMD) of Amrapali Group Anil Sharma said the court verdict is in the favour of everyone having stake in the Noida Extension projects. “The latest judgement favours every one be it farmers, developers or buyers of flats in the region,” he said
    Daily Pioneer

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