पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • लंबित मामले निस्तारित न होने से किसान नाराज


    ग्रेटर नोएडा, : आबादी, बैकलीज व मुआवजे के लंबित मामले निस्तारित नहीं होने से नाराज किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। बृहस्पतिवार को बिसरख गांव में आयोजित किसान संघर्ष समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि रविवार को महापंचायत बुलाई जाएगी। प्राधिकरण नहीं माना तो किसान एकजुट होकर आंदोलन करेंगे।

    किसानों का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने की वजह से प्राधिकरण ने आबादी निस्तारण समिति की बैठक को स्थगित कर दिया था। अधिकारियों ने वादा किया था कि चुनाव संपन्न होते ही लंबित प्रकरणों को निस्तारित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सरकार को बने दो माह हो गए हैं। इसके बाद भी प्राधिकरण ने आबादी निस्तारण और बैकलीज की कार्रवाई अब तक शुरू नहीं की है। संघर्ष समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी ने कहा कि वारिसान प्रमाणपत्र के आधार पर मृतक किसानों के परिजनों को मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। दर्जनों किसानों का मुआवजा रुका पड़ा है। प्राधिकरण ने जिलाधिकारी के साथ बैठक कर रास्ता निकालने का वादा किया था। मंगलवार को किसान दिवस में प्राधिकरण अधिकारियों ने बृहस्पतिवार से आबादी निस्तारण समिति की बैठक शुरू करने की बात कही थी। इन पर अभी अमल नहीं शुरू नहीं हुआ है। इससे किसानों में रोष बढ़ रहा है। रविवार को आयोजित होने वाली महापंचायत में अगले कदम की घोषणा की जाएगी। इस

    -Dainik jagran
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  • ग्रेनो से गाजियाबाद जल्द भरेंगे फर्राटा


    ग्रेटर नोएडा, : ग्रेटर नोएडा (NE) को गाजियाबाद से जोड़ने वाली 60 मीटर चौड़ी सड़क पर वाहन शीघ्र फर्राटे भरेंगे। सड़क निर्माण में बाधा बन रही किसानों की आबादी को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का कार्य शुरू हो गया है। 15 दिन में सभी मकानों को हटा दिया जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि दो माह में सड़क बनकर तैयार हो जाएगी। इसका निर्माण कार्य नौ वर्षो में अधर में पड़ा था। निर्माण में अब कोई बाधा शेष नहीं रही है। इस सड़क के बनने से ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद जाने का रास्ता काफी सुगम हो जाएगा। दोनों शहरों की दूरी 15 से 20 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2003 में दोनों शहरों को जोड़ने के लिए इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया था। 22.5 किलोमीटर लंबी सड़क में से 21 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। डेढ़ किमी के टुकडे़ पर अकबरपुर बहरमपुर गांव के किसानों की आबादी पड़ जाने की वजह से कार्य पूरा नहीं हो पाया था। किसानों के साथ वार्ता कर कई बार सड़क निर्माण की बाधा को दूर करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्राधिकरण को इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद निर्माण कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को सौंपी गई। जीडीए ने किसानों को ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में चार एकड़ जमीन पर अपनी आबादी स्थानांतरित करने के लिए मना लिया। पिछले दो दिनों से मकानों को हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। पंद्रह दिन के अंदर सभी मकानों को हटाकर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो दो माह बाद सड़क पर वाहन फर्राटे भरने लगेंगे।

    कहां से गुजर रही है सड़क
    दादरी-नोएडा मुख्य मार्ग पर सूरजपुर पुलिस लाइन के बीच से शुरू होकर यह सड़क तुस्याना, खेड़ा चौगानपुर, बिसरख, नोएडा एक्सटेंशन व अकबरपुर बहरमपुर गांव होते हुए गाजियाबाद के विजयनगर के नजदीक एनएच 24 बाइपास पर जाकर लगेगी।

    दिल्ली व मोहननगर का रास्ता भी हो जाएगा सुगम
    सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, वैशाली, साहिबाबाद, विजयनगर व मोहननगर होते हुए लोनी एवं बागपत जाना भी काफी आसान हो जाएगा।

    जीटी रोड पर वाहनों का दबाव होगा कम
    दिल्ली से बुलंदशहर व अलीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहन लालकुआं की तरफ जाने के बजाय ग्रेटर नोएडा से सिकंद्राबाद होते हुए बुलंदशहर, खुर्जा व अलीगढ़ की तरफ निकल जाएंगे। इससे दादरी जीटी रोड पर भी वाहनों का दबाव कम होगा।

    दो माह में बन जाएगी सड़क : संतोष
    जीडीए के वीसी संतोष कुमार यादव का कहना है कि मकानों को दूसरी जगह जमीन आवंटन करने को लेकर कुछ विवाद था। किसानों के साथ बैठक कर यह विवाद सुलझा लिया गया है। सभी किसानों को मकानों को स्थानांतरित करने के लिए दूसरी जगह जमीन आवंटित हो चुकी है। दो माह में सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।




    -Dainik jagran
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  • After this road what whould be distance between Gaur circle of Noida Extension and GZB railway station?

    Originally Posted by fritolay_ps
    ग्रेनो से गाजियाबाद जल्द भरेंगे फर्राटा


    ग्रेटर नोएडा, : ग्रेटर नोएडा (NE) को गाजियाबाद से जोड़ने वाली 60 मीटर चौड़ी सड़क पर वाहन शीघ्र फर्राटे भरेंगे। सड़क निर्माण में बाधा बन रही किसानों की आबादी को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का कार्य शुरू हो गया है। 15 दिन में सभी मकानों को हटा दिया जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि दो माह में सड़क बनकर तैयार हो जाएगी। इसका निर्माण कार्य नौ वर्षो में अधर में पड़ा था। निर्माण में अब कोई बाधा शेष नहीं रही है। इस सड़क के बनने से ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद जाने का रास्ता काफी सुगम हो जाएगा। दोनों शहरों की दूरी 15 से 20 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2003 में दोनों शहरों को जोड़ने के लिए इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया था। 22.5 किलोमीटर लंबी सड़क में से 21 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। डेढ़ किमी के टुकडे़ पर अकबरपुर बहरमपुर गांव के किसानों की आबादी पड़ जाने की वजह से कार्य पूरा नहीं हो पाया था। किसानों के साथ वार्ता कर कई बार सड़क निर्माण की बाधा को दूर करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्राधिकरण को इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद निर्माण कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को सौंपी गई। जीडीए ने किसानों को ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में चार एकड़ जमीन पर अपनी आबादी स्थानांतरित करने के लिए मना लिया। पिछले दो दिनों से मकानों को हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। पंद्रह दिन के अंदर सभी मकानों को हटाकर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो दो माह बाद सड़क पर वाहन फर्राटे भरने लगेंगे।

    कहां से गुजर रही है सड़क
    दादरी-नोएडा मुख्य मार्ग पर सूरजपुर पुलिस लाइन के बीच से शुरू होकर यह सड़क तुस्याना, खेड़ा चौगानपुर, बिसरख, नोएडा एक्सटेंशन व अकबरपुर बहरमपुर गांव होते हुए गाजियाबाद के विजयनगर के नजदीक एनएच 24 बाइपास पर जाकर लगेगी।

    दिल्ली व मोहननगर का रास्ता भी हो जाएगा सुगम
    सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, वैशाली, साहिबाबाद, विजयनगर व मोहननगर होते हुए लोनी एवं बागपत जाना भी काफी आसान हो जाएगा।

    जीटी रोड पर वाहनों का दबाव होगा कम
    दिल्ली से बुलंदशहर व अलीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहन लालकुआं की तरफ जाने के बजाय ग्रेटर नोएडा से सिकंद्राबाद होते हुए बुलंदशहर, खुर्जा व अलीगढ़ की तरफ निकल जाएंगे। इससे दादरी जीटी रोड पर भी वाहनों का दबाव कम होगा।

    दो माह में बन जाएगी सड़क : संतोष
    जीडीए के वीसी संतोष कुमार यादव का कहना है कि मकानों को दूसरी जगह जमीन आवंटन करने को लेकर कुछ विवाद था। किसानों के साथ बैठक कर यह विवाद सुलझा लिया गया है। सभी किसानों को मकानों को स्थानांतरित करने के लिए दूसरी जगह जमीन आवंटित हो चुकी है। दो माह में सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।




    -Dainik jagran
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    ग्रेनो से गाजियाबाद जल्द भरेंगे फर्राटा


    ग्रेटर नोएडा, : ग्रेटर नोएडा (NE) को गाजियाबाद से जोड़ने वाली 60 मीटर चौड़ी सड़क पर वाहन शीघ्र फर्राटे भरेंगे। सड़क निर्माण में बाधा बन रही किसानों की आबादी को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का कार्य शुरू हो गया है। 15 दिन में सभी मकानों को हटा दिया जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि दो माह में सड़क बनकर तैयार हो जाएगी। इसका निर्माण कार्य नौ वर्षो में अधर में पड़ा था। निर्माण में अब कोई बाधा शेष नहीं रही है। इस सड़क के बनने से ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद जाने का रास्ता काफी सुगम हो जाएगा। दोनों शहरों की दूरी 15 से 20 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2003 में दोनों शहरों को जोड़ने के लिए इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया था। 22.5 किलोमीटर लंबी सड़क में से 21 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। डेढ़ किमी के टुकडे़ पर अकबरपुर बहरमपुर गांव के किसानों की आबादी पड़ जाने की वजह से कार्य पूरा नहीं हो पाया था। किसानों के साथ वार्ता कर कई बार सड़क निर्माण की बाधा को दूर करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्राधिकरण को इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद निर्माण कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को सौंपी गई। जीडीए ने किसानों को ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में चार एकड़ जमीन पर अपनी आबादी स्थानांतरित करने के लिए मना लिया। पिछले दो दिनों से मकानों को हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। पंद्रह दिन के अंदर सभी मकानों को हटाकर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो दो माह बाद सड़क पर वाहन फर्राटे भरने लगेंगे।

    कहां से गुजर रही है सड़क
    दादरी-नोएडा मुख्य मार्ग पर सूरजपुर पुलिस लाइन के बीच से शुरू होकर यह सड़क तुस्याना, खेड़ा चौगानपुर, बिसरख, नोएडा एक्सटेंशन व अकबरपुर बहरमपुर गांव होते हुए गाजियाबाद के विजयनगर के नजदीक एनएच 24 बाइपास पर जाकर लगेगी।

    दिल्ली व मोहननगर का रास्ता भी हो जाएगा सुगम
    सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, वैशाली, साहिबाबाद, विजयनगर व मोहननगर होते हुए लोनी एवं बागपत जाना भी काफी आसान हो जाएगा।

    जीटी रोड पर वाहनों का दबाव होगा कम
    दिल्ली से बुलंदशहर व अलीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहन लालकुआं की तरफ जाने के बजाय ग्रेटर नोएडा से सिकंद्राबाद होते हुए बुलंदशहर, खुर्जा व अलीगढ़ की तरफ निकल जाएंगे। इससे दादरी जीटी रोड पर भी वाहनों का दबाव कम होगा।

    दो माह में बन जाएगी सड़क : संतोष
    जीडीए के वीसी संतोष कुमार यादव का कहना है कि मकानों को दूसरी जगह जमीन आवंटन करने को लेकर कुछ विवाद था। किसानों के साथ बैठक कर यह विवाद सुलझा लिया गया है। सभी किसानों को मकानों को स्थानांतरित करने के लिए दूसरी जगह जमीन आवंटित हो चुकी है। दो माह में सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।




    -Dainik jagran


    thanks frito ji for this update .. i had gone on this road around 2 weeks back but was disappointed to reach a dead end very close to the point where this road will eventually meet nh24 (if farmers really agree to relocate their huts)
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    ग्रेनो से गाजियाबाद जल्द भरेंगे फर्राटा


    ग्रेटर नोएडा, : ग्रेटर नोएडा (NE) को गाजियाबाद से जोड़ने वाली 60 मीटर चौड़ी सड़क पर वाहन शीघ्र फर्राटे भरेंगे। सड़क निर्माण में बाधा बन रही किसानों की आबादी को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का कार्य शुरू हो गया है। 15 दिन में सभी मकानों को हटा दिया जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि दो माह में सड़क बनकर तैयार हो जाएगी। इसका निर्माण कार्य नौ वर्षो में अधर में पड़ा था। निर्माण में अब कोई बाधा शेष नहीं रही है। इस सड़क के बनने से ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद जाने का रास्ता काफी सुगम हो जाएगा। दोनों शहरों की दूरी 15 से 20 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2003 में दोनों शहरों को जोड़ने के लिए इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया था। 22.5 किलोमीटर लंबी सड़क में से 21 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। डेढ़ किमी के टुकडे़ पर अकबरपुर बहरमपुर गांव के किसानों की आबादी पड़ जाने की वजह से कार्य पूरा नहीं हो पाया था। किसानों के साथ वार्ता कर कई बार सड़क निर्माण की बाधा को दूर करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्राधिकरण को इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद निर्माण कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को सौंपी गई। जीडीए ने किसानों को ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में चार एकड़ जमीन पर अपनी आबादी स्थानांतरित करने के लिए मना लिया। पिछले दो दिनों से मकानों को हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। पंद्रह दिन के अंदर सभी मकानों को हटाकर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो दो माह बाद सड़क पर वाहन फर्राटे भरने लगेंगे।

    कहां से गुजर रही है सड़क
    दादरी-नोएडा मुख्य मार्ग पर सूरजपुर पुलिस लाइन के बीच से शुरू होकर यह सड़क तुस्याना, खेड़ा चौगानपुर, बिसरख, नोएडा एक्सटेंशन व अकबरपुर बहरमपुर गांव होते हुए गाजियाबाद के विजयनगर के नजदीक एनएच 24 बाइपास पर जाकर लगेगी।

    दिल्ली व मोहननगर का रास्ता भी हो जाएगा सुगम
    सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, वैशाली, साहिबाबाद, विजयनगर व मोहननगर होते हुए लोनी एवं बागपत जाना भी काफी आसान हो जाएगा।

    जीटी रोड पर वाहनों का दबाव होगा कम
    दिल्ली से बुलंदशहर व अलीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहन लालकुआं की तरफ जाने के बजाय ग्रेटर नोएडा से सिकंद्राबाद होते हुए बुलंदशहर, खुर्जा व अलीगढ़ की तरफ निकल जाएंगे। इससे दादरी जीटी रोड पर भी वाहनों का दबाव कम होगा।

    दो माह में बन जाएगी सड़क : संतोष
    जीडीए के वीसी संतोष कुमार यादव का कहना है कि मकानों को दूसरी जगह जमीन आवंटन करने को लेकर कुछ विवाद था। किसानों के साथ बैठक कर यह विवाद सुलझा लिया गया है। सभी किसानों को मकानों को स्थानांतरित करने के लिए दूसरी जगह जमीन आवंटित हो चुकी है। दो माह में सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।




    -Dainik jagran

    Have been reading since long about this Greater Noida-Ghaziabad Expressway, want to see it going soon. Hope they don't miss this deadline.
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  • Originally Posted by trialsurvey
    thanks frito ji for this update .. i had gone on this road around 2 weeks back but was disappointed to reach a dead end very close to the point where this road will eventually meet nh24 (if farmers really agree to relocate their huts)

    Where exactly this expressway meets at NH-24 yarr?? many time have been there but could not locate :(
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  • Originally Posted by cookie
    Where exactly this expressway meets at NH-24 yarr?? many time have been there but could not locate :(


    sir i will give u detailed explanation
    first reach gor gol chakker from noida sector 121..
    then u have 3 options ---

    1) go straight ... keeep goin on and on and on ... eventually u will reach a dead end with paramount golf foreste in striking distance !! :D

    2) go left .. u will see many of the projects under gaur city and some others also ... keep goin on and on .. eventually after 7-8km ... u will hit dead end (farmer's huts and so called kothis) ... u will see NH24 within striking distance ! :D

    3) go right .. this is the road where last project is stellar jeevan and some project by shubhkamna ... then there is balak vidyala .. still keep goin .. u will see amrapali IT park .. still go on .. there will be a compulsory right turn ... here u will find police line campus .. eventually u will enter real gnoida .. (the one which u wud have entered if u went from dadri road side) ..
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  • Originally Posted by trialsurvey
    sir i will give u detailed explanation
    first reach gor gol chakker from noida sector 121..
    then u have 3 options ---

    1) go straight ... keeep goin on and on and on ... eventually u will reach a dead end with paramount golf foreste in striking distance !! :D

    2) go left .. u will see many of the projects under gaur city and some others also ... keep goin on and on .. eventually after 7-8km ... u will hit dead end (farmer's huts and so called kothis) ... u will see NH24 within striking distance ! :D

    3) go right .. this is the road where last project is stellar jeevan and some project by shubhkamna ... then there is balak vidyala .. still keep goin .. u will see amrapali IT park .. still go on .. there will be a compulsory right turn ... here u will find police line campus .. eventually u will enter real gnoida .. (the one which u wud have entered if u went from dadri road side) ..


    This GN-GZB Eway also help to make NH-24 traffic less after Hindon Bridge... After this road started then Public going to Noida / GN / Agra (by new YEW) / DND will take left turn before Hindon Bridge (if coming from Hapur/GZB side).... so traffic after Hindon bridge to IP - Ghaziapur will reduce at NH-24..... Great for every one.... :)
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  • I believe it will hit near T point of Vijaynagar .

    Originally Posted by cookie
    Where exactly this expressway meets at NH-24 yarr?? many time have been there but could not locate :(
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  • Originally Posted by cookie
    Where exactly this expressway meets at NH-24 yarr?? many time have been there but could not locate :(


    The project is called the Guatum Buddh Expressway, and most fo the work till Rahul Vihar is completed. The few houses that had to demolished for further construction has been cleared now, these guys will be settled in Chipiyana Bujurg and also given monetory compensation. This was a bit of gyan now coming back to your original question it will meet NH24 near Bagu near the Ganga Water Tank.
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  • Uttar Pradesh sub-region fails to implement green plan

    NOIDA: Given the slow pace of development of green cover in the NCR region, the National Capital Region Planning Board (NCRPB) has taken strong exception to the fact that the Uttar Pradesh sub-region has fallen far short of ensuring increase in forest cover. As per reports of the Forest Survey of India (FSI) for 2009 and 2011, forest cover in the Uttar Pradesh sub-region has stagnated at a mere 2.6% in comparison with Rajasthan, Haryana and NCT of Delhi. The NCRPB, which has mandated forest cover to be 10% of the total geographical area as per its Regional Plan 2021, has now taken up the matter with the state government.

    Sources in the NCRPB say that the UP sub-region has been responsible for pulling down the rate of growth of forest cover in the NCR region which has increased by a mere 0.03% from 6.11% in 2009 to 6.14% in 2011. While the forest cover in Haryana sub-region stands at 3.35%, the sub-regions of Rajasthan and NCT of Delhi, which have forest cover of 14.38% and 11.87%, respectively, have reached above the benchmark of 10% as set up by the NCRPB.

    "For the NCR region to achieve optimum forest cover, the UP sub-region should pull up its socks," said a senior planning board official. "While there has been no increase in forest cover in NCR districts of Meerut, Baghpat, Ghaziabad and Gautam Budh Nagar, Bulandshahr has shown depletion in forest cover between 2009 and 2011," said the official.

    The NCRPB has made it imperative in its Regional Plan of 2021 - in view of the rapid urbanization in the NCR region - that more areas in the sub-regions be brought under forest cover to maintain ecological balance. "In order to achieve this, we have mandated for massive forestation drives along irrigation canals, drains, roads, railway lines and in village common lands," said the official. "The actual area under forest cover, at present, is even less because the technology used in mapping forest cover via satellite also picks up green areas like shrub cover, green fields and even golf courses," added the official.

    The forest department of Uttar Pradesh has said that forest cover has remained stagnant in the UP sub-region because of the pressures of population and urbanization. According to the department, apart from 'forest areas', which consist of all areas recorded as 'forests' including reserved and protected forests, they have very little land for development of 'forest cover' (tree cover in any area irrespective of the ownership of land).

    "Western UP is the hub of developmental activities with huge land constraints," said Anupam Gupta, conservator of forests of the Meerut division. "Widening of highways and roads take place constantly, leading to depleting forest cover. However, even though we have undertaken fresh plantations over several hundreds of hectares, it would take at least 5-6 years to get reflected in the satellite imagery," said Gupta.


    TOI
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  • No more red tapes: Abadi land records to become digital


    In order to resolve the farmers’ land compensation related issues more efficiently, the Noida authority has started digitising the land records. At present, all the land records are maintained in files. Both Noida and Greater Noida authorities are under pressure to resolve the farmer land compensation hike issue.

    “Keeping thousands of files related with acquisition of land and compensation is a cumbersome task. Keeping this record in a computer will make the officials’ task easier,” said a senior Noida authority official.
    The officials have to go through heaps of files to find information about a particular farmers’ case and whether he has received the compensation.
    “After all the records are digitised, we will give a unique code to each file so that we can search the file with a mere click of a button and resolve the issue without wasting much time,” said the official.

    The digitisation work is already under-way and the authority hopes to complete the process by the end of this month.

    “Once we are done with the farmers’ land record job, we will start distributing the hiked compensation to them,” said the official.
    Agitations by farmers over land compensation have become quite common in the twin-cities.

    On Tuesday, two groups of farmers in Noida and Greater Noida met with the chief executive officers of the respective authorities and demanded that the process of disbursement of hiked compensation be expedited.
    On October 21 last year, the Allahabad High Court had ordered the Noida and Greater Noida authorities to hand over 64 % hiked compensation to the farmers.

    On Tuesday, farmers from Mangroli and Chhaproli villages met Noida authority CEO Sanjeev Saran while farmers in Greater Noida also met with authority officials and asked them to accelerate the process.
    “We have asked the authority to regularise abadi land within 10 days, otherwise we will stage an agitation outside the authority’s office on June 1,” said Manveer Bhatti, a farmer.

    Farmers in Greater Noida claimed that land compensation be hiked by 6%, “as was assured by the Samajwadi Party in its manifesto.

    HT
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  • भूमि अधिग्रहण: स्थायी समिति की रिपोर्ट पेश

    जमीन अधिग्रहण विधेयक पर बनी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट गुरुवार को संसद में पेश की गई। इसमें भूमि अधिग्रहण के प्रावधानों को कड़े करने की बात कही गई है, ताकि स्थानीय संस्थाओं के साथ तालमेल कर इस समूची प्रक्रिया को अधिक मानवीय, भागीदारी वाली और पारदर्शी बनाया जा सके। इससे निजी क्षेत्र की चिंताएं बढ़ सकती हैं।

    निजी क्षेत्र के लिए अधिग्रहण : इसमें विधेयक की उस धारणा को खारिज किया गया है और कहा गया है कि जब पूंजी और मानव संसाधन का अधिग्रहण उद्योग के लिए नहीं किया जाता है तो उसके लिए जमीन का अधिग्रहण क्यों किया जाए? विभिन्न देशों का उदाहरण देते हुुए इसमें कहा गया है कि किसी भी देश में किसी भी उद्देश्य के लिए जमीन का अधिग्रहण निजी क्षेत्र के लिए नहीं किया जाता है। सिफारिशों में कहा गया है, 'विधेयक में दिए गए सार्वजनिक उद्देश्य को बुनियादी ढांचा, सिंचाई व बांध, स्कूल, अस्पताल और पेयजल व जलनिकासी परियोजनाओं तक सीमित रखा जाना चाहिए, जो सरकारी खर्च पर बन रहे हों।'
    ग्रामसभा की भूमिका: समिति ने कहा है कि विधेयक में ग्रामसभा की भूमिका सलाह तक सीमित रखी गई है और यह केंद्रीय भूमिका में नहीं है। इसमें कहा गया है कि स्थानीय निकायों को और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकारोंं को नियमों में संशोधन करने की जरूरत है, जिससे स्थानीय निकाय योजना बनाने और आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा सकें।

    कृषि भूमि: बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में विधेयक के प्रावधानों को लेकर ज्यादा विरोध हो रहा है, जहां बहुफसली सिंचित भूमि को अधिग्रहण से अलग रखने की मांग की जा रही है। समिति इस विचार का अनुमोदन करती है, साथ में ध्यान आकृष्ट कराती है कि इसमें खाद्य सुरक्षा को लेकर बहुत कम ध्यान रखा गया है और सिर्फ बहुफसली जमीन को अधिग्रहण से बाहर रखा गया है।

    समिति ने सिफारिश की है कि सभी कृषि भूमि को अधिग्रहण के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए और अगर यह जरूरी हुआ तो यह राज्य की कुल कृषि भूमि के 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। केंद्रीय भूमि अधिनियम से छूट: समिति ने सिफारिश की है कि 16 केंद्रीय अधिनियमों से छूट दिए जाने की कोई जरूरत नहीं है। इस विधेयक से अधिनियमों से तालमेल बिठाने के लिए समिति ने सुझाव दिया विधेयक पारित करते समय इन अधिनियमों में संशोधन होना चाहिए।

    भूमि के लिए मुआवजा : विधेयक में ग्रामीण इलाकों में बाजार भाव से 4 गुना और शहरी इलाकों में बाजार भाव से दोगुना मुआवजा दिए जाने की बात है। समिति ने पाया है कि भूमि की दरें सामान्यतया वास्तविक दरों से कम दिखाई जाती हैं, जिससे स्टांप शुल्क मेंं छूट मिल सके। सरकार को भूमि की कीमत तय करने के लिए आयोग का गठन कर मूल्य को अंतिम रूप देना चाहिए।

    राहत एवं पुनर्वास : समिति ने कहा है कि विधेयक में वित्तीय सहायता के लिए किए गए प्रावधान को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाना चाहिए। दोहरे विस्थापन को रोकने के लिए विशेष प्रावधान होना चाहिए।

    भूमि अधिग्रहण: स्थायी समिति की रिपोर्ट पेश
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  • जमीन अधिग्रहण और मुआवजे पर नई नीति तैयार
    नफे-नुकसान का गुणा-भाग जारी
    सरकार ने सर्किल रेट से छह गुना ज्यादा मुआवजा देने की घोषणा की थी

    ग्रेटर नोएडा। पहले घोड़ी बछेड़ा, फिर टप्पल का किसान आंदोलन और इसके बाद भट्टा पारसौल में आंदोलनरत किसानों पर हुए गोलीकांड ने प्रदेश की तत्कालीन सरकार को हिला दिया था। नतीजा यह रहा कि राज्य सरकार को जमीन अधिग्रहण की नीति दो बार बदलनी पड़ी थी। इसके बाद भी किसान, प्राधिकरण को जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए।

    नई सरकार ने सर्किल रेट के छह गुना दर से किसानों को मुआवजा देने की नई नीति पर काम शुरू किया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया था, जिसे राज्य शासन को भेजा जा चुका है। वर्तमान सत्तारूढ़ दल ने चुनाव के दौरान किसानों से वायदा किया था कि सरकार बनने पर वो सर्किल रेट से छह गुना अधिक मुआवजा देंगे। अब इसे अमली जामा पहनाने की तैयारी की जा रही है। सरकार को भेजे गए जवाब में प्राधिकरण ने कहा गया है कि यदि किसानों को छह गुना मुआवजा दिया जाता है तो ग्रेनो प्राधिकरण को मौजूदा दर से तीन गुना अधिक रकम देनी होगी।

    गौरतलब है कि मौजूदा दर 1,050 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, लेकिन अदालती आदेश के बाद किसानों को 1,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान किया जा रहा है। वहीं क्षेत्र का सर्किल रेट 400 से 500 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जिसे छह गुना बढ़ाने का प्रस्ताव है। इतना ही नहीं यदि यह नियम लागू होता है तो भविष्य में अधिग्रहण किसानों की मर्जी से होगा और बढ़ी दर से मुआवजे का भुगतान भी किया जाएगा। फिलहाल प्राधिकरण, सरकार व किसानों बीच इस प्रस्ताव को लेकर नफे-नुकसान का आकलन जारी है।

    -Amar Ujala
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