पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Originally Posted by ragh_ideal
    Four months taken by BMW to stop this impact on her vote bank and four months already taken by SP to secure their vote bank.

    question is where is now HC/SC/EC and our most respected Constitution.

    if they(EC) have protocols to stop any development which can reflect the party image then why there is no rule to stop/resume such activities which are reflecting not only the party image but also spreading anxiety in societies.

    How can HC/SC forget the role of banks/builders in this case.

    and what about constitution its Good for NOTHING.


    Bhaii, tum HC ke paas gaye kyaa ? Baith baithe bathe tum HC/SC/EC sabko dhoondh rahe ho ? There are also other important things in this world. When you have gambled, why do u think that SC should be running at your whim ? and what is EC supposed to do here?
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  • एक्सटेंशन के किसानों की मांग होगी पूरी
    जल्द मिलेगा डिग्री कॉलेज का तोहफा
    अमर उजाला ब्यूरो
    ग्रेटर नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन समेत ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को अब डिग्री की पढ़ाई के लिए नोएडा, गाजियाबाद और दादरी नहीं जाना पड़ेगा। उम्मीद की जा रही है कि एक्सटेंशन स्थित गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज को ही डिग्री कॉलेज में बदल दिया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर पर तेजी से विचार चल रहा है।

    शासन ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अफसरों से अधूरे प्रोजेक्टों की जानकारी मांगी है। ऐसे नए प्रोजेक्ट्स के बारे में भी पूछा गया है, जो क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी हैं और जिनकी लंबे अर्से से मांग की जाती रही हो। ग्रेनो प्राधिकरण ने शहर में कोई डिग्री कॉलेज न होने की वजह से छात्र-छात्राओं को दूर-दराज क्षेत्रों में पढ़ने जाने में हो रही दिक्कतों का हवाला देते हुए डिग्री कॉलेज पर जोर दिया है। नया डिग्री कॉलेज बनाने और पहले से ही तैयार किसी भवन को डिग्री कॉलेज में बदलने पर भी मंत्रणा हुई। इसमें सबसे बेहतर विकल्प गौतम बुद्ध बालक इंटर कॉलेज को माना गया। वजह यह है कि 20 एकड़ में 88 करोड़ रुपये की लागत से इसकी बिल्डिंग तैयार हुई थी और यहां छोटी क्लासों की पढ़ाई हो रही है। छात्रों के लिए हॉस्टल, ऑडिटोरियम समेत विभिन्न सुविधाएं पहले से ही मौजूद हैं। यही नहीं, प्राधिकरण ने पूरा पैसा खर्च करके इसे बनवाया है और टीचरों की तनख्वाह समेत सभी जरूरतें भी पूरी करता है। डिग्री कॉलेज का क्या स्वरूप होगा, इस पर विचार विमर्श हो रहा है।

    विचार चारों कॉलेजों पर हुआ
    बसपा सरकार के कार्यकाल के दौरान नोएडा में पंचशील बालक व महामाया बालिका इंटर कॉलेज जबकि ग्रेटर नोएडा में गौतमबुद्ध बालक और सावित्री बाई फुले बालिका इंटर कॉलेज बनवाए। चारों कॉलेजों का निर्माण नोएडा और ग्रेटर नोएडा ने कराया था। प्राधिकरण सूत्रों ने बताया कि चारों कॉलेजों पर विचार हुआ। फिलहाल गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज के पक्ष में राय बनी है।

    2001 में छोड़ी थी 10 एकड़ जमीन
    नोएडा एक्सटेंशन के केपी-3 में 10 एकड़ जमीन को प्राधिकरण ने 2001 में डिग्री कॉलेज के लिए छोड़ी थी। बाद में प्राधिकरण ने उस जमीन का लैंड यूज बदलकर किसी और को आवंटित कर दी। किसान संघर्ष समिति ने डिग्री कॉलेज की मांग उठाई थी और इसके लिए आंदोलन भी किया था। संगठन के प्रवक्ता मनवीर भाटी ने बताया कि प्राधिकरण को गलती जितनी जल्दी हो, सुधार लेनी चाहिए।
    बच्चों को अभी दूर-दराज जाना पड़ता है डिग्री की पढ़ाई को
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  • किसान हित के 7 प्रस्ताव रखेंगे बोर्ड बैठक में
    अमर उजाला ब्यूरो
    नोएडा। किसान हित से जुड़े सात प्रस्तावों को आगामी 22 जुलाई को होने वाली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाने से पूर्व नोएडा किसान संघर्ष समिति के साथ डीसीईओ ने इन प्रस्तावों को लेकर चर्चा व सुझाव लिए। दरअसल, किसान आंदोलन के बाद गत वर्ष तत्कालीन सीईओ बलविंदर कुमार से हुए समझौते को कानूनी रूप देने के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।
    समिति के प्रवक्ता महेश अवाना के अनुसार कोर्ट के निर्देशानुसार 5 प्रतिशत के स्थान पर 10 फीसदी आबादी की भूमि देने, 64.70 प्रतिशत बढ़ा मुआवजा सभी को देने, आरक्षण श्रेणी के सभी किसानों को प्राथमिकता के आधार पर स्कीम द्वारा भूखंड देने, अपील वाले मुकदमों का निस्तारण करने, आरक्षण श्रेणी के किसानों को कंप्यूटर में सूचीबद्ध करने व ग्रामीणों क्षेत्रों के विकास में तेजी लाने सहित किसान हित के अन्य मुद्दों पर डीसीईओ विजय कुमार यादव के साथ बैठक हुई।
    इसके बाद यादव ने सात प्रस्तावों को बैठक में शामिल करने की बात कही। समीक्षा बैठक में किसानों के प्रतिनिधिमंडल में दलवीर यादव, लीले प्रधान, सुदेश अवाना आदि उपस्थित रहे।
    डीसीईओ ने किसान संघर्ष समिति के साथ की समीक्षा बैठक
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  • Originally Posted by ashish18
    Bhaii, tum HC ke paas gaye kyaa ? Baith baithe bathe tum HC/SC/EC sabko dhoondh rahe ho ? There are also other important things in this world. When you have gambled, why do u think that SC should be running at your whim ? and what is EC supposed to do here?



    Kha ho prabhu?

    aapne meri ankhe khol di.
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  • RTI TO GNIDA DATED 12.06.2012 by NEFOMA team
    ----------------------------------------

    To
    The Public Information Officer/ Asstt. Public Information Officer,
    ... Greater Noida Industrial Development Authority,
    169, Chitvan Estate, Sector Gamma,
    Greater Noida – 201308 (U.P.)

    Subject : Request for Information under Right To Information (RTI) Act, 2005

    Respected Sir,

    I, Shweta Bharti booked a flat in Amrapali Centrurian Park , Greater Noida (Noida Extension),Uttar Pradesh in the month of April ‘2011. Its unfortunate to note that construction work is held up for the approval of Master Plan – 2021 as per the direction given to GNIDA by honorable high court.

    In this regard, I am seeking the following information under Right to Information Act, 2005 in respect of Greater Noida Industrial Development Authority :

    1. Before sending the master plan to NCRPB,Delhi, What steps were taken by you to get the Master Plan corrected and approved by the Govt of UP Ministry of Urban Development which is the competent authority to give the approval?

    2. Please refer letter ref. no. 14011/66/2001/NCRPB –VOL1 dt. 06/06/2012 by NCRPB, Delhi to Principal Secretary, Housing Dept., Govt. of UP. What steps are being taken to ensure that the required approvals requested by NCRPB are provided at the earliest?

    3. Has the master plan been sent for correction and approval by the Govt of UP Ministry of Urban Development as it was sent back to you again on 6th June ?

    4. What is the current status of Master plan 2021 file?

    5. As per High Court judgment delivered on 21st Oct 2011, the farmers' compensation was increased both monetarily and also as a proportion of developed land. What is the status of the revised compensation disbursement. What proportion of the compensation has been settled so far? Please provide details below:
    No. of farmers settled
    Proportion of developed land allotted to farmers so far
    Proportion of monetary settlement made so far
    Estimated date of complete settlement (if not settled so far)

    Plz provide the above information at the earliest.The postal order no. for Rs.10 / is enclosed herewith.

    Regards.

    Shweta Bharti
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  • किसान केवल आबादी की जमीन चाहते हैं फ्री-होल्ड

    ग्रेटर नोएडा : आबादी की जमीन को फ्री-होल्ड करने की मांग को लेकर मंगलवार किसानों ने प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी को सीईओ के नाम एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने कहा कि आबादी व दस फीसद विकसित भूखंड को फ्री-होल्ड कराने के लिए शासन स्तर पर कार्यवाही करें। 22 जून को होने वाली बोर्ड बैठक में किसानों की प्राधिकरण स्तर पर समाधान होने वाली समस्या का समाधान को बो...र्ड से पास कराया जाए। जिन किसानों की आबादी व्यवस्थापन कमेटी में सहमति हो चुकी है उन आबादी प्रकरणों को बोर्ड बैठक में पास कराया जाए। कोर्ट के आदेश पर किसानों को मिलने वाले दस फीसद विकसित भूखंड को 12 मीटर रोड पर सेक्टर की तर्ज पर दिया जाए। सभी गांवों के अवार्ड होने पर किसानों के मूल मुआवजे से काट जा रहे हैं, टीडीएस को किसानों से न काटकर प्राधिकरण खुद उसका वहन करें। वारिसानों की समस्या का समाधान तहसील स्तर पर किया जाए। जिन गांवों में विकास कार्य रुक गए है उनका प्राथमिकता पर बरसात से पहले विकास कराया जाए।

    dainik jagran
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  • ठेकेदारों के भुगतान पर भी रहेगी रोक


    ग्रेटर नोएडा : प्राधिकरण को बैंकों से कर्ज मिलने तक ठेकेदारों के निर्माण कार्यो के बिलों का भुगतान नहीं किया जाएगा। गांवों में रुके पड़े विकास कार्य भी बंद रहेंगे। किसी भी नए विकास कार्य के लिए टेंडर नहीं निकाला जाएगा। बैंकों से कर्ज मिलने के बाद ही प्राधिकरण गांव और सेक्टरों में विकास कार्य शुरू कराएगा।
    ज्ञात हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 39 गांवों के किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने के निर्देश के बाद प्राधिकरण पर करीब चार हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा है। अब तक किसानों को प्राधिकरण 1331 करोड़ रुपये का मुआवजा बांट चुका है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद के बाद बिल्डर भी ग्रुप हाउसिंग भूखंडों की किस्तों का भुगतान नहीं कर रहे हैं। दूसरी तरह किसान मुआवजे के लिए प्राधिकरण पर दबाव बना रहे हैं। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि प्राधिकरण की पहली प्राथमिकता किसानों को जमीन का मुआवजा बांटने की है। हालांकि, इस समय मुआवजे के लिए भी प्राधिकरण के पास धनराशि नहीं है। पिछले तीन दिन से मुआवजा वितरण पूरी तरह ठप पड़ा है। प्राधिकरण बैंकों से कर्ज लेने का प्रयास कर रहा है। कर्ज मिलने तक प्राधिकरण ने मुआवजा वितरण के साथ सभी तरह के भुगतान पर भी रोक लगा दी है। किसी भी ठेकेदार को अग्रिम आदेश तक निर्माण कार्यो के बिलों का भुगतान नहीं किया जाएगा। गांव व सेक्टरों में अधूरे विकास कार्यो को भी कर्ज मिलने के बाद ही पूरा कराया जाएगा। नए टेंडरों पर लगी रोक भी जारी रहेगी। बताया जाता है कि ठेकेदारों का करोड़ों रुपये प्राधिकरण में फंसा पड़ा है। निर्माण कार्यो के बिलों की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।



    dainik jagran
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  • Scrap the Noida Extension, its the best solution I see........
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  • ग्रेनो फेज-दो में जमीन अधिग्रहण में होगी देरी


    ग्रेटर नोएडा : नोएडा एक्सटेंशन समेत आसपास गांवों में जमीन अधिग्रहण को लेकर कोर्ट में विवाद चल रहा है। विवाद को देखते हुए दादरी क्षेत्र यानी फेज-दो में जल्द जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार करना प्राधिकरण के लिए आसान नहीं होगा। इससे पूर्व प्राधिकरण कोई योजना भी नहीं ला सकेगा।

    दादरी क्षेत्र में जीटी रोड के दूसरी तरफ विकास के लिए प्राधिकरण ने तीन साल पूर्व ग्रेटर नोएडा फेज-दो के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया था। ग्रेटर नोएडा से लेकर दादरी क्षेत्र तक विकास के लिए प्राधिकरण ने मास्टर प्लान 2031 तैयार किया है। मास्टर प्लान को बोर्ड से मंजूर होने के बाद शासन को भेज दिया गया है। फेज-दो में 189 गांवों के 54 हजार हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। ग्रेटर नोएडा फेज-एक में 124 गांवों के 44 हजार हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण प्राधिकरण ने कर लिया है। इन जमीन पर प्राधिकरण विभिन्न योजनाओं के लिए जमीन आवंटित कर चुका है। प्राधिकरण के पास फेज-एक में अधिग्रहण के लिए जमीन नहीं बची है। इसलिए प्राधिकरण ने दादरी आसपास क्षेत्र की जमीन अधिग्रहण का फैसला लिया है। छह गांवों में जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव शासन को भेजा चुका है। शासन से इन गांवों में जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव पास कर दिया है। फेज-दो में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया प्राधिकरण शुरू करता, उससे पहले नोएडा एक्सटेंशन समेत आसपास गांवों के किसान अधिग्रहण को लेकर कोर्ट चले गए। किसानों के मामले हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अब प्राधिकरण के लिए दो से तीन साल तक इन गांवों की जमीन का अधिग्रहण संभव नहीं है। फेज-एक में किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए प्राधिकरण के पास पैसा नहीं है। फेज-दो में किसानों को मुआवजा देने के लिए पैसा कहां से आएगा? सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा देने का घोषणा लागू होने पर प्राधिकरण पर और भार बढ़ जाएगा। ऐसे में प्राधिकरण ने फेज-दो में जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया है।



    dainik jagran
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  • प्राधिकरण को प्रदेश सरकार से ही आसरा
    ग्रेटर नोएडा। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के साथ माथापच्ची करते-करते प्राधिकरण अब हार मान चुका है। जब भी अधिकारी दिल्ली जाते हैं तो प्लानिंग कमेटी के सदस्य कुछ न कुछ खामी बताकर उसे पूरा करने को कहते हैं। यह सिलसिला पिछले दो माह से चल रहा है। इस बात को प्राधिकरण ने लखनऊ के आला अफसरों के समक्ष भी रखा है। प्रदेश सरकार ने तय किया है कि वह स्वयं ही केंद्र से बात करेगी।

    21 अक्तूबर 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि प्राधिकरण शीघ्र ही एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मास्टर प्लान 2021 को पास कराए। इसके बाद ही आगे विकास कार्य पूरा किया जाए। शुरुआत में प्रदेश सरकार द्वारा हस्तक्षेप किए जाने पर 22 मार्च को केंद्रीय शहरी मंत्री की अध्यक्षता में प्लानिंग बोर्ड की बैठक हुई थी। बोर्ड ने मास्टर प्लान को पास करने के लिए कमेटी का गठन किया था।

    प्राधिकरण अधिकारी मानते हैं कि प्लानिंग बोर्ड ने मास्टर प्लान का प्रस्ताव तभी रखा जब उसे लगा कि यह पास होने के काबिल है। शुरुआत में जब कमेटी ने कुछ और औपचारिकताएं पूरी करने को कहा तो उसे भी पूरा कर लिया गया। कमेटी ने पिछले माह बैठक के लिए चार बार तिथि दी, लेकिन बार-बार उसे आगे बढ़ाया जाता रहा। अब कमेटी की बैठक की कोई तिथि भी नहीं बताई जा रही है।

    प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि नोएडा एक्सटेंशन के मामले को प्रदेश के आला अफसरों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया गया है। अब स्वयं मुख्यमंत्री इस सिलसिले में केंद्र सरकार से बात करेंगे। ब्यूरो

    Amar Ujala
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  • stuck again.:(
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  • Originally Posted by fritolay_ps
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    Now Builder should approach UP Sarkar to get things going in their own way.......
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  • मास्टर प्लान को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी


    ग्रेटर नोएडा : जमीन अधिग्रहण को लेकर कोर्ट जाने वाले किसानों का सुर अब बदलने लगा है। शहर का मास्टर प्लान 2021 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर होने में हो रही देरी पर किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। किसान चाहते हैं कि जल्द नोएडा एक्सटेंशन का विवाद सुलझे और उन्हें अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसद विकसित भूखंड मिलना शुरू हो जाए। इसको लेकर किसानों ने मुख्यमंत्री से मिलने का फैसला लिया है।

    जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों ने भले ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अब किसानों को भी लगने लगा है कि नोएडा एक्सटेंशन का विवाद सुलझने में ही उनका भला है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मास्टर प्लान मंजूर होने के बाद ही एक्सटेंशन का रास्ता निकल सकता है। फ्लैट खरीदारों के बाद एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मास्टर प्लान मंजूर कराने की मांग किसान भी उठाने लगे हैं। मास्टर प्लान मंजूर नहीं होने के कारण किसानों को हाईकोर्ट के निर्देश पर 64.7 फीसद अतिरिक्त मुआवजा व दस फीसद विकसित भूखंड नहीं मिल पा रहा है। प्राधिकरण के पास किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए पैसा नहीं है।

    एक्सटेंशन का विवाद सुलझने के बाद बिल्डरों का निर्माण कार्य शुरू होगा, बिल्डर प्राधिकरण को किस्त देना शुरू करेंगे। प्राधिकरण को बैंक से कर्ज लेने का रास्ता खुल जाएगा। अब तक बैंकों ने भी कर्ज देने से हाथ खड़ा कर रखा है। मास्टर प्लान के कारण गांवों का भी विकास कार्य ठप पड़ा है। किसानों को अब लगने लगा है कि विकास कार्य बंद होने से उनका भी नुकसान हो रहा है। किसानों के हाथ जमीन निकल चुकी है, उस पर किसान अब खेती नहीं कर सकते हैं। अतिरिक्त मुआवजा मिलने पर किसान पैसे को दूसरे स्थानों पर निवेश कर सकते हैं। बैंक में भी अगर मुआवजे की रकम डाल देते हैं, उसका ब्याज हर महीने मिलता। मास्टर प्लान के कारण किसानों का हाथ भी पूरी तरह खाली है। किसान नेता मनवीर भाटी का कहना है कि किसानों को हक मिलना चाहिए। मास्टर प्लान मंजूर होने का विरोध नहीं है, बल्कि मास्टर प्लान को मंजूर करने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से मिलकर मास्टर प्लान के साथ अपनी अन्य समस्याएं रखेंगे।


    dainik jagran
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  • हाइवे की जमीन से हटाए लोगों को मिलेंगे प्लाट


    ग्रेटर नोएडा (NE) और राजमार्ग 24 को जोड़ने वाली सड़क से हटाए गए लोगों को जीडीए शीघ्र ही प्लाट आवंटित करने जा रहा है। इन प्लाटों का आवंटन ड्रा के माध्यम से किया जाएगा। उपाध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने बताया कि ड्रा के लिए चुनाव आयोग से अनुमति ले ली गयी है।

    उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोएडा और राजमार्ग 24 को जोड़ने के लिए करीब पांच सौ मीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस सड़क के बीच 187 परिवारों के मकान थे। इनके पुनर्वास के लिए जीडीए ने ग्रेटर नोएडा से भूमि की मांग की गयी थी। ग्रेटर नोएडा (NE) को कुल सात एकड़ जमीन देनी है। इनमें पहले चरण में करीब चार एकड़ जमीन ग्रेटर नोएडा ने दे दी है। इस भूमि को जीडीए को 187 परिवारों को देना है। आचार संहिता लगने के कारण लोगों को प्लाट आवंटित करने से पहले चुनाव आयोग से अनुमति मांगी गयी थी। आयोग से अनुमति मिलने के बाद ग्रेटर नोएडा से मिले चार एकड़ जमीन को 30, 45 व 60 मीटर के प्लाट में विभाजित किया गया है। ड्रा में 30 मीटर के 93, 45 मीटर के 75 तथा 60 मीटर के 19 प्लाट ड्रा द्वारा लोगों को आवंटित किए जाएंगे। संतोष कुमार यादव ने बताया कि इस रोड के बनने से ग्रेटर नोएडा (NE) और एनएच 24 जुड़ जाएगा। इससे एक्सप्रेस वे की ओर जाने वालों को नोएडा नहीं जाना पड़ेगा।


    -dainik jagran
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