पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • इस बार पिटारे में 7000 करोड़!

    इस बार पिटारे में 7000 करोड़!



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    नवभारत टाइम्स | Jun 14, 2012, 07.00AM IST
    प्रमुख संवाददाता
    नोएडा॥ नोएडा अथॉरिटी का सालाना बजट 22 जून को होने वाली बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा। बजट का खाका लगभग फाइनल हो चुका है। इस बजट में पिछले साल के मुकाबले 2000 करोड़ की बढ़ोतरी के प्रस्ताव का अनुमान है। इस हिसाब से यह बजट करीबी 7000 करोड़ का होगा। इसमें 2500 करोड़ रुपये हाई कोर्ट के आदेश पर किसानों को 64 पर्सेंट मुआवजे के रूप में देय होंगे। इस बजट में रेवेन्यू बढ़ाने के उद्देश्य से अथॉरिटी अपनी जमीन की दरें 10 से 12 परसेंट बढ़ाने की तैयारी में है। खास बात यह है कि पूर्व सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल के रखरखाव आदि पर सिर्फ टोकन मनी का ही प्रावधान रखा जा रहा है।

    अथॉरिटी के बजट को फाइनल टच देने में जुटे आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 31 मार्च 2012 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में 5075 करोड़ का बजट रखा गया था। चुनावी साल होने के कारण यह पूरी रकम अथॉरिटी खर्च ही नहीं कर पाई। चूंकि पिछला बजट पूरा खर्च नहीं हुआ था , इस लिहाज से 1 अप्रैल को शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष में भी तीन महीने तक अथॉरिटी पिछले बजट के खर्च से ही अपना काम चला रही है। अब 22 जून को प्रस्तावित बजट में लगभग 9 महीने के आधार पर खर्च व आय का प्रावधान किया जा रहा है।

    सूत्रों ने बताया कि अथॉरिटी के बजट में प्रस्तावित खर्च में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 3000 करोड़ , आउटर एजेंसियों के काम पर 700 करोड़ और किसानों को 64 पर्सेंट मुआवजे के रूप में 2500 करोड़ रुपये शामिल हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगाया जा रहा है। यह खर्च बॉटैनिकल गार्डन से कालिंदी कुंज तक और सिटी सेंटर से सेक्टर -62 तक के प्रोजेक्ट पर होगा। यमुना नदी पर प्रस्तावित नए पुल पर 40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अथॉरिटी इसी साल सेक्टर -35, सेक्टर -71 व सेक्टर -94 में अंडरपास पर काम शुरू करने का भी प्लान बना रही है। ग्राम विकास के कोटे में भी पिछले साल की तर्ज पर कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।

    navbharat
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  • मास्टर प्लान पास करने पर केंद्रीय मंत्री संग बैठक आज


    ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2021 को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी नहीं मिलने का असर किसानों पर भी पड़ने लगा है। बृहस्पतिवार को कई गांवों के किसान वाहनों में भरकर शहरी विकास मंत्री कमलनाथ के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे।

    किसानों ने कहा कि मास्टर प्लान पास नहीं होने की वजह से उनको 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा मिलना बंद हो गया है। अर्जित भूमि की एवज में दस प्रतिशत जमीन भी नहीं मिल रही है। प्राधिकरण ने आबादी निस्तारण का काम भी रोक दिया है। जिन किसानों को पूर्व में छह प्रतिशत जमीन का आवंटन हो चुका है, उनकी रजिस्ट्री रोक दी गई है। प्राधिकरण से समस्या निस्तारित करने की मांग की जाती है तो अधिकारी मास्टर प्लान पास नहीं होने की बात कहकर किसानों को वापस लौटा देते हैं।

    किसानों ने कहा कि मास्टर प्लान लटकने से सभी के कार्य के प्रभावित होने लगे हैं। क्षेत्र के विकास की खातिर इसमें अड़ंगा नहीं लगना चाहिए। किसान नेता प्रदीप यादव के मुताबिक, शहरी विकास मंत्री के ओएसडी आरके निगलानी से शुक्रवार पूर्वान्ह 11 का समय दिया है। किसानों की शहरी विकास मंत्री के साथ बैठक होगी। इसमें मास्टर प्लान पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि किसानों का प्रतिनिधिमंडल बाद में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के आवास पर भी पहुंचा और उनसे मिलने का समय मांगा। घर से बाहर होने की वजह से किसानों की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।


    dainik jagran
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  • प्राधिकरण बोर्डों की बैठक के लिए एजेंडे तैयार

    ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण के इतिहास में यह पहली बार है कि आठ माह से बोर्ड बैठक नहीं हो सकी है। वित्त वर्ष शुरू हुए ढाई माह हो चुका है, लेकिन बजट के बिना ही काम चलाया जा रहा है। अब 22 जून को बैठक बुलाई गई है। इसमें मुआवजे की वार्षिक वृद्धि भी होनी है।

    ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण ने बोर्ड बैठक के लिए एजेंडे तैयार कर लिए हैं। खासकर बजट पर ही काम किया जा रहा है। बैठक में कर्मचारियों की नौकरी की उम्र 58 से बढ़ाकर 60 साल करने का प्रस्ताव भी आएगा। ग्रेनो प्राधिकरण का बजट तो बनेगा, लेकिन पैसों की कमी के कारण फिलहाल उस पर अमल नहीं हो पाएगा। प्राधिकरण को पहले धन की व्यवस्था करनी है। इसके लिए पुराने सेक्टरों में कॉमर्शियल स्कीम लाने पर भी विचार हो रहा है।

    मास्टर प्लान 2021 के तहत जितने भी आवंटन हुए हैं, वहां कोर्ट के स्टे के कारण कोई योजना नहीं लाई जा सकती। यह जरूर है कि नोएडा एक्सटेंशन का विवाद समाप्त होते ही आवंटी किस्तें देने लगेंगे और मोटी रकम आ जाएगी। हालांकि प्राधिकरण ने विभिन्न स्रोतों से ऋण लेने की योजना बनाई है। बैठक में किसानों की आबादी के मामले भी रखे जाने हैं।

    यमुना प्राधिकरण के सामने समस्या है कि किसान कोर्ट जा चुके हैं और उसके फैसले का इंतजार है। प्राधिकरण ऑटो इंडस्ट्री लाने में भी लगा हुआ है। जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों से बात हो रही है। यहां ज्यादातर आवंटी समय पर किस्तें दे रहे हैं। आवासीय योजना में विकास कार्यों पर ध्यान दिया जा रहा है।

    Amar Ujala
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  • नोएडा एक्सटेंशन क्षेत्र के किसान गए दिल्ली

    नोएडा एक्सटेंशन मामले को लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की गतिविधियों की जानकारी लेने के लिए बृहस्पतिवार को क्षेत्र के किसान दिल्ली पहुंचे। वहां उनकी अफसरों से मुलाकात नहीं हो सकी। उन्हें शुक्रवार को बुलाया गया है। वहीं, किसान संगठन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मुलाकात का समय लेने के भी प्रयास में हैं।

    प्रदीप यादव के नेतृत्व में गए किसानों का प्रतिनिधिमंडल एनसीआर प्लानिंग बोर्ड पहुंचा। वहां बताया गया कि फिलहाल कोई सक्षम अधिकारी उपलब्ध नहीं है। उन्हें शुक्रवार को आने को कहा गया है। किसानों ने बोर्ड कर्मियों के समक्ष केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ से भी मुलाकात कराने की बात रखी। अफसरों ने उन्हें मुलाकात कराने का आश्वासन दिया।

    किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी ने बताया कि वह सपा मुखिया मुलायम से मिलने दिल्ली गए थे। उनके व्यस्त होने के चलते मुलाकात नहीं हो सकी। अधिकारियों ने उनकी मुलायम से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया है। किसान केंद्रीय मंत्री कमलनाथ और सपा सुप्रीमो मुलायम से मिलकर उन्हें समस्याएं बता उनका रुख जानना चाहते हैं।
    22 जून को प्रस्तावित है तीनों प्राधिकरण बोर्डों की बैठक

    Amar Ujala
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  • जांच के दायरे में आई स्पोर्ट्स सिटी परियोजना

    प्रदेश में निजाम बदलते ही प्राधिकरण अफसरों के रुख में भी बदलाव आ गया है। जो अफसर नोएडा एक्सटेंशन स्थित स्पोर्ट्स सिटी को शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण करार दे रहे थे, वही अब परियोजना की जांच में लगे हैं। बताया जा रहा है योजना के आवंटन से लेकर दरें तय करने और सुविधाएं देने को लेकर शासन और प्राधिकरण को कई तरह की शिकायतें मिली हैं। प्राधिकरण अध्यक्ष ने शिकायतों पर जांच के आदेश दिए हैं। स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट नोएडा एक्सटेंशन इलाके में बिसरख गांव के नजदीक है। मास्टर प्लान में पहले यह प्रोजेक्ट रीक्रेशनल ग्रीन था लेकिन बाद में उसे बदल कर स्पोर्ट्स सिटी कर दिया गया। 130 एकड़ के इस प्रोजेक्ट को लेकर प्राधिकरण अफसर और शासन को कई तरह की गंभीर शिकायतें मिली हैं।

    नोएडा की जिस कंपनी को यह प्रोजेक्ट आवंटित किया गया था मायावती सरकार में कंपनी की अच्छी पकड़ थी। प्राधिकरण अध्यक्ष राकेश बहादुर के आदेशों पर पहले बिल्डर कंपनी एसडीएस के प्रोजेक्ट एनआरआई रेजीडेंसी के खिलाफ जांच शुरू की गई और अब स्पोर्ट्स सिटी के खिलाफ भी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

    शासन को मिली शिकायतों में आरोप लगाए गए हैं कि स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट फाइव स्टार होटल और शापिंग काम्पलैक्स जैसी सुविधाएं दी गई हैं। दूसरी जगह यदि फाइव स्टार होटल आदि के प्लॉट बेचे जाते हो इन प्लॉटों की बिक्री से ही स्पोर्ट्स सिटी के बराबर कीमत वसूली जा सकती थी। स्पोर्ट्स सिटी परिसर में ही टाउनशिप बसाने की इजाजत दी गई। साथ ही एफएआर में इस कदर बढ़ाेत्तरी कर दी गई कि स्पोर्ट्स सिटी में बनने वाले टावर नोएडा एक्सटेंशन में सबसे ऊंचे बनाए जा सकेंगे। जानकारों का कहना है कि जिस कम्पनी को स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट आवंटित किया गया है उसके नाम अभी प्रोजेक्ट की लीज नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट के बारे में मिली शिकायतों को लेकर शासन भी बेहद गम्भीर है।

    Hindustan
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  • update
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  • Letter to GNIDA by NEFOMA

    To
    The Chief Executive Officer
    Greater Noida Industrial Development Authority,
    169, Chitvan Estate, Sector Gamma,
    Greater Noida – 201308 (U.P.)

    Subject : Information regarding status of Master Plan 2021 approval.

    Respected Sir,
    ...
    We NEFOMA (Noida Extension Flat Owners and Members Association) represent around two lacs flat buyers of Noida Extension. Due to delay and the uncertainty of the construction work of our flats, we are under huge financial burden from last one year. We have paid our hard-earned money to builders and paying loans and interests to the banks. Most of us are living in rented house. The mental agony has become intolerable now.

    Though the honorable high court in its judgment dt. 21st Oct ‘ 2011 clearly mentioned to allow the construction work in the area after taking due approval of Master Plan – 2021 from NCRPB, but the approval is yet to be cleared. In last eight months , we have observed that whenever GNIDA submits the master plan to NCRPB it returns pointing some mistake in it. As per the latest statement by NCRPB, we understand that the Master Plan was sent to NCRPB directly instead of sending it through the Urban Development Ministry, UP. Furthermore, they have also sought objection regarding density and the recreational green area and many more. In this regard we would like to request you to please take the matter very seriously and ensure that whatever have been pointed out by NCRPB should be incorporated in the Master Plan. We also request you to please discuss the matter with the UP and Central Govt. to get it resolved at the earliest.

    We have been also watching the agitation of farmers through the media. Still, why the farmers are standing against the authority / builders even after announcement of an increased compensation with a part of developed land in the area. In this regard we request you to kindly complete the disbursal of compensation as early as possible to avoid any complications in the start of construction of our flats.

    Finally, we would like to say that we flat buyers belong to low / middle income class. As further delay will endanger our dreams to have our homes and aggravate our financial problems too much.

    We request you on behalf of all Noida Extension flat buyers to take this matter sympathetically and on priority basis resolve this issue as early as possible and make all your effort to provide us the affordable house in Noida Extension.

    We buyers are eagerly waiting for your reply.


    Regards.

    On behalf of Noida Extension Flat Owners and Members Association (NEFOMA)

    Shweta Bharti
    General Secretary.
    Date : 15.06.2012
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  • This is just official figure..
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  • NE hearing in SC is on 13.08.2012

    SUPREME COURT OF INDIA

    Case StatusPENDING
    Status of : Special Leave Petition (Civil) 16339 -16341 Of 2012

    DHARAMPAL ETC.ETC. .Vs. STATE OF U.P.& ORS.

    Pet. Adv. : MR. S.K. SINHA Res. Adv. : MR. RAVINDRA KUMAR

    Subject Category : LAND ACQUISITION & REQUISITION MATTERS - MATTERS CHALLENGING THE ACQUISITION PROCEEDINGS

    This Case is connected to : Special Leave Petition (Civil) 30969 OF 2011

    Next Date of listing is : 13/08/2012

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  • What does this mean? Is it that next date will be listed on 13 August.. thats after 2 months?
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  • Originally Posted by deltaa
    What does this mean? Is it that next date will be listed on 13 August.. thats after 2 months?


    Exactly....as it is its vacation time for SC till first week of July
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  • Originally Posted by deltaa
    What does this mean? Is it that next date will be listed on 13 August.. thats after 2 months?


    ya next two months for hearing ...........not decision.

    i am very sure this will take a year-2012.
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  • I am Hopeless.......... No More investment in any Underproduction in UP.
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  • Buyers want action to avoid future obstacles


    NOIDA: Intensifying their campaign against Greater Noida Authority, homebuyers of Noida Extension on Friday wrote to the chairman, Rakesh Bahadur, requesting him to ensure early clearance of Master Plan 2021. Noida Extension Flat Owners and Members Association (NEFOMA) have asked for immediate settlement of issues related to farmers' compensations to avoid complications so that construction of flats can resume once the plan is cleared.

    Homebuyers have highlighted the objections raised by NCRPB and asked the Authority to rectify them. "NCRPB has objections regarding population density and recreational green area. We requested the chairman to ensure that things pointed out be incorporated in the Master Plan," said Devender Kumar, founder of NEFOMA.

    The planning board has raised objections to the provisions proposed by the Authority on projected population density of Greater Noida. The Authority, through its letter dated May 18 to NCRPB had proposed that "the density of group housing flats sold has been increased from 350 people per hectare (pph) to 700 pph and in the remaining unsold residential areas, the density proposed is 1,650 pph." The Authority had further written, "The effect of this will be that by 2031 the population shall increase to 28 lakh, as per study done by a consultant. The town density then shall become 126 pph."

    The population of Greater Noida, since its inception in 1991, has grown to around 1.3 lakh in a period of more than 20 years, even though the projected population for 2011 was 12.5 lakh. The planning board has raised doubts on claims made by the Authority that population would increase to 28 lakh by 2031.

    The issue of land acquired vis-a-vis projected population of Greater Noida has also been raised in a PIL due to be filed by farmers. "Projecting a population of 12.5 lakh by 2021, the Authority acquired massive tracts of land. While population did not cross the 1.5 lakh mark, land acquired from farmers was sold to developers, thereby turning Greater Noida into a vast speculative property market," said farmers' counsel, Parmindera Bhati. "As its population did not grow to match its claims made in Master Plan 2021, the Authority is now trying to justify its case on the basis of projected population figures for 2031," he added.

    While the Authority has modified the green area cover in the draft Master Plan, marking 'Institutional Green' as a separate category, the planning board has raised objections to this change too.

    Buyers want action to avoid future obstacles - The Times of India
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  • नौ माह से घूम रही मास्टर प्लान की फाइल


    ग्रेटर नोएडा : नोएडा एक्सटेंशन का टेंशन अब राजनीतिक दांवपेंच में फंस चुका है। मास्टर प्लान 2021 को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूर कराने के लिए नौ माह से प्रयास चल रहा है। मास्टर प्लान मंजूर होने के बजाय फाइल प्राधिकरण, शासन व एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में घूम रही है। आशियाने की चाहत में जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई लगा चुके लाखों निवेशक समझ नहीं पा रहे हैं कि मास्टर प्लान मंजूर होने में कहां पर अड़चन आ रही है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से लेकर प्राधिकरण, केंद्र व प्रदेश सरकार से निवेशक गुहार लगा चुके हैं। हर जगह से उन्हें दूसरे विभाग की कमी बता कर टरकाया जा रहा है।

    नोएडा एक्सटेंशन का विवाद बसपा सरकार से चली आ रही है। प्रदेश में नई सरकार का गठन होने के बाद 21 अप्रैल को दिल्ली में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में बैठक हुई थी। इसमें केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ व प्रदेश सरकार की तरफ से प्रोटोकाल मंत्री अभिषेक मिश्रा ने भाग लिया था। उस समय एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने मास्टर प्लानिंग 2021 में किसी प्रकार की कमी से इंकार करते हुए प्रदेश सरकार से इस पर राय मांगी थी। प्रदेश सरकार ने एक महीने बाद मास्टर प्लान पर बिना आपत्ति लगाए वापस एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को भेज दिया। इसके बाद एक्सटेंशन के एक लाख निवेशकों, बिल्डरों व किसानों में भी उम्मीद की किरण जगी कि मास्टर प्लान जल्द मंजूर हो जाएगा। इसके बाद नोएडा एक्सटेंशन की रौनक लौट आएगी। 22 मई को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक होनी थी, लेकिन तकनीकी कारण बता कर बैठक को आगे टाल दिया गया। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक कब होगी, यह तय नहीं है।

    आठ जून को नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर एंड मेंबर एसोसिएशन ने एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के कार्यालय पर प्रदर्शन करने पहुंचे तो तब उन्हें जानकारी मिली कि मास्टर प्लान पर कुछ आपत्ति लगाकर प्रदेश सरकार को भेज दिया गया है। उन आपत्तियों को दूर करके प्राधिकरण ने मास्टर प्लान को वापस एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को भेज दिया। प्लानिंग बोर्ड ने छह जून को यह कहते हुए मास्टर प्लान को वापस भेज दिया कि प्राधिकरण के बजाय प्रदेश सरकार से होकर आना चाहिए था। मास्टर प्लान पर एनसीआर प्लानिंग को दो सवालों को लेकर आपत्ति है, पहला यह है कि एक्सटेंशन के छोटे से इलाके में 12.5 लाख की संभावित आबादी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की क्या व्यवस्था है? दूसरा स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, पीने के पानी, सीवर लाइन और सड़कों की क्या व्यवस्था होगी? सवाल यह उठता है कि नौ महीने तक एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने इन पर क्यों नहीं आपत्ति जाहिर की। प्राधिकरण ने इन आपत्तियों को दूर करने का प्रयास क्यों नहीं किया। नेफोमा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि मास्टर प्लान को लेकर प्राधिकरण, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड, प्रदेश सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं, राजनीतिक दांव पेच के चलते मास्टर प्लान को लटकाया जा रहा है।

    Dainik Jagran
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