पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • हाई कोर्ट में डेट टलने से सब निराश



    ग्रेटर नोएडा ।। जमीन अधिग्रहण मसले पर हाई कोर्ट में सुनवाई टलने से ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का वित्तीय संकट बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर, बिल्डर जल्द से जल्द निर्णय चाहते हैं ताकि प्रोजेक्ट को तय वक्त पर पूरा किया जा सके। निवेशक भी असमंजस की स्थिति से बाहर निकलना चाहते हैं।

    पतवाड़ी के ज्यादातर किसानों से समझौता होने के बाद अथॉरिटी अफसरों को उम्मीद थी कि सोमवार को ऐसा फैसला आ जाएगा जिससे उन्हें राहत मिल जाएगी। अफसरों के मुताबिक, फैसला आने में जितना ज्यादा वक्त लगेगा, अथॉरिटी को उतना ही वित्तीय संकट से जूझना होगा। अफसरों ने बताया कि अथॉरिटी पर बैंकों का 3.5 हजार करोड़ रुपये का लोन है।

    बैंकों का ब्याज भी बढ़ता जा रहा है। नोएडा एक्सटेंशन में जब तक असमंजस की स्थिति रहेगी तब तक अथॉरिटी को बिल्डरों और अलॉटियों से किस्त या ब्याज मिलने में परेशानी होगी। दूसरी ओर, अगर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया गया तो ब्याज और बढ़ता जाएगा। सुनवाई टलने से बिल्डरों और निवेशकों में भी मायूसी है।

    उन पर भी बैंकों का ब्याज बढ़ता जा रहा है। प्रोजेक्ट लेट होने से उसकी लागत भी बढ़ती जा रही है। आम्रपाली ग्रुप के चेयरमैन अनिल शर्मा का कहना है कि प्रोजेक्ट जितना लेट होगा, लागत उतनी ही बढ़ती जाएगी। निवेशक भी नोएडा एक्सटेंशन में बुकिंग कराकर परेशान हैं। पतवाड़ी में आम्रपाली के प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराने वाले पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट मनीष सिंह का कहना है कि जब तक इस मामले में हाई कोर्ट का फैसला नहीं आता, तब तक असमंजस की स्थिति बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर वह नोएडा एक्सटेंशन के बाहर किसी अन्य प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट करते तो उन्हें अच्छा मुनाफा मिल जाता।

    -navbharat times
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  • नोएडा एक्सटेंशन पर सुनवाई 12 सितंबर तक टली


    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार को नोएडा एक्सटेंशन मामले की सुनवाई 12 सितंबर तक के लिए टाल दी। हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी ( GNIDA ) से कहा है कि सैंकड़ों किसानों द्वारा दायर याचिकाओं पर जवाबी हलफनामा दायर करें। किसानों ने ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन में विकास के लिए तीन हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि के अधिग्रहण को चुनौती दी है। इसके चलते इस इलाके में बहुत से बिल्डरों के प्रॉजेक्ट अटक गए हैं और हजारों लोगों के घरों का सपना अधर में लटक गया है.

    किसानों द्वारा दायर 491 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही जस्टिस अशोक भूषण, एसयू खान और वी.के. शुक्ला की पीठ ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 12 सितंबर तय की है।

    याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने इमर्जेंसी क्लॉज लगाकर उनकी जमीन का अधिग्रहण किया जिससे वे इसके खिलाफ आपत्ति उठाने और पर्याप्त मुआवजे के लिए सौदेबाजी करने के मौके से महरूम रह गए। किसानों ने याचिका में कहा है कि बाद में जमीन हाउसिंग प्रॉजेक्ट बनाने लिए प्राइवेट बिल्डरों को बेच दी गई जबकि अधिग्रहण ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन के 'योजनाबद्ध औद्योगिक विकास' के नाम पर किया गया था। इसके अलावा बहुत से बिल्डरों और फ्लैट खरीदारों ने भी अर्जी दायर कर गुजारिश की थी कि मामले में उन्हें भी पक्ष बनाया जाए क्योंकि इस मामले में आने वाले किसी भी आदेश का असर उन पर पड़ने की संभावना है।

    अदालत ने हालांकि इन अर्जियों पर कोई आदेश नहीं दिया। अदालत ने कहा, 'अधिग्रहित जमीन के सभी आवंटी अगली सुनवाई की तारीख तक अपने हलफनामे दायर करने के लिए आजाद हैं।'

    अदालत ने यह भी कहा कि 12 सितंबर से यह पहले ही दायर की जा चुकी 491 याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगी और मामले से संबंधित नई याचिकाओं को अलग रखकर उन पर अलग से सुनवाई की जाएगी, ताकि अन्य याचिकाओं पर फैसले में देरी नहीं हो।

    ग्रेटर नोएडा के नाराज किसान तभी से हाई कोर्ट आ रहे हैं जब अदालत ने शाहबेरी गांव में 150 हेक्टेयर से अधिक जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया और बाद में इस फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।


    -navbharat times
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    शासन-अथारिटी को नोटिस

    ग्रेटर नोएडा नोएडा एक्सटेंशन समेत कई गांवों के जमीन अधिग्रहण मामले की इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई टल जाने पर निवेशकों, बिल्डरों व प्राधिकरण की चिंता बढ़ गई है। कोर्ट इस मामले में 12 सितंबर से एक-एक गांव की लगातार सुनवाई करेगा। इसके बाद ही कोई फैसला आएगा। ऐसे में बिल्डरों, निवेशकों व प्राधिकरण का इंतजार लंबा हो गया है। नोएडा एक्सटेंशन में उनके अरबों रुपये फंसे हुए हैं।

    नोएडा एक्सटेंशन के पतवाड़ी समेत करीब 24 गांवों के लगभग चार सौ किसानों ने जमीन अधिग्रहण को लेकर हाई कोर्ट में याचिकाएं डाल रखी हैं। इनमें नोएडा एक्सटेंशन के 11 गांव भी शामिल हैं। सोमवार को हाई कोर्ट की बड़ी बेंच में सभी गांवों की सुनवाई थी। कोर्ट ने 11 सिंतबर तक सुनवाई टाल दी है। 12 सितंबर से एक-एक गांव की सुनवाई करने के बाद कोर्ट फैसला देगा।

    सोमवार को निवेशकों, बिल्डरों, किसानों व प्राधिकरण को बेसब्री से कोर्ट के फैसले का इंतजार था। सुनवाई आगे टल जाने से लोगों को निराशा हाथ लगी है। नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों की डेढ़ दर्जन परियोजनाएं फंसी हुई हैं। हाई कोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने साबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद किया था। तभी से नोएडा एक्सटेंशन में सभी बिल्डरों के प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य बंद हो गया था। नोएडा एक्सटेंशन में करीब एक लाख लोगों ने बिल्डरों से फ्लैट बुक करा रखे हंै। बिल्डरों का प्रोजेक्ट बंद होने से निवेशकों के मकान का सपना अधर में लटक गया और उनका करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं। जमीन अधिग्रहण के बदले प्राधिकरण को बिल्डरों व आवंटियों से मिलने वाली करोड़ों रुपये की किश्त भी लटक गई है। सोमवार को हाई कोर्ट की बड़ी बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्राधिकरण से 15 दिन के अंदर जवाब मांगा है कि इमर्जेसी क्लॉज लगाने की जरूरत क्यों पड़ी? प्राधिकरण अब कोर्ट में जवाब दाखिल करने की तैयारी में जुट गया है। ऐसे में बिल्डरों, निवेशकों, किसानों व प्राधिकरण को 12 सितंबर तक और इंतजार करना पड़ेगा।

    -Dainik jagran


    Mujhe to ab aisa lag raha hai ke, Kisano ke favor mein decision hoga ,, ab bahut mushkil lag rahe hai , kyun ke same he decision hoga jaisa supreme court ne diya hai Shaberi Gaon ke liye, builder se ab sab paise waapes lene ke tayaree karlo ab to.
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  • Daily BP check from 12th :D
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  • HC to hear Noida cases from Sept 12

    The Allahabad High Court on Monday asked the UP government,Noida and Greater Noida authorities,builders and others to file counter-affidavits on hundreds of petitions filed by farmers challenging acquisition of more than 3,000 hectares of land in Greater Noida and Noida Extension areas.

    A full bench of the court comprising Justice Ashok Bhushan,Justice S U Khan and Justice V K Shukla,which is hearing about 491 petitions filed by farmers,fixed September 12 as the next date of hearing in the matter.
    Specially constituted to hear the cases pertaining to land acquisition in Noida and Greater Noida areas,the bench will hear petitions on a day-to-day basis.

    Declining impleadment applications moved by several builders and flat buyers whowantedtobe made a party,the bench directed the builders to file affidavits in all writ petitions in the capacity of interveners.The farmers opposed the impleadment applications on the plea that the Supreme Court has already refused builders to be impleaded as parties in the writ petitions.In case of Patwari village in Gautam Budh Nagar,of 1,600 farmers,1,200 have received compensation and signed karar (agreement ) after the cases were referred to the larger bench.The state government and development authorities are pursuing the remaining 400 to take better compensation and sign agreements.

    The petitioners have contended that their land was acquired by the state government by invoking the urgency clause of the Land Acquisition Act that has deprived them of an opportunity to raise objections and bargain for adequate compensation.

    Also,the land was sold to private builders for constructing housing complexes even though the acquisition was done in the name of planned industrial development of Greater Noida and Noida Extension areas.
    Though the court didnt pass an order on the applications,it observed all the allottees of the acquired land were free to file affidavits by the next date of hearing.

    The court also said that from September 12 onwards,it would proceed with hearing on the 491 petitions that have already been filed and any new petition relating to this matter shall be kept aside and heard separately so that decision on other petitions is not delayed.

    Farmers from Gautam Budh Nagar have been moving the High Court in droves ever since it quashed the acquisition of more than 150 hectares of land in Shahberi village and subsequently an appeal filed by the state government challenging the order was set aside by the Supreme Court.

    -TOI
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  • If need be, will offer Patwari-like package to others: Greater Noida CEO

    With the Allahabad High Court deciding to hear cases of land acquisition in Greater Noida regularly from September 12, the Greater Noida Authority has decided to strengthen its case that the acquisitions were done legally, in good spirit and for development of the region.

    If the need arises, the Authority said it was ready to offer a revised compensation package just as it had done in the case of Patwari village.

    Greater Noida Authority CEO Rama Raman said that after 1,200 villagers accepted the revised package, they have the nod from most villagers for a settlement. “We will have to focus on proving the legality and justification for land acquisition before the Allahabad High Court. If the larger bench gives us time to do a settlement with villagers, we will do that just as in Patwari,” he said. Raman said there are sectors where people have begun living and it will be difficult to evict them if there are orders to return and reacquire land.

    “We have done development in the region which has also benefited farmers. We have developed residential colonies, many people have found homes in Greater Noida. We too have invested in making the place fit for industrial and residential development,” Raman said.

    Meanwhile, Manoj Gaur, president of CREDAI, said every investor and builder will file a counter-affidavit in court. “Our advocate will be finalising the counter-affidavit. We are glad that the larger bench has decided to hear us. It is not just farmers whose interests have been hit,” said Gaur. More than 30 villages of Greater Noida have approached the court against land acquisition.

    -Indian Express
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  • Can anybody confirm the procedure of filling Counter affidavit by the buyer.
    1. Where to file?
    2. What is the language?
    3. How can the people situted outside NCR can file?
    4. What will be the implication?
    5,. Does every body need to file the same?
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  • a ray of hope

    somehow i believe (may b b'coz i m an effected buyer) dat if u read in between the lines in the court's order i smell that even after the farmers case being the same as for earlier court verdict of de-notification....the court is taking time and trying to find solution which can b of benefit to all d effected parties.
    Court has asked the authority to submit the details of the progress along with the counter affidavit by authority, builder n buyer. this shows dat court is being lenient and not looking for the same veridict as in earlier cases.
    hope i m smelling right....
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  • Originally Posted by Dsrivastava
    somehow i believe (may b b'coz i m an effected buyer) dat if u read in between the lines in the court's order i smell that even after the farmers case being the same as for earlier court verdict of de-notification....the court is taking time and trying to find solution which can b of benefit to all d effected parties.
    Court has asked the authority to submit the details of the progress along with the counter affidavit by authority, builder n buyer. this shows dat court is being lenient and not looking for the same veridict as in earlier cases.
    hope i m smelling right....


    You are smelling right:bab (20):

    The advocate for the petitioner tried to assail the reference made by division bench consisting of Hon'ble Mr. Justices Amitabh Lala and Ashok Srivastav vide order dated 26.7.2011. The Hon'ble Court rejected such plea and said that in view of the directions issued by the Hon'ble Chief Justice and further in view of the constitution of the larger bench, this bench would be justified in hearing the entire matter.
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  • This judgement will be deciding factor for all other judgements.. thats why court will see all cases one by one.. and provide judgement accordingly.. not like... quashing land acquisition at one go..
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  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम पहुंची प्राधिकरण कार्यालय


    ग्रेटर नोएडा: जमीन अधिग्रहण की करार नियमावली के बारे में जानकारी प्राप्त करने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम मंगलवार को यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण कार्यालय पहुंची। मुख्य कार्यपालक अधिकारी पंधारी यादव के मौजूद नहीं होने पर टीम ने डिप्टी कलेक्टर व तहसीलदार से करार नियमावली के बारे में जानकारी हासिल की।
    यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण कार्यालय में मंगलवार को 11 बजे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से सीईओ कार्यालय में एक फैक्स पहुंचा। इसमें मानवाधिकार आयोग ने अलीगढ़ में जमीन अधिग्रहण को लेकर एक किसान की शिकायत पर सीईओ से जानकारी देने के लिए कहा गया। सीईओ कार्यालय में फैक्स पहुंचने के करीब पंद्रह मिनट बाद मानवाधिकार आयोग के पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में एक टीम प्राधिकरण कार्यालय पहुंच गई। सीईओ के अवकाश पर होने के कारण टीम ने डिप्टी कलेक्टर संत कुमार व तहसीलदार से जमीन अधिग्रहण के करार नियमावली के बारे में जानकारी हासिल की। टीम ने अधिकारिक तौर पर कोई जानकारी देने से मना कर दिया

    -Dainik Jagran
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    You are smelling right:bab (20):

    The advocate for the petitioner tried to assail the reference made by division bench consisting of Hon'ble Mr. Justices Amitabh Lala and Ashok Srivastav vide order dated 26.7.2011. The Hon'ble Court rejected such plea and said that in view of the directions issued by the Hon'ble Chief Justice and further in view of the constitution of the larger bench, this bench would be justified in hearing the entire matter.

    Why do people forget that HC, Allahabad is not the final frontier. What ever the decision of the HC in current matters, it would be 100% challenged in the Supreme Court. And all of "us" know the direction in which Supreme Court is now a days delivering the judgements which is in favor of farmers (like it did in Shaberi).

    This is a WAR. Current battle is in Allahabad High Court. But the outcome of the WAR would be decided in the Supreme Court and that would take couple of more quarters i.e. 4-6 months.

    And going by the judgement given by SC in Shaberi case, I am not very hopeful of a positive outcome in favor of builders.

    The projects of NE are sure shot delayed by 1-2 years with a big question mark on the quality of the final delivered product.
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  • On Aajtak news ticker today.. I saw HC cancelled land acqusition of 2 projects in Gaziabad and Mathura and put fine 1 crore on builder.
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  • Yes, it is right that issue will finally be settled by SC only. No matter what Allahabad HC decides, conclusion can be reached only after the SC judgement.

    But things are difference now. SC might have given judgement in Shahberi case considering it one off case of land acquisition. However, things are different now on account of numerious petitions filed after SC judgement. As Allahabad HC has already observed that it now has an additional duty of finding who are actually aggrieved parties and who are just trying to exploit the current situation.

    Besides, current petitions now involve pieces of land which was acquired many years back and where substantial development has taken place and on some pieces of land people have also started living. It will be really tough task for the court to set a benchmark to decide various cases. I am of the opinion that the court now can not annual acquisition merely on the ground that land was acquired using urgency clause without due justification for invoking urgency clause because if it is considered a sole ground, the future of entire Greater Noida and big part of Noida will be at stake and the court will be flooded with plothera of petitions.

    It will be really intersting to see what the court decides in the cases with following facts.

    1. Laches i.e. petition filed years(even 2-3 years or more) after the land was acquired

    2. Substantial development or entire development activities have taken place.






    Originally Posted by sanjeevchaudhri
    Why do people forget that HC, Allahabad is not the final frontier. What ever the decision of the HC in current matters, it would be 100% challenged in the Supreme Court. And all of "us" know the direction in which Supreme Court is now a days delivering the judgements which is in favor of farmers (like it did in Shaberi).

    This is a WAR. Current battle is in Allahabad High Court. But the outcome of the WAR would be decided in the Supreme Court and that would take couple of more quarters i.e. 4-6 months.

    And going by the judgement given by SC in Shaberi case, I am not very hopeful of a positive outcome in favor of builders.

    The projects of NE are sure shot delayed by 1-2 years with a big question mark on the quality of the final delivered product.
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  • Originally Posted by stpdcomonman
    Yes, it is right that issue will finally be settled by SC only. No matter what Allahabad HC decides, conclusion can be reached only after the SC judgement.

    But things are difference now. SC might have given judgement in Shahberi case considering it one off case of land acquisition. However, things are different now on account of numerious petitions filed after SC judgement. As Allahabad HC has already observed that it now has an additional duty of finding who are actually aggrieved parties and who are just trying to exploit the current situation.

    Besides, current petitions now involve pieces of land which was acquired many years back and where substantial development has taken place and on some pieces of land people have also started living. It will be really tough task for the court to set a benchmark to decide various cases. I am of the opinion that the court now can not annual acquisition merely on the ground that land was acquired using urgency clause without due justification for invoking urgency clause because if it is considered a sole ground, the future of entire Greater Noida and big part of Noida will be at stake and the court will be flooded with plothera of petitions.

    It will be really intersting to see what the court decides in the cases with following facts.

    1. Laches i.e. petition filed years(even 2-3 years or more) after the land was acquired

    2. Substantial development or entire development activities have taken place.

    Courts never base their judgement on the infrastructural progress made over a disputed land.

    They go by the case at their hand, which in this case is to decide if the application of URGENCY clause was valid or not.

    Mainly, its a dispute between AUTHORITY and farmers.

    And with ANNA effect, and recent decisions of Allahabad HC and SC in favor of farmers, I am not very hopeful.

    The current bench of SC is very strict and honest.

    HC judges also have an ambition to become SC judges. They have to give impartial judgements which are in line with peers (judgements being given by other HC judges, like the one's given for Gaziabad, GN and Mathura land) and also those given by SC (like Shaberi).

    If they give some decision which is way-off, they would be dimming their name and reputation and chance to be elevated to SC.
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