पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
Read more
Reply
16355 Replies
Sort by :Filter by :
  • Congratulations

    Many congratulation to all NE buyers.............lets hope that no more twists and hurdels are on the way........
    CommentQuote
  • नोएडा एक्सटेंशनः सुप्रीम कोर्ट में अगले महीने हो सकती है सुनवाई

    नई दिल्ली।। नोएडा एक्सटेंशन इलाके के गांवों के किसानों की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में जुलाई में सुनवाई हो सकती है। इलाके के घोड़ी बछेड़ा सहित कई गांवों के किसानों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। इस मामले में यूपी सरकार व अन्य प्रतिवादियों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर रखा है।

    घोड़ी बछेड़ा, हल्दाना, दुगलपुर सहित कई गांवों के किसानों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने वाले वकील ललन सिंह ठाकुर ने बताया कि करीब तीन दर्जन गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण रद्द करके जमीन वापस दिलाने की मांग की है।

    किसानों की अर्जी में कहा गया है कि सरकार ने जमीन का अधिग्रहण इंडिस्ट्रयल डिवेलपमेंट के नाम पर अर्जेंसी क्लॉज के तहत किया, लेकिन उस जमीन को बिल्डर के हाथों बेच दिया। किसानों को अधिग्रहण के एवज में काफी कम मुआवजा दिया गया, जबकि सरकार ने ऊंची कीमत हासिल की।

    ठाकुर के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किसानों की मुआवजा राशि 66.75 पर्सेंट बढ़ाने का निर्देश दिया था, साथ ही किसानों को विकसित जमीन का 10 पर्सेंट हिस्सा भी देने को कहा था। हाई कोर्ट ने जो कहा, उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, क्योंकि किसानों ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग नहीं की थी, बल्कि उनकी मांग जमीन वापस दिलाने की थी।

    Navbharat times
    CommentQuote
  • नोएडा एक्सटेंशन की बड़ी टेंशन दूर


    आठ महीने के इंतजार के बाद ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के मास्टर प्लान 2021 को गुरुवार को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की टेक्निकल कमिटी ने मंजूरी दे दी। हालांकि कमिटी ने अथॉरिटी के सामने 6 शर्तें रखी हैं।

    इनके आधार पर ही शहर विकसित करना होगा। यहां से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद मास्टर प्लान को बोर्ड से मंजूरी मिलनी बाकी रह गई है। गुरुवार को आए फैसले से निवेशकों, किसानों और अथॉरिटी ने राहत की सांस ली है।

    मास्टर प्लान 2021 के अप्रूवल को लेकर गुरुवार को बोर्ड के दिल्ली ऑफिस में टेक्निकल कमिटी की मीटिंग हुई। मीटिंग में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ रमा रमण और जीएम प्लानिंग लीनू सहगल शामिल हुईं।

    अथॉरिटी ने कमिटी के सामने मास्टर प्लान का प्रजेंटेशन दिया। अथॉरिटी के सीईओ का कहना है कि मास्टर प्लान के अप्रूवल के लिए अब इसे एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। इस बोर्ड में 21 सदस्य हैं। बोर्ड से अप्रूवल मिलने में 15 से 20 दिन लगेंगे।

    शर्तें और संभावनाएं
    1. वाटर सप्लाई, सीवरेज, ड्रेनेज, पावर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को नॉर्म्स के मुताबिक रखना होगा
    अथॉरिटी का जवाब :
    बिजली के लिए जिले की तीनों अथॉरिटी और यूपीपीसीएल ने मिलकर यमुना पावर जनरेशन कंपनी बनाई है। यह 2000 मेगावॉट बिजली पैदा करेगी। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए अथॉरिटी प्लान बना चुकी है और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से लोन भी मांगा है।

    2. अबर्न एरिया का 16 पर्सेंट ग्रीन बेल्ट के रूप में रखना और मेंटेन करना होगा। अथॉरिटी ग्रीन एरिया को शिफ्ट नहीं करेगी।
    अथॉरिटी का जवाब :
    मास्टर प्लान में 22.10 पर्सेंट ग्रीनरी पहले से ही है। दादरी में ग्रीनरी बढ़ाई जा सकती है।

    3. अथॉरिटी की रेजिडेंशल स्कीमों में गरीबों और मिडिल क्लास फैमिली के लिए 20-25 पर्सेंट छोटे प्लॉट या मकान रिजर्व रखने होंगे।
    अथॉरिटी का जवाब :
    अथॉरिटी नोएडा एक्सटेंशन में लो बजट फ्लैट बना चुकी है। हर सेक्टर में पहले से ही लो बजट फ्लैट मौजूद हैं। यह व्यवस्था हर सेक्टर में होगी। यूपी सरकार ने इसके लिए 5 दिन पहले निर्देश भी दिए हैं। अथॉरिटी लो बजट फ्लैटों की स्कीम लाने की योजना बना रही है।

    4. नॉन पॉल्यूटिंग क्लीन टेक्नॉलॉजी इंडस्ट्री के लिए प्लॉट रिजर्व रखना होगा।
    अथॉरिटी का जवाब :
    ऐसी इंडस्ट्रीज के लिए मास्टर प्लान में जगह चिह्नित करने में दिक्कत नहीं है। हालांकि इस तरह की इंडस्ट्री लगवाने के लिए अथॉरिटी के अफसरों को काफी मेहनत करनी होगी। निवेश के लिए ऐसी कंपनियों को बेहतर माहौल देना होगा और शर्तों में लचीलापन भी लाना होगा, जिसकी उम्मीद कम है।

    5. अथॉरिटी का एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट पार्ट मास्टर प्लान का हिस्सा होगा।
    अथॉरिटी का जवाब :
    एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट प्लान को मास्टर प्लान में शामिल करना अथॉरिटी के हाथ में है। आसानी से ऐसा किया जा सकता है।

    6. मेट्रो, एमआरटीएस और नया एक्सप्रेस वे बनाना होगा।
    अथॉरिटी का जवाब :
    मेट्रो के लिए पहले ही दो रूट प्रस्तावित हैं। पहला - नोएडा से भंगेल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे, परी चौक और बोड़ाकी तक है। दूसरा - 130 मीटर एक्सप्रेस वे के किनारे से नोएडा एक्सटेंशन होते हुए नोएडा तक है। ये दोनों पहले से ही मास्टर प्लान में हैं। 130 मीटर एक्सप्रेस वे का निर्माण चल रहा है। मेट्रो के पहले रूट के किनारे से एक और एक्सप्रेस वे की योजना बनाई जा रही है।

    Navbharat times
    CommentQuote
  • GREATER NOIDA: With the planning committee of the NCR Planning Board giving a nod to the Greater Noida Master Plan 2021, all stakeholders in Noida Extension feel that a giant burden has been lifted off their shoulders. For the first time in over a year, the one lakh homebuyers, Greater Noida Authority, farmers and developers are thinking on the same lines — redressal of grievances at the earliest.

    However, along with the good news, there's also a bad one. Developers say that while old buyers will remain unaffected, new ones will have to shell out almost double the rates as property prices have shot up as compared to last year.

    Greater Noida Authority CEO, Rama Raman, said that his first priority will be addressing the grievances of all farmers whose lands have been acquired.

    The most elated are members of the Noida Extension Flat Owners and Members Association who have been fighting for their right ever since the land row started. "We will meet Authority officials next week to discuss farmers' grievances since we had joined hands with them to fight this battle," said Abhishek Kumar of the buyers' body.

    However, farmers are still an apprehensive lot. "The issue is a multi-layered one. Land in eight of the 11 villages in the area has been denotified by the court. Cases in more than 40 villages are currently pending in court. So how can the Master Plan be passed without first addressing these matters?" asked farmer leader Dushyant Nagar, a member of Kisan Sangharsh Samiti. Farmers of 11 villages will convene a mahapanchayat on July 1 to decide their next course of action.

    Apart from buyers, this move comes as a major relief to developers whose investments have been tied in the projects without any earnings. Supertech chairman and managing director, RK Arora, said, "We hope to resume construction by July end." Developers have also started sharing this news with homebuyers. "This win would not have been possible without the patience of homebuyers who supported us throughout the land row," said Mohit Arora, director, Supertech.

    While director of Gaursons, Manoj Gaur, said that this is a vital win in favour of buyers and the realty industry, Amrapali Group CMD, Anil Gupta hoped to hand over flats to buyers within a new timeframe. "This decision will improve the image of Greater Noida and Noida Extension. The land row had brought a negative impact in the region," said Orris infrastructures managing director, Amit Gupta.
    CommentQuote
  • CommentQuote
  • Guys


    Its not Noida Extension Master Plan, Its Greater Noida Msster Plan.

    Noida Extension is part of Greater Noida, Anyhow Greater Noida Master Plan had to be approved. There are many areas of Greater Noida where there is no farmer issue. And once MP is passed development would take place.
    CommentQuote
  • Originally Posted by fritolay_ps
    नोएडा एक्सटेंशन की बड़ी टेंशन दूर


    आठ महीने के इंतजार के बाद ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के मास्टर प्लान 2021 को गुरुवार को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की टेक्निकल कमिटी ने मंजूरी दे दी। हालांकि कमिटी ने अथॉरिटी के सामने 6 शर्तें रखी हैं।

    इनके आधार पर ही शहर विकसित करना होगा। यहां से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद मास्टर प्लान को बोर्ड से मंजूरी मिलनी बाकी रह गई है। गुरुवार को आए फैसले से निवेशकों, किसानों और अथॉरिटी ने राहत की सांस ली है।

    मास्टर प्लान 2021 के अप्रूवल को लेकर गुरुवार को बोर्ड के दिल्ली ऑफिस में टेक्निकल कमिटी की मीटिंग हुई। मीटिंग में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ रमा रमण और जीएम प्लानिंग लीनू सहगल शामिल हुईं।

    अथॉरिटी ने कमिटी के सामने मास्टर प्लान का प्रजेंटेशन दिया। अथॉरिटी के सीईओ का कहना है कि मास्टर प्लान के अप्रूवल के लिए अब इसे एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। इस बोर्ड में 21 सदस्य हैं। बोर्ड से अप्रूवल मिलने में 15 से 20 दिन लगेंगे।

    शर्तें और संभावनाएं
    1. वाटर सप्लाई, सीवरेज, ड्रेनेज, पावर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को नॉर्म्स के मुताबिक रखना होगा
    अथॉरिटी का जवाब : बिजली के लिए जिले की तीनों अथॉरिटी और यूपीपीसीएल ने मिलकर यमुना पावर जनरेशन कंपनी बनाई है। यह 2000 मेगावॉट बिजली पैदा करेगी। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए अथॉरिटी प्लान बना चुकी है और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से लोन भी मांगा है।

    2. अबर्न एरिया का 16 पर्सेंट ग्रीन बेल्ट के रूप में रखना और मेंटेन करना होगा। अथॉरिटी ग्रीन एरिया को शिफ्ट नहीं करेगी।
    अथॉरिटी का जवाब : मास्टर प्लान में 22.10 पर्सेंट ग्रीनरी पहले से ही है। दादरी में ग्रीनरी बढ़ाई जा सकती है।

    3. अथॉरिटी की रेजिडेंशल स्कीमों में गरीबों और मिडिल क्लास फैमिली के लिए 20-25 पर्सेंट छोटे प्लॉट या मकान रिजर्व रखने होंगे।
    अथॉरिटी का जवाब : अथॉरिटी नोएडा एक्सटेंशन में लो बजट फ्लैट बना चुकी है। हर सेक्टर में पहले से ही लो बजट फ्लैट मौजूद हैं। यह व्यवस्था हर सेक्टर में होगी। यूपी सरकार ने इसके लिए 5 दिन पहले निर्देश भी दिए हैं। अथॉरिटी लो बजट फ्लैटों की स्कीम लाने की योजना बना रही है।

    4. नॉन पॉल्यूटिंग क्लीन टेक्नॉलॉजी इंडस्ट्री के लिए प्लॉट रिजर्व रखना होगा।
    अथॉरिटी का जवाब : ऐसी इंडस्ट्रीज के लिए मास्टर प्लान में जगह चिह्नित करने में दिक्कत नहीं है। हालांकि इस तरह की इंडस्ट्री लगवाने के लिए अथॉरिटी के अफसरों को काफी मेहनत करनी होगी। निवेश के लिए ऐसी कंपनियों को बेहतर माहौल देना होगा और शर्तों में लचीलापन भी लाना होगा, जिसकी उम्मीद कम है।

    5. अथॉरिटी का एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट पार्ट मास्टर प्लान का हिस्सा होगा।
    अथॉरिटी का जवाब : एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट प्लान को मास्टर प्लान में शामिल करना अथॉरिटी के हाथ में है। आसानी से ऐसा किया जा सकता है।

    6. मेट्रो, एमआरटीएस और नया एक्सप्रेस वे बनाना होगा।
    अथॉरिटी का जवाब : मेट्रो के लिए पहले ही दो रूट प्रस्तावित हैं। पहला - नोएडा से भंगेल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे, परी चौक और बोड़ाकी तक है। दूसरा - 130 मीटर एक्सप्रेस वे के किनारे से नोएडा एक्सटेंशन होते हुए नोएडा तक है। ये दोनों पहले से ही मास्टर प्लान में हैं। 130 मीटर एक्सप्रेस वे का निर्माण चल रहा है। मेट्रो के पहले रूट के किनारे से एक और एक्सप्रेस वे की योजना बनाई जा रही है।

    Navbharat times


    Congratulations for the approval (??) but with my understanding it is consolation and medium of time pass on the issue. This is approved by technical committee and pending to be passed by the principal committee, isn’t it.

    To my understanding they have again given few recommendations to be incorporated after that again review / passing procedure

    It may happen again (like in past) that planned to pass on a particular date but due to unavoidable reasons one key official is not available so requires some more time

    I accept that we have taken one step ahead but is it just to show others that we have come forward or is it real, that is a question??
    CommentQuote
  • Originally Posted by dolphin14
    Congratulations for the approval (??) but with my understanding it is consolation and medium of time pass on the issue. This is approved by technical committee and pending to be passed by the principal committee, isn’t it.

    To my understanding they have again given few recommendations to be incorporated after that again review / passing procedure

    It may happen again (like in past) that planned to pass on a particular date but due to unavoidable reasons one key official is not available so requires some more time

    I accept that we have taken one step ahead but is it just to show others that we have come forward or is it real, that is a question??

    As I understand, That needs only signature of Board Members That's it.
    CEO has already said in 2 weeks time it will be done..........
    I have now become hopeful :)
    CommentQuote
  • Originally Posted by cookie
    As I understand, That needs only signature of Board Members That's it.
    CEO has already said in 2 weeks time it will be done..........
    I have now become hopeful :)

    Seems nothing is final in Noida till it is DELIVERED....REGISTERED...

    Still, the news is good...hope everything gets sorted out...hopes have increased after the decision...
    CommentQuote
  • j
    CommentQuote
  • I think ab sab set lag rha hai. Kuch dino me formal nod to MP 2021 n den supreme court order of middle path verdict.

    farmers also know that noida ext ki kudi hui jameen par ab cactus bhi nhi ugega.
    CommentQuote
  • नोएडा एक्सटेंशनः सुप्रीम कोर्ट में अगले म

    नोएडा एक्सटेंशनः सुप्रीम कोर्ट में अगले महीने हो सकती है सुनवाई


    प्रमुख संवाददाता
    नई दिल्ली।। नोएडा एक्सटेंशन इलाके के गांवों के किसानों की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में जुलाई में सुनवाई हो सकती है। इलाके के घोड़ी बछेड़ा सहित कई गांवों के किसानों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। इस मामले में यूपी सरकार व अन्य प्रतिवादियों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर रखा है।

    घोड़ी बछेड़ा, हल्दाना, दुगलपुर सहित कई गांवों के किसानों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने वाले वकील ललन सिंह ठाकुर ने बताया कि करीब तीन दर्जन गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण रद्द करके जमीन वापस दिलाने की मांग की है।

    किसानों की अर्जी में कहा गया है कि सरकार ने जमीन का अधिग्रहण इंडिस्ट्रयल डिवेलपमेंट के नाम पर अर्जेंसी क्लॉज के तहत किया, लेकिन उस जमीन को बिल्डर के हाथों बेच दिया। किसानों को अधिग्रहण के एवज में काफी कम मुआवजा दिया गया, जबकि सरकार ने ऊंची कीमत हासिल की।


    ठाकुर के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किसानों की मुआवजा राशि 66.75 पर्सेंट बढ़ाने का निर्देश दिया था, साथ ही किसानों को विकसित जमीन का 10 पर्सेंट हिस्सा भी देने को कहा था। हाई कोर्ट ने जो कहा, उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, क्योंकि किसानों ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग नहीं की थी, बल्कि उनकी मांग जमीन वापस दिलाने की थी।



    नोएडा एक्सटेंशनः सुप्रीम कोर्ट में अगले महीने हो सकती है सुनवाई - NOIDA Extension case in Supreme Court - Navbharat Times
    CommentQuote
  • Property prices to rise for new bookings as Panel clears Greater Noida plan - Economic Times

    GREATER NOIDA: With the planning committee of the NCR Planning Board giving a nod to the Greater Noida Master Plan 2021, all stakeholders in Noida Extension feel that a giant burden has been lifted off their shoulders. For the first time in over a year, the one lakh homebuyers, Greater Noida Authority, farmers and developers are thinking on the same lines - redressal of grievances at the earliest.

    However, along with the good news, there's also a bad one. Developers say that while old buyers will remain unaffected, new ones will have to shell out almost double the rates as property prices have shot up as compared to last year.

    Greater Noida Authority CEO, Rama Raman, said that his first priority will be addressing the grievances of all farmers whose lands have been acquired.

    The most elated are members of the Noida Extension Flat Owners and Members Association who have been fighting for their right ever since the land row started. "We will meet Authority officials next week to discuss farmers' grievances since we had joined hands with them to fight this battle," said Abhishek Kumar of the buyers' body.

    However, farmers are still an apprehensive lot. "The issue is a multi-layered one. Land in eight of the 11 villages in the area has been denotified by the court. Cases in more than 40 villages are currently pending in court. So how can the Master Plan be passed without first addressing these matters?" asked farmer leader Dushyant Nagar, a member of Kisan Sangharsh Samiti. Farmers of 11 villages will convene a mahapanchayat on July 1 to decide their next course of action.

    Apart from buyers, this move comes as a major relief to developers whose investments have been tied in the projects without any earnings. Supertech chairman and managing director, RK Arora, said, "We hope to resume construction by July end." Developers have also started sharing this news with homebuyers. "This win would not have been possible without the patience of homebuyers who supported us throughout the land row," said Mohit Arora, director, Supertech.

    While director of Gaursons, Manoj Gaur, said that this is a vital win in favour of buyers and the realty industry, Amrapali Group CMD, Anil Gupta hoped to hand over flats to buyers within a new timeframe. "This decision will improve the image of Greater Noida and Noida Extension. The land row had brought a negative impact in the region," said Orris infrastructures managing director, Amit Gupta.
    CommentQuote
  • Congrats to all future billionaire of noida extension on the approval of NCRPB Technical Committee. Cheers.....
    CommentQuote
  • I don’t think Supreme Court now gonna cancel NE Land Acquisition, as -

    ~ SC also knows how much money has already been invested in this region already

    ~ Land is of no use after cancellation and this will become 1 hell of a waste area of NCR

    ~ Half of the Farmer Janta has already joined hands

    ~ Farmers have no money to return to get the land back

    Etc Etc Etc which has been discussed many a times already


    So Fingers Crossed… Hope for the best … Construction resume is a good thing for all and development of this region

    Having said that, I would personally suggest, New Buyers should still wait for some time before investing their money cz its always good to do a safe and secure bet and have peace of mind even if its 100-200/sq ft costlier.
    CommentQuote