पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • भूखंडों की बढ़ी दर शहर के विकास में ला सकती है ठहराव

    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपनी संपत्तियों की दरों में भारी इजाफा कर ऐसे लोगों को तगड़ा झटका दिया है, जो शहर में अपना आशियाना स्थापित करने का सपना देख रहे थे। दर बढ़ने से लोगों के लिए ग्रेटर नोएडा में भूखंड खरीदना दूर की कौड़ी हो गया हैप्राधिकरण भी इस बात को लेकर आशंकित है कि दर बढ़ने से शहर के विकास में ठहराव आ सकता है, लेकिन किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए इसके अलावा और कोई चारा भी नहीं था।

    किसान आंदोलन की वजह से प्राधिकरण को इस वर्ष दो बार संपत्तियों की दर बढ़ानी पड़ी है। एक अप्रैल को भूखंडों की दरों में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। चार माह बाद ही 16 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि करनी पड़ी है। आर्थिक मंदी के चलते शहर में पहले से ही पूंजी निवेश रुका हुआ है। बिल्डरों के अलावा शहर में किसी ने निवेश नहीं किया। पिछले एक वर्ष में एक भी उद्योग के लिए जमीन आवंटित नहीं की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उद्यमी महंगी दरों पर भूखंड खरीद पाएंगे। नोएडा एक्सटेंशन विवाद के चलते प्राधिकरण को किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए करीब 6 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ेगी। प्राधिकरण पर इस समय लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। जमीन आवंटित होनी बंद हो गई है। प्राधिकरण को पैसा मिलना बंद हो गया है। प्राधिकरण दर बढ़ाने के फैसले को मजबूरी में लिया गया निर्णय बता रहा है, लेकिन यह शहर के विकास पर ब्रेक लगा सकता है।

    उद्योग लगने हो जाएंगे बंद
    एसोसिएशन ऑफ ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्री के अध्यक्ष सहदेव शर्मा का कहना है कि शहर में बिजली व परिवहन के साधनों की कमी से उद्यमी पहले से ही समस्याओं से जूझ रहे हैं। दर बढ़ने से नए उद्यमी भूखंड नहीं खरीद पाएंगे।

    औद्योगिक भूखंडों की दर नहीं बढ़ानी चाहिए थी
    उद्यमी दीपक यादव का कहना है कि जब तक शहर में उद्योग नहीं लगेंगे, तब तक यहां की आबादी नहीं बढ़ेगी। प्राधिकरण को उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए दर नहीं बढ़ानी चाहिए थी।

    विकास पर लग सकता है ग्रहण
    उद्यमी एडी पांडे का कहना है कि भूखंडों की दरों में अधिक वृद्धि की गई है। 16,900 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर लोग भले ही आवासीय भूखंड खरीद लें, लेकिन आठ हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर इंडस्ट्री का भूखंड खरीदना मुश्किल है।

    लोगों के लिए भूखंड खरीदना हो जाएगा मुश्किल
    प्रापर्टी के व्यवसाय से जुड़े गौरव बब्बर का कहना है कि घर बनाने के लिए लोग बढ़ी दरों पर आवासीय भूखंड तो खरीद सकते हैं, लेकिन उद्योग व व्यवसायिक भूखंडों को इतनी अधिक दरों पर कोई नहीं खरीद पाएगा।

    रुक जाएगा शहर का विकास
    प्रापर्टी के कारोबार से जुड़े सुनील गोयल का मानना है कि भूखंडों की दर बढ़ने से शहर के विकास पर असर पड़ेगा। नए आवंटी नहीं आएंगे तो शहर की आबादी कैसे बढ़ेगी।

    मजबूरी में लिया गया है फैसला : सीईओ
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन का कहना है कि दर बढ़ाने का फैसला मजबूरी में लिया गया है। किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देना है। प्राधिकरण न नफा न नुकसान की नीति पर चलता है। भूखंडों की दर न बढ़ाई जाती तो प्राधिकरण कहां से किसानों को मुआवजा देगा।

    -Dainik Jagran
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  • विरोध के बीच समझौते की प्रक्रिया शुरू


    ग्रेटर नोएडा: नोएडा एक्सटेंशन के हैबतपुर व इटेड़ा गांव में भी विरोध के बीच प्राधिकरण ने समझौते की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शनिवार को प्राधिकरण ने करीब 100 किसानों के साथ समझौता किया। देर रात तक इन किसानों को अतिरिक्त मुआवजे का चेक देने की प्रक्रिया जारी थी। वहीं ग्रामीण पंचायत मोर्चा ने हैबतपुर में पंचायत कर समझौते का विरोध किया। मोर्चा का कहना है कि किसानों को दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दिया जाए, तभी वे जमीन देंगे। पंचायत में कई किसानों ने जमीन न देने की घोषणा की है।

    पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ समझौता करने के बाद प्राधिकरण ने अब हैबतपुर व इटेड़ा के किसानों के साथ सुलह की कोशिश शुरू कर दी है। शनिवार को प्राधिकरण को इसमें सफलता भी मिल गई। सीईओ रमा रमन व डीसीईओ अखिलेश सिंह के साथ बैठक करने के बाद हैबतपुर के रमेश प्रधान, दीपक शर्मा, ज्ञानचंद शर्मा व धर्मपाल एवं इटेड़ा के रामी प्रधान, संतू, सतपाल, सोनपाल व मदनपाल आदि करीब सौ किसान समझौते को राजी हो गए। प्राधिकरण ने समझौते के दो विकल्प किसानों के सामने रखे। खस्ता आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए प्राधिकरण ने 550 रुपये प्रति वर्ग मीटर के अतिरिक्त मुआवजे की एवज में अर्जित भूमि की एवज में 8 के बजाय 11 प्रतिशत जमीन देने का प्रस्ताव रखा। अधिकांश किसानों ने मुआवजा राशि पर सहमति दी। जबकि कुछ किसानों ने मुआवजा राशि के बजाय 11 प्रतिशत जमीन लेने पर समझौता किया। एडीएम एलए हरनाम सिंह ने बताया कि किसानों को चेक देने की प्रक्रिया जारी है।

    ग्रामीण पंचायत मोर्चा ने हैबतपुर में पंचायत कर आरोप लगाया कि प्राधिकरण किसानों की एकता को तोड़ने का प्रयास कर रहा है। किसान 550 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर जमीन नहीं देना चाहते। किसानों को बाजार भाव पर मुआवजा दिया जाए। किसान सुप्रीम कोर्ट तक अपनी लड़ाई लड़ेंगे। वकील परमिंद्र भाटी, राजेंद्र नागर, कपिल चौधरी, अजब सिंह नागर, चरण सिंह भाटी, विनोद खारी, अक्षय कुमार व प्रमोद कुमार ने किसानों के मामलों की पैरवी नि:शुल्क करने की घोषणा की।

    -Dainik Jagran
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  • it is a good sign...........
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    विरोध के बीच समझौते की प्रक्रिया शुरू

    वकील परमिंद्र भाटी, राजेंद्र नागर, कपिल चौधरी, अजब सिंह नागर, चरण सिंह भाटी, विनोद खारी, अक्षय कुमार व प्रमोद कुमार ने किसानों के मामलों की पैरवी नि:शुल्क करने की घोषणा की।

    -Dainik Jagran


    So the lawyers will be paid by whom? A very desperate Congress party?
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  • Originally Posted by ThePunjabi
    So the lawyers will be paid by whom? A very desperate Congress party?


    All know this, Congress has lost their brain now. Farmers ko bharkakar finally congress ko bhi kuch nahe milega, Kisaaan bhi ab siyaane ho gaye hai. Maharastra mai congress kahi kisaaano par firing kar rahe hai aur kahi par Maharastra mai kisaan suicide kar rahe hai, par waha RG ko jaane tak ka time nahe hai.
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  • Kangresss Tricks are not over!!

    Bhai log...game abhi baki hai

    Jab tak aam aadmi ki ppori tarah le nahi li jayegi tab tak ye Kangress Party nahi rukegi

    The new Land aquisition bill is to be tabled for cabinet approval in comming week it has some ultra provisitions to send land acquisition and RE (Industrial/residential) prices through the roof esp in NCR


      One time Compensation = 2times or 6times circle rate depending whether it is urban/rural area
      30,000 Rs for 20/30 years as annuity income per acre per family
      Land for all landless labourers(farmers) of a village where land is acquired
      Reservations / Free quota in all institutions comming up on land
      20% of incremental gain to be shared back with farmer every time land title is transferred
      If the land acquired is irrigated (Almost all land in NCR is irrigated)

        1 Acre irrigated land in addition to compensation for every 1 acre acquired
        If the farmer is Dalit...6 acre alternate irrigated land in addition to compensation for every 1 acre acquired...so compensation + 600% land

        The drama has just begun - as soon as the land bill is tabled Farmers will new protests asking BMW and team to provide releif as per new package and please note they will ask it for all land acquired since time immemorial including those in british rule :bab (4):

        Rahul Baba needs to do his politics on Moon...Earth will die soon:bab (45): including those in british rule :bab (4):

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  • ग्रेटर नोएडा: प्राधिकरण के संपत्तियों की दर बढ़ने से साढ़े सात हजार लोगों की चिंता बढ़ गई है। आंदोलन के कारण किसानों को फायदा मिल गया। इसका खामियाजा आवंटियों को उठाना पड़ रहा है। किसी तरह एक-एक पाई इकट्ठा करके आवंटियों को किस्मत से भूखंड आवंटित हुआ था। भूखंड का किश्त देने में आवंटियों की सांस फूल रही है। ऊपर से अब उन्हें प्राधिकरण को और पैसा देना पड़ेगा।

    पतवाड़ी गांव के सेक्टर दो व तीन में प्राधिकरण ने करीब साढ़े सात हजार भूखंड व निर्मित मकानों की योजना निकाली थी। ड्रा के माध्यम से लोगों के मकान का सपना पूरा हुआ था। कुछ आवंटियों ने एक मुश्त योजना के तहत प्राधिकरण को भूखंड व मकान की कीमत अदा कर दिया था। एक मुश्त भुगतान न कर पाने वाले आवंटियों ने बैंक से लोन लेकर प्राधिकरण को भुगतान कर रहे हैं। 19 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। प्राधिकरण का आवासीय सेक्टर दो व तीन भी इसकी चपेट में आ गया था। अधिग्रहण रद होने पर सेक्टर दो व तीन के आवंटियों के मकान का सपना भी चकनाचूर हो गया था। प्राधिकरण से पतवाड़ी गांव के किसानों का समझौता होने के बाद आवंटियों को एक उम्मीद बंधी थी। शुक्रवार को प्राधिकरण ने भूखंडों की दर पर आवंटियों को एक और झटका दिया। प्राधिकरण साढ़े सात हजार आवंटियों से भी बढ़े हुए दर का पैसा वसूल करेगा। कितने पैसा आवंटियों को अतिरिक्त देना पड़ेगा, इसका फैसला अभी नहीं हो पाया है। भूखंड़ों दरों की बढ़ोत्तरी से आवंटियों की चिंता बढ़ गई हैं। आवंटी किसी तरह एक-एक पैसा इकट्ठा करके प्राधिकरण को किश्त का भुगतान कर रहे हैं। अतिरिक्त पैसा का कहां से भुगतान करेंगे? आवंटियों के सामने सबसे बड़ी चिंता आकर खड़ी हो गई हैं। जमीन अधिग्रहण रद होने पर बैंकों ने आवंटियों की किश्त रोक दी है। आवंटियों के समझ में नहीं आ रहा कि वे प्राधिकरण को अतिरिक्त पैसे कहां से देंगे?

    -Dainik Jagran
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  • आंदोलन में अटका छह प्रतिशत आवंटन


    किसान आंदोलन की मार ऐसे गांवों में भी पड़नी शुरू हो गई, जो मुआवजे की लड़ाई में शामिल नहीं है। प्राधिकरण ने नोएडा एक्सटेंशन के विवाद का सहारा लेकर न केवल गांवों में विकास एवं कार्य बंद करा दिए हैं, बल्कि छह प्रतिशत भूखंडों का आवंटन भी रोक दिया है। इससे उन किसानों में प्राधिकरण के खिलाफ रोष व्याप्त हो गया है, जिन्होंने जमीन का मुआवजा उठा लिया है और कोर्ट में कोई याचिका दायर नहीं की है।
    प्राधिकरण किसानों को अर्जित भूमि की एवज में छह प्रतिशत जमीन देता है। पतवाड़ी गांव के समझौते के बाद इसको बढ़ाकर अब आठ प्रतिशत कर दिया गया है। नोएडा एक्सटेंशन की लड़ाई के बाद बिसरख, पतवाड़ी, रोजा याकूबपुर, हैबतपुर, ऐमनाबाद आदि 27 गावों के किसान कोर्ट चले गए हैं। प्राधिकरण ने इसी का सहारा लेकर गांवों में छह प्रतिशत भूखंडों का आवंटन कर दिया है। इसका खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जो कोर्ट नहीं गई है। 27 गांवों में अधिकतम 100 से 300 किसानों ने याचिका दायर की है, जबकि गांव के कुल किसानों की संख्या में ढाई से तीन हजार है। कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद प्राधिकरण ने सभी किसानों का आवंटन रोक दिया है।

    ऐमनाबाद गांव के किसान विनोद, खैरपुर गुर्जर गांव के राकेश, सैनी के रामवीर व खानपुर के अजयपाल का कहना है कि उन्होंने कोर्ट में जमीन अधिग्रहण को चुनौती नहीं दी है, लेकिन प्राधिकरण ने उनके छह प्रतिशत के भूखंड रोक दिए है। प्राधिकरण को उन किसानों के साथ न्याय करना चाहिए, जो किसी विवाद में शामिल नहीं है। सीईओ रमा रमन का कहना है कि जिन किसानों ने कोर्ट में याचिका दायर नहीं की है, उन्हें शीघ्र भूखंडों का आवंटन कराया जाएगा।

    -Dainik jagran
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  • यमुना एक्सप्रेस-वे मामले में अथॉरिटी को राहत


    ग्रेटर नोएडा/ लखनऊ॥ यमुना एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत जमीन के खिलाफ किसानों की दायर याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। बताया जाता है कि किसानों ने मुआवजा लेने के बाद जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट के इस फैसले से जहां किसान मायूस हैं, वहीं यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के अफसर हाई कोर्ट के फैसले से खुश हैं।

    अफसर हाई कोर्ट के फैसले से बड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के ऐडवोकेट ने बताया कि नेत्रपाल सिंह व अन्य किसानों की जमीन यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी ने एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए अधिग्रहीत की थी। किसानों ने अधिग्रहीत जमीन के बदले मुआवजा भी उठा लिया। इसके बाद नेत्रपाल व अन्य किसान जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट चले गए।

    किसानों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अधिग्रहण को गलत बताया। किसानों ने कोर्ट से अधिसूचना को रद्द करने की मांग की। किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई जज अमिताव लाला, जज सुनील हाली की खंडपीठ ने की। किसानों ने प्रश्नगत याचिकाओं को बड़ी बेंच के सामने रेफर करने की मांग की भी की। दोनों जजों की खंडपीठ ने किसानों की याचिकाओं को खारिज कर दिया। ऐडवोकेट सुरेश सिंह का कहना है कि किसानों ने अपनी अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा भी प्राप्त कर लिया था।

    वहीं यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी एरिया के अटटा गुजरान, जगनपुर और गुनपुरा गांवों के किसान इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए रवाना हो गए है। यमुना एक्सप्रेस-वे किसान संघर्ष समिति के संयोजक सगुन नागर ने बताया कि किसान रविवार को अपने वकील के पास पेपर वर्क पूरा करेंगे। सोमवार को हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। इन गांवों के किसानों के हाई कोर्ट में याचिका दायर करने से फॉर्म्युला वन रेस ट्रैक प्रभावित होने की संभावना है।

    सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं किसान: यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी द्वारा किसानों की अधिग्रहित जमीन पर हाई कोर्ट इलाहाबाद की दो सदस्यीय बेंच के निर्णय का अध्ययन लखनऊ के प्रमुख कानूनविद कर रहे हैं। गौतमबुद्धनगर जिले के किसानों के एक वकील पंकज दुबे ने बताया कि संभव है कि यह प्रकरण नई याचिका के रूप में सुप्रीम कोर्ट में जाएगा। इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो जज अमिताव लाला और सुनील हाली की बेंच के समक्ष यूपी सरकार की दलील थी कि यह प्रकरण नोएडा-ग्रेटर नोएडा के प्रकरणों से एकदम भिन्न है और यमुना एक्सप्रेस वे भूमि अधिग्रहण का मामला अलग है।

    -Navbharat times
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  • यमुना अथॉरिटी भी किसानों को मनाने में जुटी


    ग्रेटर नोएडा : जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले किसानों से यमुना अथॉरिटी ने भी समझौता करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। अथॉरिटी अफसर शनिवार को जगनपुर, बरसात, इमलिया और मुरशदपुर के किसानों से वार्ता करने गांव पहंुचे। किसानों ने अफसरों के सामने पतवाड़ी के किसानों की तर्ज पर मुआवजा, 8 प्रतिशत आवासीय प्लॉट और पुरानी आबादी को ज्यों की त्यों छोड़ने की शर्त रखी। अफसरांे ने उनकी मांगों को शासन से सामने रखे जाने का आश्वासन दिया। जगनपुर गांव के प्रधान गजब सिंह ने कहा कि तीनांे अथॉरिटी में अंतर नहीं है। तीनों अथॉरिटी जमीन को बिल्डर्स, आईटी, इंस्टिट्यूशनल के लिए अलॉट कर रही हंै। फिर किसानांे के मुआवजे और आबादी में अंतर क्यों किया जा रहा है। दनकौर ब्लॉक के पूर्व प्रमुख चौधरी जग्गू सिंह ने कहा कि यमुना अथॉरिटी पतवाड़ी के किसानांे की तर्ज पर मुआवजा, आवासीय प्लॉट और आबादी का लाभ दे तो किसान हाई कोर्ट में फैसला करने के लिए तैयार हंै। इससे कम कीमत पर फैसला उन्हें मंजूर नहीं है।


    -Navbharat times
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  • हाई कोर्ट के फैसले से पहले समझौता नहीं


    नोएडा एक्सटेंशन एरिया के हैबतपुर गांव में शनिवार को किसानांे ने महापंचायत की जिसमंे 17 गांवांे के किसान शामिल हुए। किसानांे ने पंचायत में फैसला किया कि हाई कोर्ट का निर्णय आने से पहले किसी भी गांव का किसान अथॉरिटी से समझौता नहीं करेगा। किसानांे के मुकदमे लड़ने के लिए 11 सदस्यीय एडवोकेट की कमिटी बनाई गई है। इनमें से 6 एडवोकेट हाई कोर्ट में किसानों की पैरवी करेंगे जबकि 5 किसानांे को जागरूक करंेगे। महापंचायत में कहा गया कि किसान हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। जब सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलेगी तो अन्ना हजारे की तरह आंदोलन किया जाएगा।

    ग्र्रामीण पंचायत मोर्चा के संयोजक प्रधान रणवीर नागर ने कहा कि किसान पतवाड़ी के किसानों की तरह मुआवजा लेने के लिए जल्दी न करें। अथॉरिटी को हाई कोर्ट में मुकदमा हारने का डर सता रहा है, इसी वजह से वह समझौते के लिए उत्सुक हो रही है। किसान नेता इंद्र नागर ने कहा कि अथॉरिटी किसानांे पर दबाव बनाकर समझौते करा रही है। अगर अथॉरिटी को समझौता करना ही है तो वह किसानांे के बीच खुली बैठक करे। किसान नेता दुष्यंत नागर ने कहा कि अथॉरिटी ने जिस रेट पर बिल्डरों को जमीन बेची है, उसी रेट पर मुआवजा किसानांे को दे तो फैसला हो सकता है। किसानांे की लड़ाई लड़ने के लिए वकील भी उनके पक्ष में आ गए हैं। उन्हांेने कहा कि गरीब किसान घबराएं नहीं, उनकी लड़ाई लड़ने के लिए कई वकील तैयार हंै। 6 वकील हाई कोर्ट में किसानांे के मुकदमे लड़ेंगे जबकि 5 किसानों को समझाने का काम करेंगे। पंचायत को अशोक बैसला, तेजराम यादव, शाहमल यादव, जय यादव, राजे कसाना, जगदीश आदि ने भी संबोधित किया। पंचायत में हैबतपुर, इटेडा, बैदपुरा, सादुल्लापुर, पतवाड़ी, छोटी मिल्क, रिछपाल गढ़ी, चिपियाना, सैनी, खैरपुर, बिसरख, रोजा जलालपुर ,रोजा याकूबपुर आदि गांवों के किसान शामिल थे।

    -Navbharat times
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  • इटेहरा और हैबतपुर के किसानों से समझौता


    ग्रेटर नोएडा : पतवाड़ी के बाद अब ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने हैबतपुर और इटेहरा के किसानों से समझौता शुरू कर दिया है। शनिवार को अथॉरिटी अफसरों के साथ मीटिंग के बाद दोनांे गांवों के करीब 60 किसानों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। अथॉरिटी ने नगद रुपये देने के बदले प्लॉट देने का प्रावधान किया है। किसान बिल्डरांे को अपना प्लॉट बेच भी सकते हैं। इटेहरा गांव के रामे प्रधान और हैबतपुर गांव के रमेश प्रधान के नेतृत्व में सैकड़ांे किसान शनिवार को अथॉरिटी ऑफिस पहुंचे। अथॉरिटी अफसरांे से घंटांे बातचीत के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। अफसरों ने बताया कि दोनों गांव के करीब 60 किसानों ने शनिवार को समझौते के पेपर पर हस्ताक्षर किए। दोनों गांवों के किसानों को नगद रुपये देने के बजाय नोएडा एक्सटेंशन में ही प्लॉट दिया जा रहा है।

    -Navbharat times
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  • HC push for quick disposal of cases

    Allahabad The Allahabad High Court has asked the petitioners, who have challenged acquisition of land by Yamuna Expressway Development Authority (YEDA) in many villages of Noida, Greater Noida and Agra and the state, to exchange their affidavits at the earliest for expeditious disposal of the matter.

    The court has kept open the question of referring the cases to the larger bench, which is hearing cases related to land acquisition in Noida and Greater Noida. The court will hear the case next on September 5.

    The petitioners have demanded the land acquisition carried out by using the urgency clause should be quashed. They also contended that these cases are similar to the ones pertaining to acquisitions by Noida and Greater Noida Authorities, which are currently being heard by a larger bench.

    Hearing a bunch of petitions related to the same issue on Thursday, a division bench of Justices Amitava Lala and Sunil Hali said: “Keeping the question of referring the matter to the larger bench open, we direct the parties to exchange the affidavits within shortest possible time so that the matter can be heard and thereafter the court either dispose it of or place the matter before the larger bench in a similar manner.”

    The court also said that with a large number of petitioners having already accepted compensation, there was no point in passing an interim order for protection of tenure holders’ interests.

    However, when the petitioners pointed out that not all petitioners have taken compensation, the court said that in such case they may again approach the court if the state takes any further action with respect to the land acquisition.

    During the hearing of the case, the state government argued that the petitions in the case of YEDA were not of the same nature as that of Noida and Greater Noida cases. It contended that people were approaching the court even though they had accepted the compensation without raising any questions.

    The petitioners, however, contended that accepting compensation did not mean that they had foregone their right to demand quashing of the land acquisition. They further said that despite the land acquisition proceedings having been completed on paper, they were still in the possession of the same and were even cultivating it.

    Some of the villages from where petitioners have approached the court against YEDA’s land acquisition are Bhatta-Parsaul, Chandanpur, Rampur Bangar and Reenaka in Greater Noida and Etmadpur in Agra.

    The three-judge bench had on August 29 decided that the cases pertaining to YEDA will be heard separately.
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  • Yamuna Expressway Case details


    Case :- WRIT - C No. - 50082 of 2011

    Petitioner :- Bijendra Singh And Others
    Respondent :- State Of U.P. And Others
    Petitioner Counsel :- Raj Kumar Shukla,Anil Kumar Shukla,Smt. Sarita Shukla
    Respondent Counsel :- C.S.C.,Suresh Singh

    Hon'ble Amitava Lala,J.
    Hon'ble Sunil Hali,J.

    According to the petitioners their cultivable land has been acquired for the purpose of Yamuna Express Way Projects in District Gautam Budh Nagar but they are still in cultivatory possession. The matter is similar with the matter in which this Bench has passed an order on 26th July 2011.
    Learned Additional Chief Standing Counsel has vehemently opposed the contention by saying, that the above mentioned matter pertains to Noida and Gretaer Nodia Authority and the present is related to Yamuma Express way. He further submits that ratio of the Division Bench judgment forbids multiplicity of the proceedings and several writ petitions are being filed in the name of land acquisition regularly including the cases in which the compensation has been accepted by the farmers in accordance with the provisions of the Uttar Pradesh Land Acquisition (Determination of Compensation and Declaration of Award by Agreement) Rules, 1997, which is commonly known as 'Karak Niymawali, 1997'. But learned counsel appearing for the petitioners opposed the contention of learned Additional Chief Standing Counsel taking some other pleas.�

    Learned counsel for the petitioners contended that mere acceptance of compensation cannot abolish the right of the petitioner to challenge the acquisition proceedings. Therefore, this case is more or less identical with the cases of Noida and Greater Noida Authority, which are referred to larger Bench. However, keeping the question of referring the matter to the larger Bench open, we direct the parties to exchange the affidavits within shortest possible time so that the matter can be heard and thereafter the Court either dispose it of or place the matter before the Larger Bench in a similar manner.

    As prayed by the learned counsel appearing for the respondents, let counter affidavit be filed within a week. Rejoinder affidavit, if any, may be filed within 4 days thereafter. The matter will appear on 5.9.2011.
    So far as the question of interim protection is concerned, we are of the view that since the petitioners have already received compensation on agreement, there is no scope of passing any interim order, to which learned counsel appearing for the petitioner has contended that it cannot be said that all the petitioners before this Court have received compensation.

    However, in case any step is being taken by the authority concerned under Section 9 of the Land Acquisition Act, 1894, the petitioners will be able to make an application before this Court to protect their interest.
    Order Date :- 1.9.2011
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  • Farmers reject Patwari pact, seek more compensation


    GREATER NOIDA: Farmers in Noida Extension-Greater Noida are in no mood to relent. Just a day after the Uttar Pradesh government formally approved the pact between Greater Noida Authority and around 1500 villagers of Patwari, 250 villagers from Noida Extension gathered at Haibatpur village on Saturday and unanimously rejected the Patwari deal.

    Villagers from Iteda, Haibatpur and even from Patwari gathered at Haibatpur and decided that they would not give in to the Authority. They said they wouldn't accept the pact unless the Authority offers them an enhanced compensation-at par with the current market prices.

    "We are not willing to accept the nominal hike in compensation by Rs 550 per sqm that the Authority has offered to the villagers of Patwari
    . Unless the Authority pays us at par with the market price we will not budge. Till now the Authority has rejected this demand and hence we have decided to wait for a final order form the court," said Dushyant Nagar of the Kisan Sansh Samiti.

    "We are encouraging villagers to file a writ petition in the HC in order to make our case stronger," Nagar added. The villagers have sought fresh legal aid from local advocates and are encouraging each villager to enter a plea in the Allahabad HC to seek their land back.

    "The villagers have also constituted a special panel of advocates from Gautam Budh Nagar district and Ghaziabad, who will help the villagers submit their respective writs, and also help them present their case in a much better way," said Ramveer Pradhan, village head of Iteda.

    The villagers will dispatch a letter stating the above to Greater Noida Authority CEO Rama Raman on Monday.

    -HT
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